May 27, 2020

ज़िंदगी उलझनों से भरी है-सुनो ना २००९

फिल्म का नाम है सुनो ना, इसके आगे भी कुछ है जिससे
इसका पूरा मतलब समझ आता है-एक नन्ही सी आवाज़.

फिल्म का विषय अलग हट के है बिन ब्याही माँ के इर्द गिर्द
कहानी घूमती है. नए कलाकारों वाली इस फिल्म में समीक्षकों
को कुछ विशेष नज़र नहीं आया और उल्लेख में यही है कि
कौन कौन सी देसी और बिदेसी फिल्मों की छबि इस फिल्म में
दिखलाई देती है.

खैर गीत हमने इसलिए चुना है कि ये सलिल चौधरी की अगली
पीढ़ी से सम्बन्ध रखता है. संगीत उनके सुपुत्र का है और इसे
गाया है अन्तरा चौधरी ने. सलिल के पुराने साथी गीतकार योगेश
ने इस गीत की रचना की है. सलिल चौधरी के सुपुत्र फिल्मों में
बैकग्राउंड स्कोर के लिए विख्यात हैं.



गीत के बोल:

ज़िंदगी उलझनों से भरी है
अजनबी हैं सफ़र की राहें
हमसफ़र थे जो कल तक हमारे
फेर ली हैं उन्हीं ने निगाहें
ज़िंदगी उलझनों से भरी है
अजनबी हैं सफ़र की राहें
हमसफ़र थे जो कल तक हमारे
फेर ली हैं उन्हीं ने निगाहें
ज़िंदगी उलझनों से भरी है
अजनबी हैं सफ़र की राहें

फूल सपनों के मुरझा गये हैं
आँख में आँसुओं की नमी है
मेरी उम्मीद की हर किरण पर
धूल की अब तो चादर जमी है
फूल सपनों के मुरझा गये हैं
आँख में आँसुओं की नमी है
मेरी उम्मीद की हर किरण पर
धूल की अब तो चादर जमी है
दिल मेरा सिसकियाँ ले रहा है
मेरी साँसों से उठती हैं आहें

ज़िंदगी उलझनों से भरी है
अजनबी हैं सफ़र की राहें
हमसफ़र थे जो कल तक हमारे
फेर ली हैं उन्हीं ने निगाहें
ज़िंदगी उलझनों से भरी है
अजनबी हैं सफ़र की राहें

कोई मुझमें जो छुप कर है बैठा
दे रहा है मुझे वो दिलासा
साथ हूँ मैं तेरे हर क़दम पर
फिर ये चेहरे पे क्यूँ है निराशा
कोई मुझमें जो छुप कर है बैठा
दे रहा है मुझे वो दिलासा
साथ हूँ मैं तेरे हर क़दम पर
फिर ये चेहरे पे क्यूँ है निराशा
आयेंगे फिर वो ख़ुशियों के लम्हे
वक़्त की सुन ले तू ये सदाएँ

ज़िंदगी उलझनों से भरी है
अजनबी हैं सफ़र की राहें
हमसफ़र थे जो कल तक हमारे
फेर ली हैं उन्हीं ने निगाहें
ज़िंदगी उलझनों से भरी है
अजनबी हैं सफ़र की राहें
……………………………………….
Zindagi uljhanon se bhari hai-Suno Na 2009

Artist: Tara Sharma

0 comments:

© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP