Showing posts with label Jaan Nisar Akhtar. Show all posts
Showing posts with label Jaan Nisar Akhtar. Show all posts

Aug 3, 2020

ये दिल और उनकी-प्रेम पर्वत १९७३

आज संगीतकार जयदेव का जन्मदिन है और हम इस
अवसर पर सुनेंगे फिल्म प्रेम पर्वत से एक गीत जो कि
एक बेहद लोकप्रिय गीत है. इसे जान निसार अख्तर
ने लिखा है.

समय के साथ भिन्न और अज्ञात कारणों से नष्ट हुई
फिल्मों में से एक है प्रेम पर्वत. ये अफसोसजनक है,
मगर क्या किया जाए.




गीत के बोल:

ये दिल और उनकी निगाहों के साये
ये दिल और उनकी निगाहों के साये
ये दिल और उनकी निगाहों के साये
मुझे घेर लेते हैं बाहों के साये
मुझे घेर लेते हैं बाहों के साये

पहाड़ों को चंचल किरण चूमती है
पहाड़ों को चंचल किरण चूमती है
हवा हर नदी का बदन चूमती है
हवा हर नदी का बदन चूमती है
यहाँ से वहाँ तक हैं चाहों के साये
यहाँ से वहाँ तक हैं चाहों के साये
ये दिल और उनकी निगाहों के साये ...
मुझे घेर लेते हैं बाहों के साये
मुझे घेर लेते हैं बाहों के साये

लिपटते ये पेड़ों से बादल घनेरे
लिपटते ये पेड़ों से बादल घनेरे
ये पल पल उजाले ये पल पल अंधेरे
ये पल पल उजाले ये पल पल अंधेरे
बहुत ठंडे ठंडे हैं राहों के साये
बहुत ठंडे ठंडे हैं राहों के साये
ये दिल और उनकी निगाहों के साये
मुझे घेर लेते हैं बाहों के साये
मुझे घेर लेते हैं बाहों के साये

धड़कते हैं दिल कितनी आज़ादियों से
धड़कते हैं दिल कितनी आज़ादियों से
बहुत मिलते जुलते हैं इन वादियों से
बहुत मिलते जुलते हैं इन वादियों से
मुहब्बत की रंगीं पनाहों के साये
मुहब्बत की रंगीं पनाहों के साये
ये दिल और उनकी निगाहों के साये
मुझे घेर लेते हैं बाहों के साये
मुझे घेर लेते हैं बाहों के साये
……………………………………..
Ye dil aur unki nigahon ke-Pram parbat 1973

Artist:

Read more...

May 17, 2018

अशयार मेरे यूं तो ज़माने के-मुकेश

मुकेश की गाई एक गैर फ़िल्मी रचना सुनते हैं जिसे
लिखा है जान निसार अख्तर ने. इसकी संगीत रचना
है खय्याम की.




गीत के बोल:

अशयार मेरे यूं तो ज़माने के लिये हैं
अशयार मेरे यूं तो ज़माने के लिये हैं
कुछ शेर फ़कत उनको सुनाने के लिये हैं
कुछ शेर फ़कत उनको सुनाने के लिये हैं

अब ये भी नहीं ठीक के हर दर्द मिटा दें
अब ये भी नहीं ठीक के हर दर्द मिटा दें
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिये हैं
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिये हैं
अशयार मेरे यूं तो ज़माने के लिये हैं

आँखों में जो भर लोगे तो कांटों से चुभेंगें
आँखों में जो भर लोगे तो कांटों से चुभेंगें
ये ख्वाब तो पलकों पे सजाने के लिये हैं
ये ख्वाब तो पलकों पे सजाने के लिये हैं
अशयार मेरे यूं तो ज़माने के लिये हैं

देखूं तेरे हाथों को तो लगता है तेरे हाथ
देखूं तेरे हाथों को तो लगता है तेरे हाथ
मन्दिर में फ़कत दीप जलाने के लिये हैं
मन्दिर में फ़कत दीप जलाने के लिये हैं
अशयार मेरे यूं तो ज़माने के लिये हैं

सोचो तो बड़ी चीज़ है तहजीब बदन की
सोचो तो बड़ी चीज़ है तहजीब बदन की
वरना तो बदन आग बुझाने के लिये है
वरना तो बदन आग बुझाने के लिये है

अशयार मेरे यूं तो ज़माने के लिये हैं
कुछ शेर फ़कत उनको सुनाने के लिये हैं
..........................................................................
Ashyar mere yun to zamane ke-Mukesh Non film song

Read more...

May 12, 2018

तुम अपनी याद भी दिल से-यास्मीन १९५५

कंफ्यूज़न किधर है. दोनों तरफ झुलसी हुई मोहब्बत है. चेहरे
ज़र्द हैं और निगाहें ग़मगीन. ये किससे गिला है किसके शिकवे
हैं. खुद से है या ज़माने से. वक्त के थपेडों ने हमें कहाँ से कहाँ
पहुंचा दिया.

तुम अपने कदमों की मिटटी भी ले जाते तो अच्छा था. नदी में
कपडे धो पानी भी ले जाते तो अच्छा था. गीत में जली कटी बजी
आहिस्ता से कहना पड़ती है. 

जान निसार अख्तर की रचना है और सी रामचंद्र का संगीत. गाने
वाले हैं लता और तलत.



गीत के बोल:

तुम अपनी याद भी दिल से भुला जाते तो अच्छा था
ये दो आँसू लगी दिल की बुझा जाते तो अच्छा था

मेरे अरमाँ भी ले जाते मेरी हसरत भी ले जाते
मेरे अरमाँ भी ले जाते मेरी हसरत भी ले जाते
नज़र से छीन कर अपनी हसीं सूरत भी ले जाते
अंधेरे और इन आँखों में छा जाते तो अच्छा था
तुम अपनी याद भी दिल से भुला जाते तो अच्छा था

मेरे दिल की मुहब्बत का यक़ीं कब तुम को आया था
मेरे दिल की मुहब्बत का यक़ीं कब तुम को आया था
जहाँ सौ ज़ुल्म ढाये थे जहाँ दिल को मिटाया था
मुझे भी अपने हाथों से मिटा जाते तो अच्छा था
ये दो आँसू लगी दिल की बुझा जाते तो अच्छा था

मेरा दिल फेर दे मेरी निशानी फेरने वाले
मेरा दिल फेर दे मेरी निशानी फेरने वाले
जो मुमकिन हो तो लौटा दो मेरी आहें मेरे नाले
जो मुमकिन हो तो लौटा दो मेरी आहें मेरे नाले
हम अपने दिल का खोया चैन पा जाते तो अच्छा था
ये दो आँसू लगी दिल की बुझा जाते तो अच्छा था
...................................................................
Tum apni yaad bhi dil se bhula-Yasmin 1955

Artists: Suresh, Vaijayantimala

Read more...

Dec 14, 2017

ग़म की अंधेरी रात में-सुशीला १९६६

फिल्म सुशीला का ये गीत रेयर कहलाता है क्यूंकि इसे तलत महमूद
और रफ़ी ने गाया है. ऐसे गीत कुल जमा शायद तीन ही हैं जिनमें तलत
और रफ़ी की आवाजें हैं. दो गीत आप पहले सुन चुके हैं और अब इसे
सुन लेते हैं.

जान निसार अख्तर के बोल हैं और सी अर्जुन का संगीत. सन १९६६ में
सी अर्जुन बड़ा नाम नहीं था मगर इस गीत से उन्हें काफी प्रसिद्धि मिली.
बाद में प्रसिद्धि की जितनी भी कमी थी वो जय संतोषी माँ के गीतों से
उन्हें प्राप्त हो गई.

जावेद  अख्तर को शायद ज़रूरत है जां निसार अख्तर के लेखन को
ध्यान से पढ़ने की जिसके बाद उन्हें जैसे कि, वैसे कि शब्दों के प्रयोग
से छुटकारा पाने में मदद मिलेगी.

जावेद अख्तर एक अच्छे पटकथा लेखक ज़रूर रहे होंगे मगर उनके
गीत  लेखन में उम्दापन के सबूत टुकड़ों-टुकड़ों और छर्रों-छर्रों  में
मिलते हैं. इसे वे नियमित कर सकें तो सर्वकालिक श्रेष्ठ गीतकारों की
सूची में शामिल हो जायेंगे.




गीत के बोल:

ग़म की अंधेरी रात में
दिल को ना बेक़रार कर
सुबह ज़रूर आयेगी
सुबह का इन्तज़ार कर
ग़म की अंधेरी रात में

दर्द है सारी ज़िन्दगी
जिसका कोई सिला नहीं
दिल को फ़रेब दीजिये
और ये हौसला नहीं
और ये हौसला नहीं
खुद से तो बदग़ुमाँ ना हो
खुद पे तो ऐतबार कर
सुबह ज़रूर आयेगी
सुबह का इन्तज़ार कर
ग़म की अन्धेरी रात में

खुद ही तड़प के रह गये
दिल की सदा से क्या मिला
आगे से खेलते रहे
हमको वफ़ा से क्या मिला
हमको वफ़ा से क्या मिला
दिल की लगी बुझा ना दे
दिल की लगी से प्यार कर
सुबह ज़रूर आयेगी
सुबह का इन्तज़ार कर
ग़म की अंधेरी रात में

जिससे ना दिल बहाल सके
ऐसी खबर से फायदा
रात अभी ढली कहाँ
ख्वाब-ए-सहर से फायदा
ख्वाब-ए-सहर से फायदा
अपने आप बहार आएगी
दौर-ऐ-खिजां गुज़ार कर
सुबह का इन्तज़ार कर

ग़म की अंधेरी रात में
दिल को ना बेक़रार कर
सुबह ज़रूर आयेगी
सुबह का इन्तज़ार कर
ग़म की अंधेरी रात में
......................................................
Gham ki andheri raat mein-Sushila 1966

Read more...

भर भर के जाम पिला जा-यास्मीन १९५५

कई बार सारे अवयव अच्छे होने के बावजूद खाना जनता
को पसंद नहीं आता. ऐसा ही कुछ यास्मीन फिल्म के
साथ भी है जो सन १९५५ की एक बॉक्स ऑफिस पर
फ्लॉप हुई फिल्म है. फिल्म में एक से बढ़ कर एक गीत
हैं जिन पर गीतकार और संगीतकार दोनों ने काफी मेहनत
की.

फिल्म के प्रमुख कलाकार हैं सुरेश और वैजयंतीमाला. शायद
कारदार ने जो फ़िल्में निर्देशित की हैं उनमें से ये एक बड़ा
अपवाद रही. इसी साल कारदार की एक हास्य फिल्म भी
रिलीज़ हुई थी-बाप रे बाप जिसके नायक किशोर कुमार थे.
इस फिल्म का संगीत ज़ोरदार हिट रहा. इस फिल्म को आज
भी बड़े चाव के साथ देखा जाता है.

जो मेरा अनुमान है वो ये कि फिल्म के नायक सुरेश का
जादू समय के साथ फीका पढ़ने लगा था. फिल्मिस्तान की
फिल्म नागिन जो साल भर पहले ही रिलीज़ हुई थी उसकी
नायिका भी वैजयंतीमाला थीं. नागिन फिल्म तो इतिहास
की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल है. नागिन फिल्म के
संगीत ने भी एक इतिहास रचा है.

सुनते हैं यास्मीन से लता मंगेशकर का गाया एक मधुर गीत.
जां निसार अख्तर का गीत है और सी रामचंद्र की तर्ज़.



गीत के बोल:

आ जा
आ जा आ जा मेरे साक़ी
हसरत है दिल में बाक़ी
उल्फ़त का जाम पिला जा
जीने का ढंग बता जा
आ जा आ जा आ जा आ जा
आ जा आ जा आ जा

ये किस ने पुकारा है मुझे
किस ने पुकारा
है कौन तलबगार मेरा
कौन है प्यारा

साकी मैं इधर हूँ, मैं इधर हूँ
मैं इधर हूँ
मैं पास में बैठा हूँ
और मैं क़दमों में पड़ा हूँ

भर भर के जाम पिला दे
भर भर के जाम पिला दे
साक़ी बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला

शराब-ए-हुस्न नज़र से पिलाने आई हूँ
मैं एक एक को बेखुद बनाने आई हूँ
शराब-ए-हुस्न नज़र से पिलाने आई हूँ
मैं एक एक को बेखुद बनाने आई हूँ
अदा से नाज़ से अब्रों के इक इशारे से
अदा से नाज़ से अब्रों के इक इशारे से
दिलों में इश्क़ का जादू जगाने आई हूँ

भर भर के जाम पिला दे
भर भर के जाम पिला दे
साक़ी बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला

नज़र मिलाओ तो दिल को क़रार आ जाये
हर एक अदा पे तुम को प्यार आ जाये
उठाओ जाम के जन्नत से कम नहीं दुनिया
उठाओ जाम के जन्नत से कम नहीं दुनिया
पियो पियो के तुम्हें ऐतबार आ जाये
पियो पियो के तुम्हें ऐतबार आ जाये

भर भर के जाम पिला दे
भर भर के जाम पिला दे
साक़ी बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला

वो मुस्कुरा के निगाहें मिलाये जाते हैं
वो मुस्कुरा के निगाहें मिलाये जाते हैं
सुरूर बन के मेरे दिल पे छाये जाते हैं
सुरूर बन के मेरे दिल पे छाये जाते हैं
मिली है आज जो उनकी नज़र से मेरी नज़र
मिली है आज जो उनकी नज़र से मेरी नज़र
तो हाय मेरे कदम डगमगाये जाते हैं

भर भर के जाम पिला दे
भर भर के जाम पिला दे
साक़ी बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला
भर भर के जाम पिला दे
भर भर के जाम पिला दे
साक़ी बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला
तू ला ला ला बस बना दे मतवाला

.................................................................
Bhar bhar ke jam pila de-Yasmin 1955

Artists: Vaijayantimala, Suresh

Read more...

Oct 3, 2017

ऐ दिलरुबा नज़रें मिला-रुस्तम सोहराब १९६३

हिंदी फिल्म संगीत के खजाने में छोटे गीत काफी हैं मगर उनमें
से कुछ ही नियमित रूप से सुने जाते हैं. एक ऐसा गीत है फिल्म
रुस्तम सोहराब से. इसे लता मंगेशकर ने गाया है.

गीतकार हैं जां निसार अख्तर और इसके संगीतकार हैं सज्जाद. इस
फिल्म के गीतों की रिकॉर्डिंग क्वालिटी उम्दा है और सभी गीत सुनने
में आनंद आता है.

लता के एक अंतरे वाले गीत हमें आपको इसके पहले भी सुनवाए हैं.
फिल्म अफसाना का गीत-अभी तो मैं जवान हूँ और फिल्म श्री ४२०
का ओ जाने वाले मुड़ के ज़रा देखते जाना.




गीत के बोल:

ऐ दिलरुबा
ऐ दिलरुबा
ऐ दिलरुबा नज़रें मिला
कुछ तो मिले गम का सिला

अश्कों का एक दरिया बहा
प्यासा था दिल प्यासा रहा
नज़रें मिला नज़रें मिला
रहने ना दे कोई गिला

ऐ दिलरुबा
आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ

ऐ दिलरुबा
ऐ दिलरुबा
ऐ दिलरुबा
आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ
.........................................................................
Ae dilruba nazren mila-Rustam Sohrab 1963

Read more...

Sep 17, 2017

आप यूँ फ़ासलों से गुज़रते रहे-शंकर हुसैन १९७७

सन १९७७ की एक फिल्म शंकर हुसैन से लाता मंगेशकर का गाया
मधुर गीत सुनते हैं. जान निसार अख्तर के लिखे गीत के लिए तर्ज़
बनाई है खय्याम ने.

फिल्म के प्रमुख कलाकार हैं कंवलजीत और मधुचंदा. आपने कंवलजीत
का नाम अवश्य ही सुना होगा.



गीत के बोल:

आप यूँ फ़ासलों से गुज़रते रहे
आप यूँ फ़ासलों से गुज़रते रहे
दिल से कदमों की आवाज़ आती रही
आहटों से अंधेरे चमकते रहे
रात आती रही रात जाती रही
आप यूँ

गुनगुनाती रहीं मेरी तनहाईयाँ
दूर बजती रहीं कितनी शहनाईयाँ
दूर बजती रहीं कितनी शहनाईयाँ
ज़िंदगी ज़िंदगी को बुलाती रही

आप यूँ फ़ासलों से गुज़रते रहे
दिल से कदमों की आवाज़ आती रही
आप यूँ

कतरा कतरा पिघलता रहा आस्माँ
कतरा कतरा पिघलता रहा आस्माँ
रूह की वादियों में न जाने कहाँ
इक नदी
इक नदी दिलरुबा गीत गाती रही

आप यूँ फ़ासलों से गुज़रते रहे
दिल से कदमों की आवाज़ आती रही
आप यूँ

आप की गर्म बाहों में खो जायेंगे
आप की नर्म ज़ानों पे सो जायेंगे
सो जायेंगे
मुद्दतों रात नींदें चुराती रही

आप यूँ फ़ासलों से गुज़रते रहे
दिल से कदमों की आवाज़ आती रही
आहटों से अंधेरे चमकते रहे
रात आती रही रात जाती रही
आप यूँ आप यूँ आप यूँ आप यूँ
.........................................................................
Aap yun faaslon se-Shankar Hussain 1977

Read more...

Sep 2, 2017

देखते देखते एक धुआँ-संगत १९७५

सलिल चौधरी ने गज़ब की कारीगरी की है अपने संगीत में.
मन्ना डे का गाया एक गीत सुनते हैं फिल्म संगत से. इसे
आसानी से गाया जा सकने वाला गीत तो नहीं ही कहेंगे हम.

मन्ना डे ने लता की तुलना में कम गीत गाये हैं सलिल के
लिए लेकिन जितने भी गाये हैं वो बॉलीवुड की भाषा में कहें
तो ‘अलग हट के’ हैं. ऐसे गीत सुनने वाले संगीत प्रेमी थोड़े
कम ही हैं.

गीत लिखा है जां निसार अख्तर ने.




गीत के बोल:

देखते देखते एक धुआँ छा गया
ये ज़मीं खो गई आसमाँ खो गया
जाने क्या हो गया

देख क्या सब नज़ारे पिघलने लगे
जागते ख़्वाब आँखों में जलने लगे
कोई साँसों में
कोई साँसों में इक दर्द सा बो गया
जाने क्या हो गया
देखते देखते

कोई बहती नदी रूह में थम गई
बर्फ़ बन के लबों पर सदा जम गई
गीत जागा मगर
गीत जागा मगर जाग कर सो गया
जाने क्या हो गया
देखते देखते

दिल की धड़कन से गूँजीं ये तन्हाईयाँ
दूर तक सिर्फ़ अश्कों की परछाईयाँ
कोई चुपके से
कोई चुपके से इस ख़ाक़ पर रो गया
जाने क्या हो गया
देखते देखते एक धुआँ छा गया
ये ज़मीं खो गई आसमाँ खो गया
जाने क्या हो गया
............................................................
Dekhte dekhte ek dhuan-Sangat 1975

Read more...

Aug 24, 2017

बेकसी हद से जब गुजर जाए-कल्पना १९६०

हिंदी फिल्मों में एक समय मुजरा गीत काफी हुआ करते थे.
श्वेत श्याम युग की फिल्मों में सबसे ज्यादा मिलेंगे आपको.

आज सुनते हैं ओ पी नैयर के संगीत निर्देशन में बना और
आशा भोंसले का गाया एक गीत. इसे पद्मिनी पर फिल्माया
गया है. जां निसार अख्तर ने इस गीत को लिखा है.

गीत में अशोक कुमार महफ़िल में बैठे दिखाई दे रहे हैं.




गीत के बोल:

बेक़सी हद से जब गुज़र जाए
कोई ऐ दिल जिये के मर जाए
बेक़सी हद से जब गुज़र जाए
कोई ऐ दिल जिये के मर जाए
बेक़सी हद से जब गुज़र जाए

ज़िन्दगी से कहो दुलहन बन के
ज़िन्दगी से कहो दुलहन बन के
आज तो दो घड़ी सँवर जाए
कोई ऐ दिल जिये के मर जाए

उनको जी भर के देख लेने दे
उनको जी भर के देख लेने दे
उनको जी भर के देख लेने दे
दिल की धड़कन ज़रा ठहर जाए
कोई ऐ दिल जिये के मर जाए

हम हैं खुद अपनी जान के दुश्मन
हम हैं खुद अपनी जान के दुश्मन
क्यूँ ये इल्जाम उनके सर जाए
कोई ऐ दिल जिये के मर जाए
बेक़सी हद से जब गुज़र जाए

मेरे नग़मों से उनका दिल न दुखे
मेरे नग़मों से उनका दिल न दुखे
ग़म नहीं मुझपे जो गुज़र जाए
कोई ऐ दिल जिये के मर जाए
बेक़सी हद से जब गुज़र जाए
........................................................................
Bekasi had se jab guzar jaaye-Kalpana 1960

Artists: Ashok Kumar, Padmini

Read more...

Aug 12, 2017

इस दुनिया से निराला हूँ-रागिनी १९५८

संगीतकार नैयर का जादू वाकई निराला है. ये गीत
उनके संगीत पर ही बना हुआ सा सुनाई देता है. एक
गायिका के गीतों से सफल सफर की शुरूआत कर
दूसरी गायिका को फिल्म संगीत क्षेत्र की बुलंदियों
तक पहुँचाने का सिलसिला थमा सन १९७४ की एक
लंबे नाम वाली फिल्म पर. उसके बाद नैयर ने फिल्मों
में संगीत तो दिया मगर कुछ छूटा सा लगता रहा.

प्रस्तुत गीत में उन दोनों गायिकाओं की आवाजें हैं
जिनका जिक्र हमने ऊपर किया है. ओ पी नैयर से और
गीता दत्त के प्रारब्ध से बस एक ही शिकायत है कि
कुछ और संगीत के खजाने को मालामाल कर देते.



गीत के बोल:

इस दुनिया से निराला हूँ मैं जादूगर मतवाला हूँ
इस दुनिया से निराला हूँ मैं जादूगर मतवाला हूँ
मेरे गीत में वो जादू है पाँव तेरे रुक जायेंगे
मेरे गीत में वो जादू है पाँव तेरे रुक जायेंगे
छिप छिप हमको देखने वाली
छिप छिप हमको देखने वाली नैन तेरे मुस्कायेंगे
इस दुनिया से निराला हूँ मैं जादूगर मतवाला हूँ
इस दुनिया से निराला हूँ मैं जादूगर मतवाला हूँ

तान रसीली गा कर तूने मेरा मन लहराया रे
तान रसीली गा कर तूने मेरा मन लहराया रे
मैं तो यही जानूँ बस इतना ही मानूँ
तूने जादू आन जगाया रे
मैं तो यही जानूँ बस इतना ही मानूँ
तूने जादू आन जगाया रे

कैसे रूठ सकेंगे तुझसे जान के हम बन जाते हैं
कैसे रूठ सकेंगे तुझसे जान के हम बन जाते हैं
देखो देखो कैसे हम तुम
देखो देखो कैसे हम तुम रूठ के फिर मन जाते हैं
इस दुनिया से निराला हूँ मैं जादूगर मतवाला हूँ
इस दुनिया से निराला हूँ मैं जादूगर मतवाला हूँ
........................................................................
Is duniya se nirala hoon-Ragini 1958

Read more...

Jul 10, 2017

हँस हँस के हसीनों से नज़र-यास्मीन १९५५

फिल्म यास्मीन से एक और उल्लेखनीय गीत सुनते हैं.
जां निसार अख्तर के लिखे इस गीत को भी गाया है
लता मंगेशकर ने.

सी रामचन्द्र ने काफ़ी सारे गीतकारों के साथ काम किया.
सबसे ज्यादा राजेंद्र कृष्ण के साथ ये तो तय है. उसके
अलावा ५० के दशक में सक्रिय रहे गीतकारों में जो भी
ज्यादा लिखने वाले थे पी एल संतोषी, कमर जलालाबादी,
डी एन मधोक, कवि प्रदीप और भरत व्यास सभी के साथ
उन्होंने हिट गीत तैयार किये. जां निसार अख्तर के साथ
उनके गीत कम हैं.



गीत के बोल:

हँस हँस के हसीनों से नज़र चार किये जा
जो भी करे प्यार उसे प्यार किये जा
जो भी करे प्यार उसे प्यार किये जा

ये ज़ुल्फ़ ये अबरू ये लचकती हुई बाँहें
बिजली सी गिराती हुई खामोश निगाहें
ये ज़ुल्फ़ ये अबरू ये लाचकती हुई बाँहें
बिजली सी गिराती हुई खामोश निगाहें
है ताक़त-ए-दीदार तो दीदार किये जा
हँस हँस के हसीनों से नज़र चार किये जा
जो भी करे प्यार उसे प्यार किये जा

लाज़िम है मुहब्बत में लगावट भी अदा भी
उल्फ़त में मिले कुछ तो तड़पने का मज़ा भी
लाज़िम है मुहब्बत में लगावट भी अदा भी
उल्फ़त में मिले कुछ तो तड़पने का मज़ा भी
इक़रार किये जा कभी इंकार किये जा

हँस हूँस के हसीनों से नज़र चार किये जा
जो भी करे प्यार उसे प्यार किये जा

हर एक अदा हुस्न की आँखों में बसा ले
सीने में ज़रा इश्क़ का तूफ़ान जगा ले
सोयी हुई तक़दीर को बेदार किये जा

हँस हँस के हसीनों से नज़र अचार किये जा
जो भी करे प्यार उसे प्यार किये जा
………………………………………………..
Hans hans ke haseeno se-Yasmin 1955

Artists: Vaijayantimala

Read more...

Jun 12, 2017

आ जा रे ओ मेरे दिलवर-नूरी १९७९

आज सुनते हैं सन १९७९ की फिल्म नूरी से एक युगल गीत.
लता मंगेशकर और नितिन मुकेश की आवाजों वाले कुछ
युगल गीत काफी लोकप्रिय हुए हैं. आपको याद हो अगर
फिल्म क्रांति का गीत-जिंदगी की ना टूटे लड़ी.

जान निसार अख्तर के लिखे इस गीत को संगीत से संवारा है
खय्याम ने. खय्याम के संगीत से सजी और हिट हुई ये सन
१९७६ की कभी कभी के बाद पहली फिल्म है. गीत पूनम ढिल्लों
और फारूख शेख पर फिल्माया गया है. सन १९७७ की फिल्म
शंकर हुसैन में भी खय्याम का संगीत है मगर उस फिल्म के
इक्का दुक्का गीतों के अलावा फिल्म का कोई जिक्र नहीं होता.
हाँ, सन १९७९ की एक और फिल्म जिसमें खय्याम का संगीत
है, बेहद लोकप्रिय हुई अपने गीतों की वजह से-खानदान.



गीत के बोल:

नूरी नूरी
आ जा रे  ओ दिलवर जानी आ
आ जा रे आ जा रे ओ मेरे दिलवर आ जा
दिल की प्यास बुझा जा रे
आ जा रे आ जा रे ओ मेरे दिलवर आ जा
दिल की प्यास बुझा जा रे
आ जा रे आ जा रे ओ मेरे दिलवर आ जा
दिल की प्यास बुझा जा रे
ओ ओ ओ आ जा रे
ओ ओ ओ नूरी नूरी

उजला उजला नर्म सवेरा
रूह में मेरी झांके ऐ ऐ
उजला उजला नर्म सवेरा
रूह में मेरी झांके
प्यार से पूछे कौन बसा है
तेरे दिल में आ के
आ जा रे  आ जा रे ओ मेरे दिलवर आ जा
तू ही आ के बता जा रे
आ जा रे आ जा रे ओ मेरे दिलवर आ जा
दिल की प्यास बुझा जा रे
ओ ओ ओ आ जा रे
ओ ओ ओ नूरी नूरी

दर्द जगाये मीठा मीठा
अरमां जागे जागे
दर्द जगाये मीठा मीठा
अरमां जागे जागे
प्यार की प्यासी मैं दीवानी
कुछ ना सोचूँ आगे
आ जा रे  आ जा रे ओ मेरे दिलवर आ जा
फिर से आस बंधा जा रे
आ जा रे आ जा रे ओ मेरे दिलवर आ जा
दिल की प्यास बुझा जा रे
ओ ओ ओ आ जा रे
ओ ओ ओ नूरी नूरी

शाम सुहानी महकी महकी
खुशबू तेरी लाये
शाम सुहानी महकी महकी
खुशबू तेरी लाये
पास कहीं जब कलियाँ चटके
मैं जानू तू आये
आ जा रे  आ जा रे ओ मेरे दिलवर आ जा
मुझमें आन समा जा रे
आ जा रे आ जा रे ओ मेरे दिलवर आ जा
दिल की प्यास बुझा जा रे
ओ ओ ओ आ जा रे
ओ ओ ओ नूरी नूरी

दूर नहीं मैं तुझसे साथी
मैं तो सदा से तेरी
दूर नहीं मैं तुझसे साथी
मैं तो सदा से तेरी
एक नज़र जब तुझको देखूं
जागे किस्मत मेरी
आ जा रे  आ जा रे ओ मेरे दिलवर आ जा
फिर से आस बंधा जा रे
आ जा रे आ जा रे ओ मेरे दिलवर आ जा
दिल की प्यास बुझा जा रे
ओ ओ ओ आ जा रे
ओ ओ ओ नूरी नूरी
…………………………………………………….
Aa ja re-Noorie 1979

Artists: Farooq Sheikh, Poonam Dhillon

Read more...

May 22, 2017

ज़रा सी बात पे-मुकेश-गैर फ़िल्मी गीत

इस ग़ज़ल की धुन की महक आपको फिल्म उमराव जान
के एक गीत में भी आएगी.

फिल्म: गैर फ़िल्मी गीत
गीतकार: जां निसार अख्तर
गायक: मुकेश
संगीतकार: खय्याम



गीत के बोल:

ज़रा सी बात पे
ज़रा सी बात पे हर रस्म तोड़ आया था
दिल-ए-तबाह ने भी क्या मिज़ाज पाया था
ज़रा सी बात पे

मुआफ़ कर ना सकी मेरी ज़िन्दगी मुझको
मुआफ़ कर ना सकी मेरी ज़िन्दगी मुझको
वो एक लम्हा के मैं तुझसे तंग आया था
वो एक लम्हा के मैं तुझसे तंग आया था
ज़रा सी बात पे

शगुफ़्ता फूल सिमट कर कली बने जैसे
शगुफ़्ता फूल सिमट कर कली बने जैसे
कुछ इस कमाल से तूने बदन चुराया था
कुछ इस कमाल से तूने बदन चुराया था
ज़रा सी बात पे

गुज़र गया है कोई लम्हा-ए-शरर की तरह
गुज़र गया है कोई लम्हा-ए-शरर की तरह
अभी तो मैं उसे पहचान भी न पाया था
अभी तो मैं उसे पहचान भी न पाया था
ज़रा सी बात पे

पता नहीं कि मेरे बाद उनपे क्या गुज़री
पता नहीं कि मेरे बाद उनपे क्या गुज़री
मैं चंद ख्वाब ज़माने में छोड़ आया था
मैं चंद ख्वाब ज़माने में छोड़ आया था

ज़रा सी बात पे हर रस्म तोड़ आया था
दिल-ए-तबाह ने भी क्या मिज़ाज पाया था
ज़रा सी बात पे
……………………………………………….
Zara si baat par-Mukesh Non film song

Read more...

Feb 11, 2017

आई ज़ंजीर की झंकार-रज़िया सुल्तान १९८३

७० और अस्सी के दशक में फ़िल्मी गीतों में हमने ज्यादा भारी
आवाजें नहीं सुनी मगर फिल्म रज़िया सुल्तान में दो ऐसे गीत
हैं जिन्हें खरखरी और भारी आवाज़ वाले कब्बन मिर्ज़ा ने गाया
है.

गौरतलब है इस फिल्म में धर्मेन्द्र का मेकअप भी भारी है. उन्हें
एक गुलाम की भूमिका दी गयी थी फिल्म में. गीत लिखा है
जां निसार अख्तर ने और इसकी धुन बनाई है खय्याम ने.
कब्बन मिर्ज़ा ने ६० के दशक में इक्का दुक्का गीत गाये थे
फिल्मों के लिए जो सुनना दुर्लभ अनुभव है. आकाशवाणी के
अनाउंसर रहे कब्बन मिर्ज़ा का योगदान संगीत के क्षेत्र में
ना के बराबर है. उन्हें रज़िया सुल्तान के गीतों से ही ज्यादा
प्रसिद्धि मिली.



गीत के बोल:

ख़ुदा ख़ैर करे
आई ज़ंजीर की झंकार ख़ुदा ख़ैर करे
दिल हुआ किसका ग़िरफ़्तार ख़ुदा ख़ैर करे
आई ज़ंजीर की झंकार

जाने ये कौन मेरी रूह को छूकर ग़ुज़रा
जाने ये कौन
जाने ये कौन मेरी रूह को छूकर ग़ुज़रा
एक क़यामत हुई बेदार
एक क़यामत हुई बेदार
ख़ुदा ख़ैर करे

लम्हा मेरी आँखों में खिंची जाती है
लम्हा मेरी आँखों में खिंची जाती है
एक चमकती हुई तलवार ख़ुदा ख़ैर करे
एक चमकती हुई तलवार
एक चमकती हुई तलवार

ख़ून दिल का न छलक जाए कहीं आँखों से
ख़ून दिल का न छलक जाए मेरी आँखों से
हो न जाए कहीं इज़हार
हो न जाए कहीं इज़हार
हो न जाए कहीं इज़हार ख़ुदा खैर करे
...................................................................
Aayi zanjeer ki jhankar-Razia Sultan 1983

Artists: Hema Malini, Dharmendra

Read more...

Feb 3, 2017

बेमुरव्वत बेवफ़ा-सुशीला १९६३

इस गीत के मुखड़े के बोल जैसे हैं वो मानो रुपहले परदे
की दुनिया के लिए ही कहा जा रहा हो ऐसा प्रतीत होता है.
रुपहले परदे की दुनिया के अपने नियम कायदे और रवैया
है. कलाकारों की भीड़ में चुनिन्दा ही ऊंचे मुकाम हासिल
कर पाते हैं. एक बात ज़रूर है विलक्षण प्रतिभाएं छुपाएँ
नहीं छुपतीं.

गीत है जां निसार अख्तर का लिखा और सी अर्जुन का
संगीतबद्ध किया हुआ जिसे मुबारक बेगम ने गाया है. 




गीत के बोल:

दर्द-ए-दिल दर्द-ए-वफ़ा दर्द-ए-तमन्ना क्या है
आप क्या जानें मोहब्बत का तकाज़ा क्या है

बेमुरव्वत बेवफ़ा बेगाना-ए-दिल आप हैं
बेमुरव्वत बेवफ़ा बेगाना-ए-दिल आप हैं
आप मानें या न मानें मेरे क़ातिल आप हैं
बेमुरव्वत बेवफ़ा

आप से शिकवा है मुझको ग़ैर से शिकवा नहीं
आप से शिकवा है मुझको ग़ैर से शिकवा नहीं
जानती हूँ दिल में रख लेने के क़ाबिल आप हैं
बेमुरव्वत बेवफ़ा

साँस लेती हूँ तो यूँ महसूस होता है मुझे
साँस लेती हूँ तो यूँ महसूस होता है मुझे
जैसे मेरे दिल की हर धड़कन में शामिल आप हैं
बेमुरव्वत बेवफ़ा

ग़म नहीं जो लाख तूफ़ानों से टकराना पड़े
ग़म नहीं जो लाख तूफ़ानों से टकराना पड़े
मैं वो कश्ती हूँ कि जिस कश्ती का साहिल आप हैं

बेमुरव्वत बेवफ़ा बेगाना-ए-दिल आप हैं
आप माने या न माने मेरे क़ातिल आप हैं
बेमुरव्वत बेवफ़ा
…………………………………………………….
Bemurawwat bewafa-Sushila 1963

Read more...

Oct 23, 2016

हमको छोड़ के कहाँ जाओगे-श्रीमती ४२० १९५६

सन १९५५ में आई श्री ४२० और सन १९५६ में आई श्रीमती ४२०.
श्री ४२० एक सफल फिल्म है और इसका संगीत भी खूब चला है.

जी पी सिप्पी ने इस फिल्म का निर्माण और निर्देशन किया था.
फिल्म के प्रमुख कलाकार जॉनी वॉकर और मीना शौरी हैं. इस
फिल्म में ओमप्रकाश और हेलन भी मौजूद हैं. ढेर सारे गीतों से
सजी इस फिल्म के गीत थोड़े कम सुने गए हैं.

आज सुनते हैं जान निसार अख्तर का लिखा और ओ पी नैयर का
संगीतबद्ध गीत जिसे गीता दत्त और रफ़ी ने गाया है. गीत में रफ़ी
की आवाज़ में केवल कुछ शब्द ही हैं मगर यह गीत युगल गीतों
की श्रेणी में आता है.





गीत के बोल:

हमको छोड़ के कहाँ जाओगे
सैयां तुम बड़ा दुःख पाओगे
अब जान भी लो पहचान भी लो
नज़रें ये प्यार की
हमको छोड़ के कहाँ जाओगे
सैंया तुम बड़ा दुःख पाओगे
अब जान भी लो पहचान भी लो
नज़रें ये प्यार की
हमको छोड़ के कहाँ जाओगे

तुम जवाँ मेरा दिल जवाँ
इक नज़र मेरे मेहरबाँ
तुम जवाँ मेरा दिल जवाँ
इक नज़र मेरे मेहरबाँ
मानो मानो मेरी बात मानो
नहीं गैर जानो ओ पिया
मानो मानो मेरी बात मानो
नहीं गैर जानो ओ पिया

हमको छोड़ के कहाँ जाओगे
सैयां तुम बड़ा दुःख पाओगे
अब जान भी लो पहचान भी लो
नज़रें ये प्यार की
हमको छोड़ के कहाँ जाओगे

दिलरुबा मेरी हर अदा
हर नज़र मेरी इक बला
दिलरुबा मेरी हर अदा
हर नज़र मेरी इक बला
गोरी गोरी मेरी देखो बाहें
भरे लोग आहें ओ पिया
गोरी गोरी मेरी देखो बाहें
भरे लोग आहें ओ पिया

हमको छोड़ के कहाँ जाओगे
सैयां तुम बड़ा दुःख पाओगे
अब जान भी लो पहचान भी लो
नज़रें ये प्यार की
हमको छोड़ के कहाँ जाओगे
..........................................................
Hamko chhod ke kahan-Shrimati 420

Read more...

Aug 5, 2016

दिल है हाज़िर-सज्जो रानी १९७६

शास्त्रीय संगीत के गायकों को सुनने का मज़ा अलग ही है.
सुनते जाओ, सुनते जाओ. शोभा गुर्टू का मैं एक छोटा सा
फैन हूँ. हिंदी फिल्म संगीत धन्य है जो उन्होंने कुछ योगदान
फिल्मों के लिए दिया. संगीतकार सपन जगमोहन ने १९७४
की फिल्म सज्जो रानी में उनसे दो गीत गवाए. शोभा गुर्टू
को हम जैसे फ़िल्मी गीतों के रसिक ठुमरी क्वीन के नाम से
जानते हैं. प्रस्तुत गीत भी ठुमरी ही है.

ख्याल गायकी में गायकी और राग के उतार चढ़ाव ज्यादा ही
अहमियत रखते हैं वहीँ ठुमरी में भाव और बोल पर ज्यादा जोर
रहता है. ठुमरी का इतिहास बहुत पुराना है, मगर इसे प्रसिद्धि
दिलाने का काम उन्नीसवीं शती में वाजिद अली शाह ने ज्यादा
किया जिनके दरबार में ठुमरी संग नृत्य का आयोजन होता था.

प्रस्तुत ठुमरी राग खमाज में है.



गीत के बोल:


दिल है हाज़िर लीजिए ले जाइए
और क्या क्या और क्या क्या
और क्या क्या फरमाइए
और क्या क्या फरमाइए

प्यार धोखा है
प्यार धोखा है
तो धोखा ही सही
चाहता है चाहता है
चाहता है दिल के धोखा खाइए

हमको अपना इम्तेहान मंज़ूर है
हमको अपना इम्तेहान मंज़ूर है
और भी तरसाइए तड्पाइए
और भी तरसाइए तड्पाइए

इश्क वालों का
इश्क वालों का मुकद्दर है यही
आप अपनी आप अपनी
आप अपनी आग में जल जाइये
आप अपनी आग में जल जाइये

दिल है हाज़िर लीजिए ले जाइए
………………………………………………………..
Dil hai hazir-Sajjo Rani 1976

Read more...

Jul 23, 2016

आ जान-ए-वफ़ा-अनारकली १९५३

सन १९५३ की फिल्म अनारकली के लिए पहले संगीतकार
बसंत प्रकाश को साइन किया गया था. उन्होंने फिल्म के
लिए दो गीत भी कम्पोज किये. कुछ वजहों से फिल्म में
फेरबदल हुए और संगीतकार सी रामचंद्र को जिम्मेदारी
सौंपी गयी. बसंत प्रकाश के कम्पोज किये गीतों में से एक
फिल्म में शामिल है और वो आज आप सुनेंगे. वैसे इस
मामले में काफी कन्फ्यूज़न है कि वास्तविक कहानी क्या है.
खैर जो भी हुआ हो फिल्म का संगीत इतिहास रचने वाला
साबित हुआ.


जां निसार अख्तर का लिखा हुआ गीत गाया है गीता दत्त
ने. ये अख्तर का लिखा एकमात्र गीत है फ़िल्मी एल्बम में.
गीत  किसी सम्मोहन मन्त्र जैसा काम कर रहा है और गीत
के खत्म होते तक नायक बकरी के मेमने की तरह वापस
लौट आता है.





गीत के बोल:

वफ़ा की लाज रह जाएगी आ जा तेरे आने से
मोहब्बत की नज़र नीची ना हो जाए ज़माने से

आ जान-ए-वफ़ा आ जान-ए-वफ़ा
कहते हैं किसे प्यार ज़माने को दिखा दे
दुनिया की नज़र इश्क के क़दमो पे झुका दे
क़दमो पे झुका दे
आ जान-ए-वफ़ा आ जान-ए-वफ़ा

आ जा ये मेरा नाज़ उठाना ही पड़ेगा
आ जा ये मेरा नाज़ उठाना ही पड़ेगा
जब प्यार किया है तो निभाना ही पड़ेगा
जब प्यार किया है तो निभाना ही पड़ेगा
आ दिल के लिए जान की बाज़ी भी लगा दे
आ दिल के लिए जान की बाज़ी भी लगा दे
दुनिया की नज़र इश्क के क़दमो पे झुका दे

आ जान-ए-वफ़ा आ जान-ए-वफ़ा

आ प्यार के तूफ़ान मे लहरा के चला आ
आ प्यार के तूफ़ान मे लहरा के चला आ
हर क़ैद को हर रस्म को ठुकरा के चला आ
हर क़ैद को हर रस्म को ठुकरा के चला आ
आशिक है तो हर चीज़ मुहब्बत पे लुटा दे
आशिक है तो हर चीज़ मुहब्बत पे लुटा दे
दुनिया की नज़र इश्क के क़दमो पे झुका दे

आ जान-ए-वफ़ा आ जान-ए-वफ़ा

दीवाना मोहब्बत का कही डर के रुका है
दीवाना मोहब्बत का कही डर के रुका है
दरबार मे शाहों के कहीं इश्क झुका है
दरबार मे शाहों के कहीं इश्क झुका है
खुद इश्क के दरबार में शाहों को झुका दे
आ जान-ए-वफ़ा शाहों को झुका दे
शाहों को झुका दे आ जान-ए-वफ़ा
………………………………………………………..
Aa jaan-e-wafa-Anarkali 1953

Artists: Beena Rai, Pradeep Kumar

Read more...

Aug 7, 2015

आँखों में समां जाओ-यास्मीन १९५५

कहते हैं सरलता सबसे सुन्दर है क्यूंकि सरल है. सरल
होना और सरल बनना आसान काम नहीं है. आज के
समय में अगर आप में दो तीन बल अगर नहीं पड़े हुए
हैं तो आपका गुज़ारा नहीं हो सकता. एक कहावत है कि
जंगल में टेढ़े मेढे पेड़ों को कोई नहीं छेड़ता. सीधे पेड़ों
पर कुल्हाड़ी ज़ल्दी चला करती है.

ये बात लगभग तीनों श्रेणियों के जीवों पर लागू होती है.
ये बात मुझे अक्सर इस गीत को सुनते वक्त याद आ जाती
है. गीत है फिल्म यास्मीन से. लाता मंगेशकर का गाया
ये गीत बेमिसाल गीत है. सरल प्रवाह वाला गीत है और
इसमें आपका ध्यान गीत से भटकाने वाले वाद्य यंत्र भी
नहीं हैं. सी रामचंद्र की धुन है और जान निसार अख्तर
के बोल हैं. किसी कवी सम्मलेन की कविता सा लगता है
ये गीत बस फर्क इतना है कि सधी हुई और मीठी आवाज़
में इसे गाया जा रहा है. सैकड़ों कवि सम्मलेन जो सुने हैं
इतने सालों में, उनमें कुछ ही कवि-कवयित्रियाँ ऐसे मिले
जो पक्के सुर में अपनी कविता गाते मिले.

फिल्म का संगीत सी रामचंद्र के सर्वश्रेष्ट उत्पादन में गिना
जाता है. फिल्म नहीं चली इसका मलाल फिल्म के निर्देशक
और संगीत निर्देशक दोनों को ज़रूर रहा.





गीत के बोल: 


आँखों में समा जाओ, इस दिल में रहा करना
तारों में हँसा करना, फूलों में खिला करना

आँखों में समा जाओ, इस दिल में रहा करना

जब से तुम्हें देख है, जब से तुम्हें पाया है
कुछ होश नहीं मुझको, एक नशा सा छाया है
अब बात जो करनी हो, आँखों से कहा करना

ए काश धड़कता दिल, कुछ देर ठहर जाए
ये रात मोहब्बत की, यूँ ही न गुज़र जाए
ए काश धड़कता दिल, कुछ देर ठहर जाए
ये रात मोहब्बत की, यूँ ही न गुज़र जाए
बाकी अभी तुम पर, ये जान फ़िदा करना

आँखों में समा जाओ, इस दिल में रहा करना

किस्मत न दिखाए अब, घड़ियाँ हमें फ़ुरकत की
हर रात यूँ ही चमके, तक़दीर मोहब्बत की
किस्मत न दिखाए अब, घड़ियाँ हमें फ़ुरकत की
हर रात यूँ ही चमके, तक़दीर मोहब्बत की
ए चाँद सितारों तुम मिल-जुल के दुआ करना

आँखों में समा जाओ, इस दिल में रहा करना
...................................................................
Aankhon mein sama jao-Yasmin 1955

Read more...

May 11, 2015

आवाज़ दो हम एक हैं-देश भक्ति गीत

देश भक्ति गीतों को सुनने में एक अलग आनंद आता है.
हर संगीत प्रेमी को इन्हें अवश्य सुनना चाहिए. ऐसे गीतों
में अतिरिक्त उर्जा सी महसूस होती है, कुछ बोलों की वजह
से और कुछ इनके लिए बनाई गयी विशेष धुनों के कारण.

सुनते हैं एक गैर-फ़िल्मी देशभक्ति गीत जिसे गीतकार और
शायर जां निसार अख्तर ने लिखा है. इस गाया है रफ़ी ने
खय्याम की धुन पर. इसे भारत चीन के युद्ध के वक्त १९६२
में तैयार किया गया था.

शिव खेडा ने एक जगह अपनी प्रस्तुति में कहा था-ये मुफ्त
की आजादी है जिसकी हम लोग कीमत नहीं समझते हैं. इस
आजादी की कीमत है. जो हम खुली हवा में सांस ले पाते हैं
वो सीमा पर तैनात हमारे रक्षक जवानों की बदौलत है. जो
आजादी हमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और वीर जवानों के
वर्षों के संघर्ष की बदौलत प्राप्त हुई है उसकी हम कद्र करें.
उसे कायम रखने के लिए हमारे जवान निरंतर पसीना बहाते
हैं.

हर व्यक्ति को देशभक्ति का पाठ अवश्य पढाया जाना चाहिए
जिससे वो एक जिम्मेदार नागरिक बने.




गीत के बोल:

एक है अपनी ज़मीं, एक है अपना गगन
एक है अपना जहां, एक है अपना वतन

अपने सभी सुख एक हैं, अपने सभी ग़म एक हैं
आवाज़ दो, आवाज़ दो हम एक हैं, हम एक हैं
आवाज़ दो, आवाज़ दो हम एक हैं, हम एक हैं


ये वक़्त खोने का नहीं, ये वक़्त सोने का नहीं
जागो वतन ख़तरे में है, सारा चमन खतरे में है
फूलों के चेहरे ज़र्द हैं, ज़ुल्फ़ें फ़िज़ा की गर्द हैं
उमड़ा हुआ तूफ़ान है, नरगे में हिन्दुस्तान है
दुश्मन से नफ़रत फ़र्ज़ है, घर की हिफ़ाज़त फ़र्ज़ है
बेदार हो, बेदार हो, आमादा-ए-पैकार हो

आवाज़ दो, आवाज़ दो हम एक हैं, हम एक हैं

ये है हिमाला की ज़मीं, ताज-ओ-अजंता की ज़मीं
संगम हमारी आन है, चित्तौड़ अपनी शान है
गुल्मर्ग का महका चमन, जमुना का तट, गोकुल का बन
गंगा के धारे अपने हैं, ये सब हमारे अपने हैं
कह दो कोई दुश्मन नज़र, उठे न भूले से इधर
कह दो के हम बेदार हैं, कह दो के हम तैयार हैं

आवाज़ दो, आवाज़ दो हम एक हैं, हम एक हैं

उठो जवानां-ए-वतन, बाँधे हुए सर से कफ़न
उठो दकन की ओर से, गंग-ओ-जमन की ओर से
पंजाब के दिल से उठो, सतलुज के साहिल से उठो
महाराष्ट्र की खाक से, दिल्ली की अर्ज़-ए-पाक से
बंगाल से गुजरात से, कश्मीर के बागात से
नेफ़ा से, राजस्थान से, कुल खाक-ए-हिन्दोस्तान से

आवाज़ दो, आवाज़ दो हम एक हैं, हम एक हैं
हम एक हैं, हम एक हैं
हम एक हैं, हम एक हैं
....................................................
Awaaz do ham ek hain-Patriotic non-film song

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP