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Sep 2, 2017

देखते देखते एक धुआँ-संगत १९७५

सलिल चौधरी ने गज़ब की कारीगरी की है अपने संगीत में.
मन्ना डे का गाया एक गीत सुनते हैं फिल्म संगत से. इसे
आसानी से गाया जा सकने वाला गीत तो नहीं ही कहेंगे हम.

मन्ना डे ने लता की तुलना में कम गीत गाये हैं सलिल के
लिए लेकिन जितने भी गाये हैं वो बॉलीवुड की भाषा में कहें
तो ‘अलग हट के’ हैं. ऐसे गीत सुनने वाले संगीत प्रेमी थोड़े
कम ही हैं.

गीत लिखा है जां निसार अख्तर ने.




गीत के बोल:

देखते देखते एक धुआँ छा गया
ये ज़मीं खो गई आसमाँ खो गया
जाने क्या हो गया

देख क्या सब नज़ारे पिघलने लगे
जागते ख़्वाब आँखों में जलने लगे
कोई साँसों में
कोई साँसों में इक दर्द सा बो गया
जाने क्या हो गया
देखते देखते

कोई बहती नदी रूह में थम गई
बर्फ़ बन के लबों पर सदा जम गई
गीत जागा मगर
गीत जागा मगर जाग कर सो गया
जाने क्या हो गया
देखते देखते

दिल की धड़कन से गूँजीं ये तन्हाईयाँ
दूर तक सिर्फ़ अश्कों की परछाईयाँ
कोई चुपके से
कोई चुपके से इस ख़ाक़ पर रो गया
जाने क्या हो गया
देखते देखते एक धुआँ छा गया
ये ज़मीं खो गई आसमाँ खो गया
जाने क्या हो गया
............................................................
Dekhte dekhte ek dhuan-Sangat 1975

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