शीशा-ए-दिल इतना ना-दिल अपना और प्रीत पराई १९६०
प्रवेश करने के पहले के खुशनुमा गीतों में से एक है. एक ड्रीम
सीक्वेंस की तरह सा ये गीत एक मस्त धुन के दायरे में कैद है.
मीना कुमारी के साथ इस दृश्य में ढेर सारे सहायक कलाकार हैं.
शंकर जयकिशन के कोरस वाले गीत काफी आकर्षक और
लुभावने होते थे.
गीत लिखा है शैलेन्द्र ने जिसे गाया है लता मंगेशकर के साथ
महिला कोरस ने. फिल्म दिल अपना और प्रीत परायी फिल्म का
संगीत शंकर जयकिशन ने तैयार किया है.
गीत के बोल:
हा हा हा हा हा
आ हा हा हा हा
शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो
शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो
ये कहीं टूट जाएगा ये कहीं फूट जाएगा
शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो
शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो
ये कहीं टूट जाएगा ये कहीं फूट जाएगा
शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो
ल ल ल ल ल ल ल ला
ल ल ल ल ल ल ल ला
ल ल ला ल ल ल ला ल ल ला
ल ल ल ला ल ल ल ल ल ल ल ला
मचलती-झूमती ठंढी हवाएँ कहती हैं
तड़पती मौजों की चंचल अदाएँ कहती हैं
सँवारो ज़ुल्फ़ को काली घटाएँ कहती हैं
ये भीगी-भीगी सुहानी फ़ज़ाएँ कहती हैं
तुम्हीं से आज तुम्हारी निगाहें कहती हैं
तुम्हीं से आज तुम्हारी निगाहें कहती हैं
ओ ओ ओ ओ ओ
शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो
नज़ारे हो गए क़ुर्बान इन नज़ारों पर
मचलके आ गईं लहरें भी अब इशारों पर
अदा से तैरते फिरते हैं हम तो धारों पर
करेंगे प्यार का जादू जवाँ बहारों पर
ये कहने आई हैं सौ मछलियाँ किनारों पर
ये कहने आई हैं सौ मछलियाँ किनारों पर
ओ ओ ओ ओ ओ
शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो
सँभालो होश के दरिया का गहरा पानी है
न डूब जाओ कहीं बेख़बर जवानी है
जवाँ बहार किनारों पे आनी-जानी है
ज़रा ख़याल रहे दिल अजब निशानी है
अभी तो प्यार की दुनिया तुम्हें बसानी है
अभी तो प्यार की दुनिया तुम्हें बसानी है
ओ ओ ओ ओ ओ
शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो
ये कहीं टूट जाएगा ये कहीं फूट जाएगा
शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो
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Sheesha-e-dil itna na-Dil apna aur preet parayi
Artist: Meena Kumari

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