Dec 12, 2019

कभी आगे कभी पीछे-साधु और शैतान १९६८

कॉमेडी का नाम केवल ‘हा हा हा’, ‘ही ही ही’, ‘हे हे हे’
है या ‘खी खी खी’ भी है. किसी ने पूछा तो हमने कहीं
पर ‘हो हो हो’ भी सुना था, जोड़ दिया. प्रश्न अजीब था
क्यूंकि ऐसी आवाजें कॉमेडी के बाद होने वाली प्रतिक्रिया
के फलस्वरूप आतीं हैं. कॉमेडी का स्वयं का हिस्सा तो
ये सब कभी कभार ही होती हैं.

कॉमेडी कलाकार कुछ कर रहे है इसलिए हंसना ज़रूरी
है, ऐसी मिथ्या धारणा बनी हुई है. हँसाना आसान काम
नहीं है. कॉमेडी और बोरियत का अनुपात ८०:२० का हो
तो चल जाता है, इसके उलट हो तो दिक्कत होती है.
टी वी पर विभिन्न प्रकार के कॉमेडी शोज़ में अट्टाहास
लगा के हँसने वाले बैठाये जाते हैं. जब जनता के कुछ
समझ नहीं आता कि हँसे या रोये तो वो इन्हें देख के
हंस लेती है.

सुनते हैं राजेंद्र कृष्ण का लिखा और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
द्वारा संगीतबद्ध गीत जिसे रफ़ी ने गाया है. इसे इंगरेजी
ब्लॉग पर जनता टैक्सी हिट सॉंग कह कर बुलाती है.





गीत के बोल:

कभी आगे कभी पीछे कभी ऊपर कभी नीचे
कभी दायें मुड़ जाये कभी बाएं मुड़ जाये
जाने कहाँ कहाँ मुझे ले के चली

ओ जाने कहाँ कहाँ मुझे ले के चली
मेरी लैला मेरी लैला
कभी आगे कभी पीछे कभी ऊपर कभी नीचे
कभी दायें मुड़ जाये कभी बाएं मुड़ जाये
जाने कहाँ कहाँ मुझे ले के चली
मेरी लैला मेरी लैला
कभी आगे कभी पीछे कभी ऊपर कभी नीचे
कभी दायें मुड़ जाये कभी बाएं मुड़ जाये

लैला नाम की टैक्सी को मिलते ग्राहक बेढंगे
जेब में न हो फूटी कौड़ी कंगले भूखे नंगे
लेकिन आज मिली किस्मत से ऐसी मस्त सवारी
सवारी जिस पर मीटर इंजन एक्सीलेटर ब्रेकें वारी

कभी आगे कभी पीछे कभी ऊपर कभी नीचे
कभी दायें मुड़ जाये कभी बाएं मुड़ जाये
जाने कहाँ कहाँ मुझे ले के चली
मेरी लैला मेरी लैला
कभी आगे कभी पीछे कभी ऊपर कभी नीचे
कभी दायें मुड़ जाये कभी बाएं मुड़ जाये

पानी और पेट्रोल बराबर फिर क्यों रुक गयी लैला
समझा सौतन क्यों बैठी इस कारन जी है मैला
शक की जात बड़ी औरत की
कौन इसे समझाये समझाये
घोड़ा घास से प्यार करे तो बोलो क्या खाये
कभी आगे कभी पीछे कभी ऊपर कभी नीचे
कभी दायें मुड़ जाये कभी बाएं मुड़ जाये
जाने कहाँ कहाँ मुझे ले के चली
मेरी लैला मेरी लैला
कभी आगे कभी पीछे कभी ऊपर कभी नीचे
कभी दायें मुड़ जाये कभी बाएं मुड़ जाये
जाने कहाँ कहाँ मुझे ले के चली
मेरी लैला मेरी लैला
कभी आगे कभी पीछे कभी ऊपर कभी नीचे
कभी दायें मुड़ जाये कभी बाएं मुड़ जाये
…………………………………………..
Kabhi aage kabhi peechhe-Sadhu aur shaitan 1968

Artists: Mehmood, Bharti, 2 kids

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