Aug 2, 2016

उम्मीद की झोली में-अंगारे १९५४

१९५४ की फिल्म अंगारे से एक गीत सुनवाते हैं आपको
जो लता मंगेशकर का गाया हुआ है. नर्गिस और नासिर
खान अभिनीत इस फिल्म के गीत साहिर लुधियानवी ने
लिखे हैं.

अंगारे फिल्म के गीत कम सुने गए गीत हैं मगर फिल्म
के गीत मधुर हैं और बोल काफी दमदार. साहिर के लिखे
गीत हैं आखिर को.

सचिन देव बर्मन ने कालांतर में एक अलग शैली विकसित
कर ली थी और उनका संगीत अलग से पहचान में आ जाता
है. इस गीत की बात अगर मैं करूं तो इसमें काफी सारे
संगीतकारों की शैली का समावेश है मानो समकालीनों को
याद किया जा रहा हो-सी रामचंद्र, नौशाद, अनिल बिश्वास
और शंकर जयकिशन.

एक बात बिलकुल अलग करती है गीत की वो है गायिका
की टोनल क्वालिटी जिसका बर्मन दादा विशेष ख्याल रखते
थे. जब गायक की आवाज़ अपने उत्तम पर होती थी तभी वे
गीत रेकोर्ड किया करते थे. इस बात को वे पहले जांच लिया
करते थे कि किस गायक का गला खराब है या किसको
जुकाम हुआ है.



गीत के बोल:

मेरे खेवनहार क्यूं मुझे छोड चले मझधार
मेरे खेवनहार

उम्मीद की झोली में
क्यों भर दिये अंगारे
भला क्यों भर दिये
उम्मीद की झोली में
क्यों भर दिये अंगारे
भला क्यों भर दिये

मुंह मोड़ के दुनिया से
ठुकरा के ज़माने को
आये थे मुहब्बत की
तक़दीर बनाने को

उम्मीद की झोली में
क्यों भर दिये अंगारे
भला क्यों भर दिये

मजबूर थे पहले ही
नाशाद थे पहले ही
तेरी ही क़सम हम तो
बरबाद थे पहले ही

उम्मीद की झोली में
क्यों भर दिये अंगारे
भला क्यों भर दिये

मर मर के जिये अब तक
हम तेरे सहारे पर
मालूम न था कश्ती
डूबेगी किनारे पर

उम्मीद की झोली में
क्यों भर दिये अंगारे
भला क्यों भर दिये
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Ummeed ki jholi mein-Angarey 1954

Artist: Nargis

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