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Jul 13, 2020

मोरी छम-छम बाजे पायलिया-घूंघट १९६०

आज अभिनेत्री बीना राय का जन्मदिन है. हिंदी फिल्म इतिहास
की प्रभावशाली अभिनेत्रियों में से एक बीना राय श्वेत श्याम युग
की फिल्मों-अनारकली, घूंघट और रंगीन युग की ताजमहल के
ज़रिये दर्शकों के दिल में अमिट छाप छोड़ गयीं. जिन फिल्मों के
नाम हमने लिए वे ज्यादा चर्चित फ़िल्में हैं, उसके अलावा भी
उन्होंने कई यादगार भूमिकाएं की हैं.

किशोर साहू की फिल्म कलि घटा उनकी पहली हिंदी फिल्म है.
१९६८ की अपना घर अपनी कहानी उनकी अंतिम हिंदी फिल्म
है.

फिल्म घूंघट के लिए उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार मिला. आज सुनते
हैं इस फिल्म से एक चर्चित गीत लता मंगेशकर का गाया हुआ.





गीत के बोल:

मोरी छम-छम बाजे पायलिया
मोरी छम-छम बाजे पायलिया
आज मिले हैं मोरे साँवरिया
आज मिले हैं मोरे साँवरिया
मोरी छम-छम बाजे पायलिया
मोरी छम-छम बाजे पायलिया

बड़ी मुद्दत में दिल के सहारे मिले
आज डूबे हुओं को किनारे मिले
बड़ी मुद्दत में दिल के सहारे मिले
आज डूबे हुओं को किनारे मिले
कभी मुस्क्राए मन कभी शरमाए मन
कभी नैनों की छलके गागरिया
मोरी छम-छम बाजे पायलिया
मोरी छम-छम बाजे पायलिया
आज मिले हैं मोरे साँवरिया
मोरी छम-छम बाजे पायलिया
मोरी छम-छम बाजे पायलिया

चाँद तारों के गहने पहना दो मुझे
कोई आ के दुल्हनिया बना दो मुझे
चाँद तारों के गहने पहना दो मुझे
कोई आ के दुल्हनिया बना दो मुझे
नहीं बस में जिया कैसा जादू किया
पिया आज हुई रे मैं तो बावरिया

मोरी छम-छम बाजे पायलिया
मोरी छम-छम बाजे पायलिया
आज मिले हैं मोरे साँवरिया
मोरी छम-छम बाजे पायलिया
मोरी छम-छम बाजे पायलिया
………………………………………………
Mori chham chham baaje payaliya-Ghoonghat 1960

Artist; Beena Rai

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Dec 27, 2019

आना आना अटरिया पे आना-कल्पना १९६०

फिल्म मेरा गांव मेरा देश में अटरिया के उल्लेख
वाला एक गीत है. एक और गीत उपलब्ध है अटरिया
वाला ये है श्वेत श्याम युग से.

लोक धुनों का प्रयोग फ़िल्मी गीतों में खूब हुआ है.
ये जब से फिल्म संगीत की शुरुआत हुई तभी से
हो रहा है.

आज एक गीत सुनते हैं जिसे सुन के सबसे पहले
तो शराबी के गीत-जहाँ चार यार मिल जाएँ की
याद आती है. और भी हैं अगर आप दिमाग पर
जोर डालें तो याद आते जायेंगे.

राजा मेहँदी अली खान की रचना को स्वर दिया है
आशा भोंसले ने ओ पी नैयर के संगीत निर्देशन में.




गीत के बोल:

अना आना ओ बाबू रे
आना आना हा हा
आना आना अटरिया पे आना
आना आना अटरिया पे आना
देख ले चाहे सारा ज़माना
हो आना आना अटरिया पे आना
देख ले चाहे सारा ज़माना
हो हो हो हो हो ओ ओ ओ ओ ओ

प्यार लाई मैं दिल में छुपा के
प्यार लाई मैं दिल में छुपा के
देख ले एक नजर मुस्कुरा के
हो देख ले एक नजर मुस्कुरा के
मेरी आँखों से झांके है प्यार बार बार

आना आना
आना आना अटरिया पे आना
देख ले चाहे सारा ज़माना
आना आना अटरिया पे आना
देख ले चाहे सारा ज़माना
हो हो हो हो हो ओ ओ ओ ओ ओ


मैं कहीं हूँ मेरा दिल कहीं है
मैं कहीं हूँ मेरा दिल कहीं है
मेरा दिल मेरे बस में नहीं है
ओ मेरा दिल मेरे बस में नहीं है
छीन लेता है कोई करार बार बार

आना आना
आना आना अटरिया पे आना
देख ले चाहे सारा ज़माना
आना आना अटरिया पे आना
देख ले चाहे सारा ज़माना
…………………………………………………………….
Aana aana atariya pe aana-Kalpana 1960

Artists: Padmini, Ashok Kumar

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सोच समझ ले ओ परवाने-अपना घर १९६०

ये जो फ़िल्में हैं जिनके नाम में घर शब्द आता है
उसे कहीं कहीं मैंने ghar की जगह ghur लिखा देखा.
हिंदी में घुर पढ़ने में आता. घर घर की कहानी बन
जाती घुर घुर की कहानी.

मधुमती, लक्ष्मी छाया, फरयाल इत्यादि के अलावा भी
कई ऐसी सहायक अभिनेत्रियां हैं जिन्होंने अपने होने
का आभास दिया फिल्म उद्योग को. प्रस्तुत गीत कम्मो
नाम की अभिनेत्री पर फिल्माया गया है.

गीत प्रेम धवन का है और इसकी धुन तैयार की है
रवि ने. गायिका को आप पहचान ही गए होंगे.



गीत के बोल:

सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
तेरी नज़र पहचान गई
मै इतनी तो नादान नहीं
सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं

फिर न कहना इन जुल्फों के फंदे में हम आ गये
बड़े बड़े दिल वाले इन नज़रों का धोखा खा गये
फिर न कहना इन जुल्फों के फंदे में हम आ गये
बड़े बड़े दिल वाले इन नज़रों का धोखा खा गये
कौन सा ऐसा दिल वाला है
कौन सा दिल वाला है जो मुझ पर कुर्बान नहीं

सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
तेरी नज़र पहचान गई
सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं

जल जाना आसान नहीं
तेरी नज़र पहचान गयी
मै इतनी तो नादाँ नहीं
सोच समझे ओ परवाने
जल जाना आसान नाही

इस महफ़िल में जो भी आया वो दीवाना हो गया
दुनिया तो क्या अपने से भी वो बेगाना हो गया
इस महफ़िल में जो भी आया वो दीवाना हो गया
दुनिया तो क्या अपने से भी वो बेगाना हो गया

ये भी अदायें ना जाने तू
ये भी अदायें ना जाने तू इतना तो अनजान नहीं

सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
तेरी नज़र पहचान गई
सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
.................................................................
Soch samajh le o parwane-Apna Ghar 1960

Artists: Kammo, Premnath

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Dec 26, 2019

आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा-अपना घर १९६०

कहते हैं जो अपना स्वयं सम्मान नहीं करता उसका
सम्मान दूसरे भी नहीं करते. कुछ वैसे ही शरीर की
इन्द्रियों का भी उचित सम्मान आवश्यक है. ये तो
व्यक्ति पे स्वयं निर्भर है कि वो इनका उपयोग किस
प्रकार से और कितना करे..

शरीर की प्रमुख इन्द्रियों में आँखों को सबसे उच्च
स्थान दिया गया है. ग्रहण के दिन सूर्य और चन्द्रमा
को सीधे आँखों से ना देखें. धार्मिक दृष्टि से देखें या
वैज्ञानिक दृष्टि से, दोनों ही मामले से ये बात सटीक
है.

सुनते हैं फिल्म अपना घर से अगला गीत जिसे
मोहम्मद रफ़ी और आरती मुखर्जी ने गाया है.

प्रेम धवन की रचना है और रवि शंकर शर्मा उर्फ रवि
का संगीत.




गीत के बोल:

कोई न हो इस जग में दाता
आँखों से मजबूर
दुनिया में रह कर भी हम है
इस दुनिया से दूर

आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
जिनसे जग उजियारा
अन्धों पर क्या गुज़रे
ये क्या जाने आँखों वाला
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा

बाबा बाबा बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा

औरों की तो रात अँधेरी
अपना दिन भी अँधेरा
औरों की तो रात अँधेरी
अपना दिन भी अँधेरा
हम है जहाँ पर उस दुनिया में
कभी न हुआ सवेरा
सूरज चाँद सितारे सबको
सूरज चाँद सितारे सबको
देखा हमने काला

आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
बाबा बाबा बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा

कदम कदम पर ठोकर खाये
राह चली न जाये
कदम कदम पर ठोकर खाये
राह चली न जाये
फिरते है अपने कंधे पर
अपनी लाश उठाये
जीवन भी इक बोझ बना है
जीवन भी इक बोझ बना है
कब तक जाये संभाला

आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
बाबा बाबा बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा

कब तक यूँ ही सहते जायें
दुनिया के तानों को

नूर तो छीना दाता बहरा भी कर दे कानों को
देख लिया जी भर के हमने
तेरा खेल निराला तेरा खेल निराला
देख लिया जी भर के हमने
तेरा खेल निराला

आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
बाबा बाबा बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
जिनसे जग उजियारा
अन्धों पर क्या गुज़रे
ये क्या जाने आँखों वाला
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
…………………………………………….
Aankhen badi hain nemat-Apna Ghar 1960

Artists:

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जाये जहाँ मेरी नज़र-कल्पना १९६०

ये कतई ज़रूरी नहीं कि किसी फ़िल्मी एल्बम के सारे
गाने लोकप्रिय हों. हिंदी फिल्म इतिहास में सैकड़ों की
तादाद में ही ऐसे एल्बम हैं जिसके सभी गाने प्रचलित
हों और जनता द्वारा पसंद किये जाते हों.

ये अनुमान लगाना गीतकार और संगीतकार के लिए
भी कठिन काम होता है कि कौनसा गाना हिट होगा
और कौन सा नहीं.

आज सुनते हैं सन १९६० की फिल्म कल्पना से एक
लोकप्रिय गीत. कमर जलालाबादी की रचना है जिसे
स्वर दिया है आशा भोंसले ने ओ पी नैयर की धुन पर.
इसे पद्मिनी पर फिल्माया गया है. इसे श्रेणी बनाने
वाले दूरबीन सोंग पता नहीं क्यूँ कहते हैं.





गीत के बोल:

हो ओ ओ ओ होय
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
फ़िर भी है दिल बेक़रार
जाये जहाँ मेरी नज़र
कलियाँ वहाँ जायें बिखर
जाये जहाँ मेरी नज़र
कलियाँ वहाँ जायें बिखर
फ़िर भी है दिल बेक़रार
फ़िर भी है दिल बेक़रार
कहीं कोई छलिया तू है हसीं
कहीं कोई रसिया माहजबीं
कोई कहे दिलरूबा
कोई रंगीला छैल-छबीला
कोई रंगीला छैल-छबीला
मुझको पुकारे पिया
फ़िर भी है दिल बेक़रार
फ़िर भी है दिल बेक़रार

जाये जहाँ मेरी नज़र
कलियाँ वहाँ जायें बिखर
फ़िर भी है दिल बेक़रार
फ़िर भी है दिल बेक़रार

कोई कहे ज़ालिम तू है परी
कोई कहे हाय तेरी जादूगरी
कोई कहे लूट लिया
कोई अलबेला साँझ की बेला
कोई अलबेला साँझ की बेला
मुझको पुकारे पिया
फ़िर भी है दिल बेक़रार
फ़िर भी है दिल बेक़रार

जाये जहाँ मेरी नज़र
कलियाँ वहाँ जायें बिखर
फ़िर भी है दिल बेक़रार

फ़िर भी है दिल बेक़रार
.................................................
Jaaye jahan meri nazar-Kalpana 1960

Artists: Padmini, Ashok Kumar

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Dec 25, 2019

ओ जी सावन में हूँ बेकरार-कल्पना १९६०

ओ जी, ऐ जी हिट्स के तहत आने वाला एक और
गीत है-फिल्म कल्पना में. एक गीत आपने १९६०
से सुना अब दूसरा सुनते हैं. इसगीत का संगीत भी
ओ पी नैयर ने दिया है.

गीत हसरत जयपुरी का लिखा हुआ है जिनके गीत
आपको ओ पी नैयर के संगीत में बेहद कम और
सबसे ज्यादा शंकर जयकिशन के संगीत में मिलेंगे.

फिल्म कल्पना में पद्मिनी और रागिनी दोनों बहनें
हैं. फिल्म में चार गीतकारों की सेवाएं ली गई हैं.




गीत के बोल:

ओ जी सावन में हूँ बेकरार
सजनवा से कह दीजो
ओ जी सावन में हूँ बेकरार
सजनवा से कह दीजो
मोरे घूँघट पे झांके बहार
सजनवा से कह दीजो
ओ जी सावन में हूँ बेकरार
सजनवा से कह दीजो
मोरे घूँघट पे झांके बहार
सजनवा से कह दीजो
ओ जी सावन में हूँ बेकरार

वो जो नहीं तो चमके न बिंदिया
वो जो नहीं तो चमके न बिंदिया
रहने लगी है आँखों में निंदिया
वो जो नहीं तो चमके न बिंदिया
रहने लगी है आँखों में निंदिया
वो जो नहीं तो चमके न बिंदिया
रहने लगी है आँखों में निंदिया
मोहे दम भर नहीं है करार
सजनवा से कह दीजो

ओ जी सावन में हूँ बेकरार
सजनवा से कह दीजो
मोरे घूँघट पे झांके बहार
सजनवा से कह दीजो
ओ जी सावन में हूँ बेकरार
सजनवा से कह दीजो
मोरे घूँघट पे झांके बहार
सजनवा से कह दीजो
ओ जी सावन में हूँ बेकरार

पडने लगे है बागों में झूले
पड़ने लगे है बागों में झूले
परदेसिया क्यों हमको ही भूले
पड़ने लगे है बागों में झूले
परदेसिया क्यों हमको ही भूले
पड़ने लगे है बागों में झूले
परदेसिया क्यों हमको ही भूले
पड़ने लगे है बागों में झूले
परदेसिया क्यों हमको ही भूले
मैं तो उनकी नजर का शिकार
सजनवा से कह दीजो
मोरे घूँघट पे झांके बहार
सजनवा से कह दीजो
ओ जी सावन में हूँ बेकरार
सजनवा से कह दीजो
मोरे घूँघट पे झांके बहार
सजनवा से कह दीजो
ओ जी सावन में हूँ बेकरार
……………………………………………
O ji sawan mein hoon beqarar-Kalpana 1960

Artist: Padmini

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आँखों से आँख मिली-मिटटी में सोना १९६०

सन १९६० की फिल्म मिटटी में सोना से एक गीत सुनते
हैं. इसे लिखा है राजा मेहँदी अली खान ने. गीतकार का
नाम मदन मोहन के संगीत वाले गीतों के लिए ज़्यादा
जाना जाता है.

फिल्म से आप आशा भोंसले का गाया हुआ लोकप्रिय गीत
सुन चुके हैं इधर. प्रस्तुत गीत गाया है रफ़ी और आशा ने.
गौरतलब है रफ़ी और आशा के युगल गीतों की संख्या
लाता और रफ़ी के गाये ड्वेटस् से ज़्यादा है लगभग ढाई
गुना.

गीत का मसला पॉपुलर वाला है-मीठी नोक झोंक. रोमांटिक
नोक-झोंक भी कहा जा सकता है इसे.




गीत के बोल:

आँखों से आँख मिली
दिल से दिल टकराने दो
ना बाबा माफ़ करो देर
हुई घर जाने दो
आँखों से आँख मिली
दिल से दिल टकराने दो
ना बाबा माफ़ करो
देर हुई घर जाने दो

क्यूँ इतना घबराती हो
हम जैसे दीवानों से
क्यूँ इतना घबराती हो
हम जैसे दीवानों से
शमा हूँ लेकिन डरती हूँ
तुम जैसे परवानो से
शमा हूँ लेकिन डरती हूँ
तुम जैसे परवानो से
परवाने को ज़ालिम
पास तो अपने आने दो
ना बाबा माफ़ करो
देर हुई घर जाने दो

आँखों से आँख मिली
दिल से दिल टकराने दो
ना बाबा माफ़ करो
देर हुई घर जाने दो

क्या इस दिल की हालत है
तुझको कुछ मालूम नहीं
क्या इस दिल की हालत है
तुझको कुछ मालूम नहीं
तुझको खूब समझती हूँ
मैं इतनी मासूम नहीं
तुझको खूब समझती हूँ
मैं इतनी मासूम नहीं
शर्मीली आँखों को
दिल पर तीर चलाने दो
ना बाबा माफ़ करो
देर हुई घर जाने दो

आँखों से आँख मिली
दिल से दिल टकराने दो
ना बाबा माफ़ करो
देर हुई घर जाने दो

कॉलेज की हर लड़की से
ज़िक्र तुम्हारा करता हूँ
कॉलेज की हर लड़की से
ज़िक्र तुम्हारा करता हूँ
सबसे यही कहते होगे
मैडम तुमपे मरता हूँ
सबसे यही कहते होगे
मैडम तुमपे मरता हूँ
अरे उल्फत में जो कुछ हो
मेरी कसम हो जाने दो
अरे ना बाबा माफ़ करो
देर हुई घर जाने दो
..............................................................
Aankhon se aankh mili-Mitti mein sona 1960

Artists:

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Dec 24, 2019

कैसे भीगे भीगे-अपना घर १९६०

आइये सुनें एक साइकिल सोंग. साईकिल सोंग वो होता
है जिसमें साईकिल गाती है. श्रेणी बनाने वालों की साइटों
से हमने ऐसा ही समझा, क्या किया जाए. वो तो हमें
भी समझ आ रहा है गाना किसने गाया मगर जब श्रेणी
बनाने के तरीके देखते हैं तो सर चकराता है. किसी गीत
में नायक ने सीधा हाथ ऊपर उठाया उसके लिए अलग
श्रेणी, उल्टा हाथ ऊपर उठाया उसके लिए अलग श्रेणी.

नायक नायिका साइकिल पर चले जा रहे हैं. किसी ज़माने
में साईकिल भी स्टेटस सिम्बल हुआ करती थी. प्रीति सागर
के पिताजी मोती सागर को भी किसी ज़माने में अभिनय
का शौक हुआ करता था. मल्हार, मक्खीचूस, बर्मा रोड,
छोटी छोटी बातें और अपना घर उनके अभिनय वाली कुछ
उल्लेखनीय फ़िल्में हैं.

सुनते हैं सुमन कल्यानपुर और रफ़ी का गाया गीत जिसे
लिखा है प्रेम धवन ने और इसकी धुन रवि ने बनाई है.
गीत के अंतरे से आपको अनाड़ी फिल्म के गीत का
अंतरा याद आएगा-वो चाँद खिला वो तारे हँसे.



गीत के बोल:

कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
आओ छेड़ दे तराने ज़रा प्यार के
देखो काली काली ये घटायें
चली जायें ना जी हमको पुकार के
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
आओ छेड़ दे तराने ज़रा प्यार के
देखो काली काली ये घटायें
चली जायें ना जी हमको पुकार के
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे

तुम साथ रहो जो मेरे
मैं राहें नई बना लूं
तेरी राहों के कांटे
अपनी पलकों से उठा लूँ
तुम साथ रहो जो मेरे
मैं राहें नई बना लूं
तेरी राहों के कांटें
अपनी पलकों से उठा लूँ
तू मेरा प्यार मेरी बहार
मेरा सिंगार सजना

कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
आओ छेड़ दे तराने ज़रा प्यार के
देखो काली काली ये घटायें
चली जायें ना जी हमको पुकार के
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे

इस दुनिया की नज़रों से
ओ दूर कहीं खो जाएँ
जी भर के जहां दिल झूमे
हम गीत मिलन के गायें
इस दुनिया की नज़रों से
ओ दूर कहीं खो जाएँ
जी भर के जहां दिल झूमे
हम गीत मिलन के गायें
सारे जग को छोड़
लिया तुझ से जोड़
जीवन ये मैंने अपना

कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
आओ छेड़ दे तराने ज़रा प्यार के
देखो काली काली ये घटायें
चली जायें ना जी हमको पुकार के
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे

हम इक मंज़िल के राही
बिछड़ेंगे कभी न मिल के
दुनिया वाले क्या जानें
अरमान हमारे दिल के
हम इक मंज़िल के राही
बिछड़ेंगे कभी न मिल के
दुनिया वाले क्या जानें
अरमान हमारे दिल के
कहो दिल की बात
दिन हो या रात
रहूँ तेरे साथ सजना

कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
आओ छेड़ दे तराने ज़रा प्यार के
देखो काली काली ये घटायें
चली जायें ना जी हमको पुकार के
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे

हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
…………………………………………..
Kaise bheege bheege-Apna ghar 1960

Artists: Moti Sagar, Nanda

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Dec 22, 2019

प्यारा प्यारा है समा-कल्पना १९६०

कजरा मोहब्बत वाला तो हमने सुना है मगर सुरमा
मोहब्बत वाला सुनने को दिल की हसरत अभी बाकी
है.

विश्वजीत पर फिल्माए गए गीत कजरा मोहब्बत वाला
से ये गीत भी याद आ जाता है. दोनों गीतों का संगीत
ओ पी नैयर की देन है मगर गीतकार अलग अलग हैं.
किस्मत फिल्म का गीत एस एच बिहारी का लिखा हुआ
है जब कि ये गीत राजा मेंहदी अली खान का.

इस गीत में कहीं-ले के पहला पहला प्यार भी छुपा हुआ
है. हाँ, वही सी आई डी फिल्म का गीत जो देव आनंद
पर फिल्माया गया है.



गीत के बोल:

प्यारा प्यारा है समा
सैयां जाते हो कहाँ
प्यारा प्यारा है समा
सैयां जाते हो कहाँ
लिपट गई तेरी बांकी नजरिया
मै तेरे कुर्बान
प्यारा प्यारा है समा
सैयां जाते हो कहाँ

मुखड़े पे हलकी हलकी
लाली गुलाब की
अँखिओं से झांकती है
मस्ती शराब की
मुखड़े पे हलकी हलकी
लाली गुलाब की
अँखिओं से झांकती है
मस्ती शराब की
हो ओ ओ ओ झूमती बहारें लाई
हस्ती शबाब की
कहिये जी कहिये क्या है
मर्ज़ी जनाब की
झूमती बहारें लाई
हस्ती शबाब की
कहिये जी कहिये क्या है
मर्ज़ी जनाब की
आँख शराबी गाल गुलाबी
होठों पर मुस्कान

प्यारा प्यारा है समा
सैयां जाते हो कहाँ
लिपट गई तेरी बांकी नजरिया
मै तेरे कुर्बान
प्यारा प्यारा है समा
ओ सैयां जाते हो कहाँ

कजरा मोहब्बत वाला
अंखियों में डाल के
आई हो कहाँ से ले के
नखरे कमाल के
कजरा मोहब्बत वाला
अंखियों में दाल के

आयी हो कहा से लेके
नखरे कमल के

हो ओ ओ ओ प्यार का खज़ाना हूँ मैं
रखना संभल के
चोर कोई ले न जाये
धोखे में डाल के
प्यार का खज़ाना हूँ मैं
रखना संभल के
चोर कोई ले न जाये
धोखे में डाल के
मुझको लगा ले प्यार के ताले
नन्ही सी हूँ जान

प्यारा प्यारा है समा
सैयां जाते हो कहाँ
लिपट गई तेरी बांकी नजरिया
मै तेरे कुर्बान
प्यारा प्यारा है समा
ओ सैयां जाते हो कहाँ
…………………………………………..
Pyara pyara hai sama-Kalpana 1960

Artists:

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Sep 19, 2019

दुनिया वालों...गली गली-छलिया १९६०

नारी की स्तिथि पर ये गीत बनाया गया है. पुरुष परधान
समाज में उसके लिए क्या जगह है इस पर प्रकाश डालने
की कोशिश की गई है.




गीत के बोल:

दुनिया वालों राम सीता की नई कहानी सुन लो
वाल्मीक से ख़ूब सुनी अब मेरी ज़ुबानी सुन लो

गली गली सीता रोये आज मेरे देश में
सीता देखी राम देखा आज नए भेष में
……………………………………………..
Duniya walon gali gali-Chhalia 1960

Artist:

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बीत गई है आधी रात-नाचे नागिन बाजे बीन १९६०

लता और रफ़ी के गाये सवा तीन सौ युगल गीतों में
अधिकाँश लोकप्रिय हैं. इनमें कुछ अतिरिक्त मधुरता
वाले गीत भी हैं.

आज सुनते हैं एक कम सुना गया गीत जो सन १९६०
की फिल्म नाचे नागिन बाजे बीन से चुना गया है.

नायक चंद्रशेखर ६० के दशक में ज्यादा सक्रिय थे.
चंद्रशेखर वैद्य ने सबसे पहले नायक की भूमिका की
थी वी शांताराम की फिल्म सुरंग के लिए.






बीत गई है आधी रात
बीत गई है आधी रात
चाँदनिया धीरे धीरे आना
कैसे कहूँ मैं दिल की बात
कैसे कहूँ मैं दिल की बात
…………………………………………
Beet gayi hai adhi raat-Nache nagin baje been 1960

Artists: Chandrashekhar, Kumkum

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Sep 17, 2019

मेरे टूटे हुए दिल से-छलिया १९६०

सुनते हैं फिल्म छलिया से मुकेश का गाया लोकप्रिय
गीत. इसे कमर जलालाबादी ने लिखा है और इसकी
दनु तैयार की है कल्याणजी आनंदजी ने.

अपनी सूची पर गौर फरमाने के बाद मैं ये पाया इस
गीत को बहुत पहले शामिल कर लेना चाहिए था. हम
खा-म-खां रेयर और अनजाने गीतों के चक्कर में पड़
गए और मक्खियाँ उड़ के गुड वाले ब्लॉग पर जा
पहुंची.

दिल ही एक ऐसी चीज़ है इंसान के शरीर में जो पद्य
में टूटती है बिखरती है. दिल की नाज़ुक रगें भी टूट
जाती हैं ऐसा हमने गीतों के माध्यम से समझा. उसके
अलावा वास्तविकता में तो हड्डियां टूटा करती हैं.



गीत के बोल:

मेरे टूटे हुए दिल से कोई तो आज ये पूछे
के तेरा हाल क्या है के तेरा हाल क्या है
मेरे टूटे हुए दिल से

किस्मत तेरी रीत निराली, ओ छलिये को छलने वाली
फूल खिला तो टूटी डाली
जिसे उलफ़त समझ बैठा, मेरी नज़रों का धोखा था
किसी की क्या खता है
मेरे टूटे हुए दिल से

माँगी मुहब्बत पाई जुदाई, दुनिया मुझको रास न आई
पहले कदम पर ठोकर खाई
सदा आज़ाद रहते थे हमें मालूम ही क्या था
मुहब्बत क्या बला है
मेरे टूटे हुए दिल से
………………………………………….
Mere toote hue dil se-Chhalia 1960

Artist: Raj Kapoor

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Sep 15, 2019

मेरी जान कुछ भी कीजिए –छलिया १९६०

मुकेश और लता मंगेशकर का गाया एक युगल गीत.

फिल्म: छलिया
वर्ष: १९६०
गीत: कमर जलालाबादी
संगीत: कल्याणजी आनंदजी



गीत के बोल:

मेरी जान
मेरी जान कुछ भी कीजिये
चाहे जान मेरी लीजिए
पर दिल हमीं को दीजिए
पर दिल हमीं को दीजिए

कभी याद हमें भी कीजिये
कभी नाम हमारा लीजिए
सपनों में आया कीजिये
सपनों में आया कीजिये
…………………………………………..
Mei jaan kuchh bhi kijiye-Chhalia 1960

Artists: Raj Kapoor, Nutan

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Aug 19, 2019

बहारों से पूछो-मेरा घर मेरे बच्चे १९६०

पूछो शब्द मुखड़े में आता है ऐसे दो गीत मुझे ध्यान हैं एक तो
यही जो आज आपको सुनवा रहा हूँ और दूसरा सलमान की फिल्म
कुर्बान का-दीवानों से पूछो. याद तो और भी हैं मगर सबसे ज्यादा
यही दो ध्यान आते हैं.

मेरा घर मेरे बच्चे का गीत एक भाई साहब यूँ गुनगुनाते थे-बहारों
से पूछो दे विल टेल यू. आगे की लाइनें ब्ला ब्ला ब्ला. इस वजह से
याद हो गया और फिल्म कुर्बान के गीत में हमने ही फिट कर दिया-
दे विल टेल यू उन भाई साहब के स्मरण में. ऐसे दिमागी स्फुरण
स्वतः होते हैं और संगीत प्रेमियों के दिमाग में ज़रूर होते हैं मगर ऐसे
दिमागी स्फुरण सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित होते आपने केवल मिमिक्री
शो वगैरह में देखा होगा.

गीत की बात करें जिसे मुकेश संग सुमन कल्याणपुर ने गाया है.
गीत में आपको सुबिराज और नाज़ की जोड़ी दिखलाई देगी जो असल
जीवन में भी जोड़ी है. सुबीरज पर फिल्माया एक गीत आपको हमने
सुनवाया था कुछ दिन पहले. हसरत जैपुरी के लिखे गीत पर एक
निहायत रूमानी तर्ज़ बनाई है सरदार मलिक ने. गीत की गति कम
है मगर निरंतरता शानदार है इसकी.



गीत के बोल:

बहारों से पूछो मेरे प्यार को तुम
तुम्हारे तराने हम गा रहे हैं
नजारों से पूछो मेरे प्यार को तुम
तुम्हारे लिए हम जिए जा रहे हैं
बहारों से पूछो

कभी मैं पपीहा तुम्हारे लिए हूँ
कभी मैं चकोर तुम्हारे लिए हूँ
अजी मैं भी कोयल तुम्हारे लिए हूँ
मोहब्बत में पागल तुम्हारे लिए हूँ
मेरे प्यार ने ही दिया रूप तुमको
ये गुंचे तुम्हारे जो नज़र आ रहे हैं
नजारों से पूछो

अगर जान तुम हो तो हम भी तो दिल हैं
भरे हैं हज़ारों मोहब्बत के अरमान
अगर तुम हो सागर तो मैं भी हूँ नदिया
है दोनों दिलों में मोहब्बत के तूफ़ान
मेरे प्यार का कोई किनारा नहीं है
तेरे प्यार में हम बहे जा रहे हैं
बहारों से पूछो

ये उड़ती घटायें मस्ती लुटाएं
जैसे तुम्हारी शराबी निगाहें
ये ठंडी हवा भरती है आहें
समझो इन्हें तुम हमारी सदाएं
फिजाओं में देखो ये बादल नहीं है
ये आँचल तुम्हारा लहरा रहा है

बहारों से पूछो मेरे प्यार को तुम
तुम्हारे तराने हम गा रहे हैं
नजारों से पूछो मेरे प्यार को तुम
तुम्हारे लिए हम जिए जा रहे हैं
बहारों से पूछो
.................................................................................
Baharon se poochho-Mera ghar mere bachche 1960

Artists: Subiraj, Naaz

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Aug 3, 2019

मचलती आरज़ू खड़ी बाहें पसारे-उसने कहा था १९६०

कॉम्प्लेक्स कम्पोज़ीशन सुने हुए बहुत दिन हुए. जब जब
सलिल चौधरी और हृदयनाथ मंगेशकर के नाम याद आते
हैं ऐसी धुनें भी याद आ जाती है.

आज जो गीत हमने चुना है वह लोकप्रिय गीत है. सलिल
के संगीत वाले ऐसे काफी सारे गीत हैं जो लोकप्रिय नहीं
नहीं मगर मधुर हैं. धीरे धीरे आपको सुनवायेंगे.

खेत खलिहान हिट्स-है ना जी. सही श्रेणी चुनी है ना हमने
इस गीत के लिए. किसी ने इस गीत को झूला सोंग भी कहा
है. गीत में नायिका झूले पर भी झूल लेती है.गीत में युवा
नंदा आपको कूदती फांदती नज़र आएँगी.




गीत के बोल:

ओ हो हो हो हो हो हो हो
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ

मचलती आरज़ू खड़ी बाहें पसारे
ओ मेरे साजना रे धड़कता दिल पुकारे
आ आ आ आ जा
हो ओ ओ ओये मचलती आरज़ू खड़ी बाहें पसारे
ओ मेरे साजना रे धड़कता दिल पुकारे
आ आ आ आ जा

मेरा आँचल पकड़ के कह रहा मेरा दिल
मेरा आँचल पकड़ के कह रहा मेरा दिल
ज़माने की निग़ाहों से यहाँ छुप छुप के मिल
यहीं तन्हाई में दिल की कली जायेगी खिल
हो ओ ओ ओये
मचलती आरज़ू खड़ी बाहें पसारे
ओ मेरे साजना रे धड़कता दिल पुकारे
आ आ आ आ जा

अजब मस्ती में डूबा गीत गाती है हवा
अजब मस्ती में डूबा गीत गाती है हवा
दुपट्टा मेरा रह रह के उड़ाती है हवा
करूँ क्या आते-जाते छेड़ जाती है हवा

हो ओ ओ ओये
मचलती आरज़ू खड़ी बाहें पसारे
ओ मेरे साजना रे धड़कता दिल पुकारे
आ आ आ आ जा

मिलन के मदभरे चंचल ख़्यालों में मगन
मिलन के मदभरे चंचल ख़्यालों में मगन
मैं यूँ तकती हूँ तेरी राह ओ मेरे सजन
बहारों के लिए हो एक दिन जैसे चमन

हो ओ ओ ओये
मचलती आरज़ू खड़ी बाहें पसारे
ओ मेरे साजना रे धड़कता दिल पुकारे
आ आ आ आ जा
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Machalt arzoo-Usne kaha tha 1960

Artist: Nanda

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Mar 20, 2019

छलिया मेरा नाम-शीर्षक गीत १९६०

कल्याणजी आनंदजी ने बहुत सारी फिल्मों के शीर्षक गीत
तैयार किये हों ऐसा याद नहीं पड़ता. इधर हो सकता है
राज कपूर ने डिमांड की हो. राज कपूर आवारा हो लिए,
अनाड़ी बन गये, दीवाना बन गये, श्री ४२० बन गये.
श्री ४२० में शीर्षक गीत नहीं है.

इस ब्लॉग के नियमित पाठक इस बात को जानते हैं कि
पहले से ही पिस्ते बादाम के टोटे पड़ गए थे अब तो
मूंगफली भी पहुँच के बाहर हो चली है दिमाग कैसे काम
करे.

उस पर जो सर्पीले जंतु यहाँ ब्लॉग पर पसर कर दिन भर
जाने क्या ढूंढते रहते हैं उससे और दिमाग का कबाडा हो
जाता है. पोस्ट के बीच का रंगीन फोटो भद्दे से धब्बे में
तब्दील हो जाता है.

गीत सुनते हैं जिसे कमर जलालाबादी ने लिखा है और
तर्ज़ बनाई कल्याणजी आनंदजी ने. गीत पर सेंसर की
कैंची चल गई थी और फिल्म के और एल पी के वर्ज़न
में अंतर है. ये मूल वर्ज़न है और इसमें एक अन्तरा
गायब है. वो सबसे आखिर में दे दिया गया है.



गीत के बोल:

छलिया मेरा नाम छलना मेरा काम
छलिया मेरा नाम छलना मेरा काम
हिंदू मुसलिम सिख इसाई सबको मेरा सलाम
छलिया मेरा नाम छलना मेरा काम
हिंदू मुसलिम सिख इसाई सबको मेरा सलाम
छलिया मेरा नाम छलना मेरा काम

रोक रहीं हैं राहें मेरी नैना तीखे तीखे
हम तो खाली माल के रसिया इश्क़ नहीं हम सीखे
इश्क़ नहीं हम सीखे
जहाँ भी देखा दाम वहीं निकाला काम
हिंदू मुसलिम सिख इसाई सबको मेरा सलाम

छलिया मेरा नाम छलना मेरा काम
हिंदू मुसलिम सिख इसाई सबको मेरा सलाम
छलिया मेरा नाम

मैं हूँ गलियों का शहज़ादा जो चाहूँ वो ले लूँ
शहज़ादे तलवार से खेलें मैं कैंची से खेलूँ
मैं कैंची से खेलूँ
मेहनत मेरा काम देना उसका काम
हिंदू मुसलिम सिख इसाई सबको मेरा सलाम

छलिया मेरा नाम छलना मेरा काम
हिंदू मुसलिम सिख इसाई सबको मेरा सलाम
छलिया मेरा नाम

देखो लोगों ज़रा तो सोचो बनी कहानी कैसे
तुमने मेरी रोटी छीनी छीनी मैंने पैसे
सीखा तुम से काम हुआ मैं बदनाम
हिंदू मुसलिम सिख इसाई सबको मेरा सलाम

छलिया मेरा नाम छलना मेरा काम
हिंदू मुसलिम सिख इसाई सबको मेरा सलाम
छलिया मेरा नाम
………………………………………………….
Chhalia mera naam-Chhalia 1960

Artist: Raj Kapoor

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Jan 20, 2019

हाय रे वो दिन क्यूँ ना आये-अनुराधा १९६०

फिल्म की नायिका एक प्रतिभाशाली गायिका है. एक
डॉक्टर से उसे प्रेम हो जाता है और शादी के बाद वो
डॉक्टर के साथ गांव आ जाती है जहाँ डॉक्टर अपनी
प्रेक्टिस करता है. धीरे धीरे डॉक्टर व्यस्त होता चला
जाता है और नायिका की भूमिका एक कामकाजी घरेलू
महिला तक सीमित रह जाती है.

गीत में नायिका हाय हाय करते हुए अपने सुनहरे दिन
याद कर रही है. शैलेन्द्र के लिखे गीत की तर्ज़ तैयार
की है सितार वादक पंडित रविशंकर ने. लता मंगेशकर
ने इसे गाया है. सिंगल हाय और डबल हाय में फर्क
होता है और दोनों के एक्सप्रेशन भी अलग अलग होते
हैं. परदे पर गीत गाने वाली नायिका हैं लीला नायडू.



गीत के बोल:

हाय रे वो दिन क्यों ना आये
जा जा के ऋतु लौट आये
हाय रे वो दिन क्यों ना आये

झिलमिल वो तारे कहाँ गये सारे
मन बाती जले बुझ जाये

हाय रे वो दिन क्यों ना आये

सूनी मेरी बीना संगीत बिना
सपनों की माला मुरझाये

हाय रे वो दिन क्यों ना आये
जा जा के ऋतु लौट आये
हाय रे वो दिन क्यों ना आये
………………………………………………….
Haye re wo din kyun na aaye-Anuradha 1960

Artists: Leela Naidu, Balraj Sahni, Nazir Hussain

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Jan 9, 2019

अटकन बटकन दही चटोकन-बारूद १९६०

बच्चों पर फिल्माए गीत मासूम से सुनाई देते हैं. इनके
निर्माण के समय विशेष ध्यान रखा जाता है. इन्हें सुन
कर पकी उम्र वालों को भी बचपन याद आ जाता है.

फिल्म बारूद में एक और बच्चा गीत है. इसमें जो छोटा
बच्चा है वो हैं हनी ईरानी. बच्चा स्मार्ट है और वो बड़ी
चीज़ों की ही मांग करता है. गर गीत में चौथा अंतरा
होता और उसमें पूछा जाता-गिलहरी लोगे या डायनोसार
वो डायनोसार का ही नाम लेता.

हसरत जयपुरी के बोल हैं और खय्याम का संगीत. इसे
लाता मंगेशकर ने गाया है और गाने में हनी ईरानी की
आवाज़ भी है.



गीत के बोल:

अटकन बटकन दही चटोकन
राजा गये दिल्ली
सात कटोरी लाये
एक कटोरी टूट गई
मुन्ने का दिल लूट गई
मुन्ने का दिल लूट गई

अटकन बटकन दही चटोकन
राजा गये दिल्ली
सात कटोरी लाये
एक कटोरी टूट गई
मुन्ने का दिल लूट गई
मुन्ने का दिल लूट गई

चंदा की गेंद तुझे ला दूंगी मुन्ना
ला दूंगी मुन्ना
बिजली का बल्ला मंगा दूंगी मुन्ना
मंगा दूंगी मुन्ना
मुन्ना मेरा ले ले लेगा
फिर तो घर में खेलेगा
फिर तो घर में खेलगा
गेंद लोगे या बल्ला
बल्ला
जुग जुग जियो मेरे लल्ला

अटकन बटकन दही चटोकन
राजा गये दिल्ली
सात कटोरी लाये
एक कटोरी टूट गई
मुन्ने का दिल लूट गई
मुन्ने का दिल लूट गई

बादल का हाथी हवाओं का घोड़ा
हवाओं का घोड़ा
बैठेगा मुन्ना लगायेगा कोड़ा
लगायेगा कोड़ा
हाथी फिर तो झूमेगा
देश देश में घूमेगा
देश देश में घूमेगा

घोड़ा लोगे या हाथी
हाथी
मैं मुन्ने की साथी

अटकन बटकन दही चटोकन
राजा गये दिल्ली
सात कटोरी लाये
एक कटोरी टूट गई
मुन्ने का दिल लूट गई
मुन्ने का दिल लूट गई
…………………………………………
Atkan batkan dahi chatokan-Barood 1960

Artists: Kumkum, Sheikh Mukhta, Honey Irani

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Jul 18, 2018

तुमसे ही मेरी ज़िंदगी-अपना घर १९६०

गीता दत्त का कोई गीत सुने काफी दिन हो गए. आज सुनते हैं
एक युगल गीत मुकेश और गीता दत्त का गाया हुआ. सन १९६०
की फिल्म अपना घर के लिए इसे लिखा प्रेम धवन ने और इसकी
धुन तैयार की संगीतकार रवि ने.

फिल्म शबनम के गीत ‘किस्मत में बिछडना था’ और बावरे नैन के
गीत ‘ख्यालों में किसी के’ काफी लोकप्रिय गीत हैं जहाँ तक मुकेश
और गीता दत्त के गाये युगल गीतों का सवाल है. इन दोनों के गाये
युगल गीत लगभग १५-२० की संख्या में हैं. प्रस्तुत गीत भी लोकप्रिय
है जिसे आप लंबे समय तक सुन सकते हैं.



गीत के बोल:

तुमसे ही मेरी ज़िंदगी मेरी बहार तुम
तुमसे ही मेरी ज़िंदगी मेरी बहार तुम
अपने ही दिल से पूछ लो किसका हो प्यार तुम
तुम से ही मेरी ज़िंदगी

गाती हुई हवाओं में तेरा ही गीत है
तेरा ही गीत है
साजन मेरे निगाहों में तेरी ही प्रीत है
तेरी ही प्रीत है
चंदा का रूप चाँदनी मेरा श्रृंगार तुम
तुमसे ही मेरी ज़िंदगी

ये मुस्कुराता आसमान ये झूमती ज़मीं
ये झूमती ज़मीं
मुझको ज़रा संभालना खो जाऊँ ना कहीं
खो जाऊँ ना कहीं
ऐसे में अपना कह भी दो बस एक बार तुम
तुमसे ही मेरी ज़िंदगी

आती है ऐसी प्यार की घड़ियाँ नसीब से
घड़ियाँ नसीब से
ये दिल की धड़कनें ज़रा सुन लो क़रीब से
सुन लो क़रीब से
आये हो ले के प्यार के सपने हज़ार तुम

अपने ही दिल से पूछ लो किसका प्यार हो तुम
तुमसे ही मेरी ज़िंदगी
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Tumse hi meri zindagi-Apna ghar 1960

Artists: Premnath, Shyama

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Apr 10, 2018

तुम एक बार मोहब्बत का इम्तिहान तो लो-बाबर १९६०

एक गीत सुनते हैं बाबर फिल्म से रफ़ी का गाया हुआ. इसे
लिखा है साहिर लुधियानवी ने और इसकी धुन तैयार की है
रोशन ने.

ऐतिहासिक फ़िल्मी कथाओं में बाबर, हुमायूँ और अकबर पर
फ़िल्में बन चुकी हैं. औरंगजेब नाम से भी एक फिल्म आई
मगर उसका कथानक अलग है.

गीत अज़रा और सोहन कपिला पर फिल्माया गया है. नायक
सोहन कपिला ८० के दशक में फिल्मों में दिखने वाली नायिका
पद्मिनी कपिला के पिता हैं.





गीत के बोल:


तुम एक बार मोहब्बत का इम्तिहान तो लो
मेरे जूनून मेरी वहशत का इम्तिहान तो लो
तुम एक बार मोहब्बत का इम्तिहान तो लो

सलाम-ए-शौक पर रंजिश बहरा पयाम ना दो
सलाम-ए-शौक पर रंजिश बहरा पयाम ना दो
मेरे ख़ुलूस को हिरास-ओ—हवास का नाम ना दो
मेरी वफ़ा की हकीकत का इम्तिहान तो लो
तुम एक बार मोहब्बत का इम्तिहान तो लो

ना तख़्त-ओ-ताज ना लाल-ओ-गुहर की हसरत है
ना तख़्त-ओ-ताज ना लाल-ओ-गुहर की हसरत है
तुम्हारे प्यार तुम्हारी नज़र की हसरत है
तुम अपने हुस्न की अजमत का इम्तिहान तो लो
तुम एक बार मोहब्बत का इम्तिहान तो लो

मैं अपनी जान भी दे दूं तो ऐतबार नहीं
मैं अपनी जान भी दे दूं तो ऐतबार नहीं
के तुमसे बढ़ के मुझे जिंदगी से प्यार नहीं
यूँ ही सही मेरी चाहत का इम्तिहान तो लो
तुम एक बार मोहब्बत का इम्तिहान तो लो
......................................................................
Tum ek baar mohabbat ka-Babar 1960

Artists: Azra, Sohan Kapila

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