ये जो चिलमन है-महबूब की मेहँदी १९७१
पैदाइशी विद्वान लाखों में इक्का दुक्का होते हैं. आम आदमी
के अपने तौर तरीके होते हैं चीज़ें देखने और सीखने के. एक
ऐसा समय था जब हमें चिलमन शब्द का मतलब मालूम
नहीं था और हम इसे चिमनी का कोई भाई बहन समझ लिया
करते थे. कभी कभी लगता ये चिलम का कोई सगा सम्बन्धी
है.
एक पुराना गीत सुनते थे-किसने चिलमन से मारा उससे हम
अनुमान लगते कि चिलमन कोई तीर चलाने वाला कुछ कुछ
आइटम है. जैसे जैसे सयाने होते गए और शब्द समझते गए
चिलमन का मतलब भी क्लीयर होता चला गया. चिलमन परदे
को कहते हैं ये हमें एक शायर महोदय ने ही बतलाया. उसका
स्पेसिफिक मीनिंग भी बतलाया-झाँकने वाला पर्दा या जिसमें
हम झाँक सकें. इसका सबसे अच्छा उदाहरण समझ आया-चिक
जो बेंत की पतली पतली खपच्चियों से बनता है. पर्दा शब्द
पुल्लिंग है, मगर इस गीत के अनुसार चिलमन स्त्रीलिंग शब्द
है.
गीत रफ़ी ने गाया है राजेश खन्ना के लिए और आनंद बक्षी
के कलम से निकला ये एक सुपर हिट गीत है. फिल्म के बाकी
गीत भी खूब बजे हैं और बजते रहते हैं.
गीत के बोल:
ये जो चिलमन है, दुश्मन हैं हमारी
कितनी शर्मीली दुल्हन है हमारी
दूसरा और कोई यहाँ क्यों रहे
हुस्न और इश्क के दरमियाँ क्यों रहे
ये यहाँ क्यों रहे, हाँ जी हाँ क्यों रहे
ये जो आँचल है, शिकवा है हमारा
क्यों छुपाता है, चेहरा ये तुम्हारा
ये जो चिलमन है
कैसे दीदार आशिक तुम्हारा करे
रूख-ए-रोशन का कैसे नज़ारा करे
ओ इशारा करे, हाँ पुकारा करे
ये जो गेसू है, बादल हैं कसम से
कैसे बिखरे हैं गालों पे सनम के
ये जो चिलमन है
रुख़ से परदा ज़रा जो सरकने लगा
उफ़ ये कमबख्त दिल क्यों धड़कने लगा
भड़कने लगा, दम अटकने लगा
ये जो धड़कन है, दुश्मन है हमारी
कैसे दिल संभले, उलझन है हमारी
ये जो चिलमन है, दुश्मन हैं हमारी
कितनी शर्मीली दुल्हन है हमारी
ये जो चिलमन है, दुश्मन हैं हमारी
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Ye jo chilman hai-Mehboob ki mehndi 1971
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