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Sep 28, 2016

अनजाना अनजानी की कहानी-अनजाना अनजानी २०१०

अनजाना अनजानी फिल्म की कहानी अनूठी है और इसे धैर्य से देख
पाना एक अलग अनुभव है. ऐसे अनूठे कथानक बाहर की फिल्मों में
आम बात है मगर हिन्दुस्तानी दर्शक और २०१० में पूर्ण देसीकृत
विलायती मसाला समय के साथ मगर कुछ समय से आगे की खिचड़ी
है. वैसे तो २००० अर्थात मिलेनियम वर्ष के बाद जो नूडल्स बनने
शुरू हुए ठेलों पर तो उनमें सोयाबीन की बड़ी और लाल मिर्च लहसुन
का तड़का प्रयोग में आने लगा और नई पीढ़ी ने इसे काफी पसंद
किया. एक पैरेलल ड्रा करें खाद्य उद्योग और फिल्म उद्योग में तो
हमें काफी समानताएं देखने को मिलेंगी.

फिल्म में एक गीत है जिसे आप शीर्षक गीत कह सकते हैं. ये गीत
फिल्म की कहानी बतलाता है. गीत जो है वे साहित्यिक तरीके से
कहानी बतलाते हैं जो ऊंघ ऊंघ के फिल्म देखने वालों के समझ के
दायरे में देर से आते हैं, फिर भी ये ऐसे दर्शकों के लिए मददगार होते
हैं जिन्हें फिल्म की स्टोरी को लेकर कन्फ्यूज़न होता है कि कहानी
किस बारे में है और उसमें क्या कहा जा रहा है.

गीत सुनते हैं जिसे निखिल डिसूज़ा और मोनाली ने गाया है. गीत
लिखा है नीलेश मिश्रा ने और धुन है विशाल शेखर की जोड़ी की.



गीत के बोल:

हल्का हल्का सा गुमा है
जाने क्या मुझे हुआ है
हर नज़र दर बदर अजनबी
हमको भी यही गिला है
जो भी आज कल मिला है
हर कदम दम-बदम अजनबी

इस तरफ जो है उदासी
इस तरफ भी है ज़रा सी
दिल की राहों के दो अजनबी
अनजाना कहने को ही था
मेरा था वो जो भी था अनजानी
है मगर नहीं के तू
है यहीं कहीं

जब से जाना के अब ना जाना है
फिर कभी भी तुझे
चाहतों से किनारा कर लिया
जब से सोचा के अब ना सोचेंगे
फिर कभी भी तुम्हे
दिल ने कोई बहाना कर दिया
हो मेरे तुम्हारे दरमियाँ में
जो बातें हुई नहीं हैं
कभी दुआ में कभी जुबां में
क्यूँ तुमने कहीं नहीं हैं
कहने को तो क्या नहीं है
दर पे हर ख़ुशी खड़ी है
फिर भी क्यूँ लग रही है कमी
अनजाना कहने को ही था
मेरा था वो जो भी था अनजानी
है मगर नहीं के तू
है यहीं कहीं

ऐ मेरे खुदा दूर क्या हो रही है सुबह
मिल गयी मुझे मिल गयी तुझे
वहां जीने की फिर वजह
तू जो कह दे तो मंजिलें
मिल जाएँ यूँ आज फिर हमे तेरे मेरे ये रास्ते
लग जाए यूँ आज फिर गले
मिल भी तू तेरे फिराने
दौड़ती हूँ उस किनारे
हैं जहाँ पे मेरा अब जहाँ
अनजाना कहने को ही था
मेरा था वो जो भी था अनजानी
है मगर नहीं के तू
है यहीं कहीं
अनजाना कहने को ही था
मेरा था वो जो भी था अनजानी
है मगर नहीं के तू
है यहीं कहीं
………………………………………………….
Anjaana anjaani ki kahani-Anjaana Anjaani 2010

Artists: Priyanka Chopra, Ranveer Kapoor

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Jan 17, 2015

जाने कैसे टूटे...अलविदा- डी-डे २०१३

शंकर एहसान लॉय की तिकड़ी ने काफी पहले फिल्मों में
संगीत देना शुरू किया था. समय के हिसाब से उनके
खाते में कम फ़िल्में हैं. इनमें से शंकर महादेवन एक
ख्यातनाम गायक हैं. तिकड़ी में से एक लॉय मेंडोसा ने
इस गीत में अपनी आवाज़ दी है. दूसरे दो गायक हैं
निखिल डिसूज़ा और सुखविंदर. सुखविंदर का नाम तो
सबके लिए जाना पहचाना है. फिल्म का नाम है डी-डे
जो ऐसा लगता है जैसे-ड्राई डे हो. गीत लिखा है निरंजन
आयंगार ने.



गीत के बोल:

जाने कैसे टूटे रिश्तों से बिखरे हैं ये पल
मानो जैसे ग़म की पलकों से छलके हैं ये पल
क्यूँ अधूरी ये कहानी क्यूँ अधूरा ये फ़साना
क्यूँ लकीरों में इसके अलविदा

उमर भर का साथ दे जो क्यूँ वो ही प्यार हो
क्यूँ न मिट के जो फना हो वो भी प्यार हो
ना अधूरी ये कहानी ना अधूरी ये फ़साना
मर के भी ना हम कहेंगे अलविदा

बैरिया मेरे रब्बा क्यूँ हुआ मेरे रब्बा
यूँ ना ढामी यूँ ना ढामी
दो दिलां दी ये कहानी

मिट भी जाऊं ना मिटे ये कैसी प्यास है
दूरियों में खो के भी तू मेरे पास है
क्यूंकि तू मेरी कहानी क्यूंकि तू मेरा फ़साना
अब कभी फिर ना है कहना अलविदा

तेरी यादों को सहलाता हूँ याद कितना
पल में बन के बिखरता हूँ
जिस जहां में खो गयी हो तुम
क्या नहीं है वहाँ टूटी तन्हाइयों का ग़म
बैरिया मेरे रब्बा
जाने कैसे टूटे रिश्तों से बिखरे हैं ये पल
मानो जैसे ग़म की पलकों से छलके हैं ये पल
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Jaane kaise……alvida-D-day 2013

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