May 22, 2017

खुशबू हूँ मैं फूल नहीं हूँ-शायद १९७९

सन १९७९ की फिल्म शायद की कहानी एक जहरीली शराब कांड
के ऊपर आधारित है. इस कहानी में एक प्रेम प्रसंग भी है. ये
मूल घटना में था कि नहीं मालूम नहीं.

गीत निदा फाज़ली का है और संगीत मानस मुखर्जी का. गायक
स्वर है रफ़ी का. नसीरुद्दीन शाह और नीता मेहता पर इसे
फिल्माया गया है.




गीत के बोल:

खुशबू हूँ मैं फूल नहीं हूँ जो मुरझाऊँगा
खुशबू हूँ मैं
जब जब मौसम लहरायेगा
जब जब मौसम लहरायेगा  मैं आ जाऊँगा
मैं आ जाऊँगा
खुशबू हूँ मैं फूल नहीं हूँ जो मुरझाऊँगा

मेरी सूरत कोई नहीं है  चेहरा मेरा चेहरा है
भीगा सावन सूना आँगन  हर आईना मेरा है
जब जब कली खिलेगी कोई 
जब जब कली खिलेगी कोई  मैं मुस्काऊँगा
मैं आ जाऊँगा
खुशबू हूँ मैं फूल नहीं हूँ जो मुरझाऊँगा

शाम का गहरा सन्नाटा जब दीप जलाने आयेगा
मेरा प्यार तुम्हारी सूनी बाहों में घबरायेगा
मैं ममता का आँचल बन कर
मैं ममता का आँचल बन कर लोरी गाऊँगा
मैं आ जाऊँगा
खुशबू हूँ मैं फूल नहीं हूँ जो मुरझाऊँगा

जब भी मेरी याद सताये  फूल खिलाती रहना
मेरे गीत सहारा देंगे इनको गाती रहना
मैं अनदेखा तारा बन कर
मैं अनदेखा तारा बन कर राह दिखाऊँगा
मैं आ जाऊँगा  मैं आ जाऊँगा
खुशबू हूँ मैं फूल नहीं हूँ
खुशबू हूँ मैं फूल नहीं हूँ
खुशबू हूँ मैं फूल नहीं हूँ
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Khushboo hoon main-Shayad 1979

Artists: Naseeruddin Shah, Neeta Mehta

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