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Jul 13, 2020

मोरी छम-छम बाजे पायलिया-घूंघट १९६०

आज अभिनेत्री बीना राय का जन्मदिन है. हिंदी फिल्म इतिहास
की प्रभावशाली अभिनेत्रियों में से एक बीना राय श्वेत श्याम युग
की फिल्मों-अनारकली, घूंघट और रंगीन युग की ताजमहल के
ज़रिये दर्शकों के दिल में अमिट छाप छोड़ गयीं. जिन फिल्मों के
नाम हमने लिए वे ज्यादा चर्चित फ़िल्में हैं, उसके अलावा भी
उन्होंने कई यादगार भूमिकाएं की हैं.

किशोर साहू की फिल्म कलि घटा उनकी पहली हिंदी फिल्म है.
१९६८ की अपना घर अपनी कहानी उनकी अंतिम हिंदी फिल्म
है.

फिल्म घूंघट के लिए उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार मिला. आज सुनते
हैं इस फिल्म से एक चर्चित गीत लता मंगेशकर का गाया हुआ.





गीत के बोल:

मोरी छम-छम बाजे पायलिया
मोरी छम-छम बाजे पायलिया
आज मिले हैं मोरे साँवरिया
आज मिले हैं मोरे साँवरिया
मोरी छम-छम बाजे पायलिया
मोरी छम-छम बाजे पायलिया

बड़ी मुद्दत में दिल के सहारे मिले
आज डूबे हुओं को किनारे मिले
बड़ी मुद्दत में दिल के सहारे मिले
आज डूबे हुओं को किनारे मिले
कभी मुस्क्राए मन कभी शरमाए मन
कभी नैनों की छलके गागरिया
मोरी छम-छम बाजे पायलिया
मोरी छम-छम बाजे पायलिया
आज मिले हैं मोरे साँवरिया
मोरी छम-छम बाजे पायलिया
मोरी छम-छम बाजे पायलिया

चाँद तारों के गहने पहना दो मुझे
कोई आ के दुल्हनिया बना दो मुझे
चाँद तारों के गहने पहना दो मुझे
कोई आ के दुल्हनिया बना दो मुझे
नहीं बस में जिया कैसा जादू किया
पिया आज हुई रे मैं तो बावरिया

मोरी छम-छम बाजे पायलिया
मोरी छम-छम बाजे पायलिया
आज मिले हैं मोरे साँवरिया
मोरी छम-छम बाजे पायलिया
मोरी छम-छम बाजे पायलिया
………………………………………………
Mori chham chham baaje payaliya-Ghoonghat 1960

Artist; Beena Rai

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Jul 10, 2020

मैं खुशनसीब हूं मुझको किसी का(लता)-टॉवर हाउस १९६२

आज १० जुलाई को जिन फ़िल्मी हस्तियों के जन्मदिन हैं वे
हैं-संगीतकार तिमिर बरन, गायिका परवीन सुल्ताना,
आलोकनाथ(बाबूजी), सुनील गावस्कर(मालामाल १९८८)
और गीतकार असद भोपाली.

इनके अलावा कई ऐसे कलाकार हैं जिनको लाईमलाईट
नसीब नहीं होती मगर जो इस फिल्म उद्योग से जुड़े रहे
या जुड़े हैं. चमकते चेहरों के जन्मदिन याद रखने की इस
दुनिया को आदत है अतः ये दस्तूत तो जारी ही रहेगा.

अब आप सोच रहे होंगे इस सूची में सुनील गावस्कर का
नाम क्यूँ हैं. उस फिल्म का नाम हमने आपको ऊपर दे
दिया है जिसमें सुनील गावस्कर की विशेष भूमिका थी.

सन १९६२ की सस्पेंस फिल्म टॉवर हाउस का लता का
गाया गीत काफी चर्चित और प्रसिद्ध हुआ था. इसे आज
भी सुना जा सकता है. इसी फिल्म से असद भोपाली का
लिखा एक और गीत सुनते हैं लाता मंगेशकर का गाया
हुआ. संगीतकार हैं रवि.



गीत के बोल:

मैं खुशनसीब हूं मुझको किसी का प्यार मिला
मैं खुशनसीब हूं मुझको किसी का प्यार मिला
बड़ा हसीं मेरे दिल का राज़दार मिला
मैं खुशनसीब हूं

किसी ने पूरे किये आज प्यार के वादे
किसी ने पूरे किये आज प्यार के वादे
मेरी ये वफ़ा का सिला मुझको शानदार मिला
मेरी ये वफ़ा का सिला मुझको शानदार मिला

मैं खुशनसीब हूं मुझको किसी का प्यार मिला
मैं खुशनसीब हूं
………………………………………………..
Main khushnaseeb hoon(Lata)-Tower House 1962

Artists: Ajit, Shakila,

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Jan 25, 2020

हज़ार बातें कहे ज़माना-घटना १९७४

सन १९७४ की फिल्म घटना से एक गीत सुनते हैं जो
लता मंगेशकर की आवाज़ में है. इसे लिखा और संगीत
से संवारा है रवि ने.

ऐसे कम गीत हैं जिहने संगीतकार ने खुद लिखा हो. ये
कारनामा सबसे ज्यादा रवींद्र जैन के नाम दर्ज है.




गीत के बोल:

हज़ार बातें कहे ज़माना
मेरी वफ़ा पे यकीन रखना
हज़ार बातें कहे ज़माना
मेरी वफ़ा पे यकीन रखना
हर इक अदा में है बेगुनाही
मेरी अदा पे यकीन रखना
हज़ार बातें कहे ज़माना

मेरी मोहब्बत की ज़िन्दगी को
नज़र न लग जाए इस जहां की
नज़र न लग जाए इस जहां की
यही सदा है धड़कते दिल की
मेरी सदा पे यकीन रखना
हज़ार बातें कहे ज़माना
मेरी वफ़ा पे यकीन रखना
हज़ार बातें कहे ज़माना

किसी को हँसता न देख पाये
अजीब शय है ये बैरी दुनिया
किसी को हँसता न देख पाये
अजीब शय है ये बैरी दुनिया
अजीब शय है ये बैरी दुनिया
ये बेमुरव्वत है बेवफा है
न बेवफा पे यकीन रखना
हज़ार बातें कहे ज़माना

नज़र में रहना है खुशनसीबी
नज़र से गिरना है बेहयाई
नज़र से गिरना है बेहयाई
हया है औरत का एक गहना
मेरी हया पे यकीन रखना
हज़ार बातें कहे ज़माना
……………………………………..
Hazar batein kahe zamana-Ghatna 1974

Artist:

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Jan 23, 2020

मुझे गले से लगा लो-आज और कल १९६३

गले से लगा लो हिट्स के अंतर्गत एक गीत पेश है
फिल्म आज और कल से. एक लोकप्रिय गीत हमराही
फिल्म से आप शायद आपने नहीं सुना है उसे भी हम
जल्द सुनवायेंगे.

गले लगना और गले पड़ना दो संभावित केटेगरी हो
सकती हैं गले से सम्बंधित गानों के लिए. गले लगना
एक सहज प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसका जानवर भी
इस्तेमाल किया करते हैं. ढेर सारी क्रियाओं का संगम
प्रक्रिया कहलाता है.

गीत एक बार फिर से साहिर लुधियानवी का है और
इसका संगीत तैयार किया है रवि ने. आशा भोंसले इस
गीत की गायिका हैं साथ में रफ़ी की आवाज़ भी है.




गीत के बोल:

मुझे गले से लगा लो बहुत उदास हूँ मैं
गमे जहां से छुड़ा लो बहुत उदास हूँ मैं
मुझे गले से लगा लो

नज़र में तीर से चुभते है अब नज़रो से
मैं थक गई हूँ सभी टूट के सहारों से
अब और बोझ न डालो बहुत उदास हूँ मैं
गमे जहां से छुड़ा लो बहुत उदास हूँ मैं
मुझे गले से लगा लो

बहुत सही ग़म-ए-दुनिया मगर उदास न हो
बहुत सही ग़म-ए-दुनिया मगर उदास न हो
करीब है शब-ए-ग़म की सहर उदास न हो
बहुत सही ग़म-ए-दुनिया

सितम के हाथ की तलवार टूट जाएगी
ये ऊँच नीच की दीवार टूट जाएगी
तुझे कसम है मेरी हमसफ़र उदास न हो
तुझे कसम है मेरी हमसफ़र उदास न हो
बहुत सही ग़म-ए-दुनिया

ना जाने कब ये तरीका ये तौर बदलेगा
सितम का ग़म का मुसीबत का दौर बदलेगा
मुझे जहां से उठा लो बहुत उदास हूँ मैं
गमे जहां से छुड़ा लो बहुत उदास हूँ मैं

बहुत सही ग़म-ए-दुनिया मगर उदास न हो
करीब है शब-ए-ग़म की सहर उदास न हो
बहुत सही ग़म-ए-दुनिया
…………………………………………….
Mujhe gale se laga lo-Aaj aur Kal 1963

Artist: Nanda, Sunil Dutt

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Jan 14, 2020

ये वादियाँ ये फ़िज़ायें-आज और कल १९६३

खामोशियाँ की सदाएं भी बुलाया करती हैं. अक्सर
ये ज्यादा गहरी होती हैं अगर ध्यान से सुनने वाला
हो. फिल्म ख़ामोशी(१९९८) तो इसी बात को समर्पित
फिल्म है.

सुनते हैं फिल्म आज और कल से लोकप्रिय गीत
जिसे साहिर लुधियानवी ने लिखा है और जिसका
संगीत रवि ने तैयार किया है. इसे मोहम्मद रफ़ी
ने गाया है.

गीत को जिस श्रेणी में आप चाहें फिट कर सकते हैं-
पहाड़ हिट्स, नदी हिट्स, व्हील चेयर हिट्स, डिज़ाईन
वाला स्वेटर हिट्स, बाग-बगीचा हिट्स, झरना हिट्स
और ना सूझे तो सुनील दत्त हिट्स और नंदा हिट्स
में तो गिना जाता ही है ये.




गीत के बोल:

ये वादियाँ ये फिजायें बुला रही हैं तुम्हें
ये वादियाँ ये फिजायें बुला रही हैं तुम्हें
खामोशियों की सदाएं बुला रही है तुम्हें
ये वादियाँ ये फिजायें बुला रही हैं तुम्हें

तरस हैं जवां फूल होंठ छूने को
तरस हैं जवां फूल होंठ छूने को
मचल मचल के हवाएं बुला रहीं हैं तुम्हें
मचल मचल के हवाएं बुला रहीं हैं तुम्हें
खामोशियों की सदाएं बुला रही है तुम्हें
ये वादियाँ ये फिजायें बुला रही हैं तुम्हें

तुम्हारी ज़ुल्फों से खुशबू की भीख लेने को
तुम्हारी ज़ुल्फों से खुशबू की भीख लेने को
झुकी झुकी सी घटायें बुला रही है तुम्हें
झुकी झुकी सी घटायें बुला रही है तुम्हें
खामोशियों की सदाएं बुला रही है तुम्हें
ये वादियाँ ये फिजायें बुला रही हैं तुम्हें

हसीन चम्पई पैरों को जब से देखा है
हसीन चम्पई पैरों को जब से देखा है
नदी की मस्त अदायें बुला रही है तुम्हें
नदी की मस्त अदायें बुला रही है तुम्हें
खामोशियों की सदाएं बुला रही है तुम्हें
ये वादियाँ ये फिजायें बुला रही हैं तुम्हें

मेरा कहा न सुनो इनकी बात तो सुन लो
मेरा कहा न सुनो इनकी बात तो सुन लो
हर एक दिल की दुआयें बुला रही है तुम्हें
हर एक दिल की दुआयें बुला रही है तुम्हें
खामोशियों की सदाएं बुला रही है तुम्हें
ये वादियाँ ये फिजायें बुला रही हैं तुम्हें
……………………………………………….
Ye wadiyan ye fizayen bula rahi-Aaj aur Kal 1963

Artist: Sunil Dutt, Nanda

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Dec 27, 2019

सोच समझ ले ओ परवाने-अपना घर १९६०

ये जो फ़िल्में हैं जिनके नाम में घर शब्द आता है
उसे कहीं कहीं मैंने ghar की जगह ghur लिखा देखा.
हिंदी में घुर पढ़ने में आता. घर घर की कहानी बन
जाती घुर घुर की कहानी.

मधुमती, लक्ष्मी छाया, फरयाल इत्यादि के अलावा भी
कई ऐसी सहायक अभिनेत्रियां हैं जिन्होंने अपने होने
का आभास दिया फिल्म उद्योग को. प्रस्तुत गीत कम्मो
नाम की अभिनेत्री पर फिल्माया गया है.

गीत प्रेम धवन का है और इसकी धुन तैयार की है
रवि ने. गायिका को आप पहचान ही गए होंगे.



गीत के बोल:

सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
तेरी नज़र पहचान गई
मै इतनी तो नादान नहीं
सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं

फिर न कहना इन जुल्फों के फंदे में हम आ गये
बड़े बड़े दिल वाले इन नज़रों का धोखा खा गये
फिर न कहना इन जुल्फों के फंदे में हम आ गये
बड़े बड़े दिल वाले इन नज़रों का धोखा खा गये
कौन सा ऐसा दिल वाला है
कौन सा दिल वाला है जो मुझ पर कुर्बान नहीं

सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
तेरी नज़र पहचान गई
सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं

जल जाना आसान नहीं
तेरी नज़र पहचान गयी
मै इतनी तो नादाँ नहीं
सोच समझे ओ परवाने
जल जाना आसान नाही

इस महफ़िल में जो भी आया वो दीवाना हो गया
दुनिया तो क्या अपने से भी वो बेगाना हो गया
इस महफ़िल में जो भी आया वो दीवाना हो गया
दुनिया तो क्या अपने से भी वो बेगाना हो गया

ये भी अदायें ना जाने तू
ये भी अदायें ना जाने तू इतना तो अनजान नहीं

सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
तेरी नज़र पहचान गई
सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
.................................................................
Soch samajh le o parwane-Apna Ghar 1960

Artists: Kammo, Premnath

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Dec 26, 2019

आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा-अपना घर १९६०

कहते हैं जो अपना स्वयं सम्मान नहीं करता उसका
सम्मान दूसरे भी नहीं करते. कुछ वैसे ही शरीर की
इन्द्रियों का भी उचित सम्मान आवश्यक है. ये तो
व्यक्ति पे स्वयं निर्भर है कि वो इनका उपयोग किस
प्रकार से और कितना करे..

शरीर की प्रमुख इन्द्रियों में आँखों को सबसे उच्च
स्थान दिया गया है. ग्रहण के दिन सूर्य और चन्द्रमा
को सीधे आँखों से ना देखें. धार्मिक दृष्टि से देखें या
वैज्ञानिक दृष्टि से, दोनों ही मामले से ये बात सटीक
है.

सुनते हैं फिल्म अपना घर से अगला गीत जिसे
मोहम्मद रफ़ी और आरती मुखर्जी ने गाया है.

प्रेम धवन की रचना है और रवि शंकर शर्मा उर्फ रवि
का संगीत.




गीत के बोल:

कोई न हो इस जग में दाता
आँखों से मजबूर
दुनिया में रह कर भी हम है
इस दुनिया से दूर

आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
जिनसे जग उजियारा
अन्धों पर क्या गुज़रे
ये क्या जाने आँखों वाला
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा

बाबा बाबा बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा

औरों की तो रात अँधेरी
अपना दिन भी अँधेरा
औरों की तो रात अँधेरी
अपना दिन भी अँधेरा
हम है जहाँ पर उस दुनिया में
कभी न हुआ सवेरा
सूरज चाँद सितारे सबको
सूरज चाँद सितारे सबको
देखा हमने काला

आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
बाबा बाबा बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा

कदम कदम पर ठोकर खाये
राह चली न जाये
कदम कदम पर ठोकर खाये
राह चली न जाये
फिरते है अपने कंधे पर
अपनी लाश उठाये
जीवन भी इक बोझ बना है
जीवन भी इक बोझ बना है
कब तक जाये संभाला

आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
बाबा बाबा बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा

कब तक यूँ ही सहते जायें
दुनिया के तानों को

नूर तो छीना दाता बहरा भी कर दे कानों को
देख लिया जी भर के हमने
तेरा खेल निराला तेरा खेल निराला
देख लिया जी भर के हमने
तेरा खेल निराला

आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
बाबा बाबा बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
जिनसे जग उजियारा
अन्धों पर क्या गुज़रे
ये क्या जाने आँखों वाला
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
…………………………………………….
Aankhen badi hain nemat-Apna Ghar 1960

Artists:

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Dec 24, 2019

कैसे भीगे भीगे-अपना घर १९६०

आइये सुनें एक साइकिल सोंग. साईकिल सोंग वो होता
है जिसमें साईकिल गाती है. श्रेणी बनाने वालों की साइटों
से हमने ऐसा ही समझा, क्या किया जाए. वो तो हमें
भी समझ आ रहा है गाना किसने गाया मगर जब श्रेणी
बनाने के तरीके देखते हैं तो सर चकराता है. किसी गीत
में नायक ने सीधा हाथ ऊपर उठाया उसके लिए अलग
श्रेणी, उल्टा हाथ ऊपर उठाया उसके लिए अलग श्रेणी.

नायक नायिका साइकिल पर चले जा रहे हैं. किसी ज़माने
में साईकिल भी स्टेटस सिम्बल हुआ करती थी. प्रीति सागर
के पिताजी मोती सागर को भी किसी ज़माने में अभिनय
का शौक हुआ करता था. मल्हार, मक्खीचूस, बर्मा रोड,
छोटी छोटी बातें और अपना घर उनके अभिनय वाली कुछ
उल्लेखनीय फ़िल्में हैं.

सुनते हैं सुमन कल्यानपुर और रफ़ी का गाया गीत जिसे
लिखा है प्रेम धवन ने और इसकी धुन रवि ने बनाई है.
गीत के अंतरे से आपको अनाड़ी फिल्म के गीत का
अंतरा याद आएगा-वो चाँद खिला वो तारे हँसे.



गीत के बोल:

कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
आओ छेड़ दे तराने ज़रा प्यार के
देखो काली काली ये घटायें
चली जायें ना जी हमको पुकार के
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
आओ छेड़ दे तराने ज़रा प्यार के
देखो काली काली ये घटायें
चली जायें ना जी हमको पुकार के
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे

तुम साथ रहो जो मेरे
मैं राहें नई बना लूं
तेरी राहों के कांटे
अपनी पलकों से उठा लूँ
तुम साथ रहो जो मेरे
मैं राहें नई बना लूं
तेरी राहों के कांटें
अपनी पलकों से उठा लूँ
तू मेरा प्यार मेरी बहार
मेरा सिंगार सजना

कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
आओ छेड़ दे तराने ज़रा प्यार के
देखो काली काली ये घटायें
चली जायें ना जी हमको पुकार के
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे

इस दुनिया की नज़रों से
ओ दूर कहीं खो जाएँ
जी भर के जहां दिल झूमे
हम गीत मिलन के गायें
इस दुनिया की नज़रों से
ओ दूर कहीं खो जाएँ
जी भर के जहां दिल झूमे
हम गीत मिलन के गायें
सारे जग को छोड़
लिया तुझ से जोड़
जीवन ये मैंने अपना

कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
आओ छेड़ दे तराने ज़रा प्यार के
देखो काली काली ये घटायें
चली जायें ना जी हमको पुकार के
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे

हम इक मंज़िल के राही
बिछड़ेंगे कभी न मिल के
दुनिया वाले क्या जानें
अरमान हमारे दिल के
हम इक मंज़िल के राही
बिछड़ेंगे कभी न मिल के
दुनिया वाले क्या जानें
अरमान हमारे दिल के
कहो दिल की बात
दिन हो या रात
रहूँ तेरे साथ सजना

कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
आओ छेड़ दे तराने ज़रा प्यार के
देखो काली काली ये घटायें
चली जायें ना जी हमको पुकार के
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे

हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
…………………………………………..
Kaise bheege bheege-Apna ghar 1960

Artists: Moti Sagar, Nanda

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Nov 29, 2019

लो आ गई उनकी याद-दो बदन १९६६

सन १९६६ की फिल्म दो बदन का निर्देशन राज खोसला
ने किया था. सस्पेंस फिल्मों से अलग राज खोसला ने
एक गंभीर प्रेम कहानी को भी बखूबी संभाला.

फिल्म का अंत दुखांत है और इसमें दर्द भरे गीत ज्यादा
हैं. ऐसे कथानकों को बिना हास्य प्रसंगों और हलके-फुल्के
गीतों के सफल करा पाना आसान काम नहीं होता.

सुनते हैं फिल्म से लता मंगेशकर का गाया हुआ एक
दर्द भरा गीत. गीत शकील का है और संगीत रवि का.





गीत के बोल:

लो आ गई उनकी याद
वो नहीं आये
लो आ गई उनकी याद
वो नहीं आये

दिल उन को ढूंढता है
ग़म का सिंगार कर के
आँखें भी थक गई हैं
अब इंतज़ार कर के
आँखें भी थक गई हैं
अब इंतज़ार कर के
इक साँस रह गई है
वो भी न टूट जाये

लो आ गई उनकी याद
वो नहीं आये

रोती हैं आज हम पर
तन्हाईयाँ हमारी
रोती हैं आज हम पर
तन्हाईयाँ हमारी
वो भी न पायें शायद
परछाईयां हमारी
बढ़ते ही जा रहे हैं
मायूसियों के साये

लो आ गई उनकी याद
वो नहीं आये

लौ थरथरा रही है
अब शम्मे जिंदगी की
उजड़ी हुई मुहब्बत
मेहमां है दो घड़ी की
उजड़ी हुई मुहब्बत
मेहमां है दो घड़ी की
मर कर ही अब मिलेंगे
जी कर तो मिल न पाये

लो आ गई उनकी याद
वो नहीं आये
लो आ गई उनकी याद
वो नहीं आये
……………………………………………
Lo aa gayi unki yaad-Do badan 1966

Artists: Asha Parekh,

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Nov 28, 2019

मत जइयो नौकरिया छोड़ के-दो बदन १९६६

नायिका के सौजन्य से नायक को नौकरी मिल जाती
है. नायिका गीत के ज़रिये निवेदन कर रही है कि वो
नौकरी छोड़ के ना जाए.

नौकर, नौकरी शब्दों का प्रयोग गीतों और फिल्मों के
नामों में ज्यादा नहीं हुआ है. इस पर अभी और काम
किया जाना बाकी है बॉलीवुड में.

शकील बदायूनीं की रचना को आशा भोंसले ने रवि की
धुन पर गाया है. आशा पारेख और मनोज कुमार पर
फिल्माया गया ये गीत लोकप्रिय रहा है अपने समय में.




गीत के बोल:

मत जइयो नौकरिया छोड़ के
तोरे पैयां पडूं बलमा
मत जइयो नौकरिया छोड़ के
तोरे पैयां पडूं बलमा
मत जइयो नौकरिया छोड़ के
तोरे पैयां पडूं बलमा
तोरे पैयां पडूं मैं बिनती करूँ
तोरे पैयां पडूं मैं बिनती करूँ
मत जइयो नौकरिया छोड़ के
तोरे पैयां पडूं बलमा
मत जइयो नौकरिया छोड़ के

देख पिया परदेस में ऐसी
रूप की छाया नाहीं मिलेगी
देख पिया परदेस में ऐसी
रूप की छाया नाहीं मिलेगी
पैसा रुपया मिल जायेगा

प्रेम की माया नाहीं मिलेगी
प्रीत नहीं तो कुछ भी नहीं है
साँची कहूँ बलमा

मत जइयो नौकरिया छोड़ के
तोरे पैयां पडूं बलमा
मत जइयो नौकरिया छोड़ के

प्रीत करो और रीत न जानो
तुम तो हो सैयां एक अनाड़ी
प्रीत करो और रीत न जानो
तुम तो हो सैयां एक अनाड़ी
भूल भई ये मोसे प्रीतम
जो मैं जियरवा तोसे हारी
जाओ मैं तुम से ना बोलूंगी
साँची कहूँ बलमा

मत जइयो नौकरिया छोड़ के
तोरे पैयां पडूं बलमा
मत जइयो नौकरिया छोड़ के

दीपक लई के ढूंढ लो जग में
हमसी मोहनिया ना पाओगे
दीपक लई के ढूंढ लो जग में
हमसी मोहनिया ना पाओगे
जिस के गोरे गाल पे तिल हो
ऐसी सजनिया ना पाओगे
हम से बिछड़ के पछताओगे

साँची कहूँ बलमा

मत जइयो नौकरिया छोड़ के
तोरे पैयां पडूं बलमा
मत जइयो नौकरिया छोड़ के
……………………………………
Mat jaiyo naukariya chhod ke-Do badan 1966

Artists: Asha Parekh, Manoj Kumar

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Nov 27, 2019

जब चली ठंडी हवा-दो बदन १९६६

ठण्ड के मौसम में ठंडी हवा चलती है तो ठण्ड के
उल्लेख वाले गाने याद आना लाजमी है. Eyes-creem
भी याद आती है. जी हाँ, एक पार्लर पर मैंने यही
लिखा देखा था. पब्लिक काफी इनोवेटिव है भाषा
को ले कर.

सुनते हैं फिल्म दो बदन से एक गीत आशा भोंसले का
गाया हुआ. शकील बदायूनीं की रचना है और रवि का
संगीत. आशा पारेख इसे परदे पर गा रही हैं. गजब का
सिंक्रोनाईजेशन है बलखाती बालाओं और फूलों के बीच.
हवा काफी तेज चल रही है इसलिए फूल लहरा रहे हैं.
बाकी के सब निर्देशक के इशारे पर लहरा रहे हैं सिवाय
नायिका के.





गीत के बोल:

जब चली ठंडी हवा जब उठी काली घटा
मुझको ए जाने वफ़ा तुम याद आये
जब चली ठंडी हवा जब उठी काली घटा
मुझको ए जाने वफ़ा तुम याद आये

जिन्दगी की दास्तां चाहे जितनी हो हंसी
बिन तुम्हारे कुछ नहीं बिन तुम्हारे कुछ नहीं
क्या मज़ा आता सनम आज भूले से कहीं
तुम भी आ जाते यहीं तुम भी आ जाते यहीं
ये बहारें ये फ़िज़ा देख कर ओ दिलरुबा
जाने क्या दिल को हुआ तुम याद आये

जब चली ठंडी हवा जब उठी काली घटा
मुझको ए जाने वफ़ा तुम याद आये

ये नज़ारे ये समा और फिर इतने जवां
हाय रे ये मस्तियाँ हाय रे ये मस्तियाँ
ऐसा लगता है मुझे जैसे तुम नज़दीक हो
इस चमन से जाने जां इस चमन से जाने जां
सुन के पी पी की सदा दिल धड़कता है मेरा
आज पहले के सिवा तुम याद आये

जब चली ठंडी हवा जब उठी काली घटा
मुझको ए जाने वफ़ा तुम याद आये
……………………………………………….
Jab chali thandi hawa-Do badan 1966

Artists: Asha Parekh,

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Nov 14, 2019

हम जब सिमट के आपकी-वक्त १९६५

आज सुनते हैं साहिर लुधियानवी का लिखा हुआ
एक रोमांटिक गीत फिल्म वक्त से जिसे रवि ने
संगीत में बाँधा है. आशा भोंसले गायिका हैं. गीत
फिल्माया गया है साधना और सुनील दत्त पर.

प्यार में वक्त ठहर जाता है और जब व्यक्ति निपट
के घडी देखता है तब तक काफी समय बीत चुका
होता है. इसलिये कहते हैं प्यार अंधा होता है उसे
घडी नहीं दिखाई देती.

बिना कोलगेट से दांत मांजे जब जहां की खुशबू एक
छोटे से मुंह में समा जाए तो समझो बत्ती पूरी तरह
से गुल है.





गीत के बोल:

हम जब सिमट के आपकी बाँहों में आ गये
हम जब सिमट के आपकी बाँहों में आ गये
लाखों हसीन ख्वाब निगाहों में आ गये
हम जब सिमट के आपकी बाँहों में आ गये
हम जब सिमट के आपकी बाँहों में आ गये

खुशबू चमन को छोड़ के साँसों में घुल गई
खुशबू चमन को छोड़ के साँसों में घुल गई
लहरा के अपने आप जवां जुल्फ खुल गई
हम अपनी दिलपसंद पनाहों में आ गये
हम जब सिमट के आप की बाँहों में आ गये
लाखों हसीन ख्वाब निगाहों में आ गये
हम जब सिमट के आपकी बाँहों में आ गये

कह दी है दिल की बात नज़रों के सामने
कह दी है दिल की बात नज़रों के सामने
इकरार कर लिया है बहारों के सामने
दोनों जहां आज गवाहों में आ गये
हम जब सिमट के आपकी बाँहों में आ गये
लाखों हसीन ख्वाब निगाहों में आ गये
हम जब सिमट के आपकी बाँहों में आ गये

मस्ती भरी घटाओं की परछाईयों तले
मस्ती भरी घटाओं की परछाईयों तले
हाथों में हाथ थाम के जब साथ हम चले
शाखों से फूल टूट के राहों में आ गये
हम जब सिमट के आपकी बाँहों में आ गये
लाखों हसीन ख्वाब निगाहों में आ गये
हम जब सिमट के आपकी बाँहों में आ गये
हम जब सिमट के आपकी बाँहों में आ गये
……………………………………………………..
Ham jab simat ke aapki bahon mein-Waqt 1965

Artists: Sunil Dutt, Sadhana

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Oct 26, 2019

मेरी जान ना सता तू-बहू बेटी १९६५

साहिर लुधियानवी की लिखी एक रचना सुनते हैं रफ़ी की आवाज़
में. हल्का फुल्का गीत है ये जिसे महमूद पर फिल्माया गया है.
फिल्म बहू बेटी के लिए इसका संगीत रवि ने तैयार किया है.

गौरतलब है महमूद के साथ सबसे ज्यादा शुभा खोटे और जयश्री टी
ने काम किया है. मुमताज़ भी उनके साथ १-२ फिल्मों में दिखलाई
दीं केवल तभी तक जब तक वे सहायक अभिनेत्री हुआ करती थीं.

खाने पीने की चीज़ों से नायिका के चहरे के हिस्सों की तुलना की
जा रही है. नार के साथ साथ शायद नायक को अनारदाना चूर्ण भी
याद आ रहा है, दूसरी पंक्ति में है-चैन पाऊँ कैसे? आखिरी अंतरे में
बाद प्यार से नायक खुद को गधा भी कह लेता है.




गीत के बोल:

मेरी जान ना सता तू मेरा जी ना जला तू
करूं क्या कुछ बता दे दिल पे नहीं है काबू
हाय मेरी जान ना सता तू मेरा जी ना जला तू
करूं क्या कुछ बता दे दिल पे नहीं है काबू
हाय मेरी जान ना सता तू

तेरे दांत अनार दाने तेरे गाल सेब जैसे
जो तू आँख से हो ओझल तो मैं चैन पाऊँ कैसे
तेरे दांत अनार दाने तेरे गाल सेब जैसे
जो तू आँख से हो ओझल तो मैं चैन पाऊँ कैसे
हो ज़रा सी खोल खिड़की अदा से दे दे झिड़की
खड़ा हूँ नाक खोले लेने को तेरी खुशबू
मेरी जान ना सता तू

तुझे दिल से चाहता हूँ मैं बुरा भी हूँ तो क्या है
तुझे तो समझ है काफी मैं गधा भी हूँ तो क्या है
तुझे दिल से चाहता हूँ मैं बुरा भी हूँ तो क्या है
तुझे तो समझ है काफी मैं गधा भी हूँ तो क्या है
ज़रा सुन ऐ परी रू हुई है क्यूँ खफा तू
मैं तो हूँ दास तेरा मुझसे छुडा न पल्लू
हाय मेरी जान ना सता तू मेरा जी ना जला तू
करूं क्या कुछ बता दे दिल पे नहीं है काबू हाय
मेरी जान ना सता तू

जो तू मेरी बात रख ले जो तू मेरी अर्ज़ माने
तू जहाँ की धुन पे कह दे मैं सुनाऊँ तुझको गाने
जो तू मेरी बात रख ले जो तू मेरी अर्ज़ माने
तू जहाँ की धुन पे कह दे मैं सुनाऊँ तुझको गाने
गाऊँ चीज़ वो पक्की रहे तू हक्की बक्की
या जो हो हुक्म तेरा जाऊं मैं हुम्बा डुम्बा हुक
हाय हाय हाय मेरी जान ना सता तू मेरा जी ना जला तू
करूं क्या कुछ बता दे दिल पे नहीं है काबू हाय
मेरी जान ना सता तू
..............................................................
Meri jaan na sata too-Bahu beti 1965

Artist: Mehmood, Mumtaz

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Sep 16, 2019

डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली-डोली १९६९

संगीतकार रवि के बहुत से गाने शादी-ब्याह के अवसर
पर बजाये जाते हैं: उदाहरण के लिए-

बाबुल की दुआएं लेती जा-नीलकमल
मेरा यार बना है दूल्हा-चौदहवीं का चाँद
आज मेरे यार की शादी है-आदमी सड़क का

आपको १९६९ की फिल्म डोली से एक गीत सुनवाते
हैं जिसे महेंद्र कपूर ने गाया है. ये गाना फिल्म का
टाईटल सॉंग भी है. राजेंद्र कृष्ण के बोल है और
इसे अभिनेत्री बबीता पर फिल्माया गया है. गीत
की एक पंक्ति सुहाग रात को भी समर्पित है और
बड़े सोबर तरीके से इस बात को कहा गया है.


   

गीत के बोल:

डोली चढ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
ओ डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
कैसी हसरत से बाबुल की देखे गली
डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के

दिल ना माने मगर आज जाना भी है
अपने साजन से वादा निभाना भी है
दिल ना माने मगर आज जाना भी है
अपने साजन से वादा निभाना भी है
सामने एक नई जिंदगी है मगर
सामने एक नई जिंदगी है मगर
पीछे गुज़रा हुआ इक ज़माना भी है

डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
ओ कैसी हसरत से बाबुल की देखे गली
डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के

डोलियाँ खुशनसीबों की सजती रहें
मेंहदियाँ सबके हाथों में रचती रहें
डोलियाँ खुशनसीबों की सजती रहें
मेंहदियाँ सबके हाथों में रचती रहें
फूल चेहरों के भी मुस्कुराते रहें
फूल चेहरों के भी मुस्कुराते रहें
चूडियाँ दुल्हनों की खनकती रहे

डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
ओ कैसी हसरत से बाबुल की देखे गली
डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के

कोई घूंघट हटा देगा जब रात को
भूल जायेगी मैके की हर बात को
कोई घूंघट हटा देगा जब रात को
भूल जायेगी मैके की हर बात को
अपने राजा की बाहों में सो जायेगी
अपने राजा की बाहों में सो जायेगी
ले के पलकों में खुशियों की बारात को
डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
कैसे हसरत से बाबुल की देखे गली
डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
…………………………………………….
Doli chadh ke dulhan sasural chali-Doli 1969

Artists:

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Sep 14, 2019

आज मै देखूँ जिधर जिधर-डोली १९६९

सावन के अंधे को हरा हरा ही सूझता है. प्यार अंधा
होता है. अन्धों का हाथी बहुत बड़ा होता है. एक शब्द
है एबरेशन.

प्यार में मूली के पत्ता भी पालक नज़र आते हैं इसलिए
इस बात में कहानी की नायिका का कोई दोष नहीं कि
उसे दो दो चंद क्यूँ नज़र आने लगे.

प्यार के बुखार का का कन्फर्मेशन करने के लिए गाने
के बोल भी ऐसे होना चाहिए जो इस बात की पुष्टि करें.

गीत राजेंद्र कृष्ण का है और संगीत रवि का. इसे गा
रही हैं आशा भोंसले.



गीत के बोल:

आज मैं देखूं जिधर जिधर ना जाने क्यूँ उधर उधर
मुझे दो दो चाँद नज़र आयें मेहताब दर मेहताब
आज मैं देखूं जिधर जिधर ना जाने क्यूँ उधर उधर
मुझे दो दो चाँद नज़र आयें मेहताब दर मेहताब

मत छेड़ पवन मेरे गेसू अब और किसी की है ये खुशबू
मत छेड़ पवन मेरे गेसू अब और किसी की है ये खुशबू
देखा है कभी तूने भी उसे जो कर गया मुझपे जादू

आज मैं देखूं जिधर जिधर ना जाने क्यूँ उधर उधर
मुझे दो दो चाँद नज़र आयें मेहताब दर मेहताब

आज मैं देखूं जिधर जिधर ना जाने क्यूँ उधर उधर
मुझे दो दो चाँद नज़र आयें मेहताब दर मेहताब

बदला बदला है ज़माना हर साथ है एक तराना
बदला बदला है ज़माना हर साथ है एक तराना
क्यूँ मुझको यकीं आता ही नहीं ये सच है या ख्वाब सुहाना

आज मैं देखूं जिधर जिधर ना जाने क्यूँ उधर उधर
मुझे दो दो चाँद नज़र आयें मेहताब दर मेहताब

आँखों में कटेंगी न रातें अब होंगी किसी से बातें
आँखों में कटेंगी न रातें अब होंगी किसी से बातें
आयेगा कोई लायेगा कोई अब रंग भरी बरसातें
आज मैं देखूं जिधर जिधर ना जाने क्यूँ उधर उधर
मुझे दो दो चाँद नज़र आयें मेहताब दर मेहताब
……………………………………………………….
Aaj main dekhoon jidhar-Doli 1969

Artist: Babita

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Sep 11, 2019

दांतो तले दबा कर होंठ-डोली १९६९

प्योर रैप गाने साठ के दशक में शायद किसी को हजम
नहीं होते इसलिए सेमी-रैप सरीखे कुछ ही गीत बने.
लीक से हट कर, मीटर से बाहर और अटपटी लाइनों
वाले गीत बनाना काफी रिस्की होता था. आज के युग
में नहीं है. गीत जिन्हें गुनगुनाने में आसानी हो वही
जनता को ज्यादा लुभाते हैं.

आज सुनते हैं ऐसा ही एक गीत जिसे रफ़ी ने गाया है.
हालांकि गीत तुकबंदी में बंधा है मगर रूटीन गीतों से
अलग है. बोल एक बार फिर से राजेंद्र कृष्ण के हैं और
संगीत रवि का.



गीत के बोल:

दांतों तले दबा कर होंठ आँखें कर के बड़ी बड़ी
खा जायेगी मुझको ऐसे देख रही है खड़ी खड़ी
एक हसीना लगा है जिसको उन्नीस ऊपर एक महीना
दांतों तले दबा कर होंठ आँखें कर के बड़ी बड़ी
खा जायेगी मुझको ऐसे देख रही है खड़ी खड़ी
एक हसीना लगा है जिसको उन्नीस ऊपर एक महीना

फूलों का रस पी पी कर हुस्न पे रंगत आई है
आँख में फितने चाल क़यामत शोख तबीयत पाई है
नागिन जैसी बलखाती बिजली जैसी लहराती
नागिन जैसी बलखाती बिजली जैसी लहराती
एक हसीना लगा है जिसको उन्नीस ऊपर एक महीना

दांतों तले दबा कर होंठ आँखें कर के बड़ी बड़ी
खा जायेगी मुझको ऐसे देख रही है खड़ी खड़ी
एक हसीना लगा है जिसको उन्नीस ऊपर एक महीना

हंस हंस के ठुकराती जा तड़पेंगे तड़पाती जा
लेकिन ऐ ईमान की दुश्मन इतना तो समझाती जा
हंस हंस के ठुकराती जा तड़पेंगे तड़पाती जा
लेकिन ऐ ईमान की दुश्मन इतना तो समझाती जा
प्यार खड़ा है राहों में कब आयेगी बाहों में
प्यार खड़ा है राहों में कब आयेगी बाहों में
एक हसीना लगा है जिसको उन्नीस ऊपर एक महीना

दांतों तले दबा कर होंठ आँखें कर के बड़ी बड़ी
खा जायेगी मुझको ऐसे देख रही है खड़ी खड़ी
एक हसीना लगा है जिसको उन्नीस ऊपर एक महीना
उन्नीस ऊपर एक महीना उन्नीस ऊपर एक महीना
…………………………………………………….
Daanton tale daba kar-Doli 1969

Artist: Rajesh Khanna, Babita

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Sep 9, 2019

आज पिला दे साकी-डोली १९६९

फिल्मों के शराबी गीतों में भी अलग अलग फ्लेवर होता है.
कोई देसी ठर्रे वाली किक देता है तो कोई बीयर वाला हल्का
सुरूर. अब हर गाना तो वाईन और शेम्पेन वाला मज़ा नहीं
दे पायेगा. वैसे अधिकांश में आपको व्हिस्की या राम वाला
आनंद मिलेगा.

अब ब्रांड मत पूछने लग जाईयेगा मुझसे. और भी किस्में
पायी जाती है असव की मगर वो सब जानकारी अंग्रेजी वाले
महंगे ब्लॉग पर ढूँढें.

सुनते हैं राजेंद्र कृष्ण का लिखा गीत जिसे महेंद्र कपूर और
आशा भोंसले ने गाया है संगीतकार रवि की धुन पर.

प्रेम चोपड़ा पर फिल्माए गए कुछ रेयर गानों में से एक
है ये.




गीत के बोल:

आज पिला दे साकी अपनी आँखों के मयखाने से
होंठों के पैमाने से
आज पिला दे साकी अपनी आँखों के मयखाने से
होंठों के पैमाने से

आज है रात मुरादों की कुछ रंगीन इरादों की
कर भी दे तस्वीर मुकम्मिल चंद अधूरे वादों की
आज है रात मुरादों की कुछ रंगीन इरादों की
कर भी दे तस्वीर मुकम्मिल चंद अधूरे वादों की

आज पिला दे साकी अपनी आँखों के मयखाने से
होंठों के पैमाने से
आज पिला दे साकी अपनी आँखों के मयखाने से
होंठों के पैमाने से

सर्द है मौसम जोश में आ लहरा कर आगोश में आ
छेड़ के नगमा बेशोशी का ये मत कहना होश में आ
सर्द है मौसम जोश में आ लहरा कर आगोश में आ
छेड़ के नगमा बेशोशी का ये मत कहना होश में आ

आज पिला दे साकी अपनी आँखों के मयखाने से
होंठों के पैमाने से
आज पिला दे साकी अपनी आँखों के मयखाने से
होंठों के पैमाने से

गेसू खुले खुले से हैं मगर रंगत उड़ी उड़ी सी है
ए मेरी हमराज़ बता ये शोख शरारत किसकी है
गेसू खुले खुले से हैं मगर रंगत उड़ी उड़ी सी है
ए मेरी हमराज़ बता ये शोख शरारत किसकी है
टकराई है आँखें तेरी रात किसी बेगाने से
या अपने परवाने से
टकराई है आँखें तेरी रात किसी बेगाने से
या अपने परवाने से
……………………………………………
Aaj pila de saaki-Doli 1969

Artists: Prem Chopda, Nazima, Babita

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Sep 8, 2019

शरमा के यूँ न देख-नीलकमल १९६८

हिंदी फिल्म संगीत क्षेत्र में विविधता भी है जो भेड़चाल
और रूटीन मैलोडीज़ के बीच कहीं गुम सी लगती हैं.
मगर संगीत प्रेमी इन्हें खोज ही लेते हैं. जो रसिक हैं
उन के कानों तक ये कैसे भी पहुँच ही जाती है.

कितना भी नाकासुर नाक से रम्भायें, उड़द डॉल्स गायकी
के ठुमके लगायें, पहाड़ पर चढ़ के जोर से गाने वाले
चीखें चिल्लायें संगीत की विरासत को कालपात्र में दबाने
का जतन कर लें संगीत रसिकों को भ्रमित नहीं कर सकते.

समय सब चीज़ों को उजागर करता चलता है. किसी चीज़
पर धूल जमी हो तो उसे समय की आंधी साफ़ कर दिया
करती है. धूल को पुताई से ढंकने की कोशिश में कलई
कुछ समय उपरांत पपड़ियाँ बन के खुल जाती है.

फिल्म नीलकमल से इस वाद्य-वृन्द रचना को सुनते हैं
जिसमें बोल कम हैं और भाव ज्यादा. साहिर के बोल हैं,
रवि का संगीत और रफ़ी की आवाज़.




गीत के बोल:


शरमा के यूँ न देख अदा के मक़ाम से
शरमा के यूँ न देख अदा के मक़ाम से
अब बात बढ़ चुकी है नज़र के मकाम से

तस्वीर खींच ली है तेरे शोख हुस्न की
तस्वीर खींच ली है तेरे शोख हुस्न की
मेरी नज़र ने आज खता के मकाम से

दुनिया को भूल कर मेरी बाहों में झूल जा
आवाज़ दे रहा हूँ वफ़ा के मकाम से

दिल के मुआमले में ज़तीजे की फ़िक्र क्या
आगे है इश्क जुर्म-ओ-सज़ा के मकाम से
शरमा के यूँ न देख अदा के मक़ाम से
……………………………………………….
Sharma key un na dekh-Neelkamal 1968

Artists: Waheeda Rehman, Rajkumar

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Sep 6, 2019

पहले झुक कर करो सलाम-डोली १९६९

हिंदी सिनेमा काफी समय तक पुरुष प्रधान सोच को
ही परदे पर दर्शाता रहा. त्याग, समर्पण, स्नेह, प्रेम
जैसे भाव नारियों के ही लिए हैं ये बतलाता रहा. कुछ
गिनी चुनी ही फ़िल्में आईं जिनमें वो प्रगतिशील दिखलाई
दी.

अनेक फिल्मों में सामाजिक कुरीतियों जैसे दहेज प्रथा
को दिखलाया जाता रहा मगर समस्या पूर्ती के अभाव
के साथ. विधवा विवाह पर भी कुछ सार्थक फ़िल्में बनी
मगर उनमें भी अभिव्यक्ति की हिचक कायम रही. फिल्म
का कमर्शियल पहलू कई बार विद्रोह और समाज सुधार
को दबे शब्दों में और प्रतीकात्मक तरीके से समझाता
है. इस डर से कि फिल्म की लागत निकालना मुश्किल
ना हो जाये.

इस फिल्म की नायिका समय के हिसाब से थोडा आगे
है और वो नौकरी भी करती है. घुट घुट के जीने और
रो कर जिंदगी गुज़ारने में उसका विश्वास नहीं है.

सुनते हैं आशा भोंसले की आवाज़ में ये मनोरंजक गीत



गीत के बोल:

हा हा हा हा
ना ना ना

पहले झुक कर करो सलाम फिर बतलाओ अपना नाम
अदब से बोलो क्या है नाम ओ मिस्टर गुलफ़ाम
याल्ला लू
पहले झुक कर करो सलाम फिर बतलाओ अपना नाम
अदब से बोलो क्या है नाम ओ मिस्टर गुलफ़ाम
याल्ला लू
पहले झुक कर करो सलाम

शाम सवेरे मेरी गली के सौ सौ फेरे क्या मतलब
अच्छी सूरत जहाँ भी देखी डाले डेरे क्या मतलब
शाम सवेरे मेरी गली के सौ सौ फेरे क्या मतलब
अच्छी सूरत जहाँ भी देखी डाले डेरे क्या मतलब
दिल भी देख लिया होता और फिर प्यार किया होता
तुम जैसे ही नाम वफ़ा का करते हैं बदनाम
याल्ला लू

पहले झुक कर करो सलाम फिर बतलाओ अपना नाम
अदब से बोलो क्या है नाम ओ मिस्टर गुलफ़ाम
याल्ला लू
पहले झुक कर करो सलाम

दिल के दरिया कितने गहरे नया खिलाड़ी क्या जाने
क्या होता है प्यार का जज़्बा कोई अनाड़ी क्या जाने
दिल के दरिया कितने गहरे नया खिलाड़ी क्या जाने
क्या होता है प्यार का जज़्बा कोई अनाड़ी क्या जाने
दिल घायल जब होता है प्यार जवां तब होता है
बहा बहा के फूल के आंसू भरता है ये जाम
याल्ला लू

पहले झुक कर करो सलाम फिर बतलाओ अपना नाम
अदब से बोलो क्या है नाम ओ मिस्टर गुलफ़ाम
याल्ला लू
पहले झुक कर करो सलाम
……………………………………………………..
Pehle jhuk kar karo salam-Doli 1969

Artist: Rajesh Khanna, Babita

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Aug 28, 2019

न मुँह छुपा के जियो-हमराज़ १९६७

प्रेरणादायी गीत जीवन में बहुत काम आते हैं. ये चाहे भजन हों, फ़िल्मी
गीत हों या गैर फ़िल्मी गीत, अपना प्रभाव छोड़ते ज़रूर हैं. ध्यान से सुनने
कीऔर समझने की आवश्यकता भर होती है.

सुनील दत्त वाली फिल्म हमराज़ से एक गाना सुनते हैं जिसके बोल साहिर
के हैं और संगीत रवि का.


गीत  का सन्देश अच्छा है विशेषकर उनके लिए जो महत्वाकांक्षी हैं और
जिन्हें अपने जीवन में बहुत ऊंचे पर जाने की तमन्ना है. पब्लिक फिगर
जो बनना चाहते हैं उन्हें तो सार्वजनिक होना ही पड़ता है.

इसका मतलब ये नहीं कि हर आदमी अपने पोस्टर ले के सड़क पर दौड़
लगाते फिरे. समाज में कई लोग ऐसे भी हैं जो चुप चाप अपना काम करते
हैं और ड्रामेबाज जनता के लिए सन्देश देते रहते हैं. ऐसे लोग ना हों तो
आम जनता के समझ ही नहीं पड़े कि सही क्या है और गलत क्या.

हर जगह और हर ट्रीवियल बात के लिए अपने ट्रंप कार्ड नहीं खोले जाते,
हैं ना लुटियन मीडिया के गुप्त और सुप्त पाठकों. फोटो देखने का शौक हो
तो महात्माओं की फोटो देखो असली फायदा तभी होगा. फ़ना का एक
अर्थ पूर्ण विनाश अथवा बर्बादी भी होता है.





गीत के बोल:

न मुँह छुपा के जियो और न सर झुका के जियो
ग़मों का दौर भी आये तो मुस्कुरा के जियो
न मुँह छुपा के जियो और न सर झुका के जियो

घटा में छुप के सितारे फ़ना नहीं होते
अँधेरी रात में दिये जला के चलो
न मुँह छुपा के जियो और न सर झुका के जियो

ये ज़िंदगी किसी मंज़िल पे रुक नहीं सकती
हर इक मुक़ाम पे क़दम बढ़ा के चलो
न मुँह छुपा के जियो और न सर झुका के जियो
……………………………………………………….
Na moonh chhipa ke jiiyo-Hamraaz 1967

Artist: Sunil Dutt

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