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Oct 15, 2019

जा री बहना जा-त्रिशूल १९७८

१९७८ की चर्चित बहुसितारा फिल्म त्रिशूल से एक
और गीत सुनते हैं जो बहन की विदाई पर भाई
गा रहा है. डोली सोंग्स की श्रेणी में गिना जाता
है इसे. विदाई गीत भी कह लेते हैं इसे क्यूंकि
जाने का संकेत दिया जा रहा है.

किशोर कुमार, येसुदास और पामेला चोपड़ा के
गाये इस गीत की रचना साहिर ने की है और इस
गीत का संगीत खय्याम ने तैयार किया है.
   



गीत के बोल:

बाप का घर क्या भाई का घर क्या
आज समझ सबको अनजान
लड़की जिस घर में पलती है
उस घर होती है मेहमान
जा री बहना जा तू अपने घर जा
जा री बहना जा तू अपने घर जा

लड़की का जब बचपन जाये
मायका साथ ही जाये
उसका जीवन साथी का घर
उसका घर कहलाये
जा री बहना जा तू अपने घर जा
जा री बहना जा तू अपने घर जा

लड़की के जीवन में
जिस दिन ये शुभ अवसर आये
सास बने माता उसकी और
ससुर पिता कहलाये
जा री बहना जा तू अपने घर जा
जा री बहना जा तू अपने घर जा

जा री बहना जा तुझको
ये नव जीवन रास आये
तेरे आँगन लक्ष्मी नाचे
दुर्गा दीप जलाये
जा री बहना जा तू अपने घर जा
जा री बहना जा तू अपने घर जा
………………………………………..
Ja ri behna ja-Trishul 1978

Artists: Poonam Dhillon,

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Sep 2, 2019

आपकी महकी हुई ज़ुल्फ़ को-त्रिशूल १९७८

सन १९७८ की फिल्म त्रिशूल एक बहुसितारा और चर्चित
फिल्म है. इसमें बड़े सितारे मौजूद हैं. वहीदा रहमान ने
जो इक दुक्का फिल्मों में अमिताभ बच्चन की नायिका
रह चुकी हैं, उनकी माँ का रोल किया है. सन १९८३ की
फिल्म ‘महान’ इस मामले में उससे भी महान है.

गीत युवा संजीव कुमार पर फिल्माया गया है. उनके साथ
वहीदा रहमान इस रोमांटिक गीत को गा रही हैं. गीतकार
ने भी क्या खूब लिखा है-ऐसी बातें ना करो जिनका यकीं
मुश्किल हो. निर्देशक ने भले ही कम उम्र के संजीव के
साथ वहीदा की जोड़ी बना दी हो, गीतकार ने इस बात
पर ज़रूर गौर किया है. आठ साल पहले की फिल्म धरती
में वे राजेंद्र कुमार के साथ नायिका थीं. उसके अलावा
बढती उम्र में जुल्फें पतली होती चलती हैं. इसलिए घनी
शब्द का उपयोग नहीं है. है ना सेफ लिरिक्स.

खैर नायक जो आगे चल के बालों में सफेदी लगाने वाला
है फिल्म में, उसके लिए आवाज़ का ध्यान पहले से रखा
गया है. एक मैच्योर्ड वोईस अर्थात येसुदास की आवाज़
का प्रयोग किया गया है. फिल्म में आगे चल के एक और
गीत में येसुदास की आवाज़ आती है चंद पंक्तियों के लिए.

गीत सुनते हैं जिसे साहिर लुधियानवी ने लिखा है और
इसका संगीत खय्याम ने तैयार किया है.




गीत के बोल:


आपकी महकी हुई ज़ुल्फ़ को कहते हैं घटा
आपकी महकी हुई ज़ुल्फ़ को कहते हैं घटा
आपकी मदभरी आँखों को कंवल कहते हैं
आपकी मदभरी आँखों को कंवल कहते हैं
मैं तो कुछ भी नहीं तुमको हसीं लगती हूँ
इसको चाहत भरी नज़रों का अमल कहते हैं
इसको चाहत भरी नज़रों का अमल कहते हैं

एक हम ही नहीं
एक हम ही नहीं सब देखने वाले तुमको
संगे मरमर पे
संगे मरमर पे लिखी शोख ग़ज़ल कहते हैं
संगे मरमर पे लिखी शोख ग़ज़ल कहते हैं

ऐसी बातें न करो
ऐसी बातें न करो जिनका यकीं मुश्किल हो
ऐसी तारीफ को
ऐसी तारीफ को नीयत का खलल कहते हैं
ऐसी तारीफ को नीयत का खलल कहते हैं
आपकी मदभरी आँखों को कंवल कहते हैं
इसको चाहत भरी नज़रों का अमल कहते हैं

मेरी तकदीर के तुमने मुझे अपना समझा
मेरी तकदीर के तुमने मुझे अपना समझा
इसको सदियों की
इसको सदियों की तमन्नाओं का फल कहते हैं
इसको सदियों की तमन्नाओं का फल कहते हैं
इसको सदियों की तमन्नाओं का फल कहते हैं
...................................................................
Aapki mehki hui zulf ko-Trishul 1978

Artists: Sanjeev Kumar, Waheeda Rehman

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Apr 25, 2019

अंग अंग में छन्द भरे हैं-महा शक्तिमान १९८५

संगीतकार बप्पी लहरी जोर का झटका धीरे से लगाने
में माहिर हैं. चाहे वो सामंथा फॉक्स से गाने गवाने की
बात हो या मुन्नी बदनाम से बरसों पहले का उनका
गीत हो-लौंडा बदनाम हुआ, इसके अलावा चलते चलते
के गाने तो हमें आज भी याद हैं.

समय के साथ उनका ट्रेंड स्विच हो गया बाज़ार की
मांग की ओर साथ ही गीत लेखक इन्दीवर का भी.

फिल्म में एक कर्णप्रिय गीत भी मौजूद है जो हालांकि
थोडा लाउड है मगर चलेगा. आज के गानों की तुलना
में धीमा है और कम लाउड है.

इन्दीवर एक बार फिर से गीतकार हैं और इसे गाया है
येसुदास ने कविता कृष्णमूर्ति के साथ.



गीत के बोल:

सा नि ध प म प ध प म
सा रे सा
आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ
अंग अंग में छन्द भरे हैं
आँखों से छलके प्यार
अंग अंग में छन्द भरे हैं
आँखों से छलके प्यार
मन को बस में कर लेती है
मन को बस में कर लेती है
तेरी पायल की झंकार
अंग अंग में छन्द भरे हैं
आँखों से छलके प्यार

होंठों में तेरे मदिरा का प्याला
होंठों में तेरे मदिरा का प्याला

होंठों में तेरे मदिरा का प्याला
सारा बदन तेरा जैसे मधुशाला
ता थैया ता थैया नाचे जवानी
ता थैया ता थैया नाचे जवानी
झूम के आई बहार

अंग अंग में छन्द भरे हैं
आँखों से छलके प्यार

रूप दिखा दे रस बरसा दे
रूप दिखा दे रस बरसा दे
प्यासी नज़र की प्यास बुझा दे
मुरली जो सीने से तू लगा ले
मुरली जो सीने से तू लगा ले
बीना बजे बिन साज

अंग अंग में छन्द भरे हैं
आँखों से छलके प्यार
मन को बस में कर लेती है
मन को बस में कर लेती है
तेरी पायल की झंकार
अंग अंग में छन्द भरे हैं
आँखों से छलके प्यार
……………………………………..
Ang ang mein chhand bhare hain-Maha shaktiman 1985

Artists: Raj babbar, Meenakshi Sheshadri, Danny

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Jun 6, 2018

मोहब्बत बड़े काम की चीज़ है-त्रिशूल १९७८

प्रस्तुत गीत में इतनी बार चीज़ शब्द आया है कि मुझे
चीज़ सेंडविच याद आने लग जाता है. ये गाना है फिल्म
त्रिशूल का तीन गायकों वाला बेहद लोकप्रिय गीत जिसे
किशोर कुमार, लता मंगेशकर और येसुदास ने गाया है.

गीत शशि कपूर, हेमा मालिनी और अमिताभ बच्चन पर
फिल्माया गया है. गीत में नोकझोंक है थोड़ी सी प्यार
मोहब्बत के ऊपर. अपनी अपनी दलीलें हैं इसमें. विशेष
बात यही है इस गीत की. अब दो लोग पैरवी करेंगे तो
जीत तो उन्हीं की होगी.

गीतकार हैं साहिर लुधियानवी और संगीतकार खय्याम.
बड़े बड़े बाग और कबड्डी के मैदान से भी बड़ी जगह में
आयोजन फिल्मों में देखने को मिलते थे, अब ये आम
बात हो चली है. हरियाली का कमसे कम ये फायदा है
कि आपको साफ़ हवा मिलती रहती है.




गीत के बोल:

हर तरफ हुस्न और जवानी है
आज की रात क्या सुहानी है
रेशमी जिस्म
रेशमी जिस्म थरथराते हैं
मरमरी होंठ गुनगुनाते हैं
धडकनों में सुरूर फैला है
रंग नज़दीक-ओ-दूर फैला है
दावत-ए-इश्क दे रही है फज़ा
आज हो जा किसी हसीं पे फ़िदा
मोहब्बत बड़े काम की चीज़ है काम की चीज़ है
मोहब्बत बड़े काम की चीज़ है काम की चीज़ है

मोहब्बत के दम से है दुनिया ये रौशन
मोहब्बत ना होती तो कुछ भी ना होता
नज़र और दिल की पनाहों की खातिर
ये जन्नत ना होती तो कुछ भी ना होता
ये ही एक आराम की चीज़ है काम की चीज़ है
मोहब्बत बड़े काम की चीज़ है काम की चीज़ है

किताबों में छापते हैं चाहत के किस्से
हकीक़त की दुनिया में चाहत नहीं है
किताबों में छापते हैं चाहत के किस्से
हकीक़त की दुनिया में चाहत नहीं है
ज़माने के बाज़ार में ये वो शै है
के जिसकी किसी को ज़रूरत नहीं है
ये बेकार बेदाम सी चीज़ है
ये कुदरत के इनाम की चीज़ है
ये बस नाम ही नाम की चीज़ है
काम की चीज़ है
मोहब्बत बड़े काम की चीज़ है काम की चीज़ है

मोहब्बत से इतना खफा होने वाले
चल आ आज तुझको मोहब्बत सिखा दें
तेरा दिल जो बरसों से वीरां पड़ा है
किसी नाज़नीना को इसमें बसा दें
मेरा मशवरा काम की चीज़ है काम की चीज़ है
मोहब्बत बड़े काम की चीज़ है काम की चीज़ है
ये बेकार बेदाम की चीज़ है काम की चीज़ है
मोहब्बत बड़े काम की चीज़ है काम की चीज़ है
मोहब्बत बड़े काम की चीज़ है काम की चीज़ है
…………………………………………………….
Mohabbat bade kaam ki cheez hai-Trishul 1978

Artists: Hema Malini, Shahsi Kapoor, Amitabh Bachchan, Rakhi

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Jan 12, 2018

नई री लगन-आलाप १९७७

हरिंद्रनाथ चट्टोपाध्याय और अशोक कुमार की जुगलबंदी आपको
अगर याद हो फिल्म आशीर्वाद में, उसके बाद आपको हृषिकेश मुखर्जी
की ही एक और फिल्म याद दिलवाते हैं जिसमें अलग अलग धारा के
ढेर सारे लोग एक छत के नीचे जमा थे-बावर्ची. अब आते हैं फिल्म
नमक हराम की ओर जिसमें दो दोस्त हैं एक अमीर एक गरीब साथ
एक मुफलिसी का शिकार शायर है.

इन तीन फिल्मों के कुछ घटक ले लीजिए और कुछ क्लासिकल संगीत
की मात्रा ज्यादा कर दीजिए, हो गया फिल्म आलाप का मसाला तैयार.
फिल्म की कहानी. इसके अलावा लेकिन और भी बहुत है इस फिल्म में
जो थोडा आम आदमी के दायें बायें से निकल जाता है. गरीबी, संघर्ष,
स्वाभिमान, संगीत और सुबह का भूला शाम को घर ये की वर्ड्स हैं इस
फिल्म को समझने के लिए. फिल्म में ओमप्रकाश और अमिताभ बच्चन
दोनों ही रूटीन से हट कर भूमिकाओं में हैं. 



गीत के बोल:

नई री लगन और मीठी बतियाँ
पिया जाने और जिया मोरा जाने सखी
किस किस बात पे धड़के छतियाँ
किस किस बात पे
किस किस बात पे
किस किस बात पे धड़के छतियाँ
किस किस बात पे धड़के छतियाँ
पिया जाने और जिया मोरा जाने सखी
नई री लगन और

बाल भी उलझे हैं सपने भी
बाल भी उलझे हैं सपने भी
दूजे लागे हैं अपने भी
हो गये हम क्यों ऐसे दीवाने
हो गये हम क्यों ऐसे दीवाने

पिया जाने और जिया मोरा जाने सखी
नई री लगन और

ऐसो चित नगर करे बरजोरी
ऐसो चित नगर करे बरजोरी
और करो जी ??????????

कागा जा जा जा जा
जा रे कागा जा
जा जा जा जा रे
जा जा जा जा रे
जा जा जा जा रे
जा रे कागा जा
ना दे मोरे पिया को संदेसवा
पिया नाहीं आये
पिया नाहीं आये
मोरे आली कैसे करे मन कब जाऊँ
पिया नाहीं आये
पिया नाहीं आये
...............................................................
Nayi ri lagan-Alaap 1977

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Jan 7, 2018

देखो कान्हा नहीं मानत बतियाँ-पायल की झंकार १९८०

एक गीत सुनते हैं राजकमल के संगीत निर्देशन वाला. ७० के
दशक में राजकमल ने सावन को आने दो फिल्म के गीतों से
तहलका मचाया था. राजकमल यूँ तो हिंदी फिल्म संगीत के
क्षेत्र में काफी पहले आ गए थे मगर प्रसिद्धि उन्हें उसी फिल्म
से मिली जिसका जिक्र हमने ऊपर किया है.
   
फिल्म का नाम है पायल की झंकार जिसका गीत आज आप
सुनेंगे. इसे माया गोविन्द ने लिखा है और इस गीत को येसुदास
और सुलक्षणा पंडित गा रहे हैं. फ़िल्मी कृष्ण भजन है मगर इसे
सुनते सुनते आप ध्यानमग्न हो जायेंगे.




गीत के बोल:

देखो कान्हा नहीं मानत बतियाँ
छलिया छेड़े बाँसुरिया
देखो कान्हा नहीं मानत बतियाँ
छलिया छेड़े बाँसुरिया
देखो कान्हा नहीं मानत बतियाँ

बंशी बजा के करे बरजोरी
बंशी बजा के करे बरजोरी
बिनती करूँ पर माने नहीं मोरी
देखो देखो रोके हमरी डगरिया
छलिया छेड़े बाँसुरिया
देखो कान्हा नहीं मानत बतियाँ

जमुना पे आई भरन गगरिया
गगरिया गगरिया
जमुना पे आई भरन ग

नीर भरत जमुना तट पर जब
भर भर नीर उठाई गगर
तब डगर चलत मोहे छेड़त लंगर
हट जाओ जी कुँवर फूटी जात गगर
मोहे छोड़ छोड़ माधव माधव माधव
मोहे छोड़ छोड़ माधव माधव माधव
मोहे छोड़ छोड़ माधव माधव माधव

जमुना पे आई भरन गगरिया
मैं तो भोली श्यामा गुजरिया
भरी गगरी पे मारी कंकरिया
छलिया छेड़े बाँसुरिया
देखो कान्हा नहीं मानत बतियाँ
छलिया छेड़े पांसुरिया
देखो कान्हा नहीं मानत बतियाँ

दीम ता रे ना दिर देना देरे न
दीम ता रे ना दिर देना देरे न
दीम ता दीम ता दीम ता ना दिर देना देरे न
दीम ता दीम ता दीम ता ना दिर देना देरे न
ना दिर न दीम ता दीम ता दीम ता दीम देरे न
देरे न
दीम ता रे ना दिर देना देरे न
ओ दिर तानी दिर दिर तानी दीम तानी दीम देरे न
ओ दिर दिर तानी दीम तानी दीम देरे न
ता दीम ता दीम ता दीम ता दीम देरे न
ता दीम ता दीम ता दीम ता दीम देरे न
धागर किट तक धुम किट तक धि ता धा ता धा ता
दीम तारे ना दिर देना देरे न देरे न देरे न
देरे न देरे न

गोपाल गोपाल गोपाल
बिन गोपाल भयो ब्रज सूनो
बिन गोपाल भयो ब्रज सूनो
कहाँ हो गोपाल कहाँ हो गोपाल
कहाँ हो गोपाल चौपाल
बिन गोपाल भयो ब्रज सूनो
मधुवन सूनो यमुना सूनी
मधुवन सूनो यमुना सूनी
आज कदम की छैयां सूनी
आज कदम की छैयां सूनी
यशोदा को घर आँगन सूनो
नन्द बाबा की अँखियाँ सूनी
सूनी सूनी दधि की मटकियाँ
राधा रानी को मन सूनो
कहाँ हो गोपाल
कहाँ हो गोपाल
कहाँ हो गोपाल
गोपाल
..............................................................
Dekho Kanha nahin maanat-Payal ki jhankar 1980

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Sep 1, 2017

मधुबन ख़ुशबू देता है-साजन बिना सुहागन १९७८

सन १९७८ का एक लोकप्रिय हिट गीत सुनते हैं. फिल्म का नाम है
साजन बिना सुहागन. सावन कुमार टाक फिल्म के निर्माता हैं.
सावन कुमार ने कई गीत भी लिखे हैं. कहा जाता है उनके गीतों में
सावन शब्द ज़रूर आता है.

प्रस्तुत गीत के लेखक इन्दीवर हैं मगर इस गीत में भी सावन
शब्द आता है और रिपीट हुआ है कई बार. उषा खन्ना का संगीत है
और येसुदास की आवाज़. फिल्म में ये गीत तीन बार प्रकट होता है.





गीत के बोल:

मधुबन ख़ुशबू देता है सागर सावन देता है
जीना उसका जीना है जो औरों को जीवन देता है
मधुबन ख़ुशबू देता है

सूरज न बन पाए तो  बन के दीपक जलता चल
सूरज न बन पाए तो  बन के दीपक जलता चल
फूल मिलें या अँगारे  सच की राहों पे चलता चल
सच की राहों पे चलता चल
प्यार दिलों को देता है  अश्कों को दामन देता है
जीना उसका जीना है जो औरों को जीवन देता है

मधुबन ख़ुशबू देता है सागर सावन देता है
मधुबन ख़ुशबू देता है

चलती है लहरा के पवन  के साँस सभी की चलती रहे
चलती है लहरा के पवन  के साँस सभी की चलती रहे
लोगों ने त्याग दिये जीवन  के प्रीत दिलों में पलती रहे
के प्रीत दिलों में पलती रहे
दिल वो दिल है जो औरों को  अपनी धड़कन देता है
जीना उसका जीना है  जो औरों को जीवन देता है

मधुबन ख़ुशबू देता है सागर सावन देता है
मधुबन ख़ुशबू देता है
.................................................................
Madhuban khushboo deta hai-Sajanbina suhagan 1978

Artists: Padmini Kolhapure, Rajendra Kumar, Nutan

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Aug 28, 2017

चलो मन जायें घर अपने-स्वामी विवेकानंद १९९५

एक ऑफ बीट फिल्म से एक गीत सुनते हैं.

फिल्म: स्वामी विवेकानंद
वर्ष: १९९५
गीतकार:गुलज़ार
गायक:येसुदास
संगीत: सलिल चौधरी



गीत के बोल:

चलो मन जायें घर अपने
इस परदेस में ओ परदेस में
क्यों परदेसी राहें ये
चलो मन जायें घर अपने

आँख जो भाये वो कोरा सपना
आँख जो भाये वो कोरा सपना
सारे पराये हैं कोई न अपना
सारे पराये हैं कोई न अपना
ऐसे झूठे प्रेम में पड़ना भूल में काहे जियें
चलो मन जायें घर अपने

सच्चे प्रेम की ज्योत जला के
सच्चे प्रेम की ज्योत जला के
मन सुन मेरे कान लगा के
मन सुन मेरे कान लगा के
पाप और पुण्य की गडरी उठा के
अपनी राह चलें

चलो मन जायें घर अपने
इस परदेस में ओ परदेस में
क्यों परदेसी राहें ये
चलो मन जायें घर अपने
........................................................
Chalo man jayen ghar apne-Swami Vivekananda 1995

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May 21, 2017

खुशियाँ ही खुशियाँ हो-दुल्हन वही जो पिया मन भाये १९७७

एक थोडा तेज गति वाला गीत सुनते हैं रवींद्र जैन के
संगीत वाला.

फिल्म: दुल्हन वही जो पिया मन भये
वर्ष: १९७७
गीतकार: रवींद्र जैन
गायक:येसुदास, हेमलता
संगीत: रवींद्र जैन



गीत के बोल:

खुशियाँ ही खुशियाँ हो दामन में जिसके
खुशियाँ ही खुशियाँ हो दामन में जिसके
क्यों न खुशी से वो दीवाना हो जाये
ऐसे मुबारक मौके पे साथी
ऐसे मुबारक मौके पे साथी
पेश दुआओं का नज़राना हो जाये
खुशियाँ ही खुशियाँ हो दामन में जिसके
क्यों न खुशी से वो दीवाना हो जाये

देर से समझा हमको ज़माना
शुक्र करो कि समझ तो गया
संग रहने का ख़्वाब सुहाना
बन के हक़ीकत सज तो गया
तुम जो कहो तो महफ़िल से कह दे
तुम जो कहो तो सारी महफ़िल से कह दे
पल भर में मशहूर अफ़साना हो जाये

खुशियाँ ही खुशियाँ हो दामन में जिसके
क्यों न खुशी से वो दीवाना हो जाये

कोई क्या जाने हम ने क्या क्या
खेल रचाये तुम्हारे लिये
हम भी कैसी कैसी मंज़िल
छोड़ के आये तुम्हारे लिये
कलियाँ ही कलियाँ महका दो ऐसे
के आबाद दिल का ये वीराना हो जाये

खुशियाँ ही खुशियाँ हो दामन में जिसके
क्यों न खुशी से वो दीवाना हो जाये

हँस के हमरी हर भूल भुला देना
हम हैं तुम्हरे जब चाहो बुला लेना
अपनों की इस महफ़िल में अब
काम नहीं है बेगानों का
ये दुनिया क्या मोल करेगी
इक मुफ़लिस के अरमानों का
इतनी सी है बस अपनी तमन्ना
इतनी सी है बस अपनी तमन्ना
तेरी खुशी से दिल परवाना हो जाये

खुशियाँ ही खुशियाँ हो दामन में जिसके
क्यों न खुशी से वो दीवाना हो जाये
................................................................
Khushiyan hi khushiyan ho-Dulhan wahi jo piya man bhaye 1977

Artists: Prem Kishan, Rameshwari, Madan Puri, Iftekhar, Leela Mishra

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May 19, 2017

चाँद जैसे मुखड़े पे-सावन को आने दो १९७९

गर्मी के मौसम में सावन को आने दो फिल्म का गीत सुनते हैं.
शायद बिना कूलर ए सी के ठंडक महसूस होने लगे.

इस फिल्म के गाने खूब चले थे अपने समय. इस गीत को लिखा
है पुरुषोत्तम पंकज ने जिनका नाम आपने नहीं सुना होगा. गीत
के संगीतकार हैं राजकमल जिनका नाम से कम ही संगीत प्रेमी
वाकिफ हैं. गायक हैं येसुदास जिन्हें अधिकाँश संगीत प्रेमी जानते
हैं. हम जूने पुराने और खटारा संगीत प्रेमियों की बात कर रहे हैं.



गीत के बोल:

सब तिथियन का चन्द्रमा जो देखा चाहो आज
धीरे धीरे घूँघटा सरकावो सरताज

चाँद जैसे मुखड़े पे बिन्दिया सितारा
नहीं भूलेगा मेरी जान ये सितारा वो सितारा
माना तेरी नज़रों में मैं हूँ एक आवारा हो आवारा
नहीं भूलेगा मेरी जान ये आवारा वो आवारा

सागर सागर मोती मिलते पर्वत पर्वत पारस
तन मन ऐसे भीगे जैसे बरसे महुए का रस
प्यासे गीतों की गंगा का तू ही है किनारा
नहीं भूलेगा मेरी जान ये किनारा वो किनारा

कजरारे चंचल नैनों में सूरज चाँद का डेरा
रूप के इस पावन मन्दिर में हँसा करे बसेरा
अरे कस्तूरी को खोजता फिरता है ये बंजारा
नहीं फूलेगा मेरी जान ये बंजारा वो बंजारा

चाँद जैसे मुखड़े पे बिन्दिया सितारा
नहीं भूलेगा मेरी जान ये आवारा वो आवारा
..........................................................................
Chand jaise mukhde pe-Sawan ko aane do 1979

Artist: Arun Govil

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Nov 9, 2016

एक सुबह एक मोड़ पर-हिप हिप हुर्रे १९८४

सन १९८४ की फिल्म हिप हिप हुर्रे निर्देशक प्रकाश झा की
बतौर निर्देशक पहली फिल्म है. इसमें राजकिरण, दीप्ति नवल,
शफी इनामदार और रामगोपाल बजाज प्रमुख कलाकार हैं.
फ़िल्मी कलाकारों के नाम तो आपने सुन रखे होंगे. बजाज का
नाम ड्रामा के फील्ड में जाना पहचाना और सम्मानित है. वे
नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के निर्देशक रह चुके हैं. सन १९९६
के संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार विजेता भी हैं वे. कई
हिंदी फिल्मों में छुट-पुट किरदार निभाने वाले बजाज नाट्य
क्षेत्र में अपने सृजनात्मक योगदानों के लिए जाने जाते हैं. 

गौरतलब है है फिल्म अंदाज़ अपना अपना में परेश रावल ने
दोहरी भूमिकाएं निभायीं थीं, उनमें से एक किरदार का नाम है
रामगोपाल बजाज.

आइये सुनें गुलज़ार का लिखा, वनराज भाटिया द्वारा स्वरबद्ध
और येसुदास का गाया गीत इस फिल्म से.






गीत के बोल:


एक सुबह एक मोड़ पर
मैं ने कहा उसे रोक कर
एक सुबह एक मोड़ पर
मैं ने कहा उसे रोक कर
हाथ बढ़ा ए ज़िंदगी
आँख मिला के बात कर
हाथ बढ़ा ए ज़िंदगी
आँख मिला के बात कर

रोज़ तेरे जीने के लिये
एक सुबह मुझे मिल जाती है
मुरझाती कोई शाम अगर तो
रात कोई खिल जाती है
मैं रोज़ सुबह तक आता हूँ
और रोज़ शुरू करत हूँ सफ़र
हाथ बढ़ा ए ज़िंदगी
आँख मिला के बात कर

तेरे हज़ारों चेहरों में
एक चेहरा है मुझसे मिलता है
तेरे हज़ारों चेहरों में
एक चेहरा है मुझसे मिलता है
आँखों का रंग भी एक सा है
आवाज़ का अंग भी मिलता है
सच पूचो तो हम दो जुड़वा हैं
तू शाम मेरी मैं तेरी सहर
हाथ बढ़ा ए ज़िंदगी
आँख मिला के बात कर

एक सुबह एक मोड़ पर
मैं ने कहा उसे रोक कर
हाथ बढ़ा ए ज़िंदगी
आँख मिला के बात कर
हाथ बढ़ा ए ज़िंदगी
आँख मिला के बात कर
एक सुबह एक मोड़ पर
मैं ने कहा उसे रोक कर
मैं ने कहा उसे रोक कर
…………………………………………………………….
Ek subah ek mod par-Hip hip hurray 1984

Artists: Rajkiran, Deepti Naval

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Nov 2, 2016

नि स ग म प नि-आनंद महल १९७७

सन १९७७ की एक फिल्म है आनंद महल जिसका निर्देशन किया
बासु भट्टाचार्य ने. विजय अरोड़ा और सारिका इस फिल्म के प्रमुख
कलाकार हैं.

इस फिल्म से येसुदास का गाया एक गीत सुनते हैं. योगेश के लिखे
गीत की तर्ज़ बनाई है सलिल चौधरी ने. सुनने में सरल मगर कठिन
हैं धुन इसकी. गुनगुनाने वाले के लिए इस गीत में भटक जाने के
लिए कई मोड हैं. सलिल के संगीत की यही विशेषता है. गाने वाले
के लिए कब खाई आ जाए और कब पहाड़ की ऊंची चोटी अनुमान
लगा पाना कठिन होता था.

सुनिए ये गीत और इसका आनंद लीजिए. गीत काफी पहले बन चुका
था मगर फिल्म देर से रिलीज़ हुई इसलिए ये गीत बाद में सुनाई
देना शुरू हुआ.





गीत के बोल:

नि स ग म प नि स रे ग
आ आ रे मितवा
जनम जनम से हैं हम तो प्यासे
आ संग मेरे गा
नि स ग म प नि स रे ग
आ आ रे मितवा
जनम जनम से हैं हम तो प्यासे
आ संग मेरे गा
नि स ग म प नि स रे ग

सपना देखें मेरे खोये खोये नैना
मितवा मेरे आ तू भी सीख ले सपने देखना
सपना देखें मेरे खोये खोये नैना
मितवा मेरे आ तू भी सीख ले सपने देखना

नि स नि ध प म ग रे स
नि स ग म प नि स रे ग
आ आ रे मितवा
जनम जनम से हैं हम तो प्यासे
आ संग मेरे गा
नि स ग म प नि स रे ग

जाने ना तू ग़म की गहराईयाँ
आ जा कट जायें मेरी तनहाईयाँ
जाने ना तू ग़म की गहराईयाँ
आ जा कट जायें मेरी तनहाईयाँ
आ भी जा बरसा दे प्रीत का सावन
बरसों के जलते मन की
बुझ जाये अगन आ भी जा
बरसा दे प्रीत का सावन
बरसों के जलते मन की
बुझ जाये अगन

नि सा नि सा नि ध प ध प म  ग ग म रे सा

नि स ग म प नि स रे ग
आ आ रे मितवा
जनम जनम से हैं हम तो प्यासे
आ संग मेरे गा
नि स ग म प नि स रे ग
आ आ आ

ग प ध नि द
ग प ध नि ध नि ध प ग प ध नि द
स ग प ध
ध नि स ध नि प ध नि प ध, ग म ध प ध
नि प रे नि प ग स
नि स नि स प ध नि ध ग म प ग म रे स
नि स ग म प नि स रे ग
आ आ रे मितवा
जनम जनम से हैं हम तो प्यासे
आ संग मेरे गा
नि स ग म प नि स रे ग
आ आ आ
.................................................................................
Ni sa ga ma pa-Anand Mahal 1977

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Jul 31, 2016

ऐ मेरे उदास मन-मान अभिमान १९८०

एक फिल्म आई थी सन १९८० में-मान अभिमान. इस फिल्म
में प्रमुख कलाकार हैं राजकिरण और रामेश्वरी. हिंदी फिल्म
जगत के कुछ हृष्ट पुष्ट अभिनेताओं में से एक राजकिरण ८०
के दशक में सक्रिय रहे.

गुमनाम सा कम जानी पहचानी फिल्मों में से अनमोल मोती
चुनने का काम करना आसान काम नहीं है. पड़ोस में स्वच्छंद
घूम रहे मोती साहब को देख के एक गीत याद आ गया. वो
कुछ बीमार से लग रहे थे आज.

ये एक पार्श्व में बजने वाला गीत है. ऐसे गीतों पर अभिनय
आसान काम नहीं होता. नायक गीत के कुछ हिस्सों में ऐसा
दिख रहा है जैसे वायरल फीवर से उठने के बाद कोई दिखाई
देता है.

गीत संगीत रवींद्र जैन का है जिन्होंने एक कर्णप्रिय गीत बनाया
है और इसमें काफी सारे वाद्य यंत्रों का प्रयोग भी किया है.




गीत के बोल:

ऐ मेरे उदास मन
चल दोनों कहीं दूर चले
मेरे हमदम तेरी मंज़िल
ये नहीं ये नहीं कोई और है
ऐ मेरे उदास मन
चल दोनों कहीं दूर चले
मेरे हमदम तेरी मंज़िल
ये नहीं ये नहीं कोई और है

इस बगिया का हर फूल
देता है चुभन काँटों की
सपने हो जाते हैं धूल
क्या बात करे सपनों की
मेरे साथी तेरी दुनिया
ये नहीं ये नहीं कोई और है

ऐ मेरे उदास मन
चल दोनों कहीं दूर चले
मेरे हमदम तेरी मंज़िल
ये नहीं ये नहीं कोई और है

जाने मुझ से हुई क्या भूल
जिसे भूल सका न कोई
पछतावे के आँसू
मेरे आँख भले ही रोये
ओ रे पगले तेरा अपना
ये नहीं ये नहीं कोई और है

ऐ मेरे उदास मन
चल दोनों कहीं दूर चले
मेरे हमदम तेरी मंज़िल
ये नहीं ये नहीं कोई और है

पत्थर भी कभी इक दिन
देखा है पिघल जाते हैं
बन जाते हैं शीतल नीर
झरनों में बदल जाते हैं
तेरी पीड़ा से जो पिघले
ये नहीं ये नहीं कोई और है

ऐ मेरे उदास मन
चल दोनों कहीं दूर चले
मेरे हमदम तेरी मंज़िल
ये नहीं ये नहीं कोई और है
........................................................................
Ae mere udaas man-Maan abhimaan 1980



Artists: Raj Kiran, Rameshwari

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Jun 13, 2016

माता सरस्वती शारदा-आलाप १९७७

कलाकृतियों पर बनी फ़िल्में या कला पर बनी फ़िल्में देखने आम
जनता कम जाया जाती है, इन फिल्मों का अपना एक दर्शक वर्ग
होता है जो ‘आर्ट; शब्द सुन के चल पढता है फिल्म देखने. यह
दस्तूर आज भी ज़ारी है. आजकल कला फ़िल्में बनती ही कहाँ हैं?
जो बनती भी हैं उनको देख के समझ पाना मुश्किल होता है कौन
से जेनर की फिल्म है.

सन १९७७ की फिल्म आलाप  अमिताभ बच्चन और रेखा जैसे
कलाकारों से सजी फिल्म है. आम जनता में अमिताभ के जो भी
मुरीद हैं उनमें से २५ टका तो इस फिल्म को देख आये. बाकी के
नाम सुन के और फिल्म की रिपोर्ट सुन के जाऊं-ना जाऊं करते
रह गए. ऋषिकेश मुखर्जी के फैन भी  ज़रूर इस फिल्म को देख
आये होंगे. एक श्रेणी के फैन रह गए वो हैं अभिनेत्री रेखा के फैन.
उन्होंने भी फिल्म देखी होगी और दुखी हुए होंगे फिल्म देख कर.

फिल्म का संगीत अच्छा है और इसके गीत आप सुन सकते हैं कभी
कभार. एक सरस्वती वंदना सुनिए फिल्म से. इसे येसुदास ने गाया
है लता मंगेशकर, दिलराज कौर और मधु रानी के साथ, जयदेव की
बनाई तर्ज़ पर.




गीत के बोल:

माता सरस्वती शारदा
माता सरस्वती शारदा
हे माता सरस्वती शारदा

विद्या दानी, दयानी, दुःख हरिणी
जगत जननी ज्वालामुखी
माता सरस्वती शारदा
माता सरस्वती शारदा


कीजे सुदृष्टि, कीजे सुदृष्टि
सेवक जान अपना
इतना वरदान दीजे
तान, ताल और आलाप
बुद्धि अलंकार, शारदा
हे माता सरस्वती शारदा
विद्या दानी, दयानी, दुःख हरिणी
जगत जननी ज्वालामुखी
माता सरस्वती शारदा
माता सरस्वती शारदा
हे माता सरस्वती शारदा
हे माता सरस्वती शारदा
.......................................................
Mata Saraswati Sharda-Alaap 1977

Artists-Amitabh Bachchan

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May 28, 2016

जब दीप जले आना-चितचोर १९७६

सन १९७६ में रिलीज़ हुई कुछ फील गुड फिल्मों में से एक
है चितचोर. इस फिल्म के येसुदास के गाये दो गीत बहुत
लोकप्रिय हुए थे. प्रस्तुत गीत भी एक बेहद लोकप्रिय गीत
है जिसे आज भी आप सुन सकते हैं रेडियो पर.

गीत संगीत रवीन्द्र जैन का है. येसुदास संग हेमलता गा
रही हैं. येसुदास सिद्धहस्त मंजे हुए गायक हैं और दोनों
गायकों की  क्वालिटी में अंतर आप महसूस कर सकते हैं.
ऊंचे स्केल पर गाने में हेमलता को दिक्कत आई होगी
इस गीत में ज़रूर. गान में एक अनूठी साहित्यिक टर्म भी
मौजूद है-प्रीत का काजल.




गीत के बोल:

जब दीप जले आना
जब शाम ढले आना
जब दीप जले आना
जब शाम ढले आना
संकेत मिलन का भूल न जाना
मेरा प्यार ना बिसराना

जब दीप जले आना
जब शाम ढले आना

मैं पलकन डगर बुहारूंगा
तेरी राह निहारूंगा
मैं पलकन डगर बुहारूंगा
तेरी राह निहारूंगा
मेरी प्रीत का काजल
तुम अपने नैनों में मले आना

जब दीप जले आना
जब शाम ढले आना

जहाँ पहली बार मिले थे हम
जिस जगह से संग चले थे हम
जहाँ पहली बार मिले थे हम
जिस जगह से संग चले थे हम
नदियां के किनारे आज
उसी अमवा के तले आना

जब दीप जले आना
जब शाम ढले आना

ऩि रे गा,  रे गा
मा गा रे स स ऩि,
प प म, रे ग, स नि
स ग प म प

नित सांझ सवेरे मिलते हैं
उन्हें देख के तारे खिलते हैं
नित सांझ सवेरे मिलते हैं
उन्हें देख के तारे खिलते हैं
नित सांझ सवेरे मिलते हैं
उन्हें देख के तारे खिलते हैं

लेते हैं विदा एक दूजे से
कहते हैं चले आना

जब दीप जले आना
जब शाम ढले आना
संकेत मिलन का भूल न जाना
मेरा प्यार ना बिसराना
जब दीप जले आना
जब शाम ढले आना
…………………………………………………..
Jab deep jale aana-Chitchor 1976

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May 7, 2016

जानेमन जानेमन तेरे दो नयन-छोटी सी बात १९७५

कुछ ऐसे भी दृश्य पाए जाते हैं फिल्मों में जब नायक नायिका
फिल्म देखने जाते हैं. प्रस्तुत गीत में हेमा मालिनी और धर्मेन्द्र
अतिथि कलाकार के रूप में हैं और परदे पर इस युगल गीत
को गा रहे हैं. नायक अमोल पालेकर और नायिका विद्या सिन्हा
इस गीत का आनंद लेते दिखलाई दे रहे हैं.

ये एक चर्चित गीत है और इसे येसुदास के साथ आशा भोंसले
ने गाया है. गीत योगेश का लिखा हुआ है और इस गीत की धुन
बनाई है सलिल चौधरी ने. गीत हिंदी फिल्म सिनेमा के सर्वाधिक
लोकप्रिय गीतों में से एक है.

श्रेणी बनाने के शौकीनों के लिए दो शब्द “फिल्म के अंदर फिल्म”



गीत के बोल:

जानेमन जानेमन तेरे दो नयन
चोरी चोरी ले के गए देखो मेरा मन
जानेमन जानेमन जानेमन

मेरे दो नयन चोर नहीं सजन
तुमसे ही खोया होगा कहीं तुम्हारा मन
जानेमन जानेमन जानेमन

जानेमन जानेमन तेरे दो नयन
चोरी चोरी ले के गए देखो मेरा मन
जानेमन जानेमन जानेमन

मेरे दो नयन चोर नहीं सजन
तुमसे ही खोया होगा कहीं तुम्हारा मन
जानेमन जानेमन जानेमन

तोड़ दे दिलों की दूरी ऐसी क्या है मजबूरी
दिल दिल से मिलने दे
जा अभी तो हुई है यारी अभी से ही बेकरारी
दिन तो ज़रा ढलने दे
तोड़ दे दिलों की दूरी ऐसी क्या है मजबूरी
दिल दिल से मिलने दे
जा अभी तो हुई है यारी अभी से ही बेकरारी
दिन तो ज़रा ढलने दे

यही सुनते समझते गुजर गए जाने कितने ही सावन

जानेमन जानेमन तेरे दो नयन
चोरी चोरी ले के गए देखो मेरा मन
जानेमन जानेमन जानेमन

मेरे दो नयन चोर नहीं सजन
तुमसे ही खोया होगा कहीं तुम्हारा मन
जानेमन जानेमन जानेमन

संग संग चले मेरे मारे आगे पीछे फेरे
समझूं मैं तेरे इरादे
दोष तेरा है ये तो हर दिन जब देखो
करती हो झूठे वादे
संग संग चले मेरे मारे आगे पीछे फेरे
समझूं मैं तेरे इरादे
दोष तेरा है ये तो हर दिन जब देखो
करती हो झूठे वादे

तू ना जाने दीवाने दिखाऊँ कैसे तुझे मैं ये दिल की अगन

जानेमन जानेमन तेरे दो नयन
चोरी चोरी ले के गए देखो मेरा मन
जानेमन जानेमन जानेमन

मेरे दो नयन चोर नहीं सजन
तुमसे ही खोया होगा कहीं तुम्हारा मन
जानेमन जानेमन जानेमन


छेड़ेंगे कभी न तुम्हें ज़रा बतला दो हमें
कब तक हम तरसेंगे
ऐसे घबराओ नहीं कभी तो कहीं ना कहीं
बादल ये बरसेंगे

क्या करेंगे बरस के के जब मुरझायेगा ये सारा चमन

जानेमन जानेमन तेरे दो नयन
चोरी चोरी ले के गए देखो मेरा मन
जानेमन जानेमन जानेमन

मेरे दो नयन चोर नहीं सजन
तुमसे ही खोया होगा कहीं तुम्हारा मन
जानेमन जानेमन जानेमन
…………………………………………
Jaaneman jaaneman tere do nayan- Chhoti si baat 1975

Artists-Amol Palekar, Vidya Sinha, Dharmendra, Hema Malini

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Mar 5, 2016

ज़िन्दगी को सँवारना होगा-आलाप १९७७

सुनिए येसुदास का गया एक गीत जिसे लिखा है
डॉक्टर राही मासूम रज़ा ने और जिसकी धुन
बनायीं है जयदेव ने. फिल्म का नाम है आलाप
जो सन १९७७ के एक फिल्म है. अमिताभ बच्चन
और रेखा इस फिल्म में प्रमुख कलाकार हैं.



गीत के बोल;

ज़िन्दगी रात नहीं  रात की तसवीर नहीं
ज़िन्दगी सिर्फ़ किसी ज़ुल्फ़ की ज़ंजीर नहीं
ज़िन्दगी बस कोई बिगड़ी हुई तक़दीर नहीं
ज़िन्दगी को निखारना होगा

ज़िन्दगी को सँवारना होगा
दिल में सूरज उतारना होगा

ज़िन्दगी धूप नहीं  साया-ए-दीवार भी है
ज़िन्दगी ज़ार नहीं  ज़िन्दगी दिलदार भी है
ज़िन्दगी प्यार भी है  प्यार का इक़रार भी है
ज़िन्दगी को उभारना होगा

ज़िन्दगी को सँवारना होगा
दिल में सूरज उतारना होगा
…………………………………………………….
Zindagi ko sanwaarna hoga-Alaap 1977

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Dec 8, 2015

चाँद अकेला जाये-आलाप १९७७

कलाकृतियों पर बनी फ़िल्में या कला पर बनी फ़िल्में देखने आम
जनता कम जाया करती है, ये दस्तूर आज भी ज़ारी है. आजकल
कला फ़िल्में बनती ही कहाँ हैं ? सन १९७७ की फिल्म आलाप 
अमिताभ बच्चन और रेखा जैसे कलाकारों से सजी फिल्म है. आम
जनता में अमिताभ के जो भी मुरीद हैं उनमें से २५ टका तो इस
फिल्म को देख आये. बाकी के नाम सुन के और फिल्म की रिपोर्ट
सुन के जाऊं-ना जाऊं करते रह गए. ऋषिकेश मुखर्जी के फैन भी 
ज़रूर इस फिल्म को देख आये होंगे. एक श्रेणी के फैन रह गए वो
हैं अभिनेत्री रेखा के फैन. उन्होंने भी फिल्म देखी होगी और दुखी
हुए होंगे फिल्म देख कर.

फिल्म का संगीत अच्छा है और इसके गीत आप सुन सकते हैं
कभी कभार. एक गीत सुनिए जो राही मासूम रज़ा का लिखा हुआ
है. इसे येसुदास ने गाया है जयदेव की बनाई तर्ज़ पर. गाना सुनते
हैं इस फिल्म पर चर्चा बाद में करेंगे.



गीत के बोल:

चाँद अकेला जाये सखी री
काहे अकेला जाये सखी री
मन मोरा घबराये री
सखी री सखी री, ओ सखी री
चाँद अकेला जाये सखी री

वो बैरागी वो मनभावन
कब आयेगा मोरे आँगन
इतना तो बतलाये री
सखी री सखी री, ओ सखी री
चाँद अकेला जाये सखी री

अंग अंग में होली दहके
मन में बेला चमेली महके
ये ऋतु क्या कहलाये री
भाभी री भाभी री, ओ भाभी री
चाँद अकेला जाये सखी री
...................................................................................
Chand akela jaaye-Alaap 1977

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Oct 3, 2015

का करूँ सजनी-स्वामी १९७७

१९७७ की फिल्म स्वामी के सभी गीत क्लासिक गीत हैं. एक
गीत किशोर का गाया आप सुन चुके हैं इधर, आज सुनवाते हैं
येसुदास का गाया एक क्लासिकल गीत जिसे परदे पर धीरज
कुमार गा रहे हैं. शबाना अजमी और गिरीश कर्नाड भी दिखाई
देते हैं गीत में. घर में महफ़िल जमी है और ये गीत गाया जा
रहा है. पिछले गीत में संगीतकार राजेस्ज रोशन थे, इस गीत
के भी वही हैं, बस गीतकार बदल गए हैं. अमित खन्ना ने इस
गीत को लिखा है. अमित खन्ना के लिखे फिल्म देस परदेस के
गीतों से आप वाकिफ होंगे ही.

आये न बालम-एक प्रसिद्ध ठुमरी है जिसे बड़े गुलाम अली ने गा
के अमर बना दिया. गीत का मुखडा ठुमरी के मुखड़े से मिलता
जुलता है.



गीत के बोल:


का करूँ सजनी आए न बालम
खोज रही हैं पिया परदेसी अँखियाँ
आए न बालम

जब भी कोई, आहट होए, मनवा मोरा भागे
देखो कहीं, टूटे नहीं, प्रेम के ये धागे
है मतवारी प्रीत हमारी,
छुपे न छुपाए, छुपे न छुपाए
सावन हो तुम, मैं हूँ तोरी बदरिया
आये न बालम
का करूँ सजनी आए न बालम

भोर भई और, साँझ ढली रे, समय ने ली अंगड़ाई
ये जग सारा, नींद से हारा, मोहे नींद न आई
मैं घबराऊँ, डर डर जाऊँ,
आए वो न आए, आए वो न आए
राधा बुलाए कहाँ खोए हो कन्हैय्या
आए न बालम
का करूँ सजनी  आए न बालम
...............................................................
Aaye na balam-Swami 1977

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Mar 30, 2012

तेरी तस्वीर को सीने से-सावन को आने दो १९७९

कबीर वाणी से ये गीत शुरू होता है. कबीर के सर्वाधिक
लोकप्रिय दोहों में से एक है पोथी वाला. इसका उदाहरण
फ़िल्मी गीतों में ४-५ वाकये पर मैंने महसूस किया है.
वो गाने याद नहीं आ रहे.

फिलहाल को सुनते हैं फ़ौक जामी का लिखा ये गीत जिसे
येसुदास ने राजकमल की धुन पर गाया है.

फिल्म के लिए संगीतकार राजकमल ने कई गीतकारों की
सेवाएं ली. राजकमल प्रयोगधर्मी संगीतकार रहे हैं और उन्हें
राजश्री के अलावा किसी बड़े बैनर ने इनवाईट नहीं किया.

गांव का बिरजू शहर जा कर बड़ा नामवाला आदमी बन
वापस गांव लौटता है एक स्कूल के कार्यक्रम के मुख्य
अतिथि के तौर पर. उसकी प्रेमिका जो कभी उसकी प्रेरणा
रही, सामने मास्टरनी के रूप में खड़ी है. समय ने दोनों
के बीच दूरियां बढ़ा दी थीं जो इस गीत के समाप्त होते
ही दूर हो जाने वाली हैं. मार्मिक दृश्य है. खुशी के आंसू
कैसे निकाले जाएँ ये अमरीश पुरी से सीखें बॉलीवुड के
भाई लोग.



गीत के बोल:

पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ पण्डित भया न कोय
ढाई अक्षर प्रेम का पढ़े सो पण्डित होय

तेरी तस्वीर को सीने से लगा रखा है
तेरी तस्वीर को सीने से लगा रखा है
तेरी तस्वीर को सीने से लगा रखा है
हमने दुनिया से अलग गाँव बसा रखा है
तेरी तस्वीर को सीने से लगा रखा है

मेरी किस्मत की लकीरों को सजाया तूने
मेरी किस्मत की लकीरों को सजाया तूने
एक नाचीज़ को फ़नकार बनाया तूने
मैंने हर बोल तेरा दिल में सजा रखा है
हमने दुनिया से अलग गाँव बसा रखा है

तेरी तस्वीर को सीने से लगा रखा है

मैं ने गीतों से छवि तेरी बनाई बरसों
मैं ने गीतों से छवि तेरी बनाई बरसों
दूर रह कर तुझे आवाज़ सुनाई बरसों
किसलिये तूने मुझे ग़ैर बना रखा है
हमने दुनिया से अलग गाँव बसा रखा है

तेरी तस्वीर को सीने से लगा रखा है

तुझको दिन रात खयालों में है पूजा मैंने
तुझको दिन रात खयालों में है पूजा मैंने
तेरे पैरों के निशाँ पर किया सजदा मैं ने
बन्दगी में तेरी सर अब भी झुका रखा है
बन्दगी में तेरी सर अब भी झुका रखा है
हमने दुनिया से अलग गाँव बसा रखा है

तेरी तस्वीर को सीने से लगा रखा है
……………………………………………….
Teri tasveer ko sense se laga rakha-Sawan ko aane do 1979

Artists: Arun Govil, Zarina Wahab

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