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Jan 18, 2018

अलबेले सैयां झूलना झुला जा रे-मालिक १९५८

सदा जवान गीत वही तो होते हैं जिन्हें कभी भी सुनो हरदम
ताजे से लगते हैं. टाइमलेस कहो या समय के बंधन से मुक्त
मतलब तो एक ही है.

आज सुनें एक और विंटेज गीत जो उतना विंटेज नहीं है जैसे
हम ३० और ४० के दशक के गीतों को बोलते हैं. कोरस वाला
ये गीत शमशाद बेगम और सुरैया की मधुर ध्वनियों से युक्त है.
शकील बदायूनीं के बोल हैं और गुलाम मोहम्मद का संगीत.




गीत के बोल:

अलबेले सैंया झुलना झुला जा रे
अलबेले सैंया झुलना झुला जा रे
आई रिमझिम
हो आई रिमझिम
हो आई रिमझिम रुत अब आ जा
अलबेले सैंया झुलना झुला जा रे
अलबेले सैंया झुलना झुला जा रे

झूलूँ अकेले
झूलूँ अकेले कैसे हिंडोला
आ जा रे बालम ले कर डोला
आ जा रे बालम ले कर डोला
आ जा रे बालम ले कर डोला
ले कर डोला
हो हो हो हो पिया मिलन के दिन हैं सजनिया
होय काढ ले घूँघटा बन जा दुल्हनिया
होय काढ ले घूँघटा बन जा दुल्हनिया
तोहे छुप छुप
हो तोहे छुप छुप
होय तोहे छुप छुप देखे तोरा राजा
अलबेले सैंया झुलना झुला जा रे
अलबेले सैंया झुलना झुला जा रे

प्रेम का झूला डाल के मन में
डाल के मन में
प्रेम का झूला डाल के मन में
आऊँ गगन से जाऊँ गगन में
होओ ओ ओ ओ
आऊँ गगन से जाऊँ गगन में
आऊँ गगन से जाऊँ गगन में
हो ओ ओ ओ
आगे बढ़ूँ तो दरशन पी के
पीछे हटूँ तो सब रंग फीके
होय     पीछे हटूँ तो सब रंग फीके
मोरी आँखों में
हो मोरी आँखों में
हो मोरी आँखों में बलमा समाँ जा
अलबेले सैंया झुलना झुला जा रे
अलबेले सैंया झुलना झुला जा रे
अलबेले सैंया झुलना झुला जा रे
..........................................................................
Albele saiyan jhulna jhula ja re-Maalik 1958

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Jun 18, 2017

मन धीरे धीरे गाये रे-मालिक १९५८

प्रस्तुत गीत एक लोकप्रिय युगल गीत है. इसकी एक
विशेषता है. जो गाने वाले हैं उन्हीं पर इसे फिल्माया
भी गया है. फिल्म का नाम है मालिक. गायक कलाकार
हैं तलत महमूद और सुरैया.

शकील बदायूनी के बोल हैं और गुलाम मोहम्मद का
संगीत. मेलोडी ने जब क्वीन बनना शुरू किया था उस
युग का गीत है ये. काफी हद तक बन चुकी थी १९५८
तक.



गीत के बोल:

मन धीरे धीरे गाये रे
मालूम नहीं क्यूँ
मालूम नहीं क्यूँ
बिन गाये रहा न जाये रे
बिन गाये रहा न जाये रे
मालूम नहीं क्यूँ
मालूम नहीं क्यूँ

एक बात ज़बान पर आये रे
एक बात ज़बान पर आये रे
मालूम नहीं क्यूँ
मालूम नहीं क्यूँ
कहते हुए दिल शरमाई रे
कहते हुए दिल शरमाई रे
मालूम नहीं क्यूँ
मालूम नहीं क्यूँ
मन धीरे धीरे गाये रे

पलकों में छुपा कर गोरी
लाई है मिलन की डोरी
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ
पलकों में छुपा कर गोरी
लाई है मिलन की डोरी
अब साथ है जीवन भर का
लो थाम लो बैंया मोरी
सब देख नज़र ललचाए रे
सब देख नज़र ललचाए रे
मालूम नहीं क्यूँ
मालूम नहीं क्यूँ
मन धीरे धीरे गाये रे

आशाओं ने ली अंगड़ाई
तन मन में बजी शहनाई
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ
आशाओं ने ली अंगड़ाई
तन मन में बजी शहनाई
दिल डूब गया मस्ती में
इक लहर खुशी की आई
दिल हाथ से निकला जाये रे
दिल हाथ से निकला जाये रे
मालूम नहीं क्यूँ

मन धीरे धीरे गाये रे
मन धीरे धीरे गाये रे
मालूम नहीं क्यूँ
मालूम नहीं क्यूँ
…………………………………………………………
Man dheere dheere gaaye re-Maalik 1958

Artists: talat Mehmood, Suraiya

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