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Mar 4, 2015

बादल उठ्या- मटरू की बिजली का मंडोला २०१२

दे भटा भट-ये शब्द सुनते थे जब किरकिट खेला करते
थे, गेंदे कम बचती थी और रन ज्यादा बनाने होते थे
तब कप्तान कुछ ऐसे जुमले सुनाया करता था. फिर कभी
लड़ाई झगडा होता तब भी ये शब्द सुनाई देते. इनका
किसी गीत में भी अभिनव प्रयोग हो सकता है ये बात
मुझे इस गीत को सुनने के बाद ही समझ आई. गीत
है मटरू की बिजली का मंडोला से, जिसे स्वर दिया है
रेखा भरद्वाज ने. गुलज़ार के बोलों के लिए धुन बनायीं
है विशाल भारद्वाज ने.




इसके साथ ही एक हरयाणवी गीत का आनंद भी ले लीजिए शायद आपको
पसंद आये.




गीत के बोल:


बादल उठ्या री सखी
मेरे सासरे की ओढ़ पानी
बरसेगा सिरतोर
बादल उठ्या

मोटी मोटी बूँद भटा-भट
कुटण लगे गोड़े से
पाणी के बहाव के आगे
बह ग्ये नल के तोड़े से
उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम
हवा के चकोड़े से
जंग्ड़्या के के वाड़ मूंदे
खुल ग्ये ओड़े सोड़े से
किसा पुल टूट्या री सखी
बह ग्ये नदी नाले जोड़ पाणी
बरसेगा सिरतोर

बादल उठ्या री सखी
………………………………………………………
Badal Uthya-Matru ki bijli ka mandola 2012

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Feb 23, 2015

खामखां-मटरू की बजली का मंडोला २०१३

आपको आज गुलाबी भैंस वाली फिल्म से एक गीत सुनवाते हैं. पंकज
कपूर कुछ अनोखी हास्य कड़ियों का हिस्सा रहे हैं छोटे और बड़े परदे
पर. उनमें से एक है-“मटरू की बजली का मंडोला” क्या पता विराट का
मन भी इसी फिल्म को देखने के बाद डोला हो ?

खैर, गीत सुना जाए जो उर्दू और हिंदी का मिक्सचर है. जी हाँ वैसा ही
उसल मिसाल वाला. मोटर साईकिल की सवारी का आनंद लेते नायक
नायिका. गीत में ज्यादा दिमाग खपाने की आवश्यकता नहीं है, बस
देखिये, सुनिए और आनंद लीजिए. गीत की अंतिम पंक्तियों में प्रमुख देवी
देवताओं को याद करते हुए गीतकार हरियाणा और दूध-दही याद दिला
रहा है.






गीत के बोल:

हलकी हलकी आहें भरना
तकिये में सर दे के धीमे धीमे
सरगोशी में बातें करना
पागलपन है ऐसे तुमपे मरना
उबला उबला क्यूँ लगता है?
ये बदन, ये जलन, तो खामखां नहीं, खामखां नहीं

ये खलिश जो है, वो खामखां नहीं
हाँ तपिश तो है, पर खामखां नहीं
हाँ तपिश तो है, पर खामखां नहीं

जो नहीं किया, कर के देखना
सांस रोक के, मर के देखना
ये बेवजह, बेसबब, खामखां नहीं,
ये खामखां नहीं
ये खामखां नहीं
ये खामखां नहीं

सारी सारी रात का जगना
खिड़की पे सर रखके उंघते रहना
उम्मीदों का जलना-बुझना
पागलपन है ऐसे तुमपे मरना
खाली खाली दो आँखों में
ये नमक, ये चमक, तो खामखां नहीं, खामखां नहीं

फ़िक्र रहती है, जो खामखां नहीं
ज़िक्र रहता है, जो खामखां नहीं
अश्क आँखों में, भर के देखना
आइना कभी, डर के देखना
ये बेवजह, बेसबब, खामखां नहीं
दीवानगी सही, ये खामखां नहीं
हाँ जुनूं तो है, पर खामखां नहीं

सदा भवानी ताही जय हो प्यारा
गौरी पुत्र गणेश
पांच देव रक्षा करे हो प्यारा
ब्रह्मा विष्णु महेश
कसम यो देस मेरा से हरया भरया हरियाणा
सीधे साधे लोग अड़े के, दूध दही का खाना
बोलो राम राम, राम राम, राम राम, राम राम
राम राम, राम राम, राम राम
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Khamkhaan-Matru ki bjil ka mandola 2013

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