Dec 6, 2015

हाय दिल से पीछा छूटे–रमैया वस्तावैया २०१३

सर्दी में ऑफर तब आते हैं जब सर्दी खत्म होने वाली होती है,
स्वेटर के साथ टोपी फ्री. इस बार तो सर्दी देर से पड़ी है तो
ऑफर भी देर से आयेंगे.

आज आपको एक और गीत सुनवाते हैं सर्दी बढ़ने की खुशी में.
गीत अनूठा है और बदलते दौरों की तुलना करने के लिए एक
अच्छा एग-जाम-फल है. पिछली पोस्ट में हमने चर्चा की थी
एक शब्द के ऊपर. तो जनाब, ये एग्ज़ाम्पल का अनूठा वर्ज़न
हमने सुना है और कई बार. दो अलग अलग व्यक्तियों के मुख
से.

पुराने गीतों में आपने सुना होगा-दिल से दिल की डोर बाँध ले,
दिल से दिल मिला ले, दिल से दिल चिपका ले, दिल से दिल
लगा, दिल पे दिल आया. आज ज़माना उससे आगे बढ़ गया
है और दिल से पीछा छुडाने की बात हो रही है, कुछ अलग सा
है.

संगीत सचिन-जिगर का है, इसके बोल लिखे है प्रिया पांचाल ने.
वे अब प्रिय सरैया कहलाती हैं. सचिन-जिगर की जोड़ी में से
जिगर सरैया की वे जीवन-संगिनी बन चुकी हैं. इसके अलावा
वे एक गायिका भी हैं. आज के समय में हमें बहुमुखी प्रतिभा
वाले कई कलाकार देखने को मिल रहे हैं जो पहले के समय
में कम दिखा करते थे. गायक हैं मोहित चौहान.



गीत के बोल:

यहाँ वहाँ गलियों में ढूँढता फिरे है दिल
उलझा है खुद उलझाये मुझको
ये इशारा, वो इशारे करता फिरे है दिल
बहका है खुद, बहकाए मुझको
यूँ ही अनजाने ही कभी मनाये रूठे
यूँ ही बहाने ये कभी बनाये झूठे
चुरा ले जाए कोई
तो हाय दिल से पीछा छूटे

रामा रामा रामा रे
हाय रामा रामा रे
हो चुरा ले जाए
रामा रामा रामा रे

जाने ना, माने ना
जो बोलूँ समझे ना
सोचूँ मैं सोचूँ फिर भी
बात ये बूझे ना
अपने में रहता है
जहां से नाता टूटे
यूँ ही बहाने ये कभी बनाये झूठे
चुरा ले जाए कोई
तो हाय दिल से पीछा छूटे

कच्चे से, पक्के से
इसके इरादे हैं
रेत सी ख्वाहिशें हैं
काँच से वादे हैं
नाम ये ख्वाबों में कई
मिटाए-ढूंढे
यूँ ही बहाने ये कभी बनाये झूठे
चुरा ले जाए कोई
तो हाय दिल से पीछा छूटे
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Haye dil se peechha chhoote-Ramaiya Vastavaiya 2013

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