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Aug 27, 2019

मेरे दिल की दुनिया उजड गई-शांति १९४७

कहते हैं मन में शांति हो तो बाहर चहुँ ओर शांति नज़र आती है.
ये तो फिलोसफी की बात है. वास्तविकता भिन्न भी हो सकती है.
एक पहलू ये है कि मन की शांति के कारण आपको बाहरी उथल
पुथल से असर नहीं होता और होता भी है तो नगण्य मात्रा में.

सुनते हैं एस यू सनी निर्देशित फिल्म शांति से एक गीत जिसे उस
समय की एक जानी पहचानी गायिका पारुल घोष ने गाया है. यह
गीत लिखा है शकील बदायूनीं ने और संगीत बी एस ठाकुर का.



गीत के बोल:

मेरे दिल की दुनिया उजड गई
मेरे दिल की दुनिया उजड गई
मैं करूं तो किससे गिला करूं
ना वही मेरे ना जहाँ मेरा
कहाँ जाऊं हाय मैं क्या करूं
मेरे दिल की दुनिया उजड गई

है ज़माना मुझसे खफा खफा
है ज़माना मुझसे खफा खफा
कहीं ज़ुल्म है तो कहीं दगा
कहीं ज़ुल्म है तो कहीं दगा
नहीं राह जैसी कोई जगह
जहाँ छुप के रो ही लिया करूं
ना वही मेरे ना जहां मेरा
कहाँ जाऊं हाय मैं क्या करूं
मेरे दिल की दुनिया उजड गई

प्रभु मुझ गरीब की जान पर
ये जफान और मुसीबतें
प्रभु मुझ गरीब की जान पर
ये जफान और ये मुसीबतें
ये बाला ना लौट के आ सके
कहो मर ना जाऊं तो क्या करूं
ना वही मेरे ना जहाँ मेरा
कहाँ जाऊं हाय मैं क्या करूं
मेरे दिल की दुनिया उजड गई
……………………………………………………..
Mere dil ki duniya ujad gayi-Shanti 1947

Artists:

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Aug 15, 2019

वतन की माटी हाथ में लेकर-गाँव १९४७

सन १९४७ के फिल्म है गाँव . ये वही साल है जब देश आज़ाद
हुआ था. आजादी के पूर्व कुछ सालों में और आजादी के कुछ
साल बाद तक ऐसी फ़िल्में और गीत काफी बने जो देशभक्ति के
भावों को बढ़ाने का काम करते हैं.

सुनिए गाँव फिल्म से एक गीत मुकेश और गीता दत्त की आवाजों
में. संदेशात्मक गीत रचा है दीनानाथ मधोक ने और इसकी धुन
तैयार की हैं खेमचंद प्रकाश ने.





गीत के बोल:

वतन की माटी हाथ में लेकर माथे तिलक लगा लो
वतन की माटी हाथ में लेकर माथे तिलक लगा लो
जिस माटी ने जनम दिया उस माटी के गुण गा लो
जिस माटी ने जनम दिया उस माटी के गुण गा लो
वतन की माटी हाथ में लेकर माथे तिलक लगा लो

माटी हो के सोना उगले
माटी हो के सोना उगले ये सोना वो सोना है
ये सोना वो सोना है
चोर चुराए डाकू लूटे खतम कभी नहीं होना है
ऐसी प्यारी दौलत को
ऐसी प्यारी दौलत को तन मन से अपना लो
जिस माटी ने जनम दिया उस माटी के गुण गा लो
जिस माटी ने जनम दिया उस माटी के गुण गा लो

ग़ैरों ने बाहर से आ के
ग़ैरों ने बाहर से आ के
पेट भरे यहाँ अपने
पेट भरे यहाँ अपने
सुख की नींद सदा वो सोये देखे सुख के सपने
सुख की नींद सदा वो सोये देखे सुख के सपने
बन्द करो अब घर के द्वारे
बन्द करो अब घर के द्वारे घर को आज संभालो
जिस माटी ने जनम दिया उस माटी के गुण गा लो
जिस माटी ने जनम दिया उस माटी के गुण गा लो
………………………………………………………………
Watan ki maati haath mein le kar-Gaon 1947

Artists:

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Aug 11, 2019

हाय रे उड़ उड़ जाए-मिर्ज़ा साहिबां १९४७

बैलगाडी किसी गीत में देखे हमें काफी दिन हो गए हैं. आज
सुनते हैं गांव की प्रष्ठभूमि में फिल्माया गाया एक गीत १९४७
की फिल्म मिर्ज़ा साहिबां से. इस फिल्मे में दो संगीतकारों की
सेवाएं हैं-पंडित अमरनाथ और हुस्नलाल-भगतराम की जोड़ी की.

जो विवरण मिलते हैं उनमें ये स्पष्ट नहीं होता है कि किसने किस
गीत की धुन तैयार की है. वाद्य यन्त्र के संयोजन के हिसाब से
सोचें तो यह गीत पंडित अमरनाथ का लगता है. हम यही समझ
लेते हैं जब तक कोई ज्ञानी श्रोता इसमें करेक्शन नहीं सुझाता.

कमर जलालाबादी के बोल हैं और इसे नूरजहाँ, शमशाद बेगम
और जोहराबाई अम्बालेवाली ने गाया है. ३  गायिकाओं की
आवाज़ वाला एक दुर्लभ गीत है ये. बैलगाडी में जो सबसे ज्यादा
गोल और बड़ा चेहरा दिख रहा है वो हैं नूरजहाँ और पैदल
सवार का नाम है त्रिलोक कपूर. बाकियों को आप पहचानिये.




गीत के बोल:

हाय रे उड़ उड़ जाए हाय रे उड़ उड़ जाए
मेरा रेशमी दुपट्टवा दुपट्टवा हो हो ओ दुपट्टवा
हाय रे उड़ उड़ जाए हाय रे उड़ उड़ जाए
मेरा रेशमी दुपट्टवा दुपट्टवा हो हो ओ दुपट्टवा
हाय रे उड़ उड़ जाए

एक हवा का मीठा झोंका कह गया मीठी बात
कह गया मीठी बात
भूले से कहीं थाम ना लेना परदेसी का हाथ
हो ओ ओ परदेसी का हाथ
ये बात मुझे समझाए दुपट्टा रेशम का
ये बात मुझे समझाए दुपट्टा रेशम का
हो दुपट्टा रेशम का

हाय रे उड़ उड़ जाए हाय रे उड़ उड़ जाए
मेरा रेशमी दुपट्टवा दुपट्टवा हो हो ओ दुपट्टवा
हाय रे उड़ उड़ जाए

पीछे पीछे आने वाले हो पीछे न रे चलना
पीछे न रे चलना
डर है यूँ ही बीत ना जाए साजन समां सुहाना
साजन समां सुहाना
ये मीठा गीत सुनाये दुपट्टा रेशम का
ये मीठा गीत सुनाये दुपट्टा रेशम का
हो दुपट्टा रेशम का

हाय रे उड़ उड़ जाए हाय रे उड़ उड़ जाए
मेरा रेशमी दुपट्टवा दुपट्टवा हो हो ओ दुपट्टवा
हाय रे उड़ उड़ जाए

डूब रहा है सूरज अपने दिल में ले कर आस
हो ओ ओ दिल में ले कर आस
दूर दूर हैं दो दिल बोलो कैसे आयें पास
हो ओ ओ कैसे आयें पास
दो बिछड़े दिल मिलवाए दुपट्टा रेशम का
दो बिछड़े दिल मिलवाए दुपट्टा रेशम का
हो दुपट्टा रेशम का

हाय रे उड़ उड़ जाए हाय रे उड़ उड़ जाए
मेरा रेशमी दुपट्टवा दुपट्टवा हो हो ओ दुपट्टवा
हाय रे उड़ उड़ जाए
……………………………………………
Haye re ud ud jaaye-Mirza Sahiban 1947

Artists: Noorjahan, Trilok Kapoor, Unknown1, Unknown 2

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Jul 29, 2019

अंगना बोले काग रे-डोली १९४७

सुनते हैं सन १९४७ की फिल्म डोली से एक गीत शमशाद बेगम का
गाया हुआ. नाजिम पानीपती के बोल हैं और गुलाम मोहम्मद ने इसका
संगीत तैयार किया है. गुलाम मोहम्मद के संगीत से सजी अधिकाँश
फ़िल्में ओब्स्क्योर की केटेगरी में आती हैं. हिंदी का शब्द दुर्लभ थोडा
बेहतर है.

तुकबंदी की प्रेक्टिस करनी हो तो अपने इमेजिनेशन की किवडिया को
खोलना पड़ता है. जैसे इस गीत में ही अगर तीन पंक्तियाँ होती मुखड़े
में तो तीसरी पंक्ति में काग, बाग के बाद शायद साग आता. हो सकता
है भाग भी आता.





गीत के बोल:

अंगना बोले काग रे
उजड़ा मन का बाग रे
अंगना बोले काग रे
उजड़ा मन का बाग रे

सावन आया खिले बगीचे
सावन आया खिले बगीचे
देख रही हूँ आँख मीचे
देख रही हूँ आँख मीचे
आये मेरे भाग रे
आये मेरे भाग रे

अंगना बोले काग रे
उजड़ा मन का बाग रे

उन बिन सब कुछ सूना लागे
उन बिन सब कुछ सूना लागे
बिरहा का दुःख सूना लागे
बिरहा का दुःख सूना लागे
पड़ गए दिल में दाग रे
पड़ गए दिल में दाग रे

अंगना बोले काग रे
उजड़ा मन का बाग रे
…………………………………………………………….
Angna bole kaag re-Doli 1947

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Jul 16, 2019

अजी आवो मोहब्बत की खा लें-शहनाई १९४७

जब तक इस सृष्टि पर नर नारी मौजूद हैं मोहब्बत की कसमें
खाई और खिलाती जाएँगी. कुदरती व्यवस्था है बस भावनाओं
का इज़हार कैसे करें उसका ट्यूटोरियल समय समय पर कवि
और गीतकार अपने अपने अंदाज़ में बतलाया करते हैं.

सुनते हैं शहनाई से अगला गीत जिसे अमीरबाई कर्नाटकी और
स्वयं संगीतकार ने गाया है. गीतकार एक बार फिर से वही हैं
प्यारेलाल संतोषी.



गीत के बोल:

अजी आवो
आजी आवो मोहब्बत की खा लें कसम
हमारे रहो तुम तुम्हारे रहें हम
अजी आवो
अजी आवो जवानी की खा लें कसम
हमारे रहो तुम तुम्हारे रहें हम
अजी आवो

जिस धारा में नैया हमारी बहे रे
हमारी बहे रे
जिस धारा में दुनिया ये सारी बहे रे
ये सारी बहे रे
उस धारा में उस धारा में
घुलमिल के संग बहें हम
हमारे रहो तुम तुम्हारे रहें हम

अजी आवो
अजी आवो जवानी की खा लें कसम
हमारे रहो तुम तुम्हारे रहें हम
अजी आवो

जिस बोली में बोले पपीहा पिया हो
पपीता पिया हो
जिस बोली में धडके हमारा जिया हो
हमारा जिया हो
उस बोली में उस बोली में
कानों में तुमसे कहें हम
हमारे रहो तुम तुम्हारे रहें हम
अजी आवो

अजी आवो जवानी की खा लें कसम
हमारे रहो तुम तुम्हारे रहें हम
अजी आवो

चाहे पश्चिम से सूरज निकानले लगे
चाहे चन्दा भी आग उगलने ले
चाहे पश्चिम से सूरज निकानले लगे
चाहे चन्दा भी आग उगलने ले
ये उल्फत हमारी कभी हो ना पाए कम
हमारे रहो तुम तुम्हारे रहें हम
अजी आवो

अजी आवो जवानी की खा लें कसम
हमारे रहो तुम तुम्हारे रहें हम
अजी आवो
……………………………………………………………………..
Aji aavo moabbat ki kha len kasam-Shehnai 1947

Artists: Nasir Khan, Rehana

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Jul 9, 2019

मार कटारी मर जाना-शहनाई १९४७

सन १९४७ की फिल्मों में शहनाई एक सफल फिल्म थी. इसके
गीत भी काफ़ी बजे थे अपने समय में. आज भी कुछ गीत हैं
इस फिल्म के जो लोकप्रिय हैं. लोकप्रिय में से एक आप सुन
चुके हैं दूसरा सुनते हैं अब.

सहज और सरल बोलों वाले गीत कैसे लोगों कि जुबान पर चढ
जाते हैं उसकी बानगी है ये. ऐसे सहज गीत सहजता से ही बन
जाते हैं मगर ऐसे करिश्मे रोज रोज नहीं होते. गीतकार के दिल
से आह निकली तो उसने एक बढ़िया सा गीत अपनी सौ प्रतिशत
भावनाएं उड़ेलते हुए लिख डाला. संगीतकार के भी दिमाग में लट्टू
जला और उसने एक कालजयी धुन बना डाली. गायिका को दाद
तो हम बरसों से देते आये हैं. अमीरबाई कर्नाटकी अपने समय की
निपुण गायिका थीं.





गीत के बोल:

हमें क्या पता था के दिल की कली को मसल देंगे वो
हमें क्या पता था के राहत को गम में बदल देंगे वो
मोहब्बत के वादे और झूठी खा कसमें
किसी और के हो के चल देंगे वो

इसलिए तो कहा था बेटा

मार कटारी मर जाना
मार कटारी मर जाना
रे अँखियाँ किसी से मिलाना ना
हो मिलाना ना
मार कटारी मर जाना
मार कटारी मर जाना
रे अँखियाँ किसी से मिलाना ना
हो मिलाना ना
ज़हर खा के मर जाना
रे मन में किसी को बसाना ना
हो बसाना ना

हाय दुनिया की कोई भी चीज़ अब भाती नहीं है
चैन अब आता नहीं है नींद अब आती नहीं
जिनको आना था न आये जाने वाले जा चुके
हा आ आ आ आ आ
दिल को जाना था गया पर जान क्यूँ जाती नहीं

इसलिए तो कहा था बेटा

पीछे पड़े है पछताना
पीछे पड़े है पछताना
तू अपना किसी को बनाना ना
हो बनाना ना
पीछे पड़े है पछताना
तू अपना किसी को बनाना ना
हो बनाना ना

मार कटारी मर जाना
रे अँखियाँ किसी से मिलाना ना
हो मिलाना ना

क्यों इन आँखों ने उनका अब तक इंतज़ार किया
क्यूँ इस भोले दिल ने उन पर बार बार ऐतबार किया
जो यही मोहब्बत का बदला मुझको मिलने वाला था
हाँ आ आ आ आ आ आ
क्यों दुनिया के ताने सह के मैंने उनसे प्यार किया

इसलिए तो कहा था बेटा

सुन के हंसेगा ज़माना
सुन के हंसेगा ज़माना
दुःख अपना किसी को सुनाना ना
हो सुनाना ना
सुन के हंसेगा ज़माना
दुःख अपना किसी को सुनाना ना
हो सुनाना ना

मार कटारी मर जाना
रे अँखियाँ किसी से मिलाना ना
हो मिलाना ना
.................................................................
Maar katari mar jaana-Shehnai 1947

Artist: Rehana

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Jul 7, 2019

पा लागूं कर जोरी रे-आपकी सेवा में १९४७

सुनते हैं सन १९४७ की फिल्म आपकी सेवा में से वह गीत
जिसके लिए फिल्म ज्यादा प्रसिद्द है और चर्चित भी. फिल्म
आपकी सेवा में से इतिहास के एक गौरवशाली अध्याय की
शुरुआत हुई और वो है लता मंगेशकर का फिल्म पार्श्व्गायन
में पदार्पण.

गीत का पहला शब्द है-पा जो कि इधर पांव शब्द का संक्षिप्त
रूप है. लता मंगेशकर ने सदा स्टेज और कार्यस्थल का सम्मान
किया है. वो गानों की रिकॉर्डिंग के समय में पैर में जूते चप्पल
नहीं पहना करतीं.

प्रथम फ़िल्मी गीत कृष्ण के उल्लेख वाला है. क्या इसे आशीर्वाद
माना जाए एक शानदार शुरुआत के लिए. या इसे महज संयोग
मान के ख़ारिज कर दिया जाए.

सयाने कहते हैं ये गीत राग पीलू ठुमरी स्टाइल का है.




गीत के बोल:

पा लागूं कर जोरी रे
श्याम मोसे ना खेलो होरी
हो श्याम मोसे ना खेलो होरी
पा लागूं कर जोरी
श्याम मोसे ना खेलो होरी
मेरे श्याम
श्याम मोसे ना खेलो होरी

करत बरजोरी जोरी
हो श्याम मोसे
मोसे ना खेलो होरी
छीन झपट मोरे हाथ से गागर
हाँ आ आ आ आ आ आ
छीन झपट मोरे हाथ से गागर
तोड़ के बैयाँ मरोड़ी
हाँ हाँ हाँ हाँ बैयाँ मरोड़ी
दिल धडकत है सांस चढत है
दिल धडकत है सांस चढत है
देख कांपत गोरी गोरी
हाँ हाँ हाँ हाँ देख कांपत गोरी गोरी
ओ श्याम मोसे ना खेलो होरी
हो श्याम मोसे ना खेलो होरी
मोसे ना खेलो होरी रे श्याम
मोसे ना खेलो होरी श्याम
मोसे ना खेलो होरी श्याम
मोसे खेलो ना श्याम
मोसे खेलो ना श्याम
मोसे ना खेलो
मोसे ना खेलो
मोसे ना खेलो होरी
ना खेलो होरी
.....................................................................................
Paa lagoon kar jori-Aapki sewa mein 1947

Artist:

Lata Mangeshkar's first playback song

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Jul 6, 2019

मैं तेरी तू मेरा-आपकी सेवा में १९४७

पाठकों आपकी सेवा में पेश है सन १९४७ की एक फिल्म
आपकी सेवा में से एक गीत. फिल्म में ७-८ गीत हैं मगर
ये फिल्म लता मंगेशकर के प्रथम फ़िल्मी गीत के लिए ही
जानती है.

फिल्म में कुछ कर्णप्रिय गीत हैं उनमे से एक सुनते हैं आज.
ये मोहनतारा तलपड़े और रफ़ी का गाया युगल गीत है जिसे
लिखा है महिपाल ने. संगीत दत्ता दावजेकर का है.





गीत के बोल:

हा हा हा हा हो हो हो हो
मैं तेरी तू मेरा
मैं तेरी तू मेरा
दोनों का संग संग हो बसेरा
मैं तेरी तू मेरा
मैं तेरी तू मेरा
दोनों का संग संग हो बसेरा

छोड़ के मुझको ओ किधर चले
ओ किधर चले
बिछड़े दूर हुए
बिछड़े दूर हुए
मैं तेरी तू मेरा
मैं तेरी तू मेरा
दोनों का संग संग हो बसेरा

आओ आओ झूलते चलें किनारे
आओ आओ झूलते चलें किनारे
पानी में हों महल हमारे
पानी में हों महल हमारे
लहर लहर में डोल डोल कर
नाचे पवन चकोरा
लहर लहर में डोल डोल कर
नाचे पवन चकोरा

मैं तेरी तू मेरा
मैं तेरी तू मेरा
दोनों का संग संग हो बसेरा

मन की रानी मन पे छाओ
मन की रानी मन पे छाओ
प्रेम हिलोरी लाओ
प्रेम हिलोरी लाओ
घिर घिर काले बादल आये
आओ मैंने हाथ बढ़ाये
घिर घिर काले बादल आये
आओ मैंने हाथ बढ़ाये
सजन डाल दें आज यहाँ
मीठे सपनों का घेरा
सजन डाल दें आज यहाँ
मीठे सपनों का घेरा

मैं तेरी तू मेरा
मैं तेरी तू मेरा
दोनों का संग संग हो बसेरा
..................................................................
Main teri too mera-Aapki sewa mein 1947

Artists:

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Apr 29, 2018

दिल के अरमान निकालूँ-ऐलान १९४७

दिल के अरमान हिट्स के अंतर्गत एक गीत सुनते हैं १९४७ की
फिल्म ऐलान से. इस फिल्म से हम आपको एक गीत सुनवा चुके
हैं. पुरनी फ़िल्में गीतों से लबालब उया करती थीं. फिल्म ऐलान
का भी कुछ ऐसा ही हाल है..

जिया सरहदी के गीत को गाया है जोहराबाई अंबालेवाली ने. गीत
की तर्ज़ नौशाद की है.




गीत के बोल:

दिल के अरमान निकालूँ मैं आ जा
दिल के अरमान निकालूँ मैं आ जा
आ जा आ जा मेरा दिल लुभा जा
दिल के अरमान निकालूँ मैं आ जा

मैं जवान तू जवान दिल जवान है
मैं जवान तू जवान दिल जवान है
हाथ में जामे उम्रे रवां है
हाथ में जामे उम्रे रवां है
पी के मस्ती भरी अंखियों से
पी के मस्ती भरी अंखियों से
नगमा-ए-जिंदगानी सुना जा
आ जा आ जा मेरा दिल लुभा जा
दिल के अरमान निकालूँ मैं आ जा

क्या खबर थी मुश्किल है रास्ता
मुश्किल है रास्ता
इश्क होता नहीं इतना सस्ता
हाँ  इश्क होता नहीं इतना सस्ता

हो गयीं अब तो जेबें भी खाली
हो गयीं अब तो जेबें भी खाली
रह गयी है फकत एक गाली
रह गयी है फकत एक गाली
गाली दूँगी हठीले अब आ जा
गाली दूँगी हठीले अब आ जा
ओ रसीले छबीले अब आ जा
इश्क वालों के दिल गुदगुदा जा
इश्क वालों के दिल गुदगुदा जा
दिल के अरमान निकालूँ मैं आ जा

आ जा आ जा मेरा दिल लुभा जा
दिल के अरमान निकालूँ मैं आ जा
………………………………………………..
Dil ke armaan nikaloon-Elaan 1947

Artist:

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Apr 6, 2018

आईने में एक चाँद सी सूरत-ऐलान १९४७

सन १९४७ की फिल्म ऐलान से एक गीत सुनते हैं. ये आज आपको
विंटेज युग से दूसरा गीत सुनवा रहे हैं. उम्मीद के मुताबिक़ पाठक
संख्या आज सबसे कम होगी. नए छोरों को ये भाते नहीं और सयाने
पाठक यहाँ आते नहीं. उन्हें विंटेज युग का संगीत अंग्रेजी आलेखों
और बोलों में जल्दी समझ आता है.

खैर, वो सब तो चलता ही रहेगा, संसार है. कहा है-तुलसी इस संसार
में भाँति भाँति के लोग. गीत सुनते हैं जिसे सुरेन्द्र और अमीरबाई ने
गाया है. ज़िया सरहदी के बोल हैं और नौशाद का संगीत.




आईने में एक चाँद सी सूरत नज़र आई
आईने में एक चाँद सी सूरत नज़र आई
सौ बार हुई जिसपे फ़िदा सारी ख़ुदाई
हो ओ ओ सूरत नज़र आई
हाँ आ आ सौ बार हुई जिसपे फ़िदा सारी ख़ुदाई
हो सूरत नज़र आई

आँखों में तमन्नाओ का आबाद ज़माना
हर बात कुछ ऐसी के मोहब्बत का फ़साना
आँखों में तमन्नाओ का आबाद ज़माना
हर बात कुछ ऐसी के मोहब्बत का फ़साना
फूलों ने नज़ाक़त तेरे रुख़सार से पाई
हो ओ ओ सूरत नज़र आई
आईने में एक चाँद सी सूरत नज़र आई

ढलका हुआ आँचल हो क़यामत की अदायें
देता है मेरा दिल तुझे रह-रह के दुआयें
ढलका हुआ आँचल हो क़यामत की अदायें
देता है मेरा दिल तुझे रह रह के दुआयें
आ आ आ हुस्न सलामत रहे आबाद रहे तू
हाय हाय हुस्न सलामत रहे आबाद रहे तू
तू है तो तेरे दम से है आबाद ख़ुदाई
तू है तो तेरे दम से है आबाद ख़ुदाई
हो ओ ओ सूरत नज़र आई
आईने में एक चाँद सी सूरत नज़र आई
………………………………………………………..
Aaine mein ek chand si soorat-Elaan 1947

Artists: Munawwar Sultana, Shahnawaz

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Dec 11, 2017

यहाँ बदला वफ़ा का बेवफ़ाई-जुगनू १९४७

जुगनू सन १९४७ में रिलीज़ हुई फिल्म है. इस वर्ष हमारा देश
अंग्रेजों की गुलामी से आज़ाद हुआ था.

ये एक दुर्लभ युगल गीत है. दुर्लभ इस वजह से कि रफ़ी और
नूरजहाँ का गाया युगल गीत है. पार्टीशन के बाद नूरजहाँ पडोसी
देश में चली गयीं और उसके बाद नूरजहाँ की आवाज़ में गाने
गवाने का देसी संगीत निर्देशकों का ख्वाब अधूरा रह गया.

प्रस्तुत गीत के बोल हैं तनवीर नकवी के और संगीत तैयार किया
है फ़िरोज़ निज़ामी ने. इस गीत को दिलीप कुमार और नूरजहाँ पर
फिल्माया गया है.



गीत के बोल:

यहाँ बदला वफ़ा का बेवफ़ाई के सिवा क्या है
मोहब्बत कर के भी देखा मोहब्बत में भी धोखा है

कभी सुख है कभी दुख है अभी क्या था अभी क्या है
यूँ ही दुनिया बदलती है इसी का नाम दुनिया है
कभी सुख है कभी दुख है अभी क्या था अभी क्या है
तड़पने भी नहीं देती हमें मजबूरियाँ अपनी

मोहब्बत करने वालों का तड़पना किसने देखा है
यहाँ बदला वफ़ा का बेवफ़ाई के सिवा क्या है

यूँ ही दुनिया बदलती है इसी का नाम दुनिया है
कभी सुख है कभी दुख है अभी क्या था उभी क्या है
मोहब्बत कर के भी देखा मोहब्बत में भी धोखा है

भुला दो वो ज़माना जब मुझे अपना बनाया था
भुला दो मुँह में उल्फ़त जब तुम्हारे लब पे आया था
भुला दो वो कसम जो दिलाई थी कभी तुमने
भुला दो वो कसम जो कि खाई थी कभी तुमने
भुला दो दिल से तुम गुज़रे हुए रँगीन ज़माने को
भुला दो हाँ भुला दो इश्क़ के सज़ा फ़साने को
तमन्नाओं की बस्ती में अंधेरा ही अंधेरा है
किसे अपना कहूँ कोई जो अपना था पराया है
यूँ ही दुनिया बदलती है इसी का नाम दुनिया है
कभी सुख है कभी दुख है अभी क्या था अभी क्या है
मोहब्बत करने वालों का तड़पना किसने देखा है
यहाँ बदला वफ़ा का बेवफ़ाई के सिवा क्या है
…………………………………………………………..
Yahan badla wafa ka-Jugnu 1947

Artists: Dilip Kumar, Noorjahan

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Jun 2, 2017

अफसाना लिख रही हूँ-दर्द १९४७

सन १९४७ की फिल्म दर्द का सबसे लोकप्रिय गीत सुनते हैं. ये
गीत उमा देवी उर्फ टुनटुन ने गाया है. उमा देवी के गाये गीतों
में सबसे लोकप्रिय भी यही है. इनका पूरा नाम है उमा देवी खत्री.

उमा देवी के गायन शैली उस समय की गायिकाओं जैसी ही है.
५० के दशक के बाद फिल्मों में उनके गीत नहीं सुनाई दिए. ये
वो समय था जब सभी पुरानी गायिकाओं की आवाजें एक एक कर
के गुम होना शुरू हुईं. लता मंगेशकर और आशा भोंसले के
आगमन के बाद पुरानी गायिकाओं को अवसर कम ही प्राप्त हुए.
केवल शमशाद बेगम ने अपनी उपस्थिति बनाये रखी कुछ समय
तक.



गीत के बोल:

अफ़साना लिख रही हूँ दिल-ए-बेक़रार का
आँखोँ में रंग भर के तेरे इंतज़ार का
अफ़साना लिख रही हूँ

जब तू नहीं तो कुछ भी नहीं है बहार में
जी चाहता है मुंह भी न देखूँ बहार का
आँखोँ में रंग भर के तेरे इंतज़ार का
अफ़साना लिख रही हूँ

हासिल हैं यूँ तो मुझको ज़माने की दौलतें
लेकिन नसीब लाई हूँ इक सोग़वार का
आँखोँ में रंग भर के तेरे इंतज़ार का
अफ़साना लिख रही हूँ

आजा कि अब तो आँख में आँसू भी आ गये
साग़र छलक उठा मेरे सब्र-ओ-क़रार का
आँखोँ में रंग भर के तेरे इंतज़ार का
अफ़साना लिख रही हूँ
………………………………………………………………………..
Afsana likh rahi hoon-Dard 1947

Artist: Munawwar Sultana

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Feb 23, 2017

पापी पपीहा रे-परवाना १९४७

आज सुनते हैं ‘नन्ही सी जान’ सीरीज़ से अगला गीत. इसे
आप पपीहा हिट भी कह सकते हैं. गीत फिल्माया गया है
सुरैया ने जिन्होंने इसे परदे पर और परदे के पीछे दोनों ही
जगह गया है. इसे आप कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना हिट
भी कह सकते हैं. नायिका भेड़ों की तरफ देखते देखते पपीहा
शब्द बोल रही है. नायिका के अत्यधिक मुस्कुराने की वजह
हो सकती है ये. हो सकता है पपीहा बड़े परदे पर साफ़ दिखाई
देता हो और हमें ना दिखाई दे रहा हो.

पपीहा सिम्बलिक भी हो सकता है. एक जनाब बांसुरी बजा
रहे हैं गीत में, हो सकता है उनके लिए ये शब्द इस्तेमाल
किया गया हो. ‘बैरी हिट’ मैंने इसलिए नहीं कहा क्यूंकि मुझे
साउथ अफ्रीका के मशहूर क्रिकेटर बैरी रिचर्ड्स याद आ जाते
हैं जब भी ये शब्द सुनता हूँ.

गनीमत है गीत में नायिका ने पपीता नहीं खाया वरना इसे
जनता पपीता हिट कह डालती. क्या करें भाई, हमें श्रेणी बनाने
वालों ने मजबूर कर दिया है और गूगल भाई साहब भी कुछ
इनोवेटिव मसलों पर जल्दी गौर फ़रमाया करते हैं. सर्च पर
से एक दिन हमारा ब्लॉग हिमालय की छोटी चढ जाता है तो
दूसरे ही दिन ऐसे उतरता है जैसे कोई आर्ट फिल्म फटीचर
सिनेमा हॉल से २-३ दिन में गुम हो के लावारिस हो जाती है.

गीत सुनते हैं जिसे दीनानाथ मधोक ने लिखा है और इसकी
धुन बनाई है खुर्शीद अनवर ने.




गीत के बोल:

पापी पपीहा रे पी पी न बोल
बैरी पी पी न बोल
नन्ही सी जान मेरी सुन के न जाये डोल
पी पी न बोल बैरी पी पी न बोल
पापी पपीहा रे पी पी न बोल
बैरी पी पी न बोल

उन को ये घमण्ड है
मैं दो नैना मारी रे
मोहे मान इस बात पर के
मैं साजन की प्यारी रे
भेद हमारे जी के पिया पास नही खोल
पी पी न बोल बैरी पी पी न बोल
पापी पपीहा रे पी पी न बोल
बैरी पी पी न बोल
………………………………………………………..
Papi papeeha re-Parwana 1947

Artists: Suraiya

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Jan 7, 2017

कागज़ की मेरी नाव-दो दिल १९४७

पानी केरा बुलबुला अस मानुस की जात. गूढ़ अर्थ वाले शब्द
हैं. कुछ गीत हमें इसका आभास करवाते हैं. आज सुनते हैं
फिल्म दो दिल से एक और गीत मुकेश और सुरैया का गाया
हुआ.

पंडित गोविन्दराम के संगीत निर्देशन में ये गीत बना था जिसे
दीनानाथ मधोक ने लिखा है. रेयर कोम्बिनेशन है मुकेश और
सुरैया का. हम लोग कुछ खास गायकों के युगल गीत सुनने के
आदि हो चुके हैं और अमर ध्यान दुसरे गायकों वाले युगल
गीतों की तरफ नहीं जा पाता है. मुकेश ने उस समय की काफी
सारी गायकों के साथ युगल गीत गाये हैं जिनमें शमशाद और
गीत दत्त प्रमुख हैं. लाता के साथ गाये युगल गीत तो खैर
बहुत से हैं मुकेश के.




गीत के बोल:

कागज़ की मेरी नाव
कागज़ की मेरी नाव और दूर किनारा है
कागज़ की मेरी नाव और दूर किनारा है
इस डोलती नैया का
इस डोलती नैया का अब कौन सहारा है
कागज़ की मेरी नाव और दूर किनारा है
कागज़ की मेरी नाव

आँसू भी छलकते हैं और ग़म की घटायें हैं
आँसू भी छलकते हैं और ग़म की घटायें हैं
आवो मेरी आँखों में
आवो मेरी आँखों में सावन का नज़ारा है
इस डोलती नैया का
इस डोलती नैया का अब कौन सहारा है

कागज़ की मेरी नाव और दूर किनारा है
कागज़ की मेरी नाव

हमने तेरी आँखों में एक दुनिया बसाई थी
हमने तेरी आँखों में एक दुनिया बसाई थी
जब तुम ही फिरे हमसे फिर कौन हमारा है
इस डोलती नैया का अब कौन सहारा है

कागज़ की मेरी नाव और दूर किनारा है
कागज़ की मेरी नाव
…………………………………………………
Kagaz ki meri naav-Do dil 1947

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Dec 29, 2016

झुमका गिरा रे बरेली के बाज़ार में-देखो जी १९४७

जूने पुराने गीतों की श्रृंखला में आज प्रस्तुत है फिल्म देखो जी
से एक गीत. गौरतलब है सन १९६६ की फिल्म मेरा साया में
नायिका का झुमका बरेली के बाजार में गिर जाता है. उससे पहले
भी झुमके बरेली के बाजार में गिरते रहे हैं. प्रस्तुत गीत झुमके
वाला है, ये भी मेरा साया के गीत जितना ही रोचक है.

पुराने गीत सुनवाना ज़रूरी है क्यूंकि हमारे संगीत के खजाने के
अनमोल रत्न तो यही हैं. इन्हें सुन सुन के ना जाने कितने लोग
तर गए. इसके अलावा अगर आप जूने पुराने गीत नहीं सुनते हैं
तो नेट की दुनिया में आपको महारथी नहीं समझा जाता. आप
सुन भले ही लें इन्हें मगर सुनने का दिखावा करना ज्यादा ज़रूरी
है.

फिल्म देखो जी का निर्देशन इस गीत के लेखक वली साहब ने
ही किया था. फिल्म की प्रमुख कलाकार हैं मुमताज़ शांति. उसके
अलावा जो नाम हैं शायद ही आपने कभी सुने होंगे. गीत में प्रमुख
आवाज़ जो क्रिस्टल क्लीयर है वो है शमशाद बेगम की, साथ में
डा डा डा डा डा करने वाला कोरस भी है. गीत की धुन बनाई है
तुफैल  फारूकी ने.




गीत के बोल:

झुमका गिरा रे
झुमका गिरा रे
हाय झुमका गिरा रे

झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में
ओ सैयां
झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में
झुमका गिरा रे
मोरा झुमका गिरा रे
झुमका गिरा रे
झुमका गिरा रे

सास मेरी रोये ननद मेरी रोये
सास मेरी रोये ननद मेरी रोये
सैयां रोये रे
सैयां रोये रे गले में बैयाँ डाल के

हाय झुमका गिरा रे
मोरा झुमका गिरा रे
झुमका गिरा रे
झुमका गिरा रे

जेठ मेरा ढूंढें जेठानी मेरी ढूंढें
सैयां ढूंढें रे
सैयां ढूंढें रे नैनों में नैना डाल के

हाय झुमका गिरा रे
मोरा झुमका गिरा रे
झुमका गिरा रे
झुमका गिरा रे
झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में
हाय झुमका गिरा रे
मोरा झुमका गिरा रे
झुमका गिरा रे
झुमका गिरा रे

भैया मेरा गावे बहना मेरी गावे
भैया मेरा गावे बहना मेरी गावे
सैयां गाये रे
सैयां गाये रे गले में बाजा डाल के
सैयां गाये रे गले में बाजा डाल के

हाय झुमका गिरा रे
मोरा झुमका गिरा रे
झुमका गिरा रे
झुमका गिरा रे
.............................................................................
Jhumka gira re-Dekho ji 1947

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Sep 25, 2016

फिर नैन बाँवरे भर भर आये-दो दिल १९४७

गायिका सुरैया का पूरा नाम है सुरैया जमाल शेख. सन १९२९ में
गुजरावालां में जन्मी सुरैया का गायन कैरियर सन १९४२ से शुरू
हुआ जब उन्होंने महताब नामक एक्ट्रेस के लिए पार्श्व गायन किया.
बाल कलाकार के रूप में काम करते हुए उन्होंने अपने गाने भी गाये.
संगीत की शिक्षा उन्हें बाल्य काल में ही मिलना शुरू हो गयी थी.
डांस उन्होंने सीखा मुमताज़ अली से जो मशहूर कॉमेडियन महमूद
के पिता हैं.

सन १९३७ की फिल्म उसने क्या सोचा से बतौर बाल कलाकार उनके
एक्टिंग कैरियर का आगाज़ हुआ. अपने समय की सबसे मशहूर
गायिका-नायिका के बारे में चर्चा करेंगे आगे, फिलहाल एक गीत सुनें
फिल्म दो दिल से दीनानाथ मधोक का लिखा हुआ जिसे गोविन्दराम
ने संगीत से संवारा.

गीत में दो शब्द हैं-सोना, रूपा. इन शब्दों वाला एक गीत है देव आनंद
की एक फिल्म जोशीला में आशा भोंसले का गाया हुआ. गीत इन्हीं शब्दों
से शुरू होता है.



गीत के बोल:

फिर नैन बाँवरे भर भर आये
हाय भर भर आये
फिर नैन बाँवरे भर भर आये
आहों की ओट में निकले
मेरे दिल से हाय हाय
आहों की ओट में निकले
मेरे दिल से हाय हाय
फिर नैन बाँवरे भर भर आये
हाय भर भर आये
फिर नैन बाँवरे भर भर आये

एक तो सूनी सेज हमारी दूजे रैन अँधेरी
रैन अँधेरी
एक तो सूनी सेज हमारी दूजे रैन अँधेरी
रैन अँधेरी
तीजे पहरे पे दुनिया है पेच  न जाये मेरी
तीजे पहरे पे दुनिया है पेच  न जाये मेरी
जब याद तुम्हारी आये
जब याद तुम्हारी आये
मेरा नन्हा सा जियरा धड़क जाये

फिर नैन बाँवरे भर भर आये
हाय भर भर आये
फिर नैन बाँवरे भर भर आये

रूपा न माँगू सोना न माँगू
रूपा न माँगू सोना न माँगू
माँगूँ तोसे ये दाम हो
माँगूँ तोसे ये दाम
हाड़ मास का पिंजरा जाये
साँस आये न आये
मेरे लब पे रहे पिया का नाम
वो प्यार करे हम दोनों
वो प्यार करे हम दोनों
जिस प्यार के किस्से जग गाये

फिर नैन बाँवरे भर भर आये
हाय भर भर आये
फिर नैन बाँवरे भर भर आये
………………………………………………………………………
Phir nain bawre bhar bhar-Do dil 1947

Artist: Suraiya

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Jul 29, 2016

जब तुम ही नहीं अपने-परवाना १९४७

सुरैया का गाया हुआ एक मधुर गीत सुनते हैं फिल्म परवाना से.
ये सन १९४७ की फिल्म है जिस साल हमारे देश को आजादी
मिली थी.

खुर्शीद अनवर आजादी के बाद पाकिस्तान चले गए और वहाँ
की फिल्मों में संगीत देने लगे. विभाजन के पूर्व वे बॉलीवुड
की फिल्मों में संगीत दिया करते थे, तब फिल्म उद्योग भी एक
ही था. वे काफी प्रतिभाशाली संगीतकार थे. उन्होंने भी सभी
गायकों के लिए उल्लेखनीय धुनें बनायीं.

प्रस्तुत गीत डी एन मधोक ने लिखा था. फिल्म परवाना का
निर्देशन जे के नंदा ने किया था. जीत प्रोडक्शंस नाम संस्था ने
इसका निर्माण किया. इस फिल्म में सहगल और सुरैया प्रमुख
कलाकार हैं.





गीत के बोल:

जब तुम ही नहीं अपने
दुनिया ही बेगानी है
जब तुम ही नहीं अपने
दुनिया ही बेगानी है
उल्फ़त जिसे कहते हैं
इक झूठी कहानी है
उल्फ़त जिसे कहते हैं
इक झूठी कहानी है

जाते हुए क्यों तुमको
इस दिल का खयाल आता
जाते हुए क्यों तुमको
इस दिल का खयाल आता
तड़पा के चले जाना
इक रीत पुरानी है
तड़पा के चले जाना
इक रीत पुरानी है

जब तुम ही नहीं अपने
दुनिया ही बेगानी है

परवाने के जलने पे
हँसना न तमाशाई
परवाने के जलने पे
हँसना न तमाशाई
हँसती हुई शमा भी
इक रात की रानी है
हँसती हुई शमा भी
इक रात की रानी है

जब तुम ही नहीं अपने
दुनिया ही बेगानी है
.................................................................
Jab tumhin nahin apne-Parwana 1947


Artist: Suraiya

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Jun 2, 2016

हम दर्द का अफ़साना-दर्द १९४७

बिना विवरण सीरीज़ के तहत आज एक गीत सुनवा रहे हैं.

फिल्म: दर्द
वर्ष: १९४७
गायिका:शमशाद बेगम
बोल:शकील बदायूनी
संगीत: नौशाद
फिल्म निर्देशक-ए. आर. कारदार



गीत के बोल:

हम दर्द का अफ़साना दुनिया को सुना देंगे
हर दिल में मुहब्बत की इक आग लगा देंगे

हो जायेगी फिर दुनिया आबाद यतीमों की
गूंजेगी ज़माने में फ़रियाद यतीमों की
रोते हुए नगमों से तूफ़ां उठा देंगे
हर दिल में मुहब्बत की इक आग लगा देंगे

सरकार-ए-दो आलम की उम्मत पे सितम क्यों हो
अल्लाह के बन्दों को मझदार का ग़म क्यों हो
इस्लाम की कश्ती को हम पार लगा देंगे
हर दिल में मुहब्बत की इक आग लगा देंगे

एहसान यतीमों की तक़दीर पे कर डालो
फ़रियाद है दिलवालों, फ़रियाद है दिलवालों
हम पर भी करम करना, हम तुम को दुआ देंगे
हर दिल में मुहब्बत की इक आग लगा देंगे

हम दर्द का अफ़साना दुनिया को सुना देंगे
हर दिल में मुहब्बत की इक आग लगा देंगे
…………………………………………………………………
Ham dard ka afsana-Dard 1947

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Aug 10, 2015

दिल धड़के आँख मोरी फड़के-दर्द १९४७

सुनते हैं सन १९४७ से एक गीत फिल्म दर्द का. दिल धड़काने
वाला और आँख फड़काने वाला ये गीत लिखा है शकील बदायूनीं
ने और इसका संगीत तैयार किया नौशाद ने. सुरैया की सुरीली
आवाज़ है.

वियोग या बिछडना स्वतः संयोगवश भी हो सकता है और जबरन
भी. जबरन की बिछडन को “छोड़ के जाना “ भी कहा जाता है.
दिल धड़कता है या तो घबराहट के मारे या किसी संकट की
आशंका से. यही हाल आँख फडकने का भी है, अक्सर ऐसे होने
से किसी संभावित अप्रियता की आशंका जताई जाती है.

दर्द सन १९४७ की फिल्म है और इसका निर्देशन कारदार ने किया
है. कारदार एक चर्चित निर्देशक थे फिल्म जगत के. उनकी सभी
फिल्मों का संगीत बेहतर हुआ करता था. फिल्म में सुरैया के
गाये गीत भी हैं मगर उमा देवी का गाया गीत “अफसाना लिख रही
हूँ” सबसे ज्यादा पोपुलर हुआ और इतना हुआ कि सर्वाधिक लोकप्रिय
गीतों में शामिल हो गया. ऐसे उदाहरण आपको आगे भी बतलायेंगे
जब मुख्य धारा के गायकों को पीछे छोड़ कर अनजान गायक का
गीत प्रसिद्ध हुआ. फिल्म में श्याम और मुनव्वर सुल्ताना की प्रमुख
भूमिकाएं हैं.



गीत के बोल:

दिल धड़के आँख मोरी फड़के
चले जाना न देखो जी बिछड़ के

कहीं बीते न दुःख में जवानी
कहीं सुन ले न दुनियाँ कहानी
कहीं बन जाऊँ मैं न दीवानी

कहीं ठहरे न उल्फ़त का धारा
कहीं पा ले न कोई इशारा
कहीं टूटे न दिल क सहारा

कहीं जाना न कर के बहाना
न बने दो दिलों का फ़साना
देखो नाज़ुक बहुत है ज़माना

दिल धड़के आँख मोरी फड़के
चले जाना न देखो जी बिछड़ के

………………………………………………..
Dil Dhadke Aankh Mori-Dard 1947

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Jun 19, 2015

आज मची है धूम-दर्द १९४७

गीतकार शकील बदायूनी के साथ संगीतकार नौशाद की ट्यूनिंग
बहुत पहले से जम गयी थी. बानगी है फिल्म दर्द का गीत. दर्द
फिल्म के गीत भी बहुत बजे थे फिल्म रिलीज़ के आस पास.
आज भी इक्का दुक्का गीत सुनाई दे जाते हैं फिल्म के. नौशाद
का संगीत अपने समय में बहुत लोकप्रिय रहा और आज भी उनकी
बनायीं हुई कई धुनें जनता चाव से सुनती है.

प्रस्तुत गीत उमा देवी की आवाज़ में है जिन्हें आम जनता टुनटुन के
नाम से पहचानती है. उमा देवी की आवाज़ भी दमदार है मगर उन्हें
अधिक अवसर नहीं प्राप्त हुए गायकी के. उनके जीवन की दूसरी
पारी हास्य अभिनय में गुजरी.

फिल्म दर्द का निर्देशन उस ज़माने के चर्चित निर्देशक कारदार ने किया
था.




गीत के बोल:

आज मची है धूम
झूम ख़ुशी में झूम
शौक़ भरा दिल नाचे गाये
तू क्यूं हो महरूम
झूम ख़ुशी में झूम

दिल ने किया है, दिल को इशारा
चलेंगे दोनों संग
कोई न समझे, कोई न जाने
इस दुनिया का रंग
दिल का फ़साना
या मैं जानूँ, या उनको मालूम
झूम ख़ुशी में झूम

आँखों ने इक राज़ बताया
दिल ने कही एक बात
जगमग जगमग रहें जहां में
काश यही दिन रात
सोई हुई उम्मीदें जागीं
दिल का दामन चूम
झूम ख़ुशी में झूम
....................................................
Aaj machi hai dhoom-Dard 1947

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