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Nov 9, 2016

एक सुबह एक मोड़ पर-हिप हिप हुर्रे १९८४

सन १९८४ की फिल्म हिप हिप हुर्रे निर्देशक प्रकाश झा की
बतौर निर्देशक पहली फिल्म है. इसमें राजकिरण, दीप्ति नवल,
शफी इनामदार और रामगोपाल बजाज प्रमुख कलाकार हैं.
फ़िल्मी कलाकारों के नाम तो आपने सुन रखे होंगे. बजाज का
नाम ड्रामा के फील्ड में जाना पहचाना और सम्मानित है. वे
नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के निर्देशक रह चुके हैं. सन १९९६
के संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार विजेता भी हैं वे. कई
हिंदी फिल्मों में छुट-पुट किरदार निभाने वाले बजाज नाट्य
क्षेत्र में अपने सृजनात्मक योगदानों के लिए जाने जाते हैं. 

गौरतलब है है फिल्म अंदाज़ अपना अपना में परेश रावल ने
दोहरी भूमिकाएं निभायीं थीं, उनमें से एक किरदार का नाम है
रामगोपाल बजाज.

आइये सुनें गुलज़ार का लिखा, वनराज भाटिया द्वारा स्वरबद्ध
और येसुदास का गाया गीत इस फिल्म से.






गीत के बोल:


एक सुबह एक मोड़ पर
मैं ने कहा उसे रोक कर
एक सुबह एक मोड़ पर
मैं ने कहा उसे रोक कर
हाथ बढ़ा ए ज़िंदगी
आँख मिला के बात कर
हाथ बढ़ा ए ज़िंदगी
आँख मिला के बात कर

रोज़ तेरे जीने के लिये
एक सुबह मुझे मिल जाती है
मुरझाती कोई शाम अगर तो
रात कोई खिल जाती है
मैं रोज़ सुबह तक आता हूँ
और रोज़ शुरू करत हूँ सफ़र
हाथ बढ़ा ए ज़िंदगी
आँख मिला के बात कर

तेरे हज़ारों चेहरों में
एक चेहरा है मुझसे मिलता है
तेरे हज़ारों चेहरों में
एक चेहरा है मुझसे मिलता है
आँखों का रंग भी एक सा है
आवाज़ का अंग भी मिलता है
सच पूचो तो हम दो जुड़वा हैं
तू शाम मेरी मैं तेरी सहर
हाथ बढ़ा ए ज़िंदगी
आँख मिला के बात कर

एक सुबह एक मोड़ पर
मैं ने कहा उसे रोक कर
हाथ बढ़ा ए ज़िंदगी
आँख मिला के बात कर
हाथ बढ़ा ए ज़िंदगी
आँख मिला के बात कर
एक सुबह एक मोड़ पर
मैं ने कहा उसे रोक कर
मैं ने कहा उसे रोक कर
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Ek subah ek mod par-Hip hip hurray 1984

Artists: Rajkiran, Deepti Naval

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