घुँघरू की तरह-चोर मचाये शोर १९७४
चोर मचाये शोर से. इसे किशोर कुमार ने गाया है.
जेल में बंद नायक एक दर्द भरा गीत गा रहा है.
गीत और संगीत रवींद्र जैन का है.
गीत के बोल:
घुँघरू की तरह बजता ही रहा हूँ मैं
घुँघरू की तरह बजता ही रहा हूँ मैं
कभी इस पग में कभी उस पग में
बँधता ही रहा हूँ मैं
घुँघरू की तरह बजता ही रहा हूँ मैं
कभी टूट गया कभी तोड़ा गया
सौ बार मुझे फिर जोड़ा गया
कभी टूट गया कभी तोड़ा गया
सौ बार मुझे फिर जोड़ा गया
यूँ ही लुट लुट के और मिट मिट के
बनता ही रहा हूँ मैं
घुँघरू की तरह बजता ही रहा हूँ मैं
मैं करता रहा औरों की कही
मेरे बात मेरे मन ही में रही
मैं करता रहा औरों की कही
मेरे बात मेरे मन ही में रही
कभी मन्दिर में कभी महफ़िल में
सजता ही रहा हूँ मैं
घुँघरू की तरह बजता ही रहा हूँ मैं
अपनों में रहे या ग़ैरों में
घुँघरू की जगह तो है पैरों में
अपनों में रहे या ग़ैरों में
घुँघरू की जगह तो है पैरों में
अब कैसा गिला जग से जो मिला
सहता ही रहा हूँ मैं
घुँघरू की तरह बजता ही रहा हूँ मैं
घुँघरू की तरह बजता ही रहा हूँ मैं
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Ghunghroo ki tarah-Chor machaye shor 1974
Artist: Shashi Kapoor

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