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Jun 23, 2020

भोर आई गया अँधियारा-बावर्ची १९७२

हिंदी सिनेमा ने बेहद प्रतिभाशाली कलाकार भी देखे हैं. हम
ऐसे कलाकारों से प्रेरणा ले सकते हैं. ऐसे अधिकाँश कलाकार
अपने सभी कामों को पूरी लगन और समर्पण से करते दिखे.
नायक नायिका कुछ भी उछल-कूद करते रहें ये अपनी छाप
छोड़ते चले.

आज बहुमुखी प्रतिभा के स्वामी हरिन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय की
पुण्यतिथि है. साहित्य, शिक्षा और सिनेमा में इनके अमूल्य
योगदान को हमेशा याद रखा जायेगा. पहली लोकसभा में ये
विजयवाड़ा संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे. साहित्य और शिक्षा में
योगदान के लिए इन्हें भारत सरकार द्वारा १९७३ में पद्मभूषण
सम्मान दिया गया.

१९६२ की फिल्म साहब बीबी और गुलाम इनकी पहली हिंदी
फिल्म थी. इसके बाद वे तेरे घर के सामने फिल्म में दिखाई
दिए जिसमें उन्होंने नायिका के पिता की भूमिका निभाई. ८८
की नसीरुद्दीन शाह अभिनीत फिल्म मालामाल उनकी आखिरी
हिंदी फिल्म रही.

फिल्म जूली के लिए उनका लिखा गीत-माय हार्ट इस बीटिंग
अपने समय में बेहद लोकप्रिय हुआ था. हरिन्द्रनाथ संगीत के
भी जानकार थे और कम्पोज़िंग में भी सक्षम थे.

आज सुनते हैं फिल्म बावर्ची का एक गीत जिसमें फिल्म की
लगभग पूरी स्टारकास्ट मौजूद है. कैफी आज़मी का गीत है
और मदन मोहन का संगीत.

बॉलीवुड में आज जिन लोगों का जन्मदिन है वे हैं-राज बब्बर,
गुज़रे ज़माने के अभिनेता रहमान, और प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक
जब्बार पटेल. इसके अलावा क्रिकेट के क्षेत्र में वेट इंडीज़ के
प्रसिद्ध खिलाडी रामनरेश सरवन.



गीत के बोल:

भोर आई गया अँधियारा
भोर आई गया अँधियारा
सारे जग में हुआ उजियारा
नाचे झूमे ये मन मतवाला मतवाला
भोर आई गया अँधियारा
गया अँधियारा गया अँधियारा

भोर आई गया अँधियारा
भोर आई गया अँधियारा
सारे जग में हुआ उजियारा
नाचे झूमे ये मन मतवाला मतवाला
भोर आई गया अँधियारा
गया अँधियारा गया अँधियारा
…………………………………………….
Bhor aayi gaya andhiyara-Bawarchi 1972

Artists: Rajesh Khanna, Master Raju, Jaya Bhaduri, Asrani, Various

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Mar 16, 2020

मेरी अरज सुनो बनवारी-खलीफा १९७६

फ़िल्मी कथानक भगवान सर्वशक्तिमान के उल्लेख और
वंदना के बिना नहीं बनते हैं. किसी ना किसी रूप में
फिल्म में उल्लेख हो ही जाता है. चाहे वो टाइटल्स के
शुरू में ही क्यूँ ना हो. चलिए मान लिया जाये किसी
नास्तिक ने फिल्म बनाई तो ना मानने में भी तो वो
मान ही रहा है.

सुनते हैं एक फ़िल्मी भजन १९७६ की फिल्म खलीफ़ा
से जिसे मन्ना डे ने गाया है. गुलशन बावरा की रचना
है और पंचम का संगीत.



गीत के बोल:

हरिओम तत्सत्
हरिओम तत्सत्

जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम

मेरी अरज सुनो बनवारी
मेरी अरज सुनो बनवारी
पूरी कर दो मनोकामना
पूरी कर दो मनोकामना
आये शरण तिहारी
मेरी अरज सुनो बनवारी

हाँ तेरे द्वारे जो भी आये

खाली हाथ ना जाए ना जाए
जितनी जिसकी भक्ति होगी
उतना वो फल पाए
ओ प्रभु जी
सदा रहूँ चरणों में तेरे
बन के तेरा पुजारी

मेरी अरज सुनो बनवारी
अरज सुनो बनवारी

जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
बनवारी बनवारी
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम

दाता के तो भरे खजाने
फिर क्यूँ तू घबराये
गणग से एक लोटा भर लो
गंगा का क्या जाये
ओ बंधुआ
पलकें मूँद के मन में प्रभु का
ध्यान धरो नर नारी

मेरी अरज सुनो बनवारी
मेरी अरज सुनो बनवारी
पूरी कर दो मनोकामना
पूरी कर दो मनोकामना
आये शरण तिहारी
मेरी अरज सुनो बनवारी
अरज सुनो बनवारी

जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
जय जय राम सियाराम
…………………………………………………
Meri araj suno banwari-Khalifa 1976

Artists: Randhir Kapoor

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Mar 12, 2020

हो गई शाम दिल बदनाम-नॉटी बॉय १९६२

किशोर कुमार की परदे पर उपस्थिति का ज़्यादातर
मतलब पूर्ण मनोरंजन. आज आपको ऐसा गीत सुनवा
रहे हैं जिसमें उनके लिए पार्श्व गायन मन्ना डे ने किया
है.

फिल्म के कथानक में एक पार्टी चल रही है जिसके शुरू
में मुक्केबाजी की प्रेक्टिस हो रही है. नायिका गाना शुरू
करती है और नायक मुक्केबाजी से निवृत्त हो कर हैप्पी
हो हैप्पी हो करते हुए गाना शुरू करता है और अपने नृत्य
कौशल से जनता को लुभाता है.

इस गीत में आपको फ़िल्मी दुनिया के ओर्केस्ट्रा के कई
कलाकार दिखलाई देंगे जिनके बारे में विस्तृत जानकारी
आपको महंगे वाले अंग्रेजी ब्लोगों पर उपलब्ध हो जायेगी.

गीत शैलेन्द्र का है और संगीत एस डी बर्मन का.



गीत के बोल:

हो हो गई शाम दिल बदनाम
लेता जाये तेरा नाम
लाख मनाऊँ नहीं माने
नहीं माने नहीं माने
हो ओ ओ हो गई शाम दिल बदनाम
लेता जाये तेरा नाम
लाख मनाऊँ नहीं माने
नहीं माने नहीं माने
हो ओ ओ हो गई शाम

प्यार ने जब से जादू फेरा हाँ
जागते करूं मैं सवेरा

आँखों में नाचे छबि तेरी हो
साँसों में रहे गम तेरा
हो पूछ लो कैसा रोग
दुनिआ मारे ताने

हैप्पी हो हैप्पी हो हैप्पी हैप्पी हैप्पी
हो गई शाम दिल बदनाम
लेता जाये तेरा नाम
लाख मनाऊँ नहीं माने
नहीं माने नहीं माने
हो ओ ओ हो गई शाम

हाय न दुनिया का मेला
तेरे बिना हूँ मैं अकेला
क्या मैं बताऊ कहाँ कहाँ
गर्दिश ने मुझको धकेला
हो ओ ओ तुम आ जाओ लौटा लाओ
वो गुजरे ज़माने

हो गई शाम दिल बदनाम
लेता जाये तेरा नाम
लाख मनाऊँ नहीं माने
नहीं माने नहीं माने
हो ओ ओ हो गई शाम

प्यार का रंगी ये नज़ारा हो
साथ तुम्हारा प्यारा प्यारा
हो ओ ओ सपना सुहाना मेरे आगे
आज मै फिर दिल हार
हो ओ ओ ये दो नैन ले गये चैन
लागे तड़पाने

हो गई शाम दिल बदनाम
लेता जाये तेरा नाम
लाख मनाऊँ नहीं माने
नहीं माने नहीं माने
हो ओ ओ ओ हो गई शाम दिल बदनाम
लेता जाये तेरा नाम
लाख मनाऊँ नहीं माने
नहीं माने नहीं माने
……………………………………………
Ho gayi sham dil badnam-Naughty Boy 1962

Artists: Kalpana, Kishore Kumar

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Jan 19, 2020

यार दगा दे गया-चोरों की बारात १९८०

गानों की वैराइटी की बात करें तो ८० के दशक में हमें
सबसे ज्यादा तरह तरह का सामान देखने को मिला.
इसी दशक में हमने सलमा आगा, गुलाम अली और
डिस्को संगीत को देख लिया. इस दशक की फ़िल्मी
कव्वालियां भी अलग अलग रंग वाली मिल गयीं.

किसी फिल्म का शीर्षक गीत कव्वाली हो ऐसा कम
देखा हमने. सन १९७७ की फिल्म हम किसी से कम
नहीं में भी शीर्षक गीत कव्वाली है. फिल्म ज़माने को
दिखाना है में भी शीर्षक गीत कव्वाली है.

सुनते हैं सन १९८० की फिल्म की भूली बिसरी कव्वाली
जो जीवन पर फिल्माई गयी है. धार्मिक फिल्मों में
नारद मुनि की भूमिकाएं निभाने वाले जीवन ने सामान्य
फिल्मों में अधिकतर विलन की भूमिकाएं निभाई हैं.

आनंद बक्षी के बोल हैं और लक्ष्मी प्यारे का संगीत.
इसे मन्ना डे, अनवर और जसपाल सिंह ने गाया है.



गीत के बोल:

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
यार दगा दे गया
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
ओ यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
छोड़ा गया साथ
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
छोड़ा गया साथ
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
ओ आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात

हर गली में ढूंढते हर कली से पूछते
मिल गया कोई निशाँ हम चले आये यहाँ
हर गली में ढूंढते हर कली से पूछते
मिल गया कोई निशाँ हम चले आये यहाँ
तो दूर थी मंजिल बड़ी राह थी मुश्किल बड़ी
गिरते सँभलते रहे हम मगर चलते रहे
ये भरोसा था हमें
था हमें
इतना पता था हमें
था हमें
हम रहे जिंदा गर आज हो या कल मगर
अरे होगी मुलाक़ात
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
यार दगा दे गया

वाडे सभी तोड़े के अपना शहर छोड़ के
वो बसा परदेस में एक नये भेस में
हमने भी छोड़ा वतन बाँध के सर पे कफ़न
वो नहीं या हम नहीं हम किसी से कम नहीं
हम किसी से कम नहीं
देखिये सुनिये जनाब क्या तबियत है खराब
किसलिए ये बेरुखी बात नहीं आप की
रे लोगों की है बात
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
यार दगा दे गया

बेवफा वो बेवफा वो है तो क्या
हम तो नहीं बेवफा
बेवफा वो है तो क्या
हम तो नहीं बेवफा
हम पुरानी दोस्ती
हम पुरानी दोस्ती तोड़ के कैसे अजी
हम पुरानी दोस्ती तोड़ के कैसे अजी
जान देंगे साथ हम हमने खाई थी कसम
बेवफा वो बेवफा वो है तो क्या
हम तो नहीं बेवफा
बेवफा वो है तो क्या
हम तो नहीं बेवफा
हाँ ये सितम हो किसलिए किसलिए
वो अकेला क्यूँ जिए क्यूँ जिए
किस तरह होगी भला फूल से खुशबू जुदा
किस तरह होगी भला फूल से खुशबू जुदा
आज का दिन खास है दूर थी अब पास है
हो मिलन की रात
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
ओ आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात

ओ यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
ओ यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
ओ यार दगा दे गया
…………………………………………….
Yaar daga de gaya-Choron ki baraat 1980

Artists: Jeevan, Ajit, Sudhir, Shatrughan Sinha

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Dec 13, 2019

उलझन हज़ार कोई डाले-चांदी सोना १९७७

कोई सोना खोजने जाए और उसे प्लेटिनम मिल जाये
तो वो कैसे बावला हो के खुशी से उछलेगा इस गीत से
समझिए. नायिका तो इतनी खुश है मानो २४ केरेट की
जूलरी छत फाड के टपकना शुरू होने वाली हो.

गीत शुरू होने पर लगता है जैसे कोई रॉक शो की प्रेक्टिस
हो रही है गुफा में. पेंटल चट्टान पर कांगो बजा रहे हैं.
नायिका नाच रही है.

गीतकार को या फिर संगीतकार को गाना बनाते समय
नीना की याद बहुत आई. गीत में कई बार नीना शब्द
आया है. अल-नीनो की बहन हो सकती है क्या ये. अब
१९७७ में अल-नईनो शब्द हमने नहीं सुना था इसलिए
अनुमान लगाना कठिन है.





गीत के बोल:

ऐसा हा आ जलवा हा आ अल्ला
उलझन हज़ार कोई डाले
उलझन हज़ार कोई डाले
हाय रुकते कहाँ हैं दिल वाले
हो देखो ना आ गये
मस्ताने छा गये
बाहों में बाहें डाले
उई नीना नीना नीना नीना नीना नीना
ऐसा हा जलवा हा अल्ला हा हा
ऊई नीना नीना नीना नीना नीना नीना

उलझन हज़ार कोई डाले
हो रुकते कहाँ हैं दिल वाले
हो ओ देखो ना आ गये
मस्ताने छा गये
बाहों में बाहें डाले
उई नीना नीना नीना नीना नीना नीना

जादू भरे ख़्वाबों का रंगीं नगर
दीवानों दीवानों देखो ना देखो ना
जैसे कोई खोई हुई जन्नत का दर
मस्तानों मस्तानों देखो ना
अहा रंग बदलते पर्बत के दिल में
झूमर भी जलते मंज़र कहाँ ऐसा ओ मतवाले
उई नीना नीना नीना नीना नीना नीना

ऐसा ह जलवा ह अल्ला
उलझन हज़ार कोई डाले
हो रुकते कहाँ हैं दिल वाले
हो ओ देखो ना आ गये
मस्ताने छा गये
बाहों में बाहें डाले
उई नीना नीना नीना नीना नीना नीना

जैसे बहार लिये खड़ी हाथों के हार
दीवानों दीवानों देखो ना देखो ना
सदियों से तेरा मेरा था इन्तज़ार
मस्तानों मस्तानों देखो ना
अहा हिम्मत के आगे पत्थर के दिल की
धड़कन भी जागे धड़कन जगाता चल ओ मतवाले
उई नीना नीना नीना नीना नीना नीना

उलझन हज़ार कोई डाले
हो रुकते कहाँ हैं दिल वाले
देखो ना आ गये
मस्ताने छा गये
बाहों में बाहें डाले
उई नीना नीना नीना नीना नीना नीना
…………………………………………………….
Uljhan hazaar koi daale-Chandi Sona 1977

Artists: Parveen Babi, Sanjay Khan, Paintal, Pran

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Dec 11, 2019

तार तार बज रहा-स्कूल मास्टर १९५९

सुरबहार एक वाद्य है जिसकी ध्वनि सितार से मिलती
जुलती है. आपने फिल्म के गीतों में वीणा शब्द सबसे
ज्यादा सुना होगा. उसके बाद सितार का नाम आता है.
तबला तो अक्सर हास्य गीतों में ही बजता है.

१९५९ की फिल्म स्कूल मास्टर में एक युगल गीत है
मन्ना डे और लता मंगेशकर का गाया हुआ जिसमें इस
वाद्ययंत्र का नाम आया है. कवि प्रदीप की रचना है और
वसंत देसाई का संगीत. एक अच्छा रोमांटिक गीत है ये.





गीत के बोल:

आ आ आ आ आ आ आ आ आ
तार तार बज रहा दिल के सुरबहार का
गुनगुना ले आ पिया गीत आज प्यार का
आ पिया आ सजनिया आ
आ पिया सजनिया आ

तार तार बज रहा दिल के सुरबहार का
गुनगुना ले आ पिया गीत आज प्यार का
आ पिया आ सजनिया आ
आ पिया सजनिया आ

आ के हाथ थाम ले मुझपे नशा छा गया
ओ जब किसी का दिल लुटे आज वो दिन आ गया
आ के हाथ थाम ले मुझपे नशा छा गया
ओ जब किसी का दिल लुटे आज वो दिन आ गया
लूट लें आ जा मजा इस बहार का
आ पिया आ सजनिया आ
आ पिया सजनिया आ

समझ ले साजन ये जवानी का इशारा
जवानी का इशारा हो हो हा हा
ये वो उमर है जो नहीं आये दोबारा
नहीं आये दोबारा
हो ओ ओ यूँ ही गुजार जाए न ये समा ख़ुमार का
आ पिया आ सजनिया आ
आ पिया सजनिया आ

ये रंगीला वक्त है दूर दूर क्यूँ रहें
हो दिल से मिला दिल है जब फिर जुदाई क्यूँ सहें
ये रंगीला वक्त है दूर दूर क्यूँ रहें
हो दिल से मिला दिल है जब फिर जुदाई क्यूँ सहें
आज के मौसम में क्या काम इंतज़ार का
आ पिया आ सजनिया आ
आ पिया सजनिया आ
………………………………………………
Tara taar baj raha-School Master 1959

Artists: Kamini Kadam, BR Panthulu

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Dec 8, 2019

फैशन की दीवानी-अधिकार १९७१

कई शब्दों से फिल्म के कथानक के बारे में कयास
लगाना कठिन कार्य होता है. अधिकार फिल्म भी
ऐसी है, बिना फिल्म देखे इसकी कहानी समझ नहीं
आएगी. कुछ को तो देखने के बाद भी समझ नहीं
आई.

सुनते हैं फिल्म से एक गीत मन्ना डे का गाया हुआ.
बोल रमेश पन्त के हैं और संगीत आर डी बर्मन का.
गीत में हास्य का पुट है.



गीत के बोल:

अरे फैशन की दीवानी ये गुड़ियें हैं जापानी
अरे फैशन की दीवानी ये गुड़ियें हैं जापानी
कौन कहेगा बोलो इनको लड़की हिंदुस्तानी
बोलो बोलो बोलो बोलो बोलो ना
फैशन की दीवानी ये गुड़ियें हैं जापानी
अरे कौन कहेगा बोलो इनको लड़की हिंदुस्तानी

कानों तक बाल कटा के पाउडर से गाल सजा के
अच्छी ख़ासी सूरत का रक्खा ये हाल बना के
कानों तक बाल कटाई के पाउडर से गाल सजाई के
अच्छी ख़ासी सूरत का रक्खा ये हाल बना के
हाथ हैं सूने माथा नंगा आँखें सुरमेदानी

फैशन की दीवानी ये गुड़ियें हैं जापानी
अरे कौन कहेगा बोलो इनको लड़की हिंदुस्तानी
बोलो बोलो बोलो बोलो बोलो ना
फैशन की दीवानी ये गुड़ियें हैं जापानी
अरे कौन कहेगा बोलो इनको लड़की हिंदुस्तानी

तौबा तौबा ये ब्यूटी नक़ली है बिलकुल झूठी
इनसे की जिसने शादी उसकी तो किस्मत फूटी
तौबा तौबा ये ब्यूटी नक़ली है बिलकुल झूठी
इनसे की जिसने शादी उसकी तो किस्मत फूटी
दूर से उनको ताका करना गर हो जान बचानी

अरे फैशन की दीवानी ये गुड़ियें हैं जापानी
अरे कौन कहेगा बोलो इनको लड़की हिंदुस्तानी
बोलो बोलो बोलो बोलो बोलो ना
अरे फैशन की दीवानी ये गुड़ियें हैं जापानी
अरे कौन कहेगा बोलो इनको लड़की हिंदुस्तानी

वा वा वा वा वा वा वा वा
वा वा वा वा वा वा वा वा
हे हे हे हे

इक दिन इस देश में नारी समझी जाती थी देवी
हो के अब बीस बरस की ये कहलाती है बेबी
इक दिन इस देश में नारी समझी जाती थी देवी
हो के अब बीस बरस की ये कहलाती है बेबी
बेबी है पर नक़ल बिदेसी ये कैसी है रानी

फैशन की दीवानी ये गुड़ियें हैं जापानी
अरे कौन कहेगा बोलो इनको लड़की हिंदुस्तानी
बोलो बोलो बोलो बोलो बोलो ना
इक दिन इस देश में नारी समझी जाती थी देवी
हो के अब बीस बरस की ये कहलाती है बेबी
………………………………………..
Fashion ki deewani-Adhikar 1971

Artists: Deb Mukherji, ?????

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Nov 7, 2019

प्रभु द्वार चली प्रभु की दासी-शेरू १९५७

कैफ इरफानी का लिखा और मदन मोहन के संगीत
से सजा गीत सुनते हैं फिल्म शेरू से जिसे मन्ना डे
ने गाया है.

शास्त्रीय और उपशास्त्रीय संगीत का सम्बन्ध देसी हिंदी
सिनेमा से काफ़ी पुराना है और समय समय पर हमें
कुछ उम्दा सामान सुनने को उपलब्ध हो जाता है.

यू ट्यूब के आगमन के पूर्व मन्ना डे के दुर्लभ गाने
सुन पाना एक दुर्लभ अनुभव सरीखा ही होता था. जब
मुकेश, रफ़ी और किशोर के दुर्लभ गीत ही सुनने को
नहीं मिला करते थे तो मन्ना डे के कहाँ मिलते?



गीत के बोल:

प्रभु द्वार चली प्रभु की दासी
एक आस लिए एक प्यास लिए
प्रभु द्वार चली प्रभु की दासी
एक आस लिए एक प्यास लिए
प्रभु द्वार चली

मुस्कान के फूल सजाये हुए
नैनों के दीप जलाये हुए
मुस्कान के फूल सजाये हुए
नैनों के दीप जलाये हुए
निकली थी ???? ????? को
मन में अपना विश्वास लिए

प्रभु द्वार चली प्रभु की दासी
एक आस लिए एक प्यास लिए
प्रभु द्वार चली

तराना........

तेरो नाम ओमकार गावत सब बार बार
तेरो नाम ओमकार गावत सब बार बार
लाज मेरी तेरे हाथ जगत के खिवैया

तराना........
...........................................................
Prabhu dwar chali-Sheroo 1957

Artist:

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Oct 29, 2019

मेरी महबूबा आज मेरे घर-फरेब १९६८

दीपों का पर्व है और कम से कम सात दिन तो इसकी
रौनक रहेगी ही. एक गीत सुनते हैं जिसकी पहली पंक्ति
में दीप शब्द आया है. किसके जीवन में दीवाली कब आ
जाए नहीं कहा जा सकता. दीवाली से अर्थ बड़ा खुशी का
मौका भी होता है.

मन्ना दे और भूपेंद्र का गाया गीत है ये फिल्म फरेब से
जिसे असद भोपाली ने लिखा है. इसकी धुन तैयार की है
उषा खन्ना ने.

देसी लॉरेल और हार्डी बने दो कलाकार और किसी फेयरी
टेल में से निकली हसीना जैसी एक नायिका इस गीत पर
फ्री स्टाइल नृत्य का आनंद ले रहे हैं. जुमलों और श्रेणी
के हिसाब से ये ‘मेरी महबूबा हिट्स’ के अंतर्गत आता है.
ठीक है ना अमरीका वासी भारतीय भाइयों और बहनों.




गीत के बोल:

अरे हाँ
जलाओं दीप चरागाँ करो ज़माने में
बहार आई है मेरे गरीबखाने में
समझे मेरे लाल

मेरी महबूबा
मेरी महबूबा आज मेरे घर आई
ओ मेरी महबूबा आज मेरे घर आई
अरे नोटों के हार इसको पहना दो यार
एक परी आसमान से उतर आई
मेरी महबूबा आज मेरे घर आई

चाहता हूँ मैं इसको दिल-ओ-जान से
चाहता हूँ मैं
चाहता हूँ मैं इसको दिल-ओ-जान से
इसकी खातिर मैं दुनिया से टकराऊँगा हाँ
देखने वाले मुंह तकते रह जायेंगे
इस हसीना को मैं ले के उड़ जाऊँगा
इस हसीना को मैं ले के उड़ जाऊँगा
प्यार ले के मेरी हमसफ़र आई
ओ प्याज ले के मेरी हमसफ़र आई
एक परी आसमान से उतर आई
मेरी महबूबा आज मेरे घर आई

शादी होगी हमारी बड़ी धूम से
शादी होगी
शादी होगी हमारी बड़ी धूम से
बैंड बाजे बजेंगे मज़ा आएगा
ओ जब भी गुजरेंगे हम बन के दूल्हा दुल्हन
शहर में एक हंगामा हो जायेगा
शहर में एक हंगामा हो जायेगा
आज बरसों के उम्मीद भर आई
हो आज बरसों के उम्मीद भर आई
एक परी आसमान से उतर आई
मेरी महबूबा आज मेरे घर आई

लग न जाए किसी मनचले की नज़र
लग न जाए
लग न जाए किसी मनचले की नज़र
मैं रखूंगा इसे दो जहाँ से परे
चाँद पर होगा बंगला मेरे चाँद का
इस ज़मीन से अलग आसमान से परे
इस ज़मीन से अलग आसमान से परे
मेरी मंजिल मुझे अब नज़र आई
हो मेरी मंजिल मुझे अब नज़र आई
अरे नोटों के हार इसको पहना दो यार
एक परी आसमान से उतर आई
मेरी महबूबा आज मेरे घर आई
हो मेरी महबूबा आज मेरे घर आई
……………………………………………..
Meri mehbooba aaj mere ghar-Fareb 1968

Artists: Maloom nai

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Sep 22, 2019

देखों रे हुआ लहू से लहू कैसे जुदा-मेला १९७१

प्रस्तुत गीत फिल्म में ४ बार टुकड़ों में प्रकट होता है.
मजरूह सुल्तानपुरी के लिखे गीत को मन्ना डे ने गाया
है. इस फिल्म के गानों में यही सबसे कम सुना गया
गीत है.

फिल्मों में दो भाइयों के बिछुड़ने की एक सबसे बड़ी
वजह कुम्भ का मेला हुआ करती थी. आज की फ़िल्में
थोड़ी अपग्रेड हो गयी हैं. आज शॉपिंग मॉल जैसी जगह
पर भाई बिछड़ते हैं. पुरानी फिल्मों में कुछ और वजहें
भी हुआ करती थीं मसलन कोई बच्चे को चुरा ले गया,
किसी दुर्घटना घटने की वजह से.



गीत के बोल:


देखो रे हुआ लहू से लहू कैसे जुदा
देखो रे हुआ लहू से लहू कैसे जुदा
दोनों टुकड़े एक ही दिल के बिछड़े ऐसे के नहीं मिलते
देखो रे हुआ लहू से लहू कैसे जुदा

फूल खिले दो साथ मगर हाय ऐसे भी माली आँख ना मीचे
फूल खिले दो साथ मगर हाय ऐसे भी माली आँख ना मीचे
एक तो महके लग के गले से एक पड़ा कहीं पांव के नीचे
खेल है किस्मत का

देखो रे हुआ लहू से लहू कैसे जुदा
दोनों टुकड़े एक ही दिल के बिछड़े ऐसे के नहीं मिलते
देखो रे हुआ लहू से लहू कैसे जुदा

कैसा उजाला है ये न जाने हाथ को हाथ नहीं पहचाने
कैसा उजाला है ये न जाने हाथ को हाथ नहीं पहचाने
अचरज है कितना
देखो रे हुआ लहू से लहू कैसे जुदा

कैसा मिलन है आज एक भाई भाई को यूँ सीने से लगाये
जैसे के अपने हाथों में हो कोई अपनी ही लाश उठाये
चले साँसों में चिता खेल है किस्मत का
देखो रे हुआ लहू से लहू कैसे जुदा
..................................................................
Dekho re hua lahu se-Mela 1971

Artists: Sanjay Khan, Feroz Khan

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Mar 15, 2019

मेरे महबूब तू इतना बता-हसीना मान जायेगी १९६८

मन्ना डे की आवाज़ और जॉनी वॉकर का कोम्बिनेशन
कुछ अजीब लगता है ना ? कल्याणजी आनंदजी ने ये
कॉम्बिनेशन और एक फिल्म में इस्तेमाल किया है-
सन १९६८ की ही एक अन्य फिल्म बाज़ी में. उसमें
भी जॉनी वॉकर कुछ मिलते जुलते गेटअप में हास्य
गीत गा रहे हैं. फर्क सिर्फ इतना है उसमें हीरोईन की
माँ है और प्रस्तुत गीत में बाप है.

फिल्मों के मुख्य नायक इस तरह के सवालात नहीं
किया करते, वो किसी हाज़िर जवाब सहायक कलाकार
या हास्य अभिनेता के हिस्से ही आते हैं और अक्सर
गानों की शक्ल में.

अरे चूरन खाया है कि गटागट, महबूब है कोई ज्योतिषी
नहीं पगले. ये तो उस महबूब की नीयत, उसके बाप
की इच्छा और तेरे खीसे में कितने हरे हरे नोट हैं उस
पर निर्भर करेगा कि तेरी नैया किस पार लगेगी. अगर
तेरी कहानी में कोई हट्टा कट्टा मुश्टंडा विलन हुआ तो
संभावना और भी कम समझो.

कव्वाली फॉर्मेट पर बना ये गीत कमर जलालाबादी का
लिखा हुआ है और इसे मन्ना डे संग आशा भोंसले ने
गाया है. फिल्म के अन्य गीत लुभावने ज़रूर हैं मगर
गायकी के मामले में इस गीत का कोई जवाब नहीं.



गीत के बोल:

मेरे महबूब मेरे महबूब
मेरे महबूब मुझको तू इतना बता
मेरे महबूब मुझको तू इतना बता
मैं कंवारा मरूँगा या शादी शुदा
मैं कंवारा मरूँगा या शादी शुदा
न कंवारा मरे न तू शादीशुदा
न कंवारा मरे न तू शादीशुदा
बीच में तुझको लटका के रख दे खुदा

औरत जात हो ज़ालिम तुम्हारी जात में चक्कर
तुम औरत जात हो ज़ालिम तुम्हारी जात में चक्कर
तुम्हारे दिन में चक्कर है तुम्हारी रात में चक्कर
हो चक्रंम हूँ के खाता हूँ तेरी हर बात में चक्कर
कभी जज़्बात में चक्कर में कभी जज़्बात चक्कर में
इन तेरे चक्करों से बचाये खुदा
ओ इन तेरे चक्करों से बचाये खुदा
मैं कवारा मरूँगा या शादीशुदा
मैं कवारा मरूँगा या शादीशुदा

न कंवारा मरे न तू शादीशुदा
न कंवारा मरे न तू शादीशुदा
बीच में तुझको लटका के रख दे खुदा
बीच में तुझको लटका के रख दे खुदा

हा आ आ आ
हमारे चाहने वाले बड़े रंगीन मिलते है
हमारे चाहने वाले बड़े रंगीन मिलते है
मोहब्बत से नहीं वाकिफ़ तमाशाबीन मिलते हैं
अरे दिलफेंक हमसे इश्क का इज़हार करता हैं
हमें मालूम है तुझसे टके के तीन मिलते हैं
जिसके तुम नाखुदा उस का हाफिज खुदा
जिसके तुम नाखुदा उस का हाफिज खुदा

बीच में तुझको लटका के रख दे खुदा
बीच में तुझको लटका के रख दे खुदा

ओ मेरे महबूब मुझको तू इतना बता
मेरे महबूब मुझको तू इतना बता
मैं कंवारा मरूँगा या शादी शुदा
मैं कंवारा मरूँगा या शादी शुदा

चली आओगी तुम खिंच कर मैं ऐसा हाल कर दूंगा
चली आओगी तुम खिंच कर मैं ऐसा हाल कर दूंगा
तेरे मायके को ज़ोर-ए-इश्क़ से ससुराल कर दूंगा
अगर बन जाओगी मेरी तो मालामाल कर दूंगा
अगर ठुकराओगी तो बेवफा कंगाल कर दूंगा
हाँ हाँ कंगाल कर दूंगा

तेरी किस्मत का आँचल फाड़ कर रुमाल कर दूंगा
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
तेरी किस्मत का आँचल फाड़ कर रुमाल कर दूंगा
तेरे बंगले को देकर बद्दुआ मैं चाल कर दूंगा
हाँ हाँ चाल कर दूंगा
तेरे कूचे में कूचे में
आगे क्या था भला
रे अरे हाँ आ
तेरे कूचे में पैदा मैं इस तरह भूचाल कर दूंगा
के देहरादून को मैं वादी-ए-गढ़वाल कर दूंगा
अजी गढ़वाल कर दूंगा
तेरे बाबा पे अपना ज़ोर इस्तेमाल कर दूंगा
तमाचा एक तमाचा दो
तमाचे मार कर मैं गाल उसके लाल कर दूंगा
मैं इक दम तैश खा कर ज़िन्दगी कमाल कर दूंगा
लगाउंगा जो मैं ठोकर उसे फुटबाल कर दूंगा
उसे फुटबाल कर दूंगा

अगर कुछ भी न कर पाया तो इतना याद रख ज़ालिम
तेरे बाबा की बाबा की बाबा की हाँ
तेरी बाबा की महफ़िल में मैं भूख हड़ताल कर दूंगा
भूख हड़ताल कर दूंगा भूख हड़ताल कर दूंगा
लेकिन एक छोटी सी एक अर्ज है
के चोरी चोरी खिला देना हलवा ज़रा
ओ चोरी चोरी खिला देना हलवा ज़रा
मैं कंवारा मरूँगा या शादी शुदा
मैं कंवारा मरूँगा या शादी शुदा
मैं कंवारा मरूँगा मरूँगा मरूँगा
……………………………………………..
Mere mehboob mujhko too-Haseena maan jayegi 1968

Artists: Johny Walker, Amita

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Dec 10, 2018

मैं हूँ एक हज्जाम-दो कलियाँ १९६८

आज सुनते हैं फिल्म दो कलियाँ से एक हल्का फुल्का
गीत. ऐसे गीत और कॉमेडी दृश्य फिल्म से उपजी खीज
और बोरियत को दूर करने का काम करते हैं ताकि दर्शक
अपने आप को ठगा महसूस ना करे और इस भ्रम में रहे
कि उसके टिकट के पूरे पैसे वसूल हो गए हैं.

महमूद ने परदे पर कौन कौन से कामों और व्यवसायों
पर कॉमेडी की है ये एक रिसर्च का विषय हो सकता है.
सुन रहे हैं किताबें लिखने वाले?

चलता फिरता हेयर कटिंग सैलून-ये अभी भी वास्तविक
जीवन में आना बाकी है. हालांकि गांवों में अभी भी कई
जगह पर नाई बाल काटने घरों तक पहुँचते हैं रूटीन में
और विशेष मौकों पर तो उन्हें बुलाया जाता है.

महमूद के लिए मन्ना डे ने ऐसे गीत काफी सारे गाये
हैं. साहिर के बोल और रवि के संगीत वाला ये गीत
फिल्म के दूसरे गीतों की तुलना में कम सुना गया है.

गीत में शायद दक्षिण के डिग्री धारक निर्माता निर्देशकों
को याद किया गया है. महमूद की पीठ पर टंगे बोर्ड
पर बी ए(फेल) लिखा हुआ है.




गीत के बोल:

करा लो अरे घर की खेती साफ करा लो
मुस्लिम को तस्लीम अर्ज़ है
हिन्दू को प्रणाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम

जब जब दूजे का सर मूंडूं
तब तब पाऊँ दाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम

सबकी खातिर खुला हुआ है
इस कैंची का खाता
सबकी खातिर खुला हुआ है
इस कैंची का खाता
क्या पंडित जी क्या मौलाना
सबसे अपना नाता
क्या पंडित जी क्या मौलाना
अरे सफ़ेद बाल

सबके हुलिये चौकस रखना
हम लोगों का काम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम

मुस्लिम को तस्लीम अर्ज़ है
हिन्दू को प्रणाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम

ज़ुल्फें एक्टर छाप बना दू
आ जा ओ मतवाले
आज के दिलबर को भाते है
चेहरे मेंडक वाले
पीछे का ठीक है सामने का ठीक है
ज़ुल्फें एक्टर छाप बना दू
आ जा ओ मतवाले
आज के दिलबर को भाते है
चेहरे मेंडक वाले
सब्ज़ परी भी थे पायेगा
पहले बन गुलफ़ाम
मै हूँ एक हज्जाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम

मुस्लिम को तस्लीम अर्ज़ है
हिन्दू को प्रणाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम

इस पेशे के रूप बहुत हैं
क्या तुमको समझायें
इस पेशे के रूप बहुत हैं
क्या तुमको समझायें
जो ग्राहक के सर को मूंडे
बिज़नेस मैन कहाये

हा हा हा एम्बेसेडर हेराल्ड
पी पी
जो ग्राहक के सर को मूंडे
बिज़नेस मैन कहाये
जो पब्लिक की करे हजामत
ओ हो हो आ हा हा
जो पब्लिक की करे हजामत
उनका लीडर नाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम

मुस्लिम को तस्लीम अर्ज़ है
हिन्दू को प्रणाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम

अरे जब जब दूजे का सर मूंडूं
तब तब पाऊँ दाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम
………………………………………………….
Main hoon ek hajjam-Do kaliyan 1968

Artist: Mehmood

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Nov 8, 2018

ए फॉर एपल बी फॉर बेबी-साधू और शैतान १९६८

ऐसे गीत सुन के भी आप कुछ नहीं सीख पाए तो लानत है.
गीत में अंग्रेजी शिक्षण प्रणाली पर जूता लगाया गया है जो
आसानी से समझ नहीं आता.

सुनते हैं साधू और शैतान का ये मनोरंजक गीत जिसे गाया
है मन्ना डे ने. राजेंद्र कृष्ण के बोल है और लक्ष्मी प्यारे का
संगीत.

कहीं पर हमने ए फॉर एलिफेंट, बी फॉर बफेलो भी सुना है.



गीत के बोल:

ए फॉर एप्पल बी फॉर बेबी
सी फॉर कैमल डी फॉर डैडी
.
.
.
.
……………………………………………………….
A for apple-Sadhu aur shaitan 1968

Artist: Mehmood, Bharti, Kids

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Oct 20, 2018

तुझको रखे राम...दे दाता के नाम-आँखें १९६८

आज सुनते हैं धर्मेन्द्र और माला सिन्हा अभिनीत
फिल्म आँखें का लोकप्रिय गीत जिसे भिखारियों ने
भी बरसों गाया अपनी आजीविका के लिए.जिसके
जो काम का होता है वो उसे अपना लेता है और
इस गाने की केवल दो पंक्तियाँ ही भिखारियों ने
पकड़ीं.

गीत में आगे जो सन्देश हैं वो जनता के समझ
नहीं आते हैं. कवि, गीतकार, समाज सुधारक कह
कह के थक मर गये मगर नतीजा वही ढाक     के
तीन पात. धर्म की व्याख्या और समझ में तो
डाल-डाल पात पात का सिलसिला निरंतर चालू है.

विश्वास और मूर्खता के बीच बड़ी बारीक दीवार
होती है. तार्किक दृष्टि सभी के पास नहीं होती और
जो कान, नाक, दिमाग में घुसा उसे सत्य मानने
की परंपरा जारी है. अनपढ़ तो क्या कई पढ़े लिखे
भी आपको एक ही प्रकार का ढोल पीटते मिलेंगे.



गीत के बोल:

दे दे दे दे अल्लाह के नाम पे दे दे
इंटरनेशनल फ़कीर आये हैं

तुझको रखे राम तुझको अल्लाह रखे
तुझको रखे राम तुझको अल्लाह रखे
दे दाता के नाम तुझको अल्लाह रखे
ओये दे दाता के नाम तुझको अल्लाह रखे
तुझको रखे राम तुझको अल्लाह रखे
तुझको रखे राम तुझको अल्लाह रखे

अरे दीनार नहीं तो डॉलर चलेगा
अरे कमीज़ नहीं तो कमीज़ का कॉलर चलेगा
लेकिन दे दे इंटरनेशनल फ़कीर को

शेख ब्राह्मण मुल्ला पांडे सब हैं इक माटी के भांडे
शेख ब्राह्मण मुल्ला पांडे सब हैं इक माटी के भांडे
वेद वही कुरान वही है
वेद वही कुरान वही है
राम वही है रहमान वही है
किसी का दामन थाम तुझको अल्लाह रखे
किसी का दामन थाम तुझको अल्लाह रखे
ओ दे दाता के नाम तुझको अल्लाह रखे
ओ तुझको रखे राम तुझको अल्लाह रखे

अरे कहाँ छुप गया है तू कठोर
देख तेरे चाहने वाले दर दर भटक रहे हैं
छाले पड़ गये हैं पाँव में

गोरे उसके काले उसके ओ पूरब पश्चिम वाले उसके
गोरे उसके काले उसके पूरब पश्चिम वाले उसके
सब में उसी का नूर समाया
सब में उसी का नूर समाया
कौन है अपना कौन पराया
सबको कर प्रणाम तुझको अल्लाह रखे
हो सबको कर प्रणाम तुझको अल्लाह रखे
दे दाता के नाम तुझको अल्लाह रखे
तुझको रखे राम तुझको अल्लाह रखे

मैं परदेसन राह ना जानूं
मैं परदेसन राह ना जानूं बढते गम की थाह ना जानूं
मैं परदेसन
मैं परदेसन राह ना जाऊं बढते गम की थाह ना जानूं
लोग पराये देस बेगाना
लोग पराये देस बेगाना
कहीं मिला ना तेरा ठिकाना
सुबह से हो गई शाम तुझको अल्लाह रखे
ओ सुबह से हो गई शाम तुझको अल्लाह रखे
दे दाता के नाम तुझको अल्लाह रखे
तुझको रखे राम तुझको अल्लाह रखे
तुझको रखे राम तुझको अल्लाह रखे
……………………………………………………..
Tujhko rakhe Ram..de data ke naam-Aankhen 1968

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Jul 20, 2018

तेरे जीवन का है-कर्मयोगी १९७८

काल का पहिया घूमे रे भैया लाख तरह इंसान चले. इस गीत
को आपने ज़रूर सुन होगा फिल्म चंदा और बिजली से जिसे
मन्ना डे ने गाया है. जीवन का सार है उसमें. कवि नीरज
की ये पंक्तियाँ आज याद हो आयीं.

जीवन दर्शन पर कई गीत बने हैं हिंदी फिल्म संगीत जगत में.
इनमें से कई तो अनमोल धरोहर जैसे हैं. सभी प्रमुख गीतकारों
ने ऐसे गीत लिखे हैं. शब्द चयन चाहे अलग हो मगर उनका
अर्थ लगभग समान मिलेगा आपको.

आज सुनते हैं सन १९७८ की फिल्म कर्मयोगी से एक गीत जिसे
मन्ना डे ने गाया है. वर्मा मलिक की रचना है और इसका संगीत
तैयार किया है कल्याणजी आनंदजी ने.




गीत के बोल:

तेरे जीवन का है कर्मों से नाता
तेरे जीवन का है कर्मों से नाता
तू ही अपना भाग्य विधाता
जैसी लिखेगा कर्मों की रेखा
जैसी लिखेगा कर्मों की रेखा
देना होगा तिल तिल का लेखा
देना होगा तिल तिल का लेखा
तेरे जीवन का है कर्मों से नाता

आज तू जिसको अच्छा समझे जान ले उसका कल क्या है
कल क्या है
सोच ले चलने से पहले तू उन राहों की मंजिल क्या है
मंजिल क्या है
जो भी किया है आगे आता तू इतना भी सोच न पाता
ओ ओ ओ ओ ओ ओ
जैसी लिखेगा कर्मों की रेखा
जैसी लिखेगा तू कर्मों की रेखा
देना होगा तिल तिल का लेखा
हो ओ ओ ओ ओ
देना होगा तिल तिल का लेखा
तेरे जीवन का है कर्मों से नाता

माना के काले कर्मों से तुझको खुशियाँ और सुख मिलता है
खुशियाँ और सुख मिलता है
आसमान को छूने वाले ये कितने दिन चलता है
कितने दिन चलता है
काहे रेत के महल बनाता झूठे बल से तू क्यूँ इतराता
हो ओ ओ ओ ओ ओ
जैसी लिखेगा कर्मों की रेखा
जैसी लिखेगा कर्मों की रेखा
देना होगा तिल तिल का लेखा
हो ओ ओ ओ ओ ओ
देना होगा तिल तिल का लेखा
तेरे जीवन का है कर्मों से नाता
तू ही अपना भाग्य विधाता
जैसी लिखेगा कर्मों की रेखा
जैसी लिखेगा कर्मों की रेखा
देना होगा तिल तिल का लेखा
देना होगा तिल तिल का लेखा
देना होगा तिल तिल का लेखा
देना होगा तिल तिल का लेखा.
..................................................................
Tere jeevan ka hai-Karmyogi 1978

Artist: Rajkumar

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May 24, 2018

ज़िंदगी कैसी है पहेली हाय-आनंद १९७०

सलिल चौधरी गीत के बोलों पर बारीकी से ध्यान देने वाले
गीतकारों में से थे. शैलेन्द्र के अवसान के बाद जो स्थान रिक्त
हुआ बॉलीवुड के संगीत क्षेत्र में उसकी भरपाई के लिए विकल्प
तलाशते सलिल की मुलाकात संघर्षरत योगेश गौड़ से हुई.
सलिल को शैलेन्द्र वाली बात योगेश कई लेखनी में नज़र आई.
योगेश को इस फिल्म के गीत लिखने के मौका मिल गया.
ये सब आप दूसरी जगह पढ़ चुके होंगे अतः कहानी मैं इधर
रिपीट नहीं करूँगा.

गीत का पहला अन्तरा काफी गहराई वाला है. कम शब्दों में
पूरी जीवन-गाथा है. ईश्वर ने ये जो मन नाम की चीज़ दे दी
है मनुष्य को वो उसे मायाजाल में उलझाये रखती है. सपने,
अभिलाषाएं, आकांक्षायें, अपेक्षाएं और  बंधनों के भंवर से
मनुष्य जीवन पर्यंत निकल नहीं पाता और तेरा-मेरा करते-करते
एक दिन सब यहीं धरा रह जाता है.




गीत के बोल:t

ज़िंदगी कैसी है पहेली हाय
कभी तो हंसाये कभी ये रुलाये
ज़िंदगी कैसी है पहेली हाय
कभी तो हंसाये कभी ये रुलाये

कभी देखो मन नहीं जागे
पीछे पीछे सपनों के भागे
कभी देखो मन नहीं जागे
पीछे पीछे सपनों के भागे
एक दिन सपनों का राही
चला जाए सपनों के आगे कहाँ

ज़िंदगी कैसी है पहेली हाय
कभी तो हंसाये कभी ये रुलाये

जिन्होंने सजाए यहाँ मेले
सुख दुःख संग-संग झेले
जिन्होंने सजाए यहाँ मेले
सुख दुःख संग-संग झेले
वही चुन कर ख़ामोशी
यूँ चली जाए अकेले कहाँ

ज़िंदगी कैसी है पहेली हाय
कभी तो हंसाये कभी ये रुलाये
.................................................................
Zindagi kaisi hai paheli-Anand 1970

Artist: Rajesh Khanna, Amitabh Bachchan, Sumita Sanyal

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May 4, 2018

दर्पण झूठ ना बोले-दर्पण १९७०

ये फिल्म दर्पण का शीर्षक गीत है. मन्ना डे ने इसे गाया है.
आनंद बक्षी की रचना है और लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल का संगीत.
नायक अपनी कार में चला जा रहा है और पार्श्व में ये गीत
बज रहा है.

सत्य कड़वा होता है इस वजह से जनता को इसे सुनना पसंद
नहीं होता. सत्य का मार्ग कंटकाकीर्ण है अतः उस पर कदम
बढाने में हर किसी की सांस फूलती है. बहुत हिम्मत वाले भी
इस पर चल कर दुनिया के रुख की वजह से अपना साहस खोते
नज़र आते हैं. अंत में विजय शूरवीरों की ही होती है. जीवन
में इस प्रकार की जंग का निरंतर सामना करने वाले को हम
शूरवीर नहीं तो और क्या कहेंगे.

सत्य के मार्ग पर मीठी गोलियाँ और चॉकलेट नहीं मिला करती.
इस पर नरम नरम गद्दे और बिछौने बी नहीं होते. धिक्कार और
घृणा अवश्य मुफ्त प्राप्त होती रहती है कदम कदम पर.






गीत के बोल:

दर्पण झूठ ना बोले दर्पण झूठ ना बोले
दर्पण झूठ ना बोले दर्पण झूठ ना बोले
जो सच था तेरे सामने आया
हंस ले चाहे रो ले
दर्पण झूठ ना बोले दर्पण झूठ ना बोले
दर्पण झूठ ना बोले

बंधन तोडा जा सकता है
जग को छोड़ा जा सकता है
बंधन तोडा जा सकता है
जग को छोड़ा जा सकता है
अपने आप से भाग रहे हो
अपने आप से भाग रहे हो
तुम हो कितने भोले हो
दर्पण झूठ ना बोले दर्पण झूठ ना बोले

दूर किनारा टूटी नैया
लेकिन पूछे ये पुरवैया
दूर किनारा टूटी नैया
लेकिन पूछे ये पुरवैया
अपने आप बने तुम मांझी
अपने आप बने तुम मांझी
फिर काहे मन डोले
दर्पण झूठ ना बोले दर्पण झूठ ना बोले

ऐसी हैं जीवन की बतियाँ
या तो ये मन मींच ले अँखियाँ
ऐसी हैं जीवन की बतियाँ
या तो ये मन मींच ले अँखियाँ
या फिर ना घबराये जब
सच्चाई घूंघट खोले

दर्पण झूठ ना बोले दर्पण झूठ ना बोले
जो सच था तेरे सामने आया
हंस ले चाहे रो ले
दर्पण झूठ ना बोले दर्पण झूठ ना बोले
दर्पण झूठ ना बोले दर्पण झूठ ना बोले
……………………………………………………….
Darpan jhooth na bole-Darpan 1970

Artist: Sunil Dutt

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Mar 22, 2018

मत रो आज राधिके-जय संतोषी माँ १९७५

सन १९७५ की सुपर डुपर हिट धार्मिक फिल्म है संतोषी माँ से
एक और गीत सुनते हैं जिसे मन्ना डे ने गाया है.

प्रेरणादायी और हिम्मत बंधाने वाला गीत है ये. गीत बैकग्राउंड
में बज रहा है.




गीत के बोल:

मत रो मत रो मत रो
मत रो मत रो आज राधिके
तू सुन ले बात हमारी
तू सुन ले बात हमारी
जो दुःख से घबरा जाए
वो नहीं हिंद की नारी
वो नहीं हिंद की नारी
मत रो मत रो मत रो
………………………………………….
Mat ro aaj radhike-Jai Santoshi Maa 1975

Artist: Kanan Kaushal

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Mar 12, 2018

प्यार करता जा-भूत बंगला १९६५

फिल्म संसार के अपने नियम कायदे हैं. एक बार किसी चीज
का लेबल लग जाए तो ऐसी चिपकता है बिना गोंद-कतीरे के,
उसे छुडाना मुश्किल हो जाता है.

मन्ना डे के साथ कम ही संगीतकार गंभीरता से पेश आये हैं.
अधिकाँश ने उनसे हास्य गीत ज्यादा गवाए सिंवाए एक जोड़ी
के-शंकर जयकिशन. मेरे हिसाब से सबसे ज्यादा बढ़िया गीत
अगर किसी ने मन्ना डे को दिए हैं तो वे शंकर जयकिशन ही
हैं. उसके बाद आप एस एन त्रिपाठी को याद कर लीजिए.

कुछ इक्का दुक्का सामान्य गीत जो अन्य संगीतकारों ने उनसे
गवाए उनमें से एक आज सुनते हैं. फिल्म है भूत बंगला जो
सन १९६५ की फिल्म है जिसमें महमूद नायक हैं.

गीत हसरत जयपुरी का है और संगीत आर डी बर्मन का. गीत
की मुखड़े वाली पंक्तियाँ इको वाले अंदाज़ में दोहराई गई हैं. गीत
उपदेशात्मक किस्म का है.




गीत के बोल:

प्यार करता जा प्यार करता जा
दिल कहता है दिल कहता है
कांटों में भी गुल खिला
कांटों में भी गुल खिला
हे हे हे हे
प्यार करता जा प्यार करता जा
दिल कहता है दिल कहता है
कांटों में भी गुल खिला
कांटों में भी गुल खिला
हे हे हे हे
प्यार करता जा

हम नौजवां मस्ती भरे
धरती पे हम आसमान हैं
सब झूमने वाले
कौन है क्या किसे है खबर
पहले तो हम इंसान हैं
हम हिम्मत वाले
हे हे हे हे

प्यार करता जा प्यार करता जा
दिल कहता है दिल कहता है
कांटों में भी गुल खिला
कांटों में भी गुल खिला
हे हे हे हे
प्यार करता जा

छोटा बड़ा कोई भी हो
अपने लिए सभी एक हैं
ये प्यार धरम है
सबसे गल्ले मिल के चलो
जग बेवफा सभी नेक हैं
ये प्यार का रंग है
हे हे हे हे

प्यार करता जा प्यार करता जा
दिल कहता है दिल कहता है
कांटों में भी गुल खिला
कांटों में भी गुल खिला
हे हे हे हे
प्यार करता जा

दिल की अगन बढ़ती रहे
जलते रहें मीठी आग में
हम प्यार के राही
गुंचा-ए-दिल खिल ही गया
है वो असर मेरे राग में
दिल दिल से मिले हैं
हे हे हे हे

प्यार करता जा प्यार करता जा
दिल कहता है दिल कहता है
कांटों में भी गुल खिला
कांटों में भी गुल खिला
हे हे हे हे
प्यार करता जा
प्यार करता जा
प्यार करता जा
………………………………………………………..
Pyar karta ja-Bhoot bangle 1955

Artists: Mehmood, Tanuja

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Feb 14, 2018

मौसम आएगा जायेगा-शायद १९७९

सन १९७९ की नसीरूदीन शाह, विजयेन्द्र घाटगे और नीता मेहता
अभिनीत फिल्म शायद से आपने एक गीत सुना था कुछ समय
पहले. अब दूसरा गीत सुनते हैं जो कि एक युगल गीत है.

मन्ना डे और आशा भोंसले के गाये इस युगल गीत को लिखा है
विट्ठलभाई पटेल ने और इसकी धुन तैयार की श्यामल मित्रा ने.



गीत के बोल:

मौसम आएगा जाएगा प्यार सदा मुस्काएगा
मौसम आएगा जाएगा प्यार सदा मुस्काएगा
बाहों में तेरी मेरे सजना सच हो जायेगा सपना
बाहों में तेरी मेरे सजना सच हो जायेगा सपना
सारा जहाँ दोहराएगा
हो मौसम आएगा जाएगा प्यार सदा मुस्काएगा
मौसम आएगा जाएगा प्यार सदा मुस्काएगा

ये वादा इरादा चलो हसीं वादी में खो जायें
चलो ना आओ ना फूलों के साये में खो जायें
समां है सुहाना तेरे संग आज बहक जायें
ला ला ला ला ला ला प्यार की राहें महक जायें
प्यारा प्यारा ये नज़ारा आज सबको कबूल हो जायेगा
मौसम आएगा जाएगा प्यार सदा मुस्काएगा

ओ जानी दीवानी जागी जागी रातों में कहर आये
रसिया तेरी ही कसमों पे जिंदगी गुजर जाये
जानेमन जाने जान तेरे लब पे मेरे लब के साये
सजना ना ना ना जिया जले नैना शरमाएं
दिल दीवाना मस्ताना हर शय पे खुमार आ जायेगा

मौसम आएगा जाएगा प्यार सदा मुस्काएगा
बाहों में तेरी मेरे सजना सच हो जायेगा सपना
हो ओ ओ ओ बाहों में तेरी मेरे सजना सच हो जायेगा सपना
सारा जहाँ दोहराएगा
मौसम आएगा जाएगा प्यार सदा पुस्काएगा
मौसम आएगा जाएगा प्यार सदा मुस्काएगा
…………………………………………………………..
Mausam aayega jayega-Shayad 1979

Artists: Vijyendra Ghatge, Nita Mehta

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