निदा फाजली की एक रचना सुनते हैं जगजीत सिंह
की खनकती आवाज़ में. एक यायावर की दास्ताँ सी
लगती इस रचना का आकार बहत छोटा है. कहानी
कभी कभी दो पन्क्तियों में ही पूरी हो जाया करती है.
गीत के बोल:
हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा
हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा
मैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समंदर मेरा
हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा
एक से हो गए मौसमों के चेहरे सारे
एक से हो गए मौसमों के चेहरे सारे
मेरी आँखों से कहीं खो गया मंज़र मेरा
हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा
किससे पूछूँ कि कहाँ गुम हूँ कई बरसों से
किससे पूछूँ कि कहाँ गुम हूँ कई बरसों से
हर जगह ढूँढता फिरता है मुझे घर मेरा
हर जगह ढूँढता फिरता है मुझे घर मेरा
मैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समंदर मेरा
हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा
.................................................................
Har ghadi khud se ulajhna-Jagjit Singh
एक सॉफ्ट किस्म का युगल गीत सुनते हैं सन १९८१ की फिल्म
बीबी ओ बीबी से. जो टाइमलेस नाम की चीज़ होती है वो इस गीत
से टेनजेंट(Tangent) हो कर गुजर गयी है. सृष्टि में कण कण का
प्रारब्ध होता है वैसे ही गीतों का भी होना चाहिए. किसी की धुन मधुर
हो तब भी वो अनसुनासा रह जाता है और किसी की धुन सामान्य
होते हुए भी वो हिट हो जाता है.
दो संगीतकार हुए हैं फिल्म जगत में जिनका उल्लेख सबसे ज्यादा
मिलता है नेट पर और जिन्हें संगीत क्षेत्र के लोग तबियत से याद
करते हैं-मदन मोहन और आर डी बर्मन. दोनों के साथ ही ये कहानी
ज्यादा रही कि फ़िल्में नहींचलीं मगर संगीत खूब चला. व्यावसायिक
समीकरण समय के हिसाब से आज ज्यादा मुनाफे वाले हो गए हैं.
आज के समय में संगीत से जुड़े लोगों को भी पैसा पहले की तुलना
में अच्छा मिलता है.
दोनों संगीतकारों में फर्क जो है वो ये कि आर डी बर्मन ने कभी इस
बात की शिकायत नहीं की कि उनकी मेहनत को सराहना नहीं मिली.
ये गिला मदन मोहन को ताउम्र रहा औरसमय समय पर उनकी ये
बात सुनाई देती रही. आउटपुट की बात की जाए तो आर डी बर्मन के
संगीत वाली फिल्मों की संख्या मदन मोहन के संगीत वाली फिल्मों
की लगभग सवा दो गुना है.
एक बेसिक सी चीज़ है कि श्रोता क्या सुनना चाहता है और उसे क्या
पसंद है इस बात पर निर्भर करता है हिट/फिट का मामला. आज तो
गायन में शरीर के विभिन्न स्थानों से आने वाली आवाजों का प्रयोग
हो रहा है फिर भी पब्लिक पसंद कर ही रही है ना. बदलते समय के साथ
जनता कीपसंद भी बदली है.
इस गीत के दूसरे अंतरे की पंक्तियों के पहले वाली बांसुरी में ‘गले में
खिच खिच’ वाला इफेक्ट है. उसके अलावा पूरे गीत में कुछ भी एक्स्ट्रा
स्पेशल(read अटपटा) नहीं है. गीत निदा फाज़ली का है.
गीत के बोल:
यार मिले दिलदार मिले
तब यारी ला वंदा चस है
काफिर है जो यार कर के
फिर ये कहे मेरी बस है
एक नहीं दो नहीं सौ सौ बार
कहूँ मैं ज़माने से तुमसे है प्यार
एक नहीं दो नहीं सौ सौ बार
कहूँ मैं ज़माने से तुमसे है प्यार
एक नहीं सौ नहीं लाखों बार
हम भी कहेंगे तुमसे है प्यार
यारा ओ यारा जाना मेरी जाना
यारा ओ यारा जाना मेरी जाना
दीवाने का दीवाना जब साथ निभाए
वक्त मेहरबान हो के यूँ ही थम जाए
सारी दुनिया से प्यारा है प्यार तेरा
हो तू ही दर्पण तू ही है सिंगार मेरा
हो बालमा साजना आ जाओ बाहों में
प्यार दुआ प्यास वफ़ा प्यार ऐतबार
कहूँ मैं ज़माने से तुमसे है प्यार
यारा ओ यारा जाना मेरी जाना
यारा ओ यारा जाना मेरी जाना
तेरे मेरे प्यार के चर्चे रहें सदा
मैं धरती तू अम्बर होंगे कैसे जुदा
पेड़ों के साये में हम तुम प्यार करें
ढलते सूरज के आगे इकरार करें
हो लाजवाब ये शबाब आ जाओ बाहों में
धूप कहीं छाँव कहीं छाया है खुमार
कहूँ मैं ज़माने से तुमसे है प्यार
यारा ओ यारा जाना मेरी जाना
हो यारा ओ यारा जाना मेरी जाना
एक नहीं दो नहीं सौ सौ बार
कहूँ मैं ज़माने से ला ला ला ला ला तुमसे है प्यार
तुमसे है प्यार तुमसे है प्यार
तुमसे है प्यार
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Ek nahin do nahin-Biwi o biwi 1981
भारी और रौबदार आवाजें हमने काफी सुनी हिंदी फिल्मों में, कभी
नायकों की तो कभी गायकों की. मोती आवाज़ वाले गायक ६० और
सत्तर के दशक में बहुत कम या नहीं के बराबर सुनाई दिए. १९८३
की फिल्म रज़िया सुल्तान में कब्बन मिर्ज़ा के गाये दो गीत हैं.
उनमें से एक आज सुन लेते हैं. इसे निदा फाजली ने लिखा है और
इसकी तर्ज़ बनाई खय्याम ने.
गीत के बोल:
तेरा हिज्र मेरा नसीब है
तेरा ग़म
तेरा ग़म ही मेरी हयात है
मुझे तेरी दूरी का ग़म हो क्यों
मुझे तेरी दूरी का ग़म हो क्यों
तू कहीं भी हो मेरे साथ है
तू कहीं भी हो मेरे साथ है
तेरा हिज्र मेरा नसीब है
मेरे वास्ते तेरे नाम पर
मेरे वास्ते तेरे नाम पर
कोई हर्फ़ आए नहीं नहीं
मुझे ख़ौफ़-ए-दुनिया नहीं
मुझे ख़ौफ़-ए-दुनिया नहीं
मगर मेरे रू-ब-रू तेरी ज़ात है
मेरे रू-ब-रू तेरी ज़ात है
तेरा हिज्र मेरा नसीब है
तेरा इश्क़ मुझ पे है मेहरबान
तेरा इश्क़ मुझ पे है मेहरबान
मेरे दिल को हासिल है दो जहाँ
मेरी जान-ए-जां मेरी जान-ए-जां
मेरी जान-ए-जां इसी बात पर
मेरी जान जाए तो बात है
मेरी जान जाए तो बात है
तेरा हिज्र मेरा नसीब है
…………………………………………………
Tera hijr mera naseeb hai-Razia Sultan 1983
प्रस्तुत गीत की पहली पंक्ति में ऐसे शब्द हैं जो थोड़े अलग आर्डर
में आपने कई सार्वजनिक परिवहन के साधनों और माल ढोने वाले
वाहनों के पीछे लिखे देखे होंगे. ट्रकों के पीछे तो कई डाइलॉग भी
लिखे मिलते हैं शेर-शायरी के साथ साथ. प्रतिभा का सार्वजनिक
प्रदर्शन या तो कवि सम्मलेन-मुशायरे में, फिल्मों में, ड्रामा में या
फिर ट्रकों के पीछे ही देखने को मिलता है.
गीत की बात करते हैं. पहली पंक्ति में टायर में से हवा निकाली
जाती है और फिर दूसरी पंक्ति में थोडा सा मरहम लगाया जाता
है, ध्यान भटकाने के लिए. समय से पहले और प्रारब्ध से ज्यादा
अगर नहीं मिलता है तो क्यूँ जनता मंदिरों और बाबाओं के चक्कर
लगाती है? ऊपर वाला तो छलिया है, प्रारब्ध भी वही लिखता है
और आपको भरमाने का काम भी वही करता है. ये सब उसकी
रचाई माया है जिसमें हम सब मोहरे मात्र हैं.
गीत लिखा है निदा फाजली ने जिसकी धुन तैयार की है पंचम ने.
किशोर कुमार ने इसे बीबी ओ बीबी फिल्म के नायक रणधीर कपूर
के लिए गाया है.
गीत के बोल:
ओ हो आ हा हा हो हो हो
वक़्त से पहले किस्मत से ज्यादा
वक़्त से पहले किस्मत से ज्यादा
किसी को मिला है न किसी को मिलेगा
प्यार से सारा गुलशन महके
नफ़रत से कोई गुल न खिलेगा
वक़्त से पहले किस्मत से ज्यादा
किसी को मिला है न किसी को मिलेगा
प्यार से सारा गुलशन महके
नफ़रत से कोई गुल न खिलेगा
ग़म को हमने गीत बना कर
इस दुनिया का दिल बहलाया
ग़म को हमने गीत बना कर
इस दुनिया का दिल बहलाया
हँसते हँसाते जाने कैसे
इन गीतों में तुमको पाया
हाँ हम हैं सबके कोई न अपना
इक दिन कोई अपना मिलेगा
प्यार से सारा गुलशन बहके
नफ़रत से कोई गुल न खिलेगा
वक़्त से पहले किस्मत से ज्यादा
किसी को मिला है न किसी को मिलेगा
प्यार से सारा गुलशन महके
नफ़रत से कोई गुल न खिलेगा
नैन मिले और चैन गँवाया
बात पुरानी फिर भी नई है
अरे नैन मिले और चैन गँवाया
बात पुरानी फिर भी नई है
तेरी नज़र ने मेरी नज़र से
बिन बोले एक बात कही है
हाँ देख के मुझको यूँ न लजाओ
दिल पे फिर क़ाबू न रहेगा
प्यार से सारा गुलशन महके
नफ़रत से कोई गुल न खिलेगा
वक़्त से पहले किस्मत से ज्यादा
किसी को मिला है न किसी को मिलेगा
प्यार से सारा गुलशन महके
नफ़रत से कोई गुल न खिलेगा
वक़्त से पहले किस्मत से ज्यादा
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Waqt se pehle kismet se zyada-Biwi o biwi 1981
ऐसी कहाँ थी ये रूत सुहानी कब से तुझे ढूंढे मेरी जवानी आने से तेरे महकी हवायें जागी हुई है सारी फिजाएँ किसकी सदायें मुझको बुलायें
तेरे सिवा दिल को कोई ना भाये प्यार कहीं मेरा खो ना जाये फूलों से रंगीं तारों से उजली सागर से गहरी मेरी वफ़ाएं किसकी सदायें मुझको बुलायें .............................................................. Kiski sadayen mujhko bulayen-Red Rose 1980
सन १९७९ की फिल्म शायद की कहानी एक जहरीली शराब कांड
के ऊपर आधारित है. इस कहानी में एक प्रेम प्रसंग भी है. ये
मूल घटना में था कि नहीं मालूम नहीं.
गीत निदा फाज़ली का है और संगीत मानस मुखर्जी का. गायक
स्वर है रफ़ी का. नसीरुद्दीन शाह और नीता मेहता पर इसे
फिल्माया गया है.
गीत के बोल:
खुशबू हूँ मैं फूल नहीं हूँ जो मुरझाऊँगा
खुशबू हूँ मैं
जब जब मौसम लहरायेगा
जब जब मौसम लहरायेगा मैं आ जाऊँगा
मैं आ जाऊँगा
खुशबू हूँ मैं फूल नहीं हूँ जो मुरझाऊँगा
मेरी सूरत कोई नहीं है चेहरा मेरा चेहरा है
भीगा सावन सूना आँगन हर आईना मेरा है
जब जब कली खिलेगी कोई
जब जब कली खिलेगी कोई मैं मुस्काऊँगा
मैं आ जाऊँगा
खुशबू हूँ मैं फूल नहीं हूँ जो मुरझाऊँगा
शाम का गहरा सन्नाटा जब दीप जलाने आयेगा
मेरा प्यार तुम्हारी सूनी बाहों में घबरायेगा
मैं ममता का आँचल बन कर
मैं ममता का आँचल बन कर लोरी गाऊँगा
मैं आ जाऊँगा
खुशबू हूँ मैं फूल नहीं हूँ जो मुरझाऊँगा
जब भी मेरी याद सताये फूल खिलाती रहना
मेरे गीत सहारा देंगे इनको गाती रहना
मैं अनदेखा तारा बन कर
मैं अनदेखा तारा बन कर राह दिखाऊँगा
मैं आ जाऊँगा मैं आ जाऊँगा
खुशबू हूँ मैं फूल नहीं हूँ
खुशबू हूँ मैं फूल नहीं हूँ
खुशबू हूँ मैं फूल नहीं हूँ
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Khushboo hoon main-Shayad 1979
जीवन की साँसें खोया पाया के हिसाब में ही गिन जाती हैं. इसी
बीच में इंसान को कुछ समय मिलता है जिसमें वो बाकी के थोड़े
बहुत काम कर लेता है. दिमाग का यादों का सेक्शन कभी चैन से
बैठने नहीं देता. वो गुज़रे वक्त की हकीकतों के जाल में फँस कर
वर्तमान में डिस्को डांस करता है.
फिल्म तुम बिन का ये गीत बोलों और इसके अनूठे संगीत की वजह
से लोकप्रिय है. जगजीत सिंह द्वारा गाये गए गीतों और गज़लों में
शायद ही आपने ऐसा संगीत कभी सुना होगा. एक प्रयोगधर्मी सा
गीत जो आगे आने वाले संगीत के लिए रास्ता खोलने वाला था.
ऐसे गीत हमें आज काफी सुनाई देते हैं जिनमें बोल एक प्रेम कहानी
के और संगीत किसी हॉरर फिल्म का सा महसूस होता है.
गीत लिखा है निदा फाजली ने और इस गीत का संगीत तैयार किया
है निखिल विनय की जोड़ी ने. गीत की खूबसूरती ये कि इसका संगीत
रहस्य रोमांच वाली फिल्म और ऑपेरा थियेटर में घुस के निकलता
हुआ अपनी लय पर लौट आता है जैसे ही गीत के बोल उभरते हैं.
गीत में फिल्म का नाम आता है और इसे भी आप शीर्षक गीत कह
सकते हैं.
गीत के बोल:
जागते जागते इक उम्र कटी हो जैसे
जागते जागते इक उम्र कटी हो जैसे
जान बाकी है मगर सांस रुकी हो जैसे
कोई फ़रियाद तेरे दिल में दबी हो जैसे
कोई फ़रियाद तेरे दिल में दबी हो जैसे
तूने आँखों से कोई बात कही हो जैसे
हर मुलाक़ात पे महसूस यही होता है
हर मुलाक़ात पे महसूस यही होता है
मुझसे कुछ तेरी नज़र पूछ रही हो जैसे
राह चलते हुए अक्सर रुकना होता है
राह चलते हुए अक्सर ये गुमां होता है
वो नज़र छुप के मुझे देख रही हो जैसे
वो नज़र छुप के मुझे देख रही हो जैसे
एक लम्हे में सिमट आया है सदियों का सफर
एक लम्हे में सिमट आया है सदियों का सफर
जिंदगी तेरी बहुत तेज चली हो जैसे
जिंदगी तेरी बहुत तेज चली हो जैसे
किस तरह पहरूं तुझे सोचता रहता हूं मैं
किस तरह पहरूं तुझे सोचता रहता हूं मैं
मेरी हर सांस तेरे नाम लिखी हो जैसे
मेरी हर सांस तेरे नाम लिखी हो जैसे
कोई फ़रियाद तेरे दिल में दबी हो जैसे
तूने आँखों से कोई बात कही हो जैसे
जागते जागते इक उम्र कटी हो जैसे
जान बाकी है मगर सांस रुकी हो जैसे
……………………………………………………….
Koi fariyad-Tum bin 2001
जीवन का फलसफा इस गीत में क्रिस्टल क्लीयर है. ये है फिल्म
आहिस्ता आहिस्ता का गीत. गीत आशा और भूपेंद्र दोनों ने गाया
है. आज हम सुनेंगे आशा भोंसले वाला वर्ज़न.
आम जन में एक कहावत प्रचलित है-चने हैं तो दांत नहीं हैं, दांत
हैं तो चने नहीं. सम्पूर्णता मनुष्य को उपलब्ध नहीं है. कोई पैसे
के लिए बेचैन है तो कोई औलाद के लिए तरसता है. किसी के
पास रहने को घर नहीं, किसी के पास पहनने को कपडे नहीं. कुछ
कमी ज़रूर रख छोड़ी है ऊपर वाले ने नहीं तो मनुष्य अपने आप
को भगवान समझने लग जाए. इसलिए कहीं दही है तो रायता
नहीं, कहीं पूड़ी है तो अचार नहीं. जिंदगी फिर भी चलती रहती
है.
गीत की पहली दो पंक्तियाँ शहरयार की हैं जिन्हें लेकर निदा फाजली
नीक उम्दा गीत रचा है. संगीतकार हैं खय्याम. पिछला गीत लता
का गाया हुआ था जो हमने आपको एक श्वेत श्याम फिल्म से
सुनवाया था. नंदा के ऊपर फिल्माए आशा भोंसले के गीत रेयर हैं.
वीडियो में एक ही अन्तरा उपलब्ध है लेकिन हम आपको गीत के
पूरे बोल उपलब्ध कावा रहे हैं.
गीत के बोल:
कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कहीं ज़मीन तो कहीं आसमान नहीं मिलता
कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
जिसे भी देखिये वो अपने आप में गुम है
जिसे भी देखिये वो अपने आप में गुम है
ज़ुबाँ मिली है मगर हमज़ुबाँ नहीं मिलता
ज़ुबाँ मिली है मगर हमज़ुबाँ नहीं मिलता
कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
बुझा सका है भला कौन वक़्त के शोले
बुझा सका है भला कौन वक़्त के शोले
ये ऐसी आग है जिसमे धुआँ नहीं मिलता
ये ऐसी आग है जिसमे धुआँ नहीं मिलता
कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
तेरे जहाँ में ऐसा नहीं के प्यार न हो
तेरे जहाँ में ऐसा नहीं के प्यार न हो
जहाँ उम्मीद हो इसकी वहाँ नहीं मिलता
जहाँ उम्मीद हो इसकी वहाँ नहीं मिलता
कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कहीं ज़मीन तो कहीं आसमान नहीं मिलता
कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
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Kabhi kisi ko mukammal jahan-Aahista aahista 1981
कुंवारों का पसंदीदा गीत रहा ये काफी समय तक. फिल्म है १९८१ की बीवी ओ बीवी जिसमें रंधीर कपूर बंसी वाले के आगे गुहार लगाते दिखाई दे रहे हैं.
गीत में नायक साइकिल चलता भी दिख रहा है. तीसरे अंतरे तक गीत पहुँचता है और हीरो ट्रेन पर चढ़ने का प्रयत्न करके आखिर चढ हो जाता है. श्रेणी बनाने का शौकीनों के लिए-साइकिल गीत, ट्रेन गीत, कुंवारा गीत, गोएई गीत, काली गीत, दुल्हन गीत और जो बच गयी हों वो सब.
गीत के बोल:
गोरी हो काली हो या नखरेवाली हो कैसी भी दुल्हन दिला दे हाथों में तेरे सबकी है डोरी अपना भी चक्कर चला दे गोरी हो काली हो या नखरेवाली हो कैसी भी दुल्हन दिला दे हाथों में तेरे सबकी है डोरी अपना भी चक्कर चला दे
बाजा बजेगा शादी रचेगी घूंघट में गोरी हँसेगी बाजा बजेगा शादी रचेगी घूंघट में गोरी हँसेगी तूने सभी का जोड़ा बनाया तूने सभी का जोड़ा बनाया अपना भी टाँका भिड़ा दे
गोरी हो काली हो या नखरेवाली हो कैसी भी दुल्हन दिला दे हाथों में तेरे सबकी है डोरी अपना भी चक्कर चला दे
जीवन की गाड़ी दो पहियों वाली घर को बनाये घर वाली जीवन की गाड़ी दो पहियों वाली घर को बनाये घर वाली है दूर मंज़िल बेचैन है दिल है दूर मंज़िल बेचैन है दिल गाड़ी को धक्का लगा दे
गोरी हो काली हो या नखरेवाली हो कैसी भी दुल्हन दिला दे हाथों में तेरे सबकी है डोरी अपना भी चक्कर चला दे
बम्बई का जादू ऐसा है न्यारा कोई रहे न कुँवारा बम्बई का जादू ऐसा है न्यारा कोई रहे न कुँवारा अरमान सारे हो जाये पूरे अरमान सारे हो जाये पूरे ज़ल्दी से दुल्हा बना दे .............................................................. Gori ho kali ho-Biwi o biwi 1981
निदा फाज़ली की लिखी हुई एक गज़ल सुनते हैं चित्रा सिंह
की आवाज़ में. इसका संगीत जगजीत सिंह ने तैयार किया
है.
जिंदगी का फलसफा है निदा फाज़ली की नज़र से. कोम्पीटीशन
का ज़माना है और गलाकाट प्रतिस्पर्धा. इस दौर में ये ज्यादा
प्रासंगिक मालूम पड़ती है. यहाँ समय के अनुसार खिलौनों को
आप गैजेट्स समझ लें.
सफ़र में धूप तो होगी, जो चल सको तो चलो
सफ़र में धूप तो होगी, जो चल सको तो चलो
सभी हैं भीड़ में, तुम भी, निकल सको तो चलो
सभी हैं भीड़ में, तुम भी, निकल सको तो चलो
किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं
किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं
तुम अपने आप को, ख़ुद ही, बदल सको तो चलो
तुम अपने आप को, ख़ुद ही, बदल सको तो चलो
यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता
यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता
मुझे गिरा के, अगर तुम, सम्भल सको तो चलो
मुझे गिरा के, अगर तुम, सम्भल सको तो चलो
सफ़र में धूप तो होगी, जो चल सको तो चलो
यही है ज़िंदगी, कुछ ख़ाक, चंद उम्मीदें
यही है ज़िंदगी
यही है ज़िंदगी, कुछ ख़ाक, चंद उम्मीदें
इन्ही खिलौनों से, तुम भी, बहल सको तो चलो
इन्ही खिलौनों से, तुम भी, बहल सको तो चलो
सफ़र में धूप तो होगी, जो चल सको तो चलो
सभी हैं भीड़ में, तुम भी, निकल सको तो चलो
सफ़र में धूप तो होगी, जो चल सको तो चलो
..................................................................
Safar mein dhoop to hogi-Ghazal Chitra Singh
पॉप म्युज़िक का मतलब होता है पॉपुलर म्युज़िक अर्थात लोकप्रिय संगीत. यहाँ गौर करें लोक-प्रिय जो लोक को प्रिय हो या आम जनता को प्रिय हो. दोनों शब्द मिल के बना देते हैं ‘फेमस’. संगीत केवल किसी खास वर्ग या तबके के लिए नहीं बना, ये तो हर प्राणी के लिए है. कौन कैसे जज्ब करता है इसे इस बात पर निर्भर करती है पसंद नापसंद.
हिंदी फिल्म संगीत के खजाने में पॉपुलर सोंग बहुतेरे हैं. ये वे गीत हैं जो लोकप्रिय हुए और जिनको किसी समीक्षक की वाह वाह की ज़रूरत नहीं है. ऐसी बातें इसलिए कभी कभी सुनाना पढ़ती है क्यूंकि कई संगीत भक्त तो उषा खन्ना के संगीत को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ कर के चलते हैं. जिस संगीतकार ने ३०-३५ वर्ष फिल्म उद्योग में गुज़ारे हों और एक से बढ़ कर एक हिट गीत दिए हों समय समय पर उसे हम कैसे भुला सकते हैं या इग्नोर कर सकते हैं. उषा खन्ना ने लगभग हर उस गायक के लिए हिट गीत बनाये हैं जिन्होंने उनके संगीत निर्देशन में गाया है चाहे वो रफ़ी हों, येसुदास हों या हेमलता.
प्रस्तुत गीत को लिखा है निदा फाज़ली ने और इसे गाया है हेमलता ने.
गीत के बोल:
तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है जहाँ भी जाऊँ ये लगता है तेरी महफ़िल है तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है
ये आसमान ये बादल ये रास्ते ये हवा ये आसमान ये बादल ये रास्ते ये हवा हर एक चीज़ हैं अपनी जगह ठिकाने से कई दिनों से शिकायत नहीं ज़माने से ये ज़िन्दगी है सफ़र, तू सफ़र की मंज़िल है जहाँ भी जाऊँ ये लगता है तेरी महफ़िल है
तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है
हर एक फूल किसी याद सा महकता है हर एक फूल किसी याद सा महकता है तेरे ख़याल से जागी हुई फिजायें है ये सब्ज़ पेड़ हैं या प्यार की दुआएं है तू पास हो के नहीं फिर भी तू मुक़ाबिल है जहाँ भी जाऊँ ये लगता है तेरी महफ़िल है
तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है
हर एक शय है मोहब्बत के नूर से रोशन हर एक शय है मोहब्बत के नूर से रोशन ये रोशनी जो ना हो ज़िन्दगी अधूरी है राह-ए-वफ़ा में कोई हमसफ़र ज़रूरी है ये रास्ता कहीं तन्हा कटे तो मुश्किल है जहाँ भी जाऊँ ये लगता है तेरी महफ़िल है
तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है …………………………………………………………………… Too is tarah se-Aap to aise na tha 1980
घोड़े पे बैठ के आना, पालकी में आना, पैदल आना ये सब बातें इस गीत के आने के पहले थोड़ी ज्यादा सुहानी लगा करती थीं. फिल्म विजय के गीत ने हमारे लिए बादल पे चल के आने का रास्ता भी खोल दिया. हम कल्पना में ही सही किस किस प्रकार के वाहन और कैसी कैसी दुनिया में घूम आते हैं.
निदा फाजली के लिखे इस गीत की तर्ज़ बनाई है शिव हरी की जोड़ी ने. इसे गाया है लता संग सुरेश वाडकर ने. जो कलाकार परदे पर इस गीत को गा रहे हैं वो हैं-ऋषि कपूर और सोनम. इसके अलावा इसमें एक और पेयर आपको मिलेगा-अनिल कपूर संग मीनाक्षी शेषाद्री. इसको कहते हैं इकोनोमी गीत. चार सितारों पर एक ही गीत फिल्माया लिया गया है. उसके अलावा पर्यावरण प्रेमी गीत है. लगभग हर मौसम के अलावा हरियाली जितने भी प्रकार की हो सकती है इस गीत में आप देख सकते हैं. गीत में प्रयुक्त साइकिलों ने भी कमाल का रोमांटिसिज्म दिखलाया है.
गीत के बोल:
बादल पे चल के आ सावन में ढल के आ बादल पे चल के आ सावन में ढल के आ साँसों से मेरी निकल के आ बाहों में मेरी मचल के आ बादल पे चल के आ सावन में ढल के आ साँसों से मेरी निकल के आ बाहों में मेरी मचल के आ बादल पे चल के आ सावन में ढल के आ साँसों से मेरी निकल के आ बाहों से मेरी मचल के आ
शाम होते लहराए मौसम हरे हरे चांदी सा बरसाए बदल भरे भरे शाखों पे लहराए मौसम हरे हरे चांदी सा बरसाए बदल भरे भरे भीगी हुई इन फिजाओं में आँखों से संभल के
बादल पे चल के आ सावन में ढल के आ
मैं हूँ तेरी ज़मीन तू मेरा आसमान तू मेरी आरजू मैं तेरी जाने-जान टूटती है खनक बन के अंगडाईयाँ आ जा बाहों में भर ले तन्हाइयां मैं हूँ तेरी ज़मीन तू मेरा आसमान तू मेरी आरजू मैं तेरी जाने-जान अंचल की चंचल हवाओं में होंठों पे गीतों सा ढल के आ
बादल पे चल के आ सावन में ढल के आ
शीशे सी बाहों पे बूँदें रुकी रुकी पलकों पे शर्माए रातें झुकी झुकी शीशे सी बाहों पे बूँदें रुकी रुकी पलकों पे शर्माए रातें झुकी झुकी जुल्फों की काली घटाओं से मुझ में नशे सा पिघल के आ बादल पे चल के आ सावन में ढल के आ साँसों से मेरी निकल के आ बाहों से मेरी मचल के आ
बादल पे चल के आ सावन में ढल के आ बादल पे चल के आ सावन में ढल के आ बादल पे चल के आ सावन में ढल के आ ……………………………………………… Badal pe chalk ke aa-Vijay 1988
नया साल आया, नयी संभावनाएं ले कर के आया. ऐसा ही कुछ लगभग हर व्यक्ति सोचता है. नए साल की नयी योजनाएं, पुराने को पीछे छोड़ने की जद्दोजहद. रेसोल्यूशन आते हैं इस समय जो अधिकतर कुछ दिन बाद गोल हो जाते हैं जैसे जैसे १ जनवरी का खुमार उतरता है. बदलाव प्रकृति का नियम है, इसलिए बदलाव का स्वागत करना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है.
आइये इस अवसर पर सन ८० की फिल्म नजराना प्यार का से एक गीत सुना जाए. गीत के बोल निदा फाज़ली ने लिखे हैं और संगीत है हेमंत भोंसले का. इस गीत को आशा भोंसले, अमित कुमार और अनवर ने गाया है. हेमंत भोंसले आशा के सुपुत्र हैं. फिल्म के निर्देशक एस. एम्. सागर हैं.
गीत के बोल:
नया साल आये, तमाशे दिखाये किसी को हँसाए, किसी को रुलाये नया साल आये, तमाशे दिखाये किसी को हँसाए, किसी को रुलाये
जहाँ है उजाला वहीँ है अंधेरा मुकद्दर पे काबू, ना मेरा ना तेरा ये जीवन पहेली, समझ में ना आये
नया साल आये, तमाशे दिखाये किसी को हँसाए, किसी को रुलाये
मोहब्बत मुकद्दर, बदलती रही है ये कश्ती तो तूफां में चलती रही है मोहब्बत अंधेरों में रस्ता बनाये
नया साल आये, तमाशे दिखाये किसी को हँसाए, किसी को रुलाये
मेरी जां मोहब्बत से दौलत बड़ी है ये दुनिया में जादू की ऐसी छड़ी है मोहब्बत खरीदे मुकद्दर बनाये नया साल आये, तमाशे दिखाये किसी को हँसाए, किसी को रुलाये ............................................................. Naya saal aaye-Nazrana pyar ka 1980
नए युग से एक गीत सुनवाते हैं आपको चित्रा और एम् एम् क्रीम का गाया हुआ. एम् एम् क्रीम दक्षिण भारत के फ़िल्मी संगीतकार हैं. उन्होंने कुछ हिंदी फिल्मों में भी संगीत दिया है, जिसमें से कुछ एक गीत प्रसिद्द हुए हैं जैसे की फिल्म क्रिमिनल के गीत.
आज का जो गीत है वो फिल्म "चुप तुम रहो चुप हम रहें से लिया गया है. गीत निदा फाजली ने लिखा है. फिल्म में तारा देशपांडे, निर्मल पांडे और आशीष विद्यार्थी की प्रमुख भूमिकाएं हैं. इनमें से जो पहचान में आते हैं वो हैं निर्मल पांडे जो शेखर कपूर निर्देशित चर्चित फिल्म बैंडिट क्वीन में काम कर चुके हैं. कुरता पहने जो सज्जन परदे पर गा रहे हैं वो शायद माधवन हैं.
गीत के बोल:
चुप तुम रहो चुप हम रहें चुप तुम रहो चुप हम रहें खामोशी को खामोशी से ज़िंदगी को ज़िंदगी से, बात करने दो ओ ओ ओ
चुप तुम रहो चुप हम रहें चुप तुम रहो चुप हम रहें खामोशी को खामोशी से ज़िंदगी को ज़िंदगी से, बात करने दो ओ ओ ओ
चुप तुम रहो चुप हम रहें चुप तुम रहो
आँखों में खो जाएं आँखें बोलें हाथों से हाथ बाहों में छुपकर साँसों से जैसे डोले रात उंगलियों को उंगलियों से मौसमों को शोखियों से, बात करने दो
चुप तुम रहो चुप हम रहें चुप तुम रहो चुप हम रहें खामोशी को खामोशी से ज़िंदगी को ज़िंदगी से, बात करने दो
होंठों पर होंठों से लिखे बिन शब्दों के गीत धरती से अम्बर तक गूंजे जिस्मों का संगीत बेखुदी को बेखुदी से आशिक़ी को आशिक़ी से, बात करने दो
चुप तुम रहो चुप हम रहें चुप तुम रहो चुप हम रहें खामोशी को खामोशी से ज़िंदगी को ज़िंदगी से, बात करने दो ................................... Chup tum raho chup hum rahen-Is raat ki subah nahin 1996
उषा खन्ना के संगीत खजाने से एक मधुर युगल गीत
सुनवाते हैं आपको। लता और किशोर का गाया युगल
गीत फुर्सत के क्षणों में बनाया गया सा लगता है। कवि
एक कदम आगे बढ़ गया है और चाँद को छोड़ कर उसके
पास के सितारे पर नज़र गड़ा ली और उसको हसीं
बताने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ये बात तो पते की है
की जब कोई व्यक्ति खुश होता है तो उसको आस पास
की दुनिया खुशनुमा दिखाई देने लगती है और जब किसी
से इश्क हो जाए तो सब जगह प्यार मोहब्बत का माहौल
नज़र आता है।
सन १९८३ का वर्ष काफी समृद्ध रहा फिल्म संगीत के मामले
मामले में। ये गीत मुझे पिछली पोस्ट पढ़ कर ध्यान में आया।
८० के दशक में गायक, गीतकार, संगीतकार, फिल्म के नायक
नायिका और जो छोट गए हों वे सब, बड़े बड़े दिग्गज मौजूद थे
और ये एक संधि काल जैसा था पुराने युग और ९० के दशक में
आने वाले नए युग का। इस दौर में कई नई प्रतिभाओं का आगमन
हुआ तो कुछ स्थापित गायक और कलाकार हमसे बिछड़ भी गए।
गीत फिल्माया गया है शबाना आज़मी और विनोद मेहरा पर
जिनकी जोड़ी आपको शायद ही किसी और फिल्म में देखने को
मिले। 'स्वीकार किया मैंने' का एक गीत आप सुन चुके है पहले
गीत के बोल:
चाँद के पास जो
चाँद के पास जो सितारा है
वो सितारा हसीं लगता है
जब से तुम हो मेरी निगाहों में
जब से तुम हो मेरी निगाहों में
हर नज़ारा हसीं लगता है
हर नज़ारा हसीं लगता है
चाँद के पास जो सितारा है।
ज़िन्दगी दो दिलों की चाहत है
ज़िन्दगी दो दिलों की चाहत है
ज़िन्दगी दो दिलों की चाहत है
हर ख़ुशी प्यार की अमानत है
प्यार के पास जो
प्यार के पास जो सहारा है
वो सहारा हसीं लगता है
वो सहारा हसीं लगता है
चाँद के पास जो सितारा है
रात तन्हाईयों की दुश्मन है
रात तन्हाईयों की दुश्मन है
रात तन्हाईयों की दुश्मन है
हर सफ़र हमसफ़र से रोशन है
मौज के पास जो
मौज के पास जो किनारा है
वो किनारा हसीं लगता है
वो किनारा हसीं लगता है
चाँद के पास जो सितारा है
आज की रात है मुरादों की
आज की रात है मुरादों की
आज की रात है मुरादों की
रौशनी है नए इरादों की
शमा के पास जो
शमा के पास जो शरारा है
वो शरारा हसीं लगता है
वो शरारा हसीं लगता है
चाँद के पास जो सितारा है
चाँद के पास जो सितारा है
वो सितारा हसीं लगता है
वो सितारा हसीं लगता है
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Chand ke paas jo sitara hai-Sweekar Kiya Maine 1983
ये एक सदाबहार हिट गीत है। तीन संस्करण में यह गीत उपलब्ध है। पिछला संस्करण आपने सुना जो थोडा धीमा था। अब सुनिए थोडा
तेज़ वाला जो एक पार्टी में फिल्माया गया है। इसे परदे पर दीपक
पाराशर गा रहे हैं। प्रेम त्रिकोण पर आधारित फिल्म आप तो ऐसे ना
थे के इस गीत ने सफलता के कीर्तिमान कायम किये। आज भी ये उतने
ही चाव से सुना जाता है। निदा फाजली का ये एक बड़ा हिट गीत है।
उषा खन्ना जो कि संगीतकार हैं गीत की, जनता को चौंकाने वाले कारनामे
करती रही हैं। बड़े बड़े नाम वाले संगीतकारों के बीच उन्होंने अपनी एक
अलग पहचान बनाई है। हिंदी सिनेमा संगीत के इतिहास के कुछ बड़े
हिट गीत उनके नाम पर दर्ज हैं-जैसे 'दिल के टुकड़े टुकड़े करके -दादा' ,
ज़िन्दगी प्यार का गीत है-सौतन इत्यादि। इस गीत के गायक हैं रफ़ी।
सरदार के भेस में हैं मदन पुरी और उनके साथ गाने के अंत में जो गोल
सा चेहरा दिखाई देता है वो है ओम शिवपुरी का।
गीत के बोल:
तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है
तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है
जहाँ भी जाऊं ये लगता है तेरी महफ़िल है
तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है
तेरे बगैर जहाँ में कोई कमी सी थी
तेरे बगैर जहाँ में कोई कमी सी थी
भटक रही थी जवानी अंधेरी राहों में
सुकून दिल को मिला आ के तेरी बाहों में
मैं एक खोई हुई मौज हूँ तू साहिल है,
जहाँ भी जाऊँ ये लगता है, तेरी महफ़िल है
तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है
तेरे जमाल से रोशन है कायनात मेरी
तेरे जमाल से रोशन है कायनात मेरी
मेरी तलाश, तेरी दिलकशी, रहे बाकी
खुदा करे के ये दीवानगी रहे बाकी
तेरी वफ़ा ही मेरी हर खुशी का हासिल है,
जहाँ भी जाऊँ ये लगता है, तेरी महफ़िल है
तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है
ये आसमान ये बादल ये रास्ते ये हवा
ये आसमान ये बादल ये रास्ते ये हवा
हर एक चीज़ है अपनी जगह ठिकाने पे
कई दिनों से शिकायत नहीं ज़माने से
ये ज़िन्दगी है सफ़र तू सफ़र की मंजिल है
जहाँ भी जाऊँ ये लगता है, तेरी महफ़िल है
तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है
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Too is tarah se meri zindagi mein2-Aap to aise na the 1980
फ़िल्म : आप तो ऐसे न थे
वर्ष: १९८०
गीतकार : निदा फाजली
संगीतकार : उषा खन्ना
गायक : मनहर
कलाकार: राज बब्बर, रंजीता
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गाने के बोल:
तू इस तरह से मेरी ज़िंदगी में शामिल है
जहाँ भी जाऊँ ये लगता है, तेरी महफ़िल है
ये आसमान ये बादल ये रास्ते ये हवा
ये आसमान ये बादल ये रास्ते ये हवा
हर एक चीज़ है अपनी जगह ठिकाने पे
कई दिनों से शिकायत नहीं ज़माने से
ये ज़िंदगी है सफ़र तू सफ़र की मंज़िल है,
जहाँ भी जाऊँ ये लगता है, तेरी महफ़िल है
तू इस तरह से मेरी ज़िंदगी में शामिल है
हर एक शय है मुहब्बत के नूर से रोशन
हर एक शय है मुहब्बत के नूर से रोशन
ये रोशनी जो ना हो ज़िंदगी अधूरी है
राह-ए-वफ़ा में कोई हमसफ़र ज़रूरी है
ये रास्ता कहीं तनहा कटे तो मुश्किल है,
जहाँ भी जाऊँ ये लगता है, तेरी महफ़िल है
तू इस तरह से मेरी ज़िंदगी में शामिल है
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Too is tarah se meri zindai mein1-Aap to aise na the 1980
दौलत फिल्म सन १९८१ की फिल्म है। फिल्म ने ज्यादा दौलत तो नहीं कमाई मगर अपनी उपस्थिति दर्ज करा गयी। इसका श्रेय जीनत को दिया जाए या विनोद खन्ना को, निर्णय कर पाना मुश्किल है। इस फिल्म के दो किशोर के गाये गीत काफी सुनाई दिए। प्रस्तुत गीत लता मंगेशकर का गाया हुआ है। अमूमन ऐसे वाक्यों के लिए आर. डी. बर्मन या एनी संगीतकार आशा की आवाज़ का इस्तेमाल करते थे मगर लता ने भी इस गीत को प्रभावी बनाने में कोई कसार नहीं छोड़ी है। गीत लिखा है निदा फाजली ने । खलनायक के अड्डे पर गाना-ये एक फार्मूला है हिंदी फिल्मों का। यहाँ बीहड़ के अड्डे की जगह होटल के क्लब(आधुनिक अड्डा) में गाना गाया जा रहा है। सारिका और राज बब्बर भेस बादल के होटल में बैठे हैं। भेस बदले हुए कलाकार दर्शकों द्वारा पहचान लिए जाते हैं लेकिन फिल्म के कहानी में उनको कोई नहीं पहचान पाता।
गीत के बोल:
हो ओ ओ हो, हो हो हो हो ज़िन्दगी ये ज़िन्दगी दो घडी की ये ज़िन्दगी कौन जाने किस बहाने मौत आ जाए जवानी झूम के गाये, जवानी झूम के गाये जवानी झूम के गाये, जवानी झूम के गाये
तेरे मेरे बीच कोई दूरी ना रहे प्यास मेरे मन की अधूरी ना रहे हो, तेरे मेरे बीच कोई दूरी ना रहे प्यास मेरे मन की अधूरी ना रहे
मनचली मैं मनचली, कैसी हूँ मैं मनचली कौन जाने किस बहाने बात बन जाए जवानी झूम के गाये, जवानी झूम के गाये जवानी झूम के गाये, जवानी झूम के गाये
आँखें ना चुरा हमसे आँखें तो मिला रह ना जाए आज कोई शिकवा गिला हो, ऑंखें ना चुरा हमसे ऑंखें तो मिला रह ना जाए आज कोई शिकवा गिला
अरे आ गयी मैं आ गयी, तेरे लिए मैं आ गए कौन जाने किस बहाने राज़ खुल जाए जवानी झूम के गाये, जवानी झूम के गाये जवानी झूम के गाये, जवानी झूम के गाये
तारे उजाले बदल जायेंगे हम तो चुपके से निकल जायेंगे हो, तारे उजाले बदल जायेंगे हम तो चुपके से निकल जायेंगे रुक गयी मैं रुक गयी, तेरे लिए मैं रुक गयी कौन जाने इस बहाने जाम टकराएँ
जवानी झूम के गाये, जवानी झूम के गाये जवानी झूम के गाये, जवानी झूम के गाये
ज़िन्दगी ये ज़िन्दगी दो घडी की ये ज़िन्दगी कौन जाने किस बहाने मौत आ जाए जवानी झूम के गाये, जवानी झूम के गाये जवानी झूम के गाये, जवानी झूम के गाये
एक प्रेरणादायक गीत १९८० की फिल्म नजराना प्यार से। रफ़ी और आशा की आवाजों वाले इस गीत की धुन बनायीं है हेमंत भोंसले ने। गीत परदे पर राज बब्बर गा रहे हैं। अरुणा ईरानी नाम की नायिका परदे पर उनके साथ नज़र आ रही हैं। श्रोताओं में आपको विजयेन्द्र घाटगे और देवेन वर्मा नज़र आयेंगे। गीत निदा फ़ाज़ली ने लिखा है। हेमंत भोंसले आशा भोंसले के सुपुत्र हैं और ८० के दशक में सक्रिय रहे।
गीत के बोल:
गम छुपाते रहो, गम छुपाते रहो गम छुपाते रहो मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो ज़िन्दगी गीत है, ज़िन्दगी गीत है इसको गाते रहो, इसको गाते रहो
गम छुपाते रहो, मुस्कुराते रहो
गम से ख़ाली ज़माने में कोई नहीं वो हसीं कौन सी है जो रोई नहीं गम से खाली ज़माने में कोई नहीं वो हसीं कौन सी है जो रोई नहीं यूँ जियो दूसरों को हंसाते रहो
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो
ज़िन्दगी गीत है, ज़िन्दगी गीत है इसको गाते रहो, इसको गाते रहो
गम छुपाते रहो, मुस्कुराते रहो
हर जगह वक़्त की अपनी रफ़्तार है ये कभी गैर है ये कभी यार है हर जगह वक़्त की अपनी रफ़्तार है ये कभी गैर है ये कभी यार है गैर से यार बनके निभाते रहो गम छुपाते रहो, मुस्कुराते रहो
ज़िन्दगी गीत है, ज़िन्दगी गीत है इसको गाते रहो, इसको गाते रहो
गम छुपाते रहो, मुस्कुराते रहो
कौनसी आंख है जिसमे सपना नहीं सब हैं अपने मगर कोई अपना नहीं कौनसी आंख है जिसमे सपना नहीं सब हैं अपने मगर कोई अपना नहीं आंसुओं को तबस्सुम बनाते रहो मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो गम छुपाते रहो, गम छुपाते रहो मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो ज़िन्दगी गीत है, ज़िन्दगी गीत है इसको गाते रहो, इसको गाते रहो गम छुपाते रहो
उषा खन्ना ने सदा ही समय समय पर हिट गीत बना कर श्रोताओं और संगीत विशेषज्ञों को अचंभित किया है। फ़िल्म सौतन (१९८०) के बाद जो उनका एल्बम(एल्बम अर्थात फ़िल्म के पूरे गीत) हिट हुआ और सराहा गया वो है स्वीकार किया मैंने(१९८३) । ऊर्जावान संगीत निर्देशक हैं वे। उन्होंने सभी विधाओं पर अधिकार से दखल दिया और कामयाब भी हुईं । आपको याद होगा फ़िल्म दादा का गीत-दिल के टुकड़े टुकड़े करके। येसुदास को उतनी प्रसिद्धि रवीन्द्र जैन के बनाये ढेरों गीतों द्वारा नहीं मिली जितनी कि केवल उषा खन्ना के बनाये फ़िल्म दादा के एक गीत से। उस गीत के लिए येसुदास को पुरस्कार भी मिला। इधर उन्होंने लता मंगेशकर से एक शानदार गीत गवाया है। इसके बोल नामचीन शायर निदा फाजली के हैं। शायद ये फ़िर साबित हुआ है कि एक अच्छे गीत के लिए अच्छे बोल होना अति आवश्यक है। यहाँ अच्छे गीत से तात्पर्य उन गीतों से है जो मर्म को चोट पहुँचने में सक्षम हों और लंबे समय तक सुने जाने वाले हों। इस गीत में दो संजीदा कलाकार हैं। शबाना आज़मी और विनोद मेहरा। विनोद मेहरा की खामोशी भी बहुत गहराई लिए होती थी। कुछ ही ऐसे कलाकार हैं जिनको चुप देखना भी एक सुखद अनुभव होता है।
गाने के बोल:
अजनबी कौन हो तुम, जबसे तुम्हें देखा है सारी दुनिया मेरी आँखों में सिमट आई है
अजनबी कौन हो तुम, जबसे तुम्हें देखा है सारी दुनिया मेरी आँखों में सिमट आई है
तुम तो हर गीत में शामिल थे, तरन्नुम की तरह तुम मिले हो मुझे फूलों का तबस्सुम बन के ऐसा लगता है के बरसों से, शमा आज आई है
अजनबी कौन हो तुम...
ख़्वाब का रँग हक़ीक़त में नज़र आया है दिल में धड़कन की तरह कोई, उतर आया है आज हर साँस में, शहनाई सी लहराई है
अजनबी कौन हो तुम...
कोई आहट सी, अंधेरों में चमक जाती है रात आती है तो तन्हाई, महक जाती है तुम मिले हो या, मोहब्बत ने ग़ज़ल गाई है
अजनबी कौन हो तुम...
.......................................... Ajnabi kaun ho tum-Sweekar Kiya Maine 1983