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Jun 25, 2020

अजी रहने दो चन्दा बदली में-चौकीदार १९७४

हर जादुई असर का समय होता है. इस सृष्टि में हर चीज़
की मियाद तय है चाहे वो किसी का राजपाट हो या प्रसिद्धि.
समय ने किसी को नहीं बख्शा है इस जगत में.

आज संगीतकार मदन मोहन का जन्मदिन है. इस अवसर
पर आप सोच रहे होंगे कि मैं को लता मंगेशकर का गाना
याद करूँगा. बिलकुल नहीं जी.

मदन मोहन और लता मंगेशकर को तो सबसे ज्यादा याद
किया गया है पिछले ४०-५० सालों में. हर गाने पर आपको
कहानी उपन्यास मिल जायेंगे अतः उन सब बातों को रिपीट
करने से कोई मतलब नहीं.

आपको सुनवाऊंगा आशा भोंसले का गाया एक गाना जिसे
परदे पर खूबसूरत अभिनेत्री मधुमति पर फिल्माया गया है.
एक समय था जब जनता केवल कलाकारों के नाम से गाने
पहचानती थी. फिल्म ना चलने की सूरत में गाने भी भुला
दिए जाते थे.

आम तौर पर आशा भोंसले के गाये वे गाने जो हेलन पर
फिल्माए गए हैं जनता को जल्दी याद आते हैं. इस बात
की वजह हेलन का इस फिल्म उद्योग में हासिल किया गया
मुकाम है. उसके अलावा उनकी स्क्रीन प्रेजेंस आला दर्जे
की थी जो सबसे बड़ा कारण है दर्शकों के दिमाग पर अमिट
छाप छूटने का.

गाने पर वापस लौटते हैं. इसे लिखा है राजेन्द्र कृष्ण ने.
राजेंद्र कृष्ण के साथ मदन मोहन ने कई अविस्मरणीय गीत
बनाये हैं.



गीत के बोल:

अजी रहने दो
कल मिलते हैं
.............................................................
Aji rehne do chanda badli mein-Chowkidaar 1974

Artists: Madhumati,

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Jun 23, 2020

भोर आई गया अँधियारा-बावर्ची १९७२

हिंदी सिनेमा ने बेहद प्रतिभाशाली कलाकार भी देखे हैं. हम
ऐसे कलाकारों से प्रेरणा ले सकते हैं. ऐसे अधिकाँश कलाकार
अपने सभी कामों को पूरी लगन और समर्पण से करते दिखे.
नायक नायिका कुछ भी उछल-कूद करते रहें ये अपनी छाप
छोड़ते चले.

आज बहुमुखी प्रतिभा के स्वामी हरिन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय की
पुण्यतिथि है. साहित्य, शिक्षा और सिनेमा में इनके अमूल्य
योगदान को हमेशा याद रखा जायेगा. पहली लोकसभा में ये
विजयवाड़ा संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे. साहित्य और शिक्षा में
योगदान के लिए इन्हें भारत सरकार द्वारा १९७३ में पद्मभूषण
सम्मान दिया गया.

१९६२ की फिल्म साहब बीबी और गुलाम इनकी पहली हिंदी
फिल्म थी. इसके बाद वे तेरे घर के सामने फिल्म में दिखाई
दिए जिसमें उन्होंने नायिका के पिता की भूमिका निभाई. ८८
की नसीरुद्दीन शाह अभिनीत फिल्म मालामाल उनकी आखिरी
हिंदी फिल्म रही.

फिल्म जूली के लिए उनका लिखा गीत-माय हार्ट इस बीटिंग
अपने समय में बेहद लोकप्रिय हुआ था. हरिन्द्रनाथ संगीत के
भी जानकार थे और कम्पोज़िंग में भी सक्षम थे.

आज सुनते हैं फिल्म बावर्ची का एक गीत जिसमें फिल्म की
लगभग पूरी स्टारकास्ट मौजूद है. कैफी आज़मी का गीत है
और मदन मोहन का संगीत.

बॉलीवुड में आज जिन लोगों का जन्मदिन है वे हैं-राज बब्बर,
गुज़रे ज़माने के अभिनेता रहमान, और प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक
जब्बार पटेल. इसके अलावा क्रिकेट के क्षेत्र में वेट इंडीज़ के
प्रसिद्ध खिलाडी रामनरेश सरवन.



गीत के बोल:

भोर आई गया अँधियारा
भोर आई गया अँधियारा
सारे जग में हुआ उजियारा
नाचे झूमे ये मन मतवाला मतवाला
भोर आई गया अँधियारा
गया अँधियारा गया अँधियारा

भोर आई गया अँधियारा
भोर आई गया अँधियारा
सारे जग में हुआ उजियारा
नाचे झूमे ये मन मतवाला मतवाला
भोर आई गया अँधियारा
गया अँधियारा गया अँधियारा
…………………………………………….
Bhor aayi gaya andhiyara-Bawarchi 1972

Artists: Rajesh Khanna, Master Raju, Jaya Bhaduri, Asrani, Various

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Mar 23, 2020

तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा-आखिरी दांव १९५८

एक संगीतकार दूसरे संगीतकार का मुरीद क्यूँ हो सकता
है. अजी जनाब बिलकुल हो सकता है. सज्जाद हुसैन की
एक धुन- ये हवा ये रात ये चांदनी मदन मोहन को इतनी
भाई कि उन्होंने इस पर एक गीत बना डाला. इसको कहते
हैं असली ट्रिब्यूट.

सज्जाद हुसैन ने गाना गवाया तलत महमूद से तो इधर
आखिरी दांव फिल्म के लिए मदन मोहन ने रफ़ी से गाना
गवाया.

प्रस्तुत गीत मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखा है और इसे परदे
पर गा रहे हैं शेखर और नूतन से मुखातिब हैं. शम्मी बाजू
में बैठी है. शम्मी के ऊपर फिल्म संगदिल का गीत फिल्माया
गया था. संयोग है दोनों गीतों से शम्मी का कनेक्शन है.

नूतन के चहरे के भाव कुछ ऐसे हैं जैसे कुछ अप्रत्याशित
सा नायक के मुख से निकल के बाहर आ रहा हो. गाने वाले
और सुनने वाले के चेहरों के भाव गीत के अंत में देखिये
आनंद आयेगा.




गीत के बोल:

तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा
तेरे सामने मेरा हाल है
तेरी इक निगाह की बात है
मेरी ज़िंदगी का सवाल है
तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा

मेरी हर ख़ुशी तेरे दम से है
मेरी ज़िंदगी तेरे ग़म से है
मेरी हर ख़ुशी तेरे दम से है
मेरी ज़िंदगी तेरे ग़म से है
तेरे दर्द से रहे बेख़बर
मेरे दिल की कब ये मजाल है
तेरी इक निगाह की बात है
मेरी ज़िंदगी का सवाल है
तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा

तेरे हुस्न पर है मेरी नज़र
मुझे सुबह शाम की क्या ख़बर
तेरे हुस्न पर है मेरी नज़र
मुझे सुबह शाम की क्या ख़बर
मेरी शाम है तेरी जुस्तजू
मेरी सुबह तेरा ख़याल है
तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा

मेरे दिल जिगर में समा भी जा
मेरे दिल जिगर में समा भी जा
रहे क्यों नज़र का भी फ़ासला
मेरे दिल जिगर में समा भी जा
रहे क्यों नज़र का भी फ़ासला
के तेरे बग़ैर तो जाने जान
मुझे ज़िंदगी भी मुहाल है

तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा
तेरे सामने मेरा हाल है
तेरी इक निगाह की बात है
मेरी ज़िंदगी का सवाल है
तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा
……………………………………………………
Tujhe kya sunaoon main dilruba-Aakhiri daon 1958

Artist: Nutan, Shekhar

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Jan 28, 2020

हम प्यार करेंगे-धुन १९५३

बनाने के लिए कुछ बनाना है. वो फलों वाला बनाना
नहीं, वो तो बना बनाया आता है. उसका रंग और स्तिथि
बदलती रहती है बस. हम तो बॉलीवुड में बनने वाली
तरह तरह की चीज़ों के बारे में ज्यादा बात करते हैं.

फ़िल्मी गीत अक्सर स्तिथि अनुसार बनते हैं-फिल्म में
कहानी की मांग अनुसार. वैसे कहानी की मांग अगर
स्नानघर में गाने की होगी तो कभी कभी उसे रसोई में
फिल्मा दिया जाता है. गीत में अगर साबुन शैम्पू का जिक्र
हो तो उसे बदल कर मिर्ची धनिया करने में कितनी
देर लगती है? किसी किसी कहानी में गीत की ज़रूरत
नहीं होती तो भी उसमें गीत ठूंसे जाते हैं.

दरअसल हम जनता की आदत हो चुकी है बिना गाने
फ़िल्में नहीं भातीं. इसी वजह से हम डाक्यूमेंट्री जैसी
फ़िल्में नहीं देखते. एक समय जबरन सिनेमा घर वाले
दिखला दिया करते थे फिल्मों के शुरू में और इंटरवल
में वरना पब्लिक तो वो चीज़ देखना ज्यादा पसंद करती
है जिसमें दिमाग कम खपाना पड़े.

एक दूसरे किस्म का वर्ग भी है जो क्या देखना है
क्यों देखना है कब तक देखना है इन बातों पर दिमाग
नहीं खपाते. कृषि दर्शन के ज़माने से हमें ऐसे प्राणी
मिलना शुरू हो गए जो एकटक टेलेविज़न स्क्रीन की
तरफ ऐसे देखते थे मानो उसमें से असली फसल
निकल के आने वाली हो. उडती मक्खी उनकी नाक
में से घुस के मुंह से निकल जाया करती और मजाल
कि थोबडा ज़रा भी हिल जाए.

आज का गीत सुनते हैं जिसमें धुन के पक्के लोग
कुछ कर रहे हैं या करने का उपक्रम तो हो ही रहा है.
भरत व्यास ने फिल्म का शीर्षक गीत में ला दिया है.
ऐसे गीत भरत व्यास की कलम से कम ही निकले होंगे.
इस गीत को हेमंत कुमार और लता मंगेशकर ने गाया
है मदन मोहन की धुन पर.



गीत के बोल:

हम प्यार करेंगे हम प्यार करेंगे
हम लड़ के झगड़ के भी प्यार करेंगे
एक बार करेंगे दो बार करेंगे
सौ बार सौ बार सौ बार करेंगे
हम प्यार करेंगे हम प्यार करेंगे

गर सारे सारे दिन हम आ न सके
गर सारे सारे दिन हम आ न सके
वादा कर के भी अपना निभा न सके
वादा कर के भी अपना निभा न सके
सारी सारी रात तेरा इंतज़ार करेंगे
सारी सारी रात तेरा इंतज़ार करेंगे
एक बार करेंगे दो बार करेंगे
सौ बार सौ बार सौ बार करेंगे

हम प्यार करेंगे हम प्यार करेंगे

हम लाज के मारे मर जायेंगे
हम लाज के मारे मर जायेंगे
पर सामने न तेरे कभी आयेंगे
पर सामने न तेरे कभी आयेंगे
छुप छुप के तेरा दीदार करेंगे
छुप छुप के तेरा दीदार करेंगे
एक बार करेंगे दो बार करेंगे
सौ बार सौ बार सौ बार करेंगे

हम प्यार करेंगे हम प्यार करेंगे

हमें लगे हैं बड़ा इस दुनिया के डर
कहीं प्यार को हमारे लग जाये न नज़र
हमें लगे हैं बड़ा इस दुनिया के डर
कहीं प्यार को हमारे लग जाये न नज़र
हम चोरी-चोरी यूँ ही तक़रार करेंगे
हम चोरी-चोरी यूँ ही तक़रार करेंगे
एक बार करेंगे दो बार करेंगे
सौ बार सौ बार सौ बार करेंगे

हम प्यार करेंगे हम प्यार करेंगे
हम लड़ के झगड़ के भी प्याज करेंगे
एक बार करेंगे दो बार करेंगे
सौ बार सौ बार सौ बार करेंगे
हम प्यार करेंगे हम प्यार करेंगे
……………………………………………………..
Ham pyar karenge-Dhun 1953

Artists:

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Jan 5, 2020

हमसफ़र साथ अपना छोड़ चले-आखिरी दांव १९५८

जो गीत हमसफ़र शब्द से शुरू होते हैं या जिनके
मुखड़े में ये शब्द आता है वे कुछ अलग से सुनाई
नहीं देते आपको. इधर तो गीत ही इस शब्द से शुरू
हो रहा है. नशीला सा गीत है. हालांकि इस गाने की
शुरूआत तड़प वाली आवाज़ से होती है.

मनमोहक धुन है और आपको भाव प्रकट करने वालों
से हमदर्दी हो जाती है. इस गीत का प्रभाव बड़े परदे
पर सोचिये, कैसा होता होगा. मल्टीप्लेक्स के ज़माने में
हमें पुरानी फ़िल्में बड़े परदे पर देखने का मौका ही नहीं
मिलता.

मजरूह सुल्तानपुरी के गीत को रफ़ी और आशा गा रहे
हैं मदन मोहन की धुन पर.




गीत के बोल:

हमसफ़र साथ अपना छोड़ चले
हमसफ़र साथ अपना छोड़ चले
रिश्ते-नाते वो सारे तोड़ चले
हमसफ़र साथ

हमसफ़र साथ अपना छोड़ चले
हमसफ़र साथ

रास्ता साफ़ था तो चलते रहे
साथ हँसते रहे मचलते रहे
मोड़ आया तो मुँह को मोड़ चले
हमसफ़र साथ

सपने टूटे पड़े हैं राहों में
सपने टूटे पड़े हैं राहों में
दर्द की धूल है निगाहों में
दिल पे क़दमों के नक़्श छोड़ चले
हमसफ़र साथ अपना छोड़ चले
हमसफ़र साथ

जब उन्हें हमसे प्यार ही न रहा
रोयें क्या इंतज़ार भी न रहा
हम भी दामन को अब निचोड़ चले

हमसफ़र साथ अपना छोड़ चले
रिश्ते-नाते वो सारे तोड़ चले
हमसफ़र साथ
.......................................................
Hamsafar sath apna chhod chale-Aakhiri Daon 1958

Artists: Nutan, Shekhar

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Nov 27, 2019

सजना लगन तेरी सोने-दुनिया न माने १९५९

कभी किसी की लगन किसी को सोने नहीं देती तो कभी कोई
फिल्म की कहानी दर्शक को सोने नहीं देती. खटमल बैठने नहीं
देते और मच्छर उठने नहीं देते. क्या ज़ालिम ज़माना आ गया
है. पहले पहले लगता था कि मल्टीप्लेक्स में खटमल नहीं होते
मगर अब वहाँ भी मौजूद हैं.

जो दर्शक इमानदारी से केवल सोने के लिए टिकट खरीद कर
सिनेमा हॉल में घुसता है उसके साथ अन्याय है ये सब.

खैर छोड़े ये सब, आज के गीत पर चर्चा कर लेते हैं थोड़ी सी.
हमने आपको इस फिल्म से चलने वाले दो गीत सुनवाए थे.
अब उन गीतों में चलना शब्द था इसलिए चले. बाकियों का
पता नहीं.

प्रस्तुत गीत लिखा है राजेंद्र कृष्ण ने और मदन मोहन इसकी
धुनें के जिम्मेवार हैं. इसे लता मंगेशकर ने गाया है. थ्योरी के
अनुसार, मदन मोहन के संगीत वाले लता मंगेशकर के गीत
सभी मधुर हैं और बढ़िया हैं. थ्योरी को हम भी ७० प्रतिशत
तक मानते हैं जी.





गीत के बोल:

सजना सजना सजना
सजना लगन तेरी सोने न दे
सजना लगन तेरी सोने न दे
रोना भी चाहूं तो रोने न दे
सजना लगन तेरी सोने न दे

समझे तो समझे ये दिल हार के
समझे तो समझे ये दिल हार के
दर्द अनोखे बड़े होते हैं प्यार के
हाय बैरी प्यार के
सजना लगन तेरी सोने न दे
सजना लगन तेरी सोने न दे

अपने पराये मेरी समझें न बतियां
अपने पराये मेरी समझें न बतियां
किस संग बोल के बिताऊं काली रतियां
काली काली रतियां
सजना लगन तेरी सोने न दे

सजना लगन तेरी सोने न दे
सजना लगन तेरी सोने न दे

कितनी कठिन हैं प्यार की रस्में
कितनी कठिन हैं प्यार की रस्में
अपनी ही निंदिया वो भी न बस में
हाय मेरे बस में
सजना लगन तेरी सोने न दे
सजना लगन तेरी सोने न दे
रोना भी चाहूं तो रोने न दे
सजना लगन तेरी सोने न दे
...............................................................
Sajna teri lagan sone na de-Duniya na mane 1959

Artist: Mala Sinha

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Nov 17, 2019

उन आँखों में नींद कहाँ-मिनिस्टर १९५९

सरलता और जटिलता किसी भी कार्य को करने के
दो तरीके हैं. वैसे आजकल मक्कारी का तरीका ज्यादा
पॉपुलर है. किसी बात को गहराई तक समझाने के
लिए गहरा गड्ढा खोदने की ज़रूरत तो नहीं होती.

संगीत जगत में राग रागिनियों वाले घुमावदार और
लच्छेदार गीत बहुतेरे हैं. आम आदमी को लच्छे
कुल्फी फ़ालूदा में ज्यादा भाते हैं बनिस्बत संगीत के.
पान में डालने वाली लच्छेदार सुपारी भी आम आदमी
खा लेता है आराम से.

जो जीवन के लच्छों में पहले से ही उलझा हुआ हो उसे
और क्या उलझाना. सिनेमा एक माध्यम है मनोरंजन
का, सन्देश देने का तो व्यक्ति विशेष या समूह की
भड़ास निकालने का माध्यम भी है. आर्ट से फार्ट तक
सब मिल जायेगा आपको.

छोड़ें ये सब और बात करें आज के गीत की. सन १९५९
की फिल्म मिनिस्टर से लता मंगेशकर का गाया एक
गीत सुनते हैं जो सरल और सहज है. सुनने में सहज
लगता अवश्य है मगर इसे परफेक्टली गुनगुनाने के
लिए आपको थोडा बहुत संगीत का ज्ञान आवश्यक है.

राजेंद्र कृष्ण की रचना है और मदन मोहन का संगीत.
इसे रूप्माला नामक अभिनेत्री पर फिल्माया गया है.



गीत के बोल:

ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ

उन आँखों में नींद कहाँ
जिन आँखों से प्रीतम दूर बसे
उन आँखों में नींद कहाँ
जिन आँखों से प्रीतम दूर बसे

चैन कहाँ से पाये वो दिल
जिसका बसिया पास न हो
चैन कहाँ से पाये वो दिल
जिसका बसिया पास न हो
हार सिंगार भी ज़हर लगे उसे
जिसका रसिया पास न हो
बहते आंसू उनके जुबां
जिन आँखों से प्रीतम दूर बसे

उन आँखों में नींद कहाँ
जिन आँखों से प्रीतम दूर बसे

लाख बहारें झूम के आयें
डाली डाली फूल खिलें
लाख बहारें झूम के आयें
डाली डाली फूल खिलें
मेरे मन की कलि खिले जब
मुझसे प्रीतम आन मिले
वो क्या देखें मस्त समा
जिन आँखों से प्रीतम दूर बसे

उन आँखों में नींद कहाँ
जिन आँखों से प्रीतम दूर बसे
....................................................................
Un aankhon mein neend kahan-Minister 1959

Artist: Roopmala

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Nov 15, 2019

दिल उनको उठा के दे दिया-बाप बेटे १९५९

आज सुनते हैं लता मंगेशकर का गाया एक गीत फिल्म
बाप बेटे से. राजेंद्र कृष्ण की लिखी रचना को संगीत में
जकडा है मदन मोहन ने.

सालों से ये गाना सुनते आ रहे हैं फिल्म बाप बेटे का
मगर एक बात अभी भी खटकती है-उठा के दे दिया.
दिल ना हुआ कुर्सी हो गयी जो कोने में पड़ी थी उठा
के दे दी.

शकीला ने तो हॉरर और सस्पेंस फिल्मों में काम किया है
मेरे ख्याल से श्यामा को भी कुछ फ़िल्में करना चाहिए
थीं. इस गीत में उनके चेहरे पर जिस प्रकार के भाव
आये हैं और जिस गति से वो बदलते हैं, डरावनी फिल्मों
के लिए उपयुक्त हैं. मैं एक किलो मुस्कुराहट के अलावा
वाले भावों की बात कर रहा हूँ. 




गीत के बोल:

दिल उनको उठा के दे दिया
कुछ घबरा के कुछ शरमा के
अब सोचती हूँ ये क्या किया
कुछ घबरा के कुछ शरमा के
दिल उनको उठा के दे दिया

ये किससे हुआ सामना
दिल पुकारा मुझे थामना
ये किससे हुआ सामना
दिल पुकारा मुझे थामना
मिल चुकी थी नज़र हो चुका था असर
नाम उनका ज़ुबाँ ने ले लिया
दिल उनको उठा के दे दिया
कुछ घबरा के कुछ शरमा के
दिल उनको उठा के दे दिया

ज़िंदगी में कोई आ गया
प्यार का राग समझा गया
ज़िंदगी में कोई आ गया
प्यार का राग समझा गया
उनके हो ही गये हम तो खो ही गये
जाने जादू ये कैसा किया
दिल उनको उठा के दे दिया
कुछ घबरा के कुछ शरमा के
अब सोचती हूँ ये क्या किया
कुछ घबरा के कुछ शरमा के
दिल उनको उठा के दे दिया
………………………………………….
Dil uno utha ke de diya-Baap bete 1959

Artist: Shyama

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Nov 13, 2019

खेलो ना मेरे दिल से-हकीक़त १९६४

श्रोता के दिमाग के तार झनझना दे ऐसी धुनें केवल
सलिल चौधरी ने नहीं बल्कि अन्य संगीतकारों ने भी
बनायीं हैं. मदन मोहन के खज़ाने में भी ऐसी कुछ
धुनें हैं.

प्रस्तुत गीत फिल्म हकीक़त से है जिसे कैफी आज़मी
ने लिखा है. गीत में वाद्य यंत्र कम से कम प्रयोग में
लाये गए हैं और बस हावी होने की रेखा को छू कर
अपनी जगह पर वापस आ जाते हैं.

कुछ कुछ ऐसा ही है जैसे हमारे ब्लॉग की पोस्ट होती
हैं. गीत का बखान करने के लिए दस पेज का निबंध
लिखना ज़रूरी नहीं है. इधर उधर की आयं बायं सायं
घुसेडो और जगह जगह का कूड़ा इकठ्ठा कर के ब्लॉग
को खंती बना डालो. उसके बाद स्वच्छ भारत अभियान
का गाना गाओ. इन सब से बेहतर है संक्षेप में बात
कह लो.



गीत के बोल:

खेलो ना मेरे दिल से
खेलो ना मेरे दिल से
ओ मेरे साजना ओ साजना ओ साजना
खेलो ना खेलो ना मेरे दिल से
खेलो ना मेरे दिल से

मुस्कुरा के देखते तो हो मुझे
ग़म है किसलिये निगाह में
मुस्कुरा के देखते तो हो मुझे
ग़म है किसलिये निगाह में
मंज़िल अपनी तुम अलग बसाओगे
मुझको छोड़ दोगे राह में
प्यार क्या दिल्लगी प्यार क्या खेल है

खेलो ना मेरे दिल से
ओ मेरे साजना ओ साजना ओ साजना
खेलो ना मेरे दिल से

क्यूँ नज़र मिलाई थी लगाव से
हँस के दिल मेरा लिया था क्यूँ
क्यूँ नज़र मिलाई थी लगाव से
हँस के दिल मेरा लिया था क्यूँ

क्यूँ मिले थे ज़िन्दगी के मोड़ पर
मुझको आसरा दिया था क्यूँ
प्यार क्या दिल्लगी प्यार क्या खेल है

खेलो ना मेरे दिल से
ओ मेरे साजना ओ साजना ओ साजना
खेलो ना खेलो ना मेरे दिल से
खेलो ना मेरे दिल से
खेलो ना मेरे दिल से
..........................................................
Khelo na mere dil se-Haqeeqat 1964

Artist: Priya Rajvansh

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Nov 8, 2019

मैं ये सोच कर उसके दर से-हकीक़त १९६४

फिल्म हकीक़त का संगीत फिल्म के कथानक जैसा
ही गंभीर है. हालांकि फिल्म में एक खुशनुमा गीत
भी है रफ़ी का गाया हुआ और साथ में एक दीवाली
गीत है वो भी दुःख के भाव वाला है.

सुनते हैं फिल्म से रफ़ी का गाया एक दर्द भरा गीत
जो क्लासिक गीतों में शुमार है.



गीत के बोल:

मैं ये सोच कर उसके दर से उठा था
के वो रोक लेगी मना लेगी मुझको

हवाओं में लहराता आता था दामन
के दामन पकड़ कर बिठा लेगी मुझको

कदम ऐसे अंदाज़ से उठ रहे थे
के आवाज़ देकर बुला लेगी मुझको

मगर उसने रोका न उसने मनाया
न दामन ही पकड़ा न मुझको बिठाया
न आवाज़ ही दी न वापस बुलाया
मैं आहिस्ता आहिस्ता बढ़ता ही आया
यहाँ तक के उससे जुदा हो गया मैं
यहाँ तक के उससे जुदा हो गया मैं
जुदा हो गया मैं जुदा हो गया मैं
जुदा हो गया मैं जुदा हो गया मैं
............................................................
Main ye soch kar uske dar se-Haqeeqat 1964

Artist:

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Nov 7, 2019

प्रभु द्वार चली प्रभु की दासी-शेरू १९५७

कैफ इरफानी का लिखा और मदन मोहन के संगीत
से सजा गीत सुनते हैं फिल्म शेरू से जिसे मन्ना डे
ने गाया है.

शास्त्रीय और उपशास्त्रीय संगीत का सम्बन्ध देसी हिंदी
सिनेमा से काफ़ी पुराना है और समय समय पर हमें
कुछ उम्दा सामान सुनने को उपलब्ध हो जाता है.

यू ट्यूब के आगमन के पूर्व मन्ना डे के दुर्लभ गाने
सुन पाना एक दुर्लभ अनुभव सरीखा ही होता था. जब
मुकेश, रफ़ी और किशोर के दुर्लभ गीत ही सुनने को
नहीं मिला करते थे तो मन्ना डे के कहाँ मिलते?



गीत के बोल:

प्रभु द्वार चली प्रभु की दासी
एक आस लिए एक प्यास लिए
प्रभु द्वार चली प्रभु की दासी
एक आस लिए एक प्यास लिए
प्रभु द्वार चली

मुस्कान के फूल सजाये हुए
नैनों के दीप जलाये हुए
मुस्कान के फूल सजाये हुए
नैनों के दीप जलाये हुए
निकली थी ???? ????? को
मन में अपना विश्वास लिए

प्रभु द्वार चली प्रभु की दासी
एक आस लिए एक प्यास लिए
प्रभु द्वार चली

तराना........

तेरो नाम ओमकार गावत सब बार बार
तेरो नाम ओमकार गावत सब बार बार
लाज मेरी तेरे हाथ जगत के खिवैया

तराना........
...........................................................
Prabhu dwar chali-Sheroo 1957

Artist:

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Oct 24, 2019

पी की नजर गोरे तन से-महाराजा १९७०

दुर्लभ गीत के साथ दुर्लभता का कोई पहलू तो जुड़ा
होना ही चाहिए. अब उदाहरण के लिए आपको एक
गेटे सुनवाते हैं जिसमें अभिनेत्री नूतन आपको नाचती
नज़र आएंगी. श्वेत श्याम युग की बात और हैं मगर
७० के दशक की फिल्मों में ये देखना एक दुर्लभ
अनुभव है.

दुर्लभता थोड़ी सी ही सही एक मामले में और है-गीत
लिखने वाले इन्दीवर हैं जिन्होंने मदन मोहन के लिए
थोड़े से गाने ही लिखे हैं. दुर्लभ बात एक और भी हो
सकती है-संजय खान के साथ नूतन की फिल्म.




गीत के बोल:

पी की नजर गोरे तन से लिपट गई
अंग चुरा के गुईयां मैं तो सिमट गई
मन को भाये पर नैना लजाये रे
मन को भाये पर नैना लजाये रे
पी की नजर गोरे तन से लिपट गई
अंग चुरा के गुईयां मैं तो सिमट गई
मन को भाये पर नैना लजाये रे
मन को भाये पर नैना लजाये रे
पी की नजर गोरे तन से लिपट गई

देखो अभी से पकड़ो न बैयाँ
बैयाँ पकड़ना जो चाहो तो सैयां
देखो अभी से
देखो अभी से पकड़ो न बैयाँ
बैयाँ पकड़ना जो चाहो तो सैयां
डोली मंगाई लो चुनरिया चढ़ाई दो
कंगन पहनाई दो दुल्हनिया बनाई लो
फिर तोहरे संग चलूंगी साजना हाँ
फिर तोहरे संग चलूंगी साजना

पी की नजर गोरे तन से लिपट गई
पी की नजर गोरे तन से लिपट गई
अंग चुरा के गुईयां मैं तो सिमट गई
मन को भाये पर नैना लजाये रे
मन को भाये पर नैना लजाये रे
पी की नजर गोरे तन से लिपट गई

इतरा के सेजिया पे सोयी थी मैं तो
सपनों की दिनया में खोयी थी मैं तो
इतरा के सेजिया पे सोयी थी मैं तो
सपनों की दिनया में खोयी थी मैं तो
सैयां नी आ के उडाई दी निंदिया
माथे पे होंठों की लगाये दी बिंदिया
भरा मांग में सिन्दूर मेरा डर किया दूर
बड़े प्यार से पिया ने पहनाए कंगना
बड़े प्यार से पिया ने पहनाए कंगना

पी की नजर गोरे तन से लिपट गई
पी की नजर गोरे तन से लिपट गई
अंग चुरा के गुईयां मैं तो सिमट गई
मन को भाये पर नैना लजाये रे
मन को भाये पर नैना लजाये रे
पी की नजर गोरे तन से लिपट गई

सूरज मुखी है सजना हमारा
जलती हैं सखियाँ भी इतना है प्यारा
सूरज मुखी है
सूरज मुखी है सजना हमारा
जलती हैं सखियाँ भी इतना है प्यारा
फूलों सा मन है किरण सा बदन है
आँखों में हीरे और साँसों में चमन है
किस किस से छुपाऊँ साजन अपना
किस किस से छुपाऊँ साजन अपना
पी की नजर गोरे तन से लिपट गई
पी की नजर गोरे तन से लिपट गई
अंग चुरा के गुईयां मैं तो सिमट गई
मन को भाये पर नैना लजाये रे
मन को भाये पर नैना लजाये रे
पी की नजर गोरे तन से लिपट गई
…………………………………………….
Pi ki nazar gore tan se lipat gayi-Maharaja 1970

Artists: Nutan, Sanjay Khan

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Oct 23, 2019

ज़रा सी आहट होती है-हकीक़त १९६४

फिल्म हकीक़त के गीतों में से एक यही है जिसे
मदन मोहन के संगीत वाली किसी दूसरी फिल्म के
कथानक में फिट किया जा सकता है. मेरा आशय
उन भूतिया फिल्मों से है जिनमें मदन मोहन का
संगीत है-वो कौन थी और मेरा साया टाइप की.

गीत में आहट, सोच, वो तो नहीं जैसे शब्द हैं तो
आगे अंतरे में छू गई जिस्म मेरा किसके दामन की
हवा जैसे शब्द हॉरर फिल्म के गीत के लिए बढ़िया
सामान हैं.



गीत के बोल:

ज़रा सी आहट होती है तो दिल सोचता है
कहीं ये वो तो नहीं कहीं ये वो तो नहीं
कहीं ये वो तो नहीं
ज़रा सी आहट होती है तो दिल सोचता है
कहीं ये वो तो नहीं कहीं ये वो तो नहीं
कहीं ये वो तो नहीं

छुप के सीने में आ आ आ आ आ आ
छुप के सीने में कोई जैसे सदा देता है
शाम से पहले दिया दिल का जला देता है
है उसी की ये सदा है उसी की ये अदा
कहीं ये वो तो नहीं कहीं ये वो तो नहीं
कहीं ये वो तो नहीं

शक्ल फिरती है हाँ हाँ हाँ
शक्ल फिरती है निगाहों में वो ही प्यारी सी
मेरी नस-नस में मचलने लगी चिंगारी सी
छू गई जिस्म मेरा किसके दामन की हवा
कहीं ये वो तो नहीं कहीं ये वो तो नहीं
कहीं ये वो तो नहीं

ज़रा सी आहट होती है तो दिल सोचता है
कहीं ये वो तो नहीं कहीं ये वो तो नहीं
कहीं ये वो तो नहीं
........................................................
Zara si aahat hoti hai-Haqeeqat 1964

Artist: Priya Rajvansh

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Sep 23, 2019

कभी तेरा दामन ना-नींद हमारी ख्वाब तुम्हारे १९६६

लंबे नाम वाली फिल्मों में अगर नाम के अनुसार वजन ना
हो तो वे बॉक्स ऑफिस पर धराशायी होने में ज़रा भी समय
नहीं लगातीं. वजन से तात्पर्य कहानी में दम से है. कहानी
भले ही घिसी पिटी हो मगर तडका बढ़िया वाला चाहिए.
जनता अँधेरे से और कम रौशनी वाले रेस्टोरेंट में दो दिन
बासी दाल केवल बढ़िया तडके की वजह से ही खा जाती है.

सुनते हैं सन १९६६ की फिल्म से एक गीत रफ़ी और आशा
की आवाज़ में. राजेंद्र कृष्ण के बोल हैं और मदन मोहन का
संगीत.

https://www.youtube.com/watch?v=ZRuLC0uLXG8


गीत के बोल:

कभी तेरा दामन ना छोड़ेंगे हम हाय
कभी तेरा दामन ना छोड़ेंगे हम
चाहे ज़माना करे लाखों सितम हाँ
चाहे ज़माना करे लाखों सितम हाय
कभी तेरा दामन ना छोड़ेंगे हम हाय
कभी तेरा दामन ना छोड़ेंगे हम
सनम मेरी जन्नत है तेरे कदम हाय
सनम मेरी जन्नत है तेरे कदम हाय
कभी तेरा दामन ना छोड़ेंगे हम हाय
कभी तेरा दामन

मोहब्बत के शोलों में जलता रहूँगा
तेरा नाम ले के मैं चलता रहूँगा
ठोकर भी खा के संभालता रहूँगा
बड़े हैं मोहब्बत के हम पे करम हाय
बड़े हैं मोहब्बत के हम पे करम हाय
कभी तेरा दामन

देंगी सहारा जो तेरी निगाहें
तो आसान होंगी मोहब्बत की राहें
के मंजिल है मेरी ये तेरी ही बाहें
चले हैं सफर पे ये खा के कसम
हाँ चले हैं सफर पे ये खा के कसम
कभी तेरा दामन ना छोड़ेंगे हम हाय
कभी तेरा दामन

मचलती उम्मीदें इरादे जवान हैं
के बस में हमारे ये ज़मीन आसमान हैं
मोहब्बत वहीँ है के हम तुम जहाँ हैं
मिला कर गले कदम से कदम हाँ
मिला कर गले कदम से कदम
कभी तेरा दामन ना छोड़ेंगे हम हाय
कभी तेरा दामन
…………………………………………………….
Kabhi tera daman na-Neend hamari khwab tumhare 1966

Artists: Shashi Kapoor, Nanda

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Sep 14, 2019

आपने अपना बनाया-दुल्हन एक रात की १९६७

हिंदी फिल्म की परिभाषा जाने किसने रची जिसके
अनुसार फिल्म में ६-७ गाने होना ज़रूरी हैं. कहानी
में थोड़ी थोड़ी देर में एक गाना.

सन १९६७ की फिल्म दुल्हन एक रात की में ढेर सारे
गाने हैं जिनमें से ३ हमने आपको सुनवा दिए हैं. ये
है इसी फिल्म से चौथा गाना जो युगल गीत है लता
और महेंद्र कपूर का गाया हुआ.

इसे भी राजा मेहँदी अली खान ने लिखा है और धुन
है एक बार फिर से मदन मोहन की.




गीत के बोल:

आपने अपना बनाया
मेहरबानी आपकी
मेहरबानी आपकी
हम तो इस काबिल न थे
हम तो इस काबिल न थे
हम तो इस काबिल न थे
है कदरदानी आप की
मेहरबानी आपकी
आपने अपना बनाया
………………………………………………………
Aapne apna banaya-Dulhan ek raat ki 1967

Artist:

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Sep 7, 2019

चिराग दिल का जलाओ-शीर्षक गीत १९६९

अंदर की रौशनी तो सबसे बढ़िया होती है मगर वो जिंदगी
भर बुझी ही रह जाती है. आदमी नकली रोशनियों के सहारे
अपनी खुशियाँ तलाशता रह जाता है.

फिल्म चिराग का दर्द भरा गीत सुनते हैं रफ़ी की आवाज़
में. बोलों से ये प्रेरणादायी गीत सरीखा लगता है मगर धुन
से दर्दीला गीत समझ आता है. यही कंफ्यूज़न इसकी ब्यूटी
है.

आप लोग कहते हैं हम गानों की तारीफ़ नहीं करते, लो कर
दी जी. शीर्षक गीत खुशनुमा होता तो और भी आनंद आता.

मजरूह सुल्तानपुरी के बोल हैं और मदन मोहन का संगीत.





गीत के बोल:

चराग दिल का जलाओ बहुत अँधेरा है
.
.
.
..
..........................................................
Chirag dil ka jalao-Chirag 1969

Artist: Sunil Dutt

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Jul 10, 2019

तुम चल रहे हो-दुनिया ना माने १९५९

फिल्म दुनिया ना माने के गीत का दूसरा संस्करण सुनते
हैं आज. गीत पिछले गीत से ज्यादा गति वाला है और
ज्यादा लिवली/लाइवली है. इसकी केटेगरी है बोट सोंग.

इसके बोल भी राजेन्द्र कृष्ण ने लिखे हैं और संगीतकार
भी वही हैं-मदन मोहन. मुकेश के अलावा इस गीत में
लता मंगेशकर की आवाज़ है. कई फिल्मों में राजसी
भूमिकाएं करने वाले प्रदीप कुमार और लोचदार गर्दन की
स्वामिनी माला सिन्हा इस गीत में आपको जल और थल
पर अपनी भावनाएं उडेलते नज़र आयेंगे. नाव की सीट
पर शायद कील लगी है जिस वजह से नायक बार बार
उठने का उपक्रम करता है और इस वजह से नाव का बेलेंस
बिगड जाता है.





गीत के बोल:

तुम चल रहे हो हम चल रहे हैं
मगर दुनिया वालों के दिल जल रहे हैं
तुम चल रहे हो हम चल रहे हैं
मगर दुनिया वालों के दिल जल रहे हैं
तुम चल रहे हो

ये बहकी फिजाएं ये झूलती हवाएं
जो छेड़ छेड़ जाएँ तो दिल मचले
यही तो हैं ज़माने दिलों के अफ़साने
जो तूने ना सुनाये तो दिल मचले
तुम चल रहे हो हम चल रहे हैं
मगर दुनिया वालों के दिल जल रहे हैं

तुम चल रहे हो हम चल रहे हैं
मगर दुनिया वालों के दिल जल रहे हैं
तुम चल रहे हो

अपनी खुशी से किसी ने जो किसी से
किया है कोई वादा तो डर किसका
दिल ही दिया है किसी का क्या लिया है
काहे को कोई लूटा है घर किसका
तुम चल रहे हो हम चल रहे हैं
मगर दुनिया वालों के दिल जल रहे हैं
तुम चल रहे हो हम चल रहे हैं
मगर दुनिया वालों के दिल जल रहे हैं
तुम चल रहे हो

प्यार की अदायें ज़माने को ना भाये
वो देख देख जले तो जलने दो
हमें ना कोई रोके किसी के हम हो के
चले हैं मस्ती में तो चलने दो

तुम चल रहे हो हम चल रहे हैं
मगर दुनिया वालों के दिल जल रहे हैं
तुम चल रहे हो हम चल रहे हैं
मगर दुनिया वालों के दिल जल रहे हैं
तुम चल रहे हो
................................................................
Tum chal rahe ho-Duniya na mane 1959

Artists: Pradeep Kumar, Mala Sinha

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Jul 1, 2019

ओ मैडम-आशियाना १९५२

सन १९५२ की फिल्म आशियाना में गंभीर गीतों के साथ ही
एक हल्का फुल्का गीत भी है. मेरे ख्याल से कथानक ऐसे होने
चाहिए जिसमें सभी प्रकार के रंग वाले गीत हों. इससे संतुलन
बना रहता है. ये मेरा अपना विचार है. फिल्म हम मनोरंजन
के लिए देखते हैं. लोजिक के हिसाब से मनोरंजन में दुखी होने
का क्या काम.

खैर छोडिये सिनेमा का माध्यम आती क्या खंडाला सिखलाने के
अलावा और भी कई काम करता है जो इस एक पोस्ट में हम
नहीं समेट सकते.

सुनते हैं शमशाद बेगम और किशोर कुमार का गाया हुआ गीत
जिसे लिखा है राजेंद्र कृष्ण ने और जिसकी धुन तैयार की है
मदन मोहन ने.



गीत के बोल:

ओ मैडम
ओ ओ मैडम
ओ ओ ओ मैडम
हे  दो से हो गये एक हम न फ़ाका न ग़म
ओ मैडम

ओ मिस्टर
आ आ आ मिस्टर
दिल का होर्न आज ख़ुशी से बाजे पम-पम
ओ मिस्टर
   
पापा ख़ुश मामा ख़ुश
पापा ख़ुश मामा ख़ुश
देख के अपनी जोड़ी
वो क्या जाने अपनी शादी की मुद्दत है थोड़ी
कल की किसने देखी प्यारे आज मनाते ग़म
ओ मिस्टर
ओ मैडम
ओ ओ मैडम
हाँ दो से हो गये एक हम न फ़ाका न ग़म
ओ मैडम
ओ मिस्टर
ओ ओ ओ मिस्टर
दिल का होर्न आज ख़ुशी से     बाजे पम-पम
ओ मिस्टर

मैरिज की रात है हो ओ ओ ओ कितनी सुहानी
मैरिज की रात है हो ओ ओ ओ कितनी सुहानी
ओ लेकिन मेरी बुलबुल मैरिज है आनी-जानी
आनी जानी जानी आनी यानी यानी जानी जानी
लेकिन मेरी बुलबुल मैरिज है आनी जानी
कौन ये जाने कब पड़ जाये ढाई वाट का बम

ओ मैडम
ओ ओ मैडम
ओ ओ ओ मैडम
होये दो से हो गये एक हम न फ़ाका न ग़म
ओ मैडम

ओ मिस्टर
ओ ओ ओ मिस्टर
दिल का होर्न आज ख़ुशी से बाजे पम-पम
ओ मिस्टर

मैरिज तो है एक गुब्बारा
हे मैरिज तो है एक गुब्बारा
कभी न फूले सारा
मार मार के फूँकें थक जाये मियाँ बेचारा
मार मार के फूँकें थक जाये मियाँ बेचारा

अरे अच्ची है वो बीवी जिसका जल्दी निकले दम

क्यों मैडम
अबे जा मिस्टर
ओ मैडम
दो से हो गये एक हम न फ़ाका न ग़म
ओ मैडम

ओ मिस्टर
ओ ओ ओ मिस्टर
दिल का होर्न आज ख़ुशी से बाजे पम-पम
ओ मिस्टर
ओ मैडम
ओ मिस्टर
ओ ओ मैडम
......................................................................
O madam-Ashiana 1952

Artists: Ek nayak, ek nayika, Raj Kapoor

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Jun 21, 2018

नैनों में बदरा छाये-मेरा साया १९६६

रहस्य, रोमांच और सुन्दर नायिका-राज खोसला को ये सब
काफी दिलचस्प लगा और उनकी कई फ़िल्में सस्पेंस वाली
बन गयीं. इनमें से ३ फ़िल्में-वो-कौन थी,मेरा साया और
अनिता साधना को ले कर बनाई गईं.

अभिनेत्री को सुन्दर दिखलाने में निर्देशक ने कोई कसर नहीं
छोड़ी. दर्शक अपलक निहारता रहे स्क्रीन को, विशेषकर जब
गाने प्रकट हों फिल्म में.

नायक सुनील दत्त पूरी फिल्म में अलग अलग भावों में मूक
दर्शक से बने दिखलाई दिए, उनके हिस्से के संवाद की पोथी
दरअसल गुम गयी थी या फिर उसे चूहा खा गया था तो इस
वजह से निर्देशक ने सोचा क्यूँ ना ऐसे ही काम चला लिया
जाए, वैसे भी नायक के संवाद नहीं, दर्शक नायिका की मीठी
आवाज़ सुनने आते हैं.

ये तो हमने संभावना जाहिर की है, क्या हुआ होगा. लोग
बरसों से ही ऐसी कहानियां सुना सुन कर अपनी दुकान
चला रहे हैं.

फिल्म के  विशेष गीत को लिखा है राजा मेहँदी अली खान
ने और धुन तैयार की है मदन मोहन ने.



गीत के बोल:

नैनों में बदरा छाये बिजुरी सी चमके हाय
ऐसे में बालम मोहे गरवा लगा ले
...........................................................
Nainon mein badra chhaye-Mera Saya 1966

Artists: Sadhana, Sunil Dutt

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Apr 4, 2018

वो चुप रहें तो मेरे-जहांआरा १९६४

राजेंद्र कृष्ण की बात चली तो एक गीत सुन लिया जाए.
फिल्म जहांआरा से लता मंगेशकर का गाया एक गाना
सुनते हैं जिसकी धुन मदन मोहन ने तैयार की है. बोलों
की सरलता और धुन की जटिलता/कुटिलता का मिश्रण
जनता को काफी पसंद आया. इस जोड़ी ने कई नायाब
गीत रचे.

फिल्म जहाँआरा अभिनेत्री माला सिन्हा के फ़िल्मी जीवन
की एक माइलस्टोन फिल्म कही जाती है. ट्रेजिक कहानियों
को हिट करवा पाना आसान काम नहीं होता. किसी किसी
फिल्म का अंत ट्रेजिक होता है वहां तक तो जनता झेल
लेती है मगर पूरी कहानी दुखी सी हो तो उसे पचा पाना
आज भी पब्लिक के लिए थोडा मुश्किल काम है.




गीत के बोल:

वो चुप रहें तो मेरे दिल के दाग़ जलते हैं
वो चुप रहें तो मेरे दिल के दाग़ जलते हैं
जो बात कर लें  आ आ आ आ आ आ
जो बात कर लें तो बुझते चिराग़ जलते हैं
वो चुप रहें तो मेरे दिल के दाग़ जलते हैं

कहो बुझें के जलें
हम अपनी राह चलें या तुम्हारी राह चलें
कहो बुझें के जलें
बुझें तो ऐसे के जैसे किसी ग़रीब का दिल
किसी ग़रीब का दिल
जलें तो ऐसे के जैसे चिराग़ जलते हैं
वो चुप रहें तो मेरे दिल के दाग़ जलते हैं

ये खोई खोई नज़र
कभी तो होगी इधर या सदा रहेगी उधर
ये खोई खोई नज़र
उधर तो एक सुलग़ता हुआ है वीराना
है एक वीराना
मगर इधर तो बहारों में बाग़ जलते हैं
वो चुप रहें तो मेरे दिल के दाग़ जलते हैं

जो अश्क़ पी भी लिए
जो होंठ सी भी लिए तो सितम ये किसपे किए
जो अश्क़ पी भी लिए
कुछ आज अपनी सुनाओ कुछ आज मेरी सुनो
ख़ामोशिओं से तो दिल और दिमाग़ जलते हैं
वो चुप रहें तो मेरे दिल के दाग़ जलते हैं
जो बात कर लें तो बुझते चिराग़ जलते हैं
वो चुप रहें तो मेरे दिल के दाग़ जलते हैं
......................................................................
Wo chup rahen to mere-Jahan Ara 1964

Artist: Minu Mumtaz, Bharat Bhooshan

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