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Jul 16, 2019

अजी आवो मोहब्बत की खा लें-शहनाई १९४७

जब तक इस सृष्टि पर नर नारी मौजूद हैं मोहब्बत की कसमें
खाई और खिलाती जाएँगी. कुदरती व्यवस्था है बस भावनाओं
का इज़हार कैसे करें उसका ट्यूटोरियल समय समय पर कवि
और गीतकार अपने अपने अंदाज़ में बतलाया करते हैं.

सुनते हैं शहनाई से अगला गीत जिसे अमीरबाई कर्नाटकी और
स्वयं संगीतकार ने गाया है. गीतकार एक बार फिर से वही हैं
प्यारेलाल संतोषी.



गीत के बोल:

अजी आवो
आजी आवो मोहब्बत की खा लें कसम
हमारे रहो तुम तुम्हारे रहें हम
अजी आवो
अजी आवो जवानी की खा लें कसम
हमारे रहो तुम तुम्हारे रहें हम
अजी आवो

जिस धारा में नैया हमारी बहे रे
हमारी बहे रे
जिस धारा में दुनिया ये सारी बहे रे
ये सारी बहे रे
उस धारा में उस धारा में
घुलमिल के संग बहें हम
हमारे रहो तुम तुम्हारे रहें हम

अजी आवो
अजी आवो जवानी की खा लें कसम
हमारे रहो तुम तुम्हारे रहें हम
अजी आवो

जिस बोली में बोले पपीहा पिया हो
पपीता पिया हो
जिस बोली में धडके हमारा जिया हो
हमारा जिया हो
उस बोली में उस बोली में
कानों में तुमसे कहें हम
हमारे रहो तुम तुम्हारे रहें हम
अजी आवो

अजी आवो जवानी की खा लें कसम
हमारे रहो तुम तुम्हारे रहें हम
अजी आवो

चाहे पश्चिम से सूरज निकानले लगे
चाहे चन्दा भी आग उगलने ले
चाहे पश्चिम से सूरज निकानले लगे
चाहे चन्दा भी आग उगलने ले
ये उल्फत हमारी कभी हो ना पाए कम
हमारे रहो तुम तुम्हारे रहें हम
अजी आवो

अजी आवो जवानी की खा लें कसम
हमारे रहो तुम तुम्हारे रहें हम
अजी आवो
……………………………………………………………………..
Aji aavo moabbat ki kha len kasam-Shehnai 1947

Artists: Nasir Khan, Rehana

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Jul 9, 2019

मार कटारी मर जाना-शहनाई १९४७

सन १९४७ की फिल्मों में शहनाई एक सफल फिल्म थी. इसके
गीत भी काफ़ी बजे थे अपने समय में. आज भी कुछ गीत हैं
इस फिल्म के जो लोकप्रिय हैं. लोकप्रिय में से एक आप सुन
चुके हैं दूसरा सुनते हैं अब.

सहज और सरल बोलों वाले गीत कैसे लोगों कि जुबान पर चढ
जाते हैं उसकी बानगी है ये. ऐसे सहज गीत सहजता से ही बन
जाते हैं मगर ऐसे करिश्मे रोज रोज नहीं होते. गीतकार के दिल
से आह निकली तो उसने एक बढ़िया सा गीत अपनी सौ प्रतिशत
भावनाएं उड़ेलते हुए लिख डाला. संगीतकार के भी दिमाग में लट्टू
जला और उसने एक कालजयी धुन बना डाली. गायिका को दाद
तो हम बरसों से देते आये हैं. अमीरबाई कर्नाटकी अपने समय की
निपुण गायिका थीं.





गीत के बोल:

हमें क्या पता था के दिल की कली को मसल देंगे वो
हमें क्या पता था के राहत को गम में बदल देंगे वो
मोहब्बत के वादे और झूठी खा कसमें
किसी और के हो के चल देंगे वो

इसलिए तो कहा था बेटा

मार कटारी मर जाना
मार कटारी मर जाना
रे अँखियाँ किसी से मिलाना ना
हो मिलाना ना
मार कटारी मर जाना
मार कटारी मर जाना
रे अँखियाँ किसी से मिलाना ना
हो मिलाना ना
ज़हर खा के मर जाना
रे मन में किसी को बसाना ना
हो बसाना ना

हाय दुनिया की कोई भी चीज़ अब भाती नहीं है
चैन अब आता नहीं है नींद अब आती नहीं
जिनको आना था न आये जाने वाले जा चुके
हा आ आ आ आ आ
दिल को जाना था गया पर जान क्यूँ जाती नहीं

इसलिए तो कहा था बेटा

पीछे पड़े है पछताना
पीछे पड़े है पछताना
तू अपना किसी को बनाना ना
हो बनाना ना
पीछे पड़े है पछताना
तू अपना किसी को बनाना ना
हो बनाना ना

मार कटारी मर जाना
रे अँखियाँ किसी से मिलाना ना
हो मिलाना ना

क्यों इन आँखों ने उनका अब तक इंतज़ार किया
क्यूँ इस भोले दिल ने उन पर बार बार ऐतबार किया
जो यही मोहब्बत का बदला मुझको मिलने वाला था
हाँ आ आ आ आ आ आ
क्यों दुनिया के ताने सह के मैंने उनसे प्यार किया

इसलिए तो कहा था बेटा

सुन के हंसेगा ज़माना
सुन के हंसेगा ज़माना
दुःख अपना किसी को सुनाना ना
हो सुनाना ना
सुन के हंसेगा ज़माना
दुःख अपना किसी को सुनाना ना
हो सुनाना ना

मार कटारी मर जाना
रे अँखियाँ किसी से मिलाना ना
हो मिलाना ना
.................................................................
Maar katari mar jaana-Shehnai 1947

Artist: Rehana

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Aug 19, 2018

इस दुनिया की पगडण्डी पर-आम्रपाली १९४५

सन १९४५ की फिल्म आम्रपाली से एक गीत सुनते हैं
जो अमीरबाई कर्नाटकी का गाया हुआ है. इसे लिखा
है कवि प्रदीप ने और क्रेडिट्स में मिस कमल का
नाम है. देशभक्ति वाले गीत अंग्रेजों को पसंद नहीं
आते थे अतः प्रदीप को ये काम करना पड़ा. ऐसा
मैंने कहीं पढ़ा है.



गीत के बोल:

इस दुनिया की पगडण्डी पर
तुम्हीं हो मेरे साथी
इक तुम्हीं हो मेरे साथी
मेरे धुंधले जीवन-पथ पर
तुम ओजा की बाती
इक तुम्हीं हो मेरे साथी

तुम हो मेरे दिन के सूरज
मेरी रात के चन्दा
तुम ने मुझको बाँध लिया है
डाल प्रेम का फ़न्दा
मेरे राजकुमार हँसो
मैं तुम पे बालि बालि जाती
इक तुम्हीं हो मेरे साथी

इस विशाल संसार में मैं इक अकेली
काँप रही थी मेरी जीवनवेली
लेकिन जिस दिन तुमको पाया
मैंने मन को धीर बँधाया
अपने घर को स्वर्ग समझ
मैं फूले नहीं समाती
इक तुम्हीं हो मेरे साथी
…………………………………..
Is duniya ki pagdandi par-Amrapali 1945

Artist:

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Apr 8, 2018

काहे जादू किया मुझको इतना बता-नगमा १९५३

एक संगीतकार थे-शौकत देहलवी नाशाद जिन्होंने श्वेत श्याम
युग की कुछ फिल्मों में संगीत दिया. नाशाद का संगीत काफी
मधुर है. आपको फिल्म बारादरी के गीत तो याद होंगे ही.

आपको आज एक मधुर युगल गीत सुनवाते हैं फिल्म नगमा
से शमशाद बेगम और अमीरबाई कर्नाटकी का गाया हुआ. इस
गीतों को लिखा है नक्शब ने.



गीत के बोल:

काहे जादू किया मुझको इतना बता जादूगर बालमा
जादूगर बालमा हो जादूगर बालमा हो जादूगर बालमा
मुझको अपनी ख़बर है ना दिल का पता जादूगर बालमा
जादूगर बालमा हो जादूगर बालमा हो जादूगर बालमा
काहे जादू किया मुझको इतना बता जादूगर बालमा
जादूगर बालमा हो जादूगर बालमा हो जादूगर बालमा

ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
क्यों नज़र से न अब तक नज़र मिल सकी
ओ ओ ओ ना नज़र मिल सकी
दिल के परदे ही परदे में बिजली गिरी
आ के बिजली गिरी
होश उड़ने लगे तूर जलने लगा
जादूगर बालमा हो जादूगर बालमा हो जादूगर बालमा
काहे जादू किया मुझको इतना बता जादूगर बालमा
जादूगर बालमा हो जादूगर बालमा हो जादूगर बालमा

ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
फिर वही धुन सुना फिर वही गीत गा
हो ऑ ऑ फिर वही गीत गा
ऐसा नग़मा था सीने से दिल खिंच गया
हाय दिल खिंच गया
मुझको तड़पाने वाले हो तेरा भला
जादूगर बालमा जादूगर बालमा हो जादूगर बालमा
हो जादूगर बालमा
…………………………………………………………………
Kaahe jadoo kiya mujhko itna bata-Naghma 1953

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Apr 6, 2018

आईने में एक चाँद सी सूरत-ऐलान १९४७

सन १९४७ की फिल्म ऐलान से एक गीत सुनते हैं. ये आज आपको
विंटेज युग से दूसरा गीत सुनवा रहे हैं. उम्मीद के मुताबिक़ पाठक
संख्या आज सबसे कम होगी. नए छोरों को ये भाते नहीं और सयाने
पाठक यहाँ आते नहीं. उन्हें विंटेज युग का संगीत अंग्रेजी आलेखों
और बोलों में जल्दी समझ आता है.

खैर, वो सब तो चलता ही रहेगा, संसार है. कहा है-तुलसी इस संसार
में भाँति भाँति के लोग. गीत सुनते हैं जिसे सुरेन्द्र और अमीरबाई ने
गाया है. ज़िया सरहदी के बोल हैं और नौशाद का संगीत.




आईने में एक चाँद सी सूरत नज़र आई
आईने में एक चाँद सी सूरत नज़र आई
सौ बार हुई जिसपे फ़िदा सारी ख़ुदाई
हो ओ ओ सूरत नज़र आई
हाँ आ आ सौ बार हुई जिसपे फ़िदा सारी ख़ुदाई
हो सूरत नज़र आई

आँखों में तमन्नाओ का आबाद ज़माना
हर बात कुछ ऐसी के मोहब्बत का फ़साना
आँखों में तमन्नाओ का आबाद ज़माना
हर बात कुछ ऐसी के मोहब्बत का फ़साना
फूलों ने नज़ाक़त तेरे रुख़सार से पाई
हो ओ ओ सूरत नज़र आई
आईने में एक चाँद सी सूरत नज़र आई

ढलका हुआ आँचल हो क़यामत की अदायें
देता है मेरा दिल तुझे रह-रह के दुआयें
ढलका हुआ आँचल हो क़यामत की अदायें
देता है मेरा दिल तुझे रह रह के दुआयें
आ आ आ हुस्न सलामत रहे आबाद रहे तू
हाय हाय हुस्न सलामत रहे आबाद रहे तू
तू है तो तेरे दम से है आबाद ख़ुदाई
तू है तो तेरे दम से है आबाद ख़ुदाई
हो ओ ओ सूरत नज़र आई
आईने में एक चाँद सी सूरत नज़र आई
………………………………………………………..
Aaine mein ek chand si soorat-Elaan 1947

Artists: Munawwar Sultana, Shahnawaz

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Apr 5, 2018

उड़ जावूँ रे-आम्रपाली १९४५

आम्रपाली नाम से दो फ़िल्में मेरे ध्यान में हैं-एक तो सन १९४५
वाली और एक सन १९६६ वाली.

आज सुनते हैं विंटेज युग की आम्रपाली से एक गीत जिसे गाया
है अमीरबाई कर्नाटकी ने. सरस्वती देवी के संगीत में बने इस गीत
के बोल कवि प्रदीप ने लिखे हैं.





गीत के बोल:

उड़ जावूँ रे
उड़ जावूँ रे
मैं तो तारों की
मैं तो तारों की दुनिया में उड़ जावूँ रे
उड़ जावूँ रे
उड़ जावूँ रे
मैं तो तारों की दुनिया में उड़ जावूँ रे

आज जो मैं पँख कहीं पाऊँ रे
पाऊँ रे
सपनों की नगरी में मैं उड़ जावूँ रे
जावूँ रे
तारों को तोड़ लाऊँ रे
उड़ जावूँ रे
उड़ जावूँ रे
मैं तो तारों की दुनिया में उड़ जावूँ रे

दिखते हैं देखो कितने प्यारे-प्यारे
नीलम की थाली में चम-चम सितारे
आपस में खेल रहे आँख-मिचोली
आपस में खेल रहे आँख-मिचोली
मैं मन में ललचाऊँ रे
उड़ जावूँ रे
उड़ जावूँ रे
मैं तो तारों की दुनिया में उड़ जावूँ रे

मेरी जवानी ने खोली है पाँखें
आज मिलावूंगी
आज मिलावूंगी मैं चन्दा से आँखें
ए ए ए चन्दा से आँखें
चल मेरे मनवा आकाश की ओर
चल मेरे मनवा आकाश की ओर
मैं तुझपे वार जावूँ रे
उड़ जावूँ रे
उड़ जावूँ रे
मैं तो तारों की दुनिया में उड़ जावूँ रे
.....................................................................
Ud javoon re main to-Amrapali 1945

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Aug 31, 2017

ऐ दिल तुझी को नींद ना आई-शहनाज़ १९४८

अमीरबाई कर्नाटकी एक ख्यात गायिका थीं चालीस और पचास के
दशक में. उन्होंने गायकी के अलावा फिल्मों में संगीत भी दिया.

अमीरबाई के संगीत वाला एक गीत सुनते हैं जिसे रफ़ी ने गाया
है. आपको हमने अंजुम पीलीभीती का लिखा एक गीत सुनवाया
था. आज सुनते हैं अख्तर पीलीभीती का लिखा गीत. नाम से
आप समझ ही गए होंगे ये दोनों पीलीभीत के रहने वाले थे.

गीत का पैटर्न उसी समय के हिसाब का है. एक पंक्ति को दो
बार गाया गया है मगर गीत का मुखडा केवल एक बार आता है
गीत में.



गीत के बोल:


ऐ दिल तुझी को नींद ना आई तमाम रात
ऐ दिल तुझी को नींद ना आई तमाम रात
सोती रही खुदा की खुदाई तमाम रात
सोती रही खुदा की खुदाई तमाम रात

अपनी तो एक भी ना चली दिल के सामने
अपनी तो एक भी ना चली दिल के सामने
रह रह के तेरी याद भुलाई तमाम रात
रह रह के तेरी याद भुलाई तमाम रात

किस माह-ऐ-आसमां के तसव्वुर में रात भर
किस माह-ऐ-आसमां के तसव्वुर में रात भर
ज़ालिम तुम्हें भी नींद ना आई तमाम रात
ज़ालिम तुम्हें भी नींद ना आई तमाम रात
……………………………………………………..
Ae dil tujhi ko neend-Shahnaz 1948

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Jul 29, 2017

ओ बाबू कैसे दिल करूँ-सगाई १९५१

गायिकाओं वाला युगल गीत सुनते हैं फिल्म सगाई से.
सन १९५१ की फिल्म सगाई में कुछ बेहतरीन नगमे हैं.
इसमें रेहाना, कुक्कू, विजयलक्ष्मी और पूर्णिमा नामक
अभिनेत्रियां हैं. गीत में कम से कम दो मौजूद हैं.




गीत के बोल:

ओ बाबू ओ बाबू
कैसे दिल करूँ क़ाबू समझाये जा
ओ जानी ओ जानी
तेरी बड़ी मेहरबानी बतलाये जा
ओ बाबू ओ बाबू
कैसे दिल करूँ क़ाबू समझाये जा
ओ जानी ओ जानी
तेरी बड़ी मेहरबानी बतलाये जा
ओ बाबू

तेरी जान की क़सम मेरा दिल नहीं बस में
जाओ जाओ जाओ ना खाओ झूठी क़समें
तेरी जान की क़सम मेरा दिल नहीं बस में
जाओ जाओ जाओ ना खाओ झूठी क़समें
तेरी जान की क़सम है ईमान की क़सम
मुझको है तुझसे प्यार मेरा जिया बेक़रार
मुझको अपना बनाये जा
ओ बाबू ओ बाबू
कैसे दिल करूँ क़ाबू समझाये जा
ओ जानी ओ जानी
तेरी बड़ी मेहरबानी बतलाये जा
ओ बाबू

हटो हटो बड़े देखे प्यार जताने वाले
अँखियाँ नचा के नखरे दिखा के
जिया भरमाने वाले
ओ ओ ओ ओ
जवानी की क़सम ज़िन्दगानी की क़सम
मैं हूँ तेरी ग़ुलाम
तुझे मेरा है सलाम
मुझको दिल में बसाये जा
ओ बाबू ओ बाबू
कैसे दिल करूँ क़ाबू समझाये जा
ओ जानी ओ जानी
तेरी बड़ी मेहरबानी बतलाये जा
ओ बाबू

…………………………………………………….
O baboo kaise dil karoon-Sagai 1951

Artists: Cuckoo, Rehana

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Jul 22, 2017

अब तेरे सिवा कौन मेरा-किस्मत १९४४

अमीरबाई कर्नाटकी की आवाज़ में एक भक्ति गीत सुनते हैं
फिल्म किस्मत से. इस गीत को सुनने के बाद आप महसूस
करेंगे कि इस गीत की धुन कुछ जानी पहचानी सी है. आगे
चल के कई गीतों में इस गीत की खुशबू आती है.

संभव है ये कोई पारंपरिक धुन हो जिसके आधार पर ये गीत
तैयार किया गया हो. फिल्मों में लोक संगीत को शामिल करने
की परंपरा शुरू से है. गीत कवि प्रदीप ने लिखा और इसका
संगीत तैयार किया अनिल बिश्वास ने.



गीत के बोल:

अब तेरे सिवा
अब तेरे सिवा कौन मेरा कृष्ण कन्हैया
भगवान किनारे से लगा दे मेरी नैया
अब तेरे सिवा
अब तेरे सिवा कौन मेरा कृष्ण कन्हैया
भगवान किनारे से लगा दे मेरी नैया
अब तेरे सिवा

मेरी खुशी की दुनिया बाबुल ने छीन ली
मेरे सुखों की कलियाँ किस्मत ने बीन लीं
मेरी खुशी की दुनिया बाबुल ने छीन ली
मेरे सुखों की कलियाँ किस्मत ने बीन लीं
अब तू ही बचा लाज मेरी बंसी बजैया
भगवान किनारे से लगा दे मेरी नैया
अब तेरे सिवा

पूजा नहीं है पूरी अधूरी है आरती
पूजा नहीं है पूरी अधूरी है आरती
ओ श्याम सलोने तुझे मीरा पुकारती
ओ श्याम सलोने तुझे मीरा पुकारती
तुझे मीरा पुकारती
सहती है बार बार वो ले ले के बलैयां
सहती है बार बार वो ले ले के बलैयां
भगवान भगवान
भगवान किनारे से लगा दे मेरी नैया

अब तेरे सिवा
अब तेरे सिवा कौन मेरा कृष्ण कन्हैया
भगवान किनारे से लगा दे मेरी नैया
अब तेरे सिवा
..........................................................................
Ab tere sinwa kaun mera-Kismat 1944

Artists: Ashok Kumar, Mumtaz Shanti

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चंदा देश पिया के जा-भर्तृहरि १९४४

अमीरबाई कर्नाटकी का गाया एक गीत सुनते हैं भर्तृहरि
फिल्म से. ये अपने ज़माने का एक लोकप्रिय गीत है.
गीत का संगीत तैयार किया है खेमचंद प्रकाश ने. गीत
लिखा है पंडित इंद्र ने.

राजा भर्तृहरि इतिहास के महान राजाओं में से एक हैं.
उन्होंने राज पाट छोड़ कर वैराग्य धारण कर लिया था.
वे एक महान संस्कृत के कवि के रूप में भी जाने जाते
हैं.



गीत के बोल:

चंदा देश पिया के जा
चंदा देश पिया के जा
चंदा देश पिया के जा
चंदा देश पिया के जा
साजन हमरे भूले हमको
साजन हमरे भूले हमको
साजन हमरे भूले हमको
साजन हमरे भूले हमको
उन्हें मना कर ला
चंदा देश पिया के जा
चंदा देश पिया के जा
ओ चंदा देश पिया के जा
चंदा देश पिया के जा

सुन्दर मनहर ऋतु हरी आई
मधुबन में क्यूँ बिरह बनाई
इतनी सुना कर आ
हो इतनी सुना कर आ
हो इतनी सुना कर आ
चंदा कितनी सुना कर आ
ओ चंदा देश पिया के जा
चंदा देश पिया के जा
चंदा देश पिया के जा

सांझ भये मैं दीप सी जलती
रात रात भर बोझ सी ढलती
जा के याद दिला हां आ
जा के याद दिला हां आ
जा के याद दिला चंदा
ओ चंदा पिया के जा
चंदा देश पिया के जा
चंदा देश पिया के जा
...................................................................................
Chanda desh piya ke ja-Bhartruhari 1944

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Jul 17, 2016

मिल के बिछड़ गईं अँखियाँ-रतन १९४४

जैसा कि आप जानते हैं फिल्म रतन के सभी गीत हिट
हुए थे और आज ताक बजते हैं. आज सुनते हैं फिल्म का
अगला गीत अमीर बाई कर्नाटकी की आवाज़ में. नौशाद
के संगीत से सजे इस गीत को दीनानाथ मधोक ने लिखा

अमीरबाई कर्नाटकी का नाम बहुत ही आदर के साथ लिया
जाता है. उस युग के सर्वश्रेष्ठ गायकों में उनकी गिनती होती
थी.

फिल्म रतन ने फिल्म संगीत को एक नया ट्रेंड दिया इस
वजह से इस फिल्म का अहम स्थान है फिल्म संगीत क्षेत्र
में.





गीत के बोल:

मिल के बिछड़ गईं अँखियाँ
हाय रामा मिल के बिछड़ गईं अँखियाँ
मिल के बिछड़ गईं अँखियाँ
हाय रामा मिल के बिछड़ गईं अँखियाँ

मुशक़िल से वो दिन भुलाये थे हमने
फिर आ के छेड़ा बलम ने
मुशक़िल से वो दिन भुलाये थे हमने
फिर आ के छेड़ा बलम ने
फिर से धरक गईं छतियाँ
धरक गईं छतियाँ
हाय रामा मिल के बिछड़ गईं अँखियाँ

मिल के बिछड़ गईं अँखियाँ
हाय रामा मिल के बिछड़ गईं अँखियाँ

रोते हैं नैना जिया तलमलाये
जावो कोई उनको लाये
रोते हैं नैना जिया तलमलाये
जावो कोई उनको लाये
कैसे बिताऊँ दिन-रतियाँ
बिताऊँ दिन रतियाँ
हाय रामा मिल के बिछड़ गईं अँखियाँ

मिल के बिछड़ गईं अँखियाँ
हाय रामा मिल के बिछड़ गईं अँखियाँ
............................................................
Mil ke bichhad gayi ankhiyan-Ratan 1944

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Aug 27, 2011

काहे बोले पपीहा-सावन आया रे १९४९

जिस दिन बारिश होती है, सावन के या बारिश के उल्लेख वाले
गीत और फ़िल्में याद आ जाती हैं। आज कुछ इलाकों में बारिश
हुयी अतः एक फिल्म का नाम याद आया –सावन आया रे। वैसे
महीना तो भादो का चल रहा है मगर हमने ये गीत सावन के
महीने में नहीं सुना इसलिए अब सुन लेते हैं।

बारिश के मौसम में चील-कौवे, कोयल-पपीहे, छोरे-छोरी सभी का
कलरव/शोरगुल आप सुन सकते हैं। मौसम है ही ऐसा जो प्रकृति
के सभी तत्वों को आनंदित करता है। पत्थरों की ज़ुबान होती तो
वे भी बतलाते कि बारिश में भीगने में कितना आनंद आता है।

अमीरबाई कर्नाटकी के गाये गीत को परदे पर फिल्माया गया है
रमला देवी पर जो किशोर साहू से मुखातिब हैं। राममूर्ति चतुर्वेदी
इस गीत के लेखक हैं और इसे संगीतबद्ध किया है उस ज़माने के
नामचीन संगीतकार ‘खेमू जी’ उर्फ खेमचंद प्रकाश ने। गीत में
अगर आपको प्यानो की आवाज़ न आये तो शिकायत न कीजियेगा
क्यूंकि फ़िल्मी साज़ कैसी भी आवाज़ निकल सकते हैं। हो सकता है
प्यानो नायिका के नृत्य के लिए रिमोट कंट्रोल का काम कर रहा हो।





गीत के बोल :

पहने पीली रंग साडी
लाल लागी हो किनारी
मैं तो गवन चली हूँ
मैं तो गवन चली हूँ
काहे बोले पपीहा बोले पपीहा
काहे बोले पपीहा बोले पपीहा
मैं तो गवन चली हूँ
काहे बोले पपीहा बोले पपीहा

नैना मोरे कजरारे
बेली गजरा संवारे
नैना मोरे कजरारे
बेली गजरा संवारे
लाली होंठों की निराली
लाली होंठों की निराली
रस घोले पपीहा, घोले पपीहा
काहे बोले पपीहा, बोले पपीहा

मैं तो गवन चली हूँ
काहे बोले पपीहा बोले पपीहा

माथे की बिंदिया चम् चम् चमके
माथे की बिंदिया चम् चम् चमके
पायल मोरी छम छम छमके
पायल मोरी छम छम छमके
मोरे नैना मतवारे करे छुप के इशारे
करे छुप के इशारे
वहां झूलूंगी
वहां झूलूंगी दुलार के हिंडोले पपीहा
बोले पपीहा
काहे बोले पपीहा बोले पपीहा

मैं तो गवन चली हूँ
काहे बोले पपीहा बोले पपीहा

मन की उमंगें संवारे चली मैं
मन की उमंगें संवारे चली मैं
दुल्हन बने पी के द्वारे चली मैं
दुल्हन बने पी के द्वारे चली मैं
उनमें खो जाऊँगी उनकी हो जाऊँगी
उनमें खो जाऊँगी उनकी हो जाऊँगी
पिया रंग और उमंग भरा डोले पपीहा
डोले पपीहा
काहे बोले पपीहा बोले पपीहा

मैं तो गवन चली हूँ
काहे बोले पपीहा बोले पपीहा
काहे बोले पपीहा बोले पपीहा
...................................
Main to gawan chali-Sawan aaya re 1949

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Jul 12, 2011

ओ जानेवाले बालमवा-रतन १९४४

आपको तीन एकल गीत सुनवा दिए आज. एक आध युगल गीत भी हो जाए .
फिल्म रतन(१९४४) से तीसरा गीत प्रस्तुत है. श्याम कुमार और अमीरबाई
कर्नाटकी की आवाजों में ये बरसों से जनता को आनंदित करने वाला गीत
लिखा है दिन नाथ मधोक ने और इसकी धुन बनायीं है संगीतकार नौशाद ने.

विडियो के विवरण में लेखक दो बातें लिखता है-फिल्म रतन के संगीत ने
नौशाद को भौंचक करने वाली ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया . ये बात लगभग सटीक
है. दूसरी बात-रतन पहली फिल्म थी जिसमें ढोलक के लयबद्ध ठेकों का इस्तेमाल
हुआ था. इससे मैं सहमत नहीं हूँ. ढोलक का प्रयोग इसके पहले भी फिल्म संगीत
में खूब हुआ है. अमीरबाई सन १९४४ तक जाना पहचाना नाम हो चुकी थीं लेकिन
उनके इस गीत के सह-गायक श्याम कुमार एक अनजान सा नाम थे, आज भी हैं.
गीत उस समय के हिसाब से तेज गति वाला है.




गीत के बोल:

ओ जाने वाले बालमवा
लौट के आ, लौट के आ

जा मैं ना तेरा बालमवा
बेवफ़ा बेवफ़ा

आ, ओ जाने वाले बालमवा
लौट के आ, लौट के आ

जा मैं ना तेरा बालमवा
बेवफ़ा बेवफ़ा

तेरे बिन मेरा जिया
लागे ना कहीं भी पिया
हाय लागे ना
याद नहीं छोड़े तेरी
दुनिया अंधेरी मेरी
अब जाऊँ कहाँ
ओ दिल को ले करता है दर्द जिया
लौट के आ, लौट के आ
ओ दिल को ले करता है दर्द जिया
लौट के आ, लौट के आ

ओ जाने वाले बालमवा
लौट के आ लौट के आ

जा मैं ना तेरा बालमवा
बेवफ़ा बेवफ़ा

घड़ी-घड़ी पनघट पे आना
झूठ-मूठ की प्रीत जताना
मुझे याद है
फिर और किसी से आँख मिलाना
मुझसे आँख मिला कर जाना
मुझे याद है
झूठों से काहे बोलूँ जा री जा
बेवफ़ा बेवफ़ा
झूठों से काहे बोलूँ जा री जा
बेवफ़ा बेवफ़ा

आ, ओ जाने वाले बालमवा
लौट के आ, लौट के आ

जा मैं ना तेरा बालमवा
बेवफ़ा बेवफ़ा
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O jaane wale balamwa laut ke aa-Ratan 1944

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May 22, 2011

सैयां सलोने से नैन मिला के-विलेज गर्ल १९४५

जोर का झटका धीरे से। आपको सन १९५० के भी पीछे लिए
चलते हैं। आज आपको विलेज गर्ल अर्थात 'गाँव की गोरी' फिल्म
का गीत सुनवाते हैं। वली साहब के गीत की धुन तैयार की
है संगीतकार श्याम सुन्दर ने। गाने और वाद्य संयोजन में
पंजाबियत बरकरार है। श्याम सुन्दर पंजाबी मूल के संगीतकार
थे। शेम सुन्दर ने कम फिल्मों में संगीत दिया मगर वे अपनी
अलग छाप छोड़ गये फिल्म जगत पर। गाना मेहँदी और लीपापोती
की रस्म के बाद गियर बदलता है और एक मस्त गीत सुनाई देने
लगता है। जिस कलाकार को मेहँदी लगायी जा रही है उसका नाम
है नूरजहाँ जिनके कई गीत आपने सुने होंगे। नजीर नाम के शख्स
दूल्हा बने हैं और घोड़ी के आगे नाचने वाली कलाकार का नाम है
गीता निजामी। गीत गाया है अमीर बाई कर्नाटकी ने। इस ब्लॉग पर
श्याम सुन्दर का ये गीत सुनिए आपको उनके संगीत को पहचानने
में मदद मिलेगी-ऐसे रसिया का-ढोलक ।

नूरजहाँ के हाव भाव देख कर ऐसा लग रहा है की उनको मेहँदी लगवाने
में आनंद आ रहा है। उल्लेखनीय है कि ये फिल्म नूरजहाँ की शुरुआती
कुछ फिल्मों में से एक है।



गीत के बोल:

सैयां सलोने से नैन
सैयां सलोने से नैन, मिला के, प्रीत लगा के
हाय, जान गई

सैयां सलोने से नैन
मेरी जान गई जान गई जान गई
मेरी जान गई जान गई जान गई

सैयां सलोने से नैन
सैयां सलोने से नैन, मिला के, प्रीत लगा के
हाय, जान गई

सैयां सलोने से नैन

हो, रावी किनारे
रावी किनारे मोरा छोटा सा गाँव
रावी किनारे मोरा छोटा सा गाँव
पतझड़ की धूप छांव
तारों की छांव
पतझड़ की धूप छाँव
तारों की छांव
सूनी नगरिया बसो मोरे राजा हो
मोरे सैयां हो
मेरी जान गई जान गई जान गई
मेरी जान गई जान गई जान गई

सैयां सलोने से नैन
सैयां सलोने से नैन, मिला के, प्रीत लगा के
हाय, जान गई
सैयां सलोने से नैन

हो नैनों के गाँव
नैनों के गाँव में आजा रे बालम
नैनों के गाँव में आजा रे बालम
सपनों की दुनिया बसा जा रे बालम
सपनों की दुनिया बसा जा रे बालम
फिर मुझको गरवा लगा मोरे राजा हो
मोरे सैयां हो
मेरी जान गई जान गई जान गई
मेरी जान गई जान गई जान गई

सैयां सलोने से नैन
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Saiyan salone se nain-Village girl 1945

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