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Jul 24, 2020

मंज़िल वही है प्यार की-कठपुतली १९५७

आज २४ जुलाई है. जुलाई माह का २४ वां दिन और कोरोना
के चलते लॉकडाउन के चार माह पूरे हो गए हैं और ऊपर से
दो दिन और गुज़र गये है. इस पूरे समय ने हमारी जीवन शैली
में बदलाव ला दिया है. हालांकि कई जगह लॉकडाउन से राहत
मिली है और उनमें से कई स्थानों पर मरीजों की संख्या तेजी
से बढ़ी है. वैक्सीन का ही इंतज़ार है अब तो जिससे इसके
रोकथाम में गति आये.

आज बॉलीवुड के जिन चर्चित हस्तियों का जन्मदिन है उनमें
प्रमुख है-नायक चंद्रमोहन, प्रख्यात बांसुरी वादक पन्नालाल घोष,
अभिनेता मनोज कुमार और गायक सुबीर सेन.

मनोज कुमार पर दिन भर से सोशल मीडिया पर काफी चर्चा
हो रही है. अतः हम सुबीर सेन के बारे में बात करते हैं. गायक
सुबीर सेन मूलतः बंगाली गीतों के लिए ही जाने जाते हैं. उनके
कुछ हिंदी फ़िल्मी गीत भी उपलब्ध हैं जिनमें से एक आज हम
सुनेंगे. सुबीर सेन डिब्रूगढ़ आसाम में वर्ष १९३४ को पैदा हुए.

सुबीर सेन ने कई फ़िल्मों में अभिनय भी किया है जिनमें से
अधिकाँश बंगाली भाषा की फ़िल्में है. हिंदी फ़िल्म अनुभव में
वे दिखाई दिए थे.

सुनते हैं शैलेन्द्र का लिखा और शंकर जयकिशन द्वारा संगीतबद्ध
गीत फ़िल्म कठपुतली से जिसे बलराज साहनी और वैजयंतीमाला
पर फिल्माया गया है.





गीत के बोल:

मंज़िल वही है प्यार की राही बदल गये
मंज़िल वही है प्यार की राही बदल गये
सपनों की महफ़िल में हम तुम नये
सपनों की महफ़िल में हम तुम नये
मंज़िल वही है प्यार की राही बदल गये
मंज़िल वही है प्यार की राही बदल गये

दुनिया की नज़रों से दूर
दुनिया की नज़रों से दूर जाते हैं हम तुम जहाँ
उस देश की चाँदनी गायेगी ये दास्ताँ
मौसम था वो बहार का दिल खिल मचल गये
सपनों की महफ़िल में हम तुम नये

मंज़िल वही है प्यार की राही बदल गये

छुप न सके मेरे राज
छुप न सके मेरे राज नग़मों में ढलने लगे
रोका था दिल ने मगर पहलू बदलने लगे
ये दिन ही कुछ अजीब थे जो आज कल गये
सपनों की महफ़िल में हम तुम नये

मंज़िल वही है प्यार की राही बदल गये
मंज़िल वही है प्यार की राही बदल गये
…………………………………………………..
Manzil wahi hai pyar ki-Kathputli 1957

Artists: Balraj Sahni, Vaijayantimala

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Jul 14, 2020

मेरे दिल की धड़कन-अनहोनी १९५२

आज संगीतकार रोशन का जन्मदिन है. इस अवसर पर
सुनेंगे श्वेत श्याम युग से एक गीत. राज कपूर और नर्गिस
की जोड़ी वाली फिल्म अनहोनी से एक गाना शैलेन्द्र का
लिखा हुआ.

लता मंगेशकर और तलत महमूद के गीतों में माधुर्य
कोमलता के साथ मौजूद होता है. गुड़ के ढेले की जगह
गुड़ का महीन चूरा होता है. न विश्वास हो तो सुन के
देख लीजिए.

टेलीफोन का सदुपयोग/दुरूपयोग उस ज़माने में भी होता
था जैसा कि हमने इस गीत के माध्यम से समझा. एक
बात ज़रूर नहीं समझ आई कि उसके साथ का तार क्या
इतना लंबा छूटा हुआ होता था कि उसे ले के कोई भी
घर का चक्कर लगा ले यहाँ तक कि टेलीफोन एक्सचेंज
भी पहुँच जाए. नहीं? कोई समझायेगा मुझे ये क्या हो
रहा है.

जिन लोगों को आर डी बर्मन के गानों के मुखड़ों और
अंतरों के मीटर अनूठे लगते हैं वे इस गाने को ज़रूर
सुनें.




गीत के बोल:

मेरे दिल की धड़कन क्या बोले
क्या बोले
मेरे दिल की धड़कन क्या बोले
क्या बोले
मैं जानूँ और तू जाने
मैं जानूँ और तू जाने
मेरा प्यार भरा मन क्यों डोले
क्यों डोले
मेरा प्यार भरा मन क्यों डोले
क्यों डोले
मैं जानूँ और तू जाने
मैं जानूँ और तू जाने

चली गई रात मदभरी हवाओं के डोले पे हो के सवार
दे गयी चाँद की परी निगाहों को सपनों का पागल ख़ुमार
हमें किसने दिये ये नज़राने
कौन जाने
मैं जानूँ और तू जाने
मैं जानूँ और तू जाने

मेरे दिल की धड़कन क्या बोले
क्या बोले
मैं जानूँ और तू जाने
मैं जानूँ और तू जाने

महकी थी रात की रानी खिले थे गगन में चमेली के फूल
पूछा मैंने कान में तुमसे मुहब्बत है कैसी मज़ेदार भूल
मैं तुमसे लगी क्यों शरमाने
कौन जाने
मैं जानूँ और तू जाने
मैं जानूँ और तू जाने

मेरे दिल की धड़कन क्या बोले
क्या बोले
मैं जानूँ और तू जाने
मैं जानूँ और तू जाने
……………………………………………..
Mere dil ki dhadkan kya bole-Anhonee 1952

Artists: Raj Kapoor, Nargis

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Mar 12, 2020

हो गई शाम दिल बदनाम-नॉटी बॉय १९६२

किशोर कुमार की परदे पर उपस्थिति का ज़्यादातर
मतलब पूर्ण मनोरंजन. आज आपको ऐसा गीत सुनवा
रहे हैं जिसमें उनके लिए पार्श्व गायन मन्ना डे ने किया
है.

फिल्म के कथानक में एक पार्टी चल रही है जिसके शुरू
में मुक्केबाजी की प्रेक्टिस हो रही है. नायिका गाना शुरू
करती है और नायक मुक्केबाजी से निवृत्त हो कर हैप्पी
हो हैप्पी हो करते हुए गाना शुरू करता है और अपने नृत्य
कौशल से जनता को लुभाता है.

इस गीत में आपको फ़िल्मी दुनिया के ओर्केस्ट्रा के कई
कलाकार दिखलाई देंगे जिनके बारे में विस्तृत जानकारी
आपको महंगे वाले अंग्रेजी ब्लोगों पर उपलब्ध हो जायेगी.

गीत शैलेन्द्र का है और संगीत एस डी बर्मन का.



गीत के बोल:

हो हो गई शाम दिल बदनाम
लेता जाये तेरा नाम
लाख मनाऊँ नहीं माने
नहीं माने नहीं माने
हो ओ ओ हो गई शाम दिल बदनाम
लेता जाये तेरा नाम
लाख मनाऊँ नहीं माने
नहीं माने नहीं माने
हो ओ ओ हो गई शाम

प्यार ने जब से जादू फेरा हाँ
जागते करूं मैं सवेरा

आँखों में नाचे छबि तेरी हो
साँसों में रहे गम तेरा
हो पूछ लो कैसा रोग
दुनिआ मारे ताने

हैप्पी हो हैप्पी हो हैप्पी हैप्पी हैप्पी
हो गई शाम दिल बदनाम
लेता जाये तेरा नाम
लाख मनाऊँ नहीं माने
नहीं माने नहीं माने
हो ओ ओ हो गई शाम

हाय न दुनिया का मेला
तेरे बिना हूँ मैं अकेला
क्या मैं बताऊ कहाँ कहाँ
गर्दिश ने मुझको धकेला
हो ओ ओ तुम आ जाओ लौटा लाओ
वो गुजरे ज़माने

हो गई शाम दिल बदनाम
लेता जाये तेरा नाम
लाख मनाऊँ नहीं माने
नहीं माने नहीं माने
हो ओ ओ हो गई शाम

प्यार का रंगी ये नज़ारा हो
साथ तुम्हारा प्यारा प्यारा
हो ओ ओ सपना सुहाना मेरे आगे
आज मै फिर दिल हार
हो ओ ओ ये दो नैन ले गये चैन
लागे तड़पाने

हो गई शाम दिल बदनाम
लेता जाये तेरा नाम
लाख मनाऊँ नहीं माने
नहीं माने नहीं माने
हो ओ ओ ओ हो गई शाम दिल बदनाम
लेता जाये तेरा नाम
लाख मनाऊँ नहीं माने
नहीं माने नहीं माने
……………………………………………
Ho gayi sham dil badnam-Naughty Boy 1962

Artists: Kalpana, Kishore Kumar

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Feb 1, 2020

दो दिन की ज़िंदगी में-पूनम १९५२

हँसने वाले के साथ दुनिया भी हँसती है मगर रोने वाले
का साथ सभी छोड़ दिया करते हैं. ये एक कड़वा सच है
जिसका कोई जवाब और तोड़ नहीं है. अपने संगी साथी
भी थोड़े दिन तक झेलते हैं उसके बाद वे भी धीरे धीरे
किनारा करने लगते हैं.

आपने कई फिल्मों में नायकों और अन्य लोगो को वाद्य
यंत्र पकड़ के जोर जोर से हिलाते देखा होगा. उन गीतों
में मजाल है उँगलियाँ ज़रा भी हिल जाएँ. कुछ गीतों में
वाकई में साज़ बजाये भी जाते हैं, लेकिन आम तौर पर
बजने का ड्रामा ही ज्यादा मिलता है.

आज आपको सुनवाते हैं फिल्म पूनम से एक गीत
जिसमें सितार पर नायक की उँगलियाँ किसी मंजे हुए
सितार वादक की तरह चल रही हैं, भले ही नोट टू नोट
ना बजाया जा रहा हो मगर ऐसा आभास ज़रूर दिला
रहा है उसका प्रदर्शन मानो उसने बाकायदा कहीं से
सितार बजाने की ट्रेनिंग ली हो. ये हैं अशोक कुमार
जिन्हें आपने फिल्म आशीर्वाद में भी शिद्दत से संगीत
प्रदर्शन करते देखा होगा.

यह गीत फिल्माया गया है कामिनी कौशल पर जिसे
गाया है लता मंगेशकर ने. नायिका नायक को गीत के
माध्यम से प्रेरणा देने की कोशिश कर रही है मगर गीत
खत्म होते तक नायक सो जाता है. अब भला इतना मधुर
गीत सुन कर किसे  नींद नहीं आयेगी ?




गीत के बोल:

दो दिन की ज़िंदगी में दुखड़े हैं बेशुमार
दुखड़े हैं बेशुमार
दो दिन की ज़िंदगी में दुखड़े हैं बेशुमार
दुखड़े हैं बेशुमार
है ज़िंदगी उसी की जो हँस हँस के दे गुज़ार
हँस हँस के दे गुज़ार

उभरेंगे फिर सितारे चमकेगा फिर से चाँद
चमकेगा फिर से चाँद
उभरेंगे फिर सितारे चमकेगा फिर से चाँद
चमकेगा फिर से चाँद
उजड़े हुए चमन में आयेगी फिर बहार
आयेगी फिर बहार
है ज़िंदगी उसी की जो हँस हँस के दे गुज़ार
हँस हँस के दे गुज़ार

है धूप कहीं छाया
है धूप कहीं छाया ये ज़िन्दगी की रीत
ये ज़िन्दगी की रीत
है आज तेरी हार सखी कल है तेरी जीत
है आज तेरी हार सखी कल है तेरी जीत
हर साँस तुझसे बस यही कहती है बार बार
कहती है बार बार
है ज़िंदगी उसी की जो हँस हँस के दे गुज़ार
हँस हँस के दे गुज़ार

मरने के सौ बहाने जीने को सिर्फ़ एक
जीने को सिर्फ़ एक
मरने के सौ बहाने जीने को सिर्फ़ एक
जीने को सिर्फ़ एक
उम्मीद के शुरू में बजते हैं दिल के तार
बजते हैं दिल के तार
है ज़िंदगी उसी की जो हँस हँस के दे गुज़ार
हँस हँस के दे गुज़ार
दो दिन की ज़िंदगी में दुखड़े हैं बेशुमार
दुखड़े हैं बेशुमार
…………………………………………….
Do in ki zindagi mein dukhde-Poonam 1952

Artist: Kamini Kaushal, Ashok Kumar

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Jan 31, 2020

बरसात में हमसे मिले-बरसात १९४९

शंकर जयकिशन की फिल्म संगीत क्षेत्र में आगमन के साथ
ही नए युग का शुभारंभ हुआ जिसमें मधुरता के साथ थोड़ी
गति भी थी जो समय के हिसाब से ज़रूरी भी थी. ३० के
दशक की गीतों की गति ४० के दशक तक बरकरार रही और
उसमें थोडा बहुत फेर बदल अनिल बिश्वास, खेमचंद प्रकाश,
सी. रामचंद्र और नौशाद ने किया मगर आमूल चूल परिवर्तन
इस जोड़ी के आगमन के बाद ही हुआ.

सुनते हैं सन १९४९ की चर्चित फिल्म बरसात से शीर्षक गीत
जिसे शैलेन्द्र ने लिखा है. लता मंगेशकर और समूह ने इसे
गाया है. शंकर जयकिशन की अनेक खूबियों में से एक उनकी
फिल्मों के शीर्षक गीत भी हैं जो बेहद लोकप्रिय हैं.

गीत में मिलन और बिछुडन के भाव एक साथ हैं. दूसरे अंतरे
में तक धिना धिन बंद हो जाती है. कोरस गाने वाले दिखना
बंद हो जाते हैं और फिर दोनों नायक और उनकी गाडी भी
ओझल हो जाती है, रह जाता है धूल का गुबार और नायिका
की हाय.




गीत के बोल:


तक धिना धिन धिना धिन
तक धिना धिन
बरसात में
तक धिना धिन
बरसात में हमसे मिले तुम सजन तुमसे मिले हम
बरसात में
तक धिना धिन
बरसात में हमसे मिले तुम सजन तुमसे मिले हम
बरसात में
तक धिना धिन

नैनों से झाँके जी मस्त जवानी
मेरी मस्त जवानी
कहती फिरे दुनिया से दिल की कहानी
मेरे दिल की कहानी
उनकी जो मैं उनसे कैसी शरम
उनकी जो मैं उनसे कैसी शरम
कैसी शरम
बरसात में
तक धिना धिन
बरसात में हमसे मिले तुम सजन तुमसे मिले हम
बरसात में
तक धिना धिन

प्रीत ने सिंगार किया मैं बनी दुल्हन
मैं बनी दुल्हन
सपनों की रिमझिम में नाच उठा मन
मेरा नाच उठा मन
आज मैं तुम्हारी हुई तुम मेरे सनम
आज मैं तुम्हारी हुई तुम मेरे सनम
तुम मेरे सनम

बरसात में
तक धिना धिन
बरसात में हमसे मिले तुम सजन तुमसे मिले हम
बरसात में
तक धिना धिन

ये समाँ है जा रहे हो कैसे मनाऊँ
कैसे मनाऊँ
ये समाँ है जा रहे हो कैसे मनाऊँ
कैसे मनाऊँ
मैं तुम्हारी राह में ये नैन बिछाऊँ
नैन बिछाऊँ
जो ना आओ तुमको मेरी जान की क़सम
जान की क़सम
बरसात में
बरसात में हमसे मिले तुम सजन तुमसे मिले हम
बरसात में

देर ना करना कहीं ये आस टूट जाये
साँस छूट जाये
देर ना करना कहीं ये आस टूट जाये
साँस छूट जाये
तुम ना आओ दिल की लगी मुझको ही जलाये
ख़ाक में मिलाये
आग की लपटों में पुकारे ये मेरा ग़म
मिल ना सके हाय मिल ना सके हम
मिल ना सके हाय मिल ना सके हम
………………………………………………………
Barsaat mein hamse mile tum sajan-Barsaat 1949 

Artist: Nimmi, Raj Kapoor, Premnath

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Jan 21, 2020

दिन सुहाने ये मौसम बहार का-पूनम १९५२

क्या दिन थे वे भी जब बांसुरी की तान पर बकरियां,
भैंसें और लड़कियां आ जाया करती थीं.

सुनते हैं फिल्म पूनम से एक गीत शैलेन्द्र का लिखा
हुआ जिसे परदे पर कामिनी कौशल गा रही हैं. फिल्म
का नायक कार दुरुस्त करते करते चौंक के गाने वाली
को ढूँढने की कोशिश कर रहा है. 





गीत के बोल:

दिन सुहाने
दिन सुहाने ये मौसम बहार का
दिन सुहाने ये मौसम बहार का
दिल ये चाहे मैं गाऊँ गीत प्यार का
दिल ये चाहे मैं गाऊँ गीत प्यार का
हो गीत प्यार का
दिन सुहाने
दिन सुहाने ये मौसम बहार का

ये धडकन ये मस्ती ये हलचल
ये धडकन ये मस्ती ये हलचल
ये जवानी पे खुशियों का आँचल
ये जवानी पे खुशियों का आँचल
कहना क्या जिंदगी के सिंगार का
कहना क्या जिंदगी के सिंगार का
मौसम बहार का

दिन सुहाने
दिन सुहाने ये मौसम बहार का

जी ये चाहे के अपना हो कोई
जी ये चाहे के अपना हो कोई
नींद में प्यारा सपना हो कोई
नींद में प्यारा सपना हो कोई
और मज़ा हो किसी के इंतज़ार का
और मज़ा हो किसी के इंतज़ार का
मौसम बहार का

दिन सुहाने
दिन सुहाने ये मौसम बहार का

खिल उठी दिल की खामोश कलियाँ
खिल उठी दिल की खामोश कलियाँ
जगमगाई उम्मीदों की गलियां
जगमगाई उम्मीदों की गलियां
ये मचलना दिल-ए-बेक़रार का
ये मचलना दिल-ए-बेक़रार का
मौसम बहार का

दिन सुहाने
दिन सुहाने ये मौसम बहार का
दिल ये चाहे मैं गाऊँ गीत प्यार का
दिल ये चाहे मैं गाऊँ गीत प्यार का
हो गीत प्यार का
दिन सुहाने
दिन सुहाने ये मौसम बहार का
……………………………………………
Din suhane ye mausam bahar ka-Poonam 1952

Artist: Kamini Kaushal

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Dec 18, 2019

तुम ही तुम हो-एक दिल सौ अफ़साने १९६३

फिल्म का शीर्षक किसी कहावत जैसा लगता है, जैसे
एक अनार सौ बीमार. किसी फिल्म में जिसमें रोमांटिक
गीत हों, पारिवारिक मसले हों, उसका शीर्षक ऐसा हो तो
बिना फिल्म देखे समझना मुश्किल है कि ये वाकई सौ
अफ़साने और एक दिल की कहानी है या एक प्रोड्यूसर
और सौ डिस्ट्रीब्यूटर की.

सुनते हैं फिल्म से एक गीत लता और रफ़ी का गाया हुआ.
शैलेन्द्र के बोल हैं और शंकर जयकिशन का संगीत.

राज कपूर और वहीदा रहमान पर इसे फिल्माया गया है.
गौरतलब है राज कपूर के लिए इस गीत में रफ़ी की
आवाज़ प्रयोग में लायी गयी है. ये करिश्मा संगीतकार रवि
के संगीत निर्देशन वाली फिल्म नज़राना में भी है.


गीत के बोल:

तुम ही तुम हो मेरे जीवन में
फूल ही फूल हैं जैसे चमन में
तुम ही तुम हो मेरे जीवन में
फूल ही फूल हैं जैसे चमन में
एक हो मेरे तुम इस जहाँ में
एक है चंदा जैसे गगन में
एक हो मेरे तुम इस जहाँ में
एक है चंदा जैसे गगन में
तुम ही तुम हो तुम ही तुम हो

तुम मिले मुझे नया जहान मिल गया
झूमती जमीं को आसमान मिल गया

तुम ही तुम हो मेरे जीवन में
फूल ही फूल हैं जैसे चमन में
एक हो मेरे तुम इस जहाँ में
एक है चंदा जैसे गगन में
हाय तुम ही तुम हो तुम ही तुम हो

तुमसे दिल का चैन है तुम्हीं से है करार
तुम न रूठना के रूठ जायेगी बहार

एक हो मेरे तुम इस जहाँ में
एक है चंदा जैसे गगन में
तुम ही तुम हो मेरे जीवन में
फूल ही फूल हैं जैसे चमन में
तुम ही तुम हो तुम ही तुम हो

तुम हो मेरे कौन ज़िन्दगी है क्यूँ हसीन
सुन लो मेरी धड़कनें तो आयेगा यकीन

एक हो मेरे तुम इस जहाँ में
एक है चंदा जैसे गगन में
तुम ही तुम हो मेरे जीवन में
फूल ही फूल हैं जैसे चमन में
तुम ही तुम हो तुम ही तुम हो
तुम ही तुम हो तुम ही तुम हो
…………………………………………
Tum hi tum ho-Ek dil sau afsane 1963

Artists: Raj Kapoor, Waheeda Rehman

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Dec 1, 2019

तुम्हारी भी जय जय-दीवाना १९६७

जियो और जीने दो वाला सिद्धांत डार्विन की थ्योरी से
थोडा अलग चलता है. आज के समय में इस विचार के
पुनः प्रसार की ज़रूरत है. भौतिकतावादी युग में मानवीय
सम्बन्ध और मूल्य खोते जा रहे है.

समतावादी विचारधारा वाले लोग आपको कम मिलेंगे इस
युग में. सर्वजन सुखाय वाला सिद्धांत तभी सफल हो सकता
है जब आबादी का अधिकाँश तबका आपस में एक दूसरे
का ख्याल रखे. उसकी भैंस मेरी भैंस से बड़ी क्यूँ है, उसके
केक पर एक्स्ट्रा आइसिंग क्यूँ है जैसे विचारों को त्यागना
होगा. संतोष और शांति एक दूसरे से संबद्ध हैं.

शैलेन्द्र का लिखा हुआ गीत सुनते हैं जिसे मुकेश ने गाया
है शंकर जयकिशन की धुन पर. रेलगाड़ी या रेलवे स्टेशन
हिट्स में आप इसे शामिल कर लीजिए पर तनिक ये तो
बताइयेगा ये प्रीतमपुर नाम का स्टेशनवा हमरे देश के
जुगराफ़िया में कहाँ पर है? गीत के अंत में रेलगाड़ी की
छुक छुक और संगीत का बढ़िया मिश्रण है उसका आनंद
उठाना ना भूलियेगा.



गीत के बोल:

तुम्हारी भी जय जय हमारी भी जय जय
न तुम हारे न हम हारे
तुम्हारी भी जय जय हमारी भी जय जय
न तुम हारे न हम हारे
सफ़र साथ जितना था हो ही गया है
न तुम हारे न हम हारे
तुम्हारी भी जय जय हमारी भी जय जय

याद के फूल को हम तो अपने दिल से रहेंगे लगाये
याद के फूल को हम तो अपने दिल से रहेंगे लगाये
और तुम भी हँस लेना जब ये दीवाना याद आये
मिलेंगे जो फिर से मिला दें सितारे
न तुम हारे न हम हारे
तुम्हारी भी जय जय हमारी भी जय जय

वक़्त कहाँ रुकता है तो फिर तुम कैसे रुक जाते
वक़्त कहाँ रुकता है तो फिर तुम कैसे रुक जाते
आख़िर किसने चाँद को छुआ है हम क्यों हाथ बढ़ाते
जो उस पार हो तुम हम इस किनारे
न तुम हारे न हम हारे
तुम्हारी भी जय जय हमारी भी जय जय

था तो बहुत कहने को लेकिन अब तो चुप बेहतर है
था तो बहुत कहने को लेकिन अब तो चुप बेहतर है
ये दुनिया है एक सराय जीवन एक सफ़र है
रुका भी है कोई किसी के पुकारे
न तुम हारे न हम हारे
सफ़र साथ जितना था हो ही गया है
न तुम हारे न हम हारे

तुम्हारी भी जय जय हमारी भी जय जय
…………………………………………………..
Tumhari bhi jai jai-Diwana 1967

Artists: Raj Kapoor, Saira Bano

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Nov 29, 2019

ये मेरा दीवानापन है-यहूदी १९५८

गानों के शुरू में दो चार पंक्तियाँ कहने का ट्रेंड पुराना है.
श्वेत श्याम युग में सी रामचंद्र के संगीत वाले गीतों में
ये काफी देखने को मिलता था. राजेंद्र कृष्ण के लिखे
गानों में ऐसे काफी सारे वाकये हैं.

शंकर जयकिशन के संगीत वाले भी कुछ गीत ऐसे हैं
जिनमें ये फेनोमेना मिल जाता है. शैलेन्द्र का लिखा एक
गीत सुनते हैं फिल्म यहूदी से जिसे मुकेश ने गाया है.
ये सदाबहार लोकप्रिय गीत है और आज भी सुना जाता
है.





गीत के बोल:

दिल से तुझको बेदिली है
मुझको है दिल का गुरूर
तू ये माने के न माने
लोग मानेंगे ज़रूर

ये मेरा दीवानापन है या मोहब्बत का सुरूर
ये मेरा दीवानापन है या मोहब्बत का सुरूर
तू न पहचाने तो है ये तेरी नज़रों का क़सूर
ये मेरा दीवानापन है

दिल को तेरी ही तमन्ना दिल को है तुझसे ही प्यार
दिल को तेरी ही तमन्ना दिल को है तुझसे ही प्यार
चाहे तू आये न आये हम करेंगे इंतज़ार

ये मेरा दीवानापन है या मोहब्बत का सुरूर
तू न पहचाने तो है ये तेरी नज़रों का क़सूर
ये मेरा दीवानापन है

ऐसे वीराने में एक दिन घुट के मर जाएंगे हम
ऐसे वीराने में एक दिन घुट के मर जाएंगे हम
जितना जी चाहे पुकारो फिर नहीं आयेंगे हम

ये मेरा दीवानापन है या मोहब्बत का सुरूर
तू न पहचाने तो है ये तेरी नज़रों का क़सूर
ये मेरा दीवानापन है
ये मेरा दीवानापन है
……………………………………………..
Ye mera deewanapan hai-Yahudi 1958

Artist: Dilip Kumar

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Sep 3, 2019

ज़ुल्मी संग आँख लड़ी-मधुमति १९५८

लता मंगेशकर का गाया एक मधुर गीत सुनते हैं फिल्म
मधुमती से. फिल्म से हमने आपको कुछ गीत सुनवाए
है पहले जिन्हें आपने पसंद भी किया.

सुनिए वैजयंतीमाला और अन्य कलाकारों पर फिल्माया
गया गीत. ग्रामीण परिवेश में ये गीत गाया जा रहा है.

गीत लिखा है शैलेन्द्र ने और धुन है सलिल चौधरी की.
फिल्म का निर्देशन बिमल रॉय ने किया था.




गीत के बोल:

ज़ुल्मी संग आँख लड़ी ज़ुल्मी संग आँख लड़ी रे
सखी मैं का से कहूँ री सखी का से कहूँ
जाने कैसे ये बात बढ़ी
ज़ुल्मी संग आँख लड़ी रे
ज़ुल्मी संग आँख लड़ी ज़ुल्मी संग आँख लड़ी रे
सखी मैं का से कहूँ री सखी का से कहूँ
जाने कैसे ये बात बढ़ी
ज़ुल्मी संग आँख लड़ी रे

वो छुप छुप के बन्सरी बजाये
वो छुप छुप के बन्सरी बजाये रे
वो छुप छुप के बन्सरी बजाये
सुनाये मुझे मस्ती में डूबा हुआ राग रे
मोहे तारों की छाँव में बुलाये
चुराये मेरी निंदिया मैं रह जाऊँ जाग रे
लगे दिन छोटा रात बड़ी

ज़ुल्मी संग आँख लड़ी ज़ुल्मी संग आँख लड़ी रे

बातों बातों में रोग बढ़ा जाये
बातों बातों में रोग बढ़ा जाये रे
बातों बातों में रोग बढ़ा जाये
हमरा जिया तड़पे किसी के लिये शाम से
मेरा पागलपना तो कोई देखो
पुकारूँ मैं चंदा को साजन के नाम से
फिरी मन पे जादू की छड़ी

ज़ुल्मी संग आँख लड़ी ज़ुल्मी संग आँख लड़ी रे
सखी मैं का से कहूँ री सखी का से कहूँ
जाने कैसे ये बात बढ़ी
ज़ुल्मी संग आँख लड़ी रे
…………………………………………………………………
Zulmi sang aankh ladi-Madhumati 1958

Artist: Vaijayantimala

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Aug 24, 2019

कैसे मनाऊँ पियवा गुण मेरे-चार दीवारी १९६१

जिंदगी इस गीत की तरह सरल होती तो कितना अच्छा होता.
वो तो कम्प्यूटर प्रोग्राम के एलगोरिदम की तरह यहाँ वहाँ
भटका देती है. इफ और एंड इफ के बीच ही झूलती रह जाती.
काश कोई फायरवाल जिंदगी के लिए भी बना होता जो फफूंदों
को दूर रखता.

इस गीत की विशेषता इसकी सरलता है. बोल, संगीत, गायकी
सब दिल को छू लेने वाला है. प्रणय की बेला पर ये पार्श्व में
बज रहा है. सिनेमा के माध्यम में यही सहूलियत है-मन की
गाथा को पार्श्व गीत में उड़ेल दो. फिल्म ममता का गीत-छुपा
लो यूँ दिल में प्यार मेरा जिसमें जीवन अपनी यादों समेत
कुछ ही पलों में उड़ता हुआ पूर्वार्ध से उत्तरार्ध को पहुँच जाता है.

भावों के चित्रांकन के लिए कल्पनाशील दिमाग चाहिए तो उसे
समझने के लिए भी उतना नहीं तो कम से कम ७० टका का
भेजा चाहिए. नहीं तो मूंगफली ने बादाम से क्या कहा जैसी
बात हो जाती है.




गीत के बोल:

कैसे मनाऊँ पियवा गुण मेरे एकहू नाहीं
कैसे मनाऊँ पियवा गुण मेरे एकहू नाहीं
आई मिलन की बेला घबराऊं मन माहीं
कैसे मनाऊँ पियवा गुण मेरे एकहू नाहीं
कैसे मनाऊँ पियवा

साजन मेरे आये धडकन बढती जाए
साजन मेरे आये धडकन बढती जाए
नैना झुकते जाएँ घूंघट ढलका जाए
तुझसे ही शरमाये आज तेरी परछाई
कैसे मनाऊँ पियवा गुण मेरे एकहू नाहीं
कैसे मनाऊँ पियवा

मैं अनजान पराई द्वार तिहारे आई
मैं अनजान पराई द्वार तिहारे आई
तूने मुझे अपनाया प्रीत की रीत निभाना
हाय रे मन की कलियाँ फिर भी खिल ना पाईं
कैसे मनाऊँ पियवा गुण मेरे एकहू नाहीं
कैसे मनाऊँ पियवा
............................................................................
Kaise manaoon piywa-Char diwari 1961

Artists: Shahsi Kapoor, Nanda

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Aug 23, 2019

हमको समझ बैठी है-चार दीवारी १९६१

सिनेमा संगीत को सार्थक बनाने वाला एक और गीत सुनते हैं.
सन १९६१ की शशि कपूर और नंदा अभिनीत चार दीवारी फिल्म
में दुनिया की चाल ढाल पर शैलेन्द्र के गुदगुदाते कटाक्ष को आप
महसूस करिये. क्या ये आज भी प्रासंगिक नहीं है?

तीसरा अंतरा आनंददाई है. ये तो हमारे ऊपर भी लागू होता है.
आँख मूँद के ब्लोगिंग की दुनिया में कूद पड़े और अब भुगत रहे
हैं-उगलते बने ना निगलते बने. अपने आप पर हंसना अगर आपने
नहीं सीखा तो कुछ नहीं सीखा. अरे, इस बहाने आप हंस तो लेते
हैं चाहे फिल्म अर्थ की शबाना आज़मी की तरह ही सही-तुम इतना
क्यूँ मुस्कुरा रहे हो..........

एक कहावत है जो आपको नेट पर नहीं मिलेगी मगर जनता के
बीच लोकप्रिय है-टांगें छत से लगना. इसका सीधा अर्थ तो है-
लुटिया डूब जाना. बाकी के अर्थ-अनर्थ आप समझते रहें.



गीत के बोल:

हमको समझ बैठी है ये दुनिया दीवाना दीवाना
हमको समझ बैठी है ये दुनिया दीवाना दीवाना
पर मैं अगर पागल हूँ दुनिया है पागलखाना
पर मैं अगर पागल हूँ दुनिया है पागलखाना
दीवाना दीवाना
हमको समझ बैठी है ये दुनिया दीवाना दीवाना

चाल बेढंगी दुनिया दुरंगी मतलब की अंधी
हमको न पूछे पत्थर पूजे दौलत की बंदी
चाल बेढंगी दुनिया दुरंगी मतलब की अंधी
हमको न पूछे पत्थर पूजे दौलत की बंदी
धोखे में मत आ जाना दुनिया से दिल न लगाना
धोखे में मत आ जाना दुनिया से दिल न लगाना
है बात ये पते की लो कह चला दीवाना
दीवाना दीवाना
हमको समझ बैठी है ये दुनिया दीवाना दीवाना

हम सर के बल तुम सर के बल पैर तले अम्बर
अंधा बांटे खुद को देवे किस्मत का नंबर
हम सर के बल तुम सर के बल पैर तले अम्बर
अंधा बांटे खुद को देवे किस्मत का नंबर
हर शै पे है नजराना चुपचाप देते जाना
हर शै पे है नजराना चुपचाप देते जाना

है बात ये पते की लो कह चला दीवाना
दीवाना दीवाना
हमको समझ बैठी है ये दुनिया दीवाना दीवाना

आँख पे अपनी पट्टी बाँधी भेड़चाल चलना
नदी नाला कुछ मत देखो तुरंत कूद पड़ना
आँख पे अपनी पट्टी बाँधी भेड़चाल चलना
नदी नाला कुछ मत देखो तुरंत कूद पड़ना
सब कुछ रहे अनजाना मत सोचना समझाना
है बात ये पते की लो कह चला दीवाना
दीवाना दीवाना
हमको समझ बैठी है ये दुनिया दीवाना दीवाना
पर मैं अगर पागल हूँ दुनिया है पागलखाना
दीवाना दीवाना
हमको समझ बैठी है ये दुनिया दीवाना दीवाना
.....................................................................
Hamo samajh baithi hai ye duniya deewana-Char diwari 1961

Artist: Shashi Kapoor

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Aug 3, 2019

मचलती आरज़ू खड़ी बाहें पसारे-उसने कहा था १९६०

कॉम्प्लेक्स कम्पोज़ीशन सुने हुए बहुत दिन हुए. जब जब
सलिल चौधरी और हृदयनाथ मंगेशकर के नाम याद आते
हैं ऐसी धुनें भी याद आ जाती है.

आज जो गीत हमने चुना है वह लोकप्रिय गीत है. सलिल
के संगीत वाले ऐसे काफी सारे गीत हैं जो लोकप्रिय नहीं
नहीं मगर मधुर हैं. धीरे धीरे आपको सुनवायेंगे.

खेत खलिहान हिट्स-है ना जी. सही श्रेणी चुनी है ना हमने
इस गीत के लिए. किसी ने इस गीत को झूला सोंग भी कहा
है. गीत में नायिका झूले पर भी झूल लेती है.गीत में युवा
नंदा आपको कूदती फांदती नज़र आएँगी.




गीत के बोल:

ओ हो हो हो हो हो हो हो
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ

मचलती आरज़ू खड़ी बाहें पसारे
ओ मेरे साजना रे धड़कता दिल पुकारे
आ आ आ आ जा
हो ओ ओ ओये मचलती आरज़ू खड़ी बाहें पसारे
ओ मेरे साजना रे धड़कता दिल पुकारे
आ आ आ आ जा

मेरा आँचल पकड़ के कह रहा मेरा दिल
मेरा आँचल पकड़ के कह रहा मेरा दिल
ज़माने की निग़ाहों से यहाँ छुप छुप के मिल
यहीं तन्हाई में दिल की कली जायेगी खिल
हो ओ ओ ओये
मचलती आरज़ू खड़ी बाहें पसारे
ओ मेरे साजना रे धड़कता दिल पुकारे
आ आ आ आ जा

अजब मस्ती में डूबा गीत गाती है हवा
अजब मस्ती में डूबा गीत गाती है हवा
दुपट्टा मेरा रह रह के उड़ाती है हवा
करूँ क्या आते-जाते छेड़ जाती है हवा

हो ओ ओ ओये
मचलती आरज़ू खड़ी बाहें पसारे
ओ मेरे साजना रे धड़कता दिल पुकारे
आ आ आ आ जा

मिलन के मदभरे चंचल ख़्यालों में मगन
मिलन के मदभरे चंचल ख़्यालों में मगन
मैं यूँ तकती हूँ तेरी राह ओ मेरे सजन
बहारों के लिए हो एक दिन जैसे चमन

हो ओ ओ ओये
मचलती आरज़ू खड़ी बाहें पसारे
ओ मेरे साजना रे धड़कता दिल पुकारे
आ आ आ आ जा
.....................................................
Machalt arzoo-Usne kaha tha 1960

Artist: Nanda

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Jul 31, 2019

दर्द-ए-जिगर ठहर ज़रा-औरत १९५३

दर्द-ए-दिल और दर्द-ए-जिगर वाले कई गीत बने हैं फिल्मों के लिए.
दर्द-ए-liver के ऊपर थोड़े कम गीत बने हैं. शरीर की लेबोरेट्री के pain
को समर्पित गीतों में प्रस्तुत गीत ऊंचा स्थान रखता है.

फिल्म का नाम है औरत. सन १९५३ की इस फिल्म से आप पूर्व
में कुछ गीत सुन चुके हैं. गीत लिखा है शैलेन्द्र ने और इसे गाया
है लता मंगेशकर ने शंकर जयकिशन की धुन पर.



गीत के बोल:

दर्द-ए-जिगर ठहर ज़रा 
दर्द-ए-जिगर ठहर ज़रा 
दम तो मुझे लेने दे दम तो मुझे लेने दे
जिसने मिटाया है मुझे उसको दुआ देने दे
उसको दुआ देने दे
दर्द-ए-जिगर ठहर ज़रा

दिल की लगी क्या है जान लूं तो बहुत अच्छा हो
मैं जो घुट घुट के जान दूं तो बहुत अच्छा हो
मैं जो घुट घुट के जान दूं तो बहुत अच्छा हो
कल जहाँ बसाया था कल जहाँ बसाया था
आज मिटा लेने दे आज मिटा लेने दे
दर्द-ए-जिगर ठहर ज़रा

मेरी बर्बाद मोहब्बत ना कर किसी से गिला
ना कर किसी से गिला
वफ़ा का इस जहाँ में है तो बस यही है सिला
वफ़ा का इस जहाँ में है तो बस यही है सिला
हो यही है सिला
ए मेरी लगी तू मुझे ए मेरी लगी तू मुझे
अपनी सजा लेने दे अपनी सजा लेने दे
दर्द-ए-जिगर ठहर ज़रा

बुत न जगे मेरी मायूस सदा लौट आई
लिपट के मुझसे रो रही है मेरी तन्हाई
लिपट के मुझसे रो रही है मेरी तन्हाई
कब तलक जले ये शमा कब तलक जले ये शमा
अब तो बुझा लेने दे अब तो बुझा लेने दे
दर्द-ए-जिगर ठहर ज़रा
दर्द-ए-जिगर ठहर ज़रा
………………………………………………………
Dard-e-dil thahar zara-Aurat 1953

Artist:

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Jul 21, 2019

ऐ प्यासे दिल बेज़ुबान-बेगुनाह १९५७

शंकर जयकिशन के खजाने से एक गीत सुनते हैं आज.
इसका ओर्केस्ट्राईज़ेशन ज़बरदस्त है. इसी वजह से इसके
मुरीद ओर्केस्ट्रा वाले ज्यादा हैं. शंकर जयकिशन के गाने
गाने में आसान लगते हैं मगर ऐसा नहीं है. गाने का
मेलोडी कंटेंट तब तक पूरा नहीं होता जब तक साथ में
वाद्य यंत्र ना बजें.

मुकेश के गाये इस गीत की रचना की है शैलेन्द्र ने.




गीत के बोल:

ए प्यासे दिल बेज़ुबान तुझको ले जाऊं कहां
ए प्यासे दिल बेज़ुबान तुझको ले जाऊं कहां
आ आ आ आ आ आ
आग को आग में ढाल के कब तक जी बहलाएगा
ए प्यासे दिल बेज़ुबान

घटा झुकी और हवा चली तो हमने किसी को याद किया
चाहत के वीराने को उनके गम से आबाद किया
घटा झुकी और हवा चली तो हमने किसी को याद किया
चाहत के वीराने को उनके गम से आबाद किया
ए प्यासे दिल बेज़ुबान मौसम की ये मस्तियां
आग को आग में ढाल के कब तक जी बहलायेगा
ए प्यासे दिल बेज़ुबान

तारे नहीं अंगारे हैं वो अब चांद भी जैसे जलता है
नींद कहां सीने पर कोई भारी कदमों से चलता है
तारे नहीं अंगारे हैं वो अब चांद भी जैसे जलता है
नींद कहां सीने पर कोई भारी कदमों से चलता है
ए प्यासे दिल बेजुबान दर्द है तेरी दास्तां
आ आ आ आ आ आ
आग को आग में ढाल के कब तक जी बहलाएगा
ए प्यासे दिल बेज़ुबान

कहां वो दिन अब कहां वो रातें तुम रूठे किस्मत रूठी
गैर से भेज छुपाने को हम हंसते फिरे हंसी झूठी

ए प्यासे दिल बेज़ुबान दुःख के रहा तेरा जहां
आ आ आ आ आ आ आ
...............................................................
Ae pyase dil bezuban-Begunah 1957

Artist:

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Jan 20, 2019

हाय रे वो दिन क्यूँ ना आये-अनुराधा १९६०

फिल्म की नायिका एक प्रतिभाशाली गायिका है. एक
डॉक्टर से उसे प्रेम हो जाता है और शादी के बाद वो
डॉक्टर के साथ गांव आ जाती है जहाँ डॉक्टर अपनी
प्रेक्टिस करता है. धीरे धीरे डॉक्टर व्यस्त होता चला
जाता है और नायिका की भूमिका एक कामकाजी घरेलू
महिला तक सीमित रह जाती है.

गीत में नायिका हाय हाय करते हुए अपने सुनहरे दिन
याद कर रही है. शैलेन्द्र के लिखे गीत की तर्ज़ तैयार
की है सितार वादक पंडित रविशंकर ने. लता मंगेशकर
ने इसे गाया है. सिंगल हाय और डबल हाय में फर्क
होता है और दोनों के एक्सप्रेशन भी अलग अलग होते
हैं. परदे पर गीत गाने वाली नायिका हैं लीला नायडू.



गीत के बोल:

हाय रे वो दिन क्यों ना आये
जा जा के ऋतु लौट आये
हाय रे वो दिन क्यों ना आये

झिलमिल वो तारे कहाँ गये सारे
मन बाती जले बुझ जाये

हाय रे वो दिन क्यों ना आये

सूनी मेरी बीना संगीत बिना
सपनों की माला मुरझाये

हाय रे वो दिन क्यों ना आये
जा जा के ऋतु लौट आये
हाय रे वो दिन क्यों ना आये
………………………………………………….
Haye re wo din kyun na aaye-Anuradha 1960

Artists: Leela Naidu, Balraj Sahni, Nazir Hussain

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Jan 10, 2019

मैं रिक्शावाला-छोटी बहन १९५९

महमूद ने १९७४ में एक फिल्म बनाई थी जिसमें
स्वयं एक रिक्शा वाले की भूमिका निभाई थी और
खूब रिक्शा चलाया था. १५ साल पहले की फिल्म
छोटी बहन में भी उन्होंने रिक्शा चलाया था और
एक गीत भी उन पर फिल्माया गया जिसे रफ़ी
ने गाया.

हल्का फुल्का गीत है और इसमें थोड़े कटाक्ष भी
हैं. गीत की शुरुआत ही कटाक्ष से होती है जब
नायक घोड़े की टाप वाले अंदाज़ में अपने पैर
चलाता है. गीत की पंक्ति ‘है चार के बराबर’ उसकी
पुष्टि करती है या उनका अभिनय गीत की पंक्तियों
की पुष्टि करता है, जैसा चाहें समझ लें.

सवारी को स्टेशन छोड़ने के बाद अगली सवारी
के लिए गुहार लगाता है. एक सवारी जेबें झाडती
हुई निकल जाती है. स्टेशन के बाहर रिक्शे वाले
सवारियों के दिमाग पर इतना जोर डालते हैं कि
कई सवारियां तो उनकी बक-बक को बंद करने के
लिए ही उनके रिक्शे में बैठ जाते हैं. ये सिलसिला
आज भी जारी है बस रिक्शे में इंजिन लग गया है.
कोई तीन टांग वाला है तो कोई चार टांग वाला.

जहाँ घोडा होना चाहिए वहाँ आदमी है.धूल उड़ाती
कार जब बाजू से गुज़रती है तो नायक सोचता है-
कहाँ थे कहाँ आ गये. समय किसे कहाँ ला पटके
और किसे कौन से आसमान पर बिठला दे, ये
प्रारब्ध के लेखे के सिवा कौन बतला सकता है.

संसाधन और उदारता के बीच व्युत्क्रमानुपाती
सम्बन्ध है. जैसे जैसे पैसे बढते जाते हैं, दिमाग
का एक कोना जो उदारता को प्रेरित करता है
सिकुड़ता जाता है. दुनिया का अधिकांश धन कुछ
प्रतिशत लोगों के पास ही है. इस विसंगति पर भी

प्रश्न है इस गीत में जिसका जवाब तो हम भी
खोज रहे हैं आज तक. गीतकार हैं शैलेन्द्र और
संगीतकार शंकर जयकिशन.



गीत के बोल:

मैं रिक्शावाला मैं रिक्शावाला
है चार के बराबर ये दो टाँग वाला
कहाँ चलोगे बाबू कहाँ चलोगे लाला
कहाँ चलोगे बाबू कहाँ चलोगे लाला
मैं रिक्शावाला मैं रिक्शावाला

दूर दूर दूर कोई मुझको बुलाये
मुझको बुलाये
क्या करूँ दिल उसे भूल न पाये
भूल न पाये
मैं रिश्ते जोडूं दिल के मुझे ही मंज़िल पे
कोई न पहुँचाये कोई न पहुँचाये

मैं रिक्शावाला मैं रिक्शावाला
है चार के बराबर ये दो टाँग वाला
कहाँ चलोगे बाबू कहाँ चलोगे लाला
कहाँ चलोगे बाबू कहाँ चलोगे लाला
मैं रिक्शावाला मैं रिक्शावाला

थी कभी चाँद तक अपनी उड़ान
अपनी उड़ान
अब ये धूल ये सड़क अपना जहान
अपना जहान
जो कोई देखे चौँकें ऊपर वाला भी सोचे
ये कैसा इंसान ये कैसा इंसान

मैं रिक्शावाला मैं रिक्शावाला
है चार के बराबर ये दो टाँग वाला
कहाँ चलोगे बाबू कहाँ चलोगे लाला
कहाँ चलोगे बाबू कहाँ चलोगे लाला
मैं रिक्शावाला मैं रिक्शावाला

रात दिन हर घड़ी एक सवाल
एक सवाल
रोटियां कम हैं क्यूँ क्यूँ है अकाल
क्यूँ है अकाल
क्यूँ दुनिया मे कमी हैं ये चोरी किसने की है
कहाँ है सारा माल कहाँ है सारा माल

मैं रिक्शावाला मैं रिक्शावाला
है चार के बराबर ये दो टाँग वाला
कहाँ चलोगे बाबू कहाँ चलोगे लाला
कहाँ चलोगे बाबू कहाँ चलोगे लाला
मैं रिक्शावाला मैं रिक्शावाला
…………………………………….
Main riksha wala-Chhoti Behan 1959

Artist: Mehmood

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Nov 29, 2018

टीन कनस्तर पीट-पीट कर-लव मैरिज १९५९

बेसुरों को बेसुरा क्यूँ कहा जाता है इसका जवाब आप
आसानी से खोज सकते हैं अगर आपको संगीत का ज्ञान
नहीं है तो भी. जब सृष्टि ने श्रेष्ठ की रचना की तो निकृष्ट
भी तैयार हुआ. निर्गुण से आप अच्छा निकालने की चेष्टा
करेंगे तो उसी प्रमाण में बुरा भी तो निकलेगा. दुनिया का
हर पहलू इन दो सीमाओं के बीच ही है.

बाकी का गाना सेल्फ एक्सप्लेनेट्री है. जो गाने बजाने के
नाम पर बुरी आवाजों का शोर करते हैं उनको समर्पित है
फिल्म लव मैरिज का ये गीत.

कविवर शैलेन्द्र इसके रचयिता हैं और शंकर जयकिशन
ने इसकी धुन तैयार की है.



गीत के बोल:   

टीन कनस्तर पीट पीट कर गला फाड़ कर चिल्लाना
यार मेरे मत बुरा मान ये गाना है न बजाना है
टीन कनस्तर पीट पीट कर गला फाड़ कर चिल्लाना
यार मेरे मत बुरा मान ये गाना है न बजाना है
.......................................................................
Teen kanastar peet peet kar-Love Marriage 1959

Artist: Dev Anand

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Oct 30, 2018

आ जा री चाँदनी-चाँद १९५९

कोरस वाले गीतों में क्या आपने अतिरिक्त ऊर्जा महसूस
की है. ऐसा होना भी चाहिए क्यूंकि इतनी सारी आवाजों
का प्रभाव थोडा अलग पढता है, वजन आ जाता है गीत
में. अब ये बात और है अगर कोरस को प्रभावी ढंग से
ना प्रयोग किया जाए तो वजन दूसरे किस्म का बन
जाता है.

सुनते हैं फिल्म चाँद से लता मंगेशकर का गाया हुआ एक
गीत जिसे मीना कुमारी पर फिल्माया गया है. शैलेन्द्र के
लिखे गीत के लिए संगीत दिया है हेमंत कुमार ने.

इसे सुन के ना जाने क्यूँ दो गाने और याद आते हैं मगर
उनके बोल ध्यान में नहीं आ पा रहे. इस बार पिस्ता थोडा
महंगा हो गया है और हमने खाना बंद कर दिया है. पाठक
थोड़ी ठक ठक कर के बतलायें वो कौन से गीत हैं.




गीत के बोल:

आ जा री चाँदनी
आ जा री चाँदनी हमारी गली
चाँद ले के आ जा
हमने नैन बिछाये
आ जा
बैठे लगन लगाए
आ जा
अब तो रहा न जाये
आ जा
आ जा री चाँदनी
आ जा री चाँदनी हमारी गली
चाँद ले के आ जा
हमने नैन बिछाये
आ जा
बैठे लगन लगाए
आ जा
अब तो रहा न जाये
आ जा
आ जा री चाँदनी
आ जा री चाँदनी हमारी गली
चाँद ले के आ जा

जब जब मौसम ले अंगड़ाई
जब जब मौसम ले अंगड़ाई
बिजली चमकी बदली छाई
बिजली चमकी बदली छाई
राम ही जाने क्या है बात
नींद न आये सारी रात

आ जा री चाँदनी
आ जा री चाँदनी हमारी गली
चाँद ले के आ जा
हमने नैन बिछाये
आ जा
बैठे लगन लगाए
आ जा
अब तो रहा न जाये
आ जा
आ जा री चाँदनी
आ जा री चाँदनी हमारी गली
चाँद ले के आ जा

हमको पलछिन साँझ सकारे
हमको पलछिन साँझ सकारे
छुप छुप जाने कौन पुकारे
छुप छुप जाने कौन पुकारे
कर के सपनों में पहचान
ऐसे न आया बेईमान

आ जा री चाँदनी
आ जा री चाँदनी हमारी गली
चाँद ले के आ जा
हमने नैन बिछाये
आ जा
बैठे लगन लगाए
आ जा
अब तो रहा न जाये
आ जा
आ जा री चाँदनी
आ जा री चाँदनी हमारी गली
चाँद ले के आ जा

इक रुत आए इक रुत जाये
इक रुत आए इक रुत जाये
बाली उमर बड़ा दुख पाये
बाली उमर बड़ा दुख पाये
न हमको नींद न उनको चैन
नागिन बन गई काली रैन

आ जा री चाँदनी
आ जा री चाँदनी हमारी गली
चाँद ले के आ जा
हमने नैन बिछाये
आ जा
बैठे लगन लगाए
आ जा
अब तो रहा न जाये
आ जा
आ जा री चाँदनी
आ जा री चाँदनी हमारी गली
चाँद ले के आ जा
........................................................
Aa ja ri chandni-Chand 1959

Artist: Meena Kumari

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Aug 12, 2018

मेरे तुम्हारे बीच में-झुक गया आसमान १९६८

स्पेशल स्पेशल. हाँ ये सही है शंकर जयकिशन ने
सभी संगीतकारों की तरह लता को स्पेशल धुनें दी
गाने को सिवाय नैयर के. नैयर ने तो लता से गाने
गवाए ही नहीं.

झुक गया आसमन में भी एक ऐसा गाना है जो बाकी
के शोरगुल वाले गीतों से अलग है. लेख टंडन फिल्म के
निर्देशक हैं और ये गाना आम्रपाली फिल्म के गीतों की
कड़ी में अगला गीत सा लगता है.

दृष्टिभ्रम में खम्बा भी नायक नज़र आता है नायिका को.
प्यार में ऐसा होता है. नायक पार्क की बेंच पर बैठा भी
नज़र आता है.
इस गीत से राजेश खन्ना की एक फिल्म का नाम
निकल के आता है. फ़िल्मी बारिश भी है इसमें और
गीत का फिल्मांकन बढ़िया है.




गीत के बोल:

मेरे तुम्हारे बीच में अब तो ना पर्वत ना सागर
निस दिन रहे खयालों में तुम अब हो जाओ उजाग़र
अब आन मिलो सजना अब आन मिलो सजना
सजना

मेरे तुम्हारे बीच में अब तो ना पर्वत ना सागर
निस दिन रहे खयालों में तुम अब हो जाये उजाग़र
अब आन मिलो सजना अब आन मिलो सजना
सजना


आया मदमाता सावन फिर रिमझिम की रूत आई
फिर मन में बजी शहनाई फिर प्रीत ने ली अंगडाई
आया मदमाता सावन फिर रिमझिम की रूत आई
फिर मन में बजी शहनाई फिर प्रीत ने ली अंगडाई

मेरे तुम्हारे बीच में अब तो ना पर्वत ना सागर
निस दिन रहे खयालों में तुम अब हो जाओ उजाग़र
अब आन मिलो सजना अब आन मिलो सजना
सजना

मैं मन को लाख मनाऊँ माने नहीं मन मतवाला
अब आ के तुम्हीं समझाओ मैंने अब तक बहुत संभाला
मैं मन को लाख मनाऊँ माने नहीं मन मतवाला
अब आ के तुम्हीं समझाओ मैंने अब तक बहुत संभाला

मेरे तुम्हारे बीच में अब तो ना पर्वत ना सागर
निस दिन रहे खयालों में तुम अब हो जाओ उजाग़र
अब आन मिलो सजना अब आन मिलो सजना
सजना

सज धज के खड़ी मैं कब से डोली ले कर आ जाओ
उस पार जहाँ मेरा घर है उस पार मुझे ले जाओ
सज धज के खड़ी मैं कब से डोली ले कर आ जाओ
उस पार जहाँ मेरा घर है उस पार मुझे ले जाओ

मेरे तुम्हारे बीच में अब तो ना पर्वत ना सागर
निस दिन रहे खयालों में तुम अब हो जाओ उजाग़र
अब आन मिलो सजना अब आन मिलो सजना
सजना
मेरे तुम्हारे बीच में अब तो ना पर्वत ना सागर
निस दिन रहे खयालों में तुम अब हो जाओ उजाग़र
अब आन मिलो सजना अब आन मिलो सजना
सजना
…………………………………………………
Mere tumhare beech mein ab-Jhuk gaya aasman 1968

Artist: Saira Bano, Rajendra Kumar

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