उदास होना मन की प्रकृति है. किसी को महसूस होता है और
किसी को नहीं. आम मनुष्य को तो होता ही है, कम या अधिक
मगर तटस्थ विचारों वाले योगियों को जो मोह माया से परे
हैं उन्हें इस तरह के आभास नहीं होते. वे इस मायाजगत में
विचरते मिलते भी तो नहीं.
सुनते हैं सन १९७१ की फिल्म सीमा से एक गीत जो कि एक
युगल गीत है और इसका संगीत शंकर जयकिशन ने तैयार
किया है.
गीत के विवरण हम बाद में समझते रहेंगे, पहले इसे सुन लें.
गीत के बोल:
जब भी ये दिल उदास होता है
जाने कौन आसपास होता है
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Jab bhi ye dil udaas hota hai_Seema 1971
आज आपको सुनवाते हैं सन १९७१ की फिल्म लाखों में एक
से एक युगल गीत. किशोर और लता की आवाजों वाले इस
गाने की रचना आनंद बक्षी ने की है. पंचम की धुन है.
महमूद और राधा सलूजा पर इसे फ़िल्माया गया है. आज ही
के दिन २००४ में महमूद ने इस संसार को छोड़ दिया था.
गीत के बोल:
जोगी ओ जोगी अरे प्यार में क्या होगा
हाय रे जोगी ओ जोगी प्यार में क्या होगा
हर दिन सुहाना होगा अच्छा हर रात सुहानी होगी
जोगी ओ जोगी अरे प्यार में क्या होगा
हाय रे जोगी ओ जोगी प्यार में क्या होगा
हर दिन सुहाना होगा अच्छा हर रात सुहानी होगी
बन जायेंगी रातें फिर सपनों की बारातें
गुज़रेगा अब जीवन बस करते प्रेम की बातें
हमसे करो तुम ये वादा वादा तो ना तोड़ दोगी
जोगी ओ जोगी अरे प्यार में क्या होगा
हाय रे जोगी ओ जोगी प्यार में क्या होगा
हर दिन सुहाना होगा अच्छा हर रात सुहानी होगी
चंदा तारे सोये ये मस्त नज़ारे सोये
रात का जादू छाया हम तुम बिन सारे सोये
कैसे हमें नींद आये हम दोनों हैं दिल के रोगी
जोगी ओ जोगी अरे प्यार में क्या होगा
हाय रे जोगी ओ जोगी प्यार में क्या होगा
हर दिन सुहाना होगा अच्छा हर रात सुहानी होगी
फूलों की पायल हो और तारों का झूमर हो
प्रेम नगर में सैंया ए काश हमारा घर हो
घर की ज़रूरत नहीं है तुम मेरे दिल में रहोगी
जोगी ओ जोगी अरे प्यार में क्या होगा
हाय रे जोगी ओ जोगी प्यार में क्या होगा
हर दिन सुहाना होगा अच्छा हर रात सुहानी होगी
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Jogi o jogi-Lakhon mein ek 1971
आप आये(और वो) बाहर आई फिल्म से एक गीत सुनते हैं.
इसे लता मंगेशकर और किशोर कुमार ने गाया है. संगीत
तैयार किया है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने.
अब आप पूछिए ये गीत हम आपको क्यूँ सुनवा रहे हैं?
आज २१ जुलाई, आनंद बक्षी का जन्मदिन है.
फ़िल्मी बारिश भी है गीत में. सुहाना मौसम है और
बाकी की इस गाने की केमिस्ट्री, फिज़िक्स, ज्योग्राफी,
जूलोजी, बोटनी, पोलिटिकल साइंस, आर्ट्स, फाइन आर्ट्स
सब उच्च स्टार पर हैं.
राजेंद्र कुमार पर फिल्माया गए और किशोर कुमार द्वारा
गाये गए गीत आप उँगलियों पर गिन सकते हैं.
गीत के बोल:
तुमको भी तो ऐसा ही कुछ होता होगा ओ सजना
कैसा कैसा
तेरी याद सताती है नींद नहीं आती है रातों में
ओ तेरी याद सताती है नींद नहीं आती है रातों में
तुमको भी तो ऐसा ही कुछ होता होगा ओ सजनी
कैसा.
तेरा प्यार सताता है चैन नहीं आता है रातों में
ओ तेरा प्याज सताता है चैन नहीं आता है रातों में
तुमको भी तो ऐसा ही कुछ होता होगा हा हा हा
मेरी हालत जैसी है तेरा हाल भी ऐसा है
मेरी हालत जैसी है तेरा हाल भी ऐसा है
हल्का हल्का सा जिया में जाने दर्द ये कैसा है
तुमको भी तो ऐसा ही कुछ होता होगा ओ सजनी
कैसा कैसा
तारे गिनता मैं रहता हूँ जागता रहता हूँ रातों में
ओ तारे गिनता मैं रहता हूँ जागता रहता हूँ रातों में
इन भीगी फ़िज़ाओं से इन ठंडी हवाओं से
इन भीगी फ़िज़ाओं से इन ठंडी हवाओं से
आग सी लगती है जिया में सावन की घटाओं से ...
तुमको भी तो ऐसा ही कुछ होता होगा ओ सजना
कैसा
इन्तज़ार तेरा करती हूँ आहें मैं भरती हूँ रातों में
ओ इन्तज़ार तेरा करती हूँ आहें मैं भरती हूँ रातों में
ये मस्त नज़र तेरी मेरे होश उड़ाती है
ये मस्त नज़र तेरी मेरे होश उड़ाती है
ये तेरी मस्ती मुझे भी मदहोश बनाती है.
तुमको भी तो ऐसा ही कुछ होता होगा ओ सजना
कैसा
रोज़ ख़्वाब में तू आता है दिल धड़काता है रातों में
रोज़ ख़्वाब में तू आता है दिल धड़काता है रातों में
तुमको भी तो ऐसा ही कुछ होता होगा
डैश डैश डैश अंडरस्टुड
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Tumko bhi to aisa hi kuchh-Aap aayr bahar aayi 1971
का मेसेज आता है. क्या दूसरे ब्लोगर्स को भी ऐसी
कुछ दिक्कत आई? गूगल भाई बतलायेंगे उनको
क्या समस्या है?
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आज कवि गोपालदास नीरज की पुण्यतिथि है. वे
हमसे दो साल पहले ही बिछड़े थे. कवी सम्मेलनों की
शान रहने वाले नीरज ने हिंदी फिल्मों के लिए सत्तर
के दशक में काफी गीत लिखे.
उनकी लेखनी का लोहा हिंदी फ़िल्मी गाने सुनने वाले
भी मानते हैं.
उनकी कलम से निकला एक युगल गीत सुनते हैं फिल्म
गैम्बलर से जो सन १९७१ की फिल्म है.
लता और किशोर के गाये इस गीत की धुन तैयार की
है सचिन देव बर्मन ने.
गीत के बोल:
अपने होंठों की बंसी बना ले मुझे
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Apne honthon ki bansi bana le-Gambler 1971
फिल्म की नायिका सस्ते सुलभ ज्योतिषी के पास
अपने हाथ की रेखाएं दिखलाने जाती है और ज्योतिषी
चूंकि फ़िल्मी है अपने अंदाज़ में उसको कुछ बतलाता
है. ये हैं जॉनी वॉकर. २५ पैसे में तीन सवाल का ऑफर
है. उस ज़माने में पच्चीस पैसे में काफी कुछ आ जाता
था.
खयाली पुलाव की विशेषता ये हैं कि उसे बिना फ्राईंग
पैन और कुकर के बनाया जा सकता है. इसमें किसी
सामग्री की आवश्यकता नहीं होती.
सुनते हैं लता मंगेशकर का गाया अपने ज़माने का
लोक-प्रिय गीत. जी हैं ये आम जनता को बहुत भाता
था, खास वर्ग का पता नहीं.
गीत के बोल
हो ओ ओ ओ बलमा सिपहिया
हाय रे तेरी दम्बूक से डर लागे
हो लागे रे जियरा धक् धक् धक् धक्
धक् धक् जोर से भागे
ओ रे बलमा सिपहिया
हाय रे तेरी दम्बूक से डर लागे
हो लागे रे जियरा धक् धक् धक् धक्
धक् धक् जोर से भागे
हो जियरा धक् धक् धक् धक्
धक् धक् जोर से भागे
शर्मा के प्रीतम तेरी प्रेम भरी बातों से
ढांप दिया रे जलता दीपक मैंने हाथों से
कल पीपल की छाँव में बातें होंगी गांव में
दैया री दैया हाय रे मेरी बैरन पड़ोसन जागे
जागे रे कंगना खन खन खन खन
खन खन बाजन लागे
बलमा सिपहिया
हाय रे तेरी दम्बूक से डर लागे
हो लागे रे जियरा धक् धक् धक् धक्
धक् धक् जोर से भागे
शाम को पकड़ा हाथ सवेरे तक ना छोड़ा रे
कैसे बेदर्दी से बाबुल ने नाता जोड़ा रे
तौबा राम दुहाई रे मुड गयी मेरी कलाई रे
मर गयी मैं नैया हाय रे जाने इब का हो
इसके आगे
बाजे रे पायल छन छन छन छन
छन छन जोर से बाजे
बलमा सिपहिया
हाय रे तेरी दम्बूक से डर लागे
हो लागे रे जियरा धक् धक् धक् धक्
धक् धक् जोर से भागे
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Balma Sipahiya-Dushman 1971
समय किसको दोस्त और किसको दुश्मन का तमगा
पहना दे इंसान इस बात से अनजान रहता है. फिल्म
का कथानक ऐसा है जिसमें नायक को परिस्थितियां
दुश्मन की उपाधि दे देती हैं.
फिल्म के सभी गाने अपने समय के बड़े हिट रहे हैं.
फिल्म से सुनते हैं अगला गीत जो युगल गीत है
लता मंगेशकर और किशोर कुमार का गाया हुआ. इसे
आनंद बक्षी ने लिखा है और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने
इसका संगीत तैयार किया है.
क्या देखा क्या देखा
इक दुश्मन जो दोस्तों से प्यारा है
इक दुश्मन जो दोस्तों से प्यारा है
मैने देखा तूने देखा
मैने देखा तूने देखा
इसने देखा उसने देखा
सबने देखा
क्या देखा क्या देखा
एक गाँव जो शहरों से भी न्यारा है
एक गाँव जो शहरों से भी न्यारा है
दुश्मन दुश्मन जो दोस्तों से प्यारा है
आज सज़ा देंगे तुझको हम
तेरी सब भूलों की
आज सज़ा देंगे तुझको हम
तेरी सब भूलों की
तेरे गलें में हम डालेंगे
ये माला फूलों की
इस गाँव की रीत यही है
जीवन संगीत यही है
आज के दिन का गीत यही है
यही है
मैने देखा तूने देखा
मैने देखा तूने देखा
इसने देखा उसने देखा
सबने देखा
क्या देखा क्या देखा
इक चाँद जो सबकी आँख का तारा है
इक चाँद जो सबकी आँख का तारा है
दुश्मन दुश्मन जो दोस्तों से प्यारा है
जंजीरों से भी पक्के हैं
प्रेम के कच्चे धागे
जंजीरों से भी पक्के हैं
प्रेम के कच्चे धागे
इन कच्चे धागों को तोड़ के
कैदी कैसे तोड़ के भागे
आया ले के हरियाली से
इन बागों का माली तू
इन खेतों का हाली तू
हाली तू
मैने देखा तूने देखा
मैने देखा तूने देखा
इसने देखा उसने देखा
सबने देखा
एक कैदी जो पहरेदार हमारा है
एक कैदी जो पहरेदार हमारा है
दुश्मन दुश्मन जो दोस्तों से प्यारा है
सबने माफ़ किया मुझको पर
मैं हूँ जिसका दोषी
सबने माफ़ किया मुझको पर
मैं हूँ जिसका दोषी
कब टूटेगी उसके घायल
होँठों की ख़ामोशी
वो भी माफ़ करे तो जानूँ
मन को साफ़ करे तो जानूँ
इन्साफ़ करे तो जानूँ
तो जानूँ
मेरा नहीं तेरा नहीं
मेरा नहीं तेरा नहीं
इसका नहीं उसका नहीं
किसी का नहीं
ये दोष तक़दीर का सारा है
ये दोष तक़दीर का सारा है
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Maine dekha tone dekha-Dushman 1971
ये दुनिया किसकी है. बड़े बड़े दावेदार आये और गए, भविष्य
में आते रहेंगे. हाँ, अभी कोई सूरमा ऐसा नहीं सुनने में आया
जिसने कहा हो ये पूरा संसार मेरी जागीर है. बड़े बड़े उद्योगपति
ये ख्वाब देखते रहते हैं कि उनकी बनाई हुई चड्डियाँ कुत्ते और
बिल्लियाँ भी पहनने लगें, उनके बनाये टूथपेस्ट से चिडियाएँ भी
चोंच चमकाने लगें. संभव नहीं है.
खैर ये गीत चोरों के ऊपर केंद्रित है और आज भी ये ऐसा लगता
है मानो वर्तमान समय के लिए लिखा गया हो.
साहिर लुधियानवी के बोल, चित्रगुप्त का संगीत और किशोर कुमार
की आवाज़. सुनिए ये अनूठा गीत.
गीत के बोल:
करी जो हमने ज़रा सी चोरी
मिली जेल में चक्की
बड़ी डकैती करे कोई तो
कुर्सी है पक्की
तमाशा देखो ज़माना देखो
ये दुनिया तेरी न मेरी
मोटे चोरों की
ये दुनिया तेरी न मेरी
मोटे चोरों की
तमाशा देखो ज़माना देखो
ये दुनिया तेरी न मेरी
मोटे चोरों की
आज जो साहूकार बने हैं
आज जो साहूकार बने हैं कल थे भिखारी
ये दौलत सारी कहाँ से मारी
कहो ये बिज़नेस है के लूट
लूट है जी लूट है जी लूट है
आज जो साहूकार बने हैं
आज जो साहूकार बने हैं कल थे भिखारी
ये दौलत सारी कहाँ से मारी
कहो ये बिज़नेस है के लूट
लूट है जी लूट है जी लूट है
अरे सेठ महाजन और बनियों की
अरे सेठ महाजन और बनियों की
कब ले न जोरी करें हैं चोरी मुनाफ़ाख़ोरी
कहो मैं सच बोला या झूठ
कहो भाई कहो
सच बोलो छो दादा ठीक बोलो छो
फिर तमाशा देखो ज़माना देखो
दुनिया तेरी न मेरी
मोटे चोरों की
ये दुनिया तेरी न मेरी
मोटे चोरों की
दीन धर्म का शोर मचा कर
अरे दीन धर्म का शोर मचा कर
बनता जो नेता
जो चक्कर देता है जो वोटें लेता
जो बकता रोज़ अनाप शनाप
हाँ दीन धर्म का शोर मचा कर
अरे दीन धर्म का शोर मचा कर
बनता जो नेता
जो चक्कर देता है जो वोटें लेता
जो बकता रोज़ अनाप शनाप
हाँ नफरत की ज्वाला दहका कर
अरे नफरत की ज्वाला दहका कर
करता जो धंधा गरजता बंदा
जो खाता चन्दा
कहो क्या कम है उसका पाप
बोल पापे बोल
..??..??..??
तो फिर
तमाशा देखो ज़माना देखो
दुनिया तेरी न मेरी
मोटे चोरों की
ये दुनिया तेरी न मेरी
मोटे चोरों की
रेत मिले सीमेंट से जिसके
का कहे भाई
हाँ रेत मिले सीमेंट से जिसके
पुल कई टूटे जो जग को लूटे
बनाये बिल झूठे
कहो वो पाजी है या नेक
पाजी बेईमान गद्दार
अरे काले भाव दवा जो बेचे
अकल का कोल्हू
काले भाव दवा जो बेचे
छोटी से छोटी वो भी खोटी
वो गर्दन मोटी
नहीं क्या कातिल नंबर एक
काले भाव दवा जो बेचे
छोटी से छोटी वो भी खोटी
वो गर्दन मोटी
नहीं क्या कातिल नंबर एक
बोल वडी बोल
वडी ठीक कह्यो थई
तो तो तो
तमाशा देखो ज़माना देखो
ये दुनिया तेरी न मेरी
मोटे चोरों की
ये दुनिया तेरी न मेरी
मोटे चोरों की
तमाशा देखो ज़माना देखो
ये दुनिया तेरी न मेरी
मोटे चोरों की
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Ye duniya na teri na meri-Sansar 1971
कई शब्दों से फिल्म के कथानक के बारे में कयास
लगाना कठिन कार्य होता है. अधिकार फिल्म भी
ऐसी है, बिना फिल्म देखे इसकी कहानी समझ नहीं
आएगी. कुछ को तो देखने के बाद भी समझ नहीं
आई.
सुनते हैं फिल्म से एक गीत मन्ना डे का गाया हुआ.
बोल रमेश पन्त के हैं और संगीत आर डी बर्मन का.
गीत में हास्य का पुट है.
गीत के बोल:
अरे फैशन की दीवानी ये गुड़ियें हैं जापानी
अरे फैशन की दीवानी ये गुड़ियें हैं जापानी
कौन कहेगा बोलो इनको लड़की हिंदुस्तानी
बोलो बोलो बोलो बोलो बोलो ना
फैशन की दीवानी ये गुड़ियें हैं जापानी
अरे कौन कहेगा बोलो इनको लड़की हिंदुस्तानी
कानों तक बाल कटा के पाउडर से गाल सजा के
अच्छी ख़ासी सूरत का रक्खा ये हाल बना के
कानों तक बाल कटाई के पाउडर से गाल सजाई के
अच्छी ख़ासी सूरत का रक्खा ये हाल बना के
हाथ हैं सूने माथा नंगा आँखें सुरमेदानी
फैशन की दीवानी ये गुड़ियें हैं जापानी
अरे कौन कहेगा बोलो इनको लड़की हिंदुस्तानी
बोलो बोलो बोलो बोलो बोलो ना
फैशन की दीवानी ये गुड़ियें हैं जापानी
अरे कौन कहेगा बोलो इनको लड़की हिंदुस्तानी
तौबा तौबा ये ब्यूटी नक़ली है बिलकुल झूठी
इनसे की जिसने शादी उसकी तो किस्मत फूटी
तौबा तौबा ये ब्यूटी नक़ली है बिलकुल झूठी
इनसे की जिसने शादी उसकी तो किस्मत फूटी
दूर से उनको ताका करना गर हो जान बचानी
अरे फैशन की दीवानी ये गुड़ियें हैं जापानी
अरे कौन कहेगा बोलो इनको लड़की हिंदुस्तानी
बोलो बोलो बोलो बोलो बोलो ना
अरे फैशन की दीवानी ये गुड़ियें हैं जापानी
अरे कौन कहेगा बोलो इनको लड़की हिंदुस्तानी
वा वा वा वा वा वा वा वा
वा वा वा वा वा वा वा वा
हे हे हे हे
इक दिन इस देश में नारी समझी जाती थी देवी
हो के अब बीस बरस की ये कहलाती है बेबी
इक दिन इस देश में नारी समझी जाती थी देवी
हो के अब बीस बरस की ये कहलाती है बेबी
बेबी है पर नक़ल बिदेसी ये कैसी है रानी
फैशन की दीवानी ये गुड़ियें हैं जापानी
अरे कौन कहेगा बोलो इनको लड़की हिंदुस्तानी
बोलो बोलो बोलो बोलो बोलो ना
इक दिन इस देश में नारी समझी जाती थी देवी
हो के अब बीस बरस की ये कहलाती है बेबी
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Fashion ki deewani-Adhikar 1971
सन १९७१ में आर डी बर्मन के संगीत वाली काफी फ़िल्में आयीं.
इनमें से एक है अमर प्रेम जिसके कई गाने अमर हो चुके हैं.
फिल्म के गीत लिखे हैं आनंद बक्षी ने.
फिल्म की थीम से जुड़ा जो गीत है वो आज हम सुनेंगे. एक
छोटे बच्चे के लिए एक नारी का प्रेम-ये इस फिल्म की कहानी
का एक पंक्ति में सार है. प्रेम तो प्रेम है, वो जाति, धर्म, जीव के
रूप, प्रारूप को नहीं देखता. बच्चा बड़ा होने के बाद भी उस स्नेह
और ममता के भावों को नहीं भुला पाता. शर्मिला टैगोर ने फिल्म
में यादगार भूमिका निभाई है.
आर डी बर्मन के संगीत वाला एक भजन आपने कल सुना था
जो फिल्म अधिकार में है आशा भोंसले का गाया हुआ. आज जो
भजन हम सुनेंगे वो लता मंगेशकर का गाया हुआ है. ये फ़िल्मी
भजन ही है जिसमें बाल गोपाल का जिक्र है. बेहद लोकप्रिय है.
एक बार फिर से बोलो माखनचोर नन्दकिशोर मुरली वाले की जय.
गीत के बोल:
बड़ा नटखट है रे कृष्ण कन्हैया
का करे यशोदा मैय्या हाँ
बड़ा नटखट है रे कृष्ण कन्हैया
का करे यशोदा मैय्या हो
बड़ा नटखट है रे
ढूँढे री अंखियाँ उसे चहुँ ओर
जाने कहाँ छुप गया नंदकिशोर
ढूँढे री अंखियाँ उसे चहुँ ओर
जाने कहाँ छुप गया नंदकिशोर
उड़ गया ऐसे जैसे पुरवैया
का करे यशोदा मैय्या मैया रे हाँ
हाँ का करे यशोदा मैय्या हो
आ तोहे मै गले से लगा लूँ
लागे ना किसी की नज़र मन मे छुपा लूँ
आ तोहे मै गले से लगा लूँ
लागे ना किसी की नज़र मन मे छुपा लूँ
धूप जगत है रे ममता है छैंया
का करे यशोदा मैय्या हो
बड़ा नटखट है रे
मेरे जीवन का तू एक ही सपना
जो कोई देखे तोहे समझे वो अपना
मेरे जीवन का तू एक ही सपना
जो कोई देखे तोहे समझे वो अपना
सब का है प्यारा हो
सब का है प्यारा बंसी बजैया
का करे यशोदा मैय्या मैया रे हाँ
हाँ बड़ा नटखट है रे कृष्ण कन्हैया
का करे यशोदा मैय्या हो
बड़ा नटखट है रे
…………………………………………….
Bada natkhat hai re-Amar Prem 1971
एक फ़िल्मी भजन सुनते हैं. भजन सुनने से मन निर्मल
होता है. बोलो मुरली वाले की जय.
रमेश पन्त के बोल हैं, पंचम का संगीत और इसे गाया है
आशा भोंसले ने. अभिनेत्री नंदा पर इसे फिल्माया गया है.
गीत के बोल:
तुम तो सबके हो रखवाले बहुत सुना है नाम
तुम तो सबके हो रखवाले बहुत सुना है नाम
मैं तब जानूँ जब तुम मेरी बिगड़ी बना दो श्याम
तुम तो सबके हो रखवाले
बिनती सुन लो मुझपे कर दो बस इतना उपकार
वापस दे दो जिसका तुमने छीना है अधिकार
मेरे वचन की लाज बचा लो
मेरे वचन की लाज बचा लो अब तो तुम्हारा काम
तुम तो सबके हो रखवाले बहुत सुना है नाम
सबका जीवन सफल बनाती इन चरणों की धूल
बनके सुहागन रही मैं अभागन मुझसे हुई क्या भूल
जग के स्वामी अंतर्यामी
जग के स्वामी अंतर्यामी तुम को लाखों प्रणाम
तुम तो सबके हो रखवाले बहुत सुना है नाम
मैं तब जानूँ जब तुम मेरी बिगड़ी बना दो श्याम
बिगड़ी बना दो श्याम
तुम तो सबके हो रखवाले
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Tum to sabke ho rakhwale-Adhikar 1971
प्रस्तुत गीत फिल्म में ४ बार टुकड़ों में प्रकट होता है.
मजरूह सुल्तानपुरी के लिखे गीत को मन्ना डे ने गाया
है. इस फिल्म के गानों में यही सबसे कम सुना गया
गीत है.
फिल्मों में दो भाइयों के बिछुड़ने की एक सबसे बड़ी
वजह कुम्भ का मेला हुआ करती थी. आज की फ़िल्में
थोड़ी अपग्रेड हो गयी हैं. आज शॉपिंग मॉल जैसी जगह
पर भाई बिछड़ते हैं. पुरानी फिल्मों में कुछ और वजहें
भी हुआ करती थीं मसलन कोई बच्चे को चुरा ले गया,
किसी दुर्घटना घटने की वजह से.
गीत के बोल:
देखो रे हुआ लहू से लहू कैसे जुदा
देखो रे हुआ लहू से लहू कैसे जुदा
दोनों टुकड़े एक ही दिल के बिछड़े ऐसे के नहीं मिलते
देखो रे हुआ लहू से लहू कैसे जुदा
फूल खिले दो साथ मगर हाय ऐसे भी माली आँख ना मीचे
फूल खिले दो साथ मगर हाय ऐसे भी माली आँख ना मीचे
एक तो महके लग के गले से एक पड़ा कहीं पांव के नीचे
खेल है किस्मत का
देखो रे हुआ लहू से लहू कैसे जुदा
दोनों टुकड़े एक ही दिल के बिछड़े ऐसे के नहीं मिलते
देखो रे हुआ लहू से लहू कैसे जुदा
कैसा उजाला है ये न जाने हाथ को हाथ नहीं पहचाने
कैसा उजाला है ये न जाने हाथ को हाथ नहीं पहचाने
अचरज है कितना
देखो रे हुआ लहू से लहू कैसे जुदा
कैसा मिलन है आज एक भाई भाई को यूँ सीने से लगाये
जैसे के अपने हाथों में हो कोई अपनी ही लाश उठाये
चले साँसों में चिता खेल है किस्मत का
देखो रे हुआ लहू से लहू कैसे जुदा
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Dekho re hua lahu se-Mela 1971
सुनते हैं एक हर्षोल्लास से भरा युगल गीत फिल्म मेला से. जीवन के मेले में हंसी खुशी के पल निकालना और समझना कठिन काम है. हंसी खुशी के पल पलक झपकते ओझल होने को आतुर रहते हैं. इन्हें बिताना एक कला है.
गीत फिल्माया गया है संजय खान और मुमताज़ पर. लता और रफ़ी के गाये इस युगल गीत को मजरूह ने लिखा है और इसकी धुन तैयार की है पंचम ने.
गीत के बोल:
एक बार रख दे कदम ज़रा झूम के एक बार चल दे तू धरती को चूम के रास्ता तेरा है मंजिल तेरी है एक बार रख दे कदम ज़रा झूम के एक बार चल दे तू धरती को चूम के रास्ता तेरा है मंजिल तेरी है एक बार रख दे कदम ज़रा झूम के
सूरज कितना जवान है कितना हसीं है ये उजाला गलियां कब से पुकारे आये कोई दिलवाला राही राही ये दिन कैसा मतवाला
एक बार रख दे कदम ज़रा झूम के एक बार चल दे तू धरती को चूम के रास्ता तेरा है मंजिल तेरी है
हिम्मत वाले चला चल नीले अम्बर के साये साये कबसे तुझको निहारे धरती चुनरिया बिछाये यूँ चल यूँ चल के दुनिया तेरे पीछे पीछे आये
एक बार रख दे कदम ज़रा झूम के एक बार चल दे तू धरती को चूम के रास्ता तेरा है मंजिल तेरी है एक बार चल दे तू धरती को चूम के
जीना चाहे तो जग में जीवन मिला ना उसे कैसे ऐसे आँचल उड़ाओ नाचे सावन रुत जैसे सुन लो सुन लो घुँघरू बोले कैसे कैसे
एक बार रख दे कदम ज़रा झूम के एक बार चल दे तू धरती को चूम के रास्ता तेरा है मंजिल तेरी है एक बार चल दे तू धरती को चूम के ……………………………………………………………. Ek baar rakh de kadam-Mela 1971
हिंदी फिल्म में आपको कई ऐसे कथानक मिल जायेंगे जिसमें नायक नायिका के साथ साइड किक और साइड किकनी मौजूद हैं. कभी कभी ये साइड किक नायक पर भरी पड़ते दिखते हैं.
नायक राजेंद्रनाथ ने कई फिल्मों में नायक के सहायक या यूँ कहें साइड किक की भूमिका निभाई है. उनके ऊपर कई गीत भी फिल्माए गए हैं.
एक उल्लेखनीय गीत है फिल्म मेला से जिसमें हास्य भरपूर है और गीत के अंत में आपको नायक से सिम्पैथी हो जायेगी. गीत संगीत क्रमशः मजरूह और आर डी बर्मन के हैं.
गीत के बोल:
मेरी सखियों बोलो ज़रा मुखडा तो खोलो हाँ मेरी सखियों बोलो ज़रा मुखडा तो खोलो बतलाओ इस पागल को अब हम क्या सजा दें मिल के इन्साफ कर दो कर दो ना कहूँ मैं हाथ जोड़ के बस तुम में एक छोड़ के कहूँ मैं हाथ जोड़ के बस तुम में एक छोड़ के ओ मेरी माताओं ओ मेरी बहनों मुझको माफ कर दो कर दो ना मुझको माफ कर दो
देखो जाने ना पाए बाहों में भर के इसको जकड लो भोला सा है बेचारा थोड़ी मोहब्बत इसे भी कर लो हाय कैसी मोहब्बत मैं जानता हूँ ये सारी बातें देखूं समझूं मैं तुमको मेरे भी सर हैं सर में दो आँखें तो इसका सर सहला के और तबला बजा के हाँ इसका सर सहला के और तबला बजा के इसकी दोनों आँखों में सितारे नचा दें इसकी दिन में रात कर दो कर दो ना इसकी दिन में रात कर दो
कहूँ मैं हाथ जोड़ के बस तुम में एक छोड़ के हाँ कहूँ मैं हाथ जोड़ के बस तुम में एक छोड़ के ओ मेरी माताओं ओ मेरी बहनों मुझको माफ कर दो कर दो ना मुझको माफ कर दो
गोरियों मारो ना मुझको दुःख जायेगी ये नाज़ुक कलाई काम है घर में तुम्हारा चूल्हा जलाना करना धुलाई हो आओ गालों की इसके कर दें धुलाई दे दे के ताली ऐसी रंगत बना दें जैसे मुख पे कानों की लाली रुको ज़रा देवियों इतना गुस्सा ना करो रुको ज़रा देवियों इतना गुस्सा ना करो कुछ तुमसे ना मांगूं बाद झुमके वाली को मेरे साथ कर दो कर दो ना मेरे साथ कर दो
मेरी सखियों बोलो ज़रा मुखडा तो खोलो हाँ मेरी सखियों बोलो ज़रा मुखडा तो खोलो बतलाओ इस पागल को अब हम क्या सजा दें इसकी चंडिया साफ़ कर दो कर दो ना ना चप्पल जूती थप्पड़ …………………………………………………………. Meri sakhiyon bolo-Mela 1971
लाइब्रेरी और बगीचे का संगम हो ना हो हाथों में किताब और
फूल तो लिए ही जा सकते हैं. फ़िल्मी गीत का हीरो तो हाथ
में हेलिकोप्टर भी पकड़ सकता है फूल क्या चीज़ है.
इसलिए कुछ भी संभव है. हेलिकोप्टर खिलौने वाला नहीं बड़ा
वाला. आपके दिमाग में खिलौने वाला क्यूँ आया जी. क्या आपने
रजनीकांत की या दक्षिण की लेटेस्ट फ़िल्में नहीं फ़िल्में देखी हैं?
सुनते हैं संसार फिल्म से अगला गीत किशोर कुमार की आवाज़
में. बोल एक बार फिर से साहिर के हैं और संगीत चित्रगुप्त का.
जुल्फों में किसी ज़माने में जूं अटका करती थी. समय ने बहुत
कुछ बदल दिया. अब डेंड्रफ अटक जाया करती है. इस गीत में
जुलाब शब्द ना ढूँढें, नहीं मिलेगा.
गीत के बोल:
हाथों में किताब बालों में गुलाब करना है आज किसी का हिसाब
मेरी जान इरादा क्या है हाँ मेरी जान इरादा क्या है
हाथों में किताब बालों में गुलाब करना है आज किसी का हिसाब
मेरी जान इरादा क्या है हाँ मेरी जान इरादा क्या है
कर जा ज़रा नज़र से बात मुंह ना फिर अदा के साथ
कर जा ज़रा नज़र से बात मुंह ना फिर अदा के साथ
जुल्फों को दे ना झटके जुल्फों में दिल है अटका
बहुत दिन बीते अकले जीते रोज नहीं टाल यारों का सवाल
पीछे लगे आज हुआ आधा साल
मेरी जान इरादा क्या है मेरी जान इरादा क्या है
उफ़ ये तेरी लचकती चाल दिल का मेरे बुरा है हाल
उफ़ ये तेरी लचकती चाल दिल का मेरे बुरा है हाल
थोडा सा रुक के हंस जा मतलब ये है के फंस जा
बहुत दिन बीते अकले जीते कटे नहीं रात बने नहीं बात
जागा जागा प्यार मांगे तेरा हाथ
मेरी जान इरादा क्या है हाँ मेरी जान इरादा क्या है
यूँ भी किसी का देगी साथ मेहँदी रचेगी तेरे हाथ
यूँ भी किसी का देगी साथ मेहँदी रचेगी तेरे हाथ
होना तो है परायी मुझ में है क्या बुराई
बहुत दिन बीते अकले जीते तेरा ये गुलाम पूछे दिल थाम
राज़ी है तो बोल भेजूं पैगाम
मेरी जान इरादा क्या है हाँ मेरी जान इरादा क्या है
हाथों में किताब बालों में गुलाब करना है आज किसी का हिसाब
मेरी जान इरादा क्या है हाँ मेरी जान इरादा क्या है
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Hathon mein kitaab-Sansar 1971
सन १९७१ की फिल्म संसार में ‘बस अब तरसना छोड़ो’ के अलावा
बहुत कुछ है. बाकायदा एक पूरी कहानी है जिसमें ढेर सारे पात्र हैं.
फिल्म में नवीन निश्चल और अनुपमा प्रमुख कलाकार हैं. अनुपमा
उन नवागंतुकों में से एक हैं जिन्होंने सिनेमा संसार में कदम तो
रखा मगर लंबी पारी नहीं खेल पायीं.
प्रस्तुत गीत कृष्णा कल्ले द्वारा गाया गया है. परदे पर इसे जयश्री
टी पर फिल्माया गया है. बोल साहिर लुधियानवी के हैं और इसका
संगीत तैयार किया है चित्रगुप्त ने. चित्रगुप्त और साहिर के कॉम्बो
वाले गीत फिल्म वासना में भी हैं. जयश्री पर फिल्माया गया इसी
प्रकार का एक गीत फिल्म सावन भादो(१९७०) में भी है.
गीत के बोल:
राजा जानी
राजा जानी ना मारो नैननवा के तीर रे
राजा जानी ना मारो नैननवा के तीर रे
तीर रे तीर रे
राजा जानी
अभी नादान हूँ मैं नाज़ुक जान हूँ
मुझे ऐसे ना मारो यूं ही हलकान हूँ
मुझे ऐसे ना मारो यूं ही हलकान हूँ
हाय तीखी तीखी नज़रों से देखो न सांवरिया
सह न सकूंगी अभी कच्ची है उमरिया
जी कच्ची है उमरिया
मारो ना कटारी दो धारी उठे पीर रे
राजा जानी हाय दिलबर जानी
राजा जानी ना मारो नैननवा के तीर रे
राजा जानी
ज़बान के नर्म हो नज़र के गर्म हो
अरे जी तौबा तौबा
बड़े बेशर्म हो अरे जी तौबा तौबा
बड़े बेशर्म हो
हाय दिल तुम्हे सौंपा मैंने दिलदार मान के
बन गए तुम तो सैयां बैरी मेरी जान के
जी बैरी मेरी जान के
मारो ना कटारी दो धारी उठे पीर रे
राजा जानी दिलबर जानी
राजा जानी ना मारो नैननवा के तीर रे
राजा जानी ना मारो नैननवा के तीर रे तीर रे तीर रे
राजा जानी
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Raja jani na maaro-Sansar 1971
सुनते हैं एक मधुर युगल गीत फिल्म शर्मीली से. एस डी बर्मन
के संगीत वाले युगल गीत काफी कसावट लिए होते हैं. पिछली
काफी सारी पोस्ट पहले हमने एक रिपीट वैल्यू थ्योरी की बात
की थी, उस अनुसार इस गीत की रिपीट वैल्यू ज़बरदस्त है.
नीरज गीतकार हैं और इसे लता मंगेशकर और किशोर कुमार
ने गाया है. शशि कपूर और राखी पर इसे फिल्माया गया है.
फिल्म में राखी डबल रोल में हैं.
गीत के बोल:
आज मदहोश हुआ जाए रे
मेरा मन मेरा मन मेरा मन
बिना ही बात मुस्कुराए रे
मेरा मन मेरा मन मेरा मन
ओ री कली सजा तू डोली
ओ री लहर पहना तू पायल
ओ री नदी दिखा तू दर्पन
ओ री किरण उड़ा तू आँचल
एक जोगन है बनी आज दुल्हन हो ओ
आओ उड़ जाएं कहीं बन के पवन
आज मदहोश हुआ जाए रे
मेरा मन मेरा मन मेरा मन
शरारत करने को ललचाए रे
मेरा मन मेरा मन मेरा मन
ऐ यहाँ हमें ज़माना देखे
तो
आओ चलो कहीं छुप जाएं
अच्छा
यहाँ हमें ज़माना देखे
आओ चलो कहीं छुप जाएं
कैसे कहो प्यासे रह जाएं
तू मेरी मैं हूँ तेरा तेरी क़सम हो ओ
मैं तेरी तू मेरा मेरी क़सम हो ओ
आज मदहोश हुआ जाए रे
मेरा मन मेरा मन मेरा मन
रोम रोम बहे सुरधारा
अँग अँग बजे शहनाई
जीवन सारा मिला एक पल में
जाने कैसी घड़ी ये आई
छू लिया आज मैंने सारा गगन हो ओ
नाचे मन आज मोरा झूम छनन छनन हो ओ ओ ओ
आज मधोश हुआ जाए रे
मेरा मन मेरा मन मेरा मन
शरारत करने को ललचाए रे
बिना ही बात मुस्कुराए रे
मेरा मन
मेरा मन
मेरा मन
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Aaj madhosh hua jaaye re-Sharmili 1973
आपने चित्रगुप्त का ६० के दशक तक का संगीत अवश्य ही
सुना होगा. वो कुछ अलग तरह का था. ७० के दशक तक
पहुँचते पहुँचते चित्रगुप्त ने भी अपने संगीत में काफी बदलाव
किये. इस बारे में हमने फिल्म परदेसी के गीतों को सुनवाते
वक्त चर्चा की थी.
फिजिक्स का एक फेनोमेना है-म्यूचुअल इंडक्शन. सन १९७१
में शंकर जयकिशन के संगीत वाली काफी सारी फ़िल्में आयीं.
१९७३ तक शंकर जयकिशन की उपस्थिति नियमित रूप से
बनी रही उसके बाद धीरे धीरे उनका काम कम होता चला.
आप आसानी से इस गीत को आँखों आँखों में फिल्म में भी
फिट कर सकते हैं. या यूँ कहें आँखों आँखों में का शीर्षक
गीत को इस फिल्म में. उसके अलावा जो दो संगीतकार और
याद आते हैं इस गीत से वो हैं-आर डी बर्मन और सोनिक-ओमी.
ये कुछ दुर्लभ सा कोम्बिनेशन है-साहिर और चित्रगुप्त का.
गीत गाया है किशोर कुमार और आशा भोंसले ने और इसे
फिल्माया गया है नवीन निश्चल और अनुपमा ?? पर.
गीत के बोल:
हो हो हो ए हे हे हा हा हा
ए बस अब तरसना छोडो
यूँ ही शरमाना छोडो
बस अब तरसना छोडो
यूँ ही शरमाना छोडो
जो दिल में प्यार का तूफ़ान है
हम जान गए हैं
जो दिल में प्यार का तूफ़ान है
हम जान गए हैं
हमें बहकाना छोडो
जी पीछे आना छोडो
हमें बहकाना छोडो
जी पीछे आना छोडो
तुम्हें जिस चीज़ का अरमान है
हम जान गए हैं
तुम्हें जिस चीज़ का अरमान है
हम जान गए हैं
इतना निखर के कोई आये तो
आये है किसी के लुभाने को
इतना निखर के कोई आये तो
आये है किसी के लुभाने को
तनहा किसी को कोई पाए
तो ना मचले गले से लगाने को
कितना छुपाएँ तेरी झुकती निगाहें
ये किसके क़त्ल का सामान है
हम जान गए हैं
ये किसके क़त्ल का सामान है
हम जान गए हैं
हमें बहकाना छोडो
जी पीछे आना छोडो
तुम्हें जिस चीज़ का अरमान है
हम जान गए हैं
छेड़ो ना हमको हटो जाओ
तुम्हें ऐसा ना था हमने जाना
छेड़ो ना हमको हटो जाओ
तुम्हें ऐसा ना था हमने जाना
छोडो बहाने अजी आओ
भला अपनों से कैसा शरमाना
पकड़ों ना आंचल मेरा जकडो ना बाहें
कि जितनी आपसे पहचान है
हम जान गए हैं
कि जितनी आपसे पहचान है
हम जान गए हैं
बस अब तरसना छोडो
यूँ ही शरमाना छोडो
जो दिल में प्यार का तूफ़ान है
हम जान गए हैं
करनी हैं तुमसे कई बातें
वो जो कानों में कहने वाली हैं
करनी हैं तुमसे कई बातें
वो जो कानों में कहने वाली हैं
जानूं मैं जानूं सभी घातें
वो चालें जो देखी भाली हैं
जुल्फों के नीचे दे दो दिल को पनाहें
ये मुश्किल किस कदर आसान है
हम जान गए हैं
ये मुश्किल किस कदर आसान है
हम जान गए हैं
हमें बहकाना छोडो
जी पीछे आना छोडो
तुम्हें जिस चीज़ का अरमान है
हम जान गए हैं
तुम्हें जिस चीज़ का अरमान है
हम जान गए हैं
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Bas ab tarsana chhodo-Sansar 1971
लक्ष्मी छाया के नाम बॉलीवुड के कुछ गीत हैं जिनमें केवल
वो ही नज़र आती हैं दर्शकों को. एक ऐसा ही लोकप्रिय गीत
है राज खोसला निर्देशित सन १९७१ की मेरा गांव मेरा देश
फिल्म में. लता मंगेशकर का गाया ये गीत आज भी, उतना
तो नहीं, मगर लोकप्रिय ज़रूर है.
गीत में लक्ष्मी छाया के चेहरे के भाव किसी खलनायिका से
हैं और नायिका भयभीत दिखाई देती है.
गीत के बोल:
मार दिया जाये के छोड़ दिया जाये
बोल तेरे साथ क्या सलूक किया जाये
मार दिया जाये के छोड़ दिया जाये
बोल तेरे साथ क्या सलूक किया जाये
बोल तेरे साथ क्या सलूक किया जाये
जाम दिया जाये के ज़हर दिया जाये
बोल तेरे साथ क्या सलूक किया जाये
बोल तेरे साथ क्या सलूक किया जाये
कांच की चूडियाँ भी मैंने खनकाई
अपनी जुल्फें भी मैंने तो बिखराई
कांच की चूडियाँ भी मैंने खनकाई
अपनी जुल्फें भी मैंने तो बिखराई
तुझको जंजीरें हाँ जंजीरें तुझको हाँ हाँ
तुझको लेकिन जंजीरें पसंद आयीं
कैद किया जाये के छोड़ दिया जाये
बोल तेरे साथ क्या सलूक किया जाये
बोल तेरे साथ क्या सलूक किया जाये
आ रही है हंसी तेरी कहानी पे
आ रहा है तरस तेरी जवानी पे
आ रही है हंसी तेरी कहानी पे
आ रहा है तरस तेरी जवानी पे
आज तू है मेरी तू है तू है मेरी
आज तू है मेरी मेहरबानी पे
तोड़ दिया जाये के दिल जोड़ दिया जाये
बोल तेरे साथ क्या सलूक किया जाये
बोल तेरे साथ क्या सलूक किया जाये
एक बुझती हुई शमा के परवाने
आखरी आरजू क्या है मस्ताने
एक बुझती हुई शमा के परवाने
आखरी आरजू क्या है मस्ताने
आज तेरा गिरेबां तेरा तेरा गिरेबां
आज तेरा गिरेबां ओ दीवाने
चाक किया जाये के छोड़ दिया जाये
बोल तेरे साथ क्या सलूक किया जाये
बोल तेरे साथ क्या सलूक किया जाये
मार दिया जाये के छोड़ दिया जाये
बोल तेरे साथ क्या सलूक किया जाये
बोल तेरे साथ क्या सलूक किया जाये
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Maar diya jaaye ke-Mera gaon mera desh 1971
कविवर नीरज की स्मृति में एक गीत सुनते हैं आज जिसे हमने
फिल्म गैम्बलर से चुना है हमारे पाठकों के लिए. क्या खूब कहा
था उन्होंने- आदमी को आदमी बनाने के लिए जिंदगी में प्यार की
कहानी चाहिए.
जीवन की आपाधापी में बहुत कुछ छूट जाता है. कोई पैसे कमाने
से रह जाता है तो कोई खुशियों के पल. सम्पूर्णता जीवन में शायद
ही किसी को नसीब होती हो. कुछ ना कुछ तो कमी रह ही जाती
है. दृष्टिकोण पर भी निर्भर करता है. चाह बहुत अधिक हो तो
व्यक्ति प्यासा सा ही रहता है. संतोष जीवन की एक बड़ी कुंजी है
जिससे बड़ी बड़ी समस्याएं सुलझ जाती हैं.
फिल्म के नायक को पैसे की डरकर थी, वो उसे मिल गया फिर
उसे अब किस बात की कमी है, जाने के लिए सुनते हैं ये गीत.
देव आनंद पर फिल्माया गया ये गीत अपने गति परिवर्तन के
लिए जाना जाता है. दो मूड हैं इस गीत में. गीत का संगीत तैयार
किया है एस डी बर्मन ने.
गीत के बोल:
कैसा है मेरे दिल तू खिलाड़ी
भर के भी है तेरा प्याला खाली
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Kaisa hai mere dil too khiladi-Gambler 1971
एक फिल्म है सन १९७१ की पुतली बाई, जिसे देखने का सौभाग्य
ना जाने कितनों को हुआ होगा. इस फिल्म के गाने ज़बरदस्त हिट
हुए थे. फिल्म से दो गीत हम आपको पहले सुनवा चुके हैं. आज
सुनते हैं फिल्म का एक और चर्चित गीत जो आशा भोंसले की
आवाज़ में है.
गीत अनजान का है और संगीत जय कुमार पर्ते का. जय कुमार के
संगीत वाली एक और फिल्म है-जान हाज़िर है जिसके २ गीत भी
चर्चित हुए थे अपने समय में. हिंदी सिनेमा के कुछ ऐसे गीतों में
से एक है ये जिसका मुखडा और अंतरे दोनों समान रूप से आकर्षक
हैं. हम बड़े बड़े नाम वाले संगीतकारों से ऐसे करिश्मों की उम्मीद
करते हैं मगर कभी कभार कम जाने पहचाने संगीतकार भी तहलका
मचा दिया करते हैं.
गीत के बोल:
ओ ओ ओ ओ ओ रसिया
मेरे घुँघरू के
मेरे घुँघरू के बोल अनमोल रसिया
मेरे घुँघरू के बोल अनमोल रसिया
बोल क्या देगा
हाय हाय क्या देगा तू इनका मोल रसिया
बोल क्या देगा तू इनका मोल रसिया
मेरे घुँघरू के बोल अनमोल रसिया
मेरे घुँघरू के बोल अनमोल रसिया
बोल क्या देगा
हाँ हाँ क्या देगा तू इनका मोल रसिया
बोल क्या देगा तू इनका मोल रसिया
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Mere ghunghroo ke bol-Putlibai 1971