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Dec 2, 2016

हमरी अटरिया पे-डेढ़ इश्किया २०१४

डेढ़ इश्किया से आपने पहले एक गीत सुना. अब दूसरा सुनते
हैं. कुछ पारंपरिक गीतों से इसके बोल हैं और धुन भी तकरीबन
वैसी ही है. इसे रेखा भरद्वाज ने गाया है.

अटरिया शब्द से एक पुराना गीत सहसा याद हो आता है-मोरी
अटरिया पे कागा बोले कोई आ रहा है. उसके अलावा अटरिया
शब्द वाले दो गीत और याद आते हैं-आया आया अटरिया पे
कोई चोर-मेरा गांव मेरा देश से साथ ही मिथुन की फिल्म वाला
चढ गया ऊपर रे अटरिया पे लोटन कबूतर रे. गौरतलब है ये
शब्द लोक गीतों और पारंपरिक गीतों के लिए एकदम फिट है.
किसी डिस्को खिसको गीत में ये अजीब लगेगा शायद.

गीत गुलज़ार ने लिखा है और संगीत है विशाल भारद्वाज का.




गीत के बोल:

सज के सजाये बैठी साज़िंदे बुलाये बैठी
कहाँ गुम हुआ अंजाना
आले आले दीये भी जलाए रे जलाए
ना अटरिया पे आया परवाना

कौन सा तन हाय बरमाये रे
हमरी अटरिया पे
आजा रे सांवरिया
देखा-देखी तनिक होई जाए

किवड़िया से लग के पिया करे झांका-झांकी
बहुत कौड़ी फेंके पिया उड़ावे जहां की
कसम देवे जां की
आ जा गिलौरी खिलाई दूँ किमामी
लाली पे लाली तनिक हुई जाये
हमरी अटरिया पे

पड़ोसन के घरवा जईहो
जईहो ना सांवरिया
सौतन से बोली मोरी काटे जहरिया
जहरी नजरिया
आजा अटरिया पे पिलाई दूँ अंगूरी
जोरा-जोरी तनिक हुई जाये
हमरी अटरिया पे

सजने लगाये बैठी
चुटिया घुमाये बैठी
कहाँ गुम हुआ अनजाना
कौन सा तन हाये बरमाये रे
.................................................................................
Hamri atariya pe-Dekh Ishkiya 2014

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Jun 26, 2016

दिल का मिज़ाज इश्किया- डेढ़ इश्किया २०१४

फिल्म की कहानी के हिसाब से बिलकुल सही कलाकार ढूंढें
हैं निर्देशक ने. लगभग वेटरन कहलाने लगे नसीर और शायद
रिटायर चुकी माधुरी दीक्षित.  नसीर की एक्टिंग की धार
तो अभी भी पैनी है मगर माधुरी समय के साथ साथ
एक्टिंग में थोडा डल हो चुकी हैं. अरशद वारसी जितना भी
कर सकते हैं अपना १०० परसेंट देने की कोशिश करते हैं.

गुलज़ार के लिखे बोल हैं, विशाल भारद्वाज का संगीत है और
राहत फतह अली ने इस गीत को गाया है.



गीत के बोल:

रुक रुक के कहते हैं
झुक झुक के रहते हैं
दिल का मिज़ाज इश्किया
तन्हां है लोगों में
लोगों में तन्हाई
दिल का मिज़ाज इश्किया

चोटें भी खाये और गुनगुनाये
ऐसा ही था ये ऐसा ही है ये
मस्ती में रहता है
मस्ताना सौदाई
दिल का मिज़ाज इश्किया

शर्मीला शर्मीला परदे में रहता है
दर्दों के झोंके भी चुपके से सहता है
निकलता नहीं है गली से कभी
निकल जाये तो दिल भटक जाता है
अरे बच्चा है आखिर बहक जाता है
ख्वाबों में रहता है
बचपन से हरजाई
दिल का मिज़ाज इश्किया

गुस्से में बल खाना गैरों से जल जाना
मुश्किल में आये तो वादों से टल जाना
उलझने की इसको यूँ आदत नहीं
मगर बेवफाई शराफत नहीं
ये जज़बाती हो के छलक जाता है
इश्क में होती है
थोड़ी सी गरमाई
दिल का मिज़ाज इश्किया
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Dil ka mijaaj-Dedh Ishqiya 2014

Artists: Naseeruddin Shah, Madhuri Dixit

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