Mar 7, 2017

किया है प्यार जिसे-गुलाम अली गज़ल

सुनते हैं क़तील शिफ़ाई की लिखी और गुलाम अली की
गाई एक लोकप्रिय गज़ल.





गीत के बोल:

किया है प्यार जिसे हमने ज़िन्दगी की तरह
किया है प्यार जिसे हमने ज़िन्दगी की तरह
वो आशना भी मिला हमसे अजनबी की तरह
किया है प्यार जिसे हमने ज़िन्दगी की तरह
वो आशना भी मिला हमसे अजनबी की तरह
किया है प्यार जिसे हमने ज़िन्दगी की तरह

बढ़ा के प्यास मेरी उसने हाथ छोड़ दिया
बढ़ा के प्यास मेरी उसने हाथ छोड़ दिया
वो कर रहा था मुरव्वत भी दिल्लगी की तरह
वो आशना भी मिला हमसे अजनबी की तरह
किया है प्यार जिसे हमने ज़िन्दगी की तरह

कभी ना सोचा था हम ने क़ातिल उस के लिए
कभी ना सोचा था हम ने क़ातिल उस के लिए
करेगा हमपे सितम वो भी हर किसी की तरह
करेगा हमपे सितम वो भी हर किसी की तरह
किया है प्यार जिसे हमने ज़िन्दगी की तरह

किसे खबर थी बढ़ेगी कुछ और तारीखी
किसे खबर थी बढ़ेगी कुछ और तारीखी
मिला है हमसे वो किसी बदली में चाँदनी की तरह
मिला है हमसे वो किसी बदली में चाँदनी की तरह
किया है प्यार जिसे हमने ज़िन्दगी की तरह

सितम तो ये है के वो भी ना बन सका अपना
सितम तो ये है के वो भी ना बन सका अपना
कुबूल हमने लिये जिस के ग़म खुशी की तरह
कुबूल हमने लिये जिस के ग़म खुशी की तरह
किया है प्यार जिसे हमने ज़िन्दगी की तरह
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Kiya hai pyar jise hamne-Ghulam Ali ghazal

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