मार कटारी मर जाना-शहनाई १९४७
गीत भी काफ़ी बजे थे अपने समय में. आज भी कुछ गीत हैं
इस फिल्म के जो लोकप्रिय हैं. लोकप्रिय में से एक आप सुन
चुके हैं दूसरा सुनते हैं अब.
सहज और सरल बोलों वाले गीत कैसे लोगों कि जुबान पर चढ
जाते हैं उसकी बानगी है ये. ऐसे सहज गीत सहजता से ही बन
जाते हैं मगर ऐसे करिश्मे रोज रोज नहीं होते. गीतकार के दिल
से आह निकली तो उसने एक बढ़िया सा गीत अपनी सौ प्रतिशत
भावनाएं उड़ेलते हुए लिख डाला. संगीतकार के भी दिमाग में लट्टू
जला और उसने एक कालजयी धुन बना डाली. गायिका को दाद
तो हम बरसों से देते आये हैं. अमीरबाई कर्नाटकी अपने समय की
निपुण गायिका थीं.
गीत के बोल:
हमें क्या पता था के दिल की कली को मसल देंगे वो
हमें क्या पता था के राहत को गम में बदल देंगे वो
मोहब्बत के वादे और झूठी खा कसमें
किसी और के हो के चल देंगे वो
इसलिए तो कहा था बेटा
मार कटारी मर जाना
मार कटारी मर जाना
रे अँखियाँ किसी से मिलाना ना
हो मिलाना ना
मार कटारी मर जाना
मार कटारी मर जाना
रे अँखियाँ किसी से मिलाना ना
हो मिलाना ना
ज़हर खा के मर जाना
रे मन में किसी को बसाना ना
हो बसाना ना
हाय दुनिया की कोई भी चीज़ अब भाती नहीं है
चैन अब आता नहीं है नींद अब आती नहीं
जिनको आना था न आये जाने वाले जा चुके
हा आ आ आ आ आ
दिल को जाना था गया पर जान क्यूँ जाती नहीं
इसलिए तो कहा था बेटा
पीछे पड़े है पछताना
पीछे पड़े है पछताना
तू अपना किसी को बनाना ना
हो बनाना ना
पीछे पड़े है पछताना
तू अपना किसी को बनाना ना
हो बनाना ना
मार कटारी मर जाना
रे अँखियाँ किसी से मिलाना ना
हो मिलाना ना
क्यों इन आँखों ने उनका अब तक इंतज़ार किया
क्यूँ इस भोले दिल ने उन पर बार बार ऐतबार किया
जो यही मोहब्बत का बदला मुझको मिलने वाला था
हाँ आ आ आ आ आ आ
क्यों दुनिया के ताने सह के मैंने उनसे प्यार किया
इसलिए तो कहा था बेटा
सुन के हंसेगा ज़माना
सुन के हंसेगा ज़माना
दुःख अपना किसी को सुनाना ना
हो सुनाना ना
सुन के हंसेगा ज़माना
दुःख अपना किसी को सुनाना ना
हो सुनाना ना
मार कटारी मर जाना
रे अँखियाँ किसी से मिलाना ना
हो मिलाना ना
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Maar katari mar jaana-Shehnai 1947
Artist: Rehana

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