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Nov 29, 2015

मैंने तेरे लिए ही-आनंद १९७१

प्रस्तुत गीत में “सात रंग के” शब्दों की जगह सतरंगी
शब्द होता तो मजा किरकिरा हो जाता, है न. कभी
कभी सरल शब्द भी कितने प्रभावी हो जाते हैं कि
सुनने के बाद ताज्जुब सा होता है-ये क्या हुआ कैसे
हुआ. वैसे भी सरल शब्द वाले गीत जनता की जुबान
पर ज्यादा आसानी से चढा करते हैं.

फिल्म आनंद के बाकी के गीत ज्यादा सरल हैं बजाये
इस गीत के. इसमें थोड़े घुमाव हैं. कुछ शब्दों के घुमाव
तो कुछ सलिल के संगीत के घुमाव. मुकेश ने इन सब
उतार चढावों को आसानी से पार किया और नतीजा आप
सब के सामने है-एक शानदार गीत.

वैसे एक सरल शब्द वाला धाँसू गीत है फिल्म पेंटर बाबू
में जिसकी कुछ पंक्तियाँ हैं-कचौड़ी खायेगी छोरी और
चाटेंगे छोरे. वो गीत पता नहीं थोड़े ही दिन जुबां पर
चढा पब्लिक के फिर जल्द ही उतर कर कहीं छुप गया.

तो सुनिए आज बिना विवरण के फिल्म आनंद से एक
सदाबहार गीत. इसे मुकेश ने गाया है और इसका संगीत
सलिल चौधरी ने तैयार किया है. हीरो को आप पहचान
ही गए होंगे, ना पहचान पायें तो एक टिप्पणी दर्ज करें
हम नाम बतला देंगे आपको.



गीत के बोल:

मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने
सपने, सुरीले सपने
कुछ हँसते, कुछ गम के
तेरी आँखों के साये चुराए रसीली यादों ने

मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने
सपने, सुरीले सपने

छोटी छोटी, छोटी-छोटी बातों की हैं यादें बड़ी
भूले नहीं, बीती हुई एक छोटी घड़ी
जनम-जनम से आँखे बिछाईं
तेरे लिए इन राहों ने

मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने
सपने, सुरीले सपने

भोले-भाले, भोले-भाले दिल को बहलाते रहे
तन्हाई में, तेरे ख्यालों को सजाते रहे
कभी-कभी तो आवाज देकर
मुझको जगाया ख़्वाबों ने

मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने
सपने, सुरीले सपने
कुछ हँसते, कुछ गम के
तेरी आँखों के साये चुराए रसीली यादों ने
मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने
सपने, सुरीले सपने
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Maine tere liye hi saat rang ke-Anand 1971.

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