Showing posts with label C. Ramchandra. Show all posts
Showing posts with label C. Ramchandra. Show all posts

Jun 26, 2020

धीरे से आ जा री-अलबेला १९५१

सन १९५१ की फिल्म अलबेला से लोरी गीत. लोरी केवल
छोटे बच्चों को सुलाने के काम नहीं आती बल्कि इसे सुन
के बड़े बच्चे भी सो सकते हैं.

ये लता मंगेशकर वाला वर्ज़न है. एक और वर्ज़न है जिसमें
लता के साथ संगीतकार की आवाज़ भी है.

गीत राजेंद्र कृष्ण का लिखा हुआ है..



गीत के बोल:

धीरे से आ जा री अँखियन में
निंदिया आ जा री आ जा
धीरे से आ जा
छोटे से नैनन की बगियन में
निन्दिया आ जा री आ जा
धीरे से आजा
……………………………………………………..
Dheere se aa ja ri-Albela 1951

Artists: Bhagwan, Bimla Kumari

Read more...

Jun 21, 2020

नमस्ते नमस्ते-पतंगा १९४९

आज गुज़रे ज़माने की अभिनेत्री निगार सुल्ताना का जन्मदिन है.
इस अवसर पर सुनते हैं श्वेत श्याम युग की फिल्म पतंगा से एक
गीत.

राजेंद्र कृष्ण का गीत है और सी रामचंद्र का संगीत. इस गीत को
चार गायकों ने गाया है-स्वयं संगीतकार, शमशाद बेगम, रफ़ी और
मोहनतारा तलपड़े.

इस गीत में श्याम और गोप के भी दर्शन हो जाते हैं. बाकी लोगों को
आप पहचानिये.




गीत के बोल:

नमस्ते नमस्ते
कल मिलते हैं जी.
..............................................................................
Namaste namaste-Patanga 1949

Artissts: Nigar Sultana, Shyam, Gope, Others

Read more...

Apr 21, 2020

ना मैं रूप देखता-अफिल्मी गीत सी रामचंद्र

आपको एक अफिल्मी गीत सुनवाते हैं चितलकर का गाया हुआ. ये एक
भजन है राधेश्याम का. इसे मैं काफ़ी सालों से सुन रहा हूँ. ये उन लोगों
के लिए है जिनके मन में काफी उथल पुथल हो रही है पिछलेकुछ दिन से.
इस ब्लॉग पर पता नहीं क्या ढूंढते रहते हैं दिन भर. ये पाठक नहीं है
इतना हम जानते हैं.

सर्वप्रथम ये समझ लें इस ब्लॉग के ज़रिये हमें रोटी प्राप्त नहीं होती है. ये
शौक के चलते हम अपनी आँखेंफोड रहे हैं. ना हमें कोई म्यूजिक कंपनी
या फिल्मलाईन वाला चवन्नी भी देता है ये सब लिखने के लिए.

ब्लॉगर और गूगल को धन्यवाद हमें अपने विचार और अनुभव साझा
करने देने के लिए. ऑरकुट एक बेहतर प्लेटफोर्म था जिसमें मर्यादित
गतिविधियां थीं. उसका बंद होना अफ़सोसजनक है.

इस साईट को और दूसरी ८-१० साइटों को पढ़ पढ़ के आप लोग इतने
ज्ञानी हुए. यहाँ तो खैर ज्यादा लोग टिप्पणी नहीं करते क्यूंकि उनको
अंग्रेजी में खाने और हगने की आदत पड़ी हुई है. बस, खाने का सामान
हिंदी वाला चाहिए.

शेखी बघारने के लिए वे अंग्रेजी में कमेन्ट करना पसंदकरते हैं. कोरोना
वायरस को भी तुम लोग अंग्रेजी गानेऔर निबंध क्यूँ नहीं सुना देते, हो
सकता है डर के मारेभाग जाए.

सर्वशक्तिमान अनेकों माध्यम से प्राणी को सन्देश भेजता रहता है मगर
प्राणी अपने अहम के चलते इन संकेतों को समझ नहीं पाता. जबरन
किसी के पीछे पड़ना ठीक नहीं, समझ लो, चाहे वो मनुष्य हो या जानवर.

कबीरदास जी कह गए हैं:

कबीर गर्व ना कीजिये उंचा देखि आवास
काल परौ भुईं लेटना उपर जमसी घास।

अर्थात अपने ऊंचे मकान पर घमंड ना कीजिये, कहीं ऐसा न हो समय
आपको ज़मीन पर ऐसी जगह सोने पर मजबूर कर दे जहाँ घाग उगती हो.
यहाँ कवि ने थोडा डिस्काउंट कर दिया है और शरीर को तकलीफ ना हो
इसलिए थोड़ी घास भी है. संभव है इससे बदतर स्तिथि में आप पहुँच जाएँ.

वर्त्तमान संकट का निमित्त कोई भी बना हो उसने मानव जाति को अच्छे से
समझा दिया कि उसकी औकात क्या है. एक सूक्ष्म जीव जिसे देखने के लिए
भी माइक्रोस्कोप की ज़रूरत पड़ती है अपने से कई गुना बड़े मानव को कैसे
परास्त कर सकता है. ये सब जो हो रहा है प्रकृति से अत्यधिक खिलवाड़ का
परिणाम है.

सोशल डिसटेंसिंग का सन्देश दिया जा रहा है मगर उसे कई लोग मानने
को तैयार नहीं मानो उन्हें कोरोना वायरस ने स्वयं वायरस-प्रूफ होने का
सर्टीफिकेट दे दिया हो.




गीत के बोल:

ना मैं रूप देखता ना मैं नाम देखता
ना मैं रूप देखता ना मैं नाम देखता
मैं तो जहाँ देखता वहां श्याम देखता
राधेश्याम देखता
ना मैं रूप देखता ना मैं नाम देखता

कहाँ नहीं उसकी परछाई
कण कण में है किशन कन्हाई
और कौन है इस धरती पर
जिसने समझी पीर पराई
ना मैं भोर देखता ना मैं शाम देखता
ना मैं भोर देखता ना मैं शाम देखता
मैं तो जहाँ देखता वहां राम देखता
सीताराम देखता

ना मैं रूप देखता ना मैं नाम देखता

डगर डगर पर इतना भटका
कहाँ कहाँ मैंने सर पटका
जहाँ गया मैं जिधर गया मैं
मन मेरा मोहन में अटका
मन मेरा मोहन में अटका
न मैं पंथ देखता ना मैं धाम देखता
न मैं पंथ देखता ना मैं धाम देखता
मैं तो जहाँ देखता वहां श्याम देखता
राधेश्याम देखता
ना मैं रूप देखता ना मैं नाम देखता
………………………………………………
Na main roop dekhta-Non filmi bhajan

Read more...

Nov 26, 2019

हवा है सर्द सर्द-शतरंज १९५६

ठण्ड के मौसम वाला गीत सुनते हैं. ये है फिल्म
शतरंज से. गीत का मूड ऐसा है मानो कहीं मावठे
की बारिश हुई हो और उसकी वजह से सर्दी पड़ रही
हो.

सी रामचंद्र और राजेंद्र कृष्ण के कोम्बिनेशन वाले इस
गीत को लता मंगेशकर ने गाया है. अशोक कुमार को
सीटी बजाते आपने कितनी फिल्मों में देखा है? एक
नाम हम और बतला देते हैं-हावड़ा ब्रिज, बाकी की आप
ढूंढिए.




गीत के बोल:

हवा है सर्द सर्द
और दिल में भी है दर्द
बरसी है कहीं आज घटा
हवा है सर्द सर्द
और दिल में भी है दर्द
बरसी है कहीं आज घटा

मौसम का रंग है अजीब बुलबुल से फूल है करीब
मौसम का रंग है अजीब बुलबुल से फूल है करीब
आये बहार के कदम जागा है बाग का नसीब
आये बहार के कदम जागा है बाग का नसीब

सुन के घटा का शोर
जंगल में नाचा मोर
बरसी है कहीं आज घटा

शाखें संवर संवर गईं कलियां निखर निखर गईं
शाखें संवर संवर गईं कलियां निखर निखर गईं
देखा समा झुला झुला नज़रें जिधर जिधर गईं
देखा समा झुला झुला नज़रें जिधर जिधर गईं

कैसा अजब है रंग
भीगा है अंग अंग
बरसी है कहीं आज घटा

हवा है सर्द सर्द
और दिल में भी है दर्द
बरसी है कहीं आज घटा
………………………………………..
Hawa hai sard sard-Shatranj 1956 

Artist: Ashok Kumar, Meena Kumari

Read more...

Sep 18, 2019

आज मधुवातास डोले-स्त्री १९६१

साहित्यिक गीतों की शृंखला में आज प्रस्तुत है गीत फिल्म
स्त्री से जो सन १९६१ की फिल्म है. ये एक युगल गीत है
लता मंगेशकर और महेंद्र कपूर का गाया हुआ. भरत व्यास
इस गीत के रचयिता हैं और चितलकर रामचंद्र संगीतकार.
इस गीत को काफी आदर और सम्मान दिया जाता है, वजह
इसके बोल और संगीत दोनों ही हैं.


मधुवातास का संधि विच्छेद है-मधु + वातास. मधु का अर्थ
आप जानते हैं. वातास का अर्थ है वायु, पवन. आशा है आप
शब्द का अर्थ समझ गए होंगे. ये शब्द मुझे किसी और गीत
में देखने को नहीं मिला. भरत व्यास द्वारा प्रयुक्त कई शब्द
दूसरे गीतकारों ने प्रयोग नहीं किये. मधुरिमा का अर्थ है मधुर
होने की अवस्था या भाव. माधुर्य इसका एक और अर्थ है.
सौंदर्य के लिए भी कभी कभी इस शब्द का प्रयोग होता है.
सरल शब्दों में अगर कोई कहे- आप मीठी हैं, आप सुन्दर हैं.

भारत व्यास प्रगतिशील गीतकार थे और उन्होंने उर्दू शब्दों के
प्रयोग से परहेज़ नहीं किया. ‘इच्छा’ के लिए उन्होंने गीत की
एक पंक्ति में ‘अरमान’ शब्द प्रयोग किया है.



गीत के बोल:

आज मधुवातास डोले
मधुरिमा से प्राण भर लो
चाँद को चुपचाप निरखो
चाँदनी में स्नान कर लो
…………………………………………………..
Aaj madhuvatas dole-Stree 1961

Artists:

Read more...

Aug 28, 2019

कहो एक बार मुझे तुमसे प्यार-शबिस्तान १९५१

तुम एक बार बोलोगे हम तीन बार बोलेंगे. सुनते हैं सन १९५१
की फिल्म शबिस्तान से गीता दत्त और तलत महमूद का गाया
हुआ युगल गीत .

फिल्म के प्रमुख कलाकार हैं नसीम बानू और श्याम. गीत इन्हीं
पर फिल्माया गया है. इस फिल्म के संगीत दो संगीतकारों ने
तैयार किया है सी रामचंद्र और मदन मोहन ने.

प्रस्तुत गीत कमर जलालाबादी ने लिखा है और इसकी धुन तैयार
की है सी रामचंद्र ने.

   


गीत के बोल:


कहो एक बार मुझे तुमसे प्यार
कहो एक बार मुझे तुमसे प्यार
मुझे तुमसे प्यार तुमसे प्यार तुमसे प्यार
कहो एक बार मुझे तुमसे प्यार
मुझे तुमसे प्यार तुमसे प्यार तुमसे प्यार
कहो एक बार मुझे तुमसे प्यार

हो हलकी हलकी जब पड़े फुहार
हो हलकी हलकी जब पड़े फुहार
करे किसको याद दिल-ऐ-बेकरार बेकरार
करे तुमको याद दिल-ऐ-बेकरार
मुझे तुमसे प्यार तुमसे प्यार तुमसे प्यार
कहो एक बार मुझे तुमसे प्यार
मुझे तुमसे प्यार तुमसे प्यार तुमसे प्यार
कहो एक बार मुझे तुमसे प्यार

ओ जब रात आये करके सिंगार
हो ओ ओ जब रात आये करके सिंगार
गाये किसका गीत मन के ये सितार ये सितार
गाये तेरा गीत मन का ये सितार
मुझे तुमसे प्यार तुमसे प्यार तुमसे प्यार
कहो एक बार मुझे तुमसे प्यार
मुझे तुमसे प्यार तुमसे प्यार तुमसे प्यार
कहो एक बार मुझे तुमसे प्यार

कहाँ तेरी शान कहाँ मेरा प्यार
कहाँ तेरी शान कहाँ मेरा प्यार
मैं हूँ एक गरीब तू है ताजदार ताजदार
अरे देख मेरा तू है राजकुमार
मुझे तुमसे प्यार तुमसे प्यार तुमसे प्यार
कहो एक बार मुझे तुमसे प्यार
मुझे तुमसे प्यार तुमसे प्यार तुमसे प्यार
कहो एक बार मुझे तुमसे प्यार
.....................................................................................
Kaho ek baar mujhe tumse pyar-Shabistan 1951

Artists: Naseem Banoo, Shyam

Read more...

Jul 16, 2019

अजी आवो मोहब्बत की खा लें-शहनाई १९४७

जब तक इस सृष्टि पर नर नारी मौजूद हैं मोहब्बत की कसमें
खाई और खिलाती जाएँगी. कुदरती व्यवस्था है बस भावनाओं
का इज़हार कैसे करें उसका ट्यूटोरियल समय समय पर कवि
और गीतकार अपने अपने अंदाज़ में बतलाया करते हैं.

सुनते हैं शहनाई से अगला गीत जिसे अमीरबाई कर्नाटकी और
स्वयं संगीतकार ने गाया है. गीतकार एक बार फिर से वही हैं
प्यारेलाल संतोषी.



गीत के बोल:

अजी आवो
आजी आवो मोहब्बत की खा लें कसम
हमारे रहो तुम तुम्हारे रहें हम
अजी आवो
अजी आवो जवानी की खा लें कसम
हमारे रहो तुम तुम्हारे रहें हम
अजी आवो

जिस धारा में नैया हमारी बहे रे
हमारी बहे रे
जिस धारा में दुनिया ये सारी बहे रे
ये सारी बहे रे
उस धारा में उस धारा में
घुलमिल के संग बहें हम
हमारे रहो तुम तुम्हारे रहें हम

अजी आवो
अजी आवो जवानी की खा लें कसम
हमारे रहो तुम तुम्हारे रहें हम
अजी आवो

जिस बोली में बोले पपीहा पिया हो
पपीता पिया हो
जिस बोली में धडके हमारा जिया हो
हमारा जिया हो
उस बोली में उस बोली में
कानों में तुमसे कहें हम
हमारे रहो तुम तुम्हारे रहें हम
अजी आवो

अजी आवो जवानी की खा लें कसम
हमारे रहो तुम तुम्हारे रहें हम
अजी आवो

चाहे पश्चिम से सूरज निकानले लगे
चाहे चन्दा भी आग उगलने ले
चाहे पश्चिम से सूरज निकानले लगे
चाहे चन्दा भी आग उगलने ले
ये उल्फत हमारी कभी हो ना पाए कम
हमारे रहो तुम तुम्हारे रहें हम
अजी आवो

अजी आवो जवानी की खा लें कसम
हमारे रहो तुम तुम्हारे रहें हम
अजी आवो
……………………………………………………………………..
Aji aavo moabbat ki kha len kasam-Shehnai 1947

Artists: Nasir Khan, Rehana

Read more...

Jul 9, 2019

मार कटारी मर जाना-शहनाई १९४७

सन १९४७ की फिल्मों में शहनाई एक सफल फिल्म थी. इसके
गीत भी काफ़ी बजे थे अपने समय में. आज भी कुछ गीत हैं
इस फिल्म के जो लोकप्रिय हैं. लोकप्रिय में से एक आप सुन
चुके हैं दूसरा सुनते हैं अब.

सहज और सरल बोलों वाले गीत कैसे लोगों कि जुबान पर चढ
जाते हैं उसकी बानगी है ये. ऐसे सहज गीत सहजता से ही बन
जाते हैं मगर ऐसे करिश्मे रोज रोज नहीं होते. गीतकार के दिल
से आह निकली तो उसने एक बढ़िया सा गीत अपनी सौ प्रतिशत
भावनाएं उड़ेलते हुए लिख डाला. संगीतकार के भी दिमाग में लट्टू
जला और उसने एक कालजयी धुन बना डाली. गायिका को दाद
तो हम बरसों से देते आये हैं. अमीरबाई कर्नाटकी अपने समय की
निपुण गायिका थीं.





गीत के बोल:

हमें क्या पता था के दिल की कली को मसल देंगे वो
हमें क्या पता था के राहत को गम में बदल देंगे वो
मोहब्बत के वादे और झूठी खा कसमें
किसी और के हो के चल देंगे वो

इसलिए तो कहा था बेटा

मार कटारी मर जाना
मार कटारी मर जाना
रे अँखियाँ किसी से मिलाना ना
हो मिलाना ना
मार कटारी मर जाना
मार कटारी मर जाना
रे अँखियाँ किसी से मिलाना ना
हो मिलाना ना
ज़हर खा के मर जाना
रे मन में किसी को बसाना ना
हो बसाना ना

हाय दुनिया की कोई भी चीज़ अब भाती नहीं है
चैन अब आता नहीं है नींद अब आती नहीं
जिनको आना था न आये जाने वाले जा चुके
हा आ आ आ आ आ
दिल को जाना था गया पर जान क्यूँ जाती नहीं

इसलिए तो कहा था बेटा

पीछे पड़े है पछताना
पीछे पड़े है पछताना
तू अपना किसी को बनाना ना
हो बनाना ना
पीछे पड़े है पछताना
तू अपना किसी को बनाना ना
हो बनाना ना

मार कटारी मर जाना
रे अँखियाँ किसी से मिलाना ना
हो मिलाना ना

क्यों इन आँखों ने उनका अब तक इंतज़ार किया
क्यूँ इस भोले दिल ने उन पर बार बार ऐतबार किया
जो यही मोहब्बत का बदला मुझको मिलने वाला था
हाँ आ आ आ आ आ आ
क्यों दुनिया के ताने सह के मैंने उनसे प्यार किया

इसलिए तो कहा था बेटा

सुन के हंसेगा ज़माना
सुन के हंसेगा ज़माना
दुःख अपना किसी को सुनाना ना
हो सुनाना ना
सुन के हंसेगा ज़माना
दुःख अपना किसी को सुनाना ना
हो सुनाना ना

मार कटारी मर जाना
रे अँखियाँ किसी से मिलाना ना
हो मिलाना ना
.................................................................
Maar katari mar jaana-Shehnai 1947

Artist: Rehana

Read more...

Sep 23, 2018

आधा है चंद्रमा रात आधी-नवरंग १९५९

सन १९५९ की फिल्म नवरंग का कथानक अनूठा है.
इससे एक सबक तो लिया जा सकता है वो ये है-प्रेरणा
कभी भी किसी भी चीज़ से ली जा सकती है.

असंभव सी और इमप्रेक्टिकल से लगने वाली कल्पना
भी कभी कभी आश्चर्यजनक परिणाम देती है. जैसे आप
तेल और पानी को एक बर्तन में डालें तो वो एकसार
नहीं होंगे, मगर उन दोनों को फेंटा जाए तो उससे
कोलोडल सस्पेंशन अवश्य तैयार हो जाता है जो कि
सारी क्रीम और मलहम का आधार है. वास्तव में तो
वो मिलते नहीं मगर अंश इतने छोटे हो जाते हैं कि
चोली-दामन का साथ दिखाई देने लगता है.

भरत व्यास की रचना है और सी रामचन्द्र का संगीत.
आशा भोंसले संग महेंद्र कपूर ने इसे गाया है.



गीत के बोल:

आधा है चंद्रमा रात आधी
आधा है चंद्रमा रात आधी
रह न जाए तेरी मेरी बात आधी
मुलाक़ात आधी
आधा है चंद्रमा

आस कब तक रहेगी अधूरी
प्यास होगी नहीं क्या ये पूरी
प्यासा प्यासा गगन प्यासा प्यासा चमन
प्यासे तारों की भी है बारात आधी
आधा है चंद्रमा

सुर आधा है श्याम ने बाँधा
रहा राधा का प्यार भी आधा
नैन आधे खिले होंठ आधे हिले
रही पल में मिलन की वो बात आधी
आधा है चंद्रमा

पिया आधी है प्यार की भाषा
आधी रहने दो मन की अभिलाषा
आधे छलके नयन आधे ढलके नयन
आधी पलकों की भी है बरसात आधी
आधा है चंद्रमा
…………………………………………………
Aadha hai chandrama-Navrang 1959

Artists: Mahipal, Sandhya

Read more...

Jul 22, 2018

गया अँधेरा हुआ उजारा-सुबह का तारा १९५४

आज एक प्रेरणादायी गीत सुनते हैं श्वेत श्याम युग से.
ये अपने ज़माने का बेहद लोकप्रिय गीत हैं.

फिल्म के शीर्षक कैसे और क्यूँ रखे जाते हैं ये अब
तक मुझे पूरी तरह से समझ नहीं आया. उपन्यास
के शीर्षक तो काफी हद तक समझ आ जाते हैं
लेकिन कुछ फिल्मों में शीर्षक और कथानक के बीच
सम्बन्ध ढूंढते ढूंढते फिल्म समाप्त हो जाती है और
सिनेमा घर की बत्तियाँ जल जाती हैं.

सुनते हैं सन १९५४ की फिल्म सुबह का तारा से
शीर्षक गीत जिसे तलत महमूद संग लता मंगेशकर
ने गाया है. नूर लखनवी की रचना है जिसका संगीत
सी रामचंद्र ने तैयार किया है.

भारतीय रेल के जनरल कम्पार्टमेंट में जब आप फँस
जाएँ और सारी सवारियां जबरन आँख मिचमिचाती हुई
सोती मिले और बैठने की जगह ना मिले तो आप ऐसे
गीत गा कर मन बहला सकते हैं. रात का सफर होगा
तो बैठे बैठे गुनगुनाते हुए सुबह हो ही जायेगी.



गीत के बोल:

गया अँधेरा हुआ उजारा
गया अँधेरा हुआ उजारा चमका चमका सुबह का तारा
गया अँधेरा हुआ उजारा चमका चमका सुबह का तारा
टूटे दिल का बँधा सहारा चमका चमका सुबह का तारा

साँस खुशी की तन में आई अरमानों ने ली अंगड़ाई
जाग उठीं उम्मीदें सारी जाग उठी तक़दीर हमारी
हमें किसी ने दूर पुकारा
चमका चमका सुबह का तारा
गया अँधेरा हुआ उजारा चमका चमका सुबह का तारा

मुरझाई कली क्या फिर से खिलेगी
मुरझाई कली क्या फिर से खिलेगी खोई हुई क्या राहत मिलेगी
खोई हुई क्या राहत मिलेगी
कहीं ये तारा टूट न जाये सुबह का साथी छूट न जाये
आँखों में रह जाये नज़ारा
चमका चमका सुबह का तारा
गया अँधेरा हुआ उजारा चमका चमका सुबह का तारा

गई उदासी रौनक छाई रोशनी अब जीवन में आई
हँसी खुशी का छेड़ो तराना नाच उठे मन झूमे ज़माना
समा सुहाना प्यारा प्यारा
चमका चमका सुबह का तारा
गया अँधेरा हुआ उजारा चमका चमका सुबह का तारा
गया अँधेरा हुआ उजारा चमका चमका सुबह का तारा
………………………………………….
Gaya andhera hua ujala-Subah ka tara 1954

Artists: Pradeep Kumar, Jayshri

Read more...

May 12, 2018

तुम अपनी याद भी दिल से-यास्मीन १९५५

कंफ्यूज़न किधर है. दोनों तरफ झुलसी हुई मोहब्बत है. चेहरे
ज़र्द हैं और निगाहें ग़मगीन. ये किससे गिला है किसके शिकवे
हैं. खुद से है या ज़माने से. वक्त के थपेडों ने हमें कहाँ से कहाँ
पहुंचा दिया.

तुम अपने कदमों की मिटटी भी ले जाते तो अच्छा था. नदी में
कपडे धो पानी भी ले जाते तो अच्छा था. गीत में जली कटी बजी
आहिस्ता से कहना पड़ती है. 

जान निसार अख्तर की रचना है और सी रामचंद्र का संगीत. गाने
वाले हैं लता और तलत.



गीत के बोल:

तुम अपनी याद भी दिल से भुला जाते तो अच्छा था
ये दो आँसू लगी दिल की बुझा जाते तो अच्छा था

मेरे अरमाँ भी ले जाते मेरी हसरत भी ले जाते
मेरे अरमाँ भी ले जाते मेरी हसरत भी ले जाते
नज़र से छीन कर अपनी हसीं सूरत भी ले जाते
अंधेरे और इन आँखों में छा जाते तो अच्छा था
तुम अपनी याद भी दिल से भुला जाते तो अच्छा था

मेरे दिल की मुहब्बत का यक़ीं कब तुम को आया था
मेरे दिल की मुहब्बत का यक़ीं कब तुम को आया था
जहाँ सौ ज़ुल्म ढाये थे जहाँ दिल को मिटाया था
मुझे भी अपने हाथों से मिटा जाते तो अच्छा था
ये दो आँसू लगी दिल की बुझा जाते तो अच्छा था

मेरा दिल फेर दे मेरी निशानी फेरने वाले
मेरा दिल फेर दे मेरी निशानी फेरने वाले
जो मुमकिन हो तो लौटा दो मेरी आहें मेरे नाले
जो मुमकिन हो तो लौटा दो मेरी आहें मेरे नाले
हम अपने दिल का खोया चैन पा जाते तो अच्छा था
ये दो आँसू लगी दिल की बुझा जाते तो अच्छा था
...................................................................
Tum apni yaad bhi dil se bhula-Yasmin 1955

Artists: Suresh, Vaijayantimala

Read more...

Mar 14, 2018

मेरी जान बचना-फैसला १९६५

एक गीत सुनते हैं महेंद्र कपूर और चितलकर की आवाजों में.
गीत असद भोपाली का है और संगीत उषा खन्ना का. श्रेणियों
में एक श्रेणी वो भी है-एक संगीतकार दूसरे संगीतकार के संगीत
निर्देशन में गाता हुआ.

ये कारनामा स्वयं उषा खन्ना ने काफी किया है और उनके
गाये कई गीत ऐसे हैं जो दूसरे संगीत निर्देशकों द्वारा तैयार
किये गए हैं.

फिल्म का नाम है फैसला जो सन १९६५ की एक फिल्म है.
गीत में एक अजीबोगरीब कार में जुगल किशोर के साथ
जगदीप सवारी करते दिखलाई दे रहे हैं.




गीत के बोल:

ओ मेरी जान बचना
ओ मेरी जान ओ मुन्ना हट
बाद-ए-बहारी आई शाही सवारी आई
गाडी हमारी आई हो हो
ओ बाबू हट जाना ओ जाना ओ जाना
हट जाना
ओ मेरी जान चलना
ओ मेरी जान ओ साहिबा
बाद-ए-बहारी आई शाही सवारी आई
गाडी हमारी आई हो हो

अरे बाप रे पंक्चर
स्क्रू जैक जल्दी लाओ
.................................................................
Meri jaan bachna-Faisla 1965

Artists: Jugal Kishore, Jagdeep

Read more...

Mar 5, 2018

आ दिल से दिल मिला ले-नवरंग १९५९

भरत व्यास की रचना सुनते हैं आशा भोंसले की आवाज़ में . इसे
संगीत से संवारा है सी रामचन्द्र ने. पसंद करने वाले श्रोता और
पाठक हैं अमुक अमुक, फलाने ढिमके, यहाँ से वहाँ से, कहीं से भी
कोई भी नहीं.

काफी दिन से कोई फरमाईश नहीं आई और रेडियो आले अंदाज़ में
कुछ अनाउंसमेंट करने की खुजली सी हो रही थी सो हमने उसी
अंदाज़ में विवरण दे दिया.

सुनते हैं ये गीत. ये एक रीयल जेम है(real gem). अब ये जैम(jam)
सॉस, अचार और मुरब्बा में से क्या है वो तो आप ही समझिए.
गीतों पर कहीं कहीं लिखे विवरणों से मैं अभिभूत हो जाता हूँ.



गीत के बोल:

आ दिल से दिल मिला ले
आ दिल से दिल मिला ले इस दिल में घर बसा ले
ओ रसिया मन बसिया आ जा गले लगा ले
आ दिल से दिल मिला ले

दिल के चमन में कब से बुलबुल चहक रही है
दिल के चमन में कब से बुलबुल चहक रही है
फूलों के इस बदन में खुशबू महक रही है
फूलों के इस बदन में खुशबू महक रही है
कंगना में मेरे लाखों अरमाँ चमक रहे हैं
कंगना में मेरे लाखों अरमाँ चमक रहे हैं
अँगना में तेरे साजन
अँगना में तेरे साजन घुँघरू झनक रहे हैं
आ दिल से दिल मिला ले

चमकेंगे लाख चंदा ये रात फिर ना आये
चमकेंगे लाख चंदा ये रात फिर ना आये
होंगी हज़ार बातें ये बात फिर ना आये
होंगी हज़ार बातें ये बात फिर ना आये
साजन यूँ संग तन के मन साथ फिर ना आये
साजन यूँ संग तन के मन साथ फिर ना आये
नवरंग सा रंगीला
 नवरंग सा रंगीला प्रभात फिर ना आये
आ दिल से दिल मिला ले
...............................................................................
Aa dil se dil mila le-Navrang 1959

Artist:

Read more...

Feb 16, 2018

आंसू भी दे सके ना-लाबेला १९६६

सन १९६६ की फिल्म लाबेला से एक गीत सुनते हैं आशा भोंसले की
आवाज़ में. आनंद बक्षी के बोल हैं और सी रामचंद्र का संगीत. गीत
में आपको गिटार की कॉर्ड्स भी सुनाई देंगी जो समय के साथ साथ
सी रामचंद्र के संगीत में आ गयीं.

आनंद बक्षी ६० के दशक में लक्ष्मी प्यारे से जुड़ने के पहले तक एक
प्रतिभावान और उदयीमान गीतकार माने जाते थे. सी रामचंद्र अपने
कैरियर के ढलान की ओर अग्रसर थे. प्रकृति का नियम है जो ऊपर
चढा है उसे नीचे आना ही है. यही बात लगभग जीवन के हर पहलू
पर लागू होती है.

भगवान निर्देशित इस फिल्म में सुजीत कुमार और कुमकुम की प्रमुख
भूमिकाएं हैं. भगवान का भी फ़िल्मी कैरियर ६० के दशक में ढलान की
ओर बढ़ता गया और आगे चल के उन्हें सहायक भूमिकाएं निभा के
अपना जीवन यापन करना पड़ा. लाबेला अलबेला ना बन सकी.

आदतें जाते जाते ही जाती हैं. राजेंद्र कृष्ण के साथ सी रामचंद्र ने जो
काम किया उनमें अधिकांश गीतों में शुरू में मुखड़े से पहले दो चार
पंक्तियाँ या शेर-चीते अवश्य हुआ करते थे. इस गीत में मौजूद है.
आनंद बक्षी की लेखनी में ऐसे गीत कम हैं मगर हैं ज़रूर. आपको
याद हो गर चरस फिल्म का गीत जिसकी शुरूआती पंक्तियाँ बक्षी
ने स्वयं गाई हैं. गीत है–आ जा तेरी याद आई जिसमें मुख्य स्वर
रफ़ी और लता के हैं.



गीत के बोल:

कभी तकदीर ने इतना हमें मजबूर कर डाला
के हमने आप अपनों को नज़र से दूर कर डाला

आँसू भी दे सके न सहारे कभी-कभी
सहारे कभी कभी
रोने लगे जो रंज के मारे कभी कभी
आँसू भी दे सके ना सहारे कभी कभी
सहारे कभी-कभी

बादल कहीं बरस के जो रोया तो क्या हुआ
तूफान ने सफ़ीना डुबोया तो क्या हुआ
कश्ती डुबो गए हैं किनारे कभी कभी
किनारे कभी कभी

रूठा जहान हमसे खफ़ा आसमां हुआ
अपने ही आशियां पे कफ़स का गुमां हुआ
ऐसे भी दिन चमन में गुजारे कभी-कभी
गुजारे कभी-कभी

रोने लगे जो रंज के मारे कभी-कभी
आँसू भी दे सके ना सहारे कभी-कभी
सहारे कभी-कभी
…………………………………………..
Ansoo bhi de sake na-Labela 1966

Artist:

Read more...

Jan 13, 2018

ओ बाबू साब ओ मेमसाब क्या रखा २-तलाक १९५८

फिल्म तलाक से एक गीत आपने सुना था कुछ पोस्ट पहले.
उसका दूसरा तर्जुमा सुनिए. बाकी के विवरण में कोई अंतर
नहीं है. गीतकार, संगीतकार और गायक वही हैं.

फिल्म का नाम है तलाक. जाहिर है फिल्म की कहानी की थीम
भी यही होगी. वैसे ज़रूरी नहीं कि फिल्म के नाम का फिल्म की
कहानी से कोई कनेक्शन हो मगर अधिकांश फिल्मों के शीर्षक
कहानी से ताल्लुक रखा करते हैं. आर्ट फिल्म और फार्ट फिल्म
में ये ज़रूरी नहीं.

गीत के इस फ़िल्मी वर्ज़न में तीन अंतरे हैं. पहले वाला घर में
फिल्माया गया था ये बाग में.




गीत के बोल:

ओ बाबू साब ओ मेम साब
क्या रखा इस तक़रार में
ज़रा तो आँखें देखो मिला के
बड़ा मज़ा है प्यार में

अरे रूठो न सिस्टर मन जाओ मिस्टर
मिल के रहो सनसार में
ज़रा तो आँखें देखो मिला के
बड़ा मज़ा है प्यार में
ओ बाबू साब ओ मेम साब
ओ बाबू साब मेम साब

अच्छी नहीं है आपस की अनबन
सुनो सुनो श्रीमान जी
हाँ सुनो सुनो श्रीमान जी
लड़ना तो मैडम है इक लड़कपन
इसमें बड़ा नुकसान जी
हाँ सुनो सुनो श्रीमान जी
क्यूँ बैठे हट के मुखड़ा पलट के
फिर से बंधो इक तार में
ज़रा तो आँखें देखो मिला के बड़ा मज़ा है प्यार में

ओ बाबू साब ओ मेम साब
ओ बाबू साब मेम साब

मिया और बीवी के झगड़ों ने राजा
लाखों घरों को उजाड़ा
मीठी शैतानी अच्छी ना रानी
घर को बनाओ ना अखाड़ा
अरे छोड़ो ये गर्मी आने दो नर्मी
छोड़ो ये गर्मी आने दो नर्मी
ग़ुस्से के तीखे ख़ुमार में
ज़रा तो आँखें देखो मिला के बड़ा मज़ा है प्यार में

ओ बाबू साब ओ मेम साब
ओ बाबू साब मेम साब

जीवन में जो सुख से रहना है तो
ग़ुस्से पे कुछ कंट्रोल करो
हाँ ग़ुस्से पे कुछ कंट्रोल करो
अपनी अकड़ पे ब्रेक लगाओ जी
झूठा बड़प्पन गोल करो
ग़ुस्से पे कुछ कंट्रोल करो
झगड़ा न करना डूबेगी वरना
नैया सभी मझधार में

ज़रा तो आँखें देखो मिला के
बड़ा मज़ा है प्यार में
ओ बाबू साब ओ मेम साब
ओ बाबू साब मेम साब
..........................................................
O baboo saab o memsaab 2-Talaq 1958

Artists: Rajendra Kumar, Kamini Kadam

Read more...

Dec 28, 2017

ओ बाबू ओ मेमसाब क्या रखा १-तलाक १९५८

क्या रखा है तकरार में-सही है मगर जनता के समझ नहीं
आता है. आये दिन नोक-झोंक और चों-चों भों-भों सुनाई देती
रहती है घरों में. ये घुर घुर की कहानी घर घर की कहानी
है.

सुनते हैं हास्य रस वाला एक गीत मन्ना डे और आशा भोंसले
का गाया हुआ फिल्म तलाक से. राजेंद्र कुमार और कामिनी कदम
फिल्म के नायक और नायिका हैं. उनके अलावा गीत में कौन
कौन दिखाई दे रहे हैं इस फ्री के ब्लॉग पर बतला पाना संभव
नहीं है. उसके लिये हमारी प्रीमियम मेम्बरशिप लीजिए अर्थात
सार्थक कमेन्ट करिये कमेन्ट बॉक्स में.  इस गीत के गीतकार हैं
प्रदीप.




गीत के बोल:

ओ बाबू साब ओ मेम साब
क्या रखा इस तक़रार में
ज़रा तो आँखें देखो मिला के
बड़ा मज़ा है प्यार में

अरे रूठो न सिस्टर मन जाओ मिस्टर
मिल के रहो सनसार में
ज़रा तो आँखें देखो मिला के
बड़ा मज़ा है प्यार में
ओ बाबू साब ओ मेम साब
ओ बाबू साब मेम साब

अच्छी नहीं है आपस की अनबन
सुनो सुनो श्रीमान जी
हाँ सुनो सुनो श्रीमान जी
लड़ना तो मैडम है इक लड़कपन
इसमें बड़ा नुकसान जी
हाँ सुनो सुनो श्रीमान जी
क्यूँ बैठे हट के मुखड़ा पलट के
फिर से बंधो इक तार में
ज़रा तो आँखें देखो मिला के
बड़ा मज़ा है प्यार में

ओ बाबू साब ओ मेम साब
ओ बाबू साब मेम साब

मिया और बीवी के झगड़ों ने राजा
लाखों घरों को उजाड़ा
मीठी शैतानी अच्छी ना रानी
घर को बनाओ ना अखाड़ा
अरे छोड़ो ये गर्मी आने दो नर्मी
छोड़ो ये गर्मी आने दो नर्मी
ग़ुस्से के तीखे ख़ुमार में
ज़रा तो आँखें देखो मिला के
बड़ा मज़ा है प्यार में

ओ बाबू साब ओ मेम साब
ओ बाबू साब मेम साब
..........................................................
O baboo saab o memsaab-Talaq 1958

Artists: Rajendra Kumar, Kamini Kadam

Read more...

Dec 20, 2017

दिल लगा कर हम ये समझे-जिंदगी और मौत १९६५

आपको सुनवाते हैं बॉलीवुड के ऑफिशियल राजा-महाराजा
प्रदीप कुमार और फरयाल पर फिल्माया गया एक गीत.
नायिका फरयाल का अधिकतम समय बॉलीवुड की फिल्मों
में सहायक भूमिकाएं निभाते ही बीता. इस फिल्म में वे
हीरोईन हैं. गीत जंगल में फिल्माया गया सा प्रतीत होता
है अतः इसे हम जंगल-रोमांस हिट कह सकते हैं.

गीत लिखा है शकील बदायूनीं ने और इसे महेंद्र कपूर ने
गाया है सी रामचंद्र की धुन पर. शकील बदायूनीं के गीत
और सी रामचंद्र का संगीत कुछ रेयर कोम्बिनेशन की श्रेणी
में आता है.



गीत के बोल:

दिल लगा कर हम ये समझे जिंदगी क्या चीज़ है
दिल लगा कर हम ये समझे जिंदगी क्या चीज़ है
इश्क कहते हैं किसे और आशिकी क्या चीज़ है
दिल लगा कर हम ये समझे

हाय ये रुखसार के शोले ये बाहें मरमरी
हाय ये रुखसार के शोले ये बाहें मरमरी
आपसे मिल कर ये दो बातें समझ में आ गयीं
धूप किसका नाम है और चांदनी क्या चीज़ है

दिल लगा कर हम ये समझे

आपकी शोखी ने क्या क्या रूप दिखलाये हमें
आपकी शोखी ने क्या क्या रूप दिखलाये हमें
आपकी आँखों ने क्या क्या जाम पिलवाए हमें
होश खो बैठे तो जाना बेखुदी क्या चीज़ है

दिल लगा कर हम ये समझे

आपकी राहों में जबसे हमने रखा है कदम
आपकी राहों में जबसे हमने रखा है कदम
खम तो ये महसूस होता है कि मंजिल पे हैं हम
कोई क्या जाने मोहब्बत की खुशी क्या चीज़ है

दिल लगा कर हम ये समझे जिंदगी क्या चीज़ है
दिल लगा कर हम ये समझे
…………………………………………………………
Dil laga kar ham ye samjhe-Zindagi aur maut 1965

Artists: Pradeep Kumar, Faryal

Read more...

Dec 14, 2017

भर भर के जाम पिला जा-यास्मीन १९५५

कई बार सारे अवयव अच्छे होने के बावजूद खाना जनता
को पसंद नहीं आता. ऐसा ही कुछ यास्मीन फिल्म के
साथ भी है जो सन १९५५ की एक बॉक्स ऑफिस पर
फ्लॉप हुई फिल्म है. फिल्म में एक से बढ़ कर एक गीत
हैं जिन पर गीतकार और संगीतकार दोनों ने काफी मेहनत
की.

फिल्म के प्रमुख कलाकार हैं सुरेश और वैजयंतीमाला. शायद
कारदार ने जो फ़िल्में निर्देशित की हैं उनमें से ये एक बड़ा
अपवाद रही. इसी साल कारदार की एक हास्य फिल्म भी
रिलीज़ हुई थी-बाप रे बाप जिसके नायक किशोर कुमार थे.
इस फिल्म का संगीत ज़ोरदार हिट रहा. इस फिल्म को आज
भी बड़े चाव के साथ देखा जाता है.

जो मेरा अनुमान है वो ये कि फिल्म के नायक सुरेश का
जादू समय के साथ फीका पढ़ने लगा था. फिल्मिस्तान की
फिल्म नागिन जो साल भर पहले ही रिलीज़ हुई थी उसकी
नायिका भी वैजयंतीमाला थीं. नागिन फिल्म तो इतिहास
की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल है. नागिन फिल्म के
संगीत ने भी एक इतिहास रचा है.

सुनते हैं यास्मीन से लता मंगेशकर का गाया एक मधुर गीत.
जां निसार अख्तर का गीत है और सी रामचंद्र की तर्ज़.



गीत के बोल:

आ जा
आ जा आ जा मेरे साक़ी
हसरत है दिल में बाक़ी
उल्फ़त का जाम पिला जा
जीने का ढंग बता जा
आ जा आ जा आ जा आ जा
आ जा आ जा आ जा

ये किस ने पुकारा है मुझे
किस ने पुकारा
है कौन तलबगार मेरा
कौन है प्यारा

साकी मैं इधर हूँ, मैं इधर हूँ
मैं इधर हूँ
मैं पास में बैठा हूँ
और मैं क़दमों में पड़ा हूँ

भर भर के जाम पिला दे
भर भर के जाम पिला दे
साक़ी बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला

शराब-ए-हुस्न नज़र से पिलाने आई हूँ
मैं एक एक को बेखुद बनाने आई हूँ
शराब-ए-हुस्न नज़र से पिलाने आई हूँ
मैं एक एक को बेखुद बनाने आई हूँ
अदा से नाज़ से अब्रों के इक इशारे से
अदा से नाज़ से अब्रों के इक इशारे से
दिलों में इश्क़ का जादू जगाने आई हूँ

भर भर के जाम पिला दे
भर भर के जाम पिला दे
साक़ी बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला

नज़र मिलाओ तो दिल को क़रार आ जाये
हर एक अदा पे तुम को प्यार आ जाये
उठाओ जाम के जन्नत से कम नहीं दुनिया
उठाओ जाम के जन्नत से कम नहीं दुनिया
पियो पियो के तुम्हें ऐतबार आ जाये
पियो पियो के तुम्हें ऐतबार आ जाये

भर भर के जाम पिला दे
भर भर के जाम पिला दे
साक़ी बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला

वो मुस्कुरा के निगाहें मिलाये जाते हैं
वो मुस्कुरा के निगाहें मिलाये जाते हैं
सुरूर बन के मेरे दिल पे छाये जाते हैं
सुरूर बन के मेरे दिल पे छाये जाते हैं
मिली है आज जो उनकी नज़र से मेरी नज़र
मिली है आज जो उनकी नज़र से मेरी नज़र
तो हाय मेरे कदम डगमगाये जाते हैं

भर भर के जाम पिला दे
भर भर के जाम पिला दे
साक़ी बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला
भर भर के जाम पिला दे
भर भर के जाम पिला दे
साक़ी बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला

.................................................................
Bhar bhar ke jam pila de-Yasmin 1955

Artists: Vaijayantimala, Suresh

Read more...

Dec 7, 2017

तेरे रास्ते पे हमने एक घर-कवि १९५४

फ़िल्मी नायक और नायिका चाहे कहानी के हिसाब से जितने गरीब हों
मगर वो आम आदमी से हमेशा रईस नज़र आते हैं. ऐसा क्यूँ है, क्या
बड़े परदे का इफेक्ट होता है या उनके पाउडर लिपस्टिक का? या फ़िल्मी
किरदार बाय डिफाल्ट नॉन-फटीचर ही होता है. फिल्म का नायक रईस है
और उसने नायिका के रास्ते पर घर बना लिया है, जाहिर है वो पैसे
वाला है. शायद १९६३ का वर्ष घर निर्माण के लिए प्रसिद्ध था बॉलीवुड में

फिल्म तेरे घर के सामने  सन १९६३ में ही आई और उस फिल्म के एक
गीत में भी नायक नायिका के घर के सामने एक घर बनाने का जिक्र कर
रहा है. वो तो पूरी फिल्म ही घर निर्माण पर थी. इस वर्ष एक फिल्म और
आई जिसका नाम है-घर बसा के देखो. गृहस्थी फिल्म को भी इसी साल
रिलीज़ होते देखा गया.

फिल्म कवि से एक सॉफ्ट मेलोडी सुनते हैं जिसे लता और तलत महमूद
ने गाया है. राजेंद्र कृष्ण की रचना है और सी रामचंद्र का संगीत.





गीत के बोल:

तेरे रास्ते पे हमने इक घर बना लिया है
तेरी मुस्कुराहटों से इस को सजा लिया है
तेरे रास्ते पे हमने इक घर बना लिया है
तेरी मुस्कुराहटों से इस को सजा लिया है

आने से तेरे पहले आता है एक इशारा
आने से तेरे पहले आता है एक इशारा
सूरज से पहले जैसे इक रोशनी की धारा
आने से तेरे पहले आता है एक इशारा
सूरज से पहले जैसे इक रोशनी की धारा
हम ने वही इशारा दिल में बसा लिया है
हम ने वही इशारा दिल में बसा लिया है

तेरे रास्ते पे हमने इक घर बना लिया है
तेरी मुस्कुराहटों से इस को सजा लिया है

तेरे घर से दूर क्यों हों मेरी ज़िंदगी की राहें
मेरे दिल की धड़कनों में तेरे गीत तेरी आहें
तेरे घर से दूर क्यों हों मेरी ज़िंदगी की राहें
मेरे दिल की धड़कनों में तेरे गीत तेरी आहें
तेरी रोशनी से दिल का दीपक जला लिया है
तेरी रोशनी से दिल का दीपक जला लिया है

तेरे रास्ते पे हमने इक घर बना लिया है
तेरी मुस्कुराहटों से इस को सजा लिया है

तेरी पायलों की छम-छम मेरे गीत में समाई
तेरी पायलों की छम-धम मेरे गीत में समाई
मेरी आरज़ू ने कर दी तेरी नाम से सगाई
छोटी सी इस अदा को नग़मा बना लिया है

तेरे रास्ते पे हमने इक घर बना लिया है
तेरी मुस्कुराहटों से इस को सजा लिया है
………………………………………………………….
Tere raaste pe hamne-Kavi 1954

Read more...

Sep 6, 2017

ना बोले ना बोले-आज़ाद १९५५

मीना कुमारी पर फिल्माया गया और लता मंगेशकर
का गाया एक लोकप्रिय गीत सुनते हैं फिल्म आज़ाद
से. ये सन १९५५ की फिल्म है जिसमें दिलीप कुमार
और मीना कुमारी प्रमुख कलाकार हैं.

राजेंद्र कृष्ण के लिखे गीत की तर्ज़ बनाई है संगीतकार
सी रामचंद्र ने.



गीत के बोल:

ना बोले  ना बोले  ना बोले रे
ना बोले  ना बोले  ना बोले रे
घूँघट के पट ना खोले रे
राधा ना बोले  ना बोले  ना बोले रे
घूँघट के पट ना खोले रे
राधा ना बोले  ना बोले  ना बोले रे

राधा की लाज भरी अँखियों के डोरे
राधा की लाज भरी अँखियों के डोरे
देखोगे कैसे अब गोकुल के छोरे
देखोगे कैसे अब गोकुल के छोरे
देखो मोहन का मनवा डोले रे

राधा ना बोले  ना बोले  ना बोले रे
ना बोले  ना बोले  ना बोले रे
घूँघट के पट ना खोले रे
राधा ना बोले  ना बोले  ना बोले रे

याद करो जमुना किनारे  साँवरिया
याद करो जमुना किनारे  साँवरिया
याद करो जमुना किनारे  साँवरिया
फोड़ी थी राधा की काहे गगरिया
फोड़ी थी राधा की काहे गगरिया
इस कारन ना तुम संग बोले रे

राधा ना बोले  ना बोले  ना बोले रे
ना बोले  ना बोले  ना बोले रे
घूँघट के पट ना खोले रे
राधा ना बोले  ना बोले  ना बोले रे

रूठी हुई यूँ ना मानेगी छलिया
रूठी हुई यूँ ना मानेगी छलिया
चरणों में राधा के  रख दो मुरलिया
चरणों में राधा के  रख दो मुरलिया
बात बन जायेगी हौले हौले रे

राधा ना बोले  ना बोले  ना बोले रे
ना बोले  ना बोले  ना बोले रे
घूँघट के पट ना खोले रे
राधा ना बोले  ना बोले  ना बोले रे
…………………………………………..
Na bole na bole-Azaad 1955

Artists: Meena Kumari , Dilip Kumar

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP