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Apr 16, 2020

दिल-ए-बेताब को सीने से-पालकी १९६७

इस ब्लॉग पर हमने आपको सुमन कल्याणपुर और रफ़ी
के गाये काफी युगल गीत सुनवाये हैं. फेमस और रेयर
दों टाइप के सुन चुके हैं आप लोग.

आज एक लोकप्रिय वाला सुन लेते हैं. फिल्म पालकी का
ये गीत अपने पहले अंतरे के अनूठेपन के लिए जाना जाता
है. हुस्न की फायर और इश्क की फायर ब्रिगेड.

बोल शकील बदायूनीं के हैं और संगीत नौशाद का.




गीत के बोल:

दिल-ए-बेताब को सीने से लगाना होगा
आज पर्दा है तो कल सामने आना होगा
आपको प्यार का दस्तूर निभाना होगा
दिल झुकाया है तो सर को भी झुकाना होगा
दिल-ए-बेताब को सीने से लगाना होगा

अपनी सूरत को तू ए जान-ए-वफ़ा यूँ न छुपा
गर्मी-ए-हुस्न से जल जाये न आँचल तेरा
लग गई आग तो मुझको ही बुझाना होगा
दिल झुकाया है तो सर को भी झुकाना होगा
दिल-ए-बेताब को सीने से लगाना होगा

आज आलम है जो दिल का वो बताये न बने
पास आये न बने दूर भी जाये न बने
मैँ हूँ मदहोश मुझे होश में लाना होगा
आज पर्दा है तो कल सामने आना होगा
आपको प्यार का दस्तूर निभाना होगा

आप तो इतने क़रीब आ गये अल्लाह तौबा
क्या करें आप से टकरा गये तौबा तौबा
इश्क़ इन बातों से रुसवा-ए-ज़माना होगा

दिल-ए-बेताब को सीने से लगाना होगा
…………………………………………………..
Dil-e-betaab ko seene se-Palki 1967

Artists: Waheeda Rehman, Rajendra Kumar

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Apr 10, 2020

ए शहर-ए-लखनऊ-पालकी १९६७

लखनऊ देश के पुराने शहरों में से एक है जिसने इतिहास के
कई बदलाव देखे. नवाबी दौर में इसे खूब लोकप्रियता मिली.
आज ये उत्तर प्रदेश राज्य की राजधानी है. रेल और सड़क
मार्ग से ये तकरीबन उत्तर प्रदेश के सभी प्रमुख नगरों से जुड़ा
हुआ है.

१९६७ की फिल्म पालकी की कहानी इसी शहर को समर्पित है
शायद. फिल्म के टाइटल्स में लखनऊ को याद करता हुआ ये
गीत है जिसे शकील बदायूनीं ने लिखा है और जिसका संगीत
नौशाद ने तैयार किया है. इसे रफ़ी ने गाया है और परदे पर
इस पर राजेंद्र कुमार ने होंठ हिलाये हैं.

गीतकार शकील बदायूनीं के नाम में जिस बदायूं का जिक्र है
वो लखनऊ के पास ही का एक क़स्बा है. गीतकार इसमें शहर
के कुछ मोन्युमेंट्स के नाम और जोड़ देते तो ये टूरिज़्म वालों
का सिग्नेचर गाना बन जाता.



गीत के बोल:

ए शहर-ए-लखनऊ तुझे मेरा सलाम है
ए शहर-ए-लखनऊ तुझे मेरा सलाम है
तेरा ही नाम दूसरा जन्नत का नाम है
ए शहर-ए-लखनऊ

मेंरे लिए बहार भी तू गुलबदन भी तू
परवाना और शमा भी तू अंजुमन भी तू
जुल्फों की तरह महकी हुई तेरी शाम है
ए शहर-ए-लखनऊ

कैसा निखार तुझमे है क्या क्या है बांकपन
ग़ज़लें गली गली हैं तो नगमे चमन चमन
शायर के दिल से पूछ तेरा क्या मक़ाम है

ए शहर-ए-लखनऊ तुझे मेरा सलाम है
तेरा ही नाम दूसरा जन्नत का नाम है
ए शहर-ए-लखनऊ

तू वो है लोग शहरे निगारा कहें जिसे
फ़िरदौस-ए-हुस्न-ए-रश्क-ए-बहारा कहें जिसे
तेरे हर एक अदा में वफ़ा का पयाम है

ए शहर-ए-लखनऊ तुझे मेरा सलाम है
तेरा ही नाम दूसरा जन्नत का नाम है
ए शहर-ए-लखनऊ
……………………………………………………..
Ae shahar-e-lakhnau-Palki 1967

Artists: Rajendra Kumar

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Jan 29, 2020

कोई नहीं है-पत्थर के सनम १९६७

फिल्म उद्योग में हर प्रमुख संगीतकार, सिवाए नैयर के,
ने लता मंगेशकर के लिए स्पेशल गाने बनाये. इनमें
सी रामचंद्र और अनिल बिश्वास ऐसे हैं जिन्होंने कम
शोर वाले या यूँ कहें कम वाद्य यंत्रों वाली मधुर रचनाएँ
बनाईं. उसके बाद आता है नौशाद, एस डी बर्मन और
मदन मोहन का नाम जिन्होंने कम और ज्यादा संगीत
दोनों तरह की धुनें बनाई लता के गाये गानों के लिए.

शंकर जयकिशन के गीतों में ओर्केस्ट्रा लबालब होता था.
अधिकाँश गीतों के शुरू में भारी संगीत होता और बाद में
गीत सिंपल सा सुनाई देता. उनके गीतों में से संगीत
के टुकड़ों का अलग समझ पाना संभव नहीं होता. हम
कई जगह पर सुन चुके हैं और पढ़ चुके हैं कि ६० के
दशक में पदार्पण करने वाली लक्ष्मी प्यारे की जोड़ी भी
शंकर जयकिशन की बड़ी फैन रही है. उन्होंने भी उसी
लबालब संगीत वाली परिपाटी को आगे बढ़ाते हुए जो
गाने बनाये उसमें पूरे गानों में संगीत लबालब नज़र
आने लगा.

सुनते हैं मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा और लक्ष्मी प्यारे
द्वारा संगीतबद्ध गीत लाता मंगेशकर की आवाज़ में.



गीत के बोल:

कोई नहीं है फिर भी है मुझको
कोई नहीं है फिर भी है मुझको
क्या जाने किसका इंतज़ार
हो ओ ओ कोई नहीं हैं फिर भी हैं मुझको
क्या जाने किस का इंतज़ार
हो ओ ओ ये भी ना जानूं लहरा के आँचल
किसको बुलाये बार बार

सोचूँ ये हैं उंगलियाँ किसके प्यार की
गालों को छुए जो डाली बहार की
छुये जो डाली बहार की
सोचूँ ये हैं उंगलिया किसके प्यार की
गालों को छुए जो डाली बहार की
कौन है ए हवा ए बहार

कोई नहीं है फिर भी है मुझको
क्या जाने किसका इंतज़ार
क्या जाने किसका इंतज़ार

पानी में छबि मैं देखूं खड़ी खड़ी
बालों में सजा के कलियाँ बड़ी बड़ी
सजा के कलियाँ बड़ी बड़ी हो ओ ओ ओ ओ
पानी में छबि मैं देखूं खड़ी खड़ी
फिर बनूँ आप ही बेकरार

कोई नहीं है फिर भी है मुझको
क्या जाने किसका इंतज़ार
क्या जाने किसका इंतज़ार

वादी में निशान मेरे ही पांव के
फूलों पे हैं रंग मेरी ही छांव के
हैं रंग मेरी ही छांव के हो ओ ओ ओ ओ
वादी में निशान मेरे ही पांव के
फिर भी क्यूँ आये ना ऐतबार

कोई नहीं है फिर भी है मुझको
क्या जाने किसका इंतज़ार
हो ओ ओ ओ ओ ये भी ना जानूं लहरा के आँचल
किसको बुलाये बार बार
क्या जाने किसका इंतज़ार
क्या जाने किसका इंतज़ार
……………………………………………
Koi nahin hai-Patthar ke sanam 1967

Artist: Waheeda Rehman

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Jan 13, 2020

ए दुश्मन जान-पत्थर के सनम १९६७

नाईट सूट पहनने की आदत हमारे देश की जनता
को अभी भी नहीं है. कुरता पाजामा भी एक प्रकार
का नाईट सूट ही है. इसे दिन में भी पहना जा
सकता है. फिल्मों ने नाईट सूट को काफी लोकप्रिय
कराया है. जैसे मोगली सीरियल ने चड्डी को कराया
और जिसे देखो आज चड्डी पहने मोबाइल काण में
लगा के सड़क पर चहलकदमी करने लगता है. चड्डी
को तो एक देवांग पटेल के गाये बोनी एम के गाने
की पैरोडी ने भी लोकप्रिय कराया है.

कुरता पाजामा पहनने वाले ज्यादा स्मार्ट होते हैं या
कुरता पाजामा पहनने से आदमी ज्यादा स्मार्ट हो
जाता है, मुझे समझ नहीं आया अभी तक. नेता
कुरता पाजामा पहन के ही पब्लिक को क्यूतिया
बना रहे हैं सालों से.

आपने हाइवे पर कर्मचारियों को कपड़ों के ऊपर
जैकेट पहने देखा होगा. उसकी डिजाईन इसी गीत
से प्रेरित है शायद.

कुछ नैयर के गीत और कुछ पश्चिमी एशिया का
संगीत सुन कर लक्ष्मी प्यारे ने इस धुन की रचना
की होगी ऐसा मेरा अनुमान है. मजरूह का गीत है
और इसे आशा भोंसले गा रही हैं.



गीत के बोल:

आ ये बहार
हां
ये समा आ

ए दुश्मन-ए-जां
चल दिया कहाँ
ए दुश्मन-ए-जां
चल दिया कहाँ
ये बहार
गालों पे लट हां बेकरार
गोरा बदन हां प्यार प्यार
तुझको पुकारे तू नहीं सुनता
क्या करूं अल्लाह हा आ

छांव भी जो सनम तेरी
छांव भी जो सनम तेरी
मिल गई मेरी छांव से
डाली बदन की हुई हरी
खिल गई मैं अदाओं से
देखो मेरी अंगड़ाईयाँ आ

ए दुश्मन-ए-जां
चल दिया कहाँ
ये बहार
गालों पे लट हां बेकरार
गोरा बदन हां प्यार प्यार
तुझको पुकारे तू नहीं सुनता
क्या करूं अल्लाह हा आ

आ जा आ जा मत देर कर
आ जा आ जा मत देर कर
मस्ती है अभी चाल में
आया भी मेरी जां तू अगर
आते आते कई साल में
तब तक जियूँगी कहाँ आ

ए दुश्मन-ए-जां
चल दिया कहाँ
ये बहार
गालों पे लट हां बेकरार
गोरा बदन हां प्यार प्यार
तुझको पुकारे तू नहीं सुनता
क्या करूं अल्लाह हा आ

ए दुश्मन-ए-जां
चल दिया कहाँ
ए दुश्मन-ए-जां
चल दिया कहाँ
..................................................................
Ae dushman jaan-Patthar ke sanam 1967

Artists: Mumtaz, Manoj Kumar

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Dec 1, 2019

तुम्हारी भी जय जय-दीवाना १९६७

जियो और जीने दो वाला सिद्धांत डार्विन की थ्योरी से
थोडा अलग चलता है. आज के समय में इस विचार के
पुनः प्रसार की ज़रूरत है. भौतिकतावादी युग में मानवीय
सम्बन्ध और मूल्य खोते जा रहे है.

समतावादी विचारधारा वाले लोग आपको कम मिलेंगे इस
युग में. सर्वजन सुखाय वाला सिद्धांत तभी सफल हो सकता
है जब आबादी का अधिकाँश तबका आपस में एक दूसरे
का ख्याल रखे. उसकी भैंस मेरी भैंस से बड़ी क्यूँ है, उसके
केक पर एक्स्ट्रा आइसिंग क्यूँ है जैसे विचारों को त्यागना
होगा. संतोष और शांति एक दूसरे से संबद्ध हैं.

शैलेन्द्र का लिखा हुआ गीत सुनते हैं जिसे मुकेश ने गाया
है शंकर जयकिशन की धुन पर. रेलगाड़ी या रेलवे स्टेशन
हिट्स में आप इसे शामिल कर लीजिए पर तनिक ये तो
बताइयेगा ये प्रीतमपुर नाम का स्टेशनवा हमरे देश के
जुगराफ़िया में कहाँ पर है? गीत के अंत में रेलगाड़ी की
छुक छुक और संगीत का बढ़िया मिश्रण है उसका आनंद
उठाना ना भूलियेगा.



गीत के बोल:

तुम्हारी भी जय जय हमारी भी जय जय
न तुम हारे न हम हारे
तुम्हारी भी जय जय हमारी भी जय जय
न तुम हारे न हम हारे
सफ़र साथ जितना था हो ही गया है
न तुम हारे न हम हारे
तुम्हारी भी जय जय हमारी भी जय जय

याद के फूल को हम तो अपने दिल से रहेंगे लगाये
याद के फूल को हम तो अपने दिल से रहेंगे लगाये
और तुम भी हँस लेना जब ये दीवाना याद आये
मिलेंगे जो फिर से मिला दें सितारे
न तुम हारे न हम हारे
तुम्हारी भी जय जय हमारी भी जय जय

वक़्त कहाँ रुकता है तो फिर तुम कैसे रुक जाते
वक़्त कहाँ रुकता है तो फिर तुम कैसे रुक जाते
आख़िर किसने चाँद को छुआ है हम क्यों हाथ बढ़ाते
जो उस पार हो तुम हम इस किनारे
न तुम हारे न हम हारे
तुम्हारी भी जय जय हमारी भी जय जय

था तो बहुत कहने को लेकिन अब तो चुप बेहतर है
था तो बहुत कहने को लेकिन अब तो चुप बेहतर है
ये दुनिया है एक सराय जीवन एक सफ़र है
रुका भी है कोई किसी के पुकारे
न तुम हारे न हम हारे
सफ़र साथ जितना था हो ही गया है
न तुम हारे न हम हारे

तुम्हारी भी जय जय हमारी भी जय जय
…………………………………………………..
Tumhari bhi jai jai-Diwana 1967

Artists: Raj Kapoor, Saira Bano

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Nov 25, 2019

गोरे गोरे चाँद से मुख पर-अनिता १९६७

फिल्म बेक़सूर के गीत की दो पंक्तियों के साथ एक
और गीत तैयार कर दिया गीतकार मुंशी आरज़ू उर्फ
आरज़ू लखनवी ने सन १९६७ की फिल्म अनिता के
लिए.

फिल्म के निर्देशक ने तीन गीतकार क्यों लिए गीत
लेखन के लिए ये एक कहानी हो सकती है जिस पर
आपको शायद एक दिन मालूम चल ही जाये. अब तो
ये भी मालूम हो चला है किस कलाकार का कुत्ता
किस साबुन से नहाया करता था.

गौरतलब है इस फिल्म में आनंद बक्षी का लिखा एक
ही गीत है. राज खोसला ने राजा मेहँदी अली खान को
ज़रूर गीतकार के तौर पर लिया होगा क्यूंकि उसके
पहले वाली फिल्म जिसमें मदन मोहन का संगीत है,
गीत राजा मेहँदी अली खान के ही हैं. खोसला ने एक
गीत के लिए आरज़ू लखनवी को लिया उसकी वजह
प्रोड्यूसर भी नहीं हो सकता क्यूंकि उस फिल्म के
निर्माता भी वही हैं. हो सकता है किसी फायनेंसर की
फरमाईश पर ऐसा किया गया हो. खैर जो भी हुआ हो
उसका नतीजा उम्दा निकला.




गीत के बोल:

गोरे गोरे चाँद से मुख पर काली काली आँखें हैं
गोरे गोरे चाँद से मुख पर काली काली आँखें हैं
देख के जिनको नीद उड़ जाए वो मतवाली आँखें हैं
गोरे गोरे
मुंह से पल्ला क्या सरकाना
मुंह से पल्ला क्या सरकाना इस बादल में बिजली है
दूर ही रहना
दूर ही रहना इनसे कयामत ढाने वाली आँखें हैं

गोरे गोरे चाँद से मुख पर काली काली आँखें हैं
गोरे गोरे

वे जिनके अंधेर है सब कुछ
वे जिनके अंधेर है सब कुछ ऐसी बात है इनमें क्या
आँखें आँखें आँखें आँखें
आँखें आँखें सब हैं बराबर कौन निराली आँखें हैं

गोरे गोरे चाँद से मुख पर काली काली आँखें हैं
गोर गोरे

बेदेखे आराम नहीं है
बेदेखे आराम नहीं है देखे तो दिल का चैन गया
देखने वाले देखने वाले
देखने वाले देखने वाले यूँ कहते हैं भोली भाली आँखें हैं
देख के जिनको नीद उड़ जाए वो मतवाली आँखें हैं

गोरे गोरे चाँद से मुख पर काली काली आँखें हैं
गोरे गोरे
………………………………………………………..
Gore gore chand se much par-Anita 1967

Artists: Sadhana, Manoj Kumar

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Sep 23, 2019

उड़ के पवन के रंग चलूंगी-शागिर्द १९६७

नारी से रौनक है संसार की. वो चाहे जिस भी रूप में
हो, उसकी उपस्थिति जीवन के हर पहलू के मायने बदल
देती है. उसके बिना इस सृष्टि का हर रंग अधूरा है.

सुनते हैं लता मंगेशकर का गाया एक लोकप्रिय गीत
फिल्म शागिर्द से. सायरा बानू पर फिल्माया गया ये
गीत पर्यावरण प्रेमी गीत है जिसमें आप हरियाली से
भरपूर दृश्यों का आनंद उठाएंगे. साथ में फिल्म के
नायक के दर्शन फ्री हैं.

गीत मजरूह सुल्तानपुरी का है और इसकी धुन तैयार
की है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने.




गीत के बोल:

हो ओ ओ ओ ओ
रुक जा रुक जा रुक जा
उड़ के पवन के रंग चलूंगी
मैं भी तिहारे संग चलूंगी
रुक जा ए हवा थम जा ए बहार
रुक जा ए हवा थम जा ए बहार
उड़ के पवन के रंग चलूंगी
मैं भी तिहारे संग चलूंगी
रुक जा ए हवा थम जा ए बहार
रुक जा ए हवा थम जा ए बहार

पर्वत पर्वत तेरी महक है
लट मेरी भी दूर तलक है
देखो रे डाली डाली
देखो रे डाली डाली खिली मेरे तन की लाली
हो ओ ओ ओ ओ रुक जा
जो तू है वही मैं हूँ
रुक जा ए हवा थम जा ए बहार
रुक जा ए हवा थम जा ए बहार

हो ओ ओ हो ओ ओ
देख ज़रा सा तू मुझे छू के
पग पग से हैं बिन घुँघरू के
जो तेरी ताल में है
जो तेरी ताल में है वही मेरी चाल में है
हो ओ ओ ओ ओ रुक जा
मैं हिरनिया मैं चकोरी
रुक जा ए हवा थम जा ए बहार
रुक जा जा ए हवा थम जा ए बहार

झरना दर्पण ले के निहारे
बूंदों का गहना तन पे सँवारे
लहरें झूला झुलायें
लहरें झूला झुलायें मेरे लिए गीत गायें
हो ओ ओ ओ ओ रुक जा
पनघट की मैं हूँ गोरी
रुक जा ए हवा थम जा ए बहार

उड़ के पवन के रंग चलूंगी
मैं भी तिहारे संग चलूंगी
रुक जा ए हवा थम जा ए बहार
रुक जा ए हवा थम जा ए बहार
.....................................................
Ud ke pawan ke sang chaloongi-Shagird 1967

Artists: Saira Bano, Joy Mukherji

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Sep 14, 2019

आपने अपना बनाया-दुल्हन एक रात की १९६७

हिंदी फिल्म की परिभाषा जाने किसने रची जिसके
अनुसार फिल्म में ६-७ गाने होना ज़रूरी हैं. कहानी
में थोड़ी थोड़ी देर में एक गाना.

सन १९६७ की फिल्म दुल्हन एक रात की में ढेर सारे
गाने हैं जिनमें से ३ हमने आपको सुनवा दिए हैं. ये
है इसी फिल्म से चौथा गाना जो युगल गीत है लता
और महेंद्र कपूर का गाया हुआ.

इसे भी राजा मेहँदी अली खान ने लिखा है और धुन
है एक बार फिर से मदन मोहन की.




गीत के बोल:

आपने अपना बनाया
मेहरबानी आपकी
मेहरबानी आपकी
हम तो इस काबिल न थे
हम तो इस काबिल न थे
हम तो इस काबिल न थे
है कदरदानी आप की
मेहरबानी आपकी
आपने अपना बनाया
………………………………………………………
Aapne apna banaya-Dulhan ek raat ki 1967

Artist:

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Sep 10, 2019

कल रात ज़िन्दगी से-पालकी १९६७

सुनते हैं रफ़ी का गाया एक पॉपुलर गीत फिल्म पालकी
से. शकील बदायूनीं की रचना है और नौशाद का संगीत.

कठिन शब्दों वाला ये गीत समझने और इसका आनंद
लेने के लिए आपको भाषा की अच्छी जानकारी होना
ज़रूरी है अन्यथा इसकी धुन सुन सुन के ही आनंद लेते
रहें.

इस गीत की पहली पंक्ति कुछ ऐसी है जिसे सुन कर
जिंदगी से विपरीत की चीज़ों की याद हो आती है.
अक्सर ऐसे शब्द अकस्मात वाली घटना से जोड़ के
प्रयोग किये जाते हैं.




गीत के बोल:

कल रात ज़िन्दगी से मुलाक़ात हो गई
कल रात ज़िन्दगी से मुलाक़ात हो गई
लब थरथरा रहे थे मगर बात हो गई
कल रात ज़िन्दगी से मुलाक़ात हो गई

एक हुस्न सामने था क़यामत के रूप में
एक ख़्वाब जलवागर था हक़ीक़त के रूप में
चेहरा वही गुलाब की रंगत लिए हुए
नज़रें वही पयाम-ए-मुहब्बत लिए हुए
ज़ुल्फ़ें वो ही के जैसे धुँधलका हो शाम का
आँखें वो ही जिन आँखों पे धोखा हो जाम का
कुछ देर को तसल्ली-ए-जज़्बात हो गई
लब थरथरा रहे थे मगर बात हो गई

कल रात ज़िन्दगी से मुलाक़ात हो गई

देखा उसे तो दामन-ए-रुख़्सार नम भी था
वल्लाह उसके दिल को कुछ एहसास-ए-ग़म भी था
थे उसकी हसरतों के ख़ज़ाने लुटे हुए
लब पर तड़प रहे थे फ़साने घुटे हुए
काँटे चुभे हुए थे सिसकती उमंग में
डूबी हुई थी फिर भी वफ़ाओ के रंग में
दम भर को ख़त्म गर्दिश-ए-हालात हो गई
लब थरथरा रहे थे मगर बात हो गई

कल रात ज़िन्दगी से मुलाक़ात हो गई

ए मेरी रूहे इश्क़ मेरी जाने शायरी
दिल मानता नहीं के तू मुझसे बिछड़ गई
मायूसियाँ हैं फिर भी मेरे दिल को आस है
महसूस हो रहा है के तू मेरे पास है
समझाऊँ किस तरह से दिले बेक़रार को
वापस कहां से लाऊँ मैं गुज़री बहार को
मजबूर दिल के साथ बड़ी घात हो गई
लब थरथरा रहे थे मगर बात हो गई

कल रात ज़िन्दगी से मुलाक़ात हो गई
…………………………………………………
Kal raat zindagi se mulaqat ho gayi-Palki 1967

Artist: Rajendra Kumar

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Aug 28, 2019

न मुँह छुपा के जियो-हमराज़ १९६७

प्रेरणादायी गीत जीवन में बहुत काम आते हैं. ये चाहे भजन हों, फ़िल्मी
गीत हों या गैर फ़िल्मी गीत, अपना प्रभाव छोड़ते ज़रूर हैं. ध्यान से सुनने
कीऔर समझने की आवश्यकता भर होती है.

सुनील दत्त वाली फिल्म हमराज़ से एक गाना सुनते हैं जिसके बोल साहिर
के हैं और संगीत रवि का.


गीत  का सन्देश अच्छा है विशेषकर उनके लिए जो महत्वाकांक्षी हैं और
जिन्हें अपने जीवन में बहुत ऊंचे पर जाने की तमन्ना है. पब्लिक फिगर
जो बनना चाहते हैं उन्हें तो सार्वजनिक होना ही पड़ता है.

इसका मतलब ये नहीं कि हर आदमी अपने पोस्टर ले के सड़क पर दौड़
लगाते फिरे. समाज में कई लोग ऐसे भी हैं जो चुप चाप अपना काम करते
हैं और ड्रामेबाज जनता के लिए सन्देश देते रहते हैं. ऐसे लोग ना हों तो
आम जनता के समझ ही नहीं पड़े कि सही क्या है और गलत क्या.

हर जगह और हर ट्रीवियल बात के लिए अपने ट्रंप कार्ड नहीं खोले जाते,
हैं ना लुटियन मीडिया के गुप्त और सुप्त पाठकों. फोटो देखने का शौक हो
तो महात्माओं की फोटो देखो असली फायदा तभी होगा. फ़ना का एक
अर्थ पूर्ण विनाश अथवा बर्बादी भी होता है.





गीत के बोल:

न मुँह छुपा के जियो और न सर झुका के जियो
ग़मों का दौर भी आये तो मुस्कुरा के जियो
न मुँह छुपा के जियो और न सर झुका के जियो

घटा में छुप के सितारे फ़ना नहीं होते
अँधेरी रात में दिये जला के चलो
न मुँह छुपा के जियो और न सर झुका के जियो

ये ज़िंदगी किसी मंज़िल पे रुक नहीं सकती
हर इक मुक़ाम पे क़दम बढ़ा के चलो
न मुँह छुपा के जियो और न सर झुका के जियो
……………………………………………………….
Na moonh chhipa ke jiiyo-Hamraaz 1967

Artist: Sunil Dutt

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Jan 22, 2019

मस्त बहारों का मैं आशिक-फ़र्ज़ १९६७

शंकर जयकिशन ने बनाया याहू, चाहे कोई मुझे जंगली कहे.
लक्ष्मी प्यारे न बनाया-ऊ ऊ, मस्त बहारों का मैं आशिक. ये
दोनों ही अपने ज़माने के हिट गाने हैं.

ऊ ऊ की ध्वनि शायद संगीतकार ने स्वयं निकाली है. इसे
लिखा है आनंद बक्षी ने और गाया है रफ़ी ने.

फिल्म को जीतेंद्र की सबसे सफल फिल्मों में गिना जाता है.



गीत के बोल:

ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ
मस्त बहारों का मैं आशिक मैं जो चाहें यार करूँ
चाहें गुलों के साए से खेलूँ चाहे कली से प्यार करूँ
सारा जहाँ है मेरे लिए मेरे लिये
ऊ ऊ
मस्त बहारों का मैं आशिक मैं जो चाहें यार करूँ
चाहें गुलों के साए से खेलूँ चाहे कली से प्यार करूँ
सारा जहाँ है मेरे लिए मेरे लिये

मैं हूँ वो दीवाना जिसके सब दीवाने हा
किसको है ज़रूरत तेरी ए ज़माने हा
मेरा अपना रास्ता दुनिया से क्या वास्ता
मेरे दिल में तमन्नाओं की दुनिया जवां है
मेरे लिये मेरे लिये

ऊ ऊ
मस्त बहारों का मैं आशिक मैं जो चाहें यार करूँ
चाहें गुलों के साए से खेलूँ चाहे कली से प्यार करूँ
सारा जहाँ है मेरे लिए मेरे लिये

मेरी आँखों से ज़रा आँखें तो मिला दे हा
मेरी आँखों से ज़रा आँखें तो मिला दे हा
मेरी राहें रोक ले नज़रें तू बिछा दे हा
तेरे सर की है कसम मैं जो चला गया सनम
तो ये रुत भी चली जायेगी ये तो यहाँ है
मेरे लिये मेरे लिये

ऊ ऊ
मस्त बहारों का मैं आशिक मैं जो चाहें यार करूँ
चाहें गुलों के साए से खेलूँ चाहे कली से प्यार करूँ
सारा जहाँ है मेरे लिए मेरे लिये

सबको ये बता दो कह दो हर नज़र से हा
सबको ये बता दो कह दो हर नज़र से हा
कोई भी मेरे सिवा गुज़रे ना इधर से हा
बतला दो जहां को समझा दो खिज़ां को
आये जाये यहाँ ना कोई ये गुलसितां है
मेरे लिए मेरे लिये

ऊ ऊ
मस्त बहारों का मैं आशिक मैं जो चाहें यार करूँ
चाहें गुलों के साए से खेलूँ चाहे कली से प्यार करूँ
सारा जहाँ है मेरे लिए मेरे लिये
मेरे लिए मेरे लिये मेरे लिए मेरे लिये
………………………………………….
Mast baharon ka main aashiq-Farz 1967

Artists: Jeetendra, Aruna Irani

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Nov 15, 2018

चेहरे से अपने आज तो-पालकी १९६७

सुनते हैं हाई-फ्रीक्वेंसी गीत फिल्म पालकी से जिसे लिखा
है शकील बदायूनीं ने और गाया है रफ़ी ने. नौशाद ने
इसकी धुन तैयार की है.

लिखने वाले लिख जाते हैं, गाने वाले गा जाते हैं और
सरदर्द हो जाता है सुनने वालों का. अब ऐसे गानों का
एप्लीकेशन कहाँ किया जाये. हर व्यक्ति तो कोमल ह्रदय
कवि होता नहीं जो इस तरीके से अपनी भावनाओं का
इज़हार करे.

लड़के लड़कियों की बात करें तो गर्ल फ्रेंड की वोकेबुलरी
भी तो इतनी फरटाईल हो के उसे ये सब समझ आये.
किसी कम पढ़ी लिखी को ये सब सुना दिया तो वो तो
बेहोश हो कर धड़ाम से गिरेगी ज़मीन पर.




गीत के बोल:

सदका उतारिये के ना लागे कहीं नज़र
सेहरे में आज फूल सा मुखड़ा है जलवागर

चेहरे से अपने आज तो परदा उठाईये
चेहरे से अपने आज तो परदा उठाईये
लिल्लाह मुझको चाँद सी सूरत दिखाईये
जन्नत है ये मकाम दर-ए-यार है ये घर
जन्नत है ये मकाम दर-ए-यार है ये घर
दिल कह रहा है आज यहीं सर झुकाईये
चेहरे से अपने आज तो परदा उठाईये

उठिए खुदा के वास्ते
उठिए खुदा के वास्ते लग जाइए गले
रस्मो रिवाज़ शर्मो हाय सब हटाईये
चेहरे से अपने आज तो परदा उठाईये
लिल्लाह मुझको चाँद सी सूरत दिखाईये

ये क्या के हम ही बढ़ते रहें आपकी तरफ़
थोड़ी सी दूर आप भी तशरीफ़ लाइए
थोड़ी सी दूर आप भी तशरीफ़ लाइए
चेहरे से अपने आज तो परदा उठाईये
…………………………………………………..
Chehre se apne aaj to-Palki 1967

Artists: Rajendra Kumar, Waheeda Rehman

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Sep 30, 2018

हम तो तेरे आशिक़ हैं सदियों पुराने-फ़र्ज़ १९६७

ये फिल्म फ़र्ज़ का वो गीत है जो जनता की जुबान पे
चढ गया. इसी गाने से हमने फिल्म फ़र्ज़ को पहचाना.
रेडियो के कार्यक्रमों में ऐसे युगल गीतों की फरमाईशें
इतनी क्यूँ आती थीं ये मैं समझ ना पाया वैसे ही
जैसे न्यूटन का सिद्धांत-सेब ऊपर से नीचे ज़मीन पर
ही गिरता है, हवा में क्यूँ नहीं उड़ता ? वो तो फ़िल्मी
सितारे भी बिना हीलियम के हवा में उड़ते रहते हैं और
रिटायरमेंट के बाद धडाम से ज़मीन पर आ गिरते हैं.

गीत आनंद बक्षी का, संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का
और आवाजें है मुकेश और लता की.

फिल्म के निर्देशक है रविकांत नागाईच. कैमरामैन से
निर्देशक बने नागाईच ने कई जासूसी फ़िल्में बनाई
हैं. बनाई से मतलब निर्देशन किया है. प्रोड्यूस तो
ऑफिशियली उन्होंने २ ही पिक्चर की हैं.

अब ये बतलायें कौन कौन सी हिंदी फिल्म में नायक
ने झाडी हिला हिला के गाने गाये हैं. एक ट्रिविया और
है वो ये कि सबसे ज्यादा गुलाबी लिपस्टिक का इस्तेमाल
बबीता ने ही किया है फिल्मों में.



गीत के बोल:

हम तो तेरे आशिक़ हैं सदियों पुराने
हम तो तेरे आशिक़ हैं सदियों पुराने
चाहे तू माने चाहे न माने
चाहे तू माने चाहे न माने
हम भी ज़माने से हैं तेरे दीवाने
हम भी ज़माने से हैं तेरे दीवाने
चाहे तू माने चाहे न माने
चाहे तू माने चाहे न माने

आई हैं यूं प्यार पे जवानियां अरमां दिल में हैं
दिल मुश्किल में है जान-ए-तमन्ना
तेरे इसी प्यार की कहानियां हर महफ़िल में हैं
सबके दिल में हैं जान-ए-तमन्ना
छेड़ते हैं सब मुझको अपने बेगाने
छेड़ते हैं सब मुझको अपने बेगाने
चाहे तू माने चाहे न माने
चाहे तू माने चाहे न माने

हम तो तेरे आशिक़ हैं सदियों पुराने
चाहे तू माने चाहे न माने
चाहे तू माने चाहे न माने

सोचो मोहब्बत में कभी हाथ से दामन छूटे तो
दो दिल रूठे तो तो फिर क्या हो
ऐसा न हो काश कभी प्यार में वादे टूटे तो
दो दिल रूठे तो तो फिर क्या हो
हम तो चले आयें सनम तुझको मनाने
हम तो चले आयें सनम तुझको मनाने
चाहे तू माने चाहे न माने
चाहे तू माने चाहे न माने

हम भी ज़माने से हैं तेरे दीवाने
चाहे तू माने चाहे न माने
चाहे तू माने चाहे न माने

मस्त निगाहों से इस दिल को मस्त बनाये जा
और पिलाये जा प्यार के सागर
दिल पे बड़े शौक से सितमगर ठेस लगाए जा
तीर चलाये जा याद रहे पर
तीर कभी बन जाते हैं खुद निशाने
तीर कभी बन जाते हैं खुद निशाने
चाहे तू माने चाहे न माने
चाहे तू माने चाहे न माने

हम तो तेरे आशिक़ हैं सदियों पुराने
हम भी ज़माने से हैं तेरे दीवाने
चाहे तू माने चाहे न माने
चाहे तू माने चाहे न माने
………………………………………..
Ham to tere aashiq hain-Farz 1967

Artists: Jeetendra,

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Sep 7, 2018

देखो देखो जी-फ़र्ज़ १९६७

गीत के विवरण कैसे कैसे दिये जाते हैं उसकी इक
बानगी देते हैं आपको-इस गीत में १८ बार हम तुम
बोला गया है. देखो शब्द १२ बार आया है.

इसके आगे बतलाना की इच्छा नहीं हो रही क्यूंकि
ये आंकड़े आगे चल के गूगल पर तो मिलेंगे मगर
हमारे ब्लॉग के नाम के साथ नहीं. किसी और की
टोपी पर पंख जैसे चिपके मिलेंगे.

लता मंगेशकर का गाया हुआ ये गीत सुनते हैं. इस
गीत में हिनहिनाहट इफेक्ट का बेहद खूबसूरती से
इस्तेमाल हुआ है. हालांकि इस बात के लिये दूसरी
एक गायिका ज्यादा पहचानी जाती है.

क्या आप बतला सकते हैं जिस सीढ़ी से नायक
नायिका नीचे उतर रहे हैं उसके बाजू में एक फूलों
की झाडी है उसमें कौन से फूल लगे हैं?

पोस्ट पसंद ना आई हो तो कमेन्ट ज़रूर करें.


गीत के बोल:

देखो देखो जी
सोचो जी कुछ समझो जी
बागों में फूलों के मेले हैं
फ़िर क्यूँ अकेले हैं
हम तुम हम तुम हम तुम
देखो देखौ जी
सोचो जी कुछ समझो जी
बागों में फूलों के मेले हैं
फ़िर क्यूँ अकेले हैं
हम तुम हम तुम हम तुम

ऐसे रूठो ना हमसे खुदा के लिये
ऐसे रूठो ना हमसे खुदा के लिये
के हम हैं तैयार हर इक सजा के लिये
जो चाहे कह लो हमसे
सुन लो हमसे हाँ

देखो देखो जी
सोचो जी कुछ समझो जी
बागों में फूलों के मेले हैं
फ़िर क्यूँ अकेले हैं
हम तुम हम तुम हम तुम

हुस्न तो इश्क की दास्तान बन गया
हुस्न तो इश्क की दास्तान बन गया
ये इश्क ऐसे में क्यूँ बेज़ुबान बन गया
हाँ छोडो ना ही कह दो
कुछ तो बोलो हाँ

देखो देखो जी
सोचो जी कुछ समझो जी
बागों में फूलों के मेले हैं
फ़िर क्यूँ अकेले हैं
हम तुम हम तुम हम तुम

महबूब हमारी तुम्हें क्या पता
महबूब हमारी तुम्हें क्या पता
के हर कली बन गई आज महबूबा
ऐसे में तुम भी हमो
दिलवर कह दो हाँ

देखो देखो जी
सोचो जी कुछ समझो जी
बागों में फूलों के मेले हैं
फ़िर क्यूँ अकेले हैं
हम तुम हम तुम हम तुम
देखो देखो जी
सोचो जी कुछ समझो जी
बागों में फूलों के मेले हैं
फ़िर क्यूँ अकेले हैं
हम तुम हम तुम हम तुम
…………………………………………………………………..
Dekho ji dekho ji-Farz 1967

Artists: Jeetendra, Babita

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Aug 14, 2018

ना ना ना आ जा मेरे पास-फ़र्ज़ १९६७

लक्ष्मी प्यारे के संगीत वाली अधिकाँश फिल्मों में
लता के गाये गीतों के साथ आशा भोंसले का भी
एक ना गीत ज़रूर होता. ये गीत अक्सर फिल्म की
सहायक अभिनेत्री पर ही फिल्माया जाता. उन्हें
केवल नैयर खेमे में और बाद में आर डी बर्मन के
तबेले में ही मुख नायिका के लिए गाने मिले.

बी ग्रेड और सी ग्रेड फ़िल्में जिनमें छोटे और गरीब
मगर गुणवान संगीतकार होते उनके गीत आशा को
मिल जाते क्यूंकि लता तक पहुँच हर किसी की नहीं
थी और लता सेलेक्टिव भी थीं. सेलेक्टिव शब्द को
आप जैसे चाहे समझ लें.

सुनते हैं आनंद बक्षी की रचना. संगीतकार वही हैं
जिन्होंने फिल्म के बाकी गीतों को भी संगीत से
संवारा है.




गीत के बोल:

तू रू तू रू
ना ना ना ना ना आ जा मेरे पास
या या या या या मैं चली आऊँ तेरे पास
ये तन्हाई हाय हाय मैं और तू
तू रू तू रू
तू रू तू रू
ना ना ना ना ना आ जा मेरे पास
या या या या या मैं चली आऊँ तेरे पास
ये तन्हाई हाय हाय मैं और तू

या मैं हूँ या तू है या है ये काली रात
या मैं हूँ या तू है या है ये काली रात
अकेले अब सुन लें हम दोनों दिल की बात
या मैं हूँ या तू है या है ये काली रात
मुझे बेकरार कर थोडा सा प्यार कर
ये है मेरे दिल की आरज़ू
तू रू तू रू
ना ना ना ना ना आ जा मेरे पास
या या या या या मैं चली आऊँ तेरे पास
ये तन्हाई हाय हाय मैं और तू

ना सोचा ना समझा ना देखा ना जाना
ना सोचा ना समझा ना देखा ना जाना
ना कर दी बेदर्दी तू कैसे दीवाना
ना सोचा ना समझा ना देखा ना जाना
मैं भी आँखें चुरा लूं तुझसे दामन छुडा लूं
लेकिन क्या करून मैं आई लव यू
तू रू तू रू
ना ना ना ना ना आ जा मेरे पास
या या या या या मैं चली आऊँ तेरे पास
ये तन्हाई हाय हाय मैं और तू
तू रू तू रू
तू रू तू रू
तू रू तू रू
………………………………………..
Na na aa ja mere paas-Farz 1967

Artists: Jeetendra, Kanchana

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Jun 10, 2018

बड़े मियाँ दीवाने ऐसे ना बनो-शागिर्द १९६७

ऐसे सेल्फ एक्सप्लेनेट्री गीत मुझे बेहद पसंद आते हैं जिनके
साथ किसी विवरण की ज़रूरत नहीं होती. सब कुछ साफ़
नज़र आता है क्या चल रहा है.

फिर भी कुछ जानकारी जैसे गीतकार, संगीतकार और गायक
के बारे में बतला देना चाहिए और वो है क्रमशः मजरूह,
लक्ष्मी प्यारे और रफ़ी. कलाकरों के नाम आपको पोस्ट में
नीचे मिल जायेंगे अगर आप उन्हें ना पहचान पायें तो.
गीत की श्रेणियाँ-बीच हिट्स, स्विमिंग पूल हिट्स, कसरत
हिट्स, वेट लिफ्टिंग हिट्स, बूढी घोड़ी लाल लगाम हिट्स
इत्यादि. जिसमें आपका मन करे फिट कर लें.




गीत के बोल:

बड़े मियाँ दीवाने ऐसे ना बनो
हसीना क्या चाहे हमसे सुनो
ओ बड़े मियाँ दीवाने ऐसे ना बनो
हसीना क्या चाहे
यही तो मालूम नहीं है
हमसे सुनो

सबसे पहले सुनो मियाँ कर के वर्जिश बनो जवाँ
सबसे पहले सुनो मियाँ कर के वर्जिश बनो जवाँ
चेहरा पॉलिश किया करो थोड़ी मालिश किया करो
स्टाइल से उठे क़दम सीना ज़्यादा तो पेट कम
ऐ किबला उजले बालों को रंग डालो बन जाओ गुलफ़ाम
बड़े मियाँ दीवाने ...

बड़े मियाँ दीवाने ऐसे ना बनो
हसीना क्या चाहे हमसे सुनो

सीखो करतब नए-नए फैशन के ढंग नए-नए
सीखो करतब नए-नए फैशन के ढंग नए-नए
ढीला-ढाला लिबास क्यों रेशम पहनो कपास क्यों
फ़न ये जादूगरी का है अरमाँ तुमको परी का है
तो किबला मारो मंतर टेडी बन कर निकलो वक़्त-ए-शाम

बड़े मियाँ दीवाने ऐसे ना बनो
हसीना क्या चाहे हमसे सुनो

तन्हाई में अगर कहीं आ जाए वो नज़र कहीं
तन्हाई में अगर कहीं आ जाए वो नज़र कहीं
कहिए हाथों में हाथ डाल ए गुल-चेहरा परी-जमाल
मुद्दत से दिल उदास है तेरे होंठों की प्यास है
ऐ दिलबर मेरे लब पर कब छलकेगा तेरे लब का जाम

बड़े मियाँ दीवाने ऐसे ना बनो
हसीना क्या चाहे हमसे सुनो
ओ बड़े मियाँ दीवाने ऐसे ना बनो
हसीना क्या चाहे
यही तो मालूम नहीं है
हमसे सुनो
………………………………………………………….
Bade miyan deewane-Shagird 1967

Artists: Joy Mujherji, IS Johar

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Jun 9, 2018

दिल विल प्यार व्यार-शागिर्द १९६७

विवरण नहीं होगा तो क्या पाठक गीत नहीं सुनेंगे? ऐसा
नहीं है जिन्हें सुनना है वो सुनेंगे और जिनको कॉपी और
केवल कॉपी पेस्ट करना है वो वही करेंगे. जब हमने ब्लॉग
शुरू किया था तब गिनती की वेबसाईट हुआ करती थीं. अब
सैकड़ों हैं.

सुनते हैं फिल्म शागिर्द से लता मंगेशकर का गाया हुआ
लोकप्रिय गीत. मजरूह सुल्तानपुरी की रचना है और इसे
संगीतबद्ध किया है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने. नायिका को
तो आप पहचान ही गए होंगे.

https://www.youtube.com/watch?v=oHADwPlnPgo


गीत के बोल:

अय्या अय्या अय्या
दिल-विल प्यार-व्यार मैं क्या जानूँ रे
दिल-विल प्यार-व्यार मैं क्या जानूँ रे
जानूँ तो जानूँ बस इतना के मैं तुझे अपना जानूँ रे
दिल-विल प्यार-व्यार मैं क्या जानूँ रे
जानूँ तो जानूँ बस इतना के मैं तुझे अपना जानूँ रे
दिल-विल प्यार-व्यार
अय्या

तू है बुरा तो होगा पर बातों में तेरी रस है
जैसा भी है मुझे क्या अपना लगे तो बस है
घर है तेरा
घर है तेरा जिस नगरी में चाहे जो हो तेरा नाम रे
घर-वर नाम-वाम मैं क्या जानूँ रे
घर-वर नाम-वाम मैं क्या जानूँ रे ...
जानूँ तो जानूँ बस इतना के मैं तुझे अपना जानूँ रे
दिल-विल प्यार-व्यार

आदत नहीं के सोचूँ कितनों में हसीन है तू
लट में हैं कितने घूँघर नैनों में कितना जादू
बस तू मोहे
बस तू मोहे अच्छा लागे इतने ही से मुझ को काम रे
लट-वट नैंन-वैन मैं क्या जानूँ रे
लट-वट नैंन-वैन मैं क्या जानूँ रे
जानूँ तो जानूँ बस इतना के मैं तुझे अपना जानूँ रे
दिल-विल प्यार-व्यार

कुछ जानती तो कहती रुत बन कर के मैं खिली हूँ
डाली सी झूमती मैं साजन से आ मिली हूँ
तू ही जाने रुत है कैसी और है कितनी रँगीं शाम रे
रुत-वुत शाम-वाम मैं क्या जानूँ रे
रुत-वुत शाम-वाम मैं क्या जानूँ रे ...
जानूँ तो जानूँ बस इतना के मैं तुझे अपना जानूँ रे
दिल-विल प्यार-व्यार

पाया है जब से तुझको दिल पर नहीं है क़ाबू
एक प्यास है लबों पर बिखरे पड़े हैं गेसू
कुछ तो कह दे दर्द है कैसा कैसी प्यास है ये हर गाम रे
लब-वब प्यास-व्यास मैं क्या जानूँ रे
लब-वब प्यास-व्यास मैं क्या जानूँ रे

दिल-विल प्यार-व्यार मैं क्या जानूँ रे
दिल-विल प्यार-व्यार मैं क्या जानूँ रे
जानूँ तो जानूँ बस इतना के मैं तुझे अपना जानूँ रे
दिल-विल प्यार-व्यार
....................................................................
Dil vil pyar vyar-Shagird 1967

Artist: Saira Bano, Joy Mukherji

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Apr 10, 2018

कैसे करूं प्रेम की मैं बात-अनिता १९६७

एक हास्य पुट वाला गीत सुनते हैं फिल्म अनिता से. साधना पर
फिल्माया गया ये गीत गाया है लता मंगेशकर ने.

गीत लिखा है राजा मेहँदी अली खान ने और इस गीत की तर्ज़
तैयार की है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की जोड़ी ने. फिल्म के कुछ
गीत सुपरहिट की श्रेणी में आते हैं.




गीत के बोल:

कैसे करूं प्रेम की मैं बात
कैसे करूं प्रेम की मैं बात हाय
ना बाबा ना बाबा पिछवाड़े बुड्ढा खांसता
ना बाबा ना बाबा पिछवाड़े बुड्ढा खांसता
कैसे करूं प्रेम की मैं बात
कैसे करूं प्रेम की मैं बात हाय
ना बाबा ना बाबा पिछवाड़े बुड्ढा खांसता
ना बाबा ना बाबा पिछवाड़े बुड्ढा खांसता

काली काली चूडियाँ हैं गोरे गोरे हाथ में
काली पीली चूडियाँ हैं गोरे गोरे हाथ में
गोरे गोरे हाथ में
सुबह मुंह दिखाउंगी क्या छलके जो रात में
सुबह मुंह दिखाउंगी क्या छलके जो रात में
जोड़ती हूँ मेहँदी वाले हाथ हाय
ना बाबा ना बाबा पिछवाड़े बुड्ढा खांसता
ना बाबा ना बाबा पिछवाड़े बुड्ढा खांसता

रात की दुल्हन के माथे चन्दा जी की बिंदिया
रात की दुल्हन के माथे चन्दा जी की बिंदिया
चन्दा जी की बिंदिया
बड़ी बड़ी अंखियों में थोड़ी थोड़ी निंदिया
बड़ी बड़ी अंखियों में थोड़ी थोड़ी निंदिया
शोर मचा देगी पायल कमजात हाय
ना बाबा ना बाबा पिछवाड़े बुड्ढा खांसता
ना बाबा ना बाबा पिछवाड़े बुड्ढा खांसता

काहे जोराजोरी मेरा घूंघटा उतार के
काहे जोराजोरी मेरा घूंघटा उतार के
घूंघटा उतार के
देख ये तमाशा दैया तारे आँखें मारते
देख ये तमाशा दैया तारे आँखें मारते
कहते देखो कैसी मुलाकात हाय
ना बाबा ना बाबा ना बाबा पिछवाड़े बुड्ढा खांसता
ना बाबा ना बाबा पिछवाड़े बुड्ढा खांसता

कैसे करूं प्रेम की मैं बात
कैसे करूं प्रेम की मैं बात हाय
ना बाबा ना बाबा पिछवाड़े बुड्ढा खांसता
ना बाबा ना बाबा पिछवाड़े बुड्ढा ठांसता
......................................................................
Kaise karoon prem ki main baat-Anita 1967

Artists: Sadhana

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Feb 19, 2018

क़रीब आ ये नज़र फिर-अनिता १९६७

श्वेत श्याम युग तक हमने अभिनेत्री साधना को सीधी साधी घरेलू
लड़की या महिला के किरदारों में ही ज्यादा देखा. रंगीन युग के
आगमन के साथ ही कई फिल्मों में उनकी भूमिका भी आधुनिक
होती चली.

एक गीत सुनते हैं सन १९६७ की फिल्म अनिता से. गीत के बोल
हैं राजा मेहदी अली खान के और संगीत है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
का. इसे लता मंगेशकर ने गाया है.

फिल्म का निर्देशन राज खोसला ने किया और शायद ये एक वजह
हो सकती है गीतकार के रूप में राजा मेहदी अली खान की सेवाएं
लेने की. राज खोसला की पिछली फिल्म थी-मेरा साया जिसमें कि
मदन मोहन का संगीत है. फिल्म के गीत राजा मेहदी अली खान
द्वारा लिखे गए थे. लक्ष्मी प्यारे की राज खोसला के लिए ये पहली
फिल्म थी और इसके गीत खूब चले. इसके बाद आई फिल्म चिराग
में फिर से एक बार मदन मोहन का संगीत है. गीतकार बदल गए
चिराग फिल्म में और इसके गीत मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे.




गीत के बोल:

क़रीब आ ये नज़र फिर मिले मिले ना मिले
क़रीब आ ये नज़र फिर मिले मिले ना मिले
ये आरज़ू का चमन फिर खिले खिले न खिले
क़रीब आ ये नज़र फिर मिले मिले ना मिले
क़रीब आ ये नज़र

तरस रहा है ये दिल तेरी इक नज़र के लिए
तरस रहा है ये दिल तेरी इक नज़र के लिए
बस एक नज़र तेरी काफ़ी है उम्र भर के लिए
नज़र से प्यार जता लब हिले हिले ना हिले
क़रीब आ ये नज़र फिर मिले मिले ना मिले
क़रीब आ ये नज़र

नज़र उठा के तेरे सामने बहार खड़ी
नज़र उठा के तेरे सामने बहार खड़ी
कोई हसीना निगाहों में ले के प्यार खड़ी
फिर इस अदा से कली खिले खिले ना खिले

क़रीब आ ये नज़र फिर मिले मिले ना मिले
ये आरज़ू का चमन फिर खिले खिले न खिले
…………………………………………………………………
Karee baa ye nazar phir-Anita 1967

Artist: Sadhana, IS Jauhar

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Jan 20, 2018

आई हैं बहारें-राम और श्याम १९६७

एक लोकप्रिय गीत सुनते हैं फिल्म राम और श्याम से. ब्लॉग को
लोकप्रिय बनाये रखने के लिए लोकप्रिय गीत सुनवाना ज़रूरी होता
है. रेयर और ना के बराबर सुने हुए गीत केवल अंग्रेजी ब्लॉग पर
शोभा देते हैं. उन्हें सुनने वाले कम-भक्त यहाँ नहीं मंडराया करते.
गर हम भी अंग्रेजी में लिखा करते तो हडप्पा और मोहन-जोदडो
की खुदाई में निकले गीत भी आपको सुनवाते.

प्रस्तुत गीत को श्रेणी बनाने के शौक़ीन बर्डडे सोंग कहते हैं. हम
भी कह लेते हैं. इसे शकील बदायूनीं ने लिखा है और इसका संगीत
है नौशाद का. फिल्म के दूसरे गीतों की तुलना में ये उतना पोपुलर
नहीं है मगर इसे भी काफी सुना गया है. फिल्म का शीर्षक गीत
भी कह सकते हैं इसे.

   


गीत के बोल:

आई हैं बहारें मिटे ज़ुल्म-ओ-सितम
प्यार का ज़माना आया दूर हुए ग़म
राम की लीला रंग लाई
हा हा हा
श्याम ने बंसी बजाई
हा हा हा हा
आई हैं बहारें मिटे ज़ुल्म-ओ-सितम
प्यार का ज़माना आया दूर हुए ग़म
राम की लीला रंग लाई
हा हा हा
श्याम ने बंसी बजाई
हा हा हा हा

चमका है इनसाफ़ का सूरज फैला है उजाला
उजाला चार बूंदों वाला
चमका है इन्साफ का सूरज फैला है उजाला
नई उमंगें संग लायेगा हर दिन आने वाला
आने वाला
नई उमंगें संग लायेगा हर दिन आने वाला
हो हो मुन्ना गीत सुनायेगा
टुन्ना ढोल बजायेगा
मुन्ना गीत सुनायेगा टुन्ना ढोल बजायेगा
संग संग मेरी छोटी मुन्नी नाचेगी छम धम

हो आई हैं बहारें मिटे ज़ुल्म-ओ-सितम
प्यार का ज़माना आय दूर हुए ग़म
राम की लीला रंग लाई
हा हा हा
श्याम ने बंसी बजाई
हा हा हा हा

अब न होंगे मजबूरी के इस घर में अफ़साने
अब ना होंगे मजबूरी के इस घर में अफ़साने
प्यार के रंग में रंग जायेंगे सब अपने बेगाने
प्यार के रंग में रंग जायेंगे सब अपने बेगाने
हो हो हो हो सब के दिन फिर जायेंगे
मंज़िल अपनी पायेंगे
जीवन के तराने मिल के गायेंगे हरदम

हो आई हैं बहारें मिटे ज़ुल्म-ओ-सितम
प्यार का ज़माना आय दूर हुए ग़म
राम की लीला रंग लाई
हा हा हा
श्याम ने बंसी बजाई
हा हा हा हा
अब ना कोई भूखा होगा
और ना कोई प्यासा
हो हो हो अब ना कोई भूखा होगा और ना कोई प्यासा
अब ना कोई नौकर होगा
और ना कोई आका
अब ना कोई नौकर होगा और ना कोई आका
हो ओ ओ अपने घर के राजा तुम
हा आ आ आ छेड़ो मन का बाजा तुम
आ जायेगी सुर में देखो जीवन की सरगम

हो आई हैं बहारें मिटे ज़ुल्म-ओ-सितम
प्यार का ज़माना आय दूर हुए ग़म
राम की लीला रंग लाई
हा हा हा
श्याम ने बंसी बजाई
हा हा हा हा
…………………………………………………………
Aayi hai baharen-Ram aur Shyam 1967

Artists: Dilip Kumar, Kids

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