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Sep 1, 2017

सावन की आई बहार-जूनून १९७८

सावन की बहार अलग अलग तरीकों से आती रही है फ़िल्मी
गीतों में. थोडा बहुत शब्दों का हेर फेर हो जाता है मगर बहार
वही होती है. उसका असर भी वैसा ही होता है.

सुनते हैं सन १९७८ की फिल्म जूनून से सावन की बहार वाला
गीत. इसे आशा भोंसले और वर्षा भोंसले ने गाया है. योगेश प्रवीण
ने इसे लिखा है और वनराज भाटिया ने इसकी तर्ज़ बनाई है.



गीत के बोल:

घिर आई काली घटा मतवारी
सावन की आई बहार रे
बेला चमेली की कलियाँ चटक गईं
महकत बन की बयार रे

खिल गये हथेली पे मेंहदी के बूटे
लचकत झूलन से डार री
धानी चुनर मोरे सर पे न ठहरे
चूड़ियाँ करें झनकार रे

बादल बीच बिजुरिया चमके
ढूँढूँ मैं बलमा की बाँह रे
आधी रैन जब बोले पपिहा
जियरा पे लगत कटार रे

अँगना में भीजी अटरिया पे भीजी
भीजी सजनवा की सेज रे
भीज गई मोरी हाए कोरी चुनरिया
रिमझिम रस की फुहार रे
…………………………………………
Ghir ghir aayi-Junoon 1978

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Aug 15, 2017

ये फासले तेरी गलियों के-मम्मो १९९४

श्याम बेनेगल ने फिल्म मम्मो का निर्देशन किया था. ये फिल्म
सन १९९४ में अवतरित हुयी थी. जैसे नाम इसके साथ जुड़े हैं,
मसलन निर्देशक, निर्माता-एन एफ डी सी और संगीत निर्देशक
इस फिल्म के-वनराज भाटिया, प्रथम दृष्टया ये फिल्म कोई आर्ट
फिल्म ही दिखाई देती है.

फिल्म के नाम से कुछ ऐसे शब्द-मम्मा, मामू, कम्मो, इत्यादि
याद आ जाते हैं, क्यूँ, समझ नहीं आता.




गीत के बोल:

ये फ़ासले तेरी गलियों के हमसे तय न हुए
हज़ार बार रुके हम हज़ार बार चले
हज़ार बार रुके हम हज़ार बार चले

न जाने कौन सी मट्टी वतन की मट्टी थी
न जाने कौन सी मट्टी वतन की मट्टी थी
नज़र में धूल जिगर में लिये ग़ुबार चले
हज़ार बार रुके हम हज़ार बार चले
हज़ार बार रुके हम हज़ार बार चले

ये कैसी सरहदें उलझी हुई हैं पैरों में
ये कैसी सरहदें उलझी हुई हैं पैरों में
हम अपने घर की तरफ़ उठ के बार बार चले
हज़ार बार रुके हम हज़ार बार चले
हज़ार बार रुके हम हज़ार बार चले
…………………………………………………….
Ye faasle teri galiyon ke-Mammo 1994

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Dec 7, 2016

सावन के दिन आये सजनवा-भूमिका १९७७

फ़िल्मी गीतों में ऐसे दो शब्द हैं जिन्होंने हर युग में खबर
ज़रूर बनाई है, वे हैं “आन मिलो” अब वो चाहे “प्रीतम
आन मिलो” हो या “आन मिलो आन मिलो श्याम सांवरे”
हो या फिर “अब आन मिलो सजना” का “आन मिलो” हो.
इन्हीं के साथ साथ सन १९७७ का ‘’आन मिलो’’ भी चर्चित
हुआ. ये है भूमिका फिल्म का “आन मिलो”. ऐसे गीतों को
आम तौर पर बिखरे मोती कहा जाता है.  कभी कभार ये
सुनने को मिल जाते हैं और मन प्रसन्न हो जाता है.

गीत लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी ने और इसके संगीतकार हैं
वनराज भाटिया जिन्होंने ऑफबीट अथवा आर्ट फिल्मों में ही
अधिकांश संगीत दिया है. फिल्म के निर्देशक श्याम बेनेगल
हैं.



गीत के बोल:

सावन के दिन आए सजनवा आन मिलो
आन मिलो
बरखा जिया तरसाए सजनवा आन मिलो
आन मिलो
दूरी सही न जाए सजनिया
याद तुम्हारी आए सजनिया
आन मिलो आन मिलो

बिरहा जिया तड़पाए सजनवा आन मिलो
सजनिया आन मिलो आन मिलो

जैसे घटा में बिजुरी चमके
तीर उठे मन में थम-थम के
तीर उठे मन में थम-थम के
कोई नहीं धीर बँधाए धीर बँधाए
बिरहा जिया तड़पाए सजनवा आन मिलो
याद तुम्हारी आए सजनिया आन मिलो
आन मिलो आन मिलो

आग लगी है ठण्डी पवन में
छाया धुआँ सा है अँखियन में
छाया धुआँ सा है अँखियन में
जले कोई तुम बिन हाय तुम बिन हाय
बिरहा जिया तड़पाए सजनिया आन मिलो
दूरी सही न जाए सजनवा
याद तुम्हारी आए सजनिया आन मिलो
आन मिलो आन मिलो

सावन के दिन आए सजनवा आन मिलो
सजनिया आन मिलो
आन मिलो आन मिलो
..................................................................
Sawanke din aaye-Bhoomika 1977

Artists: Naseerudiin Shah, Smita Patil

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Nov 9, 2016

एक सुबह एक मोड़ पर-हिप हिप हुर्रे १९८४

सन १९८४ की फिल्म हिप हिप हुर्रे निर्देशक प्रकाश झा की
बतौर निर्देशक पहली फिल्म है. इसमें राजकिरण, दीप्ति नवल,
शफी इनामदार और रामगोपाल बजाज प्रमुख कलाकार हैं.
फ़िल्मी कलाकारों के नाम तो आपने सुन रखे होंगे. बजाज का
नाम ड्रामा के फील्ड में जाना पहचाना और सम्मानित है. वे
नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के निर्देशक रह चुके हैं. सन १९९६
के संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार विजेता भी हैं वे. कई
हिंदी फिल्मों में छुट-पुट किरदार निभाने वाले बजाज नाट्य
क्षेत्र में अपने सृजनात्मक योगदानों के लिए जाने जाते हैं. 

गौरतलब है है फिल्म अंदाज़ अपना अपना में परेश रावल ने
दोहरी भूमिकाएं निभायीं थीं, उनमें से एक किरदार का नाम है
रामगोपाल बजाज.

आइये सुनें गुलज़ार का लिखा, वनराज भाटिया द्वारा स्वरबद्ध
और येसुदास का गाया गीत इस फिल्म से.






गीत के बोल:


एक सुबह एक मोड़ पर
मैं ने कहा उसे रोक कर
एक सुबह एक मोड़ पर
मैं ने कहा उसे रोक कर
हाथ बढ़ा ए ज़िंदगी
आँख मिला के बात कर
हाथ बढ़ा ए ज़िंदगी
आँख मिला के बात कर

रोज़ तेरे जीने के लिये
एक सुबह मुझे मिल जाती है
मुरझाती कोई शाम अगर तो
रात कोई खिल जाती है
मैं रोज़ सुबह तक आता हूँ
और रोज़ शुरू करत हूँ सफ़र
हाथ बढ़ा ए ज़िंदगी
आँख मिला के बात कर

तेरे हज़ारों चेहरों में
एक चेहरा है मुझसे मिलता है
तेरे हज़ारों चेहरों में
एक चेहरा है मुझसे मिलता है
आँखों का रंग भी एक सा है
आवाज़ का अंग भी मिलता है
सच पूचो तो हम दो जुड़वा हैं
तू शाम मेरी मैं तेरी सहर
हाथ बढ़ा ए ज़िंदगी
आँख मिला के बात कर

एक सुबह एक मोड़ पर
मैं ने कहा उसे रोक कर
हाथ बढ़ा ए ज़िंदगी
आँख मिला के बात कर
हाथ बढ़ा ए ज़िंदगी
आँख मिला के बात कर
एक सुबह एक मोड़ पर
मैं ने कहा उसे रोक कर
मैं ने कहा उसे रोक कर
…………………………………………………………….
Ek subah ek mod par-Hip hip hurray 1984

Artists: Rajkiran, Deepti Naval

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