Showing posts with label Rekha Bhardwaj. Show all posts
Showing posts with label Rekha Bhardwaj. Show all posts

Mar 6, 2017

नमक इश्क का-ओंकारा २००६

आपको ओंकारा फिल्म से केवल एक गीत सुनवा के रह गए
बीडी जलाइले. फिल्म के और गीत भी सुनने लायक हैं. इस
फिल्म में लंगड़ा त्यागी की भूमिका के लिए सैफ अली खान
की भूरि भूरि प्रशंसा हुई थी.

आज सुनते हैं एक गीत रेखा भारद्वाज का गाया हुआ. इसे लिखा
है गुलज़ार ने और इसकी तर्ज़ बनाई विशाल भारद्वाज ने. नमक
भी रोमांटिक हो सकता है, कितना ये जानिये इस गीत को सुनने
के बाद. गीत फिल्माया गया है बिपाशा पर.



गीत के बोल:

जबां पे लागा लागा
जबां पे लागा रे  लागा रे हाय
नमक इश्क का
जबां पे लागा लागा रे
जबां पे लागा रे  लागा रे
हाय रे नमक इश्क का
तेरे इश्क का

बलम से माँगा माँगा रे 
बलम से माँगा रे
बलम से माँगा माँगा रे 
नमक इश्क का

हाय रे तेरे इश्क का
जबां पे लागा रे  लागा रे
हाय रे नमक इश्क का
तेरे इश्क का

सभी छेड़े हैं मुझको  सिपहिये बाँके छमिये
सभी छेड़े हैं मुझको  सिपहिये बाँके छमिये
उधारी देने लगे हैं  गली के बनिए बनिए
कोई तो कौड़ी तो भी लुटा दे 
कौई तो कौड़ी
अजी थोड़ी थोड़ी शहद चटा दे  थोड़ी थोड़ी
तेज़ था तड़का का करूँ  सी सी करती मैं मरूँ
तेज़ था तड़का का करूँ  सी सी करती मैं मरूँ
रात भर छाना रे
रात भर छाना  रात भर छाना छाना रे
नमक इश्क का

जबां पे लागा लागा रे
जबां पे लागा रे  लागा रे
हाय रे नमक इश्क का
तेरे इश्क का

ऐसी भूख लगी जालिम के
के बाँसुरी जैसी बाजी मैं
अरे जो भी कहा उस चन्द्रभान ने
फट से हो गयी राजी मैं
बाँसुरी जैसी बाजी मैं
फट से हो गयी राजी मैं
हाय कभी अखियों से पीना  कभी होठों से पीना
कभी अच्छा लगे मरना  कभी मुश्किल लगे जीना
करवा करवट प्यास लगी थी
करवा करवट
अजी बलम की आहट पास लगी थी
बलम की आहट
तेज़ था छौंका का कारूं
सी सी करती मैं मरूं
तेज़ था छौंका का कारूं
सी सी करती मैं मरूं

डली भर डाला जी डाला जी डाला जी
डाला जी डाला जी डाला जी रे
डली भर डाला  डली भर डाला डाला रे
नमक इश्क का
हाय रे तेरे इश्क का
……………………………………………………
Namak ishq ka-Omkara 2006

Artist: Bipasha Basu

Read more...

Feb 20, 2017

चदरिया झीनी रे झीनी…जुदाई-बदलापुर २०१४

बदलापुर से एक गीत आपने सुन लिया है. दूसरा गीत आपको
सुनवाते हैं जिसे डिशें विजन संग प्रिया पांचाल ने लिखा है.
प्रिय पांचाल शादी के बाद प्रिय सरैया कहलाई जाने लगी हैं.
संगीत तैयार किया है सचिन जिगर की जोड़ी ने.

गीत गा रहे हैं रेखा भारद्वाज और अरिजीत सिंह. आज के दौर
में इतने सारे गायक कलाकार उपलब्ध हैं कि युगल गीत भी
अनेक कोम्बिनेशन में सुनाई देते हैं. अलका याग्निक और
कुमार सानू वाला ज़माना बीत गया है. उसके बाद कुछ समय
तक हमें सोनू निगम-सुनिधि चौहान के युगल गीत काफी तादाद
में सुनाई दिए.



गीत के बोल:

रांझण ढूँढण मैं चलेया
रांझण मिलेया नाये
जिगरा विचों अगन लगा के रब्बा
लकीरां विच लिख दी जुदाई

खो गया  गुम हो गया
वक्त से चुराया था जो
अपना बनाया था
हो तेरा  वो मेरा
साथ निभाया था जो
अपना बनाया था

चदरिया झीनी रे झीनी
चदरिया झीनी रे झीनी
आँखें भीनी ये  भीनी ये  भीनी
यादें झीनी रे  झीनी रे  झीनी
चदरिया झीनी रे झीनी
चदरिया झीनी रे झीनी
आँखें भीनी ये  भीनी ये  भीनी
यादें झीनी रे  झीनी रे  झीनी

ऐसा भी क्या मिलना  साथ हो के तन्हा
ऐसी क्यूँ सज़ा हमने है पाई  रांझणा वे
फिर से मुझे जीना  तुझपे है मरना
फिर से दिल ने दी है ये दुहाई  साजना वे
लकीरों पे लिख दी क्यूँ जुदाई
हो गैर सा हुआ खुद से भी  ना कोई मेरा
दर्द से कर ले चल यारी  दिल ये कह रहा
खोलूँ जो बाहें  बस गम ये सिमट रहे हैं
आँखों के आगे लम्हें ये क्यूँ घट रहे हैं
जाने कैसे कोई सहता जुदाईयाँ
चदरिया झीनी रे झीनी
चदरिया झीनी रे झीनी
आँखें भीनी ये  भीनी ये  भीनी
यादें झीनी रे  झीनी रे  झीनी
चदरिया झीनी रे झीनी
चदरिया झीनी रे झीनी
हे आँखें भीनी ये  भीनी ये  भीनी
यादें झीनी रे  झीनी रे  झीनी

रांझण ढूँढण मैं चलेया
रांझण मिलेया नाये
जिगरा विचों अगन लगा के रब्बा
लकीरां विच लिख दी जुदाई
................................................................
Chadariya jheeni re jheeni-Badlapur 2014

Artists: Varun Dhawan, Yami Gautam

Read more...

Dec 2, 2016

हमरी अटरिया पे-डेढ़ इश्किया २०१४

डेढ़ इश्किया से आपने पहले एक गीत सुना. अब दूसरा सुनते
हैं. कुछ पारंपरिक गीतों से इसके बोल हैं और धुन भी तकरीबन
वैसी ही है. इसे रेखा भरद्वाज ने गाया है.

अटरिया शब्द से एक पुराना गीत सहसा याद हो आता है-मोरी
अटरिया पे कागा बोले कोई आ रहा है. उसके अलावा अटरिया
शब्द वाले दो गीत और याद आते हैं-आया आया अटरिया पे
कोई चोर-मेरा गांव मेरा देश से साथ ही मिथुन की फिल्म वाला
चढ गया ऊपर रे अटरिया पे लोटन कबूतर रे. गौरतलब है ये
शब्द लोक गीतों और पारंपरिक गीतों के लिए एकदम फिट है.
किसी डिस्को खिसको गीत में ये अजीब लगेगा शायद.

गीत गुलज़ार ने लिखा है और संगीत है विशाल भारद्वाज का.




गीत के बोल:

सज के सजाये बैठी साज़िंदे बुलाये बैठी
कहाँ गुम हुआ अंजाना
आले आले दीये भी जलाए रे जलाए
ना अटरिया पे आया परवाना

कौन सा तन हाय बरमाये रे
हमरी अटरिया पे
आजा रे सांवरिया
देखा-देखी तनिक होई जाए

किवड़िया से लग के पिया करे झांका-झांकी
बहुत कौड़ी फेंके पिया उड़ावे जहां की
कसम देवे जां की
आ जा गिलौरी खिलाई दूँ किमामी
लाली पे लाली तनिक हुई जाये
हमरी अटरिया पे

पड़ोसन के घरवा जईहो
जईहो ना सांवरिया
सौतन से बोली मोरी काटे जहरिया
जहरी नजरिया
आजा अटरिया पे पिलाई दूँ अंगूरी
जोरा-जोरी तनिक हुई जाये
हमरी अटरिया पे

सजने लगाये बैठी
चुटिया घुमाये बैठी
कहाँ गुम हुआ अनजाना
कौन सा तन हाये बरमाये रे
.................................................................................
Hamri atariya pe-Dekh Ishkiya 2014

Read more...

Jul 19, 2015

बड़ी धीरे जली-इश्किया २०१०

आज आपको इश्किया फिल्म का एक गीत सुनवा रहे हैं
जो गुलज़ार का लिखा हुआ है. गुलज़ार ऑस्कर पुरस्कार
प्राप्त करने के बाद इंटरनैशनली सर्टिफाइड गीतकार हो गए
हैं. वो एक ऐसी कतार में शामिल हो गए हैं जिसमें पहुँच
पाना आम गीतकार के लिए संभव नहीं है. गुलज़ार की
खूबी रही है-वे लगातार सक्रिय रहे हैं.

आज फिल्म उद्योगमें दो व्यक्ति जवानों से भी ज्यादा सक्रिय
दिखाई देते हैंएक अमिताभ बच्चन तो दूसरे गुलज़ार.इनके
अलावा भीफिल्म उद्योग में कई शख्सियतें हैं जो अपनी बढती
उम्रके बावजूद जवानों से भी ज्यादा जोश और जूनून के साथ
काम करते हैं. समय समय पर उन शख्सियतों का जिक्र
हम करते रहेंगे अपने ब्लॉग पर.

इस गीत के बोल लाजवाब हैं. इसका मुखडा सुन कर के
पहले पहल एक मसखरे ने पूछा कहा था-बड़ी धीरे जली !
हमने भी उससे सारी इधर उधर की संभावनाओं को मन
में नकारते हुए वापस पूछा-क्या जली–बीडी ?

गीत में कुछ शब्द सामान्य चलन वाले नहीं हैं, आपको
शब्दकोष उठा कर देखना पढ़ सकता है समझने के लिए.
गीत रेखा भारद्वाज का गाया हुआ है और इसका संगीत
तैयार किया है विशाल भारद्वाज ने.



गीत के बोल:

बड़ी धीरे जली रैना, धुआं धुआं नैना
रातों से हौले हौले, खोली है किनारी
अँखियों ने तागा तागा भोर उतारी
खारी अँखियों से धुआं जाए ना

पलकों पे सपनों की अग्नि उठाये
हमने दो अँखियों के आलने जलाये
दर्द ने कभी लोरियां सुनाई तो
दर्द ने कभी नींद से जगाया रे
बैरी अँखियों से ना जाए धुआं जाए ना
बड़ी धीरे जली

जलते चरागों में अब नींद ना आये
फूंकों से हमने सब तारे बुझाए
जाने क्या खली रात की पिटारी से
खोले तो कोई भोर की किनारी रे
सूजी अँखियों से ना जाए धुआं जाए ना

बड़ी धीरे जली
............................................................................
Badi dheere jail-Ishqiya 2010

Artist: Vidya Balan

Read more...

Mar 17, 2015

कबीरा मान जा-ये जवानी है दीवानी २०१३

हिंदी फिल्मों में ऐसे कई वाकिये हैं जब कोई फिल्म का
नाम किसी गीत के मुखड़े से लिया गया हो. ऐसा ही एक
ना है-ये जवानी है दीवानी. ये शब्द आपको एक पुरानी
सत्तर के दशक की फिल्म –जवानी दीवानी के शीर्षक गीत
में मिले होंगे जिसे किशोर कुमार ने गाया था.

आइये नयी फिल्म से गीत सुनें जिसे रणबीर कपूर और
दीपिका पादुकोण पर फिल्माया गया है. इसे रेखा भारद्वाज
और तोची रैना ने गाया है. गीत अमिताभ भट्टाचार्य का है
और संगीत प्रीतम का. वैसे गीतकारों ने भी क्या खूब लिखा
है-जवानी दीवानी. जी हाँ जवानी दीवानी ही होती है. एक
जूनून जैसा होता है जो धीरे धीरे परिपक्वता में परिवर्तित
होने लगता है अधेढ़ उम्र आने तक.

तोची रैना ने देर से कदम रखा है फिल्म संगीत क्षेत्र में. खैर
वो कहावत है ना-देर आये दुरुस्त आये. उनकी आवाज़ बाकी
जनता से थोड़ी अलग है.



गीत के बोल:

कैसी तेरी खुदगर्ज़ी
ना धुप चुने ना छांव
कैसी तेरी खुदगर्ज़ी
किसी ठौर टिके ना पाँव

बन लिया अपना पैगम्बर
तर लिया तू सात समंदर
फिर भी सुखा मन के अंदर
क्यूँ रह गया

रे कबीरा मान जा
रे फ़कीरा मान जा
आ जा तुझको पुकारे तेरी परछाईयाँ

रे कबीरा मान जा
रे फ़कीरा मान जा
कैसा तू है निर्मोही, कैसा हरजाईया

टूटी चारपाई वही, ठंडी पुरवाई रस्ता देखे
दूधों की मलाई वही, मिट्टी की सुराही रस्ता देखे
टूटी चारपाई वही, ठंडी पुरवाई रस्ता देखे
दूधों की मलाई वही, मिट्टी की सुराही रस्ता देखे

कैसी तेरी खुदगर्ज़ी
लब नमक रमे ना मिसरी
कैसी तेरी खुदगर्ज़ी
तुझे प्रीत पुरानी बिसरी
मस्त मौला, मस्त कलंदर
तू हवा का एक बवंडर
बुझके यूँ अन्दर ही अन्दर
क्यूँ रह गया
रे कबीरा मान जा
……………………………………….
Kabeera-Ye jawani hai deewani 2013

Read more...

Mar 4, 2015

बादल उठ्या- मटरू की बिजली का मंडोला २०१२

दे भटा भट-ये शब्द सुनते थे जब किरकिट खेला करते
थे, गेंदे कम बचती थी और रन ज्यादा बनाने होते थे
तब कप्तान कुछ ऐसे जुमले सुनाया करता था. फिर कभी
लड़ाई झगडा होता तब भी ये शब्द सुनाई देते. इनका
किसी गीत में भी अभिनव प्रयोग हो सकता है ये बात
मुझे इस गीत को सुनने के बाद ही समझ आई. गीत
है मटरू की बिजली का मंडोला से, जिसे स्वर दिया है
रेखा भरद्वाज ने. गुलज़ार के बोलों के लिए धुन बनायीं
है विशाल भारद्वाज ने.




इसके साथ ही एक हरयाणवी गीत का आनंद भी ले लीजिए शायद आपको
पसंद आये.




गीत के बोल:


बादल उठ्या री सखी
मेरे सासरे की ओढ़ पानी
बरसेगा सिरतोर
बादल उठ्या

मोटी मोटी बूँद भटा-भट
कुटण लगे गोड़े से
पाणी के बहाव के आगे
बह ग्ये नल के तोड़े से
उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम
हवा के चकोड़े से
जंग्ड़्या के के वाड़ मूंदे
खुल ग्ये ओड़े सोड़े से
किसा पुल टूट्या री सखी
बह ग्ये नदी नाले जोड़ पाणी
बरसेगा सिरतोर

बादल उठ्या री सखी
………………………………………………………
Badal Uthya-Matru ki bijli ka mandola 2012

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP