आँखों में नींदें न दिल में करार-सनम १९९७
निहायत मासूम से दिखाई देते हैं/थे. इनमें से एक
जोड़ी है-मनीषा कोइराला और विवेक मुशरान. १९९१
की फिल्म सौदागर के बाद १९९७ की फिल्म सनम
में इन्हें फिर देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ.
इनकी एक फिल्म और आई थी सन १९९१ में जिसका
नाम है-फर्स्ट लव लैटर. सौदागर की लोकप्रियता में
ये फिल्म कहीं खो सी गयी लेकिन फिल्म के १-२
गीत काफी बजे.
चेहरे समय के साथ मासूमियत खोते जाते हैं और
समय के थपेड़े उन्हें पका डालते हैं. ये खूबी केवल
हिंदी सिनेमा की एकमात्र अभिनेत्री में रही वो हैं
मधुबाला. मधुबाला के चहरे की मासूमियत उनकी
पहली फिल्म से लेकर आखिरी फिल्म तक बरकरार
रही.
कुछ लोगों ने ८० के दशक में पॉपुलर हुई एक
अभिनेत्री की तुलना मधुबाला से की. उस अभिनेत्री
की मासूमियत और मुस्कराहट समय के साथ साथ
अकुलाहट और खिसियाहट में तब्दील होती चली.
बाल-मासूमियत और परिपक्व मासूमियत का संगम
देखना हो तो अभिनेत्री साधना की फ़िल्में देख डालिए.
गीत के बोल:
आँखों में नींदें न दिल में करार
आँखों में नींदें न दिल में करार
मुहब्बत भी क्या चीज़ होती है यार
मुहब्बत भी क्या चीज़ होती है यार
कभी बेखुदी तो कभी इंतज़ार
कभी बेखुदी तो कभी इंतज़ार
मुहब्बत भी क्या चीज़ होती है यार
मुहब्बत भी क्या चीज़ होती है यार
दर्द उठे प्यास जगे याद सताये
कोई सदा शाम-ओ-सहर पास बुलाये
दर्द उठे प्यास जगे याद सताये
कोई सदा शाम-ओ-सहर पास बुलाये
रात ढले धूप खिले आए सवेरा
चाहतों के आशियां में दिल का बसेरा
बेकरारी है जाने क्यूँ सनम
आँख है खुली नींद में हैं हम
हर घड़ी दिल पे है कैसा ये खुमार
आँखों में नींदें न दिल में करार
आँखों में नींदें न दिल में करार
मुहब्बत भी क्या चीज़ होती है यार
मुहब्बत भी क्या चीज़ होती है यार
मैं तो तुझे एक पल भी भूल न पाऊं
जान-ए-वफ़ा पास तेरे दौड़ के आऊं
मैं तो तुझे एक पल भी भूल न पाऊं
जान-ए-वफ़ा पास तेरे दौड़ के आऊं
तू जो कहे रस्में सभी तोड़ दूं सनम
तेरे लिए दोनों जहाँ छोड़ दूं सनम
रात ना कटे ना कटे ये दिन
कैसे कटेगी उम्र तेरे बिन
प्यार ज़िंदगी में होता है एक बार
आँखों में नींदें न दिल में करार
आँखों में नींदें न दिल में करार
मुहब्बत भी क्या चीज़ होती है यार
मुहब्बत भी क्या चीज़ होती है यार
कभी बेखुदी तो कभी इंतज़ार
कभी बेखुदी तो कभी इंतज़ार
मुहब्बत भी क्या चीज़ होती है यार
मुहब्बत भी क्या चीज़ होती है यार
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Aankhon mein neenden-Sanam 1997
Artists: Vivek Mushran, Manisha Koirala

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