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Sep 2, 2017

ऐ क़ातिब-ए-तक़दीर-माय सिस्टर १९४४

सन १९४४ की फिल्म माय सिस्टर से एक गीत सुनते हैं सहगल
की आवाज़ में. पंडित भूषण के बोल हैं और पंकज मालिक का
संगीत. ये गीत पंकज मालिक की आवाज़ में भी उपलब्ध है.

वर्ज़न सोंग्स में पंकज मालिक और सहगल के गाये गीत काफी
लोकप्रिय हुए और आज भी सुने जाते हैं.



गीत के बोल:

ऐ क़ातिब-ए-तक़दीर मुझे इतना बता दे
ऐ क़ातिब-ए-तक़दीर मुझे इतना बता दे
क्यों मुझसे ख़फ़ा है तू, क्या मैंने किया है

औरों को खुशी मुझको फ़कत दर्द-ओ-रंज-ओ-ग़म
दुनिया को हँसी और मुझे रोना दिया है
क्या मैंने किया है क्या मैंने किया है
क्यों मुझसे ख़फ़ा है तू, क्या मैंने किया है

हिस्से में सबके आई हैं
हिस्से में सबके आई हैं रँगीन बहारें
बद-फ़क़्तियाँ लेकिन मुझे शीशे में उतारें
पीते हैं
पीते हैं रोग रोज़-ओ-शब मुज़्ज़र्रतों की मय
मैं हूँ के सता खून-ए-जिगर मैंने पिया है
क्या मैंने पिया है क्या मैंने पिया है

था जिनके दुमक दम से ये आबाद आशियां
हो चहचहाती
हो चहचहाती बुलबुलें जाने गई कहाँ
जुगनू की चमक है न सितारों की रोशनी
इस घुप अंधेरे में है मेरी जान पर बनी
क्या थी क्या थी
क्या थी बता के जिसकी सज़ा तूने मुझको दी
क्या था
क्या था गुनह के जिसका बदला मुझसे लिया है

क्या मैंने किया है
क्या मैंने किया है
क्यों मुझसे ख़फ़ा है तू, क्या मैंने किया है
...........................................................
Ae katib-e-taqdeer mujhe itna bata-My sister 1944

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Dec 12, 2014

दो नैना मतवारे तिहारे-माय सिस्टर १९४४

आपको माय सिस्टर फिल्म १९४४ से एक गीत पहले सुनवा चुके हैं.
अब दूसरा गीत भी सुन लीजिए. गीत की पंच लाइन है-"मदभरे 
रसीले निठुर बड़े". कवि के दिमाग में ये कल्पनाएँ अपने आप 
आ जाती हैं या किसी प्रेरणा से आती हैं, इसका जवाब खोजिये.
इससे ज्यादा इस गीत और इसकी गायकी पर बोलना शब्द जाया 
करने वाली बात होगी मेरे लिए. बड़े बड़े संगीत-और-सहगल भक्त 
पहले ही कई लंबे-लंबे निबंध लिख चुके हैं इस गीत पर. अब इस 
आलेख को बड़ा करने के लिए अगर आप सुनना चाहते हैं कि ये 
किसकी कौन से नंबर की फिल्म थी, फिल्म के निर्देशन के वक्त 
निर्देशक ने कान खुजाया था या नहीं, फिल्म के सेट पर निम्बू 
पानी का इंतजाम था या कोल्ड ड्रिंक का, तो आपको ये मज़ा 
किसी और पोस्ट में दिलवा देंगे. फिलहाल तो विवरण पे जाने के 
बजाए गीत का आनंद उठायें. 

आपके पैसे वसूल करवाने के लिए इतना बताये देते हैं कि जो 
मोहतरमा हिल-डुल रही हैं गीत में, उनका नाम है-सुमित्रा देवी.



गीत के बोल: 



दो नैना मतवारे तिहारे
हम पर ज़ुल्म करें

नैनों  में रहें तो सुध बुध खोएं
छिपें तो चैन हरें

दो नैना मतवारे तिहारे
हम पर ज़ुल्म करें


तन तन के चलाये तीर
नस नस में उठाये पीड
मदभरे रसीले निठुर बड़े

दो नैना मतवारे तिहारे
हम पर ज़ुल्म करें
.............................................
Do naina matware tihare-My sister 1944

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Jul 7, 2009

हाय किस बुत की मोहब्बत-माय सिस्टर

सहगल के सभी गीत आज भी संगीतप्रेमियों को
आकर्षित करते हैं। अधिकतर गीतों में दर्द एवं संवेदना
अपनी चरम सीमा पर है। सहगल के गाये सबसे बढ़िया
दर्दीले गीतों में से एक है-हाय किस बुत की मुहब्बत में गिरफ्तार हुए ।
इस गाने की धुन तैयार की है पंकज मलिक ने ।
कोई सुधार की गुंजाईश हो तो कृपया टिप्पणी जोडें ।




गाने के बोल


हाय किस बुत की मुहब्बत में गिरफ्तार हुए
हाय किस बुत की मुहब्बत में गिरफ्तार हुए

ज़िन्दगी कल्प हुई जीने से बेज़ार हुए

हमने पाया तो ये पाया है वफाओं का सिला
हमने पाया तो ये पाया है वफाओं का सिला

मुफ्त बदनाम हुए बेबस-ओ-लाचार हुए

किसलिए दौलत-ऐ-दिल उस पे लुटा दी हमने
आप अपने पे ही मायस-ऐ-गुंजार हुए

घुट के मर जायें येही दिल में है हसरत बाकी
घुट के मर जायें येही दिल में है हसरत बाकी

मुद्दतें गुजरी है बेयार-ओ-मददगार हुए
मुद्दतें गुजरी है बेयार-ओ-मददगार हुए

हाय किस बुत की मुहब्बत में गिरफ्तार हुए

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