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Jul 22, 2017

मुसाफिर जाने वाले-ग़दर एक प्रेमकथा २००१

फिल्म ग़दर से एक मधुर युगल गीत सुनते हैं. मुसाफिर हिट्स
की श्रेणी वाला ये गीत लिखा है आनंद बक्षी ने. उदित नारायण
और प्रीति उत्तम ने इसे गाया है. इसका संगीत तैयार किया है
उत्तम सिंह ने.

गीत दिल की गहराइयों को छू लेने वाला है और इसमें कालजयी
बनने के लक्षण मौजूद हैं. समय बतलायेगा इसे कब तक निरंतर
सुना जाता रहेगा.

फिल्म का कथानक विभाजन के आसपास का है और इस गीत में
जो ढेर सारी जनता अलग अलग किस्म के साधनों पर और पैदल
जाती नज़र आ रही है वो इधर से उधर का आवागमन है और गीत
के बीच में ही उस टेंशन को दिखलाया भी गया है.

समय और ट्रेंड जैसा चल पड़ा है उस हिसाब से अगर इस फिल्म के
गीत याद नहीं भी रखे जाएँ जनता द्वारा तो भी सनी देवल द्वारा हैंडपंप
उखाड़ने वाला दृश्य ज़रूर याद रहेगा.



गीत के बोल:

मुसाफिर जाने वाले
मुसाफिर जाने वाले नहीं फिर आने वाले
चलो एक दूसरे को करें रब दे हवाले
मुसाफिर जाने वाले नहीं फिर आने वाले
चलो एक दूसरे को करें रब दे हवाले

हो आ आ, हा आ आ आ आ आ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ हो हो हो हो

बड़ी मुश्किल से दिल में अपने
बड़ी मुश्किल से दिल में अपने लोग बसते हैं कुछ सपने
ये सपने शीशे के खिलौने टूट के बस लगते हैं रोने
दिलों पे छ जाते हैं ये बादल काले काले
चलो एक दूसरे को करें रब दे हवाले
मुसाफिर जाने वाले नहीं फिर आने वाले
चलो एक दूसरे को करें रब दे हवाले

हो आ आ, हा आ आ आ आ आ
ओ दरिया दे पानियां ये मौजां फिर नहीं आनियां
ओ दरिया दे पानियां ये मौजां फिर नहीं आनियां
याद आयेंगी ओ याद आयेंगी बस जानेवालों की कहानियां
ओ दरिया दे पानियां ये मौजां फिर नहीं आनियां
ओ दरिया दे पानियां ये मौजां फिर नहीं आनियां
हो आ आ, हा आ आ आ आ आ

हां ना जाने क्या छूट रहा है
हो ओ ओ ना जाने क्या छूट रहा है
दिल में बस कुछ टूट रहा है
होंठों पर नहीं कोई कहानी फिर भी आँख में आ गया पानी
नहीं हम भूलने वाले नहीं हम भूलने वाले
चलो एक दूसरे को करें रब दे हवाले
मुसाफिर जाने वाले नहीं फिर आने वाले
चलो एक दूसरे को करें रब दे हवाले
मुसाफिर जाने वाले नहीं फिर आने वाले
..........................................................................
Musafir jaane wale-gadar 2001

Artists: Sunny Deol, Amisha Patel

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Jun 6, 2017

साड्डे ते वेड़े बूटा-ग़दर २००१

एक फुल पंजाबी बोलों वाला गीत सुनते हैं फिल्म गदर से.
एक कहावत आपने अक्सर सुनी होगी-हूर के साथ लंगूर.
गधी राबड़ी खा गयी वगैरह. इसी बात को अलग अलग
अंदाज़ में गीतकार भी प्रस्तुत करते रहे हैं.

गीत लिखा है आनंद बक्षी ने और इसकी धुन बनाई है
उत्तम सिंह ने. गीत गाया है प्रीति उत्तम ने. प्रीति संगीतकार
उत्तम सिंह की बेटी हैं.



गीत के बोल:

साड्डे ते वेड़े बूटा अंगूर दा
मुंडा ते लग्गे जिवें पेड़ खजूर दा
जोड़ी ए जच दी नईं वे
के अड़ेयो जोड़ी ए जच दी नईं

ओए कुड़ी ते साड्डी ए फुल गुलाब दा
मुंडा ते दस्सो पुत्तर केड़े नवाब दा
वे अड़ेयो जोड़ी ए जच दी नईं

साड्डे ते वेड़े बूटा अनार दा
मुंडा ते वेखो किवें अँखियां मारदा
जोड़ी ए जच दी नईं
के अड़ेयो जोड़ी ए जच दी नईं

साड्डे ते बागां विच पक गईयां अम्बियां
प्यार दियां रातां देखो हो गईयां लम्बियां
साड्डे ते मेहर करो
ओ रब जी आड्डे ते मेहर करो
……………………………………………
Sadde te vere boota angoor da-Gadar 2001

Artists: Sunny Deol, Amisha Patel

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