वाह रे ज़माने क्या रंग दिखाए-घर की इज्ज़त १९४८
ज्यादा अहमियत रखते हैं. २२ जुलाई गायक मुकेश की
जन्मतिथि है, ३१ जुलाई मोहम्मद रफ़ी की पुण्य तिथि
और ४ अगस्त को किशोर कुमार का जन्मदिन. अगस्त
महीने की २७ तारीख को मुकेश की पुण्यतिथि है.
इन दो महीनों में सबसे ज्यादा संगीत के कार्यक्रम होते हैं.
एक समय था जब रेडियो वाले ही याद कर लिया करते थे
गायकों को, फिर सिलसिला शुरू हुआ अख़बारों द्वारा याद
करने का, फिर आये टी वी के चैनल, अब वेबसाइटें. हर
कोई अपने तरीके से अपनी पसंद के गीतों द्वारा याद कर
लेता है गायकों को.
आज सुनते हैं दिलीप कुमार और मुमताज़ शांति की प्रमुख
भूमिकाओं वाली फिल्म घर की इज्ज़त से एक दर्दीला गीत.
गीत लिखा है ईश्वर चंद्र कपूर ने और गीत की धुन बनाई है
पंडित गोविन्दराम ने. फिल्म का निर्देशन राम दरयानी ने
किया था.
गीत के बोल:
वाह रे ज़माने क्या रंग दिखाए
वाह रे ज़माने क्या रंग दिखाए
पल में हंसाये पल में रुलाये
क्या रंग दिखाए
वाह रे ज़माने क्या रंग दिखाए
मोहब्बत का नन्हा दिया टिमटिमाया
पहले ही झोंके ने आ कर बुझाया
आँखों में तारीखी दिल में अँधेरा
आँखों में तारीखी दिल में अँधेरा
पग पग ठोकर खाए
पग पग ठोकर खाए
क्या रंग दिखाए
वाह रे ज़माने क्या रंग दिखाए
हाथों की मेहँदी को देखे सुहागन
हाथों की मेहँदी को देखे सुहागन
आँखों में आंसू सूना है आँगन
आँखों में आंसू सूना है आँगन
खुशियों के दिन तो बीत चुके हैं
खुशियों के दिन तो बीत चुके हैं
रह गयी हाय हाय
क्या रंग दिखाए
वाह रे ज़माने क्या रंग दिखाए
पल में हंसाये पल में रुलाये
क्या रंग दिखाए
वाह रे ज़माने क्या रंग दिखाए
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Wah re zamane kya rang-Ghar ki izzat 1948
Artists: Mumtza Shanti, Dilip Kumar

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