जीना तो है उसी का-अधिकार १९७१
चर्चा की जाए. ४-५ वजह हैं इसकी. निर्देशक एस. एम्.
सागर की फिल्म अधिकार जो १९७१ की फिल्म है और
जिसमें अशोक कुमार उर्फ दादामुनि के साथ देव मुखर्जी
और नंदा की मुख्य भूमिकाएं हैं, कुछ अलग हट के बनी
फिल्म है. ये “अलग हट के” बम्बैया फिल्म उद्योग का बड़ा
ही प्रसिद्ध जुमला है. वैसे भी जितनी फिल्मों में देव मुखर्जी
ने काम किया है वो सब अलग हट के और कुछ अलग सी
फ़िल्में हैं.
वो ४-५ वजह
१) बन्ने खां भोपाली का उल्लेख
२) प्रेरक बोल-औरों के काम आना
३) दुल्हन की तुलना फुलझड़ी से करना
४) ये कव्वाली ही इसलिए :P
प्रस्तुत गीत लिखा है रमेश पन्त ने जिसे गाया है रफ़ी ने
आर डी बर्मन की धुन पर. इस फिल्माया गया है प्राण और
अशोक कुमार पर.
गीत के बोल:
ऐसी चीज़ सुनाएँ के महफ़िल दे ताली पे ताली
वरना अपना नाम नहीं बन्ने खां भोपाली
मुन्ने मियां बधाई बनो खुश होनहार
दोनों जहां की खुशियाँ हों आप पर निसार
बचपन हो खुशगवार जवानी सदाबहार
अल्लाह करे ये दिन आये हज़ार बार
जीना तो है उसी का जिसने ये राज़ जाना
जीना तो है उसी का जिसने ये राज़ जाना
है काम आदमी का औरों के काम आना
जीना तो है उसी का जिसने ये राज़ जाना
किसी ने कहा तू है तारों का राजा
किसी ने कहा आजा मेरे पास आ जा
किसी ने दुआ दी किसी ने दी बधाई
सबकी आँखों का तू तारा बने
तेरी ही रौशनी में चमके तेरा घराना
है काम आदमी का औरों के काम आना
जीना तो है उसी का जिसने ये राज़ जाना
दिल लगाकर तू पढ़ना हमेश आगे बढ़ना
सच का दामन न छूटे चाहे ये दुनिया रूठे
काम तू अच्छा करना सिर्फ अल्लाह से डरना
सभी को गले लगा कर मुहब्बत में लुट जाना
मोहब्बत वो खज़ाना है कभी जो कम नहीं होता
है जिसके पास दौलत उसे कुछ गम नहीं होता.
मेरा तेरा कर के जो मरते गोरे काले का भेद करते
उनको ये समझाना सब लोग हैं बराबर
इतना न भूल जाना
है काम आदमी का
है काम आदमी का औरों के काम आना
जीना तो है उसी का जिसने ये राज़ जाना
सूरते पे माशा अल्लाह वो बात है अभी से
तड़पेंगे दिल हजारों गुजरोगे जिस गली से
डोली में जब बिठा कर लाओगे फुलझड़ी को
जिंदा रहे तो हम भी देखेंगे उस घडी को
अगर अल्लाह ने चाहा तो हम उस दिन भी आयेंगे
बधाई हमने गाई है तो हम सेहरा भी गायेंगे
अगर अल्लाह ने चाह तो हम उस दिन भी आयेंगे
बधाई हमने गाई है तो हम सेहरा भी गायेंगे
चाँद सूरज भी आयेंगे नीचे दूल्हा दुल्हन के पीछे
फूल बरसेंगे आएगा जब खुशी का हँसता हुआ ज़माना
है काम आदमी का
है काम आदमी का औरों के काम आना
जीना तो है उसी का जिसने ये राज़ जाना
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Jeena to hai usi ka-Adhikar 1971
Artists-Pran, Ashok Kumar

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