Showing posts with label Ghar ki izzat. Show all posts
Showing posts with label Ghar ki izzat. Show all posts

Aug 20, 2016

बूट पॉलिश करवा ले बाबू-घर की इज्ज़त १९४८

बूट पॉलिश और तेल मालिश दोनों पर गीत बन चुके हैं. तेल मालिश
वाला गीत बाद में आया था. बूट पॉलिश नामक फिल्म भी बन चुकी
है.

दिलीप कुमार और मुमताज़ शांति की प्रमुख भूमिकाओं वाली फिल्म
घर की इज्ज़त से आज यही गीत सुनते हैं. इसे मीना कपूर ने गाया
है. ईश्वर चंद्र कपूर के बोल हैं और पंडित गोविन्दराम का संगीत है.

समय  अच्छे अच्छों से बूट पर पालिश करवा देता है. इस काम को
आप ऐसा-वैसा ना समझिए. इसके बलबूते पर रिच गेलफ़ॉन्ड
कहाँ से कहाँ पहुँच गए.




गीत के बोल:


बूट पॉलिश करवा ले बाबू
बूट पॉलिश करवा ले
बूट पॉलिश करवा ले
बूट पॉलिश करवा ले बाबू
बूट पॉलिश करवा ले
बूट पॉलिश करवा ले

ओ जाने वाले देख ज़रा कोई रह रह तुझे पुकारे
ओ जाने वाले देख ज़रा कोई रह रह तुझे पुकारे
बूट पॉलिश करवा ले बाबू
बूट पॉलिश करवा ले
बूट पॉलिश करवा ले


ज्यूँ ज्यूँ चमके बूट तुम्हारे
किस्मत मेरी जागे
किस्मत मेरी जागे
ज्यूँ ज्यूँ चमके बूट तुम्हारे
किस्मत मेरी जागे
तेरे बूटों के संग में है
मेरा जीवन भागे
दौलत वाले होते हैं मजबूरों के रखवाले
दौलत वाले होते हैं मजबूरों के रखवाले
बूट पॉलिश करवा ले
बूट पॉलिश करवा ले बाबू
बूट पॉलिश करवा ले
बूट पॉलिश करवा ले

आशा के दो आंसू आँखों में ही पीने दे
आशा के दो आंसू आँखों में ही पीने दे
लाख दुआएं देंगे तुझको मजबूरों को जीने दे
लाख दुआएं देंगे तुझको मजबूरों को जीने दे
हम भी तेरे देश के हैं ओ दाता रहने वाले
हम भी तेरे देश के हैं ओ दाता रहने वाले
बूट पॉलिश करवा ले
बूट पॉलिश करवा ले बाबू
बूट पॉलिश करवा ले
बूट पॉलिश करवा ले
………………………………………………………………
Boot polish karwa le re baboo-Ghzr ki izzat 1948

Artists: Jeevan

Read more...

Aug 2, 2016

वाह रे ज़माने क्या रंग दिखाए-घर की इज्ज़त १९४८

संगीत रसिकों के लिए जुलाई और अगस्त के महीने कुछ
ज्यादा अहमियत रखते हैं. २२ जुलाई गायक मुकेश की
जन्मतिथि है, ३१ जुलाई मोहम्मद रफ़ी की पुण्य तिथि
और ४ अगस्त को किशोर कुमार का जन्मदिन. अगस्त
महीने की २७ तारीख को मुकेश की पुण्यतिथि है.

इन दो महीनों में सबसे ज्यादा संगीत के कार्यक्रम होते हैं.
एक समय था जब रेडियो वाले ही याद कर लिया करते थे
गायकों को, फिर सिलसिला शुरू हुआ अख़बारों द्वारा याद
करने का, फिर आये टी वी के चैनल, अब वेबसाइटें. हर
कोई अपने तरीके से अपनी पसंद के गीतों द्वारा याद कर
लेता है गायकों को.

आज सुनते हैं दिलीप कुमार और मुमताज़ शांति की प्रमुख
भूमिकाओं वाली फिल्म घर की इज्ज़त से एक दर्दीला गीत.
गीत लिखा है ईश्वर चंद्र कपूर ने और गीत की धुन बनाई है
पंडित गोविन्दराम ने. फिल्म का निर्देशन राम दरयानी ने
किया था.





गीत के बोल:

वाह रे ज़माने क्या रंग दिखाए
वाह रे ज़माने क्या रंग दिखाए
पल में हंसाये पल में रुलाये
क्या रंग दिखाए
वाह रे ज़माने क्या रंग दिखाए

मोहब्बत का नन्हा दिया टिमटिमाया
पहले ही झोंके ने आ कर बुझाया
आँखों में तारीखी दिल में अँधेरा
आँखों में तारीखी दिल में अँधेरा
पग पग ठोकर खाए
पग पग ठोकर खाए
क्या रंग दिखाए
वाह रे ज़माने क्या रंग दिखाए

हाथों की मेहँदी को देखे सुहागन
हाथों की मेहँदी को देखे सुहागन
आँखों में आंसू सूना है आँगन
आँखों में आंसू सूना है आँगन
खुशियों के दिन तो बीत चुके हैं
खुशियों के दिन तो बीत चुके हैं
रह गयी हाय हाय

क्या रंग दिखाए
वाह रे ज़माने क्या रंग दिखाए
पल में हंसाये पल में रुलाये
क्या रंग दिखाए
वाह रे ज़माने क्या रंग दिखाए
…………………………………………………..
Wah re zamane kya rang-Ghar ki izzat 1948

Artists: Mumtza Shanti, Dilip Kumar

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP