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Aug 24, 2018

रैन गई अब हुआ सवेरा-भक्त सूरदास १९४२

के एल सहगल का गाया एक गीत सुनते हैं फिल्म
भक्त सूरदास से. हिंदी फिल्म संगीत और गैर फ़िल्मी
संगीत की चर्चा सहगल के बिना अधूरी ही रहेगी. ये
ऐसी आवाज़ है जो जड़ से जुडी आवाज़ है.

गीत दीनानाथ मधोक का है और संगीत ज्ञान दत्त का.
फिल्म भक्त सूरदास के गीत काफी लोकप्रिय गीत कहे
जाते हैं. हर नयी पीढ़ी में आपको सहगल की आवाज़
के मुरीद मिल जायेंगे.



गीत के बोल:

रैन गई अब हुआ सवेरा
रैन गई अब हुआ सवेरा
याद तेरी ने घेरा है
रैन गई अब हुआ सवेरा
याद तेरी ने घेरा है
रैन गई अब हुआ सवेरा

तुमसे नैन लगा के साजन
तुमसे नैन लगा के साजन
दुनिया से मुँह फेरा है

रैन गई अब हुआ सवेरा

तुम तो दिल की धड़कन बन के
दिल मे आ के बैठ गये
तुम तो दिल की धड़कन बन के
दिल मे आ के बैठ गये
इस घर को जो खो बैठा है
इस घर को जो खो बैठा है
उसका कौन बसेरा है

रैन गई अब हुआ सवेरा

मन के पँछी सोच समझ ले
वो जादू की नगरी है
मन के पँछी सोच समझ ले
वो जादू की नगरी है
सम्भल सम्भल कर घर आना
नज़रों ने जाल बखेरा है

रैन गई अब हुआ सवेरा
याद तेरी ने घेरा है
रैन गई अब हुआ सवेरा
…………………………………………………
Rain gayi ab hua savera-Bhakt Surdas 1942

Artist: KL Saigal

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Apr 13, 2018

लाई हयात आये क़ज़ा-सहगल गैर फ़िल्मी गीत

शेख इब्राहिम ज़ौक की रचना सुनते हैं के एल सहगल
की आवाज़ में. ज़ौक और मिर्ज़ा ग़ालिब समकालीन
थे.

इस रचना को कई कलाकारों ने अपने अपने अंदाज़
में गाया है. इसके अलावा शायद बेगम अख्तर वाला
वर्ज़न काफी लोकप्रिय है.




गीत के बोल:

लाई हयात आये क़ज़ा ले चली चले
लाई हयात आये क़ज़ा ले चली चले
अपनी खुशी न आये ना
अपनी खुशी न आये ना अपनी खुशी चले हाँ
अपनी खुशी न आये न अपनी खुशी चले

बेहतर तो है यही के न दुनिया से दिल लगे
बेहतर तो है यही के न दुनिया से दिल लगे
पर क्या करें जो काम ना
पर क्या करें जो काम ना बेदिल्लगी चले
हाँ पर क्या करें जो काम न बेदिल्लगी चले

दुनिया ने किस का राह-ए-फ़नां
दुनिया ने किस का राह-ए-फ़नां में दिया है साथ
दुनिया ने किस का राह-ए-फ़नां में दिया है साथ
तुम भी चले चलो यूँ ही जब तक चली चले
तुम भी चले चलो यूँ ही जब तक चली चले

जा के हवा-ए-शौक में हैं
जा के हवा-ए-शौक में हैं इस चमन से 'ज़ौक़'
जा के हवा-ए-शौक में हैं इस चमन से 'ज़ौक़'
अपनी बला से बाद-ए-सबा
अपनी बला से बाद-ए-सबा अब कभी चले
अपनी बला से बाद-ए-सबा अब कभी चले
लायी हयात आये क़ज़ा ले चली चले
....................................................
Laayi hayat aaye qaza-KL Saigal Non film song

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Oct 3, 2017

इधर फिर भी आना-के एल सहगल

काफी दिन हुए सहगल का कोई गीत सुने. आज सुनते
हैं एक गीत. इसे लिखा है आरजू लखनवी ने और धुन
किसी संगीतकार ने तैयार की है जिसका नाम आपको
खोजना है.




गीत के बोल:

इधर फिर भी आना उधर जाने वाले
अरे जी को बेचैन कर जाने वाले

छुरी फेर देना तो अच्छा था इस से
लगावट से मुँह फेर कर जाने वाले

गला काटना पहले फिर हाथ मलना
बड़े ढीठ निकले मुकर जाने वाले

ये है प्रीत की रीत बदलो न इसको
गले पहले मिलते हैं घर जाने वाले

कहीं आरज़ू क्यों दिखा दे न इक दिन
कि यूँ देखो मरते हैं मर जाने वाले
.................................................
Idhar phir bhi aana-KL Saigal Non film song

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Sep 2, 2017

ऐ क़ातिब-ए-तक़दीर-माय सिस्टर १९४४

सन १९४४ की फिल्म माय सिस्टर से एक गीत सुनते हैं सहगल
की आवाज़ में. पंडित भूषण के बोल हैं और पंकज मालिक का
संगीत. ये गीत पंकज मालिक की आवाज़ में भी उपलब्ध है.

वर्ज़न सोंग्स में पंकज मालिक और सहगल के गाये गीत काफी
लोकप्रिय हुए और आज भी सुने जाते हैं.



गीत के बोल:

ऐ क़ातिब-ए-तक़दीर मुझे इतना बता दे
ऐ क़ातिब-ए-तक़दीर मुझे इतना बता दे
क्यों मुझसे ख़फ़ा है तू, क्या मैंने किया है

औरों को खुशी मुझको फ़कत दर्द-ओ-रंज-ओ-ग़म
दुनिया को हँसी और मुझे रोना दिया है
क्या मैंने किया है क्या मैंने किया है
क्यों मुझसे ख़फ़ा है तू, क्या मैंने किया है

हिस्से में सबके आई हैं
हिस्से में सबके आई हैं रँगीन बहारें
बद-फ़क़्तियाँ लेकिन मुझे शीशे में उतारें
पीते हैं
पीते हैं रोग रोज़-ओ-शब मुज़्ज़र्रतों की मय
मैं हूँ के सता खून-ए-जिगर मैंने पिया है
क्या मैंने पिया है क्या मैंने पिया है

था जिनके दुमक दम से ये आबाद आशियां
हो चहचहाती
हो चहचहाती बुलबुलें जाने गई कहाँ
जुगनू की चमक है न सितारों की रोशनी
इस घुप अंधेरे में है मेरी जान पर बनी
क्या थी क्या थी
क्या थी बता के जिसकी सज़ा तूने मुझको दी
क्या था
क्या था गुनह के जिसका बदला मुझसे लिया है

क्या मैंने किया है
क्या मैंने किया है
क्यों मुझसे ख़फ़ा है तू, क्या मैंने किया है
...........................................................
Ae katib-e-taqdeer mujhe itna bata-My sister 1944

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Aug 22, 2017

सांवरिया प्रेम की बंसी सुना-स्ट्रीट सिंगर १९३८

सांवरिया को समर्पित एक गीत सुनते हैं सन १९३८ की फिल्म
स्ट्रीट सिंगर से जो कानन देवी और सहगल का गाया हुआ है.
मुंशी आरजू उर्फ आरजू लखनवी ने इसके बोल लिखे हैं और
संगीत है राय चंद्र बोराल का.




गीत के बोल:

सांवरिया प्रेम की बंसी सुना
सांवरिया प्रेम की बंसी सुना
पतली-पतली ज़रा सी बंसी
बड़े-बड़े गुन गाये
सात सुरों के फेरबदल से
सारे राग बजाये
सांवरिया प्रेम की बंसी सुना
सांवरिया प्रेम की बंसी सुना

निर्मोही को रूप दिखाये
मोही को तरसाये
मुँह पर डाल के काली कमलिया
दिन को रात बनाये
सांवरिया प्रेम की बंसी सुना
सांवरिया प्रेम की बंसी सुना

आप तो प्रीत की रीत न जाने
और को प्रीत सिखाये
प्यार में मारे बान नजर का
आँख का चक्र घुमाये

मन के ध्यान से राधा रानी
लम्बी दौड़ लगाये
मन के ध्यान से राधा रानी
लम्बी दौड़ लगाये
मथुरा से
मथुरा से गोकुल तक जाये
दर्शन कर लौट आये
मथुरा से गोकुल तक जाये
दर्शन कर लौट आये
लौट आये फिर जाये
लौट आये फिर जाये
लौट आये फिर जाये
बंसी सुनाये
बंसी सुनाये
बंसी सुनाये
………………………………………………………………
Sanwariya prem ki bansi suna-Street singer 1938

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Aug 19, 2017

मधुकर श्याम हमारे चोर-भक्त सूरदास १९४२

फिल्म भक्त सूरदास से एक गीत सुनते हैं सहगल की आवाज़ में.
दीना नाथ मधोक गीतकार हैं और धुन बनाई है ज्ञान दत्त ने.

इस जगत का सबसे बड़ा चोर और सबसे बड़ा रसिया जिसे कहते
हैं और जिसे माखनचोर, नंदकिशोर इत्यादि कई नामों से पुकारा
जाता है, कृष्ण के फ़िल्मी भजन सबसे ज्यादा मिलेंगे आपको.




गीत के बोल:

मधुकर श्याम हमारे चोर
मधुकर श्याम हमारे चोर
मधुकर श्याम हमारे चोर
मधुकर श्याम हमारे चोर
मन हर लीनो माधुरी मूरत
मन हर लीनो माधुरी मूरत
निरख नैन की कोर
श्याम हमारे चोर
श्याम हमारे चोर
मधुकर श्याम हमारे चोर

सिर पे जाके मुकट सुहाये
सिर पे जाके मुकट सुहाये
माथे तिलक नैन कजरारे
माथे तिलक नैन कजरारे
मुख सुंदर ज्यूँ भोर
श्याम हमारे चोर
चोर
श्याम हमारे चोर
मधुकर श्याम हमारे चोर

सूरदास के चोर कन्हैया
मनमोहन मुरली के बजैया
सूरदास के चोर कन्हैया
मनमोहन मुरली के बजैया
मनमोहन मुरली के बजैया
नटखट नन्दकिशोर
चोर
श्याम हमारे चोर
मधुकर श्याम हमारे चोर
श्याम हमारे चोर
श्याम हमारे चोर
श्याम हमारे चोर
मधुकर श्याम हमारे चोर
........................................................................
Madhukar Shyam hamare-Bhakt Surdas 1942

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Aug 18, 2017

ऐ दिल-ए-बेकरार झूम-शाहजहाँ १९४६

गोल्डन विंटेज गीत सुनते हैं फिल्म शाहजहाँ से के एल सहगल
का गाया हुआ. इसे मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखा है और इसकी
धुन तैयार की है नौशाद ने.

४० के दशक में अपने कैरियर का आगाज़ करने वाले संगीतकारों
में नौशाद उन गिनती के शख्सों में से एक हैं जिन्होंने ३-४ पीढ़ी
के गायकों के साथ काम किया है. सन २००५ की ताजमहल फिल्म
उनकी अंतिम फिल्म है संगीतकार के रूप में.



गीत के बोल:

ए दिल-ए-बेकरार झूम
ए दिल-ए-बेकरार झूम
ए दिल-ए-बेकरार झूम
ए दिल-ए-बेकरार झूम

अब्रे-बहार आ गया
दौर-ए-खिजां चला गया
इश्क मुराद पा गया
हुस्न की मच रही है धूम

ए दिल-ए-बेकरार झूम
ए दिल-ए-बेकरार झूम

छिटकी हुई है चांदनी
मस्ती में है कली कली
झूम रही है जिंदगी
तू भी हज़ार बार झूम

ए दिल-ए-बेकरार झूम

तारे हैं माहताब है
हुस्न है और शबाब है
जिंदगी कामयाब है
आरजुओं का है हुजूम

ए दिल-ए-बेकरार झूम
ए दिल-ए-बेकरार झूम

तेरा नशा तेरा खुमार
अब है बहार ही बहार
पी के खुशी में बार बार
पीर-ए-जवां के हाथ चूम

ए दिल-ए-बेकरार झूम
ए दिल-ए-बेकरार झूम
ए दिल-ए-बेकरार झूम
ए दिल-ए-बेकरार झूम
……………………………………………
Ae dil-e-beqarar jhoom-Shahjehan 1946

Artist: KL Saigal

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Jul 24, 2017

गमज़ा पैकान हुआ जाता है-के एल सहगल ग़ज़ल

कुन्दल्लाल सहगल का गाया एक गैर फ़िल्मी गीत सुनते
हैं जिसे बेदम वारसी ने लिखा है. ये एक ग़ज़ल है.



गीत के बोल:

गमज़ा पैकान हुआ जाता है
हाय गमज़ा पैकान हुआ जाता है
दिल का अरमान हुआ जाता है
दिल का अरमान हुआ जाता है

देख कर उलझी हुई ज़ुल्फ़ उनकी
दिल परेशान हुआ जाता है
हाय दिल परेशान हुआ जाता है

तेरी वह्शत की बदौलत ए दिल हाँ
तेरी वह्शत की बदौलत ए दिल
घर बियाबान हुआ जाता है
घर बियाबान हुआ जाता है

साज़-ओ-सामान का न होना ही मुझे
साज़-ओ-सामान का न होना ही मुझे
साज़-ओ-सामान हुआ जाता है
हाय साज़-ओ-सामान हुआ जाता है

दिल से जाते हैं मेरे सब्र-ओ-क़रार
दिल से जाते हैं मेरे सब्र-ओ-क़रार
दिल से जाते हैं मेरे सब्र-ओ-क़रार
घर ये वीरान हुआ जाता है
घर ये वीरान हुआ जाता है

दिल की रग रग में समा कर बेदम
दिल की रग रग में समा कर बेदम
दर्द तो जान हुआ जाता है
दर्द तो जान हुआ जाता है
गमज़ा पैकान हुआ जा
..........................................................
Gamza paikan hua jaata hai-KL Saigal

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Jul 15, 2017

एक बंगला बने न्यारा-प्रेसिडेंट १९३७

आज सुनते हैं सन १९३७ की फिल्म प्रेसिडेंट से सहगल
का गाया अमर गीत. फिल्म में के. एल. सहगल और
लीला देसाई और कमलेश कुमारी प्रमुख कलाकार हैं.
गीत केदार शर्मा का है और संगीत आर सी बोराल का.

ये उस ज़माने का गीत है जब बंगला परिभाषा अनुसार
वाकई बंगला हुआ करता था. आजकल बिल्डर लोग एक
कमरे के मकान को भी ‘बैंगलो’ कहा करते हैं. समय के
साथ चीज़ें कितनी बदल जाती हैं.




गीत के बोल:

एक बँगला बने न्यारा
एक बँगला बने न्यारा
रहे कुनबा जिस में सारा
एक बँगला बने न्यारा
एक बँगला बने न्यारा

सोने का बँगला चंदन का जँगला
सोने का बँगला चंदन का जँगला
विश्वकर्मा के द्वारा
विश्वकर्मा के द्वारा
सोने का बँगला चंदन का जँगला
विश्वकर्मा के द्वारा
अति सुन्दर प्यारा प्यारा
एक बँगला बने न्यारा
एक बँगला बने न्यारा

इतना ऊँचा बँगला हो
ये मानो गगन का तारा
इतना ऊँचा बँगला हो
ये मानो गगन का तारा
मानो गगन का तारा
मानो गगन का तारा
जिस पे चढ़ के इंद्रधनुष पर
झूला झूले चाँद हमारा
जिस पे चढ़ के इंद्रधनुष पर
झूला झूले चाँद हमारा
भंडार होये लक्ष्मी के हाथों में सारा
भंडार होये लक्ष्मी के हाथों में सारा
पाए अब जी भर के सुख जिसने बिपत उठाई
पाए अब जी भर के सुख जिसने बिपत उठाई
……………………………………………….
Ek bangle bane nyara-President 1937

Artist: KL Saigal

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May 30, 2017

इब्ने-मरियम हुआ करे-के एल सहगल

मिर्ज़ा ग़ालिब की एक ग़ज़ल सुनते हैं सहगल
की आवाज़ में.




गीत के बोल:

इब्ने-मरियम हुआ करे कोई
इब्ने-मरियम हुआ करे कोई
मेरे दुःख की दवा करे कोई
मेरे दुःख की दवा करे

बात पर वां ज़ुबान कटती है
बात पर वां ज़बान कटती है
वो कहें और सुना करे कोई
वो कहें और सुना करे

बक रहा हूँ जुनूँ में क्या क्या कुछ हाय
बक रहा हूँ जुनूँ में क्या-क्या कुछ
कुछ न समझे खुदा करे कोई
कुछ न समझे खुदा करे

न सुनो गर बुरा कहे कोई
न कहो गर बुरा करे कोई
रोक लो गर गलत करे कोई
बख़्श दो गर खता करे कोई
बख़्श दो गर खता करे कोई

कौन है जो नहीं है हाजतमंद
कौन है जो नहीं है हाजतमंद
अरे कौन है जो नहीं है हाजतमंद
हाँ किसकी हाजत रवा करे कोई
किसकी हाजत रवा करे कोई

जब तव्क्कू ही उठ गई ग़ालिब
क्यों किसी का गिला करे कोई
क्यों किसी का गिला करे कोई
…………………………………………..
Ibne-mariyam hua kare koi-KL Saigal Non film

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Apr 7, 2017

चाह बर्बाद करेगी हमें-शाहजहाँ १९४६

बहुत दिन हुए के एल सहगल का कोई गीत सुने. आज सुनते
हैं सन १९४६ की फिल्म शाहजहाँ से एक गीत. नौशाद की धुन
है और मजरूह सुल्तानपुरी के बोल.

सहगल के गीतों वाली ये अंतिम फिल्म थी. गीत सहगल पर
ही फिल्माया गया है. फिल्म का निर्देशन ए आर कारदार ने
किया था.



गीत के बोल:

चाह बर्बाद करेगी हमें मालूम न था
चाह बर्बाद करेगी हमें मालूम न था
रोते रोते ही कटेगी हमें मालूम न था
रोते रोते ही कटेगी हमें मालूम न था

मौत भी हम पे हँसेगी हमें मालूम न था
ज़िन्दगी रोग बनेगी हमें मालूम न था
ज़िन्दगी रोग बनेगी हमें मालूम न था
चाह बर्बाद करेगी हमें मालूम न था

छायी घनघोर घटा चाँद सितारे न रहे
वह उम्मीदें न रहीं अब वह सहारे न रहे
ग़ैर तो ग़ैर ही थे वह भी हमारे न रहे
हमपे ऐसी भी पड़ेगी हमें मालूम न था
हमपे ऐसी भी पड़ेगी हमें मालूम न था
चाह बर्बाद करेगी हमें मालूम न था
……………………………………………………
Chah barbad karegi hamen-Shahjahan 1946

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Mar 5, 2017

किसने ये सब खेल रचाया-धरती माता १९३८

आज के एल सहगल का गाया एक गीत सुनते हैं. फिल्म
का नाम है धरती माता. इस गीत के बोल पंडित सुदर्शन
के हैं और इसकी धुन बनाई है पंकज मलिक ने.

पंकज मालिक की उदारता के कई किस्से हैं. वे स्वयं एक
दमदार गायक थे और उन्होंने अपनी बढ़िया धुनें सहगल
को गाने को दीं. वे स्वयं भी गा के इन गीतों को फिल्म
में रखवा सकते थे.

धरती माता एक सार्थक फिल्म है और सामाजिक मुद्दों
पर बनने वाली प्रभावी फिल्मों में से एक. फिल्म के मुख्य
कलाकार हैं सहगल, जगदीश सेठी और उमा शशि.



गीत के बोल:

किसने
किसने ये सब खेल रचाया
किसने ये सब साज सजाया
अपने आप सभी कुछ कर के
अपना आप छुपाया
अपना आप छुपाया
किसने

कोमल कोमल प्यारे पौधे
कोमल कोमल प्यारे पौधे
धान पान मतवारे पौधे
इनके ऊपर आकर छिड़की
रंग-रूप की माया
इनके ऊपर आकर छिड़की
रंग-रूप की माया
अपने आप सभी कुछ कर के
अपना आप छुपाया
अपना आप छुपाया
किसने

अंधेरे में सोते थे ये
बिलकुल बेसुध होते थे ये
अंधेरे में सोते थे ये
बिलकुल बेसुध होते थे ये
नींद कुरी के मदमातों को
नींद से आन जगाया
नींद कुरी के मदमातों को
नींद से आन जगाया
अपने आप सभी कुछ कर के
अपना आप छुपाया
अपना आप छुपाया
किसने

हरा-भरा गुलज़ार खिला है
सरसों का संसार खिला है
देख देख मन में सुख होवत
अंखियन नूर समाया
देख देख मन में सुख होवत
अंखियन नूर समाया
अपने आप सभी कुछ कर के
अपना आप छुपाया
अपना आप छुपाया
किसने
.........................................
Kisne ye sab khel rachaya-Dharti Mata 1938

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Dec 24, 2016

जीवन बीन मधुर ना बाजे-स्ट्रीट सिंगर १९३८

एक प्राचीन फिल्म का गीत सुनते हैं. पुरानी ब्लेक एंड व्हाईट
फिल्मों के लिए आजकल के बालक ऐसे शब्द ही इस्तेमाल
करते हैं. फिल्म के नाम का अनुवाद है-सड़क गायक. ऐसे
अनुवाद होते रहे तो शब्दों का अर्थ ही कुछ और निकल आएगा.
सड़क कभी गा सकती है भला? वो तो हम समझदार कुछ
ज्यादा ही हैं जो कारपेंटर शब्द का भी सही अर्थ समझ लेते
हैं कि कारपेंटर का कार पोतने से कोई लेना देना नहीं है.

न्यू थियेटर्स के निर्माण और फणि मजूमदार के निर्देशन में बनी
फिल्म सन १९३८ की फिल्म है जिसमें सहगल, कानन देवी,
जगदीश सेठी, विक्रम कपूर, निर्मल और सत्य मुखर्जी के साथ
अन्य कलाकारों ने काम किया.



गीत के बोल:

जीवन बीन मधुर न बाजे
झूठे पड़ गये तार
बिगड़े काठ से काम बने क्या
मेघ बजे न मल्हार
बिगड़े काठ से काम बने क्या
मेघ बजे न मल्हार
पंचम छेड़ो मध्यम बोले
खरज बने गन्धार
पंचम छेड़ो मध्यम बोले
खरज बने गन्धार
बीन के झूठे पड़ गये तार
बीन के झूठे पड़ गये तार
जीवन बीन मधुर न बाजे
झूठे पड़ गये तार
बीन के झूठे पड़ गये तार

इन तारो को खोलो
इन तरभो को फेंको फेंको
इन तारो को खोलो
इन तरभो को फेंको फेंको
इन तारो को खोलो
उत्तम तार नयी तरभे हो
तब हो नया श्रृंगार
उत्तम तार नयी तरभे हो
तब हो नया श्रृंगार
इस तरभे से जो सुर बोले
गूंज उठे संसार
बीन के झूठे पड़ गये तार
जीवन बीन मधुर न बाजे
झूठे पड़ गये तार
बीन के झूठे पड़ गये तार

बजने को है गूंज नगाड़ा
होना है सबसे छुटकारा
बजने को है गूंज नगाड़ा
होना है सबसे छुटकारा

अपना जो है उसे समझ लो
वो भी नहीं हमारा
अपना जो है उसे समझ लो
वो भी नहीं हमारा
.....................................................................................
Jeevan been madhur na baaje-Street singer 1938
 

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Oct 20, 2016

किधर है तू ए मेरी तमन्ना-कुरुक्षेत्र १९४५

विंटेज संगीत की तरफ एक बार फिर लौटते हैं. आज हम सुनेंगे
फिल्म कुरुक्षेत्र का गीत कुंदनलाल सहगल का गाया हुआ.
जमील मजहरी के बोल हैं और पंडित गणपत राव का संगीत.
कुरुक्षेत्र नाम से सन १९३३ में भी एक फिल्म बनी थी.

फिल्म का निर्देशन रामेश्वर शर्मा ने किया था. इस फिल्म में
सहगल के अलावा राधा रानी, शांति, अजीत और आगा नाम
के कलाकार भी मौजूद हैं.





गीत के बोल:

किधर है तू ए मेरी तमन्ना
किधर है तू ए मेरी तमन्ना
चिराग अजिल था मेरे जला जा
मेरे अंधेरे की रोशनी बन
मेरे अंधेरे की रोशनी बन
इस उजड़ी मन्दिर में मेरी आ जा

मेरे गुलिस्ताँ के लाला-ओ-गुल
गये हैं मुद्दतें गुलफ़तना
ओ मेरे गुलशन में मेरी देवी
ओ मेरे गुलशन में मेरी देवी
फिर आ के इक बार मुस्कुरा जा

हवा रुकी है इसे तलक़ दे
बुझे हैं शोले इन्हें लपक दे
खिज़ा पे बेचैनियाँ छिड़क दे
इक आग सी हर तरफ़ लगा जा

किधर है तू ए मेरी तमन्ना
.............................................................
Kidhar hai too ae meri-Kurukshetra 1945

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Sep 25, 2016

तड़पत बीते दिन रैन-चंडीदास १९३४

सन १९३४ की फिल्म का गीत यानि विंटेज फिल्म का गीत. ये
है चंडीदास फिल्म से के एल सहगल का गाया गीत जिसे लिखा
है आगा हश्र कश्मीरी ने और इसके संगीतकार हैं राय चंद्र बोराल.

उल्लेखनीय है हमारी फिल्मों ने बोलना सन १९३३ में किया था.
इस लिहाज से फिल्म संगीत अपनी शैशव अवस्था में ही था. एक
बात ज़रूर है उस समय के संगीतकार पारंपरिक शैली और राग
रागिनियों का प्रयोग ज्यादा करते थे. राय चंद्र बोराल खुद शास्त्रीय
संगीत में पारंगत थे और वे प्रसिद्ध न्यू थिएटर्स नाम की संस्था में
संगीत विभाग संभाला करते थे.

बोराल को फिल्म संगीत का पितृ पुरुष कहा जाता है. अनिल बिश्वास
के शब्दों में वे सिनेमा संगीत के भीष्म पितामह थे. उन्होंने हिंदी
और बंगाली फ़िल्में मिला कर लगभग ७४-७५ फिल्मों में संगीत दिया.
राय चंद्र बोराल को फिल्मों में प्लेबैक शुरू करवाने का श्रेय जाता है.




गीत के बोल:

तड़पत बीते दिन रैन
तड़पत बीते दिन रैन
निस दिन बिरहा तोरा सतावे
निस दिन बिरहा तोरा सतावे
कैसे आवे मोहे चैन
तड़पत बीते दिन रैन

रात कटे गिन गिन के तारे
ढूँढत नैना सांझ सकारे
रात कटे गिन गिन के तारे
ढूँढत नैना सांझ सकारे
आवो सुनाओ मन के बाती
आवो सुनाओ मन के बाती
मधुर मधुर बैन
मधुर मधुर बैन
तड़पत बीते दिन रैन
..............................................................
Tadpat beete din raina-Chandidas 1934

Artist: KL Saigal

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Aug 13, 2016

रुमझुम रुमझुम चाल-तानसेन १९४३

फिल्म तानसेन से सहगल का गाया एक क्लासिक गीत सुनते
हैं जिसे खेमचंद प्रकाश ने संगीतबद्ध किया है पंडित इन्द्र के
बोलों पर.

फिल्म तानसेन के प्रमुख कलाकार के एल सहगल और खुर्शीद
थे. १६ वीं शताब्दी में मुग़ल बादशाह अकबर के दरबार में
नवरत्नों में से एक तानसेन संगीत के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक
और प्रसिद्ध हस्ती थे. हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में उनका
स्थान उच्च है और रहेगा. उन्होंने कई राग-रागिनियों की
रचना भी की. उनके संगीत से जुडी कई किवदंतियां पीढ़ी-दर
पीढ़ी चली आ रही हैं.

फिल्म में कुल जमा १३ गीत हैं जो कि पंडित इन्द्र ने लिखे.
फिल्म सन १९४३ की सबसे सफल फिल्मों में से एक है और
इसके गीत भी सुपर डुपर हिट हुए.

फिल्म की सिचुएशन के हिसाब से ये गीत मतवाले हाथी को
काबू में करने के लिए गाया जा रहा है.



गीत के बोल:

रुमझुम रुमझुम चाल तिहारी
रुमझुम रुमझुम चाल तिहारी
काहे भई मतवारी
रुमझुम रुमझुम चाल तिहारी
काहे भई मतवारी
बलिहारी बलिहारी
बलिहारी बलिहारी
ऐरावत बलिहारी
बलिहारी बलिहारी
ऐरावत बलिहारी
रुमझुम रुमझुम चाल तिहारी
काहे भई मतवारी
रुमझुम

तुम्हरी चाल जो चले कामनी
तुम्हरी चाल जो चले कामनी
पिया मन भावे वो गज गामिनी
पिया मन भावे वो गज गामिनी
बिसरत काहे बिरज आपनो
यह अचरज है भारी
रुमझुम रुमझुम चाल तिहारी
काहे भई मतवारी
रुमझुम

बलिहारी बलिहारी
बलिहारी बलिहारी
ऐरावत बलिहारी
रुमझुम रुमझुम चाल तिहारी
काहे भई मतवारी
रुमझुम

……………………………………………………….
Rumjhu rumjhum chal-Tansen 1943

Artists: KL Saigal, Khursheed

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Feb 4, 2016

प्यारी प्यारी सूरतों-दुश्मन १९३९

सहगल के गीतों के बिना हिंदी फिल्म संगीत की गाथा कुछ
अधूरी सी लगती है. अब सुनते हैं सहगल का एक गीत.

फिल्म दुश्मन(१९३९) से आप इधर दो गीत सुन चुके हैं. आज
सुनते हैं तीसरा गीत जो सहगल का गया हुआ है. बोल फिर
से एक बार आरजू लखनवी के हैं और संगीत पंकज मलिक का.
गीत ७६ साल पुराना है. गौरतलब है हिंदी फिल्मों ने बोलना
सन १९३१ में शुरु किया था.

फिल्म का निर्माण उस समय की नामचीन संस्था-न्यू थियेटर्स
ने किया था. फिल्म का निर्देशन नितिन बोस ने किया. सन १९३९
में न्यू थियेटर्स की केवल यही फिल्म रिलीज़ हुई थी. फिल्म में
पृथ्वीराज कपूर भी मौजूद हैं. फिल्म क्लासिक के दर्जे में आती है.




प्यारी-प्यारी सूरतों मोह भरी मूरतों
देश से परदेश में
तुम्हारा संदेसा आये है
तन से भी मन से भी
जैसा खींचा जाए है
मदद करो मदद करो
तुम तक आ जायेंगे

पहुंचेंगे आखिर कभी
छानेंगे एक एक गली
पहुंचेंगे आखिर कभी
छानेंगे एक एक गली
देखे वो मुखडा अभी
होगी यही बेकली

गाल हैं जिसके गुलाब
रस आँखों का शराब
गाल हैं जिसके गुलाब
रस आँखों का शराब
होश कहाँ रहेंगे फिर
खुद भी खो जायेंगे

हाँ वही गुल रस भरी जैसे बाजे बांसुरी
कानों में दे कर सन्देश
कानों में दे कर सन्देश
कानों में दे कर सन्देश
कानों में दे कर सन्देश
नींद से, नींद से चौंकाए है
देश से हम दूर हैं दूर हैं
आने से मजबूर हैं
देश से हम दूर हैं दूर हैं
आने से मजबूर हैं
मदद करो मदद बिना मदद बिना
मदद बिना कैसे पहुँच पाएंगे
मदद बिना कैसे पहुँच पाएंगे
मदद करो मदद करो मदद करो
…………………………………………………………….
Pyari pyari soorton-Dushman 1939

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Dec 12, 2014

दो नैना मतवारे तिहारे-माय सिस्टर १९४४

आपको माय सिस्टर फिल्म १९४४ से एक गीत पहले सुनवा चुके हैं.
अब दूसरा गीत भी सुन लीजिए. गीत की पंच लाइन है-"मदभरे 
रसीले निठुर बड़े". कवि के दिमाग में ये कल्पनाएँ अपने आप 
आ जाती हैं या किसी प्रेरणा से आती हैं, इसका जवाब खोजिये.
इससे ज्यादा इस गीत और इसकी गायकी पर बोलना शब्द जाया 
करने वाली बात होगी मेरे लिए. बड़े बड़े संगीत-और-सहगल भक्त 
पहले ही कई लंबे-लंबे निबंध लिख चुके हैं इस गीत पर. अब इस 
आलेख को बड़ा करने के लिए अगर आप सुनना चाहते हैं कि ये 
किसकी कौन से नंबर की फिल्म थी, फिल्म के निर्देशन के वक्त 
निर्देशक ने कान खुजाया था या नहीं, फिल्म के सेट पर निम्बू 
पानी का इंतजाम था या कोल्ड ड्रिंक का, तो आपको ये मज़ा 
किसी और पोस्ट में दिलवा देंगे. फिलहाल तो विवरण पे जाने के 
बजाए गीत का आनंद उठायें. 

आपके पैसे वसूल करवाने के लिए इतना बताये देते हैं कि जो 
मोहतरमा हिल-डुल रही हैं गीत में, उनका नाम है-सुमित्रा देवी.



गीत के बोल: 



दो नैना मतवारे तिहारे
हम पर ज़ुल्म करें

नैनों  में रहें तो सुध बुध खोएं
छिपें तो चैन हरें

दो नैना मतवारे तिहारे
हम पर ज़ुल्म करें


तन तन के चलाये तीर
नस नस में उठाये पीड
मदभरे रसीले निठुर बड़े

दो नैना मतवारे तिहारे
हम पर ज़ुल्म करें
.............................................
Do naina matware tihare-My sister 1944

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Jul 20, 2011

नैनहीन को राह दिखा प्रभु-भक्त सूरदास १९४२

भक्त सूरदास से एक गीत पेश है के. एल. सहगल की आवाज़ में .
दीना नाथ मधोक गीतकार हैं और संगीत बनाया है ज्ञान दत्त ने.
भक्त सूरदास पर बनी फिल्म है अतः इसमें भजन और प्रेरणादाई
गीत ही मिलेंगे आपको. बॉलीवुड ने भक्तों, संतों और महा पुरुषों
पर समय समय पर फ़िल्में बनायीं हैं.

वर्त्तमान समय में इस क्षेत्र में कम या नहीं के बराबर काम हो रहा है.
छोटे परदे के अवतरण के बाद सीरियल निर्माण होने से विकल्प ज्यादा
उपलब्ध हो गए हैं. अब फिल्मों के बजाये पौराणिक, धार्मिक और
ऐतिहासिक कथाएं धारावाहिक रूप में ही देखने को उपलब्ध हैं.



गीत के बोल:

नैनहीन को राह दिखा प्रभु
नैनहीन को राह दिखा प्रभु
पग पग ठोकर खाऊँ मैं
नैनहीन को राह दिखा प्रभु
पग पग ठोकर खाऊँ मैं
नैनहीन को

तुमरी नगरिया की कठिन डगरिया
तुमरी नगरिया की कठिन डगरिया
चलत चलत गिर जाऊं मैं प्रभु

नैनहीन को राह दिखा प्रभु
पग पग ठोकर खाऊँ मैं
नैनहीन को राह दिखा प्रभु

चहुँ ओर मेरे घोर अँधेरा
भूल न जाऊं द्वार तेरा
चहुँ ओर मेरे घोर अँधेरा
भूल न जाऊं द्वार तेरा
एक बार प्रभु हाथ पकड़ लो
एक बार प्रभु हाथ पकड़ लो
एक बार प्रभु हाथ पकड़ लो
मन का दीप जलाऊँ मैं प्रभु

नैनहीन को राह दिखा प्रभु
पग पग ठोकर खाऊँ मैं
नैनहीन को
.................................
Nainheen ko raah dikha prabhuBhakt Surdas 1942

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Jan 25, 2010

मन दर्पण है - दुश्मन १९३९

फिल्म: दुश्मन
वर्ष: १९३९
संगीतकार: पंकज मलिक
गीतकार: आरजू लखनवी
गायक: कुंदनलाल सहगल, ????
कलाकार: कुंदनलाल सहगल, ????



गीत के बोल:

सितम थे, ज़ुल्म थे
आफत थे, इंतज़ार के दिन
हज़ार शुक्र के देखेंगे अब बहार के दिन
हज़ार शुक्र के देखेंगे अब बहार के दिन

हा हा , हा हा हा हा हा
मन दर्पण है जग सारा
ये जग सारा
मन दर्पण है जग सारा
मन अँधियारा
जग अँधियारा
मन दर्पण है जग सारा
हा हा , हा हा हा हा हा

उलटी है ये ज्ञानी दुनिया
दुःख को सुख कहता
उलटी है ये ज्ञानी दुनिया
दुःख को सुख कहता
ऐसा ?
आँखों में तिल जैसे काला
रूप अँधेरा
काम उजारा
मन दर्पण है जग सारा

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