Feb 6, 2017

एक बार तू बन जा मेरा-शबनम १९४९

आपको एक अनूठा गीत सुनवाते हैं जिसमें महीनों के नाम आते हैं.
अंग्रेजी महीने वाले गीत हमने काफी सुन रखे हैं, इस हिंदी कैलेण्डर
वाले गीत का लुत्फ़ उठाइए.

कमर जलालाबादी के लिखे गीत को शमशाद बेगम गा रही हैं फिल्म
शबनम के लिए जिसका संगीत एस डी बर्मन ने तैयार किया है. इसे
पारो देवी पर फिल्माया गया है. गीत में दिलीप कुमार की  झलक
भी देखने को मिलती है.




गीत के बोल:

इक बार तू बन जा मेरा ओ परदेसी
फिर देख मज़ा
इक बार तू बन जा मेरा ओ परदेसी
फिर देख मज़ा
मिल जाये मुझे दिल तेरा ओ परदेसी
फिर देख मज़ा
मिल जाये मुझे दिल तेरा ओ परदेसी
फिर देख मज़ा

झिनचक झिनचक झिंगिलाला
झिंगिलाला
झिनचक झिनचक झिंगिलाला
झिंगिलाला
होय होय होय होय

जेठ का महीना हो भीगी-भीगी रात हो
बाजरे के खेत में पहली मुलाक़ात हो
हाय पहली मुलाक़ात हो
होय होय होय होय
आये जब बैसाख पिया मेले के नज़ारे हों
हाथ में हाँ हाथ तेरा आँखों में इशारे हों
जी आँखों में इशारे हों
फिर देख मज़ा फिर देख मज़ा

झिनचक झिनचक झिंगिलाला
झिंगिलाला
झिनचक झिनचक झिंगिलाला
झिंगिलाला
होय होय होय होय

जेठ और आषाड में नदी का किनारा हो
पिया तेरी आँखों में प्यार का इशारा हो
हाय प्यार का इशारा हो
होय होय होय होय
हो सावन में झुलाऊँ झूला आँगन हो गुलज़ार का
घर-घर में फिर चर्चा हो जी तेर मेरे प्यार का
हाय तेरे-मेरे प्यार का

फिर देख मज़ा फिर देख मज़ा

झिनचक झिनचक झिंगिलाला
झिंगिलाला
झिनचक झिनचक झिंगिलाला
झिंगिलाला
होय होय होय होय

भादो की बरसात में  दिल न रहे हाथ में
आयें जब पूस पिया हवा सर्द-सर्द हो
तेरे मेरे दिलों में फिर मीठा-मीठा दर्द हो
हाय मीठा-मीठा दर्द हो

फिर देख मज़ा फिर देख मज़ा
इक बार तू बन जा मेरा ओ परदेसी
फिर देख मज़ा

झिनचक झिनचक झिंगिलाला
झिंगिलाला
झिनचक झिनचक झिंगिलाला
झिंगिलाला
होय होय होय होय

कार्तक का महीना हो  पास न तेरे आऊँ मैं
रामा मोहे डर लागे सिमटी सिमटी जाऊँ मैं
आघन की अंधेरी रातें करती हों जब साँ-साँ
रह रह कर तुम मुझे बुलावो  कहती जाऊँ ना ना
मैं कहती जाऊँ ना ना

फिर देख मज़ा फिर देख मज़ा

झिनचक झिनचक झिंगिलाला
झिंगिलाला
झिनचक झिनचक झिंगिलाला
झिंगिलाला
होय होय होय होय
होय
पौष का महीना हो  मिल लूँ तेरे बाप से
तेरा मेरा प्यार है कह दूँ तेरे बाप से
मैं कह दूँ तेरे बाप से
होय होय होय होय
माघ में तैयारी पिया  फागुन में
फागुन में फागुन में मैं कैसे कहूँ
फागुन में सगाई हो
तेरा दिल करता हो यूँ यूँ 
आँख मेरी शरमाई हो
जी आँख मेरी शरमाई हो
फिर देख मज़ा

इक बार तू बन जा मेरा ओ परदेसी
फिर देख मज़ा
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Ek baar to ban jam era-Shabnam 1949

Artists: Paro Devi, Dilip Kumar

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