गुज़रे हैं आज इश्क़ में-दिल दिया दर्द लिया १९६८
प्रमुख भूमिकाओं वाली फिल्म दिल दिया दर्द लिया
में कुछ कर्णप्रिय गीत हैं. आप फिल्म से कुछ गीत
सुन चुके हैं इस ब्लॉग पर.
एक दर्द भरा गीत सुनते हैं शकील बदायूनीं का लिखा
हुआ और रफ़ी का गाया हुआ. संगीतकार हैं नौशाद.
गीत के बोल:
गुज़रे हैं आज इश्क़ में हम उस मक़ाम से
गुज़रे हैं आज इश्क़ में हम उस मक़ाम से
नफ़रत सी हो गई है मुहब्बत के नाम से
गुज़रे हैं
हमको न ये गुमान था ओ संगदिल सनम
राह-ए-वफ़ा से तेरे बहक जाएंगे क़दम
छलकेगा ज़हर भी तेरी आँखों के जाम से
गुज़रे हैं आज इश्क़ में हम उस मक़ाम से
गुज़रे हैं
ओ बेवफ़ा तेरा भी यूँ ही टूट जाए दिल
तू भी तड़प तड़प के पुकारे के हाय दिल
तेरा भी सामना हो कभी ग़म की शाम से
गुज़रे हैं
हम वो नहीं जो प्यार में रो कर गुज़ार दें
परछाईं भी हो तेरी तो ठोकर पे मार दें
वाक़िफ़ हैं हम भी ख़ूब हर एक इंतक़ाम से
गुज़रे हैं आज इश्क़ में हम उस मक़ाम से
नफ़रत सी हो गई है मुहब्बत के नाम से
गुज़रे हैं आज इश्क़ में
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Guzre hain aaj ishq mein-Dil diya dard liya 1968
Artist: Dilip Kumar

2 comments:
avismarneey geet jise kabhi nahi bhoola ja sakta
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नौशाद और रफ़ी की कारीगरी का एक बेहतरीन नमूना है.
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