Feb 9, 2018

ज़ुल्म-ओ-सितम को भी हम-जवान मोहब्बत १९७१

एक गीत की इंटरल्यूड्स में से कैसे एक गीत तैयार हो जाता है
उसकी एक बानगी सुनिए. फिल्म ब्रह्मचारी के गीत चक्के में चक्का
के अंतरे की एक धुन में से इसका मुखडा निकल आया.

सुनते हैं फिल्म जवान मोहब्बत से एक गीत रफ़ी का गाया हुआ.
इसे शैलेन्द्र ने लिखा है और इस गीत की धुन शंकर जयकिशन ने
बनाई है.

गीत में शम्मी कपूर एक पोमेरियन कुत्ते को घुमाते नज़र आ रहे हैं.
फिल्म की नायिका आशा पारेख को भी आप गीत में देख सकते
हैं. अब ये कुत्ता नायक का है या फिर नायिका का ये जानने के
लिए फिल्म देखें.


   


गीत के बोल:

ज़ुल्म-ओ-सितम को भी हम तो अदा समझे
पर मेरी चाहत को जाने वो क्या समझे
खुद को भला जाना मुझको बुरा समझे
पर मेरी चाहत को जाने वो क्या समझे

लाया था दिल को नज़र करने
क़ुरबाँ ये जान-ओ-जिगर करने
उनके बिना मेरा हाल है क्या
आया था उनको ख़बर करने
आया था उनको ख़बर करने

टाल दिया लेकिन मुझको भला समझे
ज़ुल्म-ओ-सितम को भी हम तो अदा समझे

हाय दिल मेरे बुरे हैं दिन तेरे
के मार ही न डाले किसी की बेदिली
उनका मुस्कराना गली से आना-जाना
हमारा लुट जाना हमारी ग़लती

जान के दुश्मन को जाने वफ़ा समझे
ज़ुल्म-ओ-सितम को भी हम तो अदा समझे

क्या है मोहब्बत प्यार है क्या
कोई उन्हें बतलाए ज़रा
हुस्न ग़ज़ब का हुस्न सही
जान तो ले दिलदार है क्या
जान तो ले दिलदार है क्या
बात वो करते हैं बात बिना समझे

ज़ुल्म-ओ-सितम को भी हम तो अदा समझे
पर मेरी चाहत को जाने वो क्या समझे
खुद को भला जाना मुझको बुरा समझे
पर मेरी चाहत को जाने वो क्या समझे
..........................................................
Zulm-o-sitam ko bhi ham to-Jawan mohabbat 1971

Artists: Shammi Kapoor, Asha Parekh, a pomerian dog

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