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May 1, 2020

जागते रहो-जस्ट मैरिड २००७

चौकीदार की आवाजों से शुरू होता ये गीत है फिल्म
जस्ट मैरिड से जो २००७ की फिल्म है. इसका निर्देशन
मग्न गुलज़ार ने किया है.

दिन का पोटली और रात की थैली अब गीतों में भी
सुनाई देने लगे हैं. आधुनिक गीतों का दौर है और इस
बहाने हमें विलायती गायन वाला छौंक देसी गीतों में
बखूबी प्राप्त होता है. सन २००५ तक लूप संगीत वाला
युग दरवाजे पर ठक-ठक करने लगा था.

गुलज़ार की रचना को श्रवणते हैं सोनू निगम की आवाज़
में. प्रीतम चक्रवर्ती इस गीत के संगीतकार हैं. इस गाने
को आपने एक ना एक बार अवश्य सुना होगा.



गीत के बोल:

जागते रहो हथेली खुलने लगी
कि रात अब उड़ने लगी
कहानियों की
शाम तो चली सुलगने दो ज़रा शब को
कि ख़ुशबू आयेगी सबको
हरे ख़्वाबों की

पहला पहला ये क़दम है
चाहत है पर ज़ोर कम है
पहली पहली रात है ये
आगे जो हो
आख़िर अगर ठीक है तो सभी ठीक है
जागते रहो

जब रात की थैली खुले
क्या जानिये क्या कुछ मिले
हो ओ ओ जब रात की थैली खुले
क्या जानिये क्या कुछ मिले
शहनाई भी सन्नाटे भी
सपने कहीं खर्राटे भी
छलके छलके नैन भी हैं
बेचैनी में चैन भी है
पहल पहली रात है ये
आगे जो हो
आख़िर अगर ठीक है तो सभी ठीक है
जागते रहो

ये रात है फ़रमान की
उम्मीद की अरमान की
हो ये रात है फ़रमान की
उम्मीद की अरमान की
शिकवे गिले नाराज़गी
आँखों में ओस की ताज़गी
क़तरा क़तरा जब घुलेगी
निखरी निखरी शब खुलेगी
पहली पहली रात है ये
आगे जो हो
आख़िर अगर ठीक है तो सभी ठीक है

जागते रहो हथेली खुलने लगी
कि रात अब उड़ने लगी
कहानियों की
शाम तो चली सुलगने दो ज़रा शब को
कि ख़ुशबू आयेगी सबको
हरे ख़्वाबों की

पहला पहला ये क़दम है
चाहत है पर ज़ोर कम है
पहली पहली रात है ये
आगे जो हो
आख़िर अगर ठीक है तो सभी ठीक है
जागते रहो हथेली खुलने लगी
कि रात अब उड़ने लगी
कहानियों की
जागते रहो
………………………………………………………
Jagte raho-Just married 2007

Artists: Fardeen Khan, Esha Deol

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Apr 7, 2009

गुदगुदी-जस्ट मैरिड २००६

कभी कभार कुछ अनजान सी, या आ के तुरंत चल पड़ी फिल्मों में
कुछ अच्छे गाने होते हैं जो हम देख नहीं पाते, देखने को नहीं मिलते
या सुनाई नहीं देते। ऐसी फिल्में पहले भी आई, अभी भी आ रही हैं
और आगे भी आती रहेंगी। इस फ़िल्म का नाम वैसे तो जरूर सुनाई
दिया था-जस्ट मैरिड। नाम सुनाई देने के पीछे प्रमुख कारण था इस
फिल्म की निर्देशिका-मेघना गुलज़ार जो गुलज़ार की सुपुत्री हैं।

इसमें फरदीन खान और ईशा देओल मुख्य कलाकार हैं। नई गायिका
सुनिधि चौहान की आवाज़ में ये एक धीमा और कर्णप्रिय नगमा है।
इसके बोल लिखे हैं गुलज़ार ने और धुन बनाई है प्रीतम चक्रवर्ती ने।
प्रीतम आजकल काफ़ी फिल्मों में संगीत दे रहे हैं। वे अपने संगीत के
लिए कम और दूसरे कारणों, (जिनके लिए कभी अन्नू मलिक विख्यात
थे) , के लिए ज्यादा जाने जाते हैं।



गाने के बोल:

जब भी ज़रा तुमने छुआ
ज़िन्दगी हलकी सी गुदगुदी कर गई
जब भी ज़रा तुमने छुआ
ज़िन्दगी हलकी सी गुदगुदी कर गई

छलकी हुई थी पहले से में
थोडी से और भी भर गई
और भी भर गई
गुदगुदी कर गई
गुदगुदी कर गई

सोचा था तुमसे मिले तो
पाँव ज़मीन पे पड़ेंगे
यह क्या पता था के फिर से
ख़्वाबों में उड़ने लगेंगे
सोचा था तुमसे मिले तो
पाँव ज़मीन पे पड़ेंगे
यह क्या पता था के फिर से
ख़्वाबों में उड़ने लगेंगे

डर तो रही थी पहले से मैं
थोडी सी और भी डर गई
और भी भर गई
गुदगुदी कर गई
गुदगुदी कर गई

अनजान लोगों का मिलना
पहले भी होते रहा है
पढ़ के बताओ सितारे
यह रिश्ता कहाँ पे लिखा है
अनजान लोगों का मिलाना
पहले भी होते रहा है
पढ़ के बताओ सितारे
यह रिश्ता कहाँ पे लिखा है

मरने लगी थी पहेले से मैं
थोडी सी और भी मर गई
और भी भर गई
गुदगुदी कर गई
गुदगुदी कर गई

जब भी ज़रा तुमने छुआ
ज़िन्दगी हलकी सी गुदगुदी कर गई
जब भी ज़रा तुमने छुआ
ज़िन्दगी हलकी सी गुदगुदी कर गई

छलकी हुई थी पहले से में
थोडी से और भी भर गई
और भी भर गई
गुदगुदी कर गई
गुदगुदी कर गई
गुदगुदी कर गई
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Gudgudi-Just married 2006

Artists: Fardeen Khan, Isha Deol

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