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Dec 18, 2016

ऐ मेरे दोस्त ऐ मेरे हमदम-मेहरबान १९६७

जिंदगी के किस मोड पर कौन मिल जाए और कब कौन बिछड
जाए ये विधाता ही जानता है. जिंदगी के ठहराव को गति मिलती
है जब कोई अपना सा इतना करीब आ जाता है कि उसका चेहरा
धुंधला दिखाई देने लगे. आपके जीवन में कोई ना आये तो ठीक
मगर कोई आ कर इस तरह चला जाए कि शून्य सा पैदा कर जाए
तो उसे भुला पाना ताउम्र संभव नहीं होता.

जैसा कि फिल्म दोस्ती का गीत बतलाता है-सुख है एक छाँव ढलती
आती है जाती है, दुःख तो अपना साथ है, यही कड़वा सच है जीवन
का. दर्द ही हमें खुशियों के उन गिनती के पलों की अहमियत को
समझाता चलता है और हम भरते जाते हैं अपने अनुभवों का टोकरा.

सुनते हैं एक शानदार गीत फिल्म मेहरबान से रफ़ी का गाया हुआ
जिसे लिखा है राजेंद्र कृष्ण ने और धुन बनाई रवि ने. अशोक कुमार
पर इसे फिल्माया गया है. गीत पार्श्व में बज रहा है मगर आपको
ऐसा ही लगेगा मानो परदे का कलाकार इसे गा रहा हो.





मुझे जब अपनी गुजरी जिंदगानी याद आती है
तो बस एक मेहरबान की मेहरबानी याद आती है

ऐ मेरे दोस्त ऐ मेरे हमदम
मेरे मोहसिन मेरे करम फरमा
वो मेरा गम था या खुशी मेरी
हर जगह तूने मेरा साथ दिया
ऐ मेरे दोस्त ऐ मेरे हमदम
मेरे मोहसिन मेरे करम फरमा
वो मेरा गम था या खुशी मेरी
हर जगह तूने मेरा साथ दिया
ऐ मेरे दोस्त ऐ मेरे हमदम

कौन था तू कहाँ से आया था
आज तक मैंने ये नहीं जाना
तू मेरी रूह था मगर मैंने
तेरे जाने के बाद पहचाना

ऐ मेरे दोस्त ऐ मेरे हमदम
मेरे मोहसिन मेरे करम फरमा
वो मेरा गम था या खुशी मेरी
हर जगह तूने मेरा साथ दिया
ऐ मेरे दोस्त ऐ मेरे हमदम

तू सुदामा भी है कन्हैया भी
कन्हैया कन्हैया
तू सुदामा भी है कन्हैया भी
तू भिखारी भी और दाता भी
तेरे सौ रंग हैं मेरे प्यारे
तू ही प्यासा है तू ही झरना भी

ऐ मेरे दोस्त ऐ मेरे हमदम
मेरे मोहसिन मेरे करम फरमा
वो मेरा गम था या खुशी मेरी
हर जगह तूने मेरा साथ दिया
ऐ मेरे दोस्त ऐ मेरे हमदम

तू मेरी बेबसी के आलम में
जब कभी मुझको याद आता है
सोच कर मेहरबानियाँ तेरी
दिल मेरा बैठ बैठ जाता है
आखिरी अर्ज मेरी तुझसे है
हर खता मेरी दरगुज़र करना
वो घडी आ रही है जब मुझको
इस ज़माने से है सफर करना

ऐ मेरे दोस्त ऐ मेरे हमदम
ऐ मेरे दोस्त ऐ मेरे हमदम
ऐ मेरे दोस्त ऐ मेरे हमदम
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Ae mere dost ae mere hamdam-Meherbaan 1967

Artists: Ashok Kumar

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