जाते हुए ये पलछिन-अंखियों के झरोखों से १९७८
में संगीत के साथ ही उन्होंने रामायण सीरियल और धार्मिक
गीतों के लिए संगीत तैयार किया.
गीत लेखन में भी उन्हें महारथ हासिल थी. अपने समकालीन
गीतकारों जैसा लिखने और संगीतकारों जैसा संगीत देने में
वे सक्षम थे. उनके गीतों में तरह तरह की ध्वनियों का जो
समावेश है वो ढेर सारे संगीतकारों की स्टाइल का निचोड़
है.
एक दर्शनवादी और आशावादी गीत सुनते हैं उन्हीं की आवाज़
में.
गीत के बोल:
जाते हुये ये पलछिन क्यूँ जीवन लिए जाते
जाते हुये ये पलछिन क्यूँ जीवन लिए जाते
जोड़ें यही जोड़ें यही तोड़े सब नाते
जाते हुये ये पलछिन क्यूँ जीवन लिए जाते
मन जितना जीना चाहे तन उतना ही मरता जाये
इंसान की हिमाकत देखो उम्मीद ही करता जाये
कोई राह मंजिल की कहीं सूझे तो बतलायें
जाते हुये ये पलछिन क्यूँ जीवन लिए जाते
रंग और सुगंध का जादू सदियों से चलता आया
इंसान इन्हीं में डूबा नादान यही भरमाया
अब कौन ये सोचे क्या खोया और क्या पाया
जाते हुये ये पलछिन क्यूँ जीवन लिए जाते
विश्वास में वास है विष का आशा में छुपी है निराशा
शब्दो के संग न बहना हैं शर्त भरी हर भाषा
इंसान का दिल भी पत्थर सा जाये तराशा
जाते हुये ये पलछिन क्यूँ जीवन लिए जाते
जोड़ें यही जोड़ें यही तोड़े सब नाते
जाते हुये ये पलछिन क्यूँ जीवन लिए जाते
क्यूँ जीवन लिए जाते क्यूँ जीवन लिए जाते
………………………………………….
Jaate huye ye palchhin-Ankhiyon ke jharokhon se 1978
Artist: Sachin, Ranjeeta

0 comments:
Post a Comment