हवा के साथ साथ-सीता और गीता १९७२
हेमा मालिनी के कैरियर की सबसे पहली और बड़ी सुपर हिट
फिल्म थी. गौरतलब है हिंदी फिल्म सिनेमा इतिहास में जुड़वाँ
भाई-बहन वाली कई फ़िल्में बनी हैं मगर सबसे ज्यादा तवज्जो
दी जाती है दिलीप कुमार अभिनीत ‘राम और श्याम’ और हेमा
अभिनीत ‘सीता और गीता’ को. फिल्म में उनके साथ दो नायक
हैं-संजीव कुमार और धर्मेन्द्र.
एक अच्छा रोमांटिक गीत है ये जिसे आनंद बक्षी ने लिखा है.
इसे गा रहे हैं आशा भोंसले और किशोर कुमार. आपने पुराने
आयोडेक्स के विज्ञापन में “ऊह आह आउच’ जैसे शब्द सुने होंगे.
ये कभी चोट लग जाती है तब मुंह से निकालते हैं. हमारे मुंह से
कभी नहीं निकले ! मैं मुंह से आउच की आवाज़ निकालने वाले
शख्स/शख्सी को सालों से ढूंढ रहा हूँ. ऊह और आह तो ज़रूर
सुने हैं और कई बार सुने हैं. शब्द बना है तो कोई न कोई वजह
ज़रूर होगी, ज़ाहिर सी बात है. किसी ने तो निकाला ही होगा
अपने मुंह से. हो सकता है कई लोगों ने निकाला हो. समय के
साथ “आउच’ कहने की कला लुप्त हो गयी हो, ये भी संभव है.
समय के साथ आवाजें भी बदल जाती हैं और जनता की पसंद भी.
अभी नाक से आवाजें निकालने वालों की चांदी है, हो सकता है आगे
चल के शरीर के दूसरे छेदों से आवाज़ निकलने वालों की हो.
वैसे आजकल के रीमिक्स में आने वाली कुछ आवाजें ऐसा भ्रम पैदा
करती हैं मानो शरीर के किसी खास छेद से निकल रही हों.
गीत सुनते हैं. ये बड़ी हिट फिल्म थी इस पर चर्चा अगले गीत के
प्रस्तुति के वक्त.
गीत के बोल:
हवा के साथ साथ,
घटा के संग संग
हवा के साथ साथ,
घटा के संग संग
ओ साथी चल
मुझे ले के साथ चल तू,
यू ही दिन रात चल तू
संभल मेरे साथ चल तू,
ले हाथों में हाथ चल तू
ओ साथी चल
एक तो ये मौसम है बड़ा सुहाना
उसपे अपना दिल भी है दीवाना
परबत से आ के ना टकरा जाना
तू बन के बादल
मुझे ले के साथ चल तू,
यू ही दिन रात चल तू
संभल मेरे साथ चल तू,
ले हाथों में हाथ चल तू
ओ साथी चल
हँसती है ये दुनियाँ तो हँसने दे
नागिन बन के इस रुत को डसने दे
मुझको अपनी आखों में बसने दे
तू बन के काजल
ओ साथी चल
अपनी रेशमी जुल्फें लहराने दे
मुझको अपनी बाहों में आने दे
थक गई आज बहुत मैं अब जाने दे ना
मिलेंगे फिर कल
मुझे ले के साथ चल तू,
यू ही दिन रात चल तू
संभल मेरे साथ चल तू,
ले हाथों में हाथ चल तू
ओ साथी चल
........................................................................
Hawa ke saath saath ,,,o sathi chal-Seeta aur Geeta 1972

0 comments:
Post a Comment