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Jul 29, 2020

किसी का दिल जो तोडेगा-क़त्ल १९८६

आज बॉलीवुड की जिन हस्तियों का जन्मदिन है उनमें से
एक हैं अनूप जलोटा. प्रसिद्ध गायक अनूप जलोटा ने फिल्मों
के लिए भी कुछ गीत गाये हैं.

सन १९८६ की संजीव कुमार अभिनीत फिल्म में एक गाना
उनका गाया हुआ है जिसे फिल्माया गया है अशोक कुमार
पर.

राजेंद्र कृष्ण का गीत है और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का संगीत.

फिल्म का निर्देशन आर के नैयर ने किया है और शायद इसी
वजह से फिल्म के गीत राजेंद्र कृष्ण के हैं. एक गीत शायद
आनंद बक्षी का है इसमें.



गीत के बोल:

किसी का दिल जो तोडेगा
खुदा क्या उसको छोडेगा
.
.
.
.
.............................................................
Kisi ka dil jo todega-Qatl 1986

Artist: Ashok Kumar

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Jul 15, 2020

बेदर्द ज़माने क्या तेरी-लाहौर १९४९

विंटेज युग की तरफ एक बार चलते हैं और एक गाना सुनते
हैं फिल्म लाहौर से. राजेंद्र कृष्ण की रचना है और इस गीत
की धुन श्याम सुन्दर ने तैयार की. आज के हिसाब से लगाएं
तो इस फिल्म को रिलीज़ हुए ७१ साल बीत गए.

करण दीवान, नर्गिस और कुलदीप कौर अभिनीत इस फिल्म
का निर्देशन एम एल आनंद ने किया था और निर्माण अभिनेता
करण दीवान के भाई ने किया. एम् एल आनंद ने सन १९५२
की फिल्म बेवफा का निर्देशन भी किया था. इसमें भी अभिनेत्री
नर्गिस मौजूद हैं.

कल हमने गानों के मीटर पर बात की थी. प्रस्तुत गाने का
मीटर भी कभी एमीटर तो कभी वोल्टमीटर हो जाता है. बाकी
समय ये फ्रीक्वेंसी मीटर की तरह चलता रहता है.

संगीतकार श्याम सुन्दर इसी दिन एक फिल्म के गीत की
रिकॉर्डिंग करते करते स्टूडियो में चल बसे थे. बॉलीवुड की कई
प्रतिभाओं को सुरा-प्रेम ने छीन लिया. संगीतकार श्याम सुन्दर
भी उन्हीं में से एक थे





गीत के बोल:

उस दिल की क़िस्मत क्या कहिये
उस दिल की क़िस्मत क्या कहिये
जिस दिल का सहारा कोई नहीं

बेदर्द ज़माने क्या तेरी
बेदर्द ज़माने क्या तेरी महफ़िल में हमारा कोई नहीं
बेदर्द ज़माने क्या तेरी महफ़िल में हमारा कोई नहीं
बेदर्द ज़माने

इस ग़म की रात के आँचल में वैसे तो हज़ारों तारे हैं
वैसे तो हज़ारों तारे हैं
वैसे तो हज़ारों तारे हैं
बन जाये जो आस मुसाफ़िर की
बन जाये जो आस मुसाफ़िर की ऐसा ही सितारा कोई नहीं
बेदर्द ज़माने क्या तेरी महफ़िल में हमारा कोई नहीं
बेदर्द ज़माने

उल्फ़त के चमन में ए नादां
उल्फ़त के चमन में ए नादां क्यूँ ढूँढ रहा है कलियों को
यहाँ ग़म के काँटे चुभते हैं
यहाँ ग़म के काँटे चुभते हैं फूलों का नज़ारा कोई नहीं
बेदर्द ज़माने क्या तेरी महफ़िल में हमारा कोई नहीं
बेदर्द ज़माने
…………………………………………
Bedard zamane kya teri-Lahore 1949

Artist:

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Jul 3, 2020

सुनिए ज़रा देखिये न-गीता मेरा नाम १९७४

ये साल बॉलीवुड के लिए काफी झटके देने वाला रहा है और
अभी साल के छः महीने ही बीते हैं. कोविड-१९ की वजह से
तो उद्योग में काफी मंदी हो चली थी जो अब धीरे धीरे लाईन
पर आ रहा है मगर कलाकारों के बिछड़ने का सिलसिला जारी
है.

बॉलीवुड से एक और शख्सियत ने विदा ले ली. फिल्म उद्योग
में काफी लंबे संघर्ष के बाद कामयाब और प्रसिद्ध हुईं, जुझारू
कोरियोग्राफर सरोज खान अलविदा कह गयीं.

आज एक गाना सुनते हैं और देखते हैं साधना अभिनीत फिल्म
गीता मेरा नाम से. सरोज खान की बतौर स्वतंत्र कोरियोग्राफर
ये पहली फिल्म है.

प्रस्तुत गीत अपने समय का एक बेहद लोकप्रिय गीत है. इसे
राजेंद्र कृष्ण ने लिखा है और धुन तैयार की है लक्ष्मी प्यारे ने.




गीत के बोल:

आसान है, सुनिए तो समझ
आ जायेंगे और हो सकता है
याद भी हो जाएँ.
..........................................................
Suniya zara dekhiye na-Geeta Mera Naam 1974

Artists: Sadhana, Feroz Khan

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Jun 26, 2020

धीरे से आ जा री-अलबेला १९५१

सन १९५१ की फिल्म अलबेला से लोरी गीत. लोरी केवल
छोटे बच्चों को सुलाने के काम नहीं आती बल्कि इसे सुन
के बड़े बच्चे भी सो सकते हैं.

ये लता मंगेशकर वाला वर्ज़न है. एक और वर्ज़न है जिसमें
लता के साथ संगीतकार की आवाज़ भी है.

गीत राजेंद्र कृष्ण का लिखा हुआ है..



गीत के बोल:

धीरे से आ जा री अँखियन में
निंदिया आ जा री आ जा
धीरे से आ जा
छोटे से नैनन की बगियन में
निन्दिया आ जा री आ जा
धीरे से आजा
……………………………………………………..
Dheere se aa ja ri-Albela 1951

Artists: Bhagwan, Bimla Kumari

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Jun 25, 2020

अजी रहने दो चन्दा बदली में-चौकीदार १९७४

हर जादुई असर का समय होता है. इस सृष्टि में हर चीज़
की मियाद तय है चाहे वो किसी का राजपाट हो या प्रसिद्धि.
समय ने किसी को नहीं बख्शा है इस जगत में.

आज संगीतकार मदन मोहन का जन्मदिन है. इस अवसर
पर आप सोच रहे होंगे कि मैं को लता मंगेशकर का गाना
याद करूँगा. बिलकुल नहीं जी.

मदन मोहन और लता मंगेशकर को तो सबसे ज्यादा याद
किया गया है पिछले ४०-५० सालों में. हर गाने पर आपको
कहानी उपन्यास मिल जायेंगे अतः उन सब बातों को रिपीट
करने से कोई मतलब नहीं.

आपको सुनवाऊंगा आशा भोंसले का गाया एक गाना जिसे
परदे पर खूबसूरत अभिनेत्री मधुमति पर फिल्माया गया है.
एक समय था जब जनता केवल कलाकारों के नाम से गाने
पहचानती थी. फिल्म ना चलने की सूरत में गाने भी भुला
दिए जाते थे.

आम तौर पर आशा भोंसले के गाये वे गाने जो हेलन पर
फिल्माए गए हैं जनता को जल्दी याद आते हैं. इस बात
की वजह हेलन का इस फिल्म उद्योग में हासिल किया गया
मुकाम है. उसके अलावा उनकी स्क्रीन प्रेजेंस आला दर्जे
की थी जो सबसे बड़ा कारण है दर्शकों के दिमाग पर अमिट
छाप छूटने का.

गाने पर वापस लौटते हैं. इसे लिखा है राजेन्द्र कृष्ण ने.
राजेंद्र कृष्ण के साथ मदन मोहन ने कई अविस्मरणीय गीत
बनाये हैं.



गीत के बोल:

अजी रहने दो
कल मिलते हैं
.............................................................
Aji rehne do chanda badli mein-Chowkidaar 1974

Artists: Madhumati,

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Jun 21, 2020

नमस्ते नमस्ते-पतंगा १९४९

आज गुज़रे ज़माने की अभिनेत्री निगार सुल्ताना का जन्मदिन है.
इस अवसर पर सुनते हैं श्वेत श्याम युग की फिल्म पतंगा से एक
गीत.

राजेंद्र कृष्ण का गीत है और सी रामचंद्र का संगीत. इस गीत को
चार गायकों ने गाया है-स्वयं संगीतकार, शमशाद बेगम, रफ़ी और
मोहनतारा तलपड़े.

इस गीत में श्याम और गोप के भी दर्शन हो जाते हैं. बाकी लोगों को
आप पहचानिये.




गीत के बोल:

नमस्ते नमस्ते
कल मिलते हैं जी.
..............................................................................
Namaste namaste-Patanga 1949

Artissts: Nigar Sultana, Shyam, Gope, Others

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Jun 17, 2020

सुन रसिया-नागिन १९५४

जून महीने में जन्मे लोगों में से एक हैं हेमंत कुमार. १६ जून
को बनारस की पावन नगरी में जन्मे हेमंत कुमार हिंदी और
बंगाली सिनेमा और संगीत की प्रभावशाली और बड़ी हस्तियों
में से एक हैं. वे भी ऐसी एक शख्सियत हैं जिन्होंने तकनीकी
शिक्षा छोड़ के अपने पैशन को अपनाया. ३० के दशक में ऐसा
होना किसी अचम्भे से कम नहीं है.

ऐसे कम कलाकार हैं जिन्होंने अपने ५० साल इस इंडस्ट्री में
पूरे किये हों. गायन के लिए दो राष्ट्रीय पुरस्कार उन्हें मिले.
उन्होंने दो बार पद्म पुरस्कारों के लिए मना किया, पद्मश्री
और पद्मभूषण. ये अपने देश की कुछ गिनी चुनी शख्सियतों
में से एक हैं जिन्होंने अवार्ड ठुकराया. सरकारी पुरस्कारों पे
सवालिया निशान काफी लगते रहे हैं पहले. पुरस्कार देने की
टाइमिंग भी कई बार समझ नहीं आती. कईयों को बरसों तक
झुलाया गया.

सन १९५४ की फिल्म नागिन का संगीत इतना बजा कि शायद
फिल्मफेयर वालों को भी मजबूरन ये पुरस्कार उन्हें देना पड़ा.
इसके अलावा शायद फिल्मफेयर को उनकी याद नहीं आई.

कुछ समय पहले आपने अवार्ड वापसी के नाम पर कई लोगों का
ड्रामा देखा होगा. इनमें से बहुत से ऐसे हैं जो अवार्ड के हकदार
नहीं हैं और उन्हें वाकई लौटा देना चाहिए था मगर किसी ने भी
लौटाया नहीं.

खैर ये सब छोड़ें, ये सब तो ट्विटर पर डिस्कस करने वाला
मसाला है जिसपे काफी कुछ डिस्कस किया जा चुका है.

सुनते हैं नागिन से एक मधुर गीत राजेंद्र कृष्ण का लिखा हुआ
जिसे लता मंगेशकर ने गाया है.




गीत के बोल:

सुन रसिया सुन रसिया
काहे को जलाये जिया आ जा
सुन रसिया सुन रसिया
काहे को जलाये जिया आ जा
सुन रसिया सुन रसिया
काहे को जलाये जिया आ जा

लिख लिख हारी बलम तोहे पतियाँ
तुम बिन कैसे बिताऊँ कारी रतियाँ
लिख लिख हारी बलम तोहे पतियाँ
तुम बिन कैसे बिताऊँ कारी रतियाँ
कारी कारी रतियाँ ये कारी कारी रतियाँ
ओ ओ ओ ओ ओ ओ

सुन रसिया सुन रसिया
काहे को जलाये जिया आ जा

कब सच होगा सजन मेरा सपना
पिया तुम आ के कहोगे मुझे अपना
कब सच होगा सजन मेरा सपना
पिया तुम आ के कहोगे मुझे अपना
कब तुम आ के कहोगे मुझे अपना
ओ ओ ओ ओ ओ ओ

सुन रसिया सुन रसिया
काहे को जलाये जिया आ जा
काहे को जलाये जिया आ जा
काहे को जलाये जिया आ जा
………………………………………..
Sun rasiya-Nagin 1954

Artist: Vaiyanatimala

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Jun 10, 2020

आगे आगे एक हसीना-प्रोफ़ेसर प्यारेलाल १९८१

हम बात कर रहे थे कि परदे के पीछे वाले कलाकार और
योगदानकर्ताओं के नाम प्रसिद्ध नहीं हो पाते. फिल्म बन
जाती है और उसके बाद गधेनुमा नायक नायिकाओं को भी
तथाकथित अपार लोकप्रियता मिल जाती है. जिस निर्देशक
ने उन्हें गधे से खच्चर या घोड़ा बनाया उसे कौन पूछता है.

कुछ निर्देशक और निर्माता फिल्मों से बड़े कद के हो जाते
हैं और जनता का एक हिस्सा उन्हें फिर यूँ पहचानता है-
फलाने की फिल्म है, ढिकाने की फिल्म है. जो कलाकार
निर्देशक की बात मान के चलते हैं उनसे सभी खुश रहते हैं
क्यूंकि निर्देशक के विज़न के अनुसार काम हो जाता है.

१० २० फ़िल्में कर लेने के बाद कई नायकों को निर्देशन की
खुजली होने लगती है और वे टांग अडाने का काम शुरू कर
देते हैं. सुझाव तक तो ठीक है मगर एक विधा से दूसरी विधा
में घुसने का ये प्रयत्न या तो फिल्म का कचरा कर बैठता है
या फिर नायक को निर्देशक बनने की ओर ले जाता है.

सन १९८१ की फिल्म प्रोफ़ेसर प्यारेलाल का निर्देशन बृज
सदाना ने किया था. कहा जाता है इस फिल्म को शूट करते
करते पूरे पांच साल लग गए और ९ घंटे की अजीब-ओ-गरीब
चीज़ों को एक ३ घंटे की फिल्म के ढाँचे में बिठाने के लिए
हृषिकेश मुखर्जी की मदद ली गई. उसके बाद भी फिल्म की
कहानी यूँ लगती है मानो ३-४ फिल्मों के उसल-मिसल हो.

फिल्म की दृश्यावलियाँ सुन्दर हैं और इस बात से कोई भी
इनकार नहीं कर सकता. वो समय था जब धर्मेन्द्र और इस
फिल्म की नायिका जीनत अमान के प्रशंसक बहुतेरे थे.

इस फिल्म के प्रमुख कलाकारों में से एक हैं जीवन, अपने
ज़माने के मशहूर विलन. इस फिल्म में भी वे विलन की ही
भूमिका में हैं. आज उनकी पुण्यतिथि है अतः हम आपको ये
गीत सुनवा रहे हैं.
राजेंद्र कृष्ण गीत लेखक हैं और कल्याणजी आनंदजी संगीतकार.
गीत आशा भोंसले ने गाया है.



गीत के बोल:


हे आगे आगे
अरे आगे आगे एक हसीना पीछे कुछ दीवाने
दीवाने अनजाने के सब हैं दीवाने

अरे शमा अभी तक
हे शमा अभी तक जली नहीं है आ पहुँचे परवाने
ये कैसे परवाने के सब हैं दीवाने
हे हे हे
आगे आगे एक हसीना पीछे कुछ दीवाने
दीवाने अनजाने के सब हैं दीवाने


होते हो यार क्यों बेक़रार
आने ही वाली है देखो बहार
होते हो यार क्यों बेक़रार
आने ही वाली है देखो बहार
मयखाने भी अपने पैमाने भी अपने
मस्ती भरे है ज़माने

हे हे हे
आगे आगे एक हसीना पीछे कुछ दीवाने
दीवाने अनजाने के सब हैं दीवाने

मेरे हुजूर जाना ना दूर
होने लगा है मुझे प्यार का सुरूर
मेरे हुजुर जाना न दूर
होने लगा है मुझे प्यार का सुरूर
किसी से न कहना जी चुप चुप रहना
ये दिल पर लगे क्यों निशाने

हे हे हे
आगे आगे एक हसीना पीछे कुछ दीवाने
दीवाने अनजाने के सब हैं दीवाने

ऐसा जवां रंगीन समां
घडी दो घडी का है मेहमां
ऐसा जवां रंगीन समां
घडी दो घडी का है मेहमां
गम है बिछड़ने का खेल है बिगड़ने का
बदलेंगे अब तो ठिकाने

हे हे हे
आगे आगे एक हसीना पीछे कुछ दीवाने
दीवाने अनजाने के सब हैं दीवाने
अरे शमा अभी तक जली नहीं है
आ पहुँचे परवाने
ये कैसे परवाने के सब हैं दीवाने
………………………………………..
Aage aage ek haseena-Professor Pyarelal 1981

Artists: Zeenat Aman, Jeevan, Others

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Mar 22, 2020

ये हवा ये रात ये चाँदनी-संगदिल १९५२

तलत महमूद के सर्वाधिक लोकप्रिय गीतों में से एक
है संगदिल का ये गाना जिसे परदे पर दिलीप कुमार
गा रहे हैं. फिल्म की नायिका मधुबाला हैं मगर नायक
ये गीत दूसरी अभिनेत्री के लिए क्यूँ गा रहा है ये
समझने के लिए आपको फिल्म देखना पड़ेगी.

राजेंद्र कृष्ण के बोल हैं और सज्जाद हुसैन का संगीत.
गीतकार राजेंद्र कृष्ण सबसे ज्यादा अपने उन गीतों के
लिए जाने गए जो उन्होंने सी रामचंद्र और मदन मोहन
के लिए लिखे.




गीत के बोल:

ये हवा ये रात ये चाँदनी
तेरी इक अदा पे निसार है
ये हवा ये रात ये चाँदनी
तेरी इक अदा पे निसार है
मुझे क्यूँ ना हो तेरी आरज़ू
तेरी जुस्तजू में बहार है
ये हवा ये रात ये चाँदनी

तुझे क्या खबर है ओ बेखबर
तुझे क्या खबर है ओ बेखबर
तेरी एक नज़र में है क्या असर
तुझे क्या खबर है ओ बेखबर
तेरी एक नज़र में है क्या असर
जो गज़ब में आये तो कहर है
जो हो मेहरबां वो क़रार है
मुझे क्यूँ ना हो तेरी आरज़ू
तेरी जुस्तजू में बहार है
ये हवा ये रात ये चाँदनी

तेरी बात बात हैं दिलनशीं
तेरी बात बात हैं दिलनशीं
कोई तुझसे बढ़ के नहीं हसीं
तेरी बात बात हैं दिलनशीं
कोई तुझसे बढ़ के नहीं हसीं
हैं कली कली में जो मस्तियां
तेरी आँख का ये खुमार है
मुझे क्यूँ ना हो तेरी आरज़ू
तेरी जुस्तजू मैं बहार है

ये हवा ये रात ये चाँदनी
तेरी इक अदा पे निसार है
………………………………………………..
Ye hawa ye raat ye chandni-Sangdil 1952

Artists: Dilip Kumar, Shammi

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Mar 18, 2020

ओ जी ओ जी छोडो भी दुपट्टा-चम्पाकली १९५७

ए जी ओ जी हिट्स के अंतर्गत अगला गीत सुनते
हैं सन १९५७ की फिल्म चम्पाकली से.

छेड़ छाड़ हर युग की फिल्मों में दिखलाई देती है.
इसका स्वरुप समय के साथ साथ बदलता चला.
छेड़ छाड़ और छिछोरियाई में अंतर है और इसे भी
हमने फिल्मों के माध्यम से ज्यादा समझा.

सुनते हैं राजेंद्र कृष्ण की रचना जिसका संगीत तैयार
किया है हेमंत कुमार ने और इसे लता मंगेशकर
संग स्वयं संगीतकार ने गाया है. पर्यावरण प्रेमी गीत
है ये इसमें आपको ढेर सारी भेडें भी दिखलाई देंगी
जिन्हें देख के आपको लगेगा नायक नायिका के
हिलने डुलने की गति जयादा है. हर चीज़ कम्पेरेटिव
जो है.



गीत के बोल:

ओ जी ओ जी छोड़ो भी दुपट्टा मेरा जादूगर बालमा
ओ जी ओ जी छोड़ो भी दुपट्टा मेरा जादूगर बालमा
ना जी ना जी हमें मजबूर करें नैना तेरे ज़ालिमा
ओ जी ओ जी छोड़ो भी दुपट्टा मेरा जादूगर बालमा
जादूगर बालमा

देखो मेरे नैनों को न देना इल्ज़ाम
नहीं देना इल्ज़ाम जी
गली गली कहीँ हो न जाऊँ बदनाम
हो न जाऊँ बदनाम जी
देखो मेरे नैनों को न देना इल्ज़ाम
नहीं देना इल्ज़ाम जी
गली गली कहीँ हो न जाऊँ बदनाम
हो न जाऊँ बदनाम जी
हाँ जी हाँ जी तुझे मशहूर करे नैना तेरे ज़ालमा
ओ जी ओ जी छोड़ो भी दुपट्टा मेरा जादूगर बालमा
जादूगर बालमा

बोलो कैसे रखूँ मैं ये मुखड़ा छुपाय के
छुपेगा न चाँद का ये टुकड़ा छुपाये से
बोलो कैसे रखूँ मैं ये मुखड़ा छुपाय के
छुपेगा न चाँद का ये टुकड़ा छुपाये से
ये चाँद का टुकड़ा छुपाये से

लो जी लो जी नित नये छेड़ करे जादूगर बालमा
ना जी ना जी हमें मजबूर करें नैना तेरे ज़ालिमा
ओ जी ओ जी छोड़ो भी दुपट्टा मेरा जादूगर बालमा
जादूगर बालमा
…………………………………………….
O ji chhodo ji-Champakali 1957

Artists: Bharat Bhushan, Suchitra Sen, Shubha Khote

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Mar 3, 2020

गीत तेरे साज़ का-इंतक़ाम १९६९

इंतक़ाम नायिका प्रधान फिल्म है जिसे ख़ास तौर
पर साधना के लिए बनाया गया था. ये फिल्म का
सबसे खूबसूरत गीत है कई मायनों में.

इसके बोल, दृश्यावली, फिल्मांकन और संगीत सभी
मनमोहक हैं. ऐसी लार्जर देन लाइफ वाली तस्वीरों
को बड़े परदे पर देखने में ही आनंद आता है. छोटे
टिकट साइज़ के स्क्रीन पर भैंस भी छोटी दिखती
है और ध्यान से ना देखो तो बकरी नज़र आती है.

सुनते हैं मधुर गीत लता मंगेशकर की आवाज़ में
जिसकी रचना की है राजेंद्र कृष्ण ने.



गीत के बोल:

गीत तेरे साज़ का तेरी ही आवाज़ हूँ
गीत तेरे साज़ का तेरी ही आवाज़ हूँ
तू भी मेरा साथी बन जा मैं तेरी हमराज़ हूँ
गीत तेरे साज़ का तेरी ही आवाज़ हूँ
तू भी मेरा साथी बन जा मैं तेरी हमराज़ हूँ
गीत तेरे साज़ का तेरी ही आवाज़ हूँ

आ जा मिल के बाँट लें हो ओ ओ
क्या खुशियां क्या ग़म
हो ओ ओ आ जा मिल के बाँट लें हो ओ ओ
क्या खुशियां क्या ग़म
तन्हा तन्हा तन्हाई का ज़हर पियें क्यूँ हम
तू मेरे जीवन का पंछी मैं तेरी परवाज़ हूँ

गीत तेरे साज़ का तेरी ही आवाज़ हूँ
तू भी मेरा साथी बन जा मैं तेरी हमराज़ हूँ
गीत तेरे साज़ का तेरी ही आवाज़ हूँ

दो दिन का साथ नहीं हो ओ ओ
सारी उम्र का है साथ हो ओ ओ
दो दिन का साथ नहीं हो ओ ओ
सारी उम्र का हैं साथ
जीते जी न होंगे जुदा ये आज मिले जो हाथ
तू मेरे साँसों का मालिक मैं तेरी दम साज़ हूँ

गीत तेरे साज़ का तेरी ही आवाज़ हूँ
तू भी मेरा साथी बन जा मैं तेरी हमराज़ हूँ
गीत तेरे साज़ का तेरी ही आवाज़ हूँ
गीत तेरे साज़ का तेरी ही आवाज़ हूँ
……………………………………….
Geet tere saaz ka-Inteqam 1969

Artists: Sadhana, Sanjay Khan

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Dec 12, 2019

कभी आगे कभी पीछे-साधु और शैतान १९६८

कॉमेडी का नाम केवल ‘हा हा हा’, ‘ही ही ही’, ‘हे हे हे’
है या ‘खी खी खी’ भी है. किसी ने पूछा तो हमने कहीं
पर ‘हो हो हो’ भी सुना था, जोड़ दिया. प्रश्न अजीब था
क्यूंकि ऐसी आवाजें कॉमेडी के बाद होने वाली प्रतिक्रिया
के फलस्वरूप आतीं हैं. कॉमेडी का स्वयं का हिस्सा तो
ये सब कभी कभार ही होती हैं.

कॉमेडी कलाकार कुछ कर रहे है इसलिए हंसना ज़रूरी
है, ऐसी मिथ्या धारणा बनी हुई है. हँसाना आसान काम
नहीं है. कॉमेडी और बोरियत का अनुपात ८०:२० का हो
तो चल जाता है, इसके उलट हो तो दिक्कत होती है.
टी वी पर विभिन्न प्रकार के कॉमेडी शोज़ में अट्टाहास
लगा के हँसने वाले बैठाये जाते हैं. जब जनता के कुछ
समझ नहीं आता कि हँसे या रोये तो वो इन्हें देख के
हंस लेती है.

सुनते हैं राजेंद्र कृष्ण का लिखा और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
द्वारा संगीतबद्ध गीत जिसे रफ़ी ने गाया है. इसे इंगरेजी
ब्लॉग पर जनता टैक्सी हिट सॉंग कह कर बुलाती है.





गीत के बोल:

कभी आगे कभी पीछे कभी ऊपर कभी नीचे
कभी दायें मुड़ जाये कभी बाएं मुड़ जाये
जाने कहाँ कहाँ मुझे ले के चली

ओ जाने कहाँ कहाँ मुझे ले के चली
मेरी लैला मेरी लैला
कभी आगे कभी पीछे कभी ऊपर कभी नीचे
कभी दायें मुड़ जाये कभी बाएं मुड़ जाये
जाने कहाँ कहाँ मुझे ले के चली
मेरी लैला मेरी लैला
कभी आगे कभी पीछे कभी ऊपर कभी नीचे
कभी दायें मुड़ जाये कभी बाएं मुड़ जाये

लैला नाम की टैक्सी को मिलते ग्राहक बेढंगे
जेब में न हो फूटी कौड़ी कंगले भूखे नंगे
लेकिन आज मिली किस्मत से ऐसी मस्त सवारी
सवारी जिस पर मीटर इंजन एक्सीलेटर ब्रेकें वारी

कभी आगे कभी पीछे कभी ऊपर कभी नीचे
कभी दायें मुड़ जाये कभी बाएं मुड़ जाये
जाने कहाँ कहाँ मुझे ले के चली
मेरी लैला मेरी लैला
कभी आगे कभी पीछे कभी ऊपर कभी नीचे
कभी दायें मुड़ जाये कभी बाएं मुड़ जाये

पानी और पेट्रोल बराबर फिर क्यों रुक गयी लैला
समझा सौतन क्यों बैठी इस कारन जी है मैला
शक की जात बड़ी औरत की
कौन इसे समझाये समझाये
घोड़ा घास से प्यार करे तो बोलो क्या खाये
कभी आगे कभी पीछे कभी ऊपर कभी नीचे
कभी दायें मुड़ जाये कभी बाएं मुड़ जाये
जाने कहाँ कहाँ मुझे ले के चली
मेरी लैला मेरी लैला
कभी आगे कभी पीछे कभी ऊपर कभी नीचे
कभी दायें मुड़ जाये कभी बाएं मुड़ जाये
जाने कहाँ कहाँ मुझे ले के चली
मेरी लैला मेरी लैला
कभी आगे कभी पीछे कभी ऊपर कभी नीचे
कभी दायें मुड़ जाये कभी बाएं मुड़ जाये
…………………………………………..
Kabhi aage kabhi peechhe-Sadhu aur shaitan 1968

Artists: Mehmood, Bharti, 2 kids

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Nov 27, 2019

सजना लगन तेरी सोने-दुनिया न माने १९५९

कभी किसी की लगन किसी को सोने नहीं देती तो कभी कोई
फिल्म की कहानी दर्शक को सोने नहीं देती. खटमल बैठने नहीं
देते और मच्छर उठने नहीं देते. क्या ज़ालिम ज़माना आ गया
है. पहले पहले लगता था कि मल्टीप्लेक्स में खटमल नहीं होते
मगर अब वहाँ भी मौजूद हैं.

जो दर्शक इमानदारी से केवल सोने के लिए टिकट खरीद कर
सिनेमा हॉल में घुसता है उसके साथ अन्याय है ये सब.

खैर छोड़े ये सब, आज के गीत पर चर्चा कर लेते हैं थोड़ी सी.
हमने आपको इस फिल्म से चलने वाले दो गीत सुनवाए थे.
अब उन गीतों में चलना शब्द था इसलिए चले. बाकियों का
पता नहीं.

प्रस्तुत गीत लिखा है राजेंद्र कृष्ण ने और मदन मोहन इसकी
धुनें के जिम्मेवार हैं. इसे लता मंगेशकर ने गाया है. थ्योरी के
अनुसार, मदन मोहन के संगीत वाले लता मंगेशकर के गीत
सभी मधुर हैं और बढ़िया हैं. थ्योरी को हम भी ७० प्रतिशत
तक मानते हैं जी.





गीत के बोल:

सजना सजना सजना
सजना लगन तेरी सोने न दे
सजना लगन तेरी सोने न दे
रोना भी चाहूं तो रोने न दे
सजना लगन तेरी सोने न दे

समझे तो समझे ये दिल हार के
समझे तो समझे ये दिल हार के
दर्द अनोखे बड़े होते हैं प्यार के
हाय बैरी प्यार के
सजना लगन तेरी सोने न दे
सजना लगन तेरी सोने न दे

अपने पराये मेरी समझें न बतियां
अपने पराये मेरी समझें न बतियां
किस संग बोल के बिताऊं काली रतियां
काली काली रतियां
सजना लगन तेरी सोने न दे

सजना लगन तेरी सोने न दे
सजना लगन तेरी सोने न दे

कितनी कठिन हैं प्यार की रस्में
कितनी कठिन हैं प्यार की रस्में
अपनी ही निंदिया वो भी न बस में
हाय मेरे बस में
सजना लगन तेरी सोने न दे
सजना लगन तेरी सोने न दे
रोना भी चाहूं तो रोने न दे
सजना लगन तेरी सोने न दे
...............................................................
Sajna teri lagan sone na de-Duniya na mane 1959

Artist: Mala Sinha

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Nov 26, 2019

हवा है सर्द सर्द-शतरंज १९५६

ठण्ड के मौसम वाला गीत सुनते हैं. ये है फिल्म
शतरंज से. गीत का मूड ऐसा है मानो कहीं मावठे
की बारिश हुई हो और उसकी वजह से सर्दी पड़ रही
हो.

सी रामचंद्र और राजेंद्र कृष्ण के कोम्बिनेशन वाले इस
गीत को लता मंगेशकर ने गाया है. अशोक कुमार को
सीटी बजाते आपने कितनी फिल्मों में देखा है? एक
नाम हम और बतला देते हैं-हावड़ा ब्रिज, बाकी की आप
ढूंढिए.




गीत के बोल:

हवा है सर्द सर्द
और दिल में भी है दर्द
बरसी है कहीं आज घटा
हवा है सर्द सर्द
और दिल में भी है दर्द
बरसी है कहीं आज घटा

मौसम का रंग है अजीब बुलबुल से फूल है करीब
मौसम का रंग है अजीब बुलबुल से फूल है करीब
आये बहार के कदम जागा है बाग का नसीब
आये बहार के कदम जागा है बाग का नसीब

सुन के घटा का शोर
जंगल में नाचा मोर
बरसी है कहीं आज घटा

शाखें संवर संवर गईं कलियां निखर निखर गईं
शाखें संवर संवर गईं कलियां निखर निखर गईं
देखा समा झुला झुला नज़रें जिधर जिधर गईं
देखा समा झुला झुला नज़रें जिधर जिधर गईं

कैसा अजब है रंग
भीगा है अंग अंग
बरसी है कहीं आज घटा

हवा है सर्द सर्द
और दिल में भी है दर्द
बरसी है कहीं आज घटा
………………………………………..
Hawa hai sard sard-Shatranj 1956 

Artist: Ashok Kumar, Meena Kumari

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Nov 17, 2019

उन आँखों में नींद कहाँ-मिनिस्टर १९५९

सरलता और जटिलता किसी भी कार्य को करने के
दो तरीके हैं. वैसे आजकल मक्कारी का तरीका ज्यादा
पॉपुलर है. किसी बात को गहराई तक समझाने के
लिए गहरा गड्ढा खोदने की ज़रूरत तो नहीं होती.

संगीत जगत में राग रागिनियों वाले घुमावदार और
लच्छेदार गीत बहुतेरे हैं. आम आदमी को लच्छे
कुल्फी फ़ालूदा में ज्यादा भाते हैं बनिस्बत संगीत के.
पान में डालने वाली लच्छेदार सुपारी भी आम आदमी
खा लेता है आराम से.

जो जीवन के लच्छों में पहले से ही उलझा हुआ हो उसे
और क्या उलझाना. सिनेमा एक माध्यम है मनोरंजन
का, सन्देश देने का तो व्यक्ति विशेष या समूह की
भड़ास निकालने का माध्यम भी है. आर्ट से फार्ट तक
सब मिल जायेगा आपको.

छोड़ें ये सब और बात करें आज के गीत की. सन १९५९
की फिल्म मिनिस्टर से लता मंगेशकर का गाया एक
गीत सुनते हैं जो सरल और सहज है. सुनने में सहज
लगता अवश्य है मगर इसे परफेक्टली गुनगुनाने के
लिए आपको थोडा बहुत संगीत का ज्ञान आवश्यक है.

राजेंद्र कृष्ण की रचना है और मदन मोहन का संगीत.
इसे रूप्माला नामक अभिनेत्री पर फिल्माया गया है.



गीत के बोल:

ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ

उन आँखों में नींद कहाँ
जिन आँखों से प्रीतम दूर बसे
उन आँखों में नींद कहाँ
जिन आँखों से प्रीतम दूर बसे

चैन कहाँ से पाये वो दिल
जिसका बसिया पास न हो
चैन कहाँ से पाये वो दिल
जिसका बसिया पास न हो
हार सिंगार भी ज़हर लगे उसे
जिसका रसिया पास न हो
बहते आंसू उनके जुबां
जिन आँखों से प्रीतम दूर बसे

उन आँखों में नींद कहाँ
जिन आँखों से प्रीतम दूर बसे

लाख बहारें झूम के आयें
डाली डाली फूल खिलें
लाख बहारें झूम के आयें
डाली डाली फूल खिलें
मेरे मन की कलि खिले जब
मुझसे प्रीतम आन मिले
वो क्या देखें मस्त समा
जिन आँखों से प्रीतम दूर बसे

उन आँखों में नींद कहाँ
जिन आँखों से प्रीतम दूर बसे
....................................................................
Un aankhon mein neend kahan-Minister 1959

Artist: Roopmala

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Nov 15, 2019

दिल उनको उठा के दे दिया-बाप बेटे १९५९

आज सुनते हैं लता मंगेशकर का गाया एक गीत फिल्म
बाप बेटे से. राजेंद्र कृष्ण की लिखी रचना को संगीत में
जकडा है मदन मोहन ने.

सालों से ये गाना सुनते आ रहे हैं फिल्म बाप बेटे का
मगर एक बात अभी भी खटकती है-उठा के दे दिया.
दिल ना हुआ कुर्सी हो गयी जो कोने में पड़ी थी उठा
के दे दी.

शकीला ने तो हॉरर और सस्पेंस फिल्मों में काम किया है
मेरे ख्याल से श्यामा को भी कुछ फ़िल्में करना चाहिए
थीं. इस गीत में उनके चेहरे पर जिस प्रकार के भाव
आये हैं और जिस गति से वो बदलते हैं, डरावनी फिल्मों
के लिए उपयुक्त हैं. मैं एक किलो मुस्कुराहट के अलावा
वाले भावों की बात कर रहा हूँ. 




गीत के बोल:

दिल उनको उठा के दे दिया
कुछ घबरा के कुछ शरमा के
अब सोचती हूँ ये क्या किया
कुछ घबरा के कुछ शरमा के
दिल उनको उठा के दे दिया

ये किससे हुआ सामना
दिल पुकारा मुझे थामना
ये किससे हुआ सामना
दिल पुकारा मुझे थामना
मिल चुकी थी नज़र हो चुका था असर
नाम उनका ज़ुबाँ ने ले लिया
दिल उनको उठा के दे दिया
कुछ घबरा के कुछ शरमा के
दिल उनको उठा के दे दिया

ज़िंदगी में कोई आ गया
प्यार का राग समझा गया
ज़िंदगी में कोई आ गया
प्यार का राग समझा गया
उनके हो ही गये हम तो खो ही गये
जाने जादू ये कैसा किया
दिल उनको उठा के दे दिया
कुछ घबरा के कुछ शरमा के
अब सोचती हूँ ये क्या किया
कुछ घबरा के कुछ शरमा के
दिल उनको उठा के दे दिया
………………………………………….
Dil uno utha ke de diya-Baap bete 1959

Artist: Shyama

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Sep 23, 2019

कभी तेरा दामन ना-नींद हमारी ख्वाब तुम्हारे १९६६

लंबे नाम वाली फिल्मों में अगर नाम के अनुसार वजन ना
हो तो वे बॉक्स ऑफिस पर धराशायी होने में ज़रा भी समय
नहीं लगातीं. वजन से तात्पर्य कहानी में दम से है. कहानी
भले ही घिसी पिटी हो मगर तडका बढ़िया वाला चाहिए.
जनता अँधेरे से और कम रौशनी वाले रेस्टोरेंट में दो दिन
बासी दाल केवल बढ़िया तडके की वजह से ही खा जाती है.

सुनते हैं सन १९६६ की फिल्म से एक गीत रफ़ी और आशा
की आवाज़ में. राजेंद्र कृष्ण के बोल हैं और मदन मोहन का
संगीत.

https://www.youtube.com/watch?v=ZRuLC0uLXG8


गीत के बोल:

कभी तेरा दामन ना छोड़ेंगे हम हाय
कभी तेरा दामन ना छोड़ेंगे हम
चाहे ज़माना करे लाखों सितम हाँ
चाहे ज़माना करे लाखों सितम हाय
कभी तेरा दामन ना छोड़ेंगे हम हाय
कभी तेरा दामन ना छोड़ेंगे हम
सनम मेरी जन्नत है तेरे कदम हाय
सनम मेरी जन्नत है तेरे कदम हाय
कभी तेरा दामन ना छोड़ेंगे हम हाय
कभी तेरा दामन

मोहब्बत के शोलों में जलता रहूँगा
तेरा नाम ले के मैं चलता रहूँगा
ठोकर भी खा के संभालता रहूँगा
बड़े हैं मोहब्बत के हम पे करम हाय
बड़े हैं मोहब्बत के हम पे करम हाय
कभी तेरा दामन

देंगी सहारा जो तेरी निगाहें
तो आसान होंगी मोहब्बत की राहें
के मंजिल है मेरी ये तेरी ही बाहें
चले हैं सफर पे ये खा के कसम
हाँ चले हैं सफर पे ये खा के कसम
कभी तेरा दामन ना छोड़ेंगे हम हाय
कभी तेरा दामन

मचलती उम्मीदें इरादे जवान हैं
के बस में हमारे ये ज़मीन आसमान हैं
मोहब्बत वहीँ है के हम तुम जहाँ हैं
मिला कर गले कदम से कदम हाँ
मिला कर गले कदम से कदम
कभी तेरा दामन ना छोड़ेंगे हम हाय
कभी तेरा दामन
…………………………………………………….
Kabhi tera daman na-Neend hamari khwab tumhare 1966

Artists: Shashi Kapoor, Nanda

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Sep 21, 2019

महफ़िल सोई-इंतकाम १९६९

इंतकाम फिल्म का निर्देशन आर के नैयर ने किया
था. अपने समय की चर्चित फिल्म बन गई थी जिसमें
एक गीत आ जाने जान का भी बड़ा योगदान है.

फ़िल्म में हेलन पर फिल्माया गया ऐसा एक और गीत
है जिसे लता मंगेशकर ने गाया है. श्वेत श्याम युग में
हेलन के ऊपर फिल्माए गये और लता द्वारा गाये गीत
गीत काफी हैं मगर वे सब ५० के दशक में ही हैं.

इस बात के अलावा फ़िल्म का कथानक भी और फिल्मों
के रूटीन कथानकों से थोडा अलग है. इसमें भी हालांकि
फ़िल्मी लटके झटके और मसाले मौजूद हैं मगर प्रस्तुति
में काफी मामलों में नयापन है. अभिनेता अशोक कुमार
और  रहमान को कहानी में काफी कवरेज है. फ़िल्म का
अंत सुखान्त है और बिछड़े हुए मिल जाते हैं. पुराने
गीले शिकवे भुला कर सब एक हो जाते हैं. अंत भला
तो सब भला.




गीत के बोल:

महफ़िल सोई ऐसा कोई
महफ़िल सोई ऐसा कोई होगा कहाँ
जो समझे जुबां मेरी आँखों की
महफ़िल सोई ऐसा कोई होगा कहाँ
जो समझे जुबां मेरी आँखों की
महफ़िल सोई

रात गाती हुई गुनगुनाती हुई
बीत जायेगी यूँ मुस्कुराती हुई
रात गाती हुई गुनगुनाती हुई
बीत जायेगी यूँ मुस्कुराती हुई
सुबह का समां पूछेगा कहाँ
गये मेहमान जो कल थे यहाँ

महफ़िल सोई ऐसा कोई होगा कहाँ
जो समझे जुबां मेरी आँखों की
महफ़िल सोई

आज थम के गज़र दे रहा है खबर हा
कौन जाने इधर आये ना सहर
आज थम के गज़र दे रहा है खबर हा
कौन जाने इधर आये ना सहर
किसको पता ज़िन्दगी है क्या
टूट ही गया साज़ ही तो था

महफ़िल सोई ऐसा कोई होगा कहाँ
जो समझे जुबां मेरी आँखों की
महफ़िल सोई
……………………………………………
Mehfil soyi-Inteqam 1969

Artists: Helen

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Sep 16, 2019

डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली-डोली १९६९

संगीतकार रवि के बहुत से गाने शादी-ब्याह के अवसर
पर बजाये जाते हैं: उदाहरण के लिए-

बाबुल की दुआएं लेती जा-नीलकमल
मेरा यार बना है दूल्हा-चौदहवीं का चाँद
आज मेरे यार की शादी है-आदमी सड़क का

आपको १९६९ की फिल्म डोली से एक गीत सुनवाते
हैं जिसे महेंद्र कपूर ने गाया है. ये गाना फिल्म का
टाईटल सॉंग भी है. राजेंद्र कृष्ण के बोल है और
इसे अभिनेत्री बबीता पर फिल्माया गया है. गीत
की एक पंक्ति सुहाग रात को भी समर्पित है और
बड़े सोबर तरीके से इस बात को कहा गया है.


   

गीत के बोल:

डोली चढ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
ओ डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
कैसी हसरत से बाबुल की देखे गली
डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के

दिल ना माने मगर आज जाना भी है
अपने साजन से वादा निभाना भी है
दिल ना माने मगर आज जाना भी है
अपने साजन से वादा निभाना भी है
सामने एक नई जिंदगी है मगर
सामने एक नई जिंदगी है मगर
पीछे गुज़रा हुआ इक ज़माना भी है

डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
ओ कैसी हसरत से बाबुल की देखे गली
डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के

डोलियाँ खुशनसीबों की सजती रहें
मेंहदियाँ सबके हाथों में रचती रहें
डोलियाँ खुशनसीबों की सजती रहें
मेंहदियाँ सबके हाथों में रचती रहें
फूल चेहरों के भी मुस्कुराते रहें
फूल चेहरों के भी मुस्कुराते रहें
चूडियाँ दुल्हनों की खनकती रहे

डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
ओ कैसी हसरत से बाबुल की देखे गली
डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के

कोई घूंघट हटा देगा जब रात को
भूल जायेगी मैके की हर बात को
कोई घूंघट हटा देगा जब रात को
भूल जायेगी मैके की हर बात को
अपने राजा की बाहों में सो जायेगी
अपने राजा की बाहों में सो जायेगी
ले के पलकों में खुशियों की बारात को
डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
कैसे हसरत से बाबुल की देखे गली
डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
…………………………………………….
Doli chadh ke dulhan sasural chali-Doli 1969

Artists:

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Sep 14, 2019

आज मै देखूँ जिधर जिधर-डोली १९६९

सावन के अंधे को हरा हरा ही सूझता है. प्यार अंधा
होता है. अन्धों का हाथी बहुत बड़ा होता है. एक शब्द
है एबरेशन.

प्यार में मूली के पत्ता भी पालक नज़र आते हैं इसलिए
इस बात में कहानी की नायिका का कोई दोष नहीं कि
उसे दो दो चंद क्यूँ नज़र आने लगे.

प्यार के बुखार का का कन्फर्मेशन करने के लिए गाने
के बोल भी ऐसे होना चाहिए जो इस बात की पुष्टि करें.

गीत राजेंद्र कृष्ण का है और संगीत रवि का. इसे गा
रही हैं आशा भोंसले.



गीत के बोल:

आज मैं देखूं जिधर जिधर ना जाने क्यूँ उधर उधर
मुझे दो दो चाँद नज़र आयें मेहताब दर मेहताब
आज मैं देखूं जिधर जिधर ना जाने क्यूँ उधर उधर
मुझे दो दो चाँद नज़र आयें मेहताब दर मेहताब

मत छेड़ पवन मेरे गेसू अब और किसी की है ये खुशबू
मत छेड़ पवन मेरे गेसू अब और किसी की है ये खुशबू
देखा है कभी तूने भी उसे जो कर गया मुझपे जादू

आज मैं देखूं जिधर जिधर ना जाने क्यूँ उधर उधर
मुझे दो दो चाँद नज़र आयें मेहताब दर मेहताब

आज मैं देखूं जिधर जिधर ना जाने क्यूँ उधर उधर
मुझे दो दो चाँद नज़र आयें मेहताब दर मेहताब

बदला बदला है ज़माना हर साथ है एक तराना
बदला बदला है ज़माना हर साथ है एक तराना
क्यूँ मुझको यकीं आता ही नहीं ये सच है या ख्वाब सुहाना

आज मैं देखूं जिधर जिधर ना जाने क्यूँ उधर उधर
मुझे दो दो चाँद नज़र आयें मेहताब दर मेहताब

आँखों में कटेंगी न रातें अब होंगी किसी से बातें
आँखों में कटेंगी न रातें अब होंगी किसी से बातें
आयेगा कोई लायेगा कोई अब रंग भरी बरसातें
आज मैं देखूं जिधर जिधर ना जाने क्यूँ उधर उधर
मुझे दो दो चाँद नज़र आयें मेहताब दर मेहताब
……………………………………………………….
Aaj main dekhoon jidhar-Doli 1969

Artist: Babita

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