February 12, 2018

आधी रात को ये दुनिया वाले-गुलाम अली

गुलाम अली की गाई एक गैर फ़िल्मी रचना सुनते हैं. इसमें प्रेमियों
के क्रियाकलापों के साथ साथ हीर रांझा का जिक्र भी है.

   


Ghulam Ali


गीत के बोल:

आधी रात को ये दुनिया वाले जब ख्वाबों में खो जाते हैं
ऐसे में मुहब्बत के रोगी यादों के चराग़ जलाते हैं

करते हैं मुहब्बत सब ही मगर हर दिल को सिला कब मिलता है
आतीं हैं बहारें गुलशन में हर फूल मगर कब खिलता है

मैं राँझा न था तू हीर न थी हम अपना प्यार निभा न सके
यूँ प्यार के ख़्वाब बहुत देखे ताबीर मगर हम पा न सके

मैंने तो बहुत चाहा लेकिन तू रख ना सकी वादों का भरम
अब रह रह कर याद आता है जो तूने किया इस दिल पे सितम

पर्दा जो हटा दूँ चेहरे से तुझे लोग कहेंगे हरजाई
मजबूर हूँ मैं दिल के हाथों मन्ज़ूर नहीं तेरी रुसवाई

सोचा है के अपने होंठों पर मैं चुप की मोहर लगा लूँगा
मैं तेरी सुलगती यादों से अब इस दिल को बहला लूँगा
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Aadhi raat ko ye duniya waale-Ghulam Ali

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