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Feb 25, 2018

कौन हूँ मैं-प्रिंस २०१०

नए ज़माने का एक गीत सुनते हैं. इसे भी बने ८ साल तो
हो ही गए हैं. हर बीस साल में एक नई पीढ़ी आती है तो
नया युग भी जैसे आ जाता है. आजकल परिवर्तन की गति
कुछ ज्यादा है और कभी कभी तो ये लगता है मानो ३-४
साल में ही युग परिवर्तन हो गया हो. पब्लिक को मोपेड से
अपग्रेड हो के बाइक पर आने में १५ साल लग गए तो
आज के युग में बाइक से स्पोर्ट्स बाइक तक व्यक्ति एक
साल में ही पहुँच जाता है. सामान्य बाइक को कोई स्पोर्ट्स
बाइक जैसा रगड़े वो बात और है.

गीत समीर का है जिसे आतिफ असलम ने गाया है और इस
गीत को संगीतबद्ध किया है सचिन गुप्ता ने. इस फिल्म में
विवेक ओबेरॉय, नंदना सेन, अरुणा शील्ड्स, नीरू बवेजा और
संजय कपूर संग पुराने कलाकार दिलीप ताहिल भी मौजूद
हैं.



गीत के बोल:

अनजानी सी ख्वाहिश है अनजाना है अफसाना
ना मेरी कोई मंजिल है ना कोई है ठिकाना
अनजानी सी ख्वाहिश है अनजाना है अफसाना
ना मेरी कोई मंजिल है ना कोई है ठिकाना

कौन हूँ मैं किसकी मुझे तलाश
कौन हूँ मैं किसकी मुझे तलाश
इन सूनी सूनी तन्हा राहों पर

बहके बहके से पलछिन हैं
होश में भी मदहोशी हैं
मुझको सुनाई देती है ये कैसी ख़ामोशी है
बहके बहके से पलछिन हैं
होश में भी मदहोशी हैं
मुझको सुनाई देती है ये कैसी ख़ामोशी है
कौन हूँ मैं किसकी मुझे तलाश
कौन हूँ मैं किसकी मुझे तलाश
इन सूनी सूनी तन्हा राहों पर

कोई भी तो जाने ना आलम मेरी तन्हाई का
पीछा करता रहता हूँ मैं तो अपनी फुरछाई का
कोई भी तो जाने ना आलम मेरी तन्हाई का
पीछा करता रहता हूँ मैं तो अपनी परछाई का
कौन हूँ मैं किसकी मुझे तलाश
कौन हूँ मैं किसकी मुझे तलाश
इन सूनी सूनी तन्हा राहों पर
………………………………………………..
Kaun hoon main-Prince 2010

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Nov 7, 2016

ज़िंदगी ये सफर में है-दिल कबड्डी २००८

कबड्डी का क्रेज इन दिनों ज़ोरों पर है और अब तो फ़िल्मी गीतों
में भी कबड्डी होने लगी है, किसी में बोलों की तो किसी में संगीत
की. जब फ़िल्मी सितारों ने कबड्डी प्रीमीयर लीग की टीमें खरीदीं
तब से कबड्डी का उद्धार होना शुरू हो गया.

खैर, कबड्डी देख के दिलो दिमाग में कभी कभी कबड्डी चालू हो
जाती है तब कभी इस फिल्म का नाम भी ध्यान आ जाता है. आज
इस फिल्म से एक गीत सुनते हैं विराग मिश्रा का लिखा हुआ. इसे
सचिन गुप्ता और ध्रुव ढल्ला की जोड़ी ने संगीत से संवारा है. गायक
हैं राहत फ़तह अली खान. सोहा अली खान और राहुल खन्ना पर
इसे फिल्माया गया है.
   
इस फिल्म की कहानी समझने के लिए आपको फिल्म देखना पड़ेगी.
अगर आपने अंग्रेजी फिल्म हसबैंड्स एंड वाइव्स देख रखी है तो आपको
स्टोरी का कुछ आइडिया मिल जायेगा. विलायती फिल्म के निर्देशक हैं
वुडी एलन. अगर आप हृषिकेश मुखर्जी अथवा बासु चटर्जी की फ़िल्में
देखने के शौक़ीन हैं तो वुडी की फ़िल्में देखना शुरू कर दीजिए.




गीत के बोल:

ज़िंदगी ये सफर में है
कट रहा है रास्ता
ज़िंदगी ये सफर में है
कट रहा है रास्ता
हमसफ़र दो हैं मगर
मंजिलें हैं जुदा जुदा
हमसफ़र दो हैं मगर
मंजिलें हैं जुदा जुदा

ज़िंदगी ये सफर में है
कट रहा है रास्ता
ज़िंदगी ये सफर में है
कट रहा है रास्ता
हमसफ़र दो हैं मगर
मंजिलें हैं जुदा जुदा
हमसफ़र दो हैं मगर
मंजिलें हैं जुदा जुदा

आंसुओं की धूप में
कोई चल रहा इधर
आंसुओं की धूप में
कोई चल रहा इधर
कहकहों की छांव में
कोई चल रहा उधर
कोई किसी से गुम हुआ
कोई किसी को मिल गया
कोई किसी से गुम हुआ
कोई किसी को मिल गया
हमसफ़र दो हैं मगर
मंजिलें हैं जुदा जुदा
हमसफ़र दो हैं मगर
मंजिलें हैं जुदा जुदा

है मिलन की चाहतें
फासले हैं दरमियान
है मिलन की चाहतें
फासले हैं दरमियान
धडकनें तो एक हैं
फिर भी हैं ये दूरियां
कोई किसी को है चाहता
कोई किसी से है खफा
कोई किसी को है चाहता
कोई किसी से है खफा
हमसफ़र दो हैं मगर
मंजिलें हैं जुदा जुदा
हमसफ़र दो हैं मगर
मंजिलें हैं जुदा जुदा

ज़िंदगी ये सफर में है
कट रहा है रास्ता
ज़िंदगी ये सफर में है
कट रहा है रास्ता
हमसफ़र दो हैं मगर
मंजिलें हैं जुदा जुदा
हमसफ़र दो हैं मगर
मंजिलें हैं जुदा जुदा
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Zingai ye safar mein hai-Dil kabbai 2008

Artists: Rahul Bose, Soha Ali Khan, Konkana Sen Sharma, Rahul Khanna, Hamara Bajaj, Irfan Khan

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