Showing posts with label Dil apna aur preet parayi. Show all posts
Showing posts with label Dil apna aur preet parayi. Show all posts

Dec 1, 2017

उई इतनी बड़ी महफ़िल-दिल अपना और प्रीत पराई १९६०

उई उई हिट्स हमने थोड़े कम सुनें हैं अभी तक. आज सुनते हैं एक
गीत दिल अपना और प्रीत पराई फिल्म से जिसे आशा भोंसले ने
गाया है. ६० के दशक तक आशा भोंसले ने शंकर जयकिशन खेमे
के लिए कम गीत गाये थे, ये घाटा १९६५ के बाद पूरा हो गया.

गीत फिल्माया गया है हेलन पर. गीत में आपको राजकुमार और
नादिरा भी दिखाई देंगे जो सूप जैसी किसी चीज़ का स्वाद ले रहे
हैं. नेट पर खंगालिये आपको ये भी पता चल जायेगा सूप किस चीज़
का है. आजकल की रिसर्च इस हद तक बढ़ गई है कि जनता ये
भी बतला देती है किस कलाकार के घर में कौनसी मिर्च खाने के
लिए प्रयोग में लायी जाती थी. सुनते हैं गीत, बातें तो होती ही रहेंगी.
हसरत जयपुरी ने इस गीत को लिखा है.



गीत के बोल:

उई इतनी बड़ी महफ़िल और इक दिल किसको दूँ
दिल किसको दूँ
उई इतनी बड़ी महफ़िल और इक दिल किसको दूँ
दिल किसको दूँ
ये दिल ये वो दिल जिसको पाला था हमने बड़े नाज़ से
ये दिल ये वो दिल जिसको पाला था हमने बड़े नाज़ से
उई कोई तो बताओ कोई समझाओ दिल इसको दूँ या उसको दूँ
उई इतनी बड़ी महफ़िल और इक दिल किसको दूँ

है यहाँ आज तो एक धूम परवानो में
फँस गई जाँ मेरी बेशुमार दीवानो में
है यहाँ आज तो एक धूम परवानो में
फँस गई जाँ मेरी बेशुमार दीवानो में
मुशकिल तो ये है किसकी सुनूँ
अपना यहाँ पे किसको चुनूँ
मुशकिल तो ये है किसकी सुनूँ
अपना यहाँ पे किसको चुनूँ
उई तन के ये उजले मन के ये काले दिल इसको दूँ या उसको दूँ
उई इतनी बड़ी महफ़िल और इक दिल किसको दूँ
जब मिले इक नज़र इक नज़र पे बिजली गिरे
मैं जहाँ चल पड़ूँ मेरे साथ दूनियाँ चले
जब मिले इक नज़र इक नज़र पे बिजली गिरे
मैं जहाँ चल पड़ूँ मेरे साथ दूनियाँ चले
रोके हैं लोग राहें मेरी थामे हसीन बाहें मेरी
रोके हैं लोग राहें मेरी थामे हसीन बाहें मेरी
मुशकिल तो ये है किसकी सुनूँ
अपना यहाँ पे किसको चुनूँ
उई रूप के लुटेरे प्यार न जाने दिल इसको दूँ या उसको दूँ   ...

उई इतनी बड़ी महफ़िल और इक दिल किसको दूँ
दिल किसको दूँ
ये दिल ये वो दिल जिसको पाला था हमने बड़े नाज़ से
ये दिल ये वो दिल जिसको पाला था हमने बड़े नाज़ से
उई कोई तो बताओ कोई समझाओ दिल इसको दूँ या उसको दूँ
उई इतनी बड़ी महफ़िल और इक दिल किसको दूँ
...............................................................
Ui itni badi mehfil aur-Dil apna aur preet parayi 1960

Artist: Helen

Read more...

Aug 5, 2011

शीशा-ए-दिल इतना ना-दिल अपना और प्रीत पराई १९६०

ये शायद मीना कुमारी के ट्रेजेडी क्वीन की छबि वाले युग में
प्रवेश करने के पहले के खुशनुमा गीतों में से एक है. एक ड्रीम
सीक्वेंस की तरह सा ये गीत एक मस्त धुन के दायरे में कैद है.
मीना कुमारी के साथ इस दृश्य में ढेर सारे सहायक कलाकार हैं.
शंकर जयकिशन के कोरस वाले गीत काफी आकर्षक और
लुभावने होते थे.

गीत लिखा है शैलेन्द्र ने जिसे गाया है लता मंगेशकर के साथ
महिला कोरस ने. फिल्म दिल अपना और प्रीत परायी फिल्म का
संगीत शंकर जयकिशन ने  तैयार किया है.



गीत के बोल:

हा हा हा हा हा
आ हा हा हा हा

शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो
शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो
ये कहीं टूट जाएगा ये कहीं फूट जाएगा
शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो

शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो
ये कहीं टूट जाएगा ये कहीं फूट जाएगा
शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो
ल ल ल ल  ल ल ल ला 
ल ल ल ल  ल ल ल ला
ल ल ला  ल ल ल ला  ल ल ला 
ल ल ल ला ल ल ल ल  ल ल ल ला

मचलती-झूमती ठंढी हवाएँ कहती हैं
तड़पती मौजों की चंचल अदाएँ कहती हैं
सँवारो ज़ुल्फ़ को काली घटाएँ कहती हैं
ये भीगी-भीगी सुहानी फ़ज़ाएँ कहती हैं

तुम्हीं से आज तुम्हारी निगाहें कहती हैं
तुम्हीं से आज तुम्हारी निगाहें कहती हैं

ओ ओ ओ ओ ओ
शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो

नज़ारे हो गए क़ुर्बान इन नज़ारों पर
मचलके आ गईं लहरें भी अब इशारों पर
अदा से तैरते फिरते हैं हम तो धारों पर
करेंगे प्यार का जादू जवाँ बहारों पर

ये कहने आई हैं सौ मछलियाँ किनारों पर
ये कहने आई हैं सौ मछलियाँ किनारों पर

ओ ओ ओ ओ ओ
शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो

सँभालो होश के दरिया का गहरा पानी है
न डूब जाओ कहीं बेख़बर जवानी है
जवाँ बहार किनारों पे आनी-जानी है
ज़रा ख़याल रहे दिल अजब निशानी है

अभी तो प्यार की दुनिया तुम्हें बसानी है
अभी तो प्यार की दुनिया तुम्हें बसानी है

ओ ओ ओ ओ ओ
शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो
ये कहीं टूट जाएगा ये कहीं फूट जाएगा
शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो
……………………………………………….
Sheesha-e-dil itna na-Dil apna aur preet parayi

Artist: Meena Kumari

Read more...

Feb 14, 2010

अंदाज़ मेरा मस्ताना - दिल अपना और प्रीत पराई १९६०

फिल्म 'दिल अपना और प्रीत पराई' का एक और गीत पेश
है। लीना, टीना, तकलीना जैसे शब्द मुझे आकर्षित करे रहे।
'तकलीना' का अर्थ आज तक समझ नहीं आया ना ही इस नाम
की कोई मोहतरमा मिलीं। सो इसको फ़िल्मी नाम समझ कर
दिमाग के किसी कोने में डाल दिया। ये गीत भी मीना कुमारी पर
फिल्माया गया है। इसके गीतकार शैलेन्द्र हैं और गायिका लता
मंगेशकर । एक छोटे से गीत को किलोमीटर लम्बा बनाया गया
है फिर भी सुनने वाला बोर नहीं होता, इसकी धुन आकर्षक जो अमां।



गीत के बोल:

अंदाज़ मेरा मस्ताना,
मांगे दिल का नजराना
ज़रा सोचके आंख मिलाना,
हो जाये ना तू दीवाना
के हम भी जवान हैं,
समां भी जवान है
ना फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है

तकलीना

अंदाज़ मेरा मस्ताना,
मांगे दिल का नजराना
ज़रा सोचके आंख मिलाना,
हो जाये ना तू दीवाना
के हम भी जवान हैं,
समां भी जवान है
ना फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है

तकलीना

प्यार की किताब हूँ मैं
सच हूँ फिर भी ख्वाब हूँ मैं
देख कर सुरूर आये,
वो अजब शराब हूँ मैं
मैं हूँ जवानी का
रंगीन तराना, रंगीन तराना

तकलीना

अंदाज़ मेरा मस्ताना,
मांगे दिल का नजराना
ज़रा सोचके आंख मिलाना,
हो जाये ना तू दीवाना
के हम भी जवान हैं,
समां भी जवान है
ना फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है

तकलीना

तुझको मेरी जुस्तजू है
मुझको तेरी आरजू है
मेरे दिल का आइना तू
दिल के आइने में तू है
हम से ही रोशन है
सारा ज़माना, सारा ज़माना

तकलीना

अंदाज़ मेरा मस्ताना,
मांगे दिल का नजराना
ज़रा सोचके आंख मिलाना,
हो जाये ना तू दीवाना
के हम भी जवान हैं,
समां भी जवान है
ना फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है

तकलीना

मैं किधर हूँ तू कहाँ है
ये ज़मीं या आसमान है
मेरे तेरे प्यार की ये
क्या अजीब दास्तां है
मीठा सा ये दर्द
भी है सुहाना, दर्द सुहाना

तकलीना

अंदाज़ मेरा मस्ताना,
मांगे दिल का नजराना
ज़रा सोचके आंख मिलाना,
हो जाये ना तू दीवाना
के हम भी जवान हैं,
समां भी जवान है
ना फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है

तकलीना

अंदाज़ मेरा मस्ताना,
मांगे दिल का नजराना
ज़रा सोचके आंख मिलाना,
हो जाये ना तू दीवाना
के हम भी जवान हैं,
समां भी जवान है
ना फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है

तकलीना

Read more...

Feb 13, 2010

अजीब दास्तां है ये- दिल अपना और प्रीत पराई १९६०

"दिल एक मंदिर" और "दिल अपना और प्रीत परायी" दोनों फिल्मों
में शंकर जयकिशन का संगीत है। फिल्म के नाम में मैं अक्सर धोखा
खा जाता हूँ और एक फिल्म के गाने दूसरी में फिट कर दिया करता हूँ।
ऐसा आपके साथ भी होता होगा ज़रूर।

ये गीत एक पार्टी में गाया जा रहा है। पाश्चात्य प्रभाव वाला संगीत
होने के बावजूद ये गीत देसी ही लगता है। शैलेन्द्र के बढ़िया बोलों
को आवाज़ दी है गायिका लता मंगेशकर ने और इसे परदे पर गा
रही हैं मीना कुमारी। राज कुमार एक डॉक्टर हैं जिनकी शादी नादिरा
से होती है। शादी के बाद ये पार्टी दी जा रही है। मीना कुमारी जो कि
एक नर्स हैं वो डॉक्टर से प्रेम करती थी/हैं। अपनी उलझन भरी
भावनाओं को वे गीत के माध्यम से व्यक्त कर रही हैं। इस फिल्म
के एक गीत पर पहले हम चर्चा कर चुके हैं।



गीत के बोल:

अजीब दास्तां है ये
कहाँ शुरू कहाँ ख़तम
ये मंजिलें हैं कौन सी
ना वो समझ सके ना हम
अजीब दास्तां है ये
कहाँ शुरू कहाँ ख़तम
ये मंजिलें हैं कौन सी
ना वो समझ सकें ना हम

ये रौशनी के साथ क्यूँ
धुंआ उठा चिराग से
ये रौशनी के साथ क्यूँ
धुआं उठा चिराग से
ये ख्वाब देखती हूँ मैं
के जग पड़ी हूँ ख्वाब से

अजीब दास्तां है ये
कहाँ शुरू कहाँ ख़तम
ये मंजिलें हैं कौन सी
ना वो समझ सके ना हम

मुबारकें तुम्हें के तुम
किसी के नूर हो गए
मुबारकें तुम्हें के तुम
किसी के नूर हो गए
किसी के इतने पास हो
के सबसे दूर हो गए

अजीब दास्तां है ये
कहाँ शुरू कहाँ ख़तम
ये मंजिलें हैं कौन सी
ना वो समझ सके ना हम

किसी का प्यार ले के तुम
नया जहाँ बसाओगे
किसी का प्यार ले के तुम
नया जहाँ बसाओगे
ये शाम जब भी आएगी
तुम हमको याद आओगे

अजीब दास्तां है ये
कहाँ शुरू कहाँ ख़तम
ये मंजिलें हैं कौन सी
ना वो समझ सके ना हम
.............................
Ajeeb dastan hai ye-Dil apna aur preet parayi 1960

Read more...

Oct 11, 2009

मेरा दिल अब तेरा ओ साजना-दिल अपना और प्रीत परायी १९६०

गाने में नक्काशी कैसे की जाती है इसका शानदार नमूना देखिये। कुछ
अचंभित और विस्मृत करने वाले गाने जिन पर चर्चा कम हुई है आपके
लिए पेश हैं। एक गीत है फ़िल्म 'दिल अपना और प्रीत परायी' से -मेरा
दिल अब तेरा ओ सजना। शंकर जयकिशन ने लता मंगेशकर के लिए जो
मधुर नगमे बनाये हैं उनमे से एक। इस गीत में वाद्य यंत्रों की बाजीगरी से
लेकर जितनी भी आवाजें हैं वो इसको कर्णप्रिय बनाती हैं चाहे वो गाने के
शुरू में होने वाला कोलाहल हो या गाने के बीच में सुनाई देने वाली वाद्य यंत्रों
की आवाजें हो। ये भी एक खूबसूरत नृत्य रचना है जो आँखों को आनंददायी
सुख प्रदान करती हैं। शुरू में होने वाली "ला ला ला ला ला ला " इसको सहज
बनाती है। 'ला ला ला ला' के साथ 'होए' का "फ़ोलो-अप " इसको कातिल बना
देता है। साथी मित्रों का अनुमान है की मुझे थोडी अजीब से चीज़ें पसंद आती हैं।
इस फ़िल्म के बाकी के गाने जनता को ज्यादा पसंद आते हैं। आज तक कोई
शंकर जयकिशन प्रेमी मुझे इस गाने की तारीफ़ करता नहीं मिला। उससे ज्यादा
फर्क नहीं पड़ता। जो अच्छा है वो अच्छा ही रहेगा। कुछ चीज़ें सुनने में ज्यादा
मज़ा आता है तो कुछ देखने में। इस फ़िल्म को थिएटर में देखने के बाद मुझे
सबसे ज्यादा इसी गाने से लगाव है। फ़िल्म के कुछ और गीत मुझे बेहद पसंद
हैं उनका जिक्र फ़िर कभी....

कैसा जा........दू ........ फे........... रा.......





गाने के बोल
:

मेरा दिल अब तेरा ओ साजना
मेरा दिल अब तेरा ओ साजना

कैसा जादू फेरा ओ साजना
कैसा जादू फेरा ओ साजना

मेरा दिल अब तेरा ओ साजना
कैसा जादू फेरा ओ साजना

नैन हमारे, तुम संग लागे
तुम संग प्रीत हमारी
मन भाए तुम, जान न जानो
जाने है दुनिया साड़ी
कोई और न मेरा ओ साजना

मेरा दिल अब तेरा ओ साजना
कैसा जादू फेरा ओ साजना

मोरनी बनके राह तकूँ मैं
तुम बादल बन छाओ
मेरे प्यासे रोम रोम पे रस बरसाते जाओ
मेरा दिल में बसेरा ओ साजना

मेरा दिल अब तेरा ओ साजना
कैसा जादू फेरा ओ साजना

प्यार का बंधन जनम जनम का
साथ तो संग ही छूटे
सारे ही रंग फीके पड़ जाएँ
प्यार का रंग न छूटे

तूने तन मन घेरा ओ साजना

मेरा दिल अब तेरा ओ साजना
कैसा जादू फेरा ओ साजना

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP